रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित निवेश संवाद के दौरान मध्यप्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 8 हजार 635 करोड़ रुपए के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 5 हजार 785 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। निवेश संवाद में गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, राजकोट और वडोदरा सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 500 से अधिक उद्योगपतियों, निवेशकों एवं कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और मध्यप्रदेश में निवेश के प्रति विशेष रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित मेगा निवेश संवाद इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश में देशभर से आए प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को संबोधित किया।   

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश व्यापार-व्यवसाय, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना-विस्तार और बिजनेस एक्सटेंशन के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। मध्यप्रदेश में निवेश हमेशा से ही फायदे का सौदा रहा है। उन्होंने देशभर के निवेशकों का प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश करने वालों को हमारी सरकार हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश में चल रहे विकास यज्ञ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक नीतियों को देश के उद्योग जगत से सराहना मिल रही है। उद्योग के संचालन के लिए मुख्यत: ठोस नीति, नेक नीयत और सहयोगी सरकार। मध्यप्रदेश में आपको यह तीनों ही मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने गुजरात के उद्योग जगत को आगामी प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027, भोपाल के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, आपके पास अनुभव है और हमारे पास अवसर। हमारे अवसरों को आपका अनुभव मिल जाए, तो हम मिलकर इतिहास रचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश के प्रगति पथ में सहयात्री बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए, मध्यप्रदेश में बिना किसी संकोच के और खुले दिल से निवेश कीजिए तथा हमारे साथ विकास की इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनिए।

 

एमपी में किसी बात की चिंता नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन की चिंता करने की जरूरत नहीं है। औद्योगिक भूमि रियायती दरों पर लीज पर उपलब्ध है, पर्याप्त वाटर बैंक और सरप्लस बिजली है तथा प्लग एंड प्ले जोन विकसित किए जा रहे हैं। लगभग 19 हजार एकड़ में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो सिस्टम को 'समस्याओं का अंत, सेवा तुरंत' बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बाधा का समाधान एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। सरल और सहज कनेक्टिविटी को प्रदेश की बड़ी ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क, मजबूत रेल कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक्सप्रेस-वे और हाईवेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशिक्षित और कुशल श्रम शक्ति भी बेहद आसानी से उपलब्ध है।

 

मध्यप्रदेश और गुजरात हैं जुड़वा भाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच औद्योगिक संभावनाओं एवं उच्च कोटि के परस्पर सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही राज्य जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के पास तकनीक, व्यापार और औद्योगिक अनुभव है, वहीं मध्यप्रदेश के पास प्रचुर जल, लैंड बैंक और देश के मध्य में स्थित होने का लॉजिस्टिक्स एडवांटेज है। दोनों राज्यों की इन्हीं बेजोड़ विशेषताओं के समन्वय से इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के पेट्रोकेमिकल, रसायन, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक अवसर हैं। बीना में विशाल पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी, उज्जैन में 360 एकड़ में विकसित हो रहा अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क, धार और नवसारी में पीएम मित्रा पार्क तथा पीथमपुर का मजबूत ऑटोमोबाइल आधार दोनों राज्यों की औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास जैसी नीतियों से निवेश का रास्ता आसान हुआ है और इन क्षेत्रों में 7 लाख 19 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है।

mohan yadav

मां नर्मदा के दो बेटे देश के औद्योगिक विकास के लिए बढ़ रहे हैं साथ-साथ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से गुजरात की धरती देश को समृद्धि देती आई है। गुजरात ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुष हमें दिए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत दुनिया का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है। गुजरात और मध्यप्रदेश मां नर्मदा के दो बेटों की तरह हैं। नर्मदा के जल से दोनों प्रदेशों में पेयजल और सिंचाई के पर्याप्त पानी मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध के लिए अपने संकल्प को पूरा किया है। दोनों राज्यों में उद्योग, व्यापार, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूलता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्यमी पुरुषार्थ और व्यापार से कई लोगों को रोजगार और घर चलाने का अवसर मिलता है। हम 'जियो और जीने दो' के साहचर्य सिद्धांत पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं।

 

