Gold silver price: चढ़ रहा सोना, ₹1,303 और महंगा हुआ भाव, चांदी भी हो गई महंगी, जल्दी करें कहीं चूक ना जाएं मौका

Gold silver price: व्यापारियों की ताजा खरीदारी और मजबूत वैश्विक संकेतों के समर्थन से मंगलवार (14 जुलाई) को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। हालांकि बाद के सत्र में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के प्रमुख स्तर से नीचे फिसल गई।

एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोना वायदा ₹1,303 या 0.93% बढ़कर ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। इस बीच, जुलाई डिलीवरी के लिए चांदी वायदा ₹2,946 या 1.35% चढ़कर ₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम हो गई।

बाजार सहभागियों ने इस बढ़त का श्रेय स्थिर हाजिर मांग और घरेलू सर्राफा बाजारों में मजबूती के बीच व्यापारियों द्वारा की गई ताजा पोजीशन को दिया।

भारत में क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?

घरेलू सर्राफा कीमतों को स्थानीय खरीदारी और बढ़ी हुई वैश्विक अनिश्चितता के संयोजन से समर्थन मिल रहा है।इससे पहले वैश्विक सत्र में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाजों पर नाकाबंदी बहाल करने के बाद जियोपॉलिटिकल तनाव फिर से उभरने के कारण सुरक्षित-हेवन मांग के कारण सोने के वायदा भाव में तेजी आई थी, जिससे तेल आपूर्ति और मुद्रास्फीति पर चिंता बढ़ गई थी।

हालांकि, बाद में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने सख्त लहजे में कहा कि अगर मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी और कटौती की भी संभावना है, जिसके बाद सर्राफा ने बढ़त छोड़ दी।

उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों की अपील को कम कर देती हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी पैदावार भी कीमती धातु की कीमतों पर असर डालती है।

इस बीच, सुरक्षित मांग और इसके औद्योगिक उपयोग दोनों के समर्थन से चांदी ने घरेलू व्यापार में सोने से बेहतर प्रदर्शन जारी रखा।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

रिद्धिसिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि शॉर्ट टर्म में सोने की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर रह सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि लगातार मुद्रास्फीति, जियोपॉलिटिकल रिस्क और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति पथ पर अनिश्चितता सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे लगातार टूटने से सोना 3,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी के 58-63 डॉलर प्रति औंस के व्यापक दायरे में रहने की उम्मीद है।

निवेशक अब आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा और पश्चिम एशिया में आगे के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखेंगे। क्योंकि दोनों शॉर्ट टर्म में सोने और चांदी की कीमतों को दिशा देते दिखाई देगें।

Silver Price Today: पिछले हफ्ते 6% टूटने के बाद चांदी आज और भी हुई सस्ती, जानें आज आपके शहर में क्या है रेट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Netweb Share Price: डेटा सेंटर स्टॉक के लिए ₹5000 का टारगेट, BofA ने खरीदने की सलाह दी

Netweb Share Price: विदेशी ब्रोकरेज BofA Securities ने पहली बार डेटा सेंटर कंपनी Netweb Technologies पर कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज ने शेयर को ‘Buy’ रेटिंग दी है। साथ ही ₹5,000 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 14% की संभावित तेजी दिखाता है।

AI से मिल सकता है बड़ा फायदा

BofA का मानना है कि भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है। इसका फायदा Netweb Technologies को मिल सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी इस मौके का फायदा उठाने की मजबूत स्थिति में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Netweb की सबसे बड़ी ताकत NVIDIA के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी है। कंपनी की सुपरकंप्यूटिंग में अच्छी पकड़ है। सरकारी ग्राहकों के साथ भी उसके लंबे समय से मजबूत रिश्ते हैं। यही बातें उसे दूसरी कंपनियों से अलग बनाती हैं।

आगे भी तेज ग्रोथ की उम्मीद

Netweb ने पिछले कुछ सालों में सुपरकंप्यूटिंग बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है। FY20 में उसका मार्केट शेयर सिर्फ 2% था। FY26 तक यह बढ़कर 9% हो गया।

BofA का कहना है कि जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ेगा, उसकी कमाई भी तेजी से बढ़ सकती है। ज्यादा बिक्री होने से लागत पर बेहतर नियंत्रण रहेगा। इससे कंपनी ऊंची महंगाई के दौर में भी अपनी मुनाफेदारी बनाए रख सकती है। ब्रोकरेज ने FY26 से FY29 के बीच कंपनी के रेवेन्यू में 40% CAGR की उम्मीद जताई है।

Netweb Technologies का शेयर मंगलवार को 0.11% की गिरावट के साथ 4,395.10 पर बंद हुआ। इस साल अब तक यह शेयर 40% से ज्यादा चढ़ चुका है।

Netweb का बिजनेस क्या है?

