पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों के लिया बड़ा फैसला किया है। पीएम मोदी ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल भेजे जा चुके हैं और ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट भी बनाई गई हैं। उन्होंने बताया कि नंदन नीलेकणी की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी।
#WATCH | ‘नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स’, परीक्षा सुधारों पर PM मोदी का बहुत बड़ा ऐलान#PMModi #NandanNilekani #ExamReforms #BJP pic.twitter.com/Z0S5iso0ql
— Moneycontrol Hindi (@MoneycontrolH) July 26, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार संसद में एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि आने वाली सभी परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकें।
कौन हैं नंदन निलेकणि
नंदन निलेकणि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज उद्यमी हैं। उन्हें इन्फोसिस के सह-संस्थापक और आधार कार्ड के जनक के रूप में जाना जाता है। वो 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के CEO और MD रहे। बाद में 2017 में कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी लौटे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 में नंदन नीलेकणि को UIDAI प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। UIDAI को ‘डिजिटल इंडिया’ को आकार देने में एक अहम कदम माना जाता है। आज, आधार को दुनिया भर में सबसे बड़े बायोमेट्रिक सिस्टम के तौर पर पहचाना जाता है।
8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। साथ ही आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया गया। आयोग करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स के वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। इसके बाद सरकार को नई सिफारिशें देगा।
अलग-अलग राज्यों में हो रही बैठकें
अभी आयोग देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन, यूनियन और महासंघ अपनी मांगें रख रहे हैं। आयोग उनके सुझाव और ज्ञापन भी ले रहा है।
आने वाली बैठकें
- दिल्ली: 7 और 10 अगस्त 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 31 जुलाई)
- चेन्नई: 7 और 8 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)
- पुडुचेरी: 9 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)
कब आएगी आयोग की रिपोर्ट?
सरकार ने नवंबर 2025 में आयोग का गठन किया था। उम्मीद है कि आयोग 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा।
जुलाई 2026 का DA कब बढ़ेगा?
केंद्र सरकार हर साल दो बार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाती है। जनवरी 2026 के लिए DA में 2% की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद कुल DA 60% हो गया।
अब कर्मचारियों की नजर जुलाई 2026 के DA पर है। पेंशन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका ऐलान आमतौर पर सितंबर में होता है। हालांकि, कुछ बार इसमें देरी होकर अक्टूबर भी हो सकता है। जुलाई 2026 का DA मई और जून 2026 के AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होगा।
पश्चिम बंगाल में भी बना नया वेतन आयोग
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने 22 जुलाई को 7वें राज्य वेतन आयोग का गठन किया। इसके साथ आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस भी जारी किया गया। यह आयोग राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और दूसरी सुविधाओं की समीक्षा करेगा।
कौन बने आयोग के अध्यक्ष?
सरकार ने अतनु चक्रवर्ती (रिटायर्ड IAS) को आयोग का अध्यक्ष बनाया है। वह पहले वित्त मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं। आयोग का मुख्यालय कोलकाता में होगा। इसे गठन की तारीख से 6 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।
किन बातों पर होगा फैसला?