समृद्धि वाली धरती है गुजरात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेगा निवेश संवाद कार्यक्रम में आए उद्योगपतियों और उद्यमियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि गुजरात के साथ संबंध अनेक प्रकार से महात्मा गांधी के समय से है। स्वतंत्रता आंदोलन समर में सभी राज्य संयुक्त रूप से संघर्षरत थे। गुजरात से ही सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा आधुनिक भारत की नींव रखने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण की। गुजरात में वे द्वारकाधीश बने और जगद्गुरु भी बने। गुजरात की धरती ही कृष्ण को श्री लगाने वाली और समृद्धि देने वाली धरती है। अब एक बार फिर गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ अब नया रिश्ता जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए गुजरात के सभी उद्यमी आमंत्रित हैं। उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में पूरा सहयोग प्राप्त होगा। गुजरात में पेट्रोकेमिकल , रसायन, टेक्सटाइल, फॉर्मा और एनर्जी सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। गुजरात का टेक्सटाइल तो दुनिया में प्रसिद्ध है। गुजरात के पास धार जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने 2 हजार एकड़ में बन रहे टेक्सटाइल सेक्टर के पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। यहां तेजी से निवेश आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी गुजरात से हैं। उनके नेतृत्व में भारत पूरे विश्व में सबसे अलग छवि बना रहा।

 

क्रियान्वित हो रहा समृद्धि का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मध्य समन्वय तेजी से बढ़ रहा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का जो राज्यों की समृद्धि का संकल्प था , वह क्रियान्वित हो रहा। सरदार सरोवर परियोजना के संदर्भ में राज्यों के मध्य आवश्यक सहयोग पर बल दिया गया है। दोनों राज्यों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में केंद्र का पर्याप्त समुचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। राज्यों में परस्पर सहयोग और साथ रहे, इस दृष्टि से विभिन्न क्षेत्रों में राज्य समान रूप से आगे बढ़ें, यह अनुकूलता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ठोस नीतियां लागू की हैं। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश में विशेष प्रयास हुए हैं। राज्य में बिजली की उपलब्धता सरप्लस है। मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन भी चल रही है। देश में सबसे सस्ती बिजली दर मध्यप्रदेश में है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों को लागू कर सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। निवेशकों से किए हर वादे को पूरा करते हुए बड़े उद्योग और एमएसएमई ईकाइयों को पिछले माह तक की निवेश प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया है। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते बैकलॉग सब्सिडी को भी खत्म किया है।

 

युवाओं को हर क्षेत्र में मिल रहे अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। राज्य में टूरिज्म, आईटी, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी अपार संभावनाएं हैं। राज्य में इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी और भोपाल सहित पड़ोसी जिले को जोड़कर मेट्रोपोलिटन सिटी तैयार करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। सबसे तेज गति से उद्योगों की स्थापना हो रही है। मध्यप्रदेश देश में में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में मध्यप्रदेश में हो रहे विशेष प्रयासों और अन्य सेक्टर में आ रहे निवेश का भी विवरण दिया। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों और सकारात्मक वातावरण की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

 

एमपी में अद्भुत टूरिज्म

गुजरात के वेलस्पन ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस लिमिटेड के ऑनर चिंतन ठाकर ने मध्यप्रदेश में निवेश का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश सिस्टर स्टेट होने के साथ-साथ देश के भविष्य के ग्रोथ इंजन हैं। वर्ष 2011 में हमारी कंपनी ने मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। देवास-भोपाल रोड पर अपनी यूनिट शुरू की। हमने वॉटर पाइप्स तैयार किए। मध्यप्रदेश सरकार ने केवल 12 महीने में उद्योग स्थापना के लिए जरूरी सभी अनुमतियां दे दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्यमियों और निवेशकों की सभी देनदारियां लगातार भुगतान की जा रही हैं। सिम्फनी लिमिटेड कंपनी के सीएमडी एवं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की गुजरात स्टेट कांउसिल के चेयरमेन  अचल बेकेरी ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश है। हाल के वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। घरेलू पर्यटकों की संख्या 14 करोड़ से अधिक दर्ज की गई। अब घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पारंपरिक तौर पर गोवा और हिमाचल प्रदेश की श्रेणी में शामिल हो रहा है। धार्मिक पर्यटन के लिए उज्जैन और चित्रकूट, वन्यजीव पर्यटन के लिए बांधवगढ़, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान, ऐतिहासिक विरासत के लिए खजुराहो, मांडू और सांची प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। राज्य में बढ़ते टूरिज्म को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने होमस्टे की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। टूरिज्म राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। गुजराती समुदाय के लिए मध्यप्रदेश में हॉस्पिटिलिटी सेक्टर में अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। कई गुजराती निवेशक मध्यप्रदेश को अपने दूसरे घर के रूप में देखते हैं। राज्य में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हुए हैं। गुजरात में पहले हुई इन्वेस्टर्स मीट में हजारों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश पर भरोसा दिखाते हैं। राज्य में उद्योग मित्र नीतियां, पारदर्शिता और निवेश अनुकूल वातावरण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

