Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने एक्सप्रो इंडिया में लगभग 1% हिस्सेदारी बेची, ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिंग में बढ़ाई हिस्सेदार

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

तेज विकास के बावजूद रुपये की कमजोरी दे रही दर्द, 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य छिटका दूर

IMF के आंकड़ों के मुताबिक तेज विकास दर के बावजूद रुपये की कमजोरी के कारण भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य 2029 तक टल सकता है। इसके पहले अनुमान थी कि 2027 में भारत जापान और UK को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। लेकिन IMF के पूर्वानुमानों के ‘मनीकंट्रोल’ द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये की गिरावट ने 5 लाख करोड़ डॉलर के टारगेट को एक साल और आगे के लिए टाल दिया है।

भारत 2027 में जापान और यूके को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का देश का यह लक्ष्य एक साल के लिए पिछड़ सकता है। इस टारगेट को रुपये की गिरती कीमत की वजह से झटका लग सकता है। जानकारों का कहना है कि रुपए के वैल्यू में कमी आने से डॉलर के हिसाब से देश के आर्थिक उत्पादन की वैल्यू में कमी आ रही है।

मनीकंट्रोल द्वारा इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के नवीनतम ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (WEO) डेटाबेस के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था के 2029 में 5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार करने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में इसके 2028 तक इस स्तर को पार करने का अनुमान लगाया गया था।

IMF ने रुपये के संदर्भ में भारत के आर्थिक आउटपुट के अनुमान को तो बढ़ाया है, लेकिन 2028 के लिए भारत की नॉमिनल GDP के अपने अनुमान को 5.1 लाख करोड़ डॉलर से घटाकर 4.996 लाख करोड़ डॉलर कर दिया है।

5 लाख करोड़ डॉलर का टारगेट खिसका दूर

यह अंतर भारत की डॉलर-मूल्य वाली जीडीपी पर मुद्रा के अवमूल्यन (मूल्य में गिरावट) के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है, जो ग्लोबल इकोनॉमिक रैंकिंग में देश की स्थिति तय करता है।

आईएमएफ (IMF) के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 4.06 लाख करोड़ डॉलर की होगी, जो 2027 में बढ़कर 4.52 लाख करोड़ डॉलर और 2029 में 5.54 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी।

रुपये की गिरावट ने मजबूत घरेलू विकास के असर को किया बेअसर

ताजा अनुमान बताते हैं कि 5 लाख डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने में हो रही देरी की मुख्य वजह भारत की नॉमिनल आर्थिक ग्रोथ में आई गिरावट नहीं, बल्कि विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) से जुड़े अनुमान में हुआ बदलाव है।

IMF का अब अनुमान है कि 2028 में रुपया प्रति डॉलर औसतन 95.5 के स्तर पर रहेगा, जबकि अप्रैल के अनुमानों में यह आंकड़ा 93.3 था। 2027 के लिए, एक्सचेंज रेट का अनुमान 93 से बदलकर 95 हो गया है।

साल की शुरुआत से अब तक भारतीय रुपया 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो चुका है। शुक्रवार को रुपया 96.73 के स्तर पर बंद हुआ, जिसके बाद RBI ने इसमें और गिरावट को रोकने के लिए कदम उठाए।

इस बीच, घरेलू मुद्रा में भारत की नॉमिनल GDP के 2028 में 477.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था, यानी इस अनुमान में 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन, जब इसे डॉलर में बदला जाता है तो आर्थिक आउटपुट का यह अनुमान लगभग 63 अरब डॉलर कम हो जाता है।

मनीकंट्रोल की गणना से पता चलता है कि अप्रैल के 93.3 रुपए प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट अनुमान के आधार पर, 2028 के लिए भारत की रुपये में मापी गई GDP का IMF का ताजा अनुमान लगभग 5.11 लाख करोड़ डॉलर बैठता है, जो 5 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े से काफी ऊपर है। हालांकि, एक्सचेंज रेट के संशोधित अनुमान के आधार पर यह आंकड़ा घटकर लगभग 4.996 लाख करोड़ डॉलर रह जाता है।

इससे पता चलता है कि रुपये की कमजोरी, घरेलू नॉमिनल आउटपुट में हुई बढ़ोतरी के असर को पूरी तरह खत्म कर देती है। इससे यह भी साफ होता है कि भारत कब इस डॉलर-बेस्ड अहम इकोनॉमिक माइल स्टोन को हासिल करेगा, यह तय करने में विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में होने वाले बदलाव कितने अहम होते हैं।

