अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक केटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीस ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कोलंबिया में सोमवार को 7.4 तीव्रता के भूकंप सेअब तक 132 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 570 लोगों के घायल होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में 86 इमारतें ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। इनमें 37 पूरी तरह तबाह हो गईं। 18 स्वास्थ्य केंद्रों और 52 स्कूलों को भी नुकसान हुआ है। इसके अलावा 7 एयरपोर्ट पर काम रोक दिया गया है। पांच शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। राष्ट्रपति ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी है। परेरा में सबसे ज्यादा मौतें परेरा शहर में अकेले 60 लोगों की मौत हुई है। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। राजधानी बोगोटा समेत कई शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको इलाके में सैन जोसे डेल पालमार के पास था। भूकंप की गहराई 107 किलोमीटर थी। चोको की राजधानी क्विब्दो में भी कई लोग घायल हुए हैं और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने आफ्टरशॉक्स की आशंका जताई है। बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मी भेजे जाएंगे बोगोटा के मेयर ने प्रभावित इलाकों के लिए 6 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। यहां पानी, कंबल, पैक्ड खाना, हाइजीन सामान और फर्स्ट-एड किट जमा की जा रही हैं। प्रभावित शहरों में राहत और बचाव अभियान के लिए बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मियों को भेजने की तैयारी है।
कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है। यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 132 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 570 लोगों के घायल होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में 86 इमारतें ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। 18 स्वास्थ्य केंद्रों और 52 स्कूलों को भी नुकसान हुआ है। इसके अलावा 7 एयरपोर्ट पर काम रोक दिया गया है। पांच शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। राष्ट्रपति ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी है। भूकंप से जुड़ी 10 फोटोज
परेरा में सबसे ज्यादा मौतें परेरा शहर में अकेले 60 लोगों की मौत हुई है। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। राजधानी बोगोटा समेत कई शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको इलाके में सैन जोसे डेल पालमार के पास था। भूकंप की गहराई 107 किलोमीटर थी। बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मी भेजे जाएंगे बोगोटा के मेयर ने प्रभावित इलाकों के लिए 6 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। यहां पानी, कंबल, पैक्ड खाना, हाइजीन सामान और फर्स्ट-एड किट जमा की जा रही हैं। प्रभावित शहरों में राहत और बचाव अभियान के लिए बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मियों को भेजने की तैयारी है। कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है। यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
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क्या हो अगर पहाड़ों के ऊपर से उड़कर जाया जा सके, वो भी बिना एयरपोर्ट के?
इसी सोच से उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रवि तम्टा ने 13 साल तक लगातार प्रयोग किए और एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया।
रवि के पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी न कोई बड़ी लैब थी, बस एक समस्या को हल करने की जिद थी।
उनका सपना है कि पहाड़ी इलाकों में, खासकर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान, लोगों तक जल्दी पहुँचा जा सके।
फ्लाइंग व्हीकल अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे कई और टेस्ट से गुजरना बाकी है।