 

एमपी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल

अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य गुजरात ने हमेशा अपनी उद्यमिता, चुनौतियों का सामना करने और नवाचारों से देश को प्रेरित किया है। मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए एक लाख एकड़ से अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। राज्य में 8 एयरपोर्ट, 22 रेल जंक्शन और तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर इसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। राज्य सरकार ने 8 डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इनमें मुरैना में फुटवियर पार्क, उज्जैन में मेडिकल डिवाइस, रायसेन में प्लास्टिक पार्क भी शामिल हैं। सेक्टर आधारित क्लस्टर हमारी विशेषता हैं। नीति आयोग ने मध्यप्रदेश को निवेश प्रोत्साहन नीतियों के निर्माण के मामले में शीर्ष राज्य घोषित किया है। हमारी उद्योग आधारित नीतियों को देश के दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। राज्य की पॉलिसी निर्यात, निवेश अनुदान को भी बढ़ावा दे रही हैं। मध्यप्रदेश जनवरी-फरवरी 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करने जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। फूड प्रोसेसिंग के लिए राज्य में कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि पीथमपुर में ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा टेस्टिंग ट्रैक है। धार जिले में टेक्सटाइल सेक्टर का देश के सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार करोड़ से अधिक का निवेश मिल चुका है। मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पॉलिसी निवेशकों को हर क्षेत्र में मदद कर रही हैं। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर काम चल रहा है। ग्वालियर में केंद्र सरकार के सहयोग से देश का पहला टेलीकॉम मैन्यूफेक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है। पर्यटन भविष्य में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। मध्यप्रदेश वन्यजीव पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

 

आईटी सेक्टर में अपार संभावनाएं

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईटी सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में देश के दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलती हैं। यहां रहना काफी सस्ता है। टीसीएस इंदौर में अपनी यूनिट संचालित करती है, जिसमें 16 हजार से अधिक स्टॉफ काम करता है। इन्फोसिस भी राज्य में अपना विस्तार करने जा रही है। बैगलौर और हैदराबाद की अपेक्षा मध्यप्रदेश में ट्रैफिक अत्यंत सुगम है। राज्य सरकार नया स्पेस टेक पार्क स्थापित करने पर कार्य कर रही है। भोपाल में ड्रोन मैन्यूफेक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रोन टेस्टिंग के लिए ग्रीन जोन तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार स्पेस टेक पॉलिसी के अंतर्गत 40 से 60 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है। हमारी सेमीकंडक्टर पॉलिसी को देशभर से बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। राज्य सरकार उद्योग स्थापित करने के लिए किराये और स्टॉफ की सैलरी के लिए भी सहायता दे रही है।

 

मुख्यमत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की वन-टू-वन चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश संवाद के दौरान प्रमुख उद्योग समूहों के साथ 15 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हुईं। इनमें निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक विस्तार और मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अरविंद लिमिटेड के साथ पीएम मित्र पार्क में प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपए के निवेश को शीघ्र क्रियान्वित करने, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध प्रोत्साहनों और  पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर चर्चा हुई। वहीं, टोरेंट पावर लिमिटेड के साथ अनूपपुर में प्रस्तावित 1600 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना, प्रदेश की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा, अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजन और भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। पेट्रोकेमिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस एवं रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में निवेश में रुचि दिखाई। वन-टू-वन बैठकों में चिरपाल ग्रुप, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट, गुजरात अंबुजा, एजियोस पॉलीफिल्म्स, एरिस लाइफसाइंसेज सहित अन्य उद्योग समूहों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। गुजरात के निवेशकों एवं उद्योग जगत ने प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, व्यवस्थाओं और नेतृत्व के प्रति विश्वास भी व्यक्त किया।