2027 में भारत, जापान और UK को छोड़ सकता है पीछे

इस देरी के बावजूद, 2027 में भारत के ग्लोबल आर्थिक रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचने का अनुमान है। इस सूची में भारत अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद आएगा।

IMF के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2027 में भारत की GDP 4.52 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह यूनाइटेड किंगडम की 4.49 लाख करोड़ डॉलर और जापान की अनुमानित 4.47 लाख करोड़ डॉलर की GDP से थोड़ी अधिक होगी। हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच का अंतर काफी कम है, जिसका मतलब है कि विनिमय दरों (exchange rates) में उतार-चढ़ाव अंतिम नतीजों को बदल सकते हैं।

IMF के ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के और विस्तार करने की उम्मीद है। 2030 में यह 6.13 लाख करोड़ डॉलर और 2031 में 6.74 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इस स्तर पर भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

 

PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में इस हफ्ते सोना 3% गिरा, चांदी 13500 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: यह हफ्ता सोने और चांदी की कीमतों के लिए अच्छा नहीं रहा। दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, हफ्ते के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में दिल्ली सर्राफा बाजार में बदलाव नहीं हुआ। सोना की कीमत बगैर किसी बदलाव के 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बनी रही।

चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भी बदलाव नहीं हुआ। यह 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सोना 0.13 फीसदी चढ़कर 4,176 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 0.30 फीसदी के उछाल के साथ 57.58 डॉलर प्रति औंस थी।

इस हफ्ते दिल्ली में चांदी 13500 रुपये हुई सस्ती

इस हफ्ते सोना दिल्ली सर्राफा बाजार में 3 फीसदी यानी 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। चांदी में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। यह इस हफ्ते 13,500 रुपये यानी 6 फीसदी फिसल गई। हालांकि, त्योहारों के दौरान सोने और चांदी में गिरावट ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। भारत में त्योहारों के दौरान सोने और चांदी खरीदने की परंपरा रही है।

रुपये में तेजी से सोने में रिकवरी पर लगी लगाम

डिजिटल एसेट ट्रेडिंग फर्म जियोटस डॉट कॉम के सीईओ विक्मर शुभराज ने कहा कि शुक्रवार को रुपये में डॉलर के मुकाबले छटे दिन तेजी आई। यह 7 पैसे चढ़कर 94.92 के लेवल पर पहुंच गया। रुपये में मजबूती से सोने में रिकवरी पर ब्रेक लगा है। रुपये में मजबूती से गोल्ड की इंपोर्ट कॉस्ट कम हो जाती है। इसका असर इसकी कीमतों पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में रिकवरी 

ऑगमोन्ट में चीफ रिसर्च अफसर रेनिशा चैनानी ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में नरमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। इससे पहले यह गिरकर 18 महीने के निचले स्तर पर आ गया था। चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती हैं।

यह भी पढ़ें: FD Calculator: 5 लाख रुपये का बैंक एफडी 5 साल के लिए करने पर पैसा कितना बढ़कर मिलेगा?

बुलियन मार्केट की नजरें फेड की पॉलिसी पर 

बुलियन मार्केट की नजरें इस महीने के अंत में आने वाली फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर लगी हैं। हालांकि, शुक्रवार को थाईलेंड में आईएमएफ की सालाना बैठक में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने 28 अक्टूबर की पॉलिसी के फैसलों के बारे में किसी तरह का संकेत देने से इनकार कर दिया। लेकिन, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल कीमतों को बढ़ने से रोकने पर होगा।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार चौथे दिन फिसला सोना, चांदी एक दिन में ₹6000 गिरी

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 15 अक्तूबर को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। सोने में लगातार चौथे दिन गिरावट आई। यह 900 रुपये गिरकर 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती और कमजोर फिजिकल डिमांड का असर सोने की कीमतों पर पड़ा।

चांदी में 6000 रुपये की गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में भी बड़ी गिरावट आई। यह 6000 रुपये गिरकर 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। सोने में भी लगातार चौथे दिन गिरावट आई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्टस सौमिल गांधी ने कहा कि रुपये में मजबूती और कमजोर डिमांड की वजह से सोने की कीमतों में नरमी दिखी।

