जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।

ब्रह्मोस से आकाश तक भारत के हथियारों का जलवा! समझिए कैसे स्वदेशी मिसाइल सिस्टम बना रहे हैं डिफेंस एक्सपोर्ट का नया रिकॉर्ड

India Defence Sector: दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उपकरण आयातकों में शुमार रहने वाला भारत अब ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर एक बड़े डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में मजबूती से उभर चुका है। विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता धीरे-धीरे घट रही है और अब भारत की स्वदेशी डिफेंस सिस्टम की डिमांड दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1।78 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान देश के रक्षा निर्यात में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब यह रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। ये इससे पिछले वित्त वर्ष में 23622 करोड़ रुपये था।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 50 गुना बढ़ा है। ये वित्त वर्ष 2014 में सिर्फ 700 करोड़ रुपये हुआ करता था। जियो पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ते सैन्य खर्चों के बीच स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मजबूत वैश्विक स्वीकार्यता की वजह से कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 50000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बना भारतीय हथियारों का मुख्य ठिकाना

भारत के रक्षा निर्यात के लिए इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र सबसे प्रमुख ठिकाना बनकर उभरा है। इसमें मुख्य रूप से म्यांमार, फिलीपींस और वियतनाम से आने वाली भारी मांग का बड़ा योगदान है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-2025 के दौरान भारत के कुल रक्षा निर्यात में इन तीनों दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की हिस्सेदारी 70.1 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले वर्ष 2014-2019 में यह हिस्सेदारी 16.5 प्रतिशत और 2008-2013 में सिर्फ 14.7 प्रतिशत थी। ये आंकड़े भारत के बदलते एक्सपोर्ट प्रोफाइल को साफ दिखाते हैं।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती ग्लोबल डिमांड

भारत के रक्षा क्षेत्र को इस महीने की शुरुआत में एक और बड़ी कामयाबी तब मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने के समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया इस मिसाइल का तीसरा अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मल्टि लेयर रणनीतिक रक्षा समझौते की कीमत 200 मिलियन डॉलर से 630 मिलियन डॉलर के बीच है। इसमें मिसाइल बैटरी, तटीय रक्षा प्रणाली और ऑपरेटरों की ट्रेनिंग शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी युद्ध प्रभावशीलता साबित करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल शक्तिशाली तटीय रक्षा और एंटी-शिप क्षमताएं प्रदान करती है। इसकी बेहद तेज गति होने की वजह से दुश्मन के लिए इसे इंटरसेप्ट करना बहुत कठिन होता है। ऐसे में ये दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक जलमार्गों में शत्रु नौसैनिक बलों के खिलाफ एक मजबूत डिटरेंट का काम करती है।

इस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyenia के जॉइंट वेंटर में तैयार किया गया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।

पिनाका रॉकेट सिस्टम की सफलता और फ्रांस की नजर

भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं में महाराष्ट्र के नागपुर प्लांट में तैयार होने वाला पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। आर्मेनिया ने साल 2022 में चार पिनाका रॉकेट लॉन्चर बैटरियों (अनगाइडेड, एक्सटेंडेड-रेंज और गाइडेड वेरिएंट) के लिए 2000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जुलाई 2023 से शुरू होकर एक साल के भीतर शुरुआती अनगाइडेड सिस्टम की डिलीवरी पूरी कर ली गई थी।

जनवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मेनिया के लिए गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पिछले हफ्ते ही डीआरडीओ (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। इसने 60 किमी की न्यूनतम दूरी पर अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से भेदा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस भी अपने पुराने होते आर्टिलरी बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए इस स्वदेशी रॉकेट सिस्टम को खरीदने पर विचार कर रहा है।

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने रचा इतिहास

भारत का रक्षा निर्यात अब सिर्फ आक्रामक मिसाइल प्रणालियों तक सीमित नहीं है। स्वदेशी रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली आकाश वेपन सिस्टम विदेश में बेची जाने वाली पहली स्थानीय एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म बन गई है। साल 2022 में आर्मेनिया ने आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए 720 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी डिलीवरी साल 2024 में शुरू हुई। डीआरडीओ द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित यह मध्यम दूरी की मोबाइल रक्षा प्रणाली लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन की गई है।

आकाश मिसाइल प्रणाली ने पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान द्वारा किए गए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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Crude Oil Price: सप्लाई की चिंता से चौथे दिन भी बढ़त जारी, क्या $110 तक जाएगा कच्चे तेल का भाव!

crude Oil Price : US के ईरान पर नए हमले के बाद ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे दिन बढ़ी है। पिछले तीन सेशन में 12% बढ़ने के बाद ब्रेंट लगभग $85 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग $80 प्रति बैरल पर था। इस बढ़ोतरी से इस इलाके से क्रूड शिपमेंट में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 33 सेंट, या 0.4% बढ़कर $85.28 प्रति बैरल हो गया, जो पिछले तीन सेशन में 12% की बढ़त के बाद हुआ था। इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 42 सेंट, या 0.5% बढ़कर $80.02 प्रति बैरल हो गया।

दोनों बेंचमार्क क्रूड कॉन्ट्रैक्ट्स बुधवार को लगभग 0.3% बढ़े थे और हफ्ते की शुरुआत में पहुंचे एक महीने के हाई के करीब ट्रेड कर रहे थे।

आखिर तेजी क्यों आई?

अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर नए हवाई हमले किए और कहा कि उसने OPEC सदस्य देश के एक पोर्ट की ओर जा रहे एक खाली तेल टैंकर को रोका। कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक महीने में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गईं, क्योंकि बढ़ते संघर्ष ने एनर्जी से भरपूर मिडिल ईस्ट से सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं, जिससे दूसरी तिमाही में दर्ज लगभग 30% की गिरावट का कुछ हिस्सा पलट गया। साथ ही, रूसी फ्यूल फैसिलिटी और तेल टैंकरों पर यूक्रेन के लगातार हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन बढ़ाने की कसम खाई है, जब तक कि तेहरान स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले बंद नहीं कर देता और ज़रूरी एनर्जी कॉरिडोर को फिर से खोलने पर सहमत नहीं हो जाता। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ट्रंप मिलिट्री ऑपरेशन को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं और उन्होंने खार्ग आइलैंड को टारगेट करने की संभावना पर चर्चा की है, जहां ईरान का मुख्य तेल एक्सपोर्ट टर्मिनल है।

हालांकि, ईरान ने पीछे हटने के बहुत कम संकेत दिए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को कहा कि स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक US अपने मिलिट्री हमले खत्म नहीं कर देता और ईरानी पोर्ट पर लगी रोक नहीं हटा लेता।

