प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे और प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे,जो इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। साथ ही राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा में सहयोग लगातार बढ़ा है। इस यात्रा का उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना माना जा रहा है। मोदी का इंडोनेशिया का यह तीसरा दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले दो बार इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी समेत 15 से अधिक समझौतों पर सहमति बनी। इसी यात्रा में दोनों देशों ने साझा समुद्री दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वें आसियान (ASEAN)-भारत और 18वें ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ इंडोनेशिया की तटीय और समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब स्थित है। यह मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से जरूरी माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साबंग पोर्ट भारतीय नौसैनिक जहाजों के लिए ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पहुंच और निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है। इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा को समर्पित राजधानी जकार्ता से करीब 400 किमी दूर मध्य जावा प्रांत में स्थित प्रम्बानन मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित हैं। यह भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। प्रम्बानन परिसर में कुल 240 मंदिर हैं। इनमें सबसे ऊंचा और प्रमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई करीब 47 मीटर (154 फीट) है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। प्रम्बानन मंदिर उसी साझा विरासत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे और प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे,जो इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। साथ ही राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा में सहयोग लगातार बढ़ा है। इस यात्रा का उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना माना जा रहा है। मोदी का इंडोनेशिया का यह तीसरा दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले दो बार इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी समेत 15 से अधिक समझौतों पर सहमति बनी। इसी यात्रा में दोनों देशों ने साझा समुद्री दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वें आसियान (ASEAN)-भारत और 18वें ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ इंडोनेशिया की तटीय और समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब स्थित है। यह मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से जरूरी माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साबंग पोर्ट भारतीय नौसैनिक जहाजों के लिए ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पहुंच और निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है। इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा को समर्पित राजधानी जकार्ता से करीब 400 किमी दूर मध्य जावा प्रांत में स्थित प्रम्बानन मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित हैं। यह भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। प्रम्बानन परिसर में कुल 240 मंदिर हैं। इनमें सबसे ऊंचा और प्रमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई करीब 47 मीटर (154 फीट) है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। प्रम्बानन मंदिर उसी साझा विरासत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
Crude Oil Price: OPEC+ के अगस्त से अपने प्रोडक्शन टारगेट को और बढ़ाने पर सहमत होने के बाद सोमवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए बड़े प्रोड्यूसर्स से क्रूड एक्सपोर्ट में रिकवरी से भी ग्लोबल सप्लाई में बढ़ोतरी का इशारा मिला, जिससे कीमतों पर असर पड़ा।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स शुक्रवार को 0.45% बढ़कर बंद होने के बाद 24 सेंट या 0.33% गिरकर $71.88 प्रति बैरल पर आ गया। इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 11 सेंट या 0.16% गिरकर $68.58 प्रति बैरल पर आ गया। WTI शुक्रवार को सेटल नहीं हुआ क्योंकि शनिवार को इंडिपेंडेंस डे की छुट्टी से पहले US मार्केट बंद रहे।
क्रूड ऑयल की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है?
पिछले कुछ हफ़्तों में गिरावट देखने के बाद पिछले हफ़्ते दोनों बेंचमार्क क्रूड कॉन्ट्रैक्ट में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि इन्वेस्टर्स होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग के भविष्य पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर करीब से नज़र रख रहे थे, साथ ही गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट में रिकवरी पर भी नज़र रख रहे थे।
इस बीच, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन (OPEC) और रूस समेत उसके सहयोगी, रविवार को अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट को और 188,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमत हुए, जून और जुलाई के लिए इसी तरह की बढ़ोतरी की घोषणा के बाद।
हालांकि, प्लान की गई प्रोडक्शन बढ़ोतरी का ज़्यादातर हिस्सा कागज़ों पर ही रहा है। ईरान से जुड़े US-इज़राइली झगड़े ने होर्मुज स्ट्रेट से टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डाली, जिससे सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे OPEC के मुख्य प्रोड्यूसर प्रभावित हुए, और उनकी प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता सीमित हो गई।
रॉयटर्स के एक सर्वे के मुताबिक, जून में OPEC का तेल प्रोडक्शन पिछले महीने की तुलना में 3.3 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़कर 19.43 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में अपने सबसे निचले लेवल से उबर रहा है।
इस बीच, डेटा से पता चला कि गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट मई से 3 मिलियन बैरल से ज़्यादा बढ़कर जून में 10 मिलियन bpd से ज़्यादा हो गया, हालांकि वॉल्यूम युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 40% कम रहा।