रुपया लगातार पांचवें दिन चढ़ा

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार चौथे दिन मजबूती आई। यह 12 पैसे की मजबूती के साथ 95.05 के लेवल पर बंद हुआ। आरबीआई ने पिछले हफ्ते रुपये पर दबाव घटाने के लिए कई कदम उठाए थे। इसका असर रुपये पर दिख रहा है। रुपये में मजबूती से सोने की इंपोर्ट कॉस्ट घट जाती है, जिसका असर इसकी कीमतों पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में अच्छी रिकवरी दिखी। सोना 1.22 फीसदी चढ़कर 4,157 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 1.84 फीसदी की तेजी के साथ 56 डॉलर प्रति औंस पर थी। इससे पहले के सत्र में सोने और चांदी में गिरावट आई थी। खासकर चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।

डॉलर इंडेक्स में गिरावट से सोने को सपोर्ट

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी की वजह डॉलर इंडेक्स में गिरावट है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर डॉलर इंडेक्स पर पड़ा है। हालांकि, अमेरिका में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। इससे इस महीने के आखिर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ी है।

यह भी पढ़ें: Gold Price Today: लगातार गिर रहा सोना, नवरात्रि के 5वें दिन दिल्ली में ₹136040 पर आया 22 कैरेट

बुलियन मार्केट की नजरें फेड की पॉलिसी पर 

इस महीने के अंत में फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी आने वाली है। इस बीच, क्रूड ऑयल की कीमतों में हल्की नरमी दिखी है। हालांकि, ब्रेट क्रूड अब भी 104 डॉलर प्रति बैरल पर है। बुलियन मार्केट की नजरें फेड की पॉलिसी पर लगी हैं। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना गिरा, चांदी एक दिन में ₹5000 फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अक्तूबर को सोने और चांदी दोनों में गिरावट आई। रुपये में मजबूती ने सोने और चांदी पर दबाव बढ़ाया। सोना 1,800 रुपये गिरकर 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने यह बताया।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5000 रुपये गिरकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। रुपये में बुधवार को भी मजबूती दिखी। यह 19 पैसे की मजबूती के साथ 95.17 के लेवल पर आ गया। यह रुपये में मजबूती का लगातार चौथा दिन था। आरबीआई ने फॉरेक्स मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस रोकने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे रुपये में तेजी आई है।

रुपये में मजबूती का पड़ा असर 

ट्रेडर्स ने बताया कि रुपये में मजबूती से सोने का इंपोर्ट सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों और रुपये में मजबूती से घरेलू बाजार में सोने में गिरावट आई।

सोने में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं

स्मार्टवेल्थ डॉट एआई के फाउंडर पंकज सिंह ने कहा कि भारत में त्योहारी मांग और चीन की लगातार खरीदारी से सोने में ज्यादा गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतने की सलाह है। करेंसी में उतार-चढ़ाव का असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत में सोने के निवेशकों के रिटर्न पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

आनंदराठी शेयर में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में नरमी दिखी। इसकी कीमत 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई, जो इस हफ्ते सोने का सबसे कम भाव है। उन्होंने कहा कि करीब बीते दो हफ्तों से सोने की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं। डॉलर 18 महीनों के हाई लेवल से नीचे आया है। इसके बावजूद यह मजबूत बना हुआ है।

यह भी पढ़ें: SIP Strategy: उतार-चढ़ाव वाले बाजार में कैसे शुरू करें SIP? जानें किन म्यूचुअल फंड्स में दांव लगाना होगा समझदारी

चांदी 59 डॉलर से नीचे आई 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.49 फीसदी गिरकर 4,140 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर में तो एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। यह 58.49 डॉलर प्रति औंस पर था। इससे पहले 27 जुलाई को चांदी का भाव 58.40 डॉलर प्रति औंस था। मार्केट की नजरें फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर लगी हैं, जो इस महीने के आखिर में होने वाली है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरा सोना, चांदी भी फिसली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 13 अक्तूबर को लगातार दूसरे दिन सोने में गिरावट आई। यह 400 रुपये गिरकर 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी में भी गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की तेजी थी, जबकि चांदी पर दबाव था।