ईरान के तेल टैंकरों पर हाल के हमलों ने तेज़ी से बढ़ते “शटल रन” ट्रेड में भी रुकावट डाली है, जिसमें रुकावटों से बचने के लिए स्ट्रेट के बाहर एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में क्रूड ऑयल भेजा जाता है। यह तरीका लड़ाई के दौरान यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देशों के लिए एक ज़रूरी एक्सपोर्ट रूट बन गया था, हालांकि सिस्टम में कोई भी रुकावट कुछ समय के लिए हो सकती है।

तनाव के बावजूद, स्ट्रेट से शिपिंग एक्टिविटी जारी रही है। US सेंट्रल कमांड के स्पोक्सपर्सन कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, US की मदद से जहाज़ों का ट्रांज़िट मंगलवार रात को डबल डिजिट में पहुंच गया। पिछले हफ़्ते इस रास्ते से गुज़रने वाले लगभग 300 जहाज़ों में से लगभग आधे को US सेना से मदद मिली।

$110 के ऊपर जाएगा भाव

ग्लोबल फर्म गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि अगर खाड़ी के एक्सपोर्ट में रुकावटें बनी रहती हैं, तो चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। हालांकि, इन्वेस्टमेंट बैंक को उम्मीद है कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है और तेल का प्रोडक्शन उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है, तो साल के आखिर तक कीमतें गिरकर $60 के आस-पास आ जाएंगी।

इस बीच, चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी टेक्निकल रिसर्च के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा का भी मानना ​​है कि जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ेगा, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ज़्यादा हो सकती हैं, जो एक अटकल वाली चिंता से एक संभावित स्थिति बन सकती है।

मकदा ने कहा, “कीमतें साइकोलॉजिकल रिस्क प्रीमियम दिखाती हैं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की कमज़ोरी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है। नेविगेशन पर असर डालने वाली मिलिट्री लड़ाई से अटकलें लगाई जा सकती हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 से ऊपर जा सकती हैं और स्टैगफ्लेशन का खतरा पैदा हो सकता है।”

 

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बादलों के बीच उड़ने का लेना हो मजा, तो इन 7 पैराग्लाइडिंग स्पॉट्स को जरूर करें एक्सप्लोर!

पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया की इन शानदार जगहों पर उड़ान भरना किसी सपने से कम नहीं है। यहां आसमान से दिखने वाले पहाड़, समुद्र, झीलें और खूबसूरत घाटियां आपको नेचर का एक अनोखा नजारा दिखाती हैं। अगर आप भी एडवेंचर के साथ घूमने और नई जगहों को अलग अंदाज में एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो इन डेस्टिनेशन के बारे में जरूर जानें:

1. गुदौरी, जॉर्जिया

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जॉर्जिया का गुदौरी कॉकस पर्वतों के बीच स्थित एक खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां उड़ान भरते समय बर्फ से ढके पहाड़ों, हरी घाटियों और प्राकृतिक नजारों का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां रूस-जॉर्जिया फ्रेंडशिप मॉन्यूमेंट, काज़बेगी और गेर्गेती ट्रिनिटी चर्च जैसी जगहें घूम सकते हैं। गुदौरी घूमने के लिए 3 से 4 दिन का समय मिलता है। यहां पहुंचने के लिए राजधानी टिब्लिसी से टैक्सी, बस या टूर पैकेज लिया जा सकता है। खाने में जॉर्जियन खाचापुरी, खिंकाली, लोबियो और स्थानीय वाइन जरूर ट्राई करनी चाहिए।

2. माउई, USA

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अमेरिका के हवाई आइलैंड में माउई समुद्र, पहाड़ और ज्वालामुखी लैंडस्केप के कारण पैराग्लाइडिंग के लिए बेहद खास जगह है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय प्रशांत महासागर और खूबसूरत तटीय इलाकों का शानदार नजारा दिखाई देता है। माउई में हालेआकाला नेशनल पार्क, रोड टू हाना, वैलिया बीच और मोलोकिनी क्रेटर जैसी जगहें घूमने लायक हैं। खाने में हवाईयन पोके बाउल, कलुआ पोर्क, ताजा सी-फूड और हवाईयन कॉफी काफी पॉपुलर हैं।इस जगह को अच्छी तरह देखने के लिए 5 से 7 दिन का समय रखें। यहां घूमने के लिए कार किराए पर लेना सबसे माउंटेन रहता है।

3. बीर बिलिंग, भारत

पैराग्लाइडिंग के लिए हिमाचल के बीड़ बिलिंग से बढ़िया नहीं है कोई जगह, यहां के बारे में सबकुछ जानें - Bir Billing Is The Best Paragliding Place Of India At Himachal Pradesh -

हिमाचल प्रदेश का बीर बिलिंग भारत की सबसे फेमस पैराग्लाइडिंग जगहों में से एक है और इसे भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी भी कहा जाता है। यहां धौलाधार मलौण्टाइन रेंज, हरी घाटियां और छोटे गांवों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां बीर मोनेस्ट्री, चोकलिंग मोनेस्ट्री, पालपुंग शेराब्लिंग मठ और बरोट वैली घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 3 से 5 दिन काफी हैं। दिल्ली या चंडीगढ़ से बस, ट्रेन और टैक्सी के जरिए पहुंचा जा सकता है। यहां तिब्बती मोमोज, थुकपा, हिमाचली धाम, मैगी और स्थानीय चाय जरूर चखें।

4. पोखरा, नेपाल

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नेपाल का पोखरा हिमालय, झीलों और पहाड़ों के खूबसूरत मेल के कारण दुनिया की लोकप्रिय पैराग्लाइडिंग जगहों में शामिल है। यहां सारंगकोट से पैराग्लाइडिंग करते समय अन्नपूर्णा माउंटेन और फेवा झील का शानदार व्यू दिखाई देता है। खाने में नेपाली थाली, मोमो, थुकपा और सेल रोटी काफी फेमस हैं। पोखरा में फेवा झील, डेविस फॉल, वर्ल्ड पीस पैगोडा और इंटरनेशनल माउंटेन म्यूजियम घूम सकते हैं। यहां के लिए 4 से 5 दिन का समय अच्छा रहता है। काठमांडू से बस या फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं और शहर में टैक्सी, बाइक या पैदल घूम सकते हैं।

5. शैमोनिक्स, फ्रांस

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फ्रांस का शैमोनिक्स आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक शानदार एडवेंचर डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय मों ब्लांक पर्वत, ग्लेशियर और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां मों ब्लांक, ऐगुई दु मिदी केबल कार और मेर दे ग्लास ग्लेशियर जैसी जगहें घूम सकते हैं। इस क्षेत्र को देखने के लिए 4 से 6 दिन का समय रखें। जिनेवा से ट्रेन या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। खाने में फ्रेंच चीज, फोंड्यू, रैकलेट, क्रेप्स और फ्रेंच पेस्ट्री का स्वाद जरूर लें।