 

सीएम डॉ. मोहन ने बताया किसने कितना किया निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सीमेंट क्षेत्र में गोल्डक्रेस्ट सीमेंट द्वारा 3,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पैकेजिंग क्षेत्र में एजियोस पॉलीफिल्म्स प्रालि द्वारा 2,500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड द्वारा 1,200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में एरिस लाइफसाइंसेज लिमिटेड द्वारा 500 करोड़ रुपए के निवेश से 800 रोजगार, टेक्सटाइल क्षेत्र में राघव वूवन एलएलपी द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 400 रोजगार, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भव्य मशीन टूल्स द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 300 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में जय केमिकल इंडस्ट्रीज प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार तथा पैकेजिंग क्षेत्र में बालाजी मल्टीफ्लेक्स प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में श्रद्धा स्पन प्रालि द्वारा 160 करोड़ रुपए के निवेश से 600 रोजगार, अन्य क्षेत्र में इनर इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स एंड सिस्टम्स प्रालि द्वारा 150 करोड़ रुपए के निवेश से 160 रोजगार, एयरोस्पेस एवं डिफेंस क्षेत्र में ऑप्टिमाइज्ड ग्रुप द्वारा 100 करोड़ रुपए के निवेश से 120 रोजगार, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में जेएमके फूड द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 80 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में विबफास्ट ग्रुप द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 75 रोजगार तथा अरुणाया ऑर्गेनिक्स लिमिटेड द्वारा 25 करोड़ रुपए के निवेश से 50 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इन सभी निवेश प्रस्तावों से कुल 8 हजार 635 करोड़ रुपए का निवेश और 5 हजार 785 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को पिछले ढाई वर्षों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने निवेशकों को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

jawer airport

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट पार्किंग स्थल पर बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जिन्हें जेवर का अभूतपूर्व विकास नहीं दिखाई देता, उन्हें केवल गड्ढे और जलभराव नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर कमियों को दूर करने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसे प्रदेश में हो रहे विकास से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति बताया।

 

धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि बारिश के बाद विपक्ष को यहां गड्ढे और जलभराव दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसी धरती पर खड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, विश्वस्तरीय सड़कें, औद्योगिक निवेश और हजारों युवाओं के लिए पैदा हो रहे रोजगार के अवसर नजर नहीं आ रहे। विधायक ने कहा कि एक समय जेवर क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आज यह उत्तर प्रदेश के बदलते औद्योगिक और आर्थिक स्वरूप का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेवर को देश-दुनिया के मानचित्र पर नई पहचान दी है।

 

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में एयरपोर्ट वर्षों तक चर्चा और कागजों तक सीमित रहा, आज वे इसके आसपास बारिश के पानी को लेकर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें जेवर में हुआ विकास और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर स्वीकार नहीं हो रही है।

 

विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे

 

धीरेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जलभराव या किसी तकनीकी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है। उन्होंने कहा, विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे। कमी जहां होगी, उसे ठीक कराया जाएगा, लेकिन कुछ समय के जलभराव को जेवर और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक विकास पर पर्दा डालने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा।

जेब में ₹0 कैश, फिर भी घूमेंगे विदेश! देखें कहां काम करेगा भारतीय UPI

कभी भी अब्रॉड ट्रैवल में सबसे बड़ी परेशानी होती है पेमेंट करना। पहले लोगों को कैश बदलवाना पड़ता था या इंटरनेशनल कार्ड साथ रखना पड़ता था। लेकिन अब भारत के लोगों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। कई देशों में UPI से सीधे मोबाइल के जरिए पेमेंट की सुविधा मिलने लगी है, जिससे शॉपिंग करना, होटल का बिल पेमेंट या रेस्टोरेंट में पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

स्पेन की तैयारी 

जल्दी ही स्पेन भी अब वह देश होगा, जहां जाकर भारत के लोग UPI से आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दुकानों पर सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैवल पहले से ज्यादा आसान होगा।

नेपाल और भूटान 

नेपाल और भूटान घूमने जाने वाले भारतीयों के लिए UPI काफी काम की फैसिलिटी है। यहां कई दुकानों, होटलों और आउटलेट पर UPI से पेमेंट किया जा सकता है। इससे करेंसी चेंज करने की परेशानी कम हो जाती है और मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