लेकिन रवि की कहानी बताती है –
बड़े आविष्कार हमेशा बड़ी लैब में नहीं जन्म लेते। कभी-कभी एक मुश्किल सवाल ही उनकी शुरुआत होता है।
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भारत का एक अरबपति परिवार वियतनाम के न्हा ट्रांग में बेहद भव्य शादी करने जा रहा है। उद्योगपति परिवार ने वियतनाम में शादी करने के लिए करीब 47 करोड़ रुपये में रिसॉर्ट बुक किया है। अरबपति परिवारों का एक भारतीय जोड़ा दिसंबर महीने में वियतनाम के न्हा ट्रांग में शादी करेगा। इस शादी पर 130 अरब वियतनामी डोंग से ज्यादा, यानी करीब 47.36 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
Vietnam.vn की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह शादी दिसंबर में होगी। इसमें 1,400 से ज्यादा मेहमान शामिल हो सकते हैं। खास बात यह है कि मेहमानों को चार्टर विमानों के जरिए न्हा ट्रांग लाया जाएगा।8 अगस्त को खान होआ प्रांत के संस्कृति, खेल और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने भी इस शादी की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय अरबपति परिवार की इस ‘सुपर वेडिंग’ को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों, संस्थाओं और कारोबारियों के साथ मिलकर तैयारी की जा रही है। इस शादी को लेकर वियतनाम में भी काफी चर्चा है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर होने वाला यह आयोजन न्हा ट्रांग के पर्यटन और स्थानीय कारोबार के लिए भी खास माना जा रहा है।
वियतनाम में होने वाली भारतीय शादी होगी अब तक की सबसे बड़ी
ब्लू लेमन वियतनाम कंपनी लिमिटेड के जनरल डायरेक्टर फान क्वांग दाई इस भव्य शादी के आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शादी में शामिल होने वाले मेहमान सीधे भारत से खान होआ के कैम रान एयरपोर्ट पहुंचेंगे। फान क्वांग दाई के मुताबिक, मेहमान शादी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए न्हा ट्रांग के एक लग्जरी रिसॉर्ट में चार रातें रुकेंगे।
उन्होंने बताया कि यह शादी वियतनाम में अब तक होने वाली सबसे बड़ी भारतीय शादियों में से एक हो सकती है। इसमें मेहमानों की संख्या पहले दा नांग में हुई भारतीय शादियों से काफी ज्यादा होगी। दा नांग में हुई पिछली भारतीय शादियों में करीब 300 से 500 मेहमान शामिल हुए थे। इस बार 1,400 से ज्यादा मेहमानों के आने की उम्मीद है। ऐसे में इस शादी का आयोजन और तैयारियां भी बड़े स्तर पर की जा रही हैं।
भारत से खास शेफ की टीम बुलाई जाएगी
इस भव्य शादी में मेहमानों के लिए खाना भारत से बुलाई गई खास टीम तैयार करेगी। अरबपति परिवार अपने मेहमानों के लिए भोजन बनाने के लिए भारत से शेफ की पूरी टीम साथ लेकर आएगा। आयोजक शादी के सभी कार्यक्रमों को बिना किसी परेशानी के पूरा कराने के लिए वियतनाम की कई सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस आयोजन में खान होआ प्रांत का संस्कृति, खेल और पर्यटन विभाग, प्रांतीय पीपल्स कमेटी, कस्टम्स, इमिग्रेशन और प्रांतीय पुलिस सहयोग कर रहे हैं। सभी विभाग मिलकर मेहमानों के आने-जाने, सुरक्षा और दूसरे जरूरी इंतजामों को संभालेंगे।
न्हा ट्रांग भारतीय शादियों के लिए क्यों बन रहा है पसंदीदा जगह?
खान होआ प्रांत का निवेश, व्यापार और पर्यटन संवर्धन केंद्र भारत को पर्यटन के लिए एक बड़ा और संभावनाओं वाला बाजार मानता है। भारत की आबादी 1.4 अरब से ज्यादा है, ऐसे में यहां से बड़ी संख्या में पर्यटकों के वियतनाम आने की उम्मीद रहती है। भारतीय पर्यटकों की पसंद और खर्च करने का तरीका भी अलग-अलग होता है। इनमें कम बजट में यात्रा करने वाले लोगों से लेकर महंगे और लग्जरी पर्यटन पर ज्यादा खर्च करने वाले पर्यटक भी शामिल हैं।
भारत में शादी के लिए विदेश जाने का चलन यानी वेडिंग टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान के मुताबिक, 2024-25 के शादी के सीजन में भारत में करीब 48 लाख शादियां होने की उम्मीद थी। इन शादियों से लगभग 68 अरब डॉलर का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया था। यही वजह है कि न्हा ट्रांग जैसे पर्यटन स्थल भारतीय परिवारों को अपनी भव्य शादियों के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। शानदार रिसॉर्ट, समुद्र तट और विदेशी माहौल जैसी सुविधाएं इसे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए खास विकल्प बनाती हैं।