आयोग कर्मचारियों के पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर, सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और नए वेतन ढांचे को लागू करने के तरीके का अध्ययन करेगा। इसके बाद सरकार विस्तृत आदेश जारी करेगी।
DA में भी मिली बड़ी बढ़ोतरी
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA और DR में 20% की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद राज्य कर्मचारियों का कुल DA और DR बढ़कर बेसिक सैलरी का 38% हो गया।
Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कौन-सी पेंशन स्कीम सबसे बढ़िया? समझिए पूरा हिसाब
नीट पेपर लीक मामले को लेकर कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव के बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं और भत्ते दिए जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य होने के साथ-साथ सांसद भी होते हैं। ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित वेतन, विभिन्न प्रकार के भत्ते और कई आधिकारिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
आइए जानते हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने 1 लाख रुपये बेसिक सैलरी मिलती है।
इसके अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते भी दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: अपने संसदीय क्षेत्र में जनता से संपर्क और क्षेत्रीय कामकाज के लिए हर महीने 70,000 रुपये।
- कार्यालय भत्ता: कार्यालय चलाने, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए हर महीने 60,000 रुपये।
- दैनिक भत्ता: संसद या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने पर 2,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को मिलने वाली अन्य सुविधाएं
- सरकारी आवास: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में सरकारी बंगला दिया जाता है। इस आवास के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। इसके रखरखाव और अन्य जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी सरकार उठाती है।
- सरकारी गाड़ी और सुरक्षा: आधिकारिक कामकाज के लिए मंत्री को सरकारी कार, ड्राइवर और ईंधन की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन के आधार पर उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत के अनुसार पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ), एस्कॉर्ट वाहन और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं।
- यात्रा की सुविधा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सरकारी काम के लिए पूरे देश में यात्रा करने की सुविधा मिलती है। इसमें हवाई यात्रा के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास और ट्रेन में फर्स्ट एसी से सफर करने की व्यवस्था शामिल होती है। सरकारी नियमों के अनुसार, पात्र परिवार के सदस्यों को भी यात्रा से जुड़ी कुछ सुविधाएं मिल सकती हैं।
- चिकित्सा सुविधा: केंद्रीय मंत्री और उनके आश्रित परिवार के सदस्य सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत इलाज की सुविधा प्राप्त करते हैं। इस योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
- कार्यालय और संचार सुविधाएं: सरकार मंत्री की मदद के लिए निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट), सचिव और अन्य सहयोगी कर्मचारी उपलब्ध कराती है। इसके अलावा सरकारी आवास और कार्यालय में टेलीफोन, इंटरनेट तथा सरकारी कामकाज के लिए जरूरी अन्य संचार सुविधाएं भी दी जाती हैं।
नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंत की बेटी के शामिल होने के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”हो सकता है वो (कैबिनेट मंत्री की बेटी) अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को न मानती हों, इसके लिए मेरे कैबिनेट सहयोगी को ट्रोल नहीं किया जाना चाहिएय़” बता दें कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया कि दिबिसा महंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने की ये अपील
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की कि मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के राजनीतिक विचारों के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की अपनी अलग सोच और राय हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।” अपना उदाहरण देते हुए हिमंत सरमा ने कहा, “कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।”
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बेटे या बेटी के राजनीतिक विचारों और उनके फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता की ओर से लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।”
गुवाहाटी में भी हुआ था प्रदर्शन
गुवाहाटी में यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में पारदर्शिता की मांग के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।इस पूरे विवाद पर मंत्री केशव महंता की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
Retirement Planning: रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। आज लोगों के पास कई विकल्प हैं। कोई NPS में निवेश करता है, कोई PPF में पैसा जमा करता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF है। वहीं, कम आय वाले लोगों के लिए Atal Pension Yojana (APY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) जैसी योजनाएं भी हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सबसे बेहतर स्कीम कौन-सी है? इसका जवाब एक नहीं है। यह आपकी नौकरी, आय, उम्र और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।