ग्रीस 

ग्रीस भी कुछ समय पहले UPI फैसिलिटी अपनाने वाले देशों में जुड़ चूका है। अगर आप एथेंस की हिस्टोरिक साइट देखने जाएं या सेंटोरिनी और माइकोनोस आइलैंड की सैर करें, तो कई जगहों पर डिजिटल पेमेंट करने की फैसिलिटी मिल सकती है। इससे शॉपिंग करना और घूमना दोनों आसान हो जाते हैं।

सिंगापुर

सिंगापुर उन देशों में है, जहां भारतीय UPI को अपनाया गया। यहां टूरिस्ट शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और कई जगहों पर आसानी से मोबाइल से पेमेंट कर सकते हैं। इससे बार-बार कैश निकालने या पैसे बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कतर और यूएई

कतर, दुबई और अबू धाबी वाले पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी UPI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर QR कोड स्कैन करके आसानी से पेमेंट किया जा सकता है। इससे ट्रैवल में पेमेंट करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका

फ्रांस यूरोप का पहला देश था, जिसने UPI पेमेंट की शुरुआत की। इसके बाद मॉरिशस और श्रीलंका ने भी यह फैसिलिटी शुरू कर दी थी। अब इन देशों में कई होटल, लोकल मार्केट, बीच, रेस्टोरेंट पर टूरिस्ट आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं। इससे घूमने-फिरने का एक्सपीरियंस आसान बन जाता है।

टूरिस्ट बेनिफिट 

दुनिया के कई देशों में UPI की सुविधा मिलने से भारत के लोग का काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब हर बार फॉरेन करेंसी साथ रखने या इंटरनेशनल कार्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां UPI अवेलेबल है, वहां मोबाइल से QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है। जो भी देश इस फैसिलिटी को अपना रहे हैं, वहां ट्रैवल करना अब आसान और सेफ होता जा रहा है।

ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किए में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प ने कहा- अगर कोई हमला होता तो उसी प्लेन को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगातार धमकियां मिलती रहती हैं।
कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं। यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

Photo: एक फ्रेम में अमित शाह और राहुल गांधी, तस्वीर ने खींचा सोशल मीडिया का ध्यान! पहली बार दिखा दुर्लभ राजनीतिक नजारा

Supriya Sule Daughter Reception Photo: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (10 अगस्त) रात आयोजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले की हाई-प्रोफाइल वेडिंग रिसेप्शन पार्टी में देश की राजनीति का एक बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिला। संसद में राजनीतिक मुद्दों पर अक्सर एक-दूसरे पर हमला करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक ही फ्रेम में नजर आए।

दोनों नेताओं की तस्वीर सामने आते ही यह सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। रिसेप्शन समारोह में अमित शाह और राहुल गांधी एक-दूसरे से कुछ ही दूरी पर खड़े दिखाई दिए। जैसे ही अमित शाह मंच की ओर बढ़े सुप्रिया सुले ने गृह मंत्री को आगे जाने का इशारा किया। हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए शाह का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है।

अमित शाह ने नवविवाहित कपल को दिया आशीर्वाद

समारोह के दौरान अमित शाह जब मंच की ओर बढ़े तो सुप्रिया सुले ने उन्हें आगे जाने का इशारा किया। फिर अमित शाह ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया और नवविवाहित जोड़े के पास पहुंचे। रेवती सुले और उनके पति ने अमित शाह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद गृह मंत्री ने नवविवाहित जोड़े को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया। इस पूरे पल को वहां मौजूद फोटोग्राफरों ने कैमरों में कैद कर लिया। इसी दौरान राहुल गांधी भी अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ समारोह में पहुंचे। उनके साथ सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं।

राहुल गांधी भी पहुंचे मंच पर

रिसेप्शन में मेहमानों का अभिवादन करने के लिए सोनिया गांधी अपने पूरे परिवार के साथ मंच पर पहुंचीं। इसी दौरान वह मंच के एक छोर की ओर चली गईं। सुप्रिया सुले उन्हें वापस नवविवाहित जोड़े के पास लेकर आईं। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी को भी जोड़े के बगल में खड़ा किया।

