क्या अब जंतर-मंतर पर नहीं दिखेंगे अभिजीत दिपके? अस्पताल से बोले- ‘सुबह-शाम चढ़ रही है आईवी ड्रिप, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान…’

Abhijeet Dipke Diagnosed With Typhoid: ‘रोजाना सुबह-शाम ड्रिप चढ़ रही है, पर हौसला अभी भी फुल चार्ज है…’ देशव्यापी नीट प्रदर्शन की कमान संभाल रहे अभिजीत दिपके ने जब X पर अपनी ब्लड रिपोर्ट शेयर की है। उन्हें टाइफाइड हो गया है। हालांकि, इसके बावजूद CJP संस्थापक ने हुंकार भरी है कि बीमारी उनके आंदोलन की रफ्तार नहीं धीमी कर सकती। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना हेल्थ अपडेट देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह छात्र आंदोलन बिना रुके जारी रहेगा।

X पर वीडियो मैसेज शेयर कर बताया हेल्थ अपडेट

अभिजीत दिपके ने आज शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने समर्थकों और छात्रों को अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, पिछले कुछ दिनों से मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। अब मेरी ब्लड रिपोर्ट आ गई है और मुझे टाइफाइड की पुष्टि हुई है। मेरा इलाज चल रहा है और मुझे रोजाना सुबह और शाम आईवी ड्रिप चढ़ाई जा रही है।’

दिपके ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए देश भर के छात्रों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, ‘मैं देश भर में शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे सभी ‘कॉकरोचों’ का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। आप लोगों ने इस आंदोलन को इतना सफल बनाया है।’

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर प्रदर्शन इसी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ेगा।

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, पर CJP का आंदोलन रहेगा जारी

सोनम वांगचुक द्वारा अपना 26 दिनों का भूख हड़ताल समाप्त करने पर दिपके ने राहत जताई। उन्होंने कहा, ‘हम अब बेहद खुश और टेंशन फ्री हैं कि सोनम सर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उनका जीवन इस देश के लिए बेहद कीमती है।’

वैसे उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक CJP का आंदोलन पूरे देश में पूरी ताकत के साथ चलता रहेगा।

‘इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल’- आशुतोष रांका

इस आंदोलन के नीतिगत रणनीति बनाने वाले CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सरकार को कड़ा संदेश दिया है। आशुतोष रांका ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल यानी जिस पर कोई समझौता नहीं होने वाला है। अगर सरकार इस पर ‘ना’ कहती है, तो आगे की बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता।’

CJP की सरकार के सामने 3 मुख्य मांगें

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्तें पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
  2. कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई (FIR/केस) न किए जाने का लिखित आश्वासन मिले।
  3. मुआवजे की मांग: नीट पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कल हुई थी बैठक, आज फिर चर्चा की उम्मीद

शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ हाई-लेवल बैठक की थी। केंद्रीय मंत्रियों ने पार्टी की मांगों का अध्ययन करने और सरकार का रुख तय करने का भरोसा दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आगे की वार्ता प्रस्तावित है।

जंतर-मंतर पर दिपके का साया बने आशुतोष रांका कौन हैं? जानें IIT, LSE और मैकिन्से से आंदोलन तक का सफर

Who is Ashutosh Ranka: IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई और फिर लंदन में मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनी में भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी! आम तौर पर लोग ऐसे करियर का सपना देखते हैं, लेकिन आशुतोष रांका इस सब से आगे बढ़कर देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। NEET पेपर लीक को लेकर CJP के ‘पॉलिसी हेड’ के रूप में केंद्र सरकार से सीधी बात करने वाले आशुतोष रांका कौन हैं और कैसे एक कॉर्पोरेट कंसल्टेंट छात्रों की सबसे बड़ी आवाज बन गया, आइए आपको बताते हैं।

कौन हैं आशुतोष रांका?