स्कीम किसके लिए सबसे बड़ा फायदा
| स्कीम | किसके लिए | सबसे बड़ा फायदा |
| NPS | सभी भारतीय नागरिक | बड़ा रिटायरमेंट फंड और टैक्स छूट |
| EPF | नौकरीपेशा कर्मचारी | कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान |
| PPF | सभी भारतीय नागरिक | पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न |
| APY | कम आय वाले लोग | ₹1,000 से ₹5,000 तक गारंटीड पेंशन |
| PM-SYM | असंगठित क्षेत्र के कामगार | ₹3,000 मासिक गारंटीड पेंशन, सरकार भी बराबर योगदान देती है |
| UPS | केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी | तय शर्तों पर निश्चित पेंशन |
NPS: लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका
अगर आपकी उम्र 20 से 45 साल के बीच है और आप लंबे समय तक निवेश कर सकते हैं, तो National Pension System (NPS) अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश होता है। इसलिए लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, रिटर्न तय नहीं होता।
मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है और आप 60 साल की उम्र तक निवेश करते हैं, तो आपका कुल निवेश ₹18 लाख होगा। वहीं, अनुमानित फंड करीब ₹1.13 करोड़ बन सकता है।
रिटायरमेंट के समय करीब ₹68 लाख (60%) टैक्स-फ्री निकाले जा सकते हैं। बाकी करीब ₹45 लाख से एन्युटी खरीदनी होगी। इसी से हर महीने पेंशन मिलेगी।
EPF: नौकरीपेशा लोगों की मजबूत बचत
अगर आप नौकरी करते हैं, तो EPF आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे मजबूत नींव है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों हर महीने योगदान करते हैं। सरकार हर साल ब्याज भी देती है।
मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 है। ऐसे में कर्मचारी और कंपनी मिलाकर हर महीने करीब ₹9,600 EPF खाते में जमा हो सकते हैं। अगर 30 साल तक नियमित योगदान होता है, तो रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड तैयार हो सकता है।
PPF: बिना जोखिम वालों के लिए
अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो Public Provident Fund (PPF) अच्छा विकल्प है। इसमें सरकार ब्याज देती है। ब्याज और मैच्योरिटी दोनों टैक्स-फ्री रहते हैं।
अगर आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं और ब्याज दर 7.1% रहती है, तो 15 साल बाद करीब ₹40 लाख का फंड बन सकता है। जरूरत पड़ने पर इस खाते को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
APY : कम आय वालों के लिए बेहतर
अगर आपकी आय कम है और आप गारंटीड पेंशन चाहते हैं, तो Atal Pension Yojana (APY) अच्छा विकल्प हो सकती है। इसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिलती है। जितनी कम उम्र में योजना से जुड़ेंगे, उतना कम योगदान देना होगा।
मान लीजिए आपकी उम्र 25 साल है और आप ₹5,000 महीने की पेंशन चाहते हैं। ऐसे में आपको करीब ₹376 महीने जमा करने होंगे। 60 साल के बाद आपको तय पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी।
PM-SYM : रेहड़ी पटरी या मजदूरी वालों के लिए
अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे रेहड़ी-पटरी लगाते हैं, मजदूरी करते हैं या छोटे दुकानदार हैं, तो प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) भी अच्छा विकल्प है। इस योजना में 60 साल की उम्र के बाद ₹3,000 महीने की गारंटीड पेंशन मिलती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जितना पैसा आप जमा करते हैं, उतना ही पैसा सरकार भी जमा करती है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 30 साल है, तो आपको हर महीने ₹100 जमा करने होंगे। सरकार भी ₹100 जमा करेगी। यानी हर महीने कुल ₹200 खाते में जमा होंगे। 60 साल की उम्र के बाद आपको ₹3,000 महीने की पेंशन मिलेगी। अगर पेंशनधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को 50% फैमिली पेंशन मिलती है।
UPS: सरकारी कर्मचारियों के लिए नया विकल्प
अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो Unified Pension Scheme (UPS) भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
इस योजना में तय शर्तें पूरी होने पर रिटायरमेंट के बाद आखिरी 12 महीने की औसत बेसिक सैलरी का 50% तक पेंशन मिल सकती है। इससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनी रहती है।
आखिर कौन-सी स्कीम सबसे बेहतर?
- अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं, तो EPF और NPS का कॉम्बिनेशन सबसे मजबूत माना जाता है। EPF सुरक्षित बचत देता है, जबकि NPS लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकता है।
- अगर आप खुद का कारोबार करते हैं, तो NPS और PPF अच्छा विकल्प हो सकता है। एक तरफ बेहतर ग्रोथ की संभावना रहती है, तो दूसरी तरफ सुरक्षित और टैक्स-फ्री बचत भी होती है।
- अगर आपकी आय कम है या आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, तो APY और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी योजनाएं रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का सहारा बन सकती हैं।
- अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो UPS पर भी विचार कर सकते हैं।
रिटायरमेंट के लिए कितना फंड होना चाहिए?
