Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के बाद आपकी बचत 30 साल तक साथ दे पाएगी? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Retirement Planning: पहले रिटायरमेंट का मतलब थोड़ा आसान था। 58-60 साल की उम्र में नौकरी छोड़ी और अगले 10-15 साल तक बचत के सहारे जिंदगी चल गई। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

आज भारतीय पहले से कहीं ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। 1960 में औसत उम्र सिर्फ 41 साल थी। अब यह 70 साल से ऊपर पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि 60 साल में रिटायर होने वाला व्यक्ति 85-90 साल तक जी सकता है। यानी रिटायरमेंट अब 10 साल नहीं, 25-30 साल का सफर बन चुका है।

यही वजह है कि अब सिर्फ बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या वही पैसा पूरे रिटायरमेंट में आपका साथ देगा?

क्या 1 करोड़ रुपये काफी होंगे?

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के समय 1 करोड़ रुपये हैं। इस पर हर साल 8% रिटर्न मिलता है। आप पहले साल 3.5 लाख रुपये निकालते हैं और हर साल महंगाई के हिसाब से निकासी 5% बढ़ाते हैं।

ऐसे में 30 साल बाद भी आपका फंड खत्म नहीं होता। उल्टा यह करीब 3.37 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वजह यह है कि शुरुआती वर्षों में निवेश का रिटर्न निकाली गई रकम से ज्यादा रहता है। इसलिए बाकी पैसा लगातार बढ़ता रहता है।

सालशुरुआत में फंडसालाना निकासीसाल के अंत में फंड
1₹1.00 करोड़₹3.50 लाख₹1.05 करोड़
5₹1.19 करोड़₹4.25 लाख₹1.24 करोड़
10₹1.48 करोड़₹5.43 लाख₹1.54 करोड़
15₹1.82 करोड़₹6.93 लाख₹1.90 करोड़
20₹2.23 करोड़₹8.84 लाख₹2.33 करोड़
25₹2.71 करोड़₹11.29 लाख₹2.82 करोड़
30₹3.25 करोड़₹14.41 लाख₹3.37 करोड़

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

आज सबसे बड़ा जोखिम लॉन्गेविटी रिस्क है। यानी आपकी बचत खत्म हो जाए, लेकिन जिंदगी बाकी रहे।

एक सर्वे के मुताबिक, औसत भारतीय ने रिटायरमेंट के लिए सिर्फ 28 लाख रुपये जोड़े हैं। जबकि आराम से रिटायर होने के लिए उसे करीब 1 करोड़ रुपये चाहिए। यानी जरूरत और बचत के बीच बड़ा अंतर है, औसतन करीब 72 लाख का।

महंगाई और इलाज का खर्च

रिटायरमेंट में सबसे बड़ा दुश्मन महंगाई है। आज 50,000 रुपये महीने का खर्च है, तो 30 साल बाद यही खर्च 2 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है।

इसके ऊपर मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ दवाइयां, टेस्ट और अस्पताल का खर्च भी बढ़ता जाता है। इसलिए रिटायरमेंट का बड़ा हिस्सा इलाज पर खर्च हो सकता है।

जल्दी शुरुआत करना जरूरी

रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। कंपाउंडिंग को ज्यादा समय मिलेगा और छोटी-छोटी बचत भी बड़ा फंड बन सकती है।

अब रिटायरमेंट को सिर्फ नौकरी खत्म होने का दिन मत समझिए। यह 25-30 साल की लंबी वित्तीय यात्रा है। अगर इस सफर को आराम से बिताना है, तो तैयारी भी समय रहते शुरू करनी होगी।

इन 5 बातों का भी ध्यान रखें

  • रिटायरमेंट की तैयारी जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम बोझ पड़ेगा।
  • अपना सारा पैसा एक ही जगह मत लगाइए। अलग-अलग विकल्पों में बांटकर निवेश करें।
  • हर साल महंगाई को ध्यान में रखकर अपने निवेश और खर्च का हिसाब जरूर देखें।
  • इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग पैसा रखें।
  • रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी कैसे आएगी, इसकी योजना पहले से बना लें। SWP, SCSS और दूसरे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

2 reasons to buy the Maruti Alto K10, 2 reasons not to

2 reasons to buy the Maruti Alto K10, 2 reasons not to

The Maruti Alto K10 is one of the most affordable cars in India. It is offered with a potent engine, a fairly equipped cabin and a price tag that, despite a drop in hatchback sales over the years, has kept the Alto K10 a very relevant car in the market. But should you buy it? Here are two reasons to buy the Alto K10 and two reasons not to. 