6. ओलुडेनिज़, तुर्की

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तुर्की का ओलुडेनिज़ समुद्र के ऊपर पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। यहां बाबादाग पर्वत से पैराग्लाइडिंग करते समय नीले समुद्र, सफेद समुद्र तट और खूबसूरत खाड़ी का नजारा देखने को मिलता है। यहां ब्लू लगून, बटरफ्लाई वैली, कयाकॉय गांव और बाबादाग पर्वत घूम सकते हैं। इस जगह को देखने के लिए 3 से 5 दिन ठीक हैं। दलामान एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां तुर्किश कबाब, बकलावा, गोजलेमे, मेजे प्लेटर और तुर्किश चाय काफी पॉपुलर हैं।

7. इंटरलाकेन, स्विट्ज़रलैंड

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स्विट्ज़रलैंड का इंटरलाकेन झीलों और आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक खूबसूरत शहर है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान बर्फ से ढकी चोटियां, हरी घाटियां और नीली झीलों का शानदार व्यू मिलता है। यहां जुंगफ्राउयोख, लेक थून, लेक ब्रीएंज, हार्डर कुल्म और ग्रिंडेलवाल्ड घूमने लायक जगहें हैं। इंटरलाकेन के लिए 4 से 6 दिन का समय अच्छा रहेगा। स्विट्ज़रलैंड की ट्रेन व्यवस्था से यहां घूमना आसान है। खाने में स्विस फोंड्यू, रैकलेट, रोस्ती और स्विस चॉकलेट जरूर खाएं।

8. क्वीन्सटाउन, न्यूज़ीलैंड

Tandem Paragliding Experience in Interlaken - Klook

 

न्यूज़ीलैंड का क्वीन्सटाउन एडवेंचर लवर के लिए दुनिया की बेहतरीन जगहों में से एक है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान पहाड़ों, झीलों और खूबसूरत घाटियों का शानदार नजारा दिखाई देता है। यहां लेक वाकाटिपु, बॉब्स पीक, मिलफोर्ड साउंड और ग्लेनॉर्की घूम सकते हैं। यहां खाने में न्यूजीलैंड लैम्ब, मीट पाई, सी-फूड और लोकल हनी काफी पॉपुलर हैं। क्वीन्सटाउन को अच्छे से देखने के लिए 5 से 7 दिन रखें। यहां कार किराए पर लेकर घूमना सबसे अच्छा ऑप्शन है।

9. वैले डे ब्रावो, मेक्सिको

Valle Tours — Cloudsurf Paragliding

मेक्सिको का वैले डे ब्रावो पहाड़ियों, जंगलों और झील से घिरा हुआ खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान झील और हरियाली का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। यहां लेक एवांडारो, मॉनार्क बटरफ्लाई रिजर्व और पुराने शहर की गलियां घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 2 से 4 दिन पर्याप्त हैं। मेक्सिको सिटी से बस या कार द्वारा पहुंचा जा सकता है। आप जब भी यहां जाये खाने में टैकोस, तमालेस, एनचिलाडास और मैक्सिकन कॉफी जरूर ट्राई करें।

10. मिराफ्लोरेस, पेरू

पैराग्लाइडर पायलटों के लिए वैले डे ब्रावो | क्रॉस कंट्री मैगज़ीन

पेरू के लीमा शहर का मिराफ्लोरेस समुद्र किनारे पैराग्लाइडिंग के लिए पॉपुलर है। यहां पहाड़ों की जगह समुद्र के ऊपर उड़ने का अनोखा एक्सपीरियंस मिलता है, जहां प्रशांत महासागर और शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। यहां मालेकॉन बोर्डवॉक, लव पार्क, लार्को म्यूजियम और पार्के केनेडी घूम सकते हैं। इस जगह के लिए 2 से 3 दिन काफी हैं। यहां जाने का जब भी आपको मौका मिले खाने में पेरूवियन सेविचे, लोमो साल्टाडो, एंटीचूकोस और पिस्को सॉर जरूर चखें।

इन सभी पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन पर रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता, लोकल संस्कृति और स्वादिष्ट खाने का एक्सपीरियंस मिलता है। अगर आप पहली बार पैराग्लाइडिंग करना चाहते या फिर एक्सपेरिएंस्ड एडवेंचर लवर हो सभी के लिए जगहें शानदार एक्सपीरियंस देती हैं।

यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले किए

यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। एजोव सागर लंबे समय तक यूक्रेन की पहुंच से बाहर रहा था। रूस इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले करने और दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, स्टील, सूरजमुखी का तेल और दूसरे सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने के लिए करता था। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेन के ड्रोन हमले काफी प्रभावी हो गए हैं और अब इस समुद्री रास्ते पर भी रूस का दबदबा कमजोर पड़ने लगा है। यूक्रेन की ड्रोन सेना के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया गया है। पहले यूक्रेन के हमले मुख्य रूप से रूस के शैडो ऑयल टैंकरों और युद्धपोतों तक सीमित थे, लेकिन अब हमलों का दायरा बढ़ गया है। रूस के दो अहम समुद्री रास्ते बंद लगातार हमलों के बाद रूस ने डॉन-एजोव चैनल और केर्च स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोक दी है। सैटेलाइट तस्वीरों और जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली बेवसाइट्स के मुताबिक, इन दोनों रास्तों के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर सिर्फ रूस के तेल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे गेहूं, सूरजमुखी के तेल और दूसरे कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लागू नहीं हैं। अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) का कहना है कि यूक्रेन के हमलों का मकसद क्रीमिया को रूस की सप्लाई लाइन से अलग करना और समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व अनाज के निर्यात को बाधित करना है। गेहूं की कीमतें बढ़ने लगीं रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है। रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है और वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 20% हिस्सा अकेले रूस से आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।एजोव सागर में संकट बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के वायदा भाव (फ्यूचर्स) भी बढ़ने लगे हैं। रूस का दावा है कि वह अपने गेहूं का निर्यात ब्लैक सी के दूसरे बंदरगाहों से कर सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि निर्यात के सबसे व्यस्त मौसम में दूसरे बंदरगाहों की क्षमता इतनी नहीं है कि वे पूरा भार संभाल सकें। रूस के लिए एजोव सागर इतना खास क्यों है एजोव सी यूक्रेन और रूस के बीच स्थित एक अंदरूनी समुद्र है, जो केर्च स्ट्रेट के जरिए ब्लैक सी से जुड़ा है। 2003 में यूक्रेन और रूस ने इस समुद्री क्षेत्र को साझा इस्तेमाल करने का समझौता किया था। लेकिन 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस ने इस समझौते का कई बार उल्लंघन किया। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस ने एजोव सागर के आसपास के लगभग पूरे यूक्रेनी तट पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे रूस का समंदर तक बता दिया था। आकार में छोटा होने के बावजूद, एजोव सागर रूस की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। सोवियत काल में विकसित हुए नदियों और नहरों का विशाल नेटवर्क इसी समुद्री मार्ग से जुड़ता है। इसके जरिए दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, सूरजमुखी का तेल, इस्पात और अन्य सामान पहले ब्लैक सी और फिर दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया जाता है।