खान होआ की नजर लग्जरी वेडिंग टूरिज्म पर
खान होआ अपने प्राकृतिक नजारों, आधुनिक पर्यटन सुविधाओं और शानदार रिसॉर्ट्स की वजह से भारतीय परिवारों के लिए शादी के एक खास डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यहां मौजूद वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि यह जगह भारत के लग्जरी वेडिंग मार्केट में अपनी जगह बना सकती है। न्हा ट्रांग में होने वाली आगामी शादी इसका बड़ा उदाहरण है। इस शादी में 1,400 से ज्यादा मेहमान शामिल होंगे, जो एक लग्जरी रिसॉर्ट में चार रातों तक ठहरेंगे। आयोजकों के मुताबिक, यह शादी वियतनाम में अब तक होने वाली सबसे बड़ी भारतीय शादियों में से एक हो सकती है। इससे न्हा ट्रांग को भारतीय डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए एक प्रमुख जगह के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है।
पैकेज प्राइस और ट्रैवल डेट
IRCTC का थाईलैंड टूर पैकेज ₹49,500 प्रति व्यक्ति से शुरू हो रहा है। ट्रिपल शेयरिंग में एक व्यक्ति का किराया ₹49,500 है, जबकि डबल शेयरिंग के लिए ₹61,300 और सिंगल ऑक्यूपेंसी के लिए ₹57,000 देने होंगे। बच्चों के लिए किराया ₹30,300 रखा गया है। बुकिंग के समय 2% TCS अलग से देना होगा, जबकि 5% GST पैकेज की कीमत में शामिल है। यह 5 रात और 6 दिन का थाईलैंड टूर है, जो 12 नवंबर से 17 नवंबर 2026 तक चलेगा। जर्नी की शुरुआत कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगी। ट्रैवलर फ्लाइट से बैंकॉक पहुंचेंगे और वहां से आगे का सफर टूर प्लानिंग के हिसाब से करेंगे।
पहला दिन – पटाया
बैंकॉक एयरपोर्ट पहुंचने के बाद ट्रैवलर को पटाया ले जाया जाएगा। एयरपोर्ट से पटाया तक का सफर करीब ढाई घंटे का होगा। होटल पहुंचकर चेक-इन और नाश्ता करने के बाद टाइगर पार्क घूमने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच किया जाएगा। शाम को पटाया का फेमस अल्काजार शो देखने जाएंगे। शो के बाद भारतीय रेस्टोरेंट में डिनर होगा और रात पटाया के होटल में बिताई जाएगी।
दूसरा दिन – कोरल आइलैंड
दूसरे दिन सुबह नाश्ते के बाद कोरल आइलैंड घूमने का प्लान है। यात्रियों को स्पीडबोट से आइलैंड तक ले जाया जाएगा, जहां समुद्र और खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है। कोरल आइलैंड घूमने के बाद भारतीय रेस्टोरेंट में लंच कराया जाएगा। इसके बाद जेम्स गैलरी देखने का मौका मिलेगा। शाम को कुछ समय अपने हिसाब से बिताया जा सकता है। रात में डिनर के बाद पटाया के होटल में आराम करेंगे।
तीसरा दिन – बैंकॉक
तीसरे दिन पटाया से चेक-आउट करके बैंकॉक के लिए रवाना होंगे। बैंकॉक पहुंचने के बाद आधे दिन का सिटी टूर कराया जाएगा। इस दौरान मार्बल बुद्ध और गोल्डन बुद्ध जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को देखने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच किया जाएगा। शाम को चाओफ्राया नदी में डिनर क्रूज का आनंद लिया जा सकेगा। नदी के खूबसूरत नजारों के बीच डिनर के बाद रात बैंकॉक के होटल में ठहरेंगे।
चौथा दिन – सफारी वर्ल्ड और मरीन पार्क
चौथे दिन बैंकॉक में घूमने के लिए स्पेशल लोकेशन है। इस दिन ट्रैवलर सफारी वर्ल्ड और मरीन पार्क जाएंगे। यहां अलग-अलग जानवरों को देखने के साथ मनोरंजक शो देख सकते है। घूमने के दौरान लंच की सुविधा भी मिलेगी। दिनभर की सैर के बाद यात्री बैंकॉक के होटल में वापस आएंगे और रात वहीं रुकेंगे।
पांचवां दिन – बैंकॉक ओशन वर्ल्ड
पांचवें दिन होटल से चेक-आउट करने के बाद SEA LIFE बैंकॉक ओशन वर्ल्ड घूमने जाएंगे। यहां समुद्री जीवों और पानी के अंदर की दुनिया को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच कराया जाएगा। यदि टाइम मिले तो एयरपोर्ट जाने से पहले बैंकॉक में शॉपिंग भी की जा सकती है। इसके बाद वापसी की फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट रवाना होंगे।