अलग से, रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रूस के पश्चिमी पोर्ट से क्रूड शिपमेंट जून में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और जुलाई में भी इसी लेवल पर रहने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद हुई है, जिसमें रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा था, जिससे मॉस्को को क्रूड एक्सपोर्ट बढ़ाना पड़ा।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत देश की टॉप लीडरशिप शुक्रवार को तेहरान में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था। इस दौरान सुरक्षा वजहों से अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई शामिल नहीं हुए। अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स ने इससे दूरी बरती। ईरान की तरफ से न्योता भेजे जाने के बावजूद इन्होंने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा। हालांकि पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान, जॉर्जिया जैसे देशों के टॉप लीडर्स समारोह में पहुंचे। वहीं, भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए। खामेनेई की अंतिम यात्रा की 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मिकेल ओयार्सबल के दो शानदार गोल की बदौलत स्पेन ने फीफा विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर टूर्नामेंट के प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। यह 2010 के फाइनल के बाद पहली बार है जब स्पेन ने नॉटकाउट मुकाबले में जीत हासिल की है।राउंड ऑफ 32 के गुरुवार रात खेले गये इस मुकाबले में स्पेन के लिए मिकेल ओयार्सबल ने 36वें और 89वें मिनट में गोल किया, जबकि पेद्रो पोरो ने 66वें मिनट में गोल दागा। अब अंतिम 16 में अब उसका मुक़ाबला अब पुर्तगाल से होगा।
2010 में टूर्नामेंट जीतने के बाद से विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में स्पेन का इतिहास बेहद निराशाजनक रहा है। तब से लेकर सोफी स्टेडियम तक: तीन विश्व कप, एक भी नॉकआउट जीत नहीं। 2014 में, मौजूदा चैंपियन ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए। 2018 में, वे राउंड ऑफ़ 16 में मेजबान रूस से हार गए। 2022 में, लुइस एनरिक की प्रबल दावेदार टीम को इसी चरण में मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में हरा दिया ।
अब, मिकेल ओयार्सबल के दो गोल और पेड्रो पोरो के एक गोल की बदौलत , स्पेन ने एक बार फिर नॉकआउट मैच जीत लिया है और इस विस्तारित टूर्नामेंट के राउंड ऑफ़ 16 में पहुंच गया है।पेड्री और मार्क कुकुरेला के शानदार तालमेल के बाद ओयार्सबल ने 36वें मिनट में पहला गोल किया। यह गोल 2010 के फाइनल में आंद्रेस इनिएस्टा के ऐतिहासिक अतिरिक्त समय के गोल के बाद किसी स्पेनिश खिलाड़ी द्वारा विश्व कप के नॉकआउट चरण में किया गया पहला गोल था।
Next stop: Round of 16! #FIFAWorldCup
— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) July 2, 2026
यामल को हमेशा ही सारी सुर्खियां मिलती हैं। यहां, मैच शुरू होने से पहले जब टीमें मैदान पर उतर रही थीं, तब टीवी कैमरे उन पर ही टिके रहे। यामल मुस्कुराते हुए उनकी ओर देख रहे थे और बड़ी स्क्रीन पर नज़र आ रहे थे। बाद में, उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (MVP) चुना गया।
लेकिन ओयार्सबल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं उन्होंने स्पेन के लिए अपने पिछले 17 मैचों में 17 गोल और छह असिस्ट किए हैं। इस विश्व कप में स्पेन ने आठ गोल किए हैं, जिनमें से पांच में ओयार्सबल की सीधी भूमिका रही है, जिनमें चार गोल और एक असिस्ट शामिल है। स्पेन की पुरुष राष्ट्रीय टीम के इतिहास में केवल छह खिलाड़ियों – डेविड विला, राउल गोंज़ालेज़, फर्नांडो टोरेस, अल्वारो मोराटा, डेविड सिल्वा और फर्नांडो हिएरो – ने उनसे अधिक गोल किए हैं।
ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारत की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों से संपर्क किया है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण भेजा है।
सूत्रों ने बताया कि, यह निमंत्रण BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो वर्तमान में कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख हैं, को भेजा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे निमंत्रण स्वीकार करेंगे या नहीं। साथ ही, वे कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल के गठन पर भी फैसला लेंगे जो अंतिम संस्कार के लिए तेहरान जा सकता है।
इसके अलावा, ईरान ने BJP और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।
सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी
यह निमंत्रण भारत के सभी राजनीतिक दलों तक तेहरान की पहुंच को दर्शाता है। बता दें कि ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक की तैयारी कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दौरान खामेनेई की मौत के बाद आयोजित किया जा रहा है।
वहीं, भारत सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि वह तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) करेंगे। उम्मीद है कि वे कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी यह यात्रा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण देने के अलावा, ईरान ने शिया समुदाय के कई भारतीय सांसदों को भी अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।
बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते के आखिर से कई अंतिम संस्कार समारोहों की योजना बनाई है। खमेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद दूसरे शहरों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे।
वहीं, ईरान के अधिकारियों का अनुमान है कि सार्वजनिक अंतिम संस्कार में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन सकता है।
ईरान में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज
फिलहाल, ईरान की राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं, समारोह से पहले ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास खामेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं, सड़कों को कुछ हद तक बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकारी टेलीविजन ने अंतिम संस्कार में आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है और अंतिम संस्कार के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
सार्वजनिक समारोहों के अलावा, तेहरान शुक्रवार को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक अलग कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
ईरान ने नहीं दिया यूरोपीय देशों को निमंत्रण
हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने यूरोपीय देशों को आधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हालिया संघर्ष के दौरान यूरोपीय सरकारों पर “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े होने का आरोप लगाया और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान पर उनके रुख की आलोचना की।
गौरतलब है कि यह अंतिम संस्कार पहले युद्ध की वजह से टाल दिया गया था। अब यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते को लागू करने को लेकर दोनों देश अब भी एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं।
अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान के साथ-साथ पवित्र शहर कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों के बाद, खमेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके बाद, 9 जुलाई को मशहद में स्थित इमाम रजा के मकबरे में उन्हें दफनाया जाएगा, जो उनका जन्मस्थान भी है।
फिलहाल यह अभी स्पष्ट नहीं है कि खमेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खमेनेई, अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे या नहीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई भी घोषणा ‘सर्वोच्च नेता’ के कार्यालय से की जाएगी।
यह भी पढ़ें: रूस खुद बन गया भारतीय तेल का खरीदार! यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने ऐसा क्या कर दिया वहां की रिफाइनरियों के साथ?
यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमलों ने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे वहां की तेल रिफाइनरियों का कामकाज ठप पड़ गया है। इस संकट के कारण रूस को अपने इतिहास में पहली बार ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच खबर आ रही है कि इस कमी को दूर करने के लिए अब रूस ने समुद्र के रास्ते भारत से गैसोलीन का आयात करना शुरू कर दिया है।
11 टाइम जोन वाले रूस में ईंधन की राशनिंग, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
यूक्रेन के हमलों के बाद रूस के सभी 11 टाइम जोन में ईंधन का संकट गहरा गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश में ईंधन की राशनिंग करनी पड़ रही है, पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं और वहां गैसोलीन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस संकट पर क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति कार्यालय) ने बयान जारी कर कहा है कि रूस स्वीकार्य कीमतों पर ईंधन आयात करने के लिए अन्य देशों के संपर्क में है और लगातार चर्चा कर रहा है। वैसे इस मामले पर रूस के ऊर्जा मंत्रालय और भारत के तेल मंत्रालय ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है।
भारत से भेजी जा चुकी है 60000 टन से अधिक गैसोलीन
उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों की मानें तो भारत से कम से कम 60000 मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए रवाना की जा चुकी है। एक अन्य सूत्र ने पुष्टि की है कि दो तेल टैंकर रूस भेजे गए हैं। इनमें से हर में 30000 से 40000 टन गैसोलीन लोड है। वैसे अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी कंपनी रूस को इस गैसोलीन की सप्लाई कर रही है।
आपको बता दें कि रूस अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हर महीने विभिन्न देशों से कुल 400000 टन गैसोलीन आयात करने की योजना बना रहा है। इसमें उसका पड़ोसी देश बेलारूस भी शामिल है। बेलारूस ने पहले ही रूस को ईंधन का निर्यात करना शुरू कर दिया है। रूस में गर्मियों के मौसम में ईंधन की मांग काफी बढ़ जाती है और इस दौरान वहां रोजाना कम से कम 110000 टन गैसोलीन की खपत होती है।
पुतिन ने माना – ड्रोन हमलों से रिफाइनरियों को पहुंचा नुकसान
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सरकारी मंत्रियों और अन्य अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में खुद यह स्वीकार किया है कि तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी हुई है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि रूस इस संकट से प्रभावी ढंग से निपट रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक बेलारूस ने जून के पहले पखवाड़े में मई के पहले पखवाड़े की तुलना में रूस को रेलवे के जरिए की जाने वाली गैसोलीन की आपूर्ति को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 70000 टन से अधिक कर दिया है।
रूस की संसद ने टैक्स कोड में किया बदलाव, मिलेगी सब्सिडी
यूक्रेनी ड्रोन हमलों से पैदा हुए इस ईंधन संकट से निपटने के लिए रूसी संसद ने पिछले हफ्ते अपने टैक्स कोड में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। इन नए संशोधनों के तहत ईंधन आयात पर सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस सब्सिडी को भारतीय डिलीवरी लागत और कीमतों के आधार पर तय किया गया है।
भारत में रूसी कच्चे तेल के आयात ने तोड़ा रिकॉर्ड
एक तरफ जहां रूस भारत से तैयार ईंधन खरीद रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात जून के महीने में सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। एलएसईजी और केपलर के शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों से ये जानकारी सामने आई है। असल में ईरान और अमेरिका-इजरायाल के बीच युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से अन्य देशों से होने वाली तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा था। इस प्रभाव को कम करने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी से रूसी कच्चे तेल के बैरल खरीदे। केपलर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी आधे से अधिक (50% से ज्यादा) हो गई। ये मई के महीने में 36.5% थी। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत ने जून में रूस से लगभग 2.70 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की खेप प्राप्त की है।