Reasons to buy the Maruti Alto K10

Gets a zippy engine

Maruti offers the Alto K10 with a 1.0-litre 3-cylinder naturally aspirated petrol engine mated either with a 5-speed manual or a 5-speed automated manual transmission (AMT). Although producing just 69hp and 91Nm, the Alto K10’s engine feels zippy, especially with the manual transmission, which allows the Alto to accelerate vigorously. 

The engine feels the strongest in the top half of the rev range, where it also gets quite vocal. However, the engine never sounds harsh or strained, even in high revs. At city driving speeds, minor taps on the accelerator pedal are enough to keep up with the traffic. Low-speed jerkiness is, however, felt in stop-and-go traffic.

Compared to the manual gearbox, the AMT feels lethargic and takes some time to shift, especially through lower gears. However, the gearbox responds quite well during kickdown, but high-speed overtakes still require planning. It is in city traffic, especially in stop-and-go situations, where the AMT shines with the creep function, making it easier to modulate the throttle while crawling through the traffic. 

Offers an easy ownership experience

The Alto K10, since its dawn in 2010, and even after rising input costs and inflation, has remained one of the most affordable cars in India, priced from Rs 3.70 lakh. Not only is the Alto K10’s initial cost one of the lowest in the market, but its running costs are also low, mainly due to its high fuel efficiency, which Maruti claims is over 24kpl. The cost of parts and service is also relatively cheap, making the Alto K10 easy to maintain over the years.

Its compact form factor also makes it easier not only to navigate narrow city lanes, but also to park it in smaller spaces, which will be appreciated by newer drivers. The suspension system also feels robust, and makes the Alto K10 feel built to take a lot of beating without any stress. The quality of materials inside the cabin is quite good and can withstand years of wear and tear.

Reasons not to buy the Maruti Alto K10

Feels unsettled at high speeds

While the Alto K10 gets a peppy engine that loves to rev, the lack of proper steering feel does not inspire much confidence to push the hatchback to triple-digit speeds. At high speeds, a lot of steering corrections have to be made to stay in the correct lines, and a fair bit of body roll is also felt inside the cabin. Under hard braking too, the Alto K10 does not feel sure-footed and shimmies a bit, especially on uneven terrain.

Higher variants are expensive

Although the Maruti Alto K10’s price starts at Rs 3.70 lakh, it goes up to Rs 5.45 lakh, which does not feel affordable, especially for a car whose price is at the core of its appeal. The AMT prices, which range from Rs 4.95 lakh to Rs 5.45 lakh, are especially high and feel out of reach compared to the manual variants, making a buyer think twice before choosing an AMT over the manual. 

Prices are ex-showroom, India.

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर उम्मीद जताई और 2026-27 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया। वहीं, महंगाई के अनुमान में कटौती की गई है। RBI ने कहा कि देश में घरेलू मांग मज़बूत है,एक्सपोर्ट बढ़ा है,निवेश गतिविधि भी अच्छी है और ग्लोबल फ्रंट में बनी अनिश्चितताओं में कमी आ रही है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के फैसलों के बारे में बताते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष,ट्रेड टेंशन और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल माहौल में अस्थिर के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत कायम हैं।