पैकेज फैसिलिटी
IRCTC के इस पैकेज में जर्नी को आसान बनाने के लिए कई फैसिलिटीज शामिल की गई हैं। इसमें थाई लायन एयरलाइंस से कोलकाता और बैंकॉक के बीच आने-जाने का हवाई किराया, तीन सितारा होटल में पांच रातों का ठहराव, नाश्ता, लंच और डिनर शामिल हैं। ट्रैवलर को ट्रैवल इंश्योरेंस और लोकल टूर गाइड की फैसिलिटी भी मिलेगी।
कुछ खर्च ऐसे हैं, जो पैकेज की कीमत में शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें वीज़ा फीस, 2% TCS, फ्लाइट में मिलने वाला खाना, सीट चुनने का शुल्क, टिप्स और निजी खर्च शामिल हैं। इसलिए टूर बुक करने से पहले इन एक्स्ट्रा खर्चों को भी अपने बजट में शामिल करें।
जरूरी डॉक्यूमेंट
थाईलैंड की ट्रिप से पहले पैसेंजर को वहां के लेटेस्ट एंट्री नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। पासपोर्ट की वैलिडिटी कम से कम छह महीने होनी चाहिए। इसके अलावा वापसी का टिकट, होटल बुकिंग की जानकारी, फोटो और पैसे होने का प्रमाण जैसे डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है। Thailand Digital Arrival Card (TDAC) भी जरूरी हो सकता है।
चीन के पूर्वी हिस्से से रविवार को करीब 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान टकराया है। इसके असर से पूर्वी और मध्य चीन में तेज बारिश हो रही है। शंघाई में 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, तूफान के कारण पिछले कुछ दिनों में 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। साथ ही, 1,500 से ज्यादा इमरजेंसी शेल्टर बनाए गए। चीन के नेशनल मेटियोरोलॉजिकल सेंटर (NMC) ने सोमवार सुबह टाइफून अलर्ट को घटाकर सबसे निचले स्तर के ब्लू अलर्ट पर कर दिया। हालांकि, झेजियांग के कुछ हिस्सों में फ्लैश फ्लड का सबसे गंभीर अलर्ट अभी भी जारी है। कई जगह लैंडफॉल की भी खबरें सामने आई हैं। 943 उड़ाने रद्द की गई, लोकल ट्रेन भी बंद शंघाई में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर के दो प्रमुख एयरपोर्ट पर सोमवार को 943 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दक्षिण-पश्चिम चीन के चेंगदू से रविवार को शंघाई जा रही एक फ्लाइट बारिश के कारण शंघाई में लैंड नहीं कर सकी। विमान को कुछ देर शंघाई के ऊपर चक्कर लगाने के बाद बीजिंग डायवर्ट कर दिया गया। वहां उतरने के बाद विमान रात में चेंगदू लौट गया। इसके अलावा लोकल ट्रेन समेत कई आम लोगों के लिए परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं। झेजियांग के निंगबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार दोपहर से उड़ानें फिर शुरू कर दी गईं। हालांकि, एयरपोर्ट ने कहा कि तूफान का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कुछ उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द करना पड़ सकता है। बीजिंग में बारिश का रेड अलर्ट जारी चीन की राजधानी बीजिंग भी अलर्ट पर है। शहर के पांच जिलों में सोमवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया। कुछ इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बताया गया। बीजिंग के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। लोगों को जरूरी काम के अलावा बाहर न निकलने और आउटडोर गतिविधियां रोकने की सलाह दी गई है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान अब उत्तर-पश्चिम दिशा में 15 से 20 kmph की रफ्तार से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, डॉल्फिन का क्लाउड सिस्टम करीब 1,300 km तक फैला है। चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