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाई मजबूत पहचान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that over past nine years Uttar Pradesh has established strong identity among country's leading economies

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का राज स्थापित होने से निवेश और विकास को मिली नई रफ्तार 

– सपा सरकार पर सीएम का तीखा हमला, बोले- सरकारी खजाने की हुई लूट और विकास रहा अधूरा

– यूपी में तीसरी बार बनेगी एनडीए की सरकार, भाजपा के नेतृत्व में लगेगी हैट्रिक

– उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई, सवा तीन करोड़ लोगों को मिला रोजगार

– नौ सालों में दंगा, कर्फ्यू और माफिया संस्कृति से मुक्त हुआ उत्तर प्रदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों के कार्यों, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने में सफल रही है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान, सुरक्षा और विकास के संकट से जूझ रहा था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कहा कि यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट होगी। एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी। मुख्यमंत्री बुधवार को लखनऊ में 'आज तक' न्यूज चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'पंचायत आज तक उत्तर प्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। 
 

सीएम ने कहा कि 9 वर्षों की कार्यपद्धति और रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने है। जनता जनार्दन फैसला करने को तैयार है। 2003 से 2017 तक सपा और अन्य सरकारों की कार्यपद्धतियां भी सबके सामने है। हम लोगों ने पीएम मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में विकसित भारत को आगे बढ़ाने का काम किया।

डबल इंजन सरकार का लाभ हमने लिया है। इसमें यूपी सफल हुआ है। विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन की भाजपा की सरकार ही पूरा कर सकती है। गत वर्ष एक रिकॉर्ड टूटा था, इस बार एक नया टूटने वाला है। यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट करेगी। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

 

सपा सरकार में लूटा गया सरकारी खजाना

सीएम ने कहा कि सपा का विकास का मॉडल होता तो यूपी कबका डूब गया होता। सैफई खानदान यूपी को तबाह कर रहा था, उसका नमूना जेपीएनआईसी बिल्डिंग है। सपा ने जेपीएनआईसी को बनाने के लिए 200 करोड़ का डीपीआर बनाया था, लेकिन 800 करोड़ रुपए खर्च हो जाने के बाद भी अधूरा है। आदि गंगा की मान्यता वाली गोमती के रिवर फ्रंट के नाम पर 166 करोड़ रुपए का डीपीआर किया था लेकिन 1400 करोड़ रुपए खर्च हो गए। साथ ही कार्य भी अधूरा है। सपा सरकार में केवल सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।

 

सीएम ने कहा कि 2016 दिसंबर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। इसके बाद 15,200 करोड़ की लागत तय की गई। सरकार बदलने के बाद मई 2017 में उसकी समीक्षा की तो जमीन ही न होने का पता चला। इसमें बड़ी बेइमानी का पता चला तो टेंडर को रद्द किया गया। दो वर्ष जमीन खरीदने में लगे। 2018 में हमारे पास 90 प्रतिशत जमीन आ गई। इसके बाद 15,200 करोड़ का टेंडर मात्र 11,800 करोड़ रुपए का हो गया। इसी बजट में सपा सरकार से बेहतर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया गया। 

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सीएम ने कहा कि यूपी की एक्साइस पॉलिसी में भी डैकती डाली जाती थी। पहले मात्र 12 हजार करोड़ रुपए की एक्साइस ड्यूटी आती थी। हमारी सरकार के लिए कठिन था, लेकिन पॉलिसी की बदल दी। आज पांच गुना ज्यादा 63,000 करोड़ रुपए एक्साइस ड्यूटी के रूप में सरकार को मिल रहे हैं।

 

विपक्ष ने राम मंदिर के विरोध में अधिवक्ता खड़े किए

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले जब यूपी में सुरक्षा नहीं थी तो त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था, उपद्रव शुरू हो जाता है। आज हर समुदाय का पर्व व त्योहार शांतिपूर्ण ढ़ंग से पूरा हो रहा है। जिन लोगों ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई, वह आस्था की बात कर रहे हैं। साथ ही पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई। देश के उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर रहे थे कि भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर के विरोध में अपने अधिवक्ता खड़े किए। जिन लोगों ने देश के खजाने को लूटा और पहचान का संकट खड़ा किया, आज उनको अयोध्या की चोरी दिख रही है लेकिन अपनी डकैती नहीं दिखती। 

 

अयोध्या चढ़ावा मामले में की गई कार्रवाई, हिंदू आस्था पर प्रहार करना न्याय संगत नहीं

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की घटना निश्चित ही सभी रामभक्तों को आहत करती है। वह एक इंडिपेंडेंट ट्रस्ट है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की, जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए उनकी व सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर भी दो इस्तीफे हुए, लेकिन उसके नाम पर अयोध्या को, श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करना अथवा हिंदू आस्था पर प्रहार करना, ये न्याय संगत नहीं है।

यूपी में जब यह आस्था के केंद्र देश के लिए मॉडल बन रहे और यूपी पहचान में आगे बढ़ रहा हैं तो सपा को पीड़ा हो सकती है। आस्था के केंद्रों से अर्थव्यवस्था को गति मिली है। इससे फूल बेचने वाले, रिक्शा चलाने वाले, होटल व टैक्सी संचालकों की भी आर्थिक स्थिति सुधरी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान एक नाविक ने 30 करोड़ रुपए की कमाई की थी, लेकिन ये उनको अच्छा नहीं लगाता है।

 

दोनों युवराजों को चांदी के चम्मच से खाने की आदत

सीएम ने कहा कि समृद्धि केवल दो खानदानों ने अपने नाम पर पेटेंट करा लिया है। ये एक गरीब की पीड़ा को नहीं समझ सकते। दोनों राजकुमारों ने जहां जन्म लिया है, वहां चांदी के चम्मच से खाने की आदत रही है। देर से सोकर उठने की आदत रही है। गर्मी, बरसात की पीड़ा कैसी होती है, इन्हें नहीं पता है। दोनों फीफा कप का आनंद लेने ऑस्ट्रेलिया और टूरिस्ट वीजा पर यूएस की यात्रा पर गए हैं। ये किसके पैसे से विदेश की यात्रा कर रहे हैं। यहां समाज को बांटने का काम करते है, लेकिन जनता सारी करतूतों को जानती है।

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मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम नहीं आई