इसके बाद सुप्रिया सुले खुद एक तरफ हट गईं। फिर वहां मौजूद फोटोग्राफरों को ऐतिहासिक तस्वीरें लेने का मौका मिला। इस तरह समारोह में अमित शाह और राहुल गांधी दोनों एक ही कार्यक्रम और एक ही मंच के आसपास नजर आए। इस समारोह में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी आकर्षण के केंद्र रहे।

Sule’s Daughter’s Reception_

एक समारोह में अलग-अलग दलों के बड़े नेता

दिल्ली के 6 जनपथ में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल रिसेप्शन में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के कई बड़े नेता पहुंचे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और NCP नेता प्रफुल्ल पटेल समेत कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।

Sule’s Daughter’s Reception

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इतने बड़े नेताओं का एक ही निजी समारोह में एक साथ पहुंचना चर्चा का विषय रहा। सोशल मीडिया पर चर्चा के दौरान खासतौर पर अमित शाह और राहुल गांधी की एक फ्रेम में मौजूदगी को इस आयोजन का सबसे खास ऐतिहासिक राजनीतिक क्षण माना गया।

जून में हुई थी रेवती सुले की शादी

सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले ने जून में मुंबई में नागपुर के उद्योगपति सारंग लखानी के साथ शादी की थी। दिल्ली में आयोजित यह रिसेप्शन शादी के बाद आयोजित एक भव्य समारोह था। इस समारोह में राजनीति, उद्योग और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रही।

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Noida Plot Scheme: नोएडा एयरपोर्ट के पास घर बनाने का सुनहरा मौका! YEIDA ला रहा 2 नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम, जानिए सबकुछ

YEIDA Residential Plot Schemes: उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रेजिडेंशियल प्लॉट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) नवरात्रि के दौरान दो नई रिहायशी प्लॉट योजनाएं लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई योजनाओं में पहली स्कीम कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इन दोनों योजनाओं की घोषणा अक्टूबर में होने की संभावना है।

आपके बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 जून को फ्लाइट ऑपरेशन शुरू हुए थे। इसके दो दिन बाद कार्गो टर्मिनल भी खुल गया था। YEIDA के एडिशनल CEO शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि अथॉरिटी अभी स्कीम की बारीकियों पर काम कर रही है। जल्द ही प्लॉट की सही संख्या और अन्य जानकारी की घोषणा की जाएगी।

40 वर्गमीटर के प्लॉट वाली होगी LIG स्कीम

हाल ही में YEIDA ने अक्टूबर में नवरात्रि के दौरान दो नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, इनमें से एक स्कीम कम आय वाले ग्रुप के लिए होगी। इसमें 40 वर्ग मीटर के प्लॉट मिलेंगे। दूसरी स्कीम आम जनता के लिए होगी। इसमें प्लॉट का साइज़ 162 से 300 वर्ग मीटर के बीच होगा।

दोनों स्कीम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पास सेक्टर 5-A में शुरू की जाएंगी। यानी अलग-अलग जरूरत और बजट वाले लोग अपनी पसंद के आकार का प्लॉट हासिल करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे सीमित बजट वाले लोगों को एयरपोर्ट के आसपास अपना घर बनाने का मौका मिल सकेगा।

पहले प्लॉट मिल चुका है तो नहीं कर पाएंगे अप्लाई

YEIDA ने योजनाओं में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को मौका देने के लिए एक अहम शर्त रखी है। जिन लोगों को पहले नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी या YEIDA की किसी पिछली रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम में प्लॉट मिल चुका है, वे इन नई स्कीम के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन लोगों को दोबारा लाभ लेने से रोकना है, जिन्हें पहले ही किसी प्राधिकरण की योजना के तहत रिहायशी प्लॉट आवंटित किया जा चुका है।

प्लॉट की कीमत समेत अन्य जानकारी

फिलहाल, यमुना प्राधिकरण के मुताबिक इस एरिया में रेजिडेंशियल प्लॉट का आवंटन रेट 36,260 रुपये प्रति वर्गमीटर है। हालांकि, नई योजनाओं में प्लॉट की अंतिम कीमत और अन्य शुल्क से जुड़ी जानकारी प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यह कदम यमुना अथॉरिटी द्वारा जून में एयरपोर्ट के पास ही लकी ड्रॉ के जरिए भारी संख्या में रेजिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के ठीक बाद उठाया गया है। अप्रैल में घोषित उस स्कीम को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

