ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं:सर्वे में दावा, मिडटर्म में हार का खतरा; राष्ट्रपति के खिलाफ पार्टी में बगावत तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिख रहे हैं। इसकी वजह ट्रम्प की गिरती लोकप्रियता और मिडटर्म चुनाव में उनके साथ का उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचने का डर है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी प्रचार वेबसाइट से ट्रम्प और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट एजेंडे’ का जिक्र हटाया है, जबकि कुछ चुनावी मंच साझा करने से बच रहे हैं। एपी-एनओआरसी सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं। अर्थव्यवस्था संभालने पर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26% और जीवनयापन की लागत पर 17% है। 65% से ज्यादा अमेरिकी ऊंची कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ पार्टी में आवाजें तेज आयोवा से सांसद और सीनेट उम्मीदवार एश्ले हिंसन और मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की मांग की है। दोनों पहले ट्रम्प की सैन्य कार्रवाई के समर्थक थे। आयोवा के सांसद जैक नन और मैरियानेट मिलर-मीक्स ने ट्रम्प की युद्ध शक्तियां सीमित करने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया। फ्लोरिडा की सांसद मारिया ने ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति पर सवाल उठाए हैं। कई उम्मीदवारों ने कहा है कि वे ट्रम्प का प्रचार नहीं चाहते। कड़े मुकाबले वाली सीटों पर कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी प्रचार वेबसाइट से ट्रम्प का जिक्र हटा दिया है, जबकि कुछ उनके साथ चुनावी मंच साझा करने से बच रहे हैं। अर्थव्यवस्था बड़ी कमजोरी, ट्रम्प को 26% सपोर्ट ट्रम्प से दूरी वाले खेमे में बड़े नाम; गवर्नर से सांसदों तक का विरोध सर्वे: ट्रम्प के गढ़ ओहायो से गवर्नर की रेस में भारतीयवंशी रामास्वामी भी 6 पॉइंट पीछे ओहायो गवर्नर चुनाव में भारतीयवंशी विवेक रामास्वामी के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। ट्रम्प ने 2024 में यह राज्य 11 पॉइंट से जीता था, लेकिन 24 से 27 सितंबर के मैरिस्ट सर्वे में डेमोक्रेट एमी एक्टन 50% समर्थन के साथ रामास्वामी के 44% से आगे हैं। इसी सर्वे में ट्रम्प की अप्रूवल 42% रही। 41% वोटर्स ने कहा कि चुनाव में उनका वोट मुख्य रूप से ट्रम्प के खिलाफ होगा। विपक्षी डेमोक्रेट्स 9 अंक आगे, हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए बड़ा खतरा रिपब्लिकन पार्टी की चिंता राष्ट्रीय चुनावी आंकड़ों से भी बढ़ रही है। नेट सिल्वर के औसत के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस के जेनेरिक बैलेट में डेमोक्रेट्स की बढ़त 6.7 अंक थी, जो अब 9 अंक हो गई। हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए गंभीर खतरा है। सीनेट में भी तस्वीर पहले के मुकाबले कठिन हुई है। रिपब्लिकन फिलहाल 53-47 की बढ़त रखते हैं, लेकिन कुछ ऐसी सीटें भी प्रतिस्पर्धी हो गई हैं जिन्हें पहले सुरक्षित माना जा रहा था।