चांदी में 500 रुपये की गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी 500 रुपये गिरकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही। सोने और चांदी की कीमतों पर रुपये में मजबूती का असर पड़ा। बीते दो सत्रों में रुपये में 1.5 फीसदी की मजबूती आई है। रुपये में मजबूती से गोल्ड के आयात की लागत घट जाती है। इसका असर इसके घरेलू प्राइस पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरी चांदी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.03 फीसदी चढ़कर 4,172 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.97 फीसदी गिरकर 59,60 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, ब्रेंट क्रूड अब भी 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

क्रूड ऑयल 100 डॉलर के ऊपर 

क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इससे अमेरिका सहित दूसरे देशों में महंगाई तेजी से बढ़ने का डर है। इस महीने के आखिर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी आने वाली है। बुलियन मार्केट की नजरें फेड के फैसले पर लगी हैं। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका खराब असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: Gold- Silver price: सोना ₹1.50 लाख के नीचे, चांदी हुई सस्ती, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव 

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू लड़ाई ने सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ा दिया। तब से सोने और चांदी की कीमतें सीमित दायरे में चढ़ और उतर रही हैं।

September CPI : सितंबर में रिटेल महंगाई 23 महीने के हाई पर आई, खाने-पीने की चीजों ने दिया सबसे तगड़ा झटका

September CPI : सितंबर में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज़ में यह पहली बार है जब महंगाई दर 5 प्रतिशत के स्तर से ऊपर गई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का इस बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान रहा है, जिससे परिवारों का खर्च काफी बढ़ गया है। आज 12 अक्टूबर को आए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी, जिसमें बढ़ोतरी हुई है। यह मार्च के बाद से सालाना महंगाई दर में लगातार छठी मासिक बढ़ोतरी है।

इस बढ़ोतरी के साथ महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई, हालांकि यह केंद्रीय बैंक की 2-6 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा के भीतर ही रही है।

खाने-पीने की चीजो की महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ी

कंज्यूमर फ़ूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के हिसाब से, खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई अगस्त में 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई। प्याज़ की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त में इसकी महंगाई दर 48.78 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत हो गई, जबकि नींबू की कीमतों में 36.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले महीने 15.15 प्रतिशत थी।

हालांकि, कुछ सब्जियों में राहत मिली। आलू की कीमतों में सालाना 11.50 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि टमाटर की कीमतें 8.62 प्रतिशत कम हुईं। चांदी के गहनों में महंगाई दर 87.80 प्रतिशत के बहुत ऊंचे स्तर पर बनी रही, हालांकि अगस्त में यह 106.81 प्रतिशत थी। सितंबर में पान-तंबाकू की महंगाई 4.71% से बढ़कर 4.8% पर रही। वहीं, फूड एंड बेवरेजेज महंगाई 5.66% से बढ़कर 7.36% पर रही।

ग्रामीण इलाकों में महंगाई 6 प्रतिशत के पार

ग्रामीण भारत में महंगाई में ज़्यादा तेज़ी देखी गई। सितंबर में ग्रामीण भारत की खुदरा महंगाई अगस्त के 5.24 प्रतिशत से बढ़कर 6.08 प्रतिशत हो गई। शहरी इलाकों में महंगाई 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.88 प्रतिशत हो गई। इसके चलते ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच का अंतर बढ़कर 1.20 प्रतिशत हो गया, जबकि अगस्त में यह 0.93 प्रतिशत था।

बड़े राज्यों में, तमिलनाडु की रिटेल महंगाई दर 6.81 प्रतिशत दर्ज की गई, इसके बाद ओडिशा में 6.70 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत, तेलंगाना में 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत रही।

कीमतों का दबाव सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों तक ही सीमित नहीं

ताज़ा आंकड़ों से कई तरह की सेवाओं और खाने-पीने से जुड़ी चीज़ों के अलावा अन्य कैटेगरी में भी महंगाई बढ़ने का पता चलता है। पर्सनल केयर, मिसिलेनियस महंगाई घटकर 13.75% पर रही है। वहीं, रेस्टोरेंट,एकॉमडेशन सर्विस महंगाई बढ़कर 9.36% पर रही है। एजुकेशन सर्विसेस महंगाई 3.73% से बढ़कर 3.94% पर रही है।