एक आसान नियम है। रिटायरमेंट के बाद हर महीने जितना खर्च चाहिए, उसका कम से कम 200 से 250 गुना फंड बनाने की कोशिश करें।
मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹20,000 खर्च होगा। ऐसे में कम से कम ₹50 लाख से ₹60 लाख का रिटायरमेंट फंड बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि, महंगाई को देखते हुए इससे बड़ा फंड तैयार करना हमेशा बेहतर रहेगा।
₹2 लाख सैलरी, नो लोन और अच्छी सेविंग्स… फिर भी 26 साल के युवक को क्यों लगता है कि वह गरीब है
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
Pralhad Joshi: केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बीच उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक अनुभव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मोदी सरकार में उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से संभाली हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। अब उनके सामने देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लंबित सुधारों को गति देने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।
प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। संसद में विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाने, विधेयकों को आगे बढ़ाने और जटिल राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के कारण उन्हें सरकार का अनुभवी रणनीतिकार माना जाता है।
शिक्षा मंत्रालय के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय का दायित्व मिलने के बाद जोशी की सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना होगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।
इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने, नए कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर रहेगा फोकस
संकट प्रबंधन के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न प्रावधानों को लागू करना, उच्च शिक्षा में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि शिक्षा मंत्रालय की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और दीर्घकालिक सुधार योजनाओं पर किसी तरह का असर न पड़े और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले समय पर लिए जाएं।
नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार 25 जुलाई को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।
‘विनम्रता के साथ जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं’
प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।”
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”
इससे पहले, देशभर में CJP के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ चुनावी गठबंधन की इच्छा जताई है। मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से अपील की कि चुनाव के बाद अफसोस करने के बजाय अभी से बातचीत शुरू करें। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर कोई खास सकारात्मक संकेत नहीं मिले। पार्टी के एक सांसद ने कहा कि दोनों दलों के बीच गठबंधन होना फिलहाल काफी मुश्किल नजर आता है।
असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव को भेजा फ्रेंड रिक्वेस्ट!
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करने को तैयार है। ओवैसी ने कहा, “हम नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर से सरकार बनाए। मैं हाथ मिलाने के लिए तैयार हूं और गठबंधन करने को भी तैयार हूं। अभी बातचीत का सही समय है। चुनाव खत्म होने के बाद पछताने से कोई फायदा नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ कभी नहीं रही और आगे भी नहीं रहेगी। उनके मुताबिक, उनकी लड़ाई सम्मान, अधिकार और न्याय के लिए है। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर अखिलेश यादव के साथ बैठकर गठबंधन पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।
यूपी चुनाव से पहले बड़ी पक रही सियासी खिचड़ी
विपक्ष के वोट बंटने की आलोचना पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की राजनीति किसी धर्म के विरोध पर नहीं, बल्कि न्याय, समानता और समाज के पिछड़े व वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई पर आधारित है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के भीतर ओवैसी के इस प्रस्ताव को ज्यादा समर्थन नहीं मिला। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली राजनीति में विश्वास करती है। लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एआईएमआईएम के साथ चुनावी गठबंधन होना फिलहाल आसान नहीं दिखता।
समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, “समाजवादी पार्टी हमेशा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति करती रही है। जहां तक असदुद्दीन ओवैसी का सवाल है, उनकी अपनी अलग राजनीतिक सोच है और वह उसी पर आगे बढ़ते हैं। ऐसे में उनके साथ चुनावी गठबंधन होना फिलहाल काफी मुश्किल नजर आता है।” इस बीच, गुरुवार को असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और अपनी कमियों की जिम्मेदारी से बच रही है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि सरकार का रवैया युवाओं के प्रति उपेक्षापूर्ण है। उनका आरोप था कि सरकार युवाओं की बात सुनने और उनसे संवाद करने के बजाय उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपना शौर्य दिखाया था, सपा सरकार वहां मुगल म्यूजियम बना रही थी। हमने कहा, उत्तर प्रदेश की जनता का पैसा किसी आक्रमणकारी के नाम पर म्यूजियम नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रनायकों के नाम पर म्यूजियम बनेगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर भव्य म्यूजियम के निर्माण का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। सीएम ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण नोड आगरा के अंदर विकसित करने जा रहे हैं।