Netweb Technologies हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), AI सर्वर, सुपरकंप्यूटर, डेटा सेंटर और डेटा स्टोरेज सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनी है। कंपनी सरकार, रक्षा क्षेत्र, रिसर्च संस्थानों, IIT-IISc जैसे शैक्षणिक संस्थानों और बड़ी कंपनियों को एडवांस कंप्यूटिंग सिस्टम उपलब्ध कराती है।

यह ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से सर्वर, स्टोरेज, क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करती है। कंपनी का फोकस भारत में तेजी से बढ़ रहे AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर बाजार का फायदा उठाने पर है।

ISM 2.0 : सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का रास्ता साफ, चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 15 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 14 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,100 के नीचे रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ। लगभग 1422 शेयरों में बढ़त हुई,2632 शेयरों में गिरावट आई और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में शामिल शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,श्रीराम फाइनेंस,HDFC लाइफ,टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। जबकि, भारती एयरटेल,अपोलो हॉस्पिटल्स,सन फार्मा,TCS और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा गिरा (2%),इसके बाद निफ्टी PSU बैंक (-1.8%),निफ्टी ऑटो (-1.6%),निफ्टी बैंक (-1.1%) और निफ्टी IT (-1%) रहे। अन्य सेक्टरों में,निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.8%,निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.6%,निफ्टी FMCG 0.6%,निफ्टी मीडिया 0.3% और निफ्टी इंफ्रा 0.3% गिरे।

वहीं, दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा ने 1% की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया,इसके बाद निफ्टी मेटल रहा,जिसमें 0.60% की बढ़त हुई। छोटे-मझोले शेयर भी दबाव में रहे। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1% गिरे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं हैं,जिससे घरेलू इक्विटी पर फिर से दबाव आ गया। इससे यह डर भी पैदा हो गया कि क्या ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट भारत की कॉर्पोरेट कमाई में सुधार को और धीमा कर देगी। रुपये के डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार करने से मुश्किलें और बढ़ गईं। इससे इंपोर्टेड महंगाई की चिंता बढ़ी और अलग-अलग इंडस्ट्रीज में इनपुट कॉस्ट बढ़ने का डर पैदा हो गया।

इसका सबसे ज्यादा असर महंगाई और कॉस्ट-सेंसिटिव सेक्टर पर दिखा। ऑटो,फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर में गिरावट के कारण बाजार नीचे आया। जबकि फार्मा सेक्टर ने इस ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने’डिफेंसिव’शेयरों का सहारा लिया। इससे फार्मा सेक्टर को फायदा हुआ। विदेशी फंड की लगातार निकासी ने भी बाजार में सावधानी का माहौल बनाए रखा और सेंटीमेंट को कमजोर किया। अब सबकी नजरें US फेड चेयर पर हैं,जिनके आने वाले बयान ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं। इस बीच,Q1 अर्निंग्स सीजन तो अच्छा चल रहा है,लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट को कुछ हद तक कमजोर कर दिया है।

इक्विरस वेल्थ में MD और बिज़नेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों,कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू करेंसी में भारी गिरावट के कारण बैंकिंग,IT,ऑटोमोबाइल और रियल्टी शेयरों में भारी बिकवाली हुई,जिससे बेंचमार्क इंडेक्स गिर गए।