सितंबर में रिक्रिएशन, स्पोर्ट & कल्चर महंगाई बढ़कर 2.16 प्रतिशत पर आ गई। वहीं, इंफो, कम्युनिकेशन महंगाई 2.01 प्रतिशत से बढ़कर 2.44 प्रतिशत पर रही। सितंबर रिटेल महंगाई दर 23 महीने के ऊपरी स्तर पर रही है। ट्रांसपोर्टेशन महंगाई दर 4.60 प्रतिशत से बढ़कर 5.01 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं, हेल्थ महंगाई दर 1.34 प्रतिशत से बढ़कर 1.40 प्रतिशत पर रही है। फर्निशिंग, घरेलू उपकरण महंगाई दर 3.11 न पर रही है। हाउसिंग यूटिलिटी महंगाई 2.61प्रतिशत से बढ़कर 2.74 प्रतिशत पर रही है। वहीं, कपड़ा, जूता चप्पल महंगाई 3.56 प्रतिशत से बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर रही है।

मॉनेटरी पॉलिसी पर असर

सितंबर में महंगाई के आंकड़े RBI के लिए एक चुनौती हैं, क्योंकि मार्च से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण हेडलाइन महंगाई दर, RBI की तय सीमा (टॉलरेंस बैंड) के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच गई है।

इन दबावों का बने रहना RBI के भविष्य के पॉलिसी फैसलों के लिए अहम होगा। अब यह देखना होगा कि क्या खाने-पीने की चीजों की महंगाई में बढ़ोतरी कुछ समय के लिए है या यह आम कंज्यूमर कीमतों पर भी इसका असर दिखने लगा है। RBI एमपीसी की अगली बैठक दिसंबर में होगी।

 

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 13 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में लगातार दूसरे दिन जोरदार तेजी, चांदी भी ₹4500 रुपये उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 9 अक्टूबर को सोने में लगातार दूसरे दिन जोरदार तेजी आई। यह 1,900 रुपये के उछाल के साथ 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी में भी अच्छी तेजी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में मजबूती का असर घरेलू बाजार में इनकी कीमतों पर पड़ा। डॉलर में नरमी का असर भी सोने की कीमतों पर पड़ा।

चांदी में गिरावट पर लगा ब्रेक

चांदी में भी दिल्ली सर्राफा बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी में गिरावट पर ब्रेक लग गया। यह 4,500 रुपये के उछाल के साथ 2,28,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। गुरुवार को चांदी में 3000 रुपये की गिरावट आई थी। इस हफ्ते के पहले तीन दिनों में चांदी की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली थी।

डॉलर में नरमी से सोने को सपोर्ट

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी डॉलर में नरमी है। हालांकि, इनफ्लेशन को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस फिर से 104 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। 8 अक्टूबर को यह एक समय 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था।

इस हफ्ते सोने में 3 फीसदी की तेजी

इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा। लेकिन, लगातार दो दिन तेजी की वजह से सोने में 3.07 फीसदी यानी 4,600 रुपये की रिकवरी आई। हालांकि, चांदी में हफ्ते के दोरान 1,500 रुपये यानी 1 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली। पिछले काफी समय से सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिख रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना 1.33 फीसदी चढ़कर 4,188 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। सिल्वर करीब 3 फीसदी उछाल के साथ 60.92 डॉलर प्रति औंस था। मिरै एसेट शेयरखान के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह ने कहा कि सोने की कीमतें तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में रह सकती हैं। उन्होंने कहा कि क्रूड में तेजी आने पर सोने पर फिर से दबाव बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें: Crude Oil: महंगे क्रूड के लिए रहें तैयार, कीमतें जल्द नीचे आने की उम्मीद नहीं

सोने की कीमतें सीमित दायरे में बने रहने की उम्मीद

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ गया। दोनों की कीमतें तब से सीमित दायरे में चढ़ और उतर रही हैं।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹3600 उछला, चांदी 3000 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 8 अक्टूबर को सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली। यह 3,600 रुपये के उछाल के साथ 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 7 अक्टूबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में 8 अक्टूबर को बड़ी गिरावट देखने को मिली।