जून में 973 प्लॉट के लिए आए थे 1.1 लाख आवेदन

नई योजनाओं की घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब YEIDA की पिछली रिहायशी प्लॉट योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। इतने ही प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज़्यादा वैलिड एप्लीकेशन आए थे। बेहतर एयर कनेक्टिविटी, शानदार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इलाके में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्रोथ की संभावनाओं ने इस क्षेत्र को घर खरीदारों के लिए एक आकर्षक जगह बना दिया है। यह स्कीम अप्रैल में घोषित की गई थी। इसमें 973 प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोएडा एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी जमीन को लेकर लोगों में कितनी मजबूत दिलचस्पी है।

नोएडा एयरपोर्ट के कारण बढ़ी इलाके की डिमांड

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेजी से विकास हो रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस इलाके में कनेक्टिविटी एवं निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। बेहतर हवाई संपर्क के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की उम्मीद ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को घर खरीदारों और निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी प्लॉट की योजनाओं में बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर रहे हैं। अब नवरात्रि के दौरान प्रस्तावित इन दो नई स्कीमों पर भी हजारों-लाखों लोगों की नजर रहने की उम्मीद है।

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Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के इस मंदिर में एक साथ कर सकते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, उज्जैन की मिट्टी से बनी है महाकाल की प्रतिमूर्ति

Palamu Jyotirlinga Temple: शिव भक्तों के लिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा बेहद पावन और पवित्र यात्रा है। लेकिन, इनमें से कुछ बेहद दुर्गम स्थानों पर स्थित हैं, जहां हर किसी के लिए पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद, हर शिवभक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा अपने मन में जरूर रखता है। शायद झारखंड के पलामू स्थिति भगवती भवन मंदिर का निर्माण भी इसी सोच के साथ किया गया होगा। इस मंदिर के परिसर में एक ही छत के नीचे सभी 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यानी श्रद्धालु एक यात्रा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का पुण्य पा सकते हैं।

उज्जैन की मिट्टी से बनी महाकाल की प्रतिमूर्ति

अपनी इस अनोखी विशेषता के कारण यह शिवभक्तों के बीच दिलचस्पी का केंद्र है। खासतौर से उन भक्तों के लिए, जो कम भीड़-भाड़ वाली धार्मिक जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। भगवती भवन मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों प्रतिरूप होने के साथ ही यहां स्थित महाकाल की प्रतिमूर्ति भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति को उज्जैन से लाई गई मिट्टी से बनाया गया है। पारंपरिक रूप से, भक्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करते हैं। हालांकि, भगवती भवन में, इन पवित्र रूपों का अनुभव एक ही परिसर में किया जा सकता है।

प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड का पलामु

शिव भक्तों के लिए, भगवती भवन एक अलग तरह का तीर्थ अनुभव देता है। कई राज्यों में घूमने के बजाय, श्रद्धालु एक ही जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। पलामू अपने जंगलों, जंगली जानवरों और खूबसूरत नजारों के लिए ज्यादा जाना जाता है। हालांकि इस इलाके में कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं। जिला प्रशासन के अथक प्रयासोंक की बदौलत यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जगहों के साथ-साथ अन्य टूरिस्ट आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

कैसे पहुंचें पलामु

पलामू का जिला हेडक्वार्टर मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) है, जो सड़क और रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे पास का एयरपोर्ट रांची में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मेदिनीनगर से लगभग 165 km दूर है।

ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां पर रेगुलर पैसेंजर और एक्सप्रेस सर्विस हैं, जिनमें नई दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों के लिए सीधे ट्रेनें शामिल हैं।

पलामू रांची, पटना, वाराणसी और आस-पास के दूसरे शहरों से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि डाल्टनगंज रांची से लगभग 165 km दूर है, और रांची और झारखंड के दूसरे बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों से रेगुलर बस सर्विस उपलब्ध हैं।

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ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की विश्वसनीय धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली कैटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। उन्होंने इसे “पुराने समय की याद में” उड़ान बताई थी। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी और अपनी जांच में मिली अन्य सामग्री के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक कैटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी कैटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3Harris Technologies ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।