US-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। FIIs की ओर से घरेलू इक्विटी में नई बिकवाली के चलते निवेशक इक्विटी में निवेश करते समय सावधानी बरतेंगे और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाएंगे।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि NSE के वीकली ऑप्शन की एक्सपायरी के कारण गैप-डाउन के साथ खुलने के बाद इंडेक्स एक दायरे में ही बना रहा। इसने पिछले दिन के निचले स्तर के आसपास सपोर्ट लिया और गिरती हुई ट्रेंडलाइन के ऊपर बना रहा। इंडेक्स 50 EMA के ऊपर भी बना रहा, जो इसकी अंदरूनी मजबूती को दिखाता है।

शॉर्ट टर्म में,जब तक इंडेक्स 23,950 के ऊपर रहता है,तब तक आउटलुक पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। ऊपर की तरफ यह 24,250–24,300 के जोन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि,23,950 के नीचे बड़ी गिरावट मौजूदा तेजी वाले सेटअप को कमजोर कर सकती है और कंसोलिडेशन का दौर शुरू कर सकती है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में US-ईरान युद्धे से जुड़ी घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और Q1FY27 के अर्निंग्स सीजन की अहम भूमिका होगी। कंपनियों के मज़बूत नतीजों से बाजार को सहारा मिल सकता है,लेकिन जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतें निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।

ISM 2.0 : सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का रास्ता साफ, चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट,वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडलस्टिक पैटर्न’बनाया है,जो ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव दिखाता है। इंडेक्स अपने 200 डे के मूविंग एवरेज के पास भी बंद हुआ है,इसलिए इस सपोर्ट जोन पर नजर रखना ज़रूरी है। इसके अलावा,RSI ने’लोअर टॉप’बनाया है जो ऊपर की ओर बढ़ने की रफ्तार (मोमेंटम) में कमी का संकेत है।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी बैंक के लिए सपोर्ट 56,800–56,900 के जोनन में है। जबकि, तत्काल रेजिस्टेंस 58,200 के आसपास दिख रहा है। मोमेंटम कमजोर होने को देखते हुए,ट्रेडर्स को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए और नई पोजीशन लेने से पहले किसी साफ चाल(डिसाइसिव मूव)का इंतजार करना चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Plan : इस समय बाजार में पोजीशनल ट्रेड से बचें, कुछ समय इंडेक्स में इंट्रा-डे रहें

Trading Plan : निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन कच्चे तेल ने बाजार का खेल बिगाड़ दिया है। निफ्टी 150 प्वाइंट टूटकर 24100 के नीचे फिसल गया है। बैंक निफ्टी भी करीब 750 प्वाइंट नीचे कारोबार कर रहा है। इसमें कल का लो टूटा गया है। इधर मिडकैप और स्मॉलकैप भी बिकवाली आई है। हालांकि, वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में कोई बड़ा उछाल नहीं आया है। रुपये की कमजोरी बाजार की टेंशन फिर बढ़ा रही है। आज रुपये में 56 पैसे की कमजोरी है। कल से लेकर आजतक रुपया 1% टूटा है। इधर वेस्ट एशिया संकट से क्रूड भी 86 डॉलर के पार चला गया है। इसके चलते BPCL,IOCऔर HPCL 2-3 परसेंट फिसले हैं।

रियल्टी और सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है। ये दोनों सेक्टर इंडेक्स करीब दो फीसदी फिसले हैं। साथ ही ऑटो,डिफेंस और NBFCs में भी दबाव है। LTF और श्रीराम फाइनेंस करीब 4 फीसदी गिरावट के साथ वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल है। हालांकि फार्मा और मेटल शेयरों में खरीदारी आई है। नतीजों के बाद HCL TECH में मुनाफावसूली देखने को मिली है। यह शेयर करीब 4 फीसदी से ज्यादा फिसलकर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। उधर अच्छे बिजनेस अपडेट से कॉनकॉर का शेयर करीब 5 फीसदी चढ़ा है।

बाजार: तेल की मार

बाजार पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में गिरावट है,लेकिन यह सधी हुई है। निफ्टी अभी भी कल के निचले स्तर के ऊपर ही है। बैंक निफ्टी ने जरूर कल के लो तोड़े हैं। बैंक निफ्टी अब 20 DEMA के काफी करीब है। ब्रॉडर मार्केट में भी गिरावट है। ADV/DEC 1:2.5 के करीब है। इंडिया VIX में बड़ी तेजी नहीं है। कच्चा तेल $86 के भी पार निकला है। रुपये में तेज गिरावट है। यह 96 के पार निकला है।

बाजार: अब क्या?