सीएम ने कहा कि मुझे एक लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से पहले एक सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र से देश की संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। विभिन्न मुद्दों के लिए जूझता था और संसद में उठाने का प्रयास करता था। कभी-कभी निराशा भी होती थी। लगता था कि बीमारी व भूख से मरना, माफिया के सामने लोगों का नतमस्तक होना, बिजली व सामान्य जनसुविधाओं के लिए लोगों को तरसना, युवाओं के सामने पहचान का संकट, किसानों की आत्महत्या उत्तर प्रदेश की नियति बन गई है। पीड़ा के साथ लगता था कि क्या इन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है।

जब पार्टी ने मुझे शासन-सत्ता का संचालन करने का अवसर दिया और अब उसके सकारात्मक परिणाम को देखता हूं। ऐसा नहीं की मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम आई हो। मेरे साथ कोई भी व्यक्ति नहीं आया। गोरखपुर से पांच बार से सांसद रहा, वहां से भी एक व्यक्ति नहीं आया। जो टीम लखनऊ में मुझे मिली, उन्हीं के साथ काम करने का प्रयास किया। उसके परिणाम सबके सामने है। 

 

सीएम ने कहा कि यूपी को इन 9 वर्षों में पहचान के संकट से उबारा है। यूपी की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। महिला कर्मचारियों की उपस्थिति तीन गुना बढ़ी है। बीमारू राज्य की श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश 9 वर्षों में देश के टॉप तीन अर्थव्य़वस्था के रूप में स्थापित हुआ है। ऐसे कौन से कारण थे, जो यूपी में नहीं हो सकते थे।

 

2014 के पहले भी थी एक डबल इंजन सरकार 

सीएम ने कहा कि 2014 के पहले भी एक प्रकार की डबल इंजन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस व यूपीए की सरकार थी और यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दोनों मिलकर काम कर रहे थे लेकिन जनता में विश्वास नहीं था। इन दोनों की स्थिति एक तरफ कुआं और खाई जैसी थी। आज ये लोग जो उपदेश देते हैं, वह 2014 से पहले अंगीकार किया होता तो हाशिए पर नहीं गए होते।

 

यूपी का नौजवान अपनी पहचान छिपाता था, उसे नौकरी नहीं मिलती थी। उसने आवेदन किया तो योग्यता के बाद भी वो चयनित नहीं होता था। क्योंकि नौकरी पर कुछ चंद जनपदों और लोगों का कब्जा था। 2017 के पहले सुरक्षा की स्थिति बदलहाल थी, बेटी और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। सत्ता के समानांतर माफियाओं की सरकारें चलती थीं। मीडिया, आम आदमी, व्यापारी, बेटी, उद्यमी कोई भी सुरक्षित नहीं था। व्यापारी और आम नागरिक भी घर से निकलता था तो ईश्वर से प्रार्थना करता था कि मुझे शाम को वापस परिवार का मुंह देखने का अवसर मिले।

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माफियाओं के साथ आज भी उन लोगों की सहानुभूति

सीएम ने कहा कि उद्यमी निवेश नहीं करना चाहता था। न सरकार की नीति थी और न नीयत थी। अराजकता चरम पर थी, माफिया के सामने सरकारें नाक रगड़ती हुई दिखाई देती थी। आज भी उनके भाषण सुनते होंगे, वे बोलते हैं कि सत्ता में आ गए तो जांच कराएंगे कि माफिया मारे क्यों जा रहे हैं। आज भी उन लोगों की सहानुभूति उन माफिया और उनके गुर्गों के प्रति है, जो जेल में है या जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं। उनकी सहानुभूति आज भी यूपी के नागरिकों के प्रति नहीं दिखती है।

 

23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच ले जाएं

सीएम ने कहा कि 2003 से 2026 के 23 वर्षों के रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता के बीच लेकर जाइए। पहले पांच साल मुलायम सिंह के, अगले पांच साल मायावती के व अगले पांच वर्ष अखिलेश के और पिछले 9 वर्षों के हमारे कार्यकाल के, जनता से उनकी संतुष्टि के बारे में पूछिए। आपको स्वर्गीय राजीव गांधी का वह वाक्य याद आज जाएगा जिसमें निराश होकर कहा था कि हम 100 रुपए भेजते है, लेकिन नीचे 15 रुपए ही पहुंचता है। आखिर 85 रुपए कौन खा जा रहा था।

ये किसी छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति, युवा की नौकरी, बुर्जुग-निराश्रित महिला की पेंशन, गरीब का अनाज, बहन-बेटी के लिए बनने वाले शौचालय का पैसा था। जिस 85 प्रतिशत पैसे पर पिछली सरकारें डकैती डालने का काम करती थीं। आज डीबीटी के माध्यम से 100 रुपए दिल्ली या लखनऊ से भेजने पर सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है। सभी तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंच रहा है। सीएम योगी ने कहा कि संकल्प और इच्छाशक्ति के दम पर देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य दंगा मुक्त, उपद्रव मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और अपनी परांपरागत पहचान से युक्त हो सकता है, यह यूपी ने पिछले 9 वर्षों में करके दिखाया है।

 

अब इंसेफेलाइटिस से मौतें नहीं होतीं

सीएम ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष इसी सीजन में इंसेफेलाइटिस से मौतें होती थीं। हर परिवार सशंकित रहता था कि पता नहीं कौन सा बच्चा इसकी चपेट में आ जाए। हर वर्ष 1200 से 1500 मौतें होती थीं। आज इंसेफेलाइटिस से होनी वाली मौतें शून्य पर पहुंच चुकी हैं। भूख से मौतें अलग से होते थीं, आज उन्हें 100 प्रतिशत सैचुरेट कर चुके हैं। उन्हें जमीन के पट्टे मिले, उनका आवास बना, आयुष्मान कार्ड, रसोई गैस के सिलेंडर और रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

 

परंपरागत उद्यम फिर जीवित हुए

सीएम ने कहा कि परंपरागत उद्यम फिर से जीवित हो चुके हैं, जिन्हों कभी यूपी को पहचान दिलाई थी। आजादी के तत्काल बाद 1950 में देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 14 प्रतिशत था, जो 2017 से पहले घटकर मात्र 7 प्रतिशत के आस-पास रह गया था। यूपी अवनति की ओर था। तब अन्नदाता को पानी, बीज, बिजली नहीं मिलती थी। किसान खेत में जाने से डरता था। वहीं पैदावार फसल का दाम किसानों को नहीं मिलता था, क्योंकि इसका फायदा बिचौलिए उठाते थे। कृषि यूपी का आधार है लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रोत्साहन नहीं था।

मैन्युफैक्चरिंग पावर जब परंपरागत उद्यम के साथ जुड़ती है, तब अर्थव्यवस्था को तेज करती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए हमारे पास एमएसएमई का बेहतरीन नेटर्वक था लेकिन पिछली सरकारों के इंस्पेक्टर राज ने उसे तबाह कर दिया था। लोग विभागीय उत्पीड़न के शिकार होते थे। उस समय उद्यमी, कारीगर बन गया और किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया था। ऐसे में यूपी की अर्थव्यवस्था को डूबना ही था।

