कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? जानिए उनकी पढ़ाई और पूरा राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे कई बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

कितने पढ़े लिखे हैं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की पढ़ाई की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि प्रह्लाद जोशी ने कला (आर्ट्स) विषय से पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जीवन और संसदीय कामकाज का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब केंद्र सरकार कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है।

इस कॉलेज से की है पढ़ाई

प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा कर्नाटक के हुब्बल्ली में पूरी की। इसके बाद उन्होंने के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यहां से कई प्रमुख राजनेता, अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पढ़ाई कर चुके हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2004 से हैं लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब तक पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया है और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जब कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने उनकी कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती बढ़ाने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में लाने की तैयारी भी की जा रही है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या? सोमवार को बड़ा कदम उठा सकती है सरकार, फुल डिटेल जानिए

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है। वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने जहां राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। वहीं इस बड़े घटनाक्रम के साथ ही दो एक सवाल तेजी से तैरने लगे हैं कि अब सरकार का अगला कदम क्या होगा। केंद्र सरकार सोमवार 27 जुलाई को एक और बड़े कदम की ओर बढ़ती दिख रही है।

ये विधेयक लाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए कानून का मकसद संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार यह विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है।

विधेयक में कड़ी सजा का प्रवधान 

विधेयक के मसौदे में पेपर लीक कराने या सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, इस कानून के तहत दर्ज मामलों का ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरा करने का भी प्रस्ताव है।

बनाए जाएंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रस्तावित विधेयक में यह भी कहा गया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक और परीक्षा में नकल जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके। इसके अलावा, सरकार विशेष जांच इकाइयां (स्पेशलाइज्ड एनफोर्समेंट यूनिट्स) बनाने का भी प्रस्ताव लेकर आई है। इनके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित कर सकेगी, जो इन मामलों की पूरी जांच की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर इस कदम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद से पास कराने की कोशिश करेगी। हालांकि, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मंत्रिमंडल को दी गई जानकारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई से जुड़े नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मौजूदा नियमों की तुलना में पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए और कड़ी सजा का प्रावधान करना है। इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार अगले सप्ताह संसद में ऐसा विधेयक पेश करेगी, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान होंगे।

क्या अब जंतर-मंतर पर नहीं दिखेंगे अभिजीत दिपके? अस्पताल से बोले- ‘सुबह-शाम चढ़ रही है आईवी ड्रिप, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान…’

Abhijeet Dipke Diagnosed With Typhoid: ‘रोजाना सुबह-शाम ड्रिप चढ़ रही है, पर हौसला अभी भी फुल चार्ज है…’ देशव्यापी नीट प्रदर्शन की कमान संभाल रहे अभिजीत दिपके ने जब X पर अपनी ब्लड रिपोर्ट शेयर की है। उन्हें टाइफाइड हो गया है। हालांकि, इसके बावजूद CJP संस्थापक ने हुंकार भरी है कि बीमारी उनके आंदोलन की रफ्तार नहीं धीमी कर सकती। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना हेल्थ अपडेट देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह छात्र आंदोलन बिना रुके जारी रहेगा।

X पर वीडियो मैसेज शेयर कर बताया हेल्थ अपडेट

अभिजीत दिपके ने आज शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने समर्थकों और छात्रों को अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, पिछले कुछ दिनों से मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। अब मेरी ब्लड रिपोर्ट आ गई है और मुझे टाइफाइड की पुष्टि हुई है। मेरा इलाज चल रहा है और मुझे रोजाना सुबह और शाम आईवी ड्रिप चढ़ाई जा रही है।’

दिपके ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए देश भर के छात्रों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, ‘मैं देश भर में शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे सभी ‘कॉकरोचों’ का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। आप लोगों ने इस आंदोलन को इतना सफल बनाया है।’

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर प्रदर्शन इसी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ेगा।

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, पर CJP का आंदोलन रहेगा जारी

सोनम वांगचुक द्वारा अपना 26 दिनों का भूख हड़ताल समाप्त करने पर दिपके ने राहत जताई। उन्होंने कहा, ‘हम अब बेहद खुश और टेंशन फ्री हैं कि सोनम सर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उनका जीवन इस देश के लिए बेहद कीमती है।’