बाजार में गिरावट है,घबराहट नहीं है। अगर यही मार्च में हुआ होता तो निफ्टी 400 प्वाइंट गिरता। बाजार में अब डर का फैक्टर नहीं है। बाजार की सोच है कि ये मामला जल्दी ही सुलझेगा। लेकिन एक रिस्क फैक्टर खुल गया है। ऐसे में बैंक निफ्टी की रैली पर रिस्क है। बैंक निफ्टी काफी चल चुका है और अगर 20 DEMA टूटा तो करेक्शन का रिस्क होगा। इस समय बाजार में पोजीशनल ट्रेड्स से बचें। कुछ समय इंडेक्स में इंट्रा-डे रहें। पोजीशन कैरी करना भी है तो हेज के साथ ही करें

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,950-24,000 पर सपोर्ट और 24,150-24,200 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,500-57,700 पर रेजिस्टेंस है।

 

 

Bank Nifty Trend : बैंक निफ्टी में तीन दिन की बढ़त थमी, 1% से ज्यादा टूटा इंडेक्स, केनरा बैंक और कोटक ने लगाई सबसे तगड़ी चपत

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

लखनऊ में शहीद पथ पर बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, नितिन गडकरी ने दिए डीपीआर बनाने के निर्देश

new elevated corridor will be built on Shaheed Path in Lucknow

– योगी सरकार की कानून व्यवस्था और विकास मॉडल की सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की सराहना

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों पर

– शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक बनेगा 23 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

– केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गिनाईं यूपी में भावी योजनाएं

Uttar Pradesh News : लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहीद पथ पर बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साकार होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक भूमि पूजन कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। दोनों वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने योगी सरकार की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। 

 

सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,850 करोड़ रुपए से अधिक की 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। 

 

शहीदपथ पर वाहन चालकों को जाम से मिलेगी राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार थी, तब उनके सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए शहीद पथ का शिलान्यास हुआ था। आज यही शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन चुका है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अब इसके ऊपर एलिवेटेड रोड बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो भी संचालित की जाए, ताकि लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।

ALSO READ: योगी के नेतृत्व में सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

तीन लेयर फ्लाईओवर बनेगा दुनिया के आकर्षण का केंद्र

नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ में प्रस्तावित तीन लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना में आधुनिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों को मजबूती मिलेगी। किसी भी राज्य के विकास की नींव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होती है। पानी, बिजली, परिवहन और संचार व्यवस्था बेहतर होने से उद्योग, व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी व बेरोजगारी कम होती है।

 

लखनऊ-सीतापुर सिक्स लेन हाईवे सहित कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लखनऊ से सीतापुर तक प्रस्तावित छह लेन राजमार्ग को भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तत्काल स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

अगले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपए के विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ के किसान पथ पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा बाईपास, आनंदनगर-महराजगंज बाईपास, पडरौना-तमकुही बाईपास तथा दादरी-लालकुआं छह लेन एलिवेटेड रोड जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गिफ्ट, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, 45 मिनट में होगा सफर

रक्षा मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास पूरे देश में चर्चा का विषय है। किसी भी प्रदेश के विकास की पहली शर्त मजबूत कानून व्यवस्था होती है और योगी सरकार ने यह स्थापित करके दिखाया है। लखनऊ के विकास से जुड़े हर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया और आने वाले समय में लखनऊ के आसपास बड़े उद्योग स्थापित होंगे।

 

यूपी में सीएम योगी ने समाप्त किया गुंडाराजः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत कर लोगों का विश्वास जीता और गुंडाराज को समाप्त किया। किसी भी देश और राज्य के विकास में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं।

सबसे पहली आवश्यकता मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के चार प्रमुख आधार हैं वाटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, जहां ये चारों व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां व्यापार, उद्योग और कारोबार तेजी से बढ़ते हैं।

ALSO READ: भदरसा अब 'भरत नगर', मुख्यमंत्री योगी के फैसले से भरत जी की तपोभूमि को मिला सम्मान