 

कृषि विकास दर को 18 प्रतिशत तक पहुंचाया

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। अमेरिका-ईरान व रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, उर्वरक की कमी स्वाभाविक रूप से हो जानी चाहिए थी, लेकिन यूपी में किसान को फर्टिलाइजर, बीज, कीटनाशक समय पर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के अंदर 10 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने 24 लाख हेक्टेयर जमीन को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में अप्रूव हुई सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को यूपी में डबल इंजन की सरकार ने पूरा कराया। उन्होंने बुंदेलखंड की अर्जुन सहायक परियोजना का भी जिक्र किया। बताया कि पहले महोबा के किसानों को प्रति बीघा 5 हजार रुपए मिलता था, आज उन्हीं अन्नदाता किसानों को 50 हजार रुपए मिल रहा है। उन्होंने बाणसागर परियोजना की सफलता की भी चर्चा की।

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बिचौलियों को हटाकर किसानों को दिलाया फायदा

सीएम ने कहा कि यूपी के किसानों को 10 घंटे बिजली खेती के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही बिजली उनके लिए मुफ्त है। प्रदेश में 16 लाख प्राइवेट ट्यूबवेल हैं, सबकी बिजली मुफ्त कर दी गई है। 2017 में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य का भुगतान बाकी था। गन्ना किसानों को अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का दाम किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम ने कहा कि आज 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। 105 चीनी मिलें ऐसी हैं, जहां से 4 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को हो रहा है।

शेष में प्रयास किया जा रहा है कि वह 15 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कर दें। आज किसान की किसी भी उपज को बिचौलियों की जगह उन्हीं से सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। अगर बाजार में अच्छा दाम है तो किसान स्वतंत्र रूप से वहां बेच सकता है। अगर बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा है तो एमएसपी में लागत के डेढ़ गुना दाम पर सरकार किसान से खरीदेगी और फिर उसे अपने स्तर पर बाजार तक पहुंचाने का काम करेगी।

आज किसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना समेत हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। खेती में जो विकास दर बढ़ी है, उस विकास दर के पीछे डबल इंजन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का परिणाम देखने को मिल रहा है।

 

सीएम ने कहा कि पहले एमएसएमई दम तोड़ चुका था, कारीगर पलायन कर चुके थे, अब वह फिर से प्रगति कर रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी संचालित कर रहा है। सरकार हर यूनिट को 5 लाख रुपए की सामाजिक बीमा का कवर भी उपलब्ध करा रही है। सवा तीन करोड़ रुपए इसके साथ रोजगार से जुड़ चुके हैं। 

 

सुशासन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए कानून का राज जरूरी

सीएम ने कहा कि यूपी जैसे राज्य में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कानून का राज स्थापित कर दीजिए। सुरक्षा का बेहतरीन माहौल दे दीजिए। अपने आप सुशासन के लक्ष्य प्राप्त होते दिखाई देंगे। यूपी सरकार ने प्रभावी ढ़ग से इसे बढ़ाने का काम किया। आज यह सुनना अच्छा लगता है, जब कहा जाता है कि यूपी के मॉडल को सुरक्षा के मायने में अन्य राज्यों ने स्वीकार किया है। 

 

हर योजना में शीर्ष पर यूपी

सीएम ने कहा कि पहले दिल्ली में सरकारी योजनाओं को लागू करने में टॉप राज्यों की सूची देखता था। यूपी का कहीं पता नहीं होता था, वह बाटम 3 में दिखता था। तब सरकारों की मानसिकता भी ऐसी ही थी। पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी जी के नेतृत्व में 100 से ज्यादा जनकल्याण की स्कीमें निकली हैं। आज हर एक स्कीम में यूपी का नाम टॉप में आता है। यूपी में योजना की सफलता का मतलब है कि वह देश के अंदर सफल हो गई। साथ ही दुनिया के लिए मॉडल बन गई। सीएम ने कहा कि आज गरीब को मकान, शौचालय मिला है। हर गरीब को सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, जिसके लिए दशकों से लालायित था। अब कोई शिकायत लेकर नहीं आता। 

 

ई-पॉस मशीन से आई पारदर्शिता

सीएम ने कहा कि पूर्वी जनपदों में 2017 से पहले भूख से मौत होती थी। इस सरकार ने ई-पॉश मशीनें लगाईं। आज के दिन 16 करोड़ लोगों को यूपी में मुफ्त राशन दिया जा रहा है। ई-पॉस मशीन से 80 हजार उचित मूल्य की दुकानों को जोड़ा गया है। किसी गांव में उचित मूल्य की दुकान में थोड़ी भी घटतौली होने पर अलर्ट आ जाता है, जिसके बाद टीम फौरन छापा मारकर कार्रवाई करती है।

 

यूपी में बिजली खपत 35 हजार मेगावाट तक पहुंची

सीएम ने कहा कि यूपी के सभी 75 जनपदों में सामान्य रूप से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। 2017 के पहले पीक आवर में कुल बिजली आपूर्ति 15-16 हजार मेगावाट ही होती थी, आज आपूर्ति 33 से 35 हजार मेगावाट हो रही है। ये यूपी की नई स्थिति है।

 

यूपी में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

सीएम ने कहा कि यूपी ने 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गईं हैं, जिससे निवेश बढ़ा है। 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और 7.50 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की तैयारी चल रही है। ये नया यूपी है, जिसके तहत 65 लाख युवाओं को नौकरी दी गई है।

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सीएम ने कहा कि देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अच्छी सड़कें यूपी में मिलेंगी। देश के एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत यूपी का योगदान है। सबसे ज्यादा एयरपोर्ट यूपी में हैं। 2017 से पहले यूपी में केवल दो एयरपोर्ट संचालित थे, आज 17 हैं। इनमें पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। जिसमें पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम भी शामिल है। इसके पास 14 हजार एकड़ जमीन है, देश में किसी भी एयरपोर्ट के पास इतनी जमीन नहीं है। नए एयरक्राफ्ट आने पर सभी एयरपोर्ट से हवाई सुविधा और बढ़ेगी। प्रदेश सरकार पांच नए एयरपोर्ट पर भी काम कर रही है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि पहले कोई सोचता भी नहीं था कि आजमगढ़ में एयरपोर्ट होगा, लेकिन यह भी संभव हुआ। श्रावस्ती, अलीगढ़, मुरादाबाद, सोनभद्र में कोई एयरपोर्ट की कल्पना नहीं करता था, लेकिन वहां भी सपना पूरा किया गया। दिल्ली से मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे भी बन चुका है और रैपिड रेल भी आ चुकी है। देश की पहली इनलैंड वाटरवे वाराणसी-हल्दिया के बीच संचालित हो रही है। साथ ही यूपी के अंदर सबसे ज्यादा सात सिटी में मेट्रो सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में एक बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इनके अलावा हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल हैं। बिल के मुताबिक, इन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकेगा। साथ ही रूस की ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा व्यवस्था पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इससे पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। इस कदम का मकसद रूस के तेल कारोबार पर आर्थिक दबाव बनाना और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर करना है। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, ओलिगार्क्स, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है, यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। बिल को दिवंगत सांसद लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था इस बिल को सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया था। निधन से एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन दौरे के दौरान कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस में कहा, “यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनका सबसे बड़ा मुद्दा था और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है।” कैपिटल हिल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सीनेटर एक साथ नजर आए। उन्होंने इस बिल को ग्राहम के लिए श्रद्धांजलि बताया।