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान हुई मजबूत

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती घरेलू मांग,मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज एक्टिविटी में लगातार बनी तेजी और मज़बूत एक्सपोर्ट से इकोनॉमी को सपोर्ट मिल रहा है,जिससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान और मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इंडियन इकॉनमी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसको ध्यान में रखते हुए आरबीआई में 2026-27 के अपने रियल GDP ग्रोथ अनुमान को बदलकर 6.7 फीसदी कर दिया है। RBI को उम्मीद है कि पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 7.0 फीसदी,दूसरी तिमाही में 6.4 फीसदी,तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहेगी। हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी कायम

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी, मज़बूत डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन,इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हो रहे सरकारी खर्च, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट में बढ़त से इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में डाइवर्सिफिकेशन,बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट और मार्केट डाइवर्सिफिकेशन से भी एक्सटर्नल डिमांड को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

दूसरे फेज की महंगाई बढ़ने को जोखिम कायम

RBI ने अपने महंगाई के अनुमान में भी बदलाव किया। उसका मनना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में रिटेल महंगाई 5.0 फीसदी रह सकती है। पहली तिमाही में महंगाई पहले के अनुमान से कम रही है, इसके चलते आगे के लिए भी अच्छे संकेत मिल रहे है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई में हाल में देखने को मिली बढ़ोतरी की मेन वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में आई तेजी है,न कि बड़े पैमाने पर आई डिमांड।

RBI को उम्मीद है कि खुदरा महंगाई इस फाइनेंशियल ईयर के तीसरे क्वार्टर में पीक पर होगी और उसके बाद कम हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि एल नीनो,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाएं महंगाई के अनुमान पर असर डाल रहे हैं,जबकि खाने की चीजो,फ्यूल और दूसरी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी से दूसरे दौर के असर एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं।

कच्चे तेल के शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वेस्ट एशिया संघर्ष से सप्लाई में आई रुकावटें जून के बाद कम हो गई थीं, लेकिन जुलाई की शुरुआत से फिर से बढ़ी मुश्किलों ने एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है।

कच्चे तेल पर RBI ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें अभी भी बहुत वोलेटाइल हैं। जून में इंडियन बास्केट क्रूड में तेज गिरावट आई थी,लेकिन वेस्ट एशिया में फिर से तनाव बढ़ने की वजह से जुलाई में कच्चे तेल कीमतें काफी बढ़ गईं,जिससे इसके शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से इनपुट कॉस्ट बढ़ सकता है। इससे दूसरे दौर का महंगाई का दबाव बन सकता है।

ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता का दिख सकता है असर

गवर्नर ने ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता की ओर इशारा करते हुए कहा कि नए US टैरिफ,ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ में कमी और जियोपॉलिटिकल तनाव से बाहरी माहौल पर असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि,भारत को हाल ही में हुए बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट,हेल्दी सर्विसेज एक्सपोर्ट और मजबूत इनवर्ड रेमिटेंस से सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती

RBI ने कहा कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती बनी हई है। हाल के महीनों में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट में भी सुधार देखने को मिला है। इससे डेट मार्केट में कैपिटल लाने के लिए पॉलिसीगत उपायों से मदद मिली है। नतीजतन,इस साल बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में अच्छा सरप्लस हासिल होने की उम्मीद है।

भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व अच्छी स्थिति में

RBI गवर्नर ने कहा कि भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगभग 693 अरब डॉलर की अच्छी स्थिति में है। यह दस महीने से ज्यादा का इम्पोर्ट कवर दे सकता है। RBI की एक्सचेंज-रेट पॉलिसी पर उन्होंने कहा कि हम अपनी पॉलिसी जारी रखेंगे कि यह मार्केट की ताकतों के हिसाब से तय होगी। हालांकि एक्सेंज रेट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर हस्तक्षेप किया जाएगा,सट्टेबाजी पर रोक लगेगी और गलत हरकतों को रोकेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि इकोनॉमिक एक्टिविटी में कोई बाधा न आए।

अपने संबोधन के खत्म करते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि भारत के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स ग्लोबल झटकों के खिलाफ सपोर्ट देते रहेंगे। हालांकि पॉलिसी बनाने वाले भविष्य में कोई भी पॉलिसी एक्शन लेने से पहले महंगाई,कच्चे तेल की कीमतों,मौसम की स्थिति और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखेंगे।