फेस्टिव सीजन से पहले सोने में बढ़ी दिलचस्पी

इससे पहले लगातार दो सत्रों में सोने में गिरावट आई थी। ट्रेडर्स का कहना है कि फेस्टिवल सीजन से पहले सोने में रिटेलर्स और ज्वेलर्स की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों को मजबूती मिली। ट्रेडर्स ने बताया कि ज्वेलर्स आम तौर पर फेस्टिव सीजन से पहले रॉ मैटेरियल के रूप में सोने का स्टॉक बढ़ाते हैं। त्योहारों के दौरान सोने की मांग बढ़ती है।

डॉलर में मजबूती और महंगे क्रूड से सोने में ज्यादा तेजी नहीं

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने की कीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। अब इसमें रिकवरी दिखी है। हालांकि, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और डॉलर में मजबूती से सोने में तेजी सीमित बनी हुई है। चांदी की चाल सोने से उल्टी रही। यह 3000 रुपये गिरकर 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी, चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 0.32 फीसदी की तेजी दिखी। यह 4,125 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर करीब एक फीसदी गिरकर 59.15 डॉलर प्रति औंस था। आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में स्थिरता रही। इससे पहले के सत्र में यह 9 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल पर 

उन्होंने कहा कि सोने में तेजी दिखी है, लेकिन क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर बनी हुई हैं। खबरों के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पेंटागन को ईरानी ठिकानों पर हमलों के विकल्पों पर विचार करने को कहा है। ये हमले अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शंस से पहले हो सकते हैं। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

यह भी पढ़ें: पीएनबी, बीओबी, इंडियन बैंक सहित इन बैंकों ने बढ़ाया इंटरेस्ट रेट, लोन की EMI बढ़ेगी

इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।

Bank of India ने लोन महंगा किया, दूसरे बैंक भी जल्द बढ़ा सकते हैं इंटरेस्ट रेट

बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो आधारित लेंडिंग रेट (आरबीएलआर) बढ़ा दिया है। उसने आरबीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक-चौथाई फीसदी वृद्धि की है। अब यह 8.35 फीसदी हो गया है। नया रेट 7 अक्तूबर से प्रभावी हो गया है। इसका मतलब है कि आरबीएलआर से जुड़े बैंक को होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

RBI के रेपो रेट बढ़ाने के दिन ही बैंक ने बढ़ाया इंटरेस्ट रेट

Bank of India ने आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के दिन ही अपने लोन को महंगा करने का ऐलान कर दिया। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्तूबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा दिया। उसने इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया। आरबीआई ने 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है।

दूसरे बैंक भी जल्द कर सकते हैं इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के ऐलान 

आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद यह माना जा रहा था कि सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक सहित दूसरे बैंक अपने लोन का इंटरेस्ट बढ़ाएंगे। बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे पहले अपना रेपो आधारित लेंडिंग रेट बढ़ाने का ऐलान किया। यह 7 अक्तूबर से ही लागू हो गया। बैंक ऑफ इंडिया के रेपो से जुड़े सभी लोन अब महंगे हो जाएंगे। बैंकों को अपने लोन के इंटरेस्ट रेट के लिए किसी बाहरी बेंचमार्क से लिंक्ड करना पड़ता है। अब ज्यादातर बैंकों के लोन रेपो से लिंक्ड हैं।

होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन हो जाएंगे महंगे

बैंक ऑफ इंडिया सरकारी बैंक है। माना जा रहा है कि जल्द दूसरे बैंक भी अपने लोन के इंटरेस्ट रेट में इजाफा कर सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे। त्योहारों के पहले इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का असर लोन के नए और पुराने दोनों ग्राहकों पर पड़ेगा। जो लोन पहले होम लोन ले चुके हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। कोई ग्राहक नया लोन लेने जा रहा है तो उसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा।

आरबीआई ने इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए बढ़ाया रेपो

आरबीआई ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट बढ़ाने का फैसला महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए किया। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के सभी 6 सदस्यों ने रेपो रेट बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन 4.82 फीसदी पर पहुंच गया।

यह भी पढ़ें: बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वालों के लिए खुशखबरी, रेपो रेट बढ़ने से अब FD पर मिलेगा ज्यादा इंटरेस्ट

क्रूड में उछाल से दुनियाभर में बढ़ रहा इनफ्लेशन 

पिछले कई महीनों से इनफ्लेशन लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह क्रूड की ऊंची कीमतें हैं। अमेरिका सहित दुनियाभर में इनफ्लेशन बढ़ रहा है। सितंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाया था।