वर्ल्ड अपडेट्स:फ्रांस ने यूक्रेन को मिसाइल निर्माण की मंजूरी दी: यूक्रेन में ही बनेंगी क्रूज मिसाइल, इंटरसेप्टर और ग्लाइड बम

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि यूक्रेन को उसकी अपनी जमीन पर मिसाइल और बम बनाने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। पेरिस में आयोजित ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इस फैसले से यूक्रेन की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और हथियारों का निर्माण तेजी से हो सकेगा। नए लाइसेंसिंग समझौतों के तहत यूक्रेन एस्टर-30 एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, एएएसएम ग्लाइड बम और स्कैल्प -ईजी क्रूज मिसाइल का स्थानीय स्तर पर निर्माण करेगा। मैक्रों ने यह भी बताया कि आने वाले हफ्तों में फ्रांस और इटली यूक्रेन को अतिरिक्त एयर डिफेंस बैटरियां और इंटरसेप्टर उपलब्ध कराएंगे। वहीं, 16 राफेल लड़ाकू विमान 2028-29 तक यूक्रेन को मिलने की उम्मीद है। ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ फ्रांस और ब्रिटेन की अगुआई वाला देशों का समूह है, जो यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर काम कर रहा है। रूस ने इस पहल का विरोध किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे “युद्ध को आगे बढ़ाने वाले देशों का गठबंधन” बताया। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीकों के परीक्षण केंद्र में बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बुल्गारिया ने यूक्रेन समर्थक गठबंधन से बनाई दूरी: PM बोले- युद्ध नहीं, कूटनीति से निकलेगा हल बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा है कि उनका देश यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता देने वाले पश्चिमी देशों के गठबंधन का हिस्सा नहीं है। फ्रांस में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि मजबूत कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए। रादेव ने कहा कि बुल्गारिया यूक्रेन को इस तरह की अतिरिक्त सैन्य सहायता नहीं देता क्योंकि इससे संघर्ष लंबा खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता तनाव कम करने और बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह भी कहा था कि बुल्गारिया यूक्रेन को अब तक 13 सैन्य सहायता पैकेज दे चुका है और उसके पास आगे भेजने के लिए अतिरिक्त सैन्य सामग्री नहीं बची है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया नाटो शिखर सम्मेलन में स्लोवाकिया, हंगरी और चेक गणराज्य सहित कुछ देशों ने अमेरिका के नेतृत्व वाले लगभग 70 अरब यूरो (करीब 80 अरब डॉलर) के नए सैन्य सहायता पैकेज में शामिल होने से इनकार कर दिया। चुनाव में वोटरों को लाखों डॉलर के चेक देना मस्क को पड़ सकता है भारी; आपराधिक जांच की सिफारिश
अमेरिका के विस्कॉन्सिन इलेक्शंस कमीशन ने प्रारंभिक तौर पर माना है कि अरबपति कारोबारी इलॉन मस्क ने 2025 के राज्य सुप्रीम कोर्ट चुनाव से पहले मतदाताओं को 10 लाख डॉलर के चेक देकर चुनावी रिश्वत संबंधी कानून का उल्लंघन किया हो सकता है। आयोग ने मामले को ब्राउन काउंटी के जिला अटॉर्नी के पास आपराधिक जांच के लिए भेज दिया है। अभियोजन पक्ष को अब 40 दिनों के भीतर तय करना होगा कि मस्क के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए या नहीं। आयोग ने पिछले सप्ताह मिली दो शिकायतों को 5-1 के बहुमत से आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रस्ताव में कहा गया कि मस्क ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मतदान करने वाले लोगों को 10 लाख डॉलर देने की पेशकश की, जिससे मतदाताओं को चुनाव में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जा सके। 2025 के विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट चुनाव में मस्क ने रिपब्लिकन समर्थित उम्मीदवार ब्रैड शिमेल के समर्थन में कम से कम 2 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। हालांकि शिमेल को डेमोक्रेट समर्थित सुसान क्रॉफर्ड से 10 प्रतिशत अंकों के अंतर से हार मिली। यह चुनाव 10 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च के साथ अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा न्यायिक चुनाव माना गया। मस्क के खिलाफ पहले से एक अलग दीवानी मुकदमा भी लंबित है, जिसमें उन पर वोट खरीदने, अवैध लॉटरी चलाने और चुनावी कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाला: नेपाल में दो पूर्व मंत्रियों सहित 16 को जेल