 

 

RBI Policy Highlights : रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव, जानिए महंगाई और ग्रोथ पर क्या है RBI गवर्नर की राय

RBI MPC Meeting Aug 2026: महंगाई कितना करेगी परेशान! आरबीआई की इस बात से कहीं खुशी-कहीं गम

RBI MPC Meeting Aug 2026: केंद्रीय बैंक आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई की रफ्तार का अनुमान घटा दिया है। इस बार की मौद्रिक नीति में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और अपना न्यूट्रल नजरिया बरकरार रखा है तो साथ ही वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन यानी कि महंगाई बढ़ने की रफ्तार के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। सिर्फ यही नहीं इस तिमाही यानी चालू वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर 2026 के इनफ्लेशन का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया है। बता दें कि आरबीआई गवर्वर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को MPC (मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी) की अहम नीतिगत फैसलों का ऐलान किया है।

इनफ्लेशन को लेकर अब RBI का ये है कैलकुलेशन

आरबीआई की एमपीसी ने वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है तो सितंबर 2026 के अनुमान को 5.1% से कम कर 4.7% किया है। हालांकि तीसरी तिमाही में इनफ्लेशन के अनुमान को 5.9% स्थिर रखा है तो चौथी तिमाही के लिए अनुमान 5.4% से बढ़ाकर 5.5% कर दिया है। इससे पहले पिछली बैठक में आरबीआई ने जून तिमाही के इनफ्लेशन के अनुमान को 4% से बढ़ाकर 4.2% कर दिया था तो सितंबर तिमाही के लिए इसे 4.4% से 5.1%, तीसरी तिमाही के लिए 5.2% से 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 4.7% से 5.4% कर दिया था।

जून महीने की बात करें तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें अधिक रहने और कई कैटेगरी में कीमतों का दबाव बढ़ने की वजह से जून में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई। यह 17 महीनों में पहली बार है जब यह आरबीआई के 4% के मीडियम-टर्म टारगेट से ऊपर गई है।

Repo Rate को लेकर क्या हुआ है फैसला

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने अपने रिव्यू बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी न्यूट्रल पर बनाए रखा है। रेपो रेट को स्थिर रखने का मतलब है कि आम लोगों के लोन की किश्तों में किसी बदलाव के आसार नहीं हैं।

आरबीआई की एमपीसी बैठक से जुड़े अहम अपडेट्स यहां पढ़ें

Maruti Suzuki to yet again hike prices from August 2026

Maruti-Suzuki-price-hike

Maruti Suzuki has announced yet another price hike across its vehicle range of up to Rs 30,000, effective from August 2026. This will be the second price hike from Maruti Suzuki in short succession, having just, following a similar hike of up to Rs 30,000 introduced in June.

  1. This will be Maruti’s third price hike in 2026 
  2. Rising input costs and commodity inflation cited as reasons 

In a regulatory filing with the stock exchanges, the company cited persistent commodity inflation and rising input costs as the primary drivers behind the adjustment. The automaker stated it attempted to absorb cost increases through internal efficiency measures and cost reduction initiatives. However, sustained pressure on operating margins necessitated “passing a fraction of the cost burden on to the market.”

When announcing its previous revision in June, Maruti Suzuki had also attributed the decision to a sustained rise in input costs and elevated inflationary pressures. 

The exact price adjustment will vary depending on the specific model and variant. The upcoming August price adjustment follows a pattern of broader industry price revisions aimed at managing raw material volatility, with Mahindra, BYD and Tata Motors among others announcing price hikes in recent weeks.