सीएम ने 53 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आगरा में आगरा उत्तर, आगरा ग्रामीण और आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों के लिए 342 करोड़ रुपए से अधिक की 53 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का स्वागत 'जय श्री राम' एवं 'भारत माता की जय' के नारों के साथ गदा भेंट कर किया गया। इस दौरान उन्होंने स्कूली छात्रों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट्स दी। साथ ही अन्य स्टॉल्स का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने नन्हे शिशुओं को गोद में लेकर दुलारा, उन्हें तिलक लगाया और खिलौने भेंट किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मुझे ब्रजभूमि में आगरा की इस पौराणिक और महाराजा सूरजमल की शौर्य एवं पराक्रम की इस धरा पर एक बार फिर से आने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस धरा को नमन करते हुए कहा कि जब तीन महीने पहले जब मैं आया था, तब 6,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का अवसर मुझे प्राप्त हुआ था। आज एक बार फिर से विधानसभाओं के कार्यक्रम की श्रृंखला में मुझे आगरा की इन तीन विधानसभाओं के साथ संवाद बनाने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
आगरा ने 2022 और 2024 में बीजेपी को अपना आशीर्वाद दिया
सीएम ने आगरा की जनता जनार्दन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगरा ने 2022, 2024 में डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी को अपना आशीर्वाद दिया है। इसका परिणाम यह है कि आगरा ने जो सोचा, उससे पहले डबल इंजन सरकार उस योजना को लेकर आगरा के अंदर आ गई। आज आगरा स्मार्ट सिटी के साथ-साथ सेफ सिटी के एक नए मॉडल की तरफ आगे बढ़ रहा है। आगरा का यह मॉडल अभी तीन दिन पहले माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद तो और भी उसका उज्ज्वल पक्ष हम सबके सामने आया है। 468 औद्योगिक इकाइयों के एनओसी से जुड़े हुए कार्यक्रम टीटीजेड के नाते जो पेंडिंग पड़े हुए थे, उन सबको स्वीकृति मिल गई। यानी अब आगरा में उद्योग लगने से कोई रोकेगा नहीं, कोई रोक भी नहीं पाएगा।
आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि आगरा में हम इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। अब आगरा एक बार ब्रजभूमि के औद्योगिक गतिविधियों का ही नहीं, टूरिज्म के भी एक नए केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। बेहतरीन कनेक्टिविटी हो गई है। आगरा के अंदर हर प्रकार की कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करने की दिशा में डबल इंजन सरकार ने जो कार्य प्रारंभ किया, आज वह आप सबके सामने है। पेरू का इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर भारत के अंदर कहीं खुलना था, हम लोगों ने कहा कि आगरा में हम जमीन उपलब्ध करवाते हैं, और अब इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर ने यहां पर सफलतापूर्वक काम करना प्रारंभ कर दिया है। यहां के अन्नदाता किसानों को लाभ होगा, किसान के उत्पाद को वैल्यू एडिशन मिलेगा, और कई गुना दाम मिलने के बाद अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे उनके चेहरे पर खुशहाली आएगी।
ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसे कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से टीटीजेडी के कारण लंबित पड़ी विकास परियोजनाओं को उच्चतम न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब आगरा को स्मार्ट, सेफ और फ्यूचर रेडी सिटी के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अब शहर में मल्टी लेवल पार्किंग, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसे कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जाएंगे। आगरा के विकास के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा किसानों की समस्याएं उठाए जाने पर सरकार ने उनका समाधान निकाला है। किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिले, इसके लिए सर्किल रेट बढ़ाने की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां नए मूल्य के अनुरूप भुगतान संभव नहीं होगा, वहां सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगी और किसी भी किसान को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
10 नई टाउनशिप विकसित करने को मंजूरी दी गई
सीएम ने कहा कि आगरा से आने वाले विकास प्रस्तावों को सरकार प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दे रही है। इसी क्रम में ग्रेटर आगरा परियोजना के तहत करीब 5,200 करोड़ रुपये की लागत से 10 नई टाउनशिप विकसित करने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा आगरा-ग्वालियर रोड पर 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अटलपुरम टाउनशिप विकसित की जा रही है, जहां करीब 10 हजार परिवारों के लिए आवास और व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। साथ ही ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत आगरा के लेदर उद्योग के बाद अब पेठा को भी वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।
500 महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल के निर्माण की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास से जुड़ी ऐतिहासिक कोठी के अधिग्रहण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बटेश्वर धाम, कैलाश मंदिर, गुरु का ताल, गीत गोविंद वाटिका, अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली बटेश्वर, फतेहपुर सीकरी और सौरीपुर जैन तीर्थ के विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगरा में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की स्मृति में 500 महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने स्वीकृति देने के साथ बजट भी जारी कर दिया है।