सर्वे- ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं:मिडटर्म में हार का खतरा; राष्ट्रपति के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी में बगावत तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पार्टी नेताओं को डर है कि मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प का साथ उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी चुनावी वेबसाइट से ट्रम्प और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का जिक्र हटा दिया है। कुछ नेता उनके साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं। एपी-एनओआरसी सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से खुश हैं। अर्थव्यवस्था पर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26% है। महंगाई से निपटने के मामले में यह सिर्फ 17% है। 65% से ज्यादा अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ कई रिपब्लिकंस आयोवा से सांसद और सीनेट उम्मीदवार एश्ले हिंसन और मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की मांग की है। दोनों पहले ट्रम्प की सैन्य कार्रवाई के समर्थक थे। आयोवा के सांसद जैक नन और मैरियानेट मिलर-मीक्स ने ट्रम्प की युद्ध शक्तियां सीमित करने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया। फ्लोरिडा की सांसद मारिया ने ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति पर सवाल उठाए हैं। कई उम्मीदवारों ने कहा है कि वे ट्रम्प का प्रचार नहीं चाहते। अर्थव्यवस्था बड़ी कमजोरी, ट्रम्प को 26% सपोर्ट ट्रम्प से दूरी वाले खेमे में बड़े नाम; गवर्नर से सांसदों तक का विरोध सर्वे: ट्रम्प के गढ़ ओहायो से गवर्नर की रेस में भारतवंशी रामास्वामी भी 6 पॉइंट पीछे ओहायो गवर्नर चुनाव में भारतवंशी विवेक रामास्वामी के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। ट्रम्प ने 2024 में यह राज्य 11 पॉइंट से जीता था, लेकिन 24 से 27 सितंबर के मैरिस्ट सर्वे में डेमोक्रेट एमी एक्टन 50% समर्थन के साथ रामास्वामी से 44% से आगे हैं। इसी सर्वे में ट्रम्प का अप्रूवल 42% रहा। 41% वोटर्स ने कहा कि चुनाव में उनका वोट मुख्य रूप से ट्रम्प के खिलाफ होगा। विपक्षी डेमोक्रेट्स 9 अंक आगे, हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए बड़ा खतरा रिपब्लिकन पार्टी की चिंता राष्ट्रीय चुनावी आंकड़ों से भी बढ़ रही है। नेट सिल्वर के औसत के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस के जेनेरिक बैलट में डेमोक्रेट्स की बढ़त 6.7 अंक थी, जो अब 9 अंक हो गई। हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए गंभीर खतरा है। सीनेट में भी तस्वीर पहले के मुकाबले कठिन हुई है। रिपब्लिकन फिलहाल 53-47 की बढ़त रखते हैं, लेकिन कुछ ऐसी सीटें भी प्रतिस्पर्धी हो गई हैं जिन्हें पहले सुरक्षित माना जा रहा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला, खिड़कियां टूटीं:पुजारी समेत श्रद्धालु अंदर मौजूद थे अमेरिका के ओहायो में शुक्रवार को हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किया गया। इसमें मंदिर को काफी नुकसान हुआ। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के मुताबिक, दोपहर 1:30 बजे श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

AI का जोश, एशियाई कंपनियो ने जुटाया 6 साल का रिकॉर्ड फंड, लिस्टिंग के बाद मार्केट में फिर जल्द एंट्री की होड़

AI Boom in Stock Market: हॉन्ग कॉन्ग में एआई से जुड़ी कंपनियों ने इस बार रिकॉर्डतोड़ पैसे जुटाए। यह तेजी ऐसे समय में आई, जब हॉन्ग कॉन्ग के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनियों ने आईपीओ, प्लेसमेंट्स और ब्लॉक ट्रेड्स के जरिए जुलाई-सितंबर में $47.5 अरब जुटाए, जोकि ब्लूमबर्ग के मुताबिक किसी साल की तीसरी तिमाही में अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

इसके साथ ही इस साल अब तक हॉन्ग कॉन्ग में कुल $92 अरब से अधिक फंड जुटाए गए जोकि साल 2021 में $112.5 अरब के रिकॉर्ड के काफी करीब है। यह ऐसे समय में हुआ, जब बॉन्ड यील्ड में तेजी और कई नए शेयरों के खराब परफॉरमेंस के कारण निवेशक और कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रही हैं।