वैसे उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक CJP का आंदोलन पूरे देश में पूरी ताकत के साथ चलता रहेगा।

‘इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल’- आशुतोष रांका

इस आंदोलन के नीतिगत रणनीति बनाने वाले CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सरकार को कड़ा संदेश दिया है। आशुतोष रांका ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल यानी जिस पर कोई समझौता नहीं होने वाला है। अगर सरकार इस पर ‘ना’ कहती है, तो आगे की बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता।’

CJP की सरकार के सामने 3 मुख्य मांगें

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्तें पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
  2. कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई (FIR/केस) न किए जाने का लिखित आश्वासन मिले।
  3. मुआवजे की मांग: नीट पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कल हुई थी बैठक, आज फिर चर्चा की उम्मीद

शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ हाई-लेवल बैठक की थी। केंद्रीय मंत्रियों ने पार्टी की मांगों का अध्ययन करने और सरकार का रुख तय करने का भरोसा दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आगे की वार्ता प्रस्तावित है।

कौन हैं विनीत जोशी जिनकी शिक्षा मंत्रालय से हुई छुट्टी? NEET पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन

Vineet Joshi Transferred: देश भर में NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक के खिलाफ जारी भारी आक्रोश और विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी को उनके पद से हटा दिया है। 1992 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को अब पंचायती राज मंत्रालय में सचिव के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया है।

विनीत जोशी की जगह अब वरिष्ठ अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव की कमान सौंपी गई है। आइए आपको बताते हैं कि विनीत जोशी कौन हैं?

कौन हैं विनीत जोशी?

विनीत जोशी 1992 बैच के मणिपुर कैडर के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। वे पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने देश के शीर्ष संस्थान IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया है। इसके अलावा उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT), नई दिल्ली से MBA की डिग्री हासिल की है।

उच्च शिक्षा सचिव बनने से पहले विनीत जोशी मणिपुर के मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

शिक्षा मंत्रालय में संभाले कई बड़े पद

विनीत जोशी ने केंद्र और राज्य सरकारों में विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने दिसंबर 2024 में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया था। बाद में संजय कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। नियमित नियुक्ति होने तक अप्रैल 2025 में उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था।

CBSE और NTA के प्रमुख भी रह चुके है

विनीत जोशी का नाम देश की प्रमुख शैक्षणिक एजेंसियों और परीक्षा प्रणालियों से गहराई से जुड़ा रहा है। वे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रणाली जैसे बड़े शैक्षणिक सुधारों से जुड़े रहे।

वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक भी रह चुके हैं। NTA वही संस्था है जो देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं जैसे JEE Main, NEET और CUET का आयोजन कराती है।

NEET विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों के बाद से ही शिक्षा मंत्रालय पर चौतरफा दबाव था। छात्रों और विभिन्न संगठनों के लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार द्वारा विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में भेजा जाना एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

IDA Hike: इन कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 1 जुलाई 2026 से बढ़ा महंगाई भत्ता, जानें किसे कितना मिलेगा फायदा

CPSE Employees IDA Hike July 2026: सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज में काम करने वाले अधिकारियों और नॉन-यूनियनाइज्ड सुपरवाइजर्स के लिए खुशखबरी है। भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली इंडस्ट्रियल डियरनेस अलाउंस (IDA) की नई दरों का नोटिफिकेशन पिछले दिनों जारी कर दिया।

महंगाई भत्ता (DA/IDA) कर्मचारियों की सैलरी का वह अहम हिस्सा है, जो बढ़ती महंगाई के असर को कम करने के लिए समय-समय पर रिवाइज किया जाता है। आइए आपको बताते हैं कि अलग-अलग पे-स्केल के हिसाब से IDA की नई दरें क्या तय की गई हैं और इसका आपकी टेक-होम सैलरी पर क्या असर पड़ेगा।

1987 से 2017 पे-स्केल: जानिए IDA की नई दरें

सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई IDA दरें इस प्रकार हैं:

  • 2017 पे-स्केल: इस पे-स्केल के तहत आने वाले कर्मचारियों का IDA बढ़कर 55.7% हो गया है।
  • 2007 पे-स्केल: इस श्रेणी के कर्मचारियों के लिए नई IDA दर 241.7% तय की गई है।
  • 1997 पे-स्केल: 1997 वेतनमान वाले कर्मचारियों का IDA रिवाइज होकर 476.9% पहुंच गया है।
  • 1987 पे-स्केल: 1987 पे-स्केल का पालन करने वाले कर्मचारियों के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के औसत ₹9,854 स्तर के आधार पर ₹18,298 की राशि तय की गई है।

सैलरी पर कितना पड़ेगा असर?