जापान में तबाही मचाने के बाद डॉल्फिन तूफान अब चीन पहुंच गया है। रविवार देर रात इसने पूर्वी चीन के तटीय इलाकों में दस्तक दी। उस समय इसकी रफ्तार करीब 150 किमी प्रति घंटे थी। इसके बाद कई शहरों में तेज बारिश शुरू हो गई। सबसे ज्यादा असर शंघाई में दिखा, जहां पिछले 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, खतरे को देखते हुए 10 लाख से ज्यादा लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था। चीनी मीडिया SCMP के मुताबिक अब तूफान कमजोर पड़ रहा है। इसलिए चीन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी का स्तर घटा दिया है। हालांकि, लगातार बारिश की वजह से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। कुछ जगहों पर पहाड़ों से मिट्टी और चट्टानें खिसकने की घटनाएं भी हुई हैं। टाइफून की तस्वीरें… 943 उड़ाने रद्द की गई, लोकल ट्रेन भी बंद शंघाई में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर के दो प्रमुख एयरपोर्ट पर सोमवार को 943 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दक्षिण-पश्चिम चीन के चेंगदू से रविवार को शंघाई जा रही एक फ्लाइट बारिश के कारण शंघाई में लैंड नहीं कर सकी। विमान को कुछ देर शंघाई के ऊपर चक्कर लगाने के बाद बीजिंग डायवर्ट कर दिया गया। वहां उतरने के बाद विमान रात में चेंगदू लौट गया। इसके अलावा लोकल ट्रेन समेत कई आम लोगों के लिए परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं। झेजियांग के निंगबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार दोपहर से उड़ानें फिर शुरू कर दी गईं। हालांकि, एयरपोर्ट ने कहा कि तूफान का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कुछ उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द करना पड़ सकता है। बीजिंग में बारिश का रेड अलर्ट जारी चीन की राजधानी बीजिंग भी अलर्ट पर है। शहर के पांच जिलों में सोमवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया। कुछ इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बताया गया। बीजिंग के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। लोगों को जरूरी काम के अलावा बाहर न निकलने और आउटडोर गतिविधियां रोकने की सलाह दी गई है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान अब उत्तर-पश्चिम दिशा में 15 से 20 kmph की रफ्तार से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, डॉल्फिन का क्लाउड सिस्टम करीब 1,300 km तक फैला है। चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
Electric Air Taxi in india News: भारत में आने वाले कुछ सालों में हवाई सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक, भारत का लक्ष्य 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों और कारों को आसमान में उड़ान भरते देखना है। इसके लिए अगले साल से इन अत्याधुनिक विमानों की टेस्टिंग और ट्रायल को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि भारत 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी की उड़ान शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उम्मीद है कि इस नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग अगले साल तेज हो जाएगी।
हाल ही में बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए नायडू ने कहा कि इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले महानगरों के लिए आवाजाही का एक नया विकल्प बन सकते हैं। ANI के मुताबिक नायडू ने कहा, “हम चाहते हैं कि 2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें। इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है, न सिर्फ बेंगलुरु में, बल्कि मुंबई और दिल्ली में भी…।”
15 मिनट में नोएडा से गुरुग्राम
कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल से टैक्सी बुक करते हैं। लेकिन यह टैक्सी सड़क पर आने के बजाय किसी बिल्डिंग की छत पर बने खास वर्टिपैड पर आपका इंतजार कर रही है। आप लिफ्ट से ऊपर पहुंचते हैं, एक ऐसे इलेक्ट्रिक विमान में बैठते हैं जो देखने में किसी बड़े ड्रोन जैसा लगता है। कुछ ही सेकंड में वह सीधे आसमान में उड़ जाता है।
सड़क के जाम में फंसने के बजाय यह एयर टैक्सी शहर के ऊपर से उड़ते हुए आपको एयरपोर्ट तक पहुंचा देती है। दावा है कि भविष्य में ऐसी यात्रा के जरिए एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि एयर टैक्सी शुरू होने के बाद नोएडा से गुरुग्राम पहुंचने में सिर्फ 10 से 15 मिनट लगेंगे।
मंत्री ने क्या कहा?
मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरला एविएशन अगले साल पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में आ जाएगी। जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) टेस्टिंग, सुरक्षा और नियमों पर इंडस्ट्री के साथ काम करना जारी रखेंगे। नायडू ने यह भी कहा कि DGCA ने सरला एविएशन को डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल दिया है, जो कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट में एक रेगुलेटरी कदम है। मंत्री ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “2028 तक हम इसे हकीकत बनाने की योजना बना रहे हैं।”
क्या होती है इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी?
इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को टेक्नीकल भाषा में eVTOL यानी Electric Vertical Take-Off and Landing Aircraft कहा जाता है। इन टैक्सी की खासियत यह है कि इन्हें हेलीकॉप्टर की तरह रनवे की जरूरत नहीं होती। ये डायरेक्ट जमीन या वर्टिपैड से ऊपर उड़ सकते हैं। साथ ही उसी तरह नीचे उतर भी सकते हैं।

इनके डिजाइन में फ्लाइट और हेलीकॉप्टर दोनों की झलक दिखाई देती है। इनमें कई रोटर या इलेक्ट्रिक फैन लगाए जाते हैं, जो विमान के पंखों या उसके बाहरी हिस्सों पर लगे होते हैं। हेलीकॉप्टर की तरह eVTOL भी लंबवत उड़ान भर सकता है। लेकिन इसमें एक बड़े रोटर की जगह कई छोटे रोटर या फैन इस्तेमाल किए जाते हैं।
बैटरी और इलेक्ट्रिक तकनीक ने खोला रास्ता
eVTOL टेक्नोलॉजी का विचार नया नहीं है। इस दिशा में कई दशकों से काम हो रहा है। लेकिन हाल के सालों में बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति ने इसे कमर्शियल इस्तेमाल के करीब पहुंचा दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी बड़े पैमाने पर सफल होती हैं तो शहरों में सड़क ट्रैफिक का कुछ हिस्सा आसमान में शिफ्ट किया जा सकता है।
जॉर्जिया टेक के वर्टिकल लिफ्ट रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की निदेशक मर्लिन स्मिथ के मुताबिक, बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं। ऐसे में परिवहन के मौजूदा तरीकों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।
किन कामों में इस्तेमाल हो सकती हैं eVTOL?
शुरुआत में इलेक्ट्रिक एयर कारों का इस्तेमाल लोगों को कम और मध्यम दूरी तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। कई eVTOL कंपनियां एयरलाइंस के साथ मिलकर एयर-टैक्सी सर्विस शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इनका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे-
- मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में एयर टैक्सी का इस्तेमाल हो सकेगा।
- आग बुझाने और फायरफाइटिंग में भी ये काम करेगा।
- इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में, खेती और कृषि कार्यों में, पर्यटन क्षेत्र में, शहरों के बीच एयर टैक्सी सेवा का लाभ उठाया जा सकेगा।
कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?
अमेरिका में Archer, BETA Technologies और Joby जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी विकसित करने और उन्हें कमर्शियल सर्विस में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियां अंतिम FAA सुरक्षा मंजूरी के करीब पहुंच चुकी हैं। हालांकि, आम यात्रियों के लिए एयर टैक्सी की नियमित बुकिंग कब से शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। फिर भी इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का दौर लोगों की उम्मीद से काफी करीब है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह टेक्नोलॉजी?