AI ने भरा जोश

हॉन्ग कॉन्ग में रौनक के पीछे एआई रही है लेकिन इस गर्मी तो इसने तगड़ा जोश दिखा दिया। चीन की कंपनियों ने तेजी से बढ़ रही एआई इंडस्ट्री में विस्तार के लिए ताबड़तोड़ पैसे जुटाए और पहले की तुलना में मार्केट में बहुत जल्द दोबारा एंट्री की। सबसे तगड़ा सौदा तो अलीबाबा ग्रुप की $10.2 अरब का फॉलो-ऑन ऑफर रहा तो Zhongji Innolight ने करीब $8 अरब जुटाए जोकि लगभग सात वर्षों में हॉन्ग कॉन्ग की सबसे बड़ी लिस्टिंग रही। अन्य कंपनियों ने भी बार-बार निवेशकों से पैसे जुटाए। एआई मॉडल बनाने वाली Z.AI ने इस साल IPO, प्लेसमेंट और कन्वर्टिबल बॉन्ड के जरिए कुल $9.6 अरब जुटाए।

गोल्डमैन में एशिया (एक्स-जापान) इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख जेम्स वांग का कहना है कि पहले कंपनियां एक बार पैसे जुटाने के बाद फिर एक-दो साल बाद ही दोबारा ऐसी कोशिश करती थी लेकिन अब लॉकअप पीरियड समाप्त होते ही पूंजी जुटाने लगी हैं। उनका कहना है कि AI की वजह से यह सिलसिला अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा और इसकी रफ्तार जल्द धीमे होने के कोई संकेत नहीं हैं।

Z.AI के अलावा एक और एआई मॉडल कंपनी मिनीमैक्स ग्रुप, चिप बनाने वाली कंपनी शंघाई एलुवेटर कोरएक्स सेमीकंडक्टर और शंघाई बिरेन टेक्नोलॉजी भी अपने IPO लॉकअप की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद जुलाई में दोबारा बाजार में लौट आईं।

यह तेजी सिर्फ चीन या हॉन्ग कॉन्ग तक ही नहीं रही, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखने को मिली। तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र में शेयर बिक्री के जरिए रिकॉर्ड $120 अरब से अधिक जुटाए गए, जो छह वर्षों में इस अवधि के लिए सबसे अधिक है। चीन में भी इस दौरान मेमोरी चिप बनाने वाली Corp का 66.6 अरब युआन (लगभग $9.9 अरब) का IPO आया, जो चीन में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO रहा।

भारत में भी दिखी रौनक

साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान युद्ध, शेयर बाजार में हाहाकार और विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय बाजार ने भी जोरदार वापसी की। जुलाई से अब तक यहां शेयरों की बिक्री के जरिए कंपनियों ने रिकॉर्ड $26 अरब जुटाए, जिसके साथ भारतीय मार्केट के लिए यह अब तक की सबसे अच्छी तिमाही साबित हुई।

इस दौरान सबसे बड़े डील्स की बात करें तो एलआईसी में $3.2 अरब की सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री शामिल थी तो एनएसई ने $2.4 अरब का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया। यह ऐसे समय में हुआ जब निफ्टी 50 अगस्त की शुरुआत के अपने हाई लेवल से लगभग 9.5% नीचे आ गया था। घरेलू बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी ने नए शेयर ऑफरिंग की मांग को मजबूत बनाए रखा।

आगे भी आईपीओ का पाइपलाइन काफी मजबूत है। मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स नवंबर में संभावित लिस्टिंग से पहले निवेशकों से मुलाकात कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। सिटीग्रुप में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख हरीश रमन का कहना है कि इस साल अभी और आईपीओ आ सकते हैं और वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है।

आगे कैसा है रुझान

एआई पर होने वाले भारी खर्च भविष्य में पर्याप्त रिटर्न दे पाएगा या नहीं, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं लेकिन इसके बावजूद एआई से जुड़ी कंपनियां ताबड़तोड़ पैसा जुटा रही हैं और निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है। हालांकि HSBC के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी कैपिटल मार्केट्स मार्टिन जोल (Martin Zoll) का कहना