IDA में हुई इस बढ़ोतरी से कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में इजाफा देखने को मिलेगा। आपकी सैलरी में कितना उछाल आएगा, यह आपके बेसिक पे और लागू पे-स्केल पर निर्भर करता है।

उदाहरण से समझें तो अगर 2017 पे-स्केल के तहत किसी CPSE कर्मचारी का बेसिक पे ₹50,000 है, तो 55.7% की नई दर के हिसाब से उनका IDA घटक अब ₹27,850 हो जाएगा। इसी तरह अलग-अलग पे-स्केल और बेसिक पे के हिसाब से कुल सैलरी में बढ़ोतरी भिन्न होगी।

क्या होते हैं CPSEs और इन्हें क्यों मिलता है अलग भत्ता?

सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) वे सरकारी कंपनियां होती हैं, जो ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं जैसे अहम क्षेत्रों में काम करती हैं। केंद्र सरकार के मंत्रालयों में काम करने वाले कर्मचारियों और CPSE कर्मचारियों के वेतनमान व भत्ते अलग-अलग होते हैं। CPSE में महंगाई भत्ते की गणना इंडस्ट्रियल डियरनेस अलाउंस (IDA) के आधार पर होती है।

DPE ने सभी प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने नियंत्रण वाली सभी CPSE कंपनियों में इन संशोधित दरों को तुरंत प्रभाव से लागू कराएं।

8th Pay Commission: बेसिक पे से लेकर भत्तों तक, जानिए 7 और 10 अगस्त को वेतन आयोग किस बात पर करेगा महत्वपूर्ण चर्चा

8th Pay Commission Salary Structure: देश के करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आठवां वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चा है। यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज में पहुंच चुका है। इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के लिए हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों से लगातार चर्चा की जा रही है।

7 और 10 अगस्त को होगी बड़ी बैठक

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अगले वेतन संशोधन पर चल रहे परामर्श के तहत दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारी संघों, परिसंघों और यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 23 जुलाई 2026 को जारी एक नोटिस में आयोग ने बताया कि यह बैठक उसकी हितधारक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले कर्मचारी प्रतिनिधियों के सुझाव और सिफारिशें जुटा रहा है।

सैलरी स्ट्रक्चर के 3 मुख्य पिलर, जिन पर टिकी है पूरी चर्चा

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित मुख्यतः तीन हिस्सों में तय किया जा रहा है:

A. बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर

बेसिक पे आपकी सैलरी और पेंशन की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि ग्रेच्युटी, पीएफ और बाकी भत्ते इसी के आधार पर तय होते हैं। पुराने बेसिक पे को नए बेसिक पे में बदलने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। नेशनल काउंसिल – जेसीएम (NC-JCM) ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

वहीं ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने परिवार की निर्भरता इकाई को 3 से बढ़ाकर 4.4 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बेसिक पे में बड़ा उछाल आएगा।

B. भत्ते (DA, HRA और TA)

नए बेसिक पे के लागू होते ही उस पर आधारित सभी प्रमुख भत्ते री-कैलकुलेट होंगे:

HRA (मकान किराया भत्ता): एआईएनपीएसईएफ ने X कैटेगरी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% HRA करने की सिफारिश की है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जब भी DA बढ़े, HRA में खुद-ब-खुद बढ़ोतरी हो।

TA (ट्रेवल भत्ता): लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम TA बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीने करने का प्रस्ताव है।

C. ग्रॉस सैलरी

बेसिक पे और सभी भत्तों को मिलाकर आपकी कुल कमाई तय होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर यूनियनों के ये सभी प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी ₹37,080 से बढ़कर सीधे ₹61,344 तक पहुंच सकती है यानी करीब 65% तक की भारी बढ़ोतरी!

कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें?

आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को 18 महीने की अवधि के लिए किया गया था। इसके अनुसार, आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2027 से मध्य-2027 के बीच सौंप सकता है।

अगर हम ऐतिहासिक ट्रेंड्स को देखें तो सिफारिशें आने के बाद सरकार द्वारा इसे पूरी तरह लागू करने में 2 से 3 साल का समय लगता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से एरियर के साथ प्रभावी हो सकती है।

कॉकरोच जनता पार्टी की इन दो शर्तों पर सरकार की सहमति! सामने आई ये बड़ी बात

Cockroach Janta Party Protest: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है। वहीं शुक्रवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सीजेपी के डेलिगेशन सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी दो मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है और बातचीत का दौर अभी जारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और इस मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार जल्द ही प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक करेगी, ताकि बाकी मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ाई जा सके।

जेपी नड्डा से बैठक में CJP ने रखीं चार मांगें

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में संगठन ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नीट परीक्षा विवाद के कारण कथित तौर पर अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।

करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं। इसके अलावा, देश की परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। जेपी नड्डा ने कहा, “बैठक करीब दो घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव हमारे सामने रखे। हमने उनसे कहा है कि कल दोपहर फिर बैठक होगी। तब तक सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

CJP ने  गारंटी की भी मांग की

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उनके अनुसार, केंद्र ने नीट परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है। सौरव दास ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ आगे कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए। साथ ही, सरकार लिखित रूप में यह भरोसा दे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।

वहीं, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने भी कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग पर केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। आशुतोष रंका ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ पहले से दर्ज एफआईआर वापस लेने तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि सरकार लिखित गारंटी दे कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

NEET Paper Leak Row: NTA के 47 अफसर बर्खास्त, पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्श

राजधानी दिल्ली में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, बर्खास्त अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ केस भी दर्ज किया जा सकता है। मुताबिक यह कदम NTA में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के तहत उठाया गया है। NTA में सुधार के लिए जल्द ही और एक्शन लिए जाएंगे। एक दिन पहले सरकार ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था

NTA से 47 अधिकारी हटाए गए

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसी के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने शुक्रवार को 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार एजेंसी के भीतर जवाबदेही तय करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है।

बताया जा रहा है कि आने वाले समय में एनटीए में और भी बड़े सुधार किए जा सकते हैं। यह कार्रवाई एजेंसी में व्यापक बदलाव की योजना का हिस्सा है। हाल के दिनों में परीक्षा पेपर लीक के विवादों के बाद एनटीए पर सवाल उठे थे। अब सरकार एजेंसी का पूरी तरह से पुनर्गठन करने की तैयारी में है, जिसे अगले महीने लागू किया जा सकता है।

एनटीए के आउटसोर्सिंग सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का सबसे बड़ा फोकस राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के आउटसोर्सिंग मॉडल में बदलाव करना है। परीक्षा से जुड़े कई काम बाहरी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं। अब इन प्रक्रियाओं में बदलाव कर निगरानी बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और परीक्षा आयोजित करने में सामने आई कमियों को दूर करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि ये बदलाव एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित हो।

लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली बनाने की तैयारी

पेपर लीक के मामलों को लेकर हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार अब पूरी परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य ऐसी लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की गुंजाइश न रहे। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव किए जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

ये सुधार नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद सामने आए सवालों को देखते हुए किए जा रहे हैं। इस मामले ने देशभर में नाराजगी पैदा की थी और सुरक्षित व भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की मांग तेज हो गई थी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से एनटीए के काम करने का तरीका पूरी तरह बदलेगा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) देशभर में जेईई, नीट, सीयूईटी समेत 15 से 20 राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाएं आयोजित करती है।

Ravneet Singh: केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा मंजूर, छोड़ा रेल राज्यमंत्री का पद

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। हालांकि, उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राज्य की राजनीति में सक्रिय वापसी की अटकलों के बीच यह फैसला लिया गया है। रवनीत सिंह का राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यकाल जून में ही समाप्त हो गया था। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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