आशुतोष रांका ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। उन्हें इस पूरे आंदोलन का ‘पॉलिसी माइंड’ माना जा रहा है, क्योंकि वे शिक्षा सुधारों और सरकारी नीतियों के खिलाफ तार्किक और नीतिगत ड्राफ्ट तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से पढ़ाई की है और इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) जैसी विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की है। CJP में शामिल होने से पहले आशुतोष रांका लंदन में दुनिया की दिग्गज कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) में कंसल्टेंट के रूप में काम कर चुके हैं।

फिलहाल वो आंदोलन की नीतिगत रणनीति, शिक्षा सुधारों के ड्राफ्ट और केंद्र सरकार के साथ बातचीत में CJP का प्रतिनिधित्व कर रहे है।

कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ आंदोलन का हिस्सा क्यों बने?

जब जून में CJP ने अपने प्रवक्ताओं के पैनल का ऐलान किया, तब आशुतोष रांका के शानदार एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड को खास तौर पर हाईलाइट किया गया। IIT कानपुर, LSE और मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनियों में काम करने के अनुभव के कारण उनके पास नीतियों के विश्लेषण और रणनीतिक समझ का गहरा अनुभव है। नीट परीक्षा में हुई धांधली के बाद उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल छात्रों की मांगों को कानूनी और नीतिगत रूप से मजबूत बनाने के लिए किया।

केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अहम भूमिका

NEET आंदोलन के तहत जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच आशुतोष रांका ने सरकार के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सौरव दास के साथ आशुतोष रांका भी उस दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जिसने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा। वे केवल परीक्षा रद्द करने या जांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक और पारदर्शी सुधारों की रूपरेखा पर भी काम कर रहे हैं।

जंतर-मंतर पर डटे हैं CJP संस्थापक

जहां आशुतोष रांका और सौरव दास सरकार के साथ टेबल टॉक संभाल रहे हैं, वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने वाले एक बयान के विरोध में इस पार्टी की नींव रखी थी।

हमेशा अभिजीत दिपके के बगल में दिखने वाले सौरव दास कौन? जानिए उनका पूरा बैकग्राउंड

Who is Saurav Das: देश भर में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन की पूरे देश में गूंज है। 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद से लोगों की जबान पर अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका का नाम है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके इस आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार हैं, लेकिन केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ टेबल टॉक से लेकर मीडिया के सामने छात्रों की मांगों को मजबूती से रखने का पूरा जिम्मा CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास संभाल रहे हैं।

CJP के मुख्य मीडिया यूनिट के हेड और स्पोक्सपर्सन के रूप में सौरव दास आज इस आंदोलन की सबसे पहचानी जाने वाली आवाज बन चुके हैं। जानें सौरव दास का पूरा बैकग्राउंड, पढ़ाई, पत्रकारिता के सफर और उनकी प्रोफाइल की पूरी डिटेल।

कौन हैं सौरव दास?

सौरव दास पेशे से एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कानून, न्यायपालिका, गवर्नेंस और नागरिक अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर कई वर्षों तक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। फिलहाल वो कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और सरकार के साथ बातचीत में मुख्य वार्ताकार।

CJP में शामिल होने से पहले भी वे नागरिक और पर्यावरणीय आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, जिसमें प्रदूषण विरोधी अभियान और ‘क्लाइमेट एक्शन फ्रंट’ जैसे प्रयास शामिल हैं। जून में CJP द्वारा पहला देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने से ठीक पहले सौरव दास को संगठन के प्रमुख सार्वजनिक संचारक के रूप में पेश किया गया था।

18 की उम्र में RTI से बनाई पहचान

सौरव दास की शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने साल 2016 से 2019 के दौरान एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज के दिनों में ही मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून का सक्रिय उपयोग करना शुरू कर दिया था।

RTI के माध्यम से मिली जानकारियों के आधार पर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कई कमियों और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उजागर किया। उनकी खोजी रिपोर्ट ‘द कारवां’, ‘आर्टिकल 14’, ‘द वायर’ और ‘अल जजीरा’ जैसे नामचीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

NEET आंदोलन के हैं सूत्रधार

NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सौरव दास छात्रों का पक्ष रखने वाले सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास शामिल थे, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीधी मुलाकात की और छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा।

वे लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, प्रभावित अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग पर कायम हैं। पुलिस की कार्रवाई और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच भी सौरव दास ने हमेशा आंदोलन को अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने की अपील की है।

कौन हैं अभिजीत दिपके, कितनी पढ़ाई की है? CJP के संस्थापक का पूरा बैकग्राउंड जानिए