इसके साथ ही पूंजी निवेश आता है। जहां व्यापार, उद्योग और निवेश बढ़ता है, वहां रोजगार का सृजन होता है और जहां रोजगार का निर्माण होता है, वहां गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी स्वतः दूर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। 

Bank Nifty Trend : बैंक निफ्टी में तीन दिन की बढ़त थमी, 1% से ज्यादा टूटा इंडेक्स, केनरा बैंक और कोटक ने लगाई सबसे तगड़ी चपत

Bank Nifty Trend : कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच 14 जुलाई को बैंक निफ्टी इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट आई है। जिससे इसकी लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया है। आज ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई,जो 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते के बाद से सबसे ऊंची कीमत है। सोमवार को अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शिपिंग पर रोक फिर से लागू कर दी और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उधार लेने की लागत बढ़ सकती है,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है और ट्रेजरी से होने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है। इसके चलते बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना है।

बैंक निफ्टी की इस गिरावट में केनरा बैंक,कोटक महिंद्रा बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का योगदान सबसे ज्यादा है। इनमें 2%,1.6% और 1.3% की गिरावट आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और फेडरल बैंक भी उन बैंकों में शामिल थे जिनके शेयरों में गिरावट आई है। फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों श्रीराम फाइनेंस,बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व में 1-2% की कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। 1.25 बजे के आसपास बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी की गिरावट के साथ 57,475 के आसपास कारोबार कर रहा था।

बैंक निफ्टी व्यू

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ,58,700 (जून का हाई) अभी भी एक तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर मजबूती से बंद होता है,तो इससे चल रहे कंसोलिडेशन से ब्रेकआउट की पुष्टि होगी और आने वाले हफ्तों में 59,300 और फिर 60,000 के लेवल की ओर रैली शुरू हो सकती है। अगर बैंक निफ्टी 58,700 के ऊपर नहीं जा पाता है तो इसका मतलब होगा कि पिछले 4 हफ्तों से चल रहा कंसोलिडेशन और जारी रहेगा।

नीचे की तरफ,57,400-57,500 के लेवल के तत्कल सपोर्ट के तौर पर काम करने की उम्मीद है,जो गुरुवार के गैप-अप जोन और सोमवार के निचले स्तर से मेल खाता है। अगला अहम सपोर्ट 56,500 पर है,जहां 20 हफ्ते और 50-हफ्ते के EMA और पिछले हफ्ते का निचला स्तर एक साथ मिलते हैं,जिससे यह एक मजबूत डिमांड जोन बन जाता है।

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा की राय

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 57,500 पर तत्काल सपोर्ट है। जबकि 57,200 अगला अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। ऊपर की तरफ,58,500 मुख्य रेजिस्टेंस है और इस लेवल के ऊपर ब्रेकआउट से नई तेजी आ सकती है। जब तक इंडेक्स सपोर्ट के ऊपर बना हुआ है ट्रेडर्स को गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार की राय

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि कुछ ऐसी मुश्किलें फिर से सामने आ रही हैं जिनका असर जल्द ही भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। अगर तेल में यह तेजी जारी रहती है, तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक हालात पर फिर से खरीब असर पड़ सकता है। BoP (भुगतान संतुलन) की कमजोरी और रुपये पर संभावित असर फिर से ऐसी परेशानियां आ सकती हैं जिनसे बाजार पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि US में 10 ईयर बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.61% हो जाना एक और चिंता की बात है,जिसका असर विदेशी निवेश पर पड़ सकता है। जून में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई है और इसके और बढ़ने की संभावना है। इन चुनौतियों को देखते हुए,निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। तेजी से बदलते जियोपॉलिटिकल और आर्थिक माहौल में निवेश से जुड़े फैसले लेना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। निवेशकों इस लगातार बदलते हालात पर नजर बनाए रखनी चाहिए और खासकर कच्चे तेल की कीमतों के मामले में स्थिति साफ होने का इंतजार करना चाहिए।

 

 Stock Of The Day : ब्लॉक डील के बाद बायोकॉन में आई शानदार तेजी, 6% से ज्यादा चढ़कर वायदा का टॉप गेनर बना स्टॉक

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

“₹198 करोड़ की संपत्ति, 475 ग्राम सोना और कोई कार नहीं…” जानें प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव के हलफनामे में क्या जानकारी दी?