भारत जैसे तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भारी ट्रैफिक वाले देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। खासतौर पर भारी ट्रैफिक जाम का सामने करने वाली दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में एयरपोर्ट और शहर के दूसरे हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर तकनीक, सुरक्षा, लागत और इससे जुड़े अथॉरिटी की मंजूरी से जुड़ी चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो 2028 के आसपास भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का सपना हकीकत में बदलता दिखाई दे सकता है। यानी आने वाले समय में सड़क पर कैब बुक करने के साथ-साथ मोबाइल से आसमान में उड़ने वाली टैक्सी भी बुक करने का विकल्प मिल सकता है।
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20 साल के भारतीय नागरिक वरुण बटचिगरी को जर्मनी में गिरफ्तार किया गया है। उन पर अमेरिका के एरिजोना में अपनी 19 साल की गर्लफ्रेंड जुलिसा रूबी सलाजार की गला दबाकर हत्या करने का आरोप है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, वरुण पर फर्स्ट-डिग्री मर्डर का शक है। जुलिसा का शव गुरुवार को एरिजोना यूनिवर्सिटी के पास टक्सन स्थित उसके अपार्टमेंट में मिला था। जुलिसा के परिवार ने उसकी चिंता होने पर पुलिस से वेलफेयर चेक कराने को कहा था। टक्सन पुलिस विभाग के मुताबिक, वे गुरुवार शाम करीब 4 बजे अपार्टमेंट पहुंचे, जहां जुलिसा बेहोश मिली। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने आरोपी को जर्मनी में ट्रेस किया जांचकर्ताओं का कहना है कि वरुण जुलिसा का फोन और क्रेडिट कार्ड लेकर गया था। उसने जुलिसा की मां को कई मैसेज भी भेजे। पुलिस को पता चला कि वरुण टक्सन से भाग चुका है। वह टक्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा और वहां से ह्यूस्टन की फ्लाइट ली। इसके बाद उसने जर्मनी के बर्लिन जाने वाली दूसरी फ्लाइट ली। अधिकारियों का मानना है कि वरुण भारत लौटने की कोशिश कर रहा था। उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अधिकारियों ने वरुण का पता लगाया और जर्मनी पहुंचने के बाद उसे हिरासत में लिया। उसे एरिजोना लाए जाने की उम्मीद है, जहां उस पर फर्स्ट-डिग्री मर्डर का आरोप लगाया जाएगा और उसे पिमा काउंटी एडल्ट डिटेंशन सेंटर में दर्ज किया जाएगा। रिश्ता खत्म करना चाहती थी जुलिसा इस मामले में वरुण और जुलिसा के रिश्ते और उनसे जुड़े दुर्व्यवहार के आरोपों की भी जांच हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलिसा यह रिश्ता खत्म करना चाहती थी। उसके साथ यौन हमले और दुर्व्यवहार होने की बात भी सामने आई है। 5 अगस्त को जुलिसा के रूममेट्स ने उसके कमरे से तेज चीखने की आवाज सुनी थी। इससे वे चिंतित हो गए और उन्होंने जुलिसा से संपर्क कर पूछा कि वह सुरक्षित है या नहीं। रूममेट्स को जवाब मिला कि वह ठीक है और कमरे में केवल बहस हुई थी। एक महिला ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया था कि वरुण ने हैलोवीन के दिन जुलिसा पर यौन हमला किया था। हालांकि, जुलिसा ने इस घटना की शिकायत उस समय नहीं की थी। वरुण को यूनिवर्सिटी से निकाला गया वरुण एरिजोना यूनिवर्सिटी में बिजनेस एनालिटिक्स की पढ़ाई कर रहा था। हालांकि, एक लड़ाई के बाद उसे यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया और उसकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके खिलाफ घरेलू हिंसा से जुड़े आरोपों का भी रिकॉर्ड रहा है। उसने हाल ही में नौकरी खो दी थी, जिससे उसके लिए किराया देना मुश्किल हो गया था और उसका इमिग्रेशन स्टेटस भी खतरे में पड़ गया था। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 27 साल की भारतीय महिला की हत्या:आरोपी बॉयफ्रेंड भारत से गिरफ्तार, उसी के अपार्टमेंट में शव मिला था अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में भारतीय मूल की महिला निकिता गोदिशाला की हत्या के मामले में उसके एक्स बॉयफ्रेंड अर्जुन शर्मा को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है। निकिता न्यू ईयर से लापता थी। पूरी खबर पढ़ें…