Viral Video: MP के किसान ने एक ही मंडप में करवाई परिवार के 14 बेटों की शादी…ट्रैक्टर-ट्रॉली से निकली बारात! वायरल हो रहा वीडियो

Viral Video: मध्य प्रदेश से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के सतना जिले से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बताया जा रहा कि सतना में एक परिवार ने अपने 14 बेटों की शादी एक ही मंडप में करावा दी। वीडियो में 14 नवविवाहित जोड़े शादी के पारंपरिक कपड़ों में सजे हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा कि इसमें 14 दूल्हे और 14 दुल्हनें शामिल हैं। इस अनोखे अंदाज को देखकर सोशल मीडिया पर लोग परिवार की सादगी और अलग तरीके से मनाए गए शादी समारोह की जमकर सराहना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के साथ दावा किया गया कि एक किसान ने शादी में होने वाले भारी खर्च से बचने के लिए अपने 14 बेटों का विवाह एक ही मंडप में एक साथ कराया। इस समारोह के दौरान पूरे परंपराओं का पालन किया गया और एक ही जगह सभी रस्में भी निभाई गईं। पोस्ट में ये भी कहा गया कि होटल, महंगी गाड़ियों और दूसरे खर्चों से दूरी रखते हुए पूरी बारात केवल दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निकाली गई, ताकि शादी सादगी के साथ कम खर्च में संपन्न हो सके। वहीं इस वीडियो को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं मिली है।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया कि मध्य प्रदेश के सतना में एक किसान परिवार ने बढ़ते शादी के खर्च से बचने के लिए अपने 14 बेटों और भतीजों का विवाह एक ही मंडप में कराया। पोस्ट में ये भी कहा गया कि सभी दूल्हे एक ही ट्रैक्टर-ट्रॉली में बारात लेकर पहुंचे और दुल्हनें दूसरी ट्रॉली से विदा हुईं। साथ ही इस शादी को बिना दिखावे और सादगी के साथ आयोजित होने का उदाहरण बताते हुए इसे नई सामाजिक परंपरा की शुरुआत बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोग इस पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

Retail Inflation: महंगाई का झटका! जून में बढ़कर 4.38% पहुंची, RBI के लक्ष्य से ऊपर निकली

Retail Inflation: जून महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई। मई में यह 3.93% थी। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से महंगाई में फिर तेजी आई है। यह पिछले 6 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और RBI के 4% के लक्ष्य से भी ऊपर निकल गई है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जून में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम रहे। फूड इंफ्लेशन मई के 4.78% से बढ़कर जून में 5.32% हो गई। चूंकि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इनके दाम बढ़ने का असर सीधे कुल महंगाई पर पड़ा।

होटल और रेस्तरां में खाने-पीने की सेवाएं भी 6.94% महंगी हुईं। वहीं, निजी गाड़ी चलाने का खर्च 7.35% और माल ढुलाई सेवाओं की लागत 7.70% बढ़ गई। इससे साफ है कि ईंधन और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ा है।

गहनों की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

‘अन्य व्यक्तिगत सामान’ श्रेणी सबसे ज्यादा महंगी रही। इसमें सोने-चांदी और गहने शामिल हैं। इस श्रेणी में महंगाई दर 50.17% रही। हालांकि, मई में यह 56.35% थी, यानी बढ़ोतरी की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी कम हुई है।

कुछ चीजों के दाम घटे भी

हर चीज महंगी नहीं हुई। जून में कुछ टिकाऊ सामानों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। गाड़ियों की खरीद पर महंगाई दर -4.59% रही। वहीं मनोरंजन से जुड़े टिकाऊ सामान और घर-बगीचे में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण भी सस्ते हुए। सरकार का कहना है कि GST में पहले की गई कटौती का असर इन प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दिखा।

गांवों में ज्यादा बढ़ी महंगाई

महंगाई का असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिला। जून में ग्रामीण महंगाई 4.74% रही, जो मई में 4.25% थी। वहीं शहरी महंगाई 3.53% से बढ़कर 3.92% हो गई। इससे पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों का असर गांवों में ज्यादा पड़ा।

इस साल के पहले पांच महीनों में महंगाई लगातार कम हो रही थी, लेकिन जून में इसमें फिर तेजी आ गई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें ही महंगाई की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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Gold Price Today: चांदी 5000 रुपये सस्ती हुई, सोने के भी गिरे दाम; चेक करें लेटेस्ट प्राइस

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में 24 कैरेट सोना 150 रुपये सस्ता होकर 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। शुक्रवार को चांदी 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने और चांदी के भाव?