Prashant Kishor: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए अपने नॉमिनेशन पेपर के साथ दाखिल हलफनामे में लगभग 198 करोड़ रुपये की पारिवारिक संपत्ति की जानकारी दी है। इस खुलासे के साथ ही पहली बार चुनाव लड़ रहे पूर्व चुनाव रणनीतिकार की वित्तीय संपत्ति सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।

हलफनामे के अनुसार, किशोर ने अपने नाम पर 96.06 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने 101.93 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। इस तरह, परिवार की कुल घोषित संपत्ति लगभग 197.99 करोड़ रुपये है।

हलफनामे से पता चलता है कि परिवार की चल संपत्ति की कीमत 111.78 करोड़ रुपये है, जबकि अचल संपत्ति की कीमत 86.29 करोड़ रुपये है। किशोर की अपनी चल संपत्ति 22.19 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी की चल संपत्ति 89.51 करोड़ रुपये बताई गई है।

बता दें कि किशोर की घोषित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उनका इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो है। उन्होंने ‘वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ में 100% कंट्रोलिंग हिस्सेदारी की घोषणा की है, जिसकी कीमत लगभग 95.26 करोड़ रुपये है। हलफनामे में 7.36 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और मार्केट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट का भी जिक्र है।

इस जानकारी में किशोर के नाम पर ₹65,570 और उनकी पत्नी के नाम पर ₹1,95,200 नकद होने की बात कही गई है। इसमें शेयरों, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और इंश्योरेंस पॉलिसी में किए गए निवेश का भी जिक्र है।

475 ग्राम सोना और कोई कार नहीं

इसके अलावा, अचल संपत्ति के तौर पर, किशोर ने बिहार के रोहतास जिले में एक बंद पड़ी राइस मिल की जानकारी दी है, जिसकी कीमत लगभग ₹9.75 करोड़ है। उन्होंने खुद खरीदी गई लगभग ₹59.25 करोड़ की रिहायशी संपत्तियों की भी जानकारी दी है, जिनमें पाटलिपुत्र कॉलोनी, वसंत विहार और गाजियाबाद की संपत्तियां शामिल हैं। वहीं, विरासत में उन्हें मिली रिहायशी संपत्तियों की कीमत लगभग ₹14.62 करोड़ है।

हलफनामे में परिवार की चल संपत्ति के तौर पर 475 ग्राम सोना होने की जानकारी भी दी गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि किशोर पर लगभग ₹5.77 करोड़ की देनदारी है और उनके पास कोई कार नहीं है।

8 आपराधिक मामलों की दी जानकारी

कानूनी मामलों की बात करें तो किशोर ने अपने खिलाफ चल रहे आठ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इन मामलों में आपराधिक मानहानि और गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जमा करने जैसे आरोप शामिल हैं। हलफनामे में बताया गया है कि ये मामले बिहार के अलग-अलग हिस्सों, जैसे पटना और बेतिया के पुलिस स्टेशनों में दर्ज हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि उन्हें इनमें से किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।

बता दें कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को होगा, जबकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 जुलाई है। इस चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह प्रशांत किशोर का पहला चुनाव है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि पटना की इस अहम सीट पर जन सुराज पार्टी बीजेपी को कितनी कड़ी टक्कर दे पाती है।

यह भी पढ़ें: UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन, जानें क्या है विदेश मंत्री जयशंकर का सुपर प्लान

26 लाख रुपये की नौकरी, फिर भी परेशान गुरुग्राम इंजीनियर, पत्नी को लेकर कही ये बात वायरल

गुरुग्राम में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। PayU में काम करने वाले इस इंजीनियर ने अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य होने की वजह से उन्हें कई बार मानसिक और आर्थिक दबाव महसूस होता है।

हालांकि उन्होंने अपनी पत्नी को एक अच्छी मां बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि अगर उनकी पत्नी ज्यादा महत्वाकांक्षी होतीं और आर्थिक रूप से योगदान देतीं तो परिवार की जिम्मेदारियां आसान हो सकती थीं।