आगरा में विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगरा में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में पुल, फ्लाईओवर, सड़कों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, नए कॉलेज और विश्वविद्यालयों का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जो प्रदेश में सरकार चला रहे थे, वे सिर्फ अपने विकास में व्यस्त थे। जनता का पैसा सैफई सिंडीकेट की लूट-खसोट और डकैती का माध्यम बन गया था।
सपा और कांग्रेस पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उससे पहले कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में नौजवानों की नौकरियों में भ्रष्टाचार, गरीबों की योजनाओं में अनियमितता और किसानों के हितों की उपेक्षा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के कारण प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ, किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हुए तथा बेटियां और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके और बिना किसी भेदभाव के गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
यूपी में 9 सालों में 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार बिना किसी भेदभाव के गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं और समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। पिछले एक वर्ष में केंद्र सरकार ने 12 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों में नौ लाख युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी है। अब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा सहित प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को समान अवसर मिल रहे हैं। अन्यथा इससे पहले सैफई सिंडीकेट उसमें कुंडली मारकर बैठ जाता था। चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली करके उस पूरे कार्यक्रम को इतना विवादित कर देते थे कि पूरा का पूरा अभियान फेल हो जाता था। न्यायालय को स्टे करना पड़ता था।
2017 से पहले के मुख्यमंत्री 12 बजे सोकर उठते थे
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। जो भी उनकी सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, उसके लिए केवल दो ही जगह हैं, जेल या जहन्नुम। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास विकास के लिए न समय था, न सोच और न ही जनप्रतिनिधियों तथा जनता से संवाद की इच्छा। जहां पर मुख्यमंत्री 12 बजे सोकर उठता हो, 2 बजे तक तैयार होता हो, 5 बजे जिम चला जाता हो और 7 बजे के बाद अपनी मित्र मंडली के साथ मौज-मस्ती में लिप्त हो जाता हो, वहां का तो भगवान ही मालिक था। पहले प्रदेश के हर जिले में माफिया सक्रिय थे, थाने और तहसीलें गुंडों के प्रभाव में थीं तथा प्रदेश अराजकता, दंगों और कर्फ्यू के माहौल से जूझ रहा था।
आज यूपी दंगा, कर्फ्यू और माफियाराज से मुक्त होकर विकास की नई पहचान बन चुका
मुख्यमंत्री ने कहा आज उत्तर प्रदेश दंगा, कर्फ्यू और माफियाराज से मुक्त होकर विकास और सुशासन में नई पहचान बना चुका है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है और विकास की गति तेज हुई है। आगरा में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं इसी विकास यात्रा का हिस्सा हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी आगरा को 6,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार बुलेट ट्रेन की गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और आगरा को स्मार्ट, सेफ एंड फ्यूचर रेडी सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के उत्साह की सराहना करते हुए आगरा ग्रामीण, आगरा उत्तरी और आगरा दक्षिण के नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, टैबलेट व चाबी वितरित किए
-राघव शर्मा, डॉली त्यागी और चेतना राणा (स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत टैबलेट)
-सुनीता (चमड़ा उत्पाद के लिए टूल किट)
-सचिन कुमार, राम प्रकाश पचौरी (कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत चाबी)
-उपासना (प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चाबी)
-योगेश कुमार, मलखान सिंह (आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड)
-अमित गर्ग (66 लाख रुपए का चेक)
-शोभित बंसल, राजकुमार भगत, चित्रा चौहान (10 लाख रुपए का चेक)
-पुष्पा, नंद किशोर जैन (50 हजार रुपए का चेक)
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य, मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, मंत्री धर्मवीर प्रजापति, भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरनलाल लोधी, महापौर हेमलता दिवाकर, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, सांसद नवीन जैन, सांसद राजकुमार चाहर, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, धर्मपाल सिंह, डॉ. जी.एस. धर्मेश, चौधरी बाबूलाल, भगवान सिंह कुशवाहा, छोटेलाल वर्मा, रानी पक्षालिका सिंह, विधान परिषद सदस्य विजय शिवहरे, विधान परिषद सदस्य मानवेंद्र प्रताप सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया, महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।
अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।
प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।
Yes, but should have done it before the streets were held hostage. Now it seems supporters will not be heard, but “cockroaches” on streets will! https://t.co/OGwcUXxkO8
— Ranvir Shorey (@RanvirShorey) July 25, 2026
जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”
हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।
फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।
प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।