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नरमी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की। इसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।

ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब भी बना हुआ है। दूसरी तरफ मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई (Inflation) के आंकड़ों पर है। निवेशकों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

इसके अलावा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

स्पॉट गोल्ड घटकर 4,160.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 62.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से गोल्ड में हल्की गिरावट आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग PMI, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI और फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी। इन आंकड़ों से डॉलर और सोने की कीमतों को नई दिशा मिल सकती है। उनके मुताबिक, इन अहम आर्थिक आंकड़ों के आने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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LPG Price Today: एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत! घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के नए रेट जारी, देखें- राज्यवार डिटेल्स

LPG Price Today: देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। आज (5 जुलाई) भी 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आम उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही पुराने दाम पर सिलेंडर मिलेगा। कमर्शियल उपभोक्ताओं को भी कीमतों में बड़ी कटौती का फायदा मिलेगा। अब उपभोक्ताओं की नजर अगले मासिक कीमत संशोधन पर रहेगी, जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार नए दाम तय किए जाएंगे।

जुलाई की शुरुआत राहत भरी

जुलाई 2026 में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर, CNG और PNG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 1 जुलाई से ₹173 से ₹183.50 तक की कटौती की गई है।

कमर्शियल उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

इंडियन ऑयल ने वर्ष 2026 में पहली बार कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम घटाए हैं। इस फैसले से होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत में कमी आने की उम्मीद है।

घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बावजूद देशभर में घरेलू LPG, PNG और CNG की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। साथ ही, होटल और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी अब पहले की तरह नियमित गैस आपूर्ति मिल रही है।

ATF भी हुआ सस्ता

कमर्शियल LPG के साथ-साथ एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कटौती की गई है। इसके बाद दिल्ली में ATF का नया रेट ₹110 प्रति लीटर हो गया है। इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत कम होने की संभावना है।

पश्चिम एशिया संकट का असर

हालांकि, साल 2026 की पहली छमाही में भारत की LPG खपत में 8% की गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते LPG आयात प्रभावित होना रहा। जनवरी से जून के बीच देश की LPG खपत करीब 1.47 करोड़ टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 1.60 करोड़ टन थी।

अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर

मार्च से जून 2026 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बनकर उभरा। मई महीने में गैस की खपत घटकर पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि अब आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने लगी है।

जुलाई की मुख्य बातें

घरेलू 14.2 किलोग्राम LPG: कोई बदलाव नहीं।

CNG और PNG: कीमतें स्थिर हैं।

19 किलोग्राम कमर्शियल LPG: ₹173–₹183.50 तक सस्ता।

ATF: ₹5 प्रति लीटर की कटौती।

सरकार कादावा: देशभर में LPG, CNG और PNG की पर्याप्त आपूर्ति जारी है।

भारत में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई कीमतें हर महीने की पहली तारीख को जारी की जाती हैं। तेल कंपनियां (जैसे- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों, कच्चे तेल के रुझान, रुपये-डॉलर की कीमत और अन्य बाजार कारकों की समीक्षा करती हैं। फिर उसके आधार पर नई दरें लागू करती हैं।

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मुख्य बातें

  • कीमतें हर महीने की 1 तारीख को अपडेट होती हैं।
  • घरेलू बनाम कमर्शियल: 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में हर महीने बदलाव होता है क्योंकि यह सीधे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से जुड़ा होता है। वहीं, 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में बदलाव सरकार की नीतियों और सब्सिडी के आधार पर तय होता है।

लेटेस्ट रेट चेक करने के तरीके: आप अपने शहर के सटीक रेट इंडेन, भारत गैस या एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइटों, उनके मोबाइल ऐप या अपने गैस वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) से संपर्क करके जान सकते हैं।