₹26 लाख सालाना कमाई, फिर भी बचत सिर्फ ₹15 हजार

सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय इंजीनियर की सालाना आय करीब 26 लाख रुपये है। टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद उनकी मासिक इन-हैंड सैलरी लगभग 1.75 लाख रुपये बताई गई।

उन्होंने दावा किया कि इतने वेतन के बावजूद घर के खर्चों के बाद हर महीने करीब 15 हजार रुपये ही बच पाते हैं। यही वजह है कि वह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

गुरुग्राम की महंगी जिंदगी का बताया हिसाब

इंजीनियर ने अपने मासिक खर्चों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सेक्टर-56 में 2BHK फ्लैट का किराया करीब 40 हजार रुपये है। इसके अलावा राशन, बिजली, घरेलू मदद और अन्य खर्चों पर करीब 30 हजार रुपये खर्च होते हैं।

वहीं कार की EMI करीब 16 हजार रुपये और रांची में रहने वाले माता-पिता की मदद के लिए वह हर महीने 20 हजार रुपये भेजते हैं।

बेटी की परवरिश पर खर्च 50 हजार रुपये

उन्होंने बताया कि बेटी की स्कूल फीस, कपड़े, खिलौने, मेडिकल जरूरतें और हॉबी क्लास जैसी चीजों पर हर महीने लगभग 50 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। उनका कहना है कि बच्चे की जिम्मेदारी और घर के अन्य खर्चों को संभालते हुए कई बार वह खुद को दबाव में महसूस करते हैं।

tech (1)पत्नी की तारीफ भी की, लेकिन जताई अधूरी उम्मीद

इंजीनियर ने कहा कि उनकी पत्नी निशा एक अच्छी मां हैं और बेटी की अच्छी देखभाल करती हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि शादी से पहले उनकी पत्नी अमिटी यूनिवर्सिटी से MBA कर रही थीं, लेकिन शादी के बाद पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी।

उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि पत्नी आगे चलकर कोई कोर्स पूरा करेंगी, नौकरी करेंगी या घर से कोई छोटा काम शुरू करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

काश पार्टनर ज्यादा महत्वाकांक्षी होता…बयान पर मचा विवाद

इंजीनियर ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि उन्होंने ऐसे साथी से शादी की होती जो जीवन में आगे बढ़ने और आर्थिक योगदान देने को लेकर ज्यादा इच्छुक होता।

उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया। कुछ लोगों ने उनकी परेशानी को समझा, जबकि कई यूजर्स ने इसे पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करने वाला नजरिया बताया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी पति-पत्नी की जिम्मेदारियों पर बहस

कई यूजर्स ने कहा कि घर संभालना, बच्चे की देखभाल करना और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना भी एक बड़ा योगदान है, जिसकी आर्थिक कीमत अक्सर नहीं आंकी जाती।

एक यूजर ने लिखा कि लोग अपनी जीवनशैली को नियंत्रित नहीं करते और बाद में बचत कम होने की शिकायत करते हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि 1.75 लाख रुपये की मासिक आय के बावजूद परेशानी महसूस होना खर्चों की योजना से जुड़ा मुद्दा हो सकता है।

कुछ लोगों ने दी फाइनेंशियल प्लानिंग की सलाह

कुछ यूजर्स का मानना था कि समस्या कम कमाई नहीं बल्कि खर्चों के सही प्रबंधन की है। उन्होंने सुझाव दिया कि बेहतर बजटिंग और निवेश योजना से आर्थिक दबाव कम किया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इंजीनियर की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार में योगदान सिर्फ पैसे से नहीं मापा जा सकता।

एक वायरल पोस्ट ने उठाया बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है कि शादी में आर्थिक जिम्मेदारी, करियर, घरेलू काम और बच्चों की परवरिश को किस तरह संतुलित किया जाए। सोशल मीडिया पर बहस जारी है कि परिवार में योगदान की असली परिभाषा क्या होनी चाहिए सिर्फ कमाई या फिर हर तरह की जिम्मेदारी निभाना।

तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी कैदी ने मांगी खुद खाना बनाने की इजाजत, कोर्ट पहुंचा मामला

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

WhatsApp Image 2026-07-14 at 12.12.10

वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।