नेपाल की काठमांडू जिला अदालत ने फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाले में दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों समेत 16 लोगों को दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री टोप बहादुर रायमाझी को चार साल और पूर्व गृह मंत्री बालकृष्ण खांड को दो साल की जेल की सजा सुनाई। दोनों पर नेपाली नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भूटानी शरणार्थी बताकर अमेरिका में पुनर्वास दिलाने की साजिश रचने का आरोप था। रायमाझी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि खांड जमानत पर बाहर हैं। दोनों पहले अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर चुके हैं। उनके वकीलों ने कहा है कि फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी। अदालत ने गृह मंत्रालय के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एक पूर्व भूटानी शरणार्थी नेता समेत 14 अन्य लोगों को भी दोषी ठहराते हुए चार साल तक की सजा सुनाई है। यह घोटाला 2023 में सामने आया था। नेपाल में 1990 के दशक की शुरुआत से नेपाली मूल के करीब 1.20 लाख लोग भूटान से विस्थापित होकर पहुंचे थे। बाद में पुनर्वास कार्यक्रम के तहत लगभग 1.13 लाख शरणार्थियों को अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में बसाया गया।
अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन में ही बनेंगी फ्रांस की क्रूज मिसाइल, इंटरसेप्टर और ग्लाइड बम फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि यूक्रेन को उसकी अपनी जमीन पर मिसाइल और बम बनाने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। पेरिस में आयोजित ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इस फैसले से यूक्रेन की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और हथियारों का निर्माण तेजी से हो सकेगा। नए लाइसेंसिंग समझौतों के तहत यूक्रेन एस्टर-30 एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, एएएसएम ग्लाइड बम और स्कैल्प -ईजी क्रूज मिसाइल का स्थानीय स्तर पर निर्माण करेगा। मैक्रों ने यह भी बताया कि आने वाले हफ्तों में फ्रांस और इटली यूक्रेन को अतिरिक्त एयर डिफेंस बैटरियां और इंटरसेप्टर उपलब्ध कराएंगे। वहीं, 16 राफेल लड़ाकू विमान 2028-29 तक यूक्रेन को मिलने की उम्मीद है। ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ फ्रांस और ब्रिटेन की अगुआई वाला देशों का समूह है, जो यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर काम कर रहा है। रूस ने इस पहल का विरोध किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे “युद्ध को आगे बढ़ाने वाले देशों का गठबंधन” बताया। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीकों के परीक्षण केंद्र में बदल रहे हैं। बुल्गारिया यूक्रेन समर्थक गठबंधन से अलग: PM बोले- युद्ध नहीं, कूटनीति से निकलेगा हल बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा है कि उनका देश यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता देने वाले पश्चिमी देशों के गठबंधन का हिस्सा नहीं है। फ्रांस में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि मजबूत कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए। रादेव ने कहा कि बुल्गारिया यूक्रेन को इस तरह की अतिरिक्त सैन्य सहायता नहीं देता क्योंकि इससे संघर्ष लंबा खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता तनाव कम करने और बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह भी कहा था कि बुल्गारिया यूक्रेन को अब तक 13 सैन्य सहायता पैकेज दे चुका है और उसके पास आगे भेजने के लिए अतिरिक्त सैन्य सामग्री नहीं बची है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया नाटो शिखर सम्मेलन में स्लोवाकिया, हंगरी और चेक गणराज्य सहित कुछ देशों ने अमेरिका के नेतृत्व वाले लगभग 70 अरब यूरो (करीब 80 अरब डॉलर) के नए सैन्य सहायता पैकेज में शामिल होने से इनकार कर दिया। मस्क के खिलाफ आपराधिक जांच की सिफारिश: चुनाव में वोटरों को लाखों डॉलर के चेक देने का मामला
अमेरिका के विस्कॉन्सिन इलेक्शंस कमीशन ने प्रारंभिक तौर पर माना है कि अरबपति कारोबारी इलॉन मस्क ने 2025 के राज्य सुप्रीम कोर्ट चुनाव से पहले मतदाताओं को 10 लाख डॉलर के चेक देकर चुनावी रिश्वत संबंधी कानून का उल्लंघन किया हो सकता है। आयोग ने मामले को ब्राउन काउंटी के जिला अटॉर्नी के पास आपराधिक जांच के लिए भेज दिया है। अभियोजन पक्ष को अब 40 दिनों के भीतर तय करना होगा कि मस्क के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए या नहीं। आयोग ने पिछले सप्ताह मिली दो शिकायतों को 5-1 के बहुमत से आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रस्ताव में कहा गया कि मस्क ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मतदान करने वाले लोगों को 10 लाख डॉलर देने की पेशकश की, जिससे मतदाताओं को चुनाव में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जा सके। 2025 के विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट चुनाव में मस्क ने रिपब्लिकन समर्थित उम्मीदवार ब्रैड शिमेल के समर्थन में कम से कम 2 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। हालांकि शिमेल को डेमोक्रेट समर्थित सुसान क्रॉफर्ड से 10 प्रतिशत अंकों के अंतर से हार मिली। यह चुनाव 10 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च के साथ अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा न्यायिक चुनाव माना गया। मस्क के खिलाफ पहले से एक अलग दीवानी मुकदमा भी लंबित है, जिसमें उन पर वोट खरीदने, अवैध लॉटरी चलाने और चुनावी कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने रिपब्लिकन सीनेटर का ट्रम्प को समर्थन
अमेरिका में रिपब्लिकन सीनेटर जिम बैंक्स ने जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए नया विधेयक पेश किया है। प्रस्ताव में अवैध प्रवासियों को “आक्रमणकारी” बताते हुए उनके अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वत: नागरिकता देने की व्यवस्था खत्म करने की मांग की गई है। यह पहल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त आव्रजन नीति को कानूनी आधार देने की दिशा में नया प्रयास मानी जा रही है। राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद ट्रम्प ने कार्यकारी आदेश जारी कर अवैध या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों की स्वत: नागरिकता समाप्त करने की कोशिश की थी। हालांकि, जून के अंत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को असंवैधानिक करार दिया था। जिम बैंक्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिकी संप्रभुता पर अभूतपूर्व हमला है और देश की सुरक्षा के लिए अवैध प्रवासियों द्वारा आव्रजन व्यवस्था के कथित दुरुपयोग को रोकना जरूरी है। इस मुद्दे पर अन्य रिपब्लिकन सांसद भी सक्रिय हैं। टेनेसी के प्रतिनिधि एंडी ओगल्स जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने के लिए अलग विधेयक पेश कर चुके हैं। वहीं, साउथ कैरोलिना के सीनेटर टिम स्कॉट ने “बर्थ टूरिज्म” पर रोक लगाने के लिए प्रस्ताव रखा है, ताकि विदेशी नागरिक केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका न आ सकें।

Strait of Hormuz : ईरान को ट्रंप की चेतावनी, अमेरिका बनेगा ‘हॉर्मुज का गार्जियन’, मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ा तनाव

iran stops pakistan ship in hormuz

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) दोबारा शुरू करेगा और अब से खुद को 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संरक्षक' के रूप में स्थापित करेगा। ट्रंप ने यह घोषणा Fox News को दिए एक इंटरव्यू और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य हमलों का दौर तेज हो गया है।

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ट्रंप बोले- ईरान की नाकाबंदी फिर होगी लागू

ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि अमेरिका “ईरानी नाकाबंदी” को फिर से लागू कर रहा है, जिसके तहत ईरान के जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों की आवाजाही पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अब से अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का जिम्मा संभालेगा। इसके बदले इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई की जा सके। ट्रंप ने कहा कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय बंदरगाह वाले इलाकों पर हमले किए। इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच चल रही संघर्ष विराम (Ceasefire) वार्ता पर भी संकट गहरा गया है।

donald trump

पहले हुआ था समझौता

दोनों देशों ने पिछले महीने एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लड़ाई रोकने, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने पर सहमति बनी थी। हालांकि, अमेरिका द्वारा नाकाबंदी दोबारा लागू करने की घोषणा से इस समझौते के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसी भी स्थिति में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में अमेरिकी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी सेना ने कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की या व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डाली, तो इसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों को भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अमेरिका को किसी प्रकार का सैन्य या लॉजिस्टिक सहयोग दिया, तो उसे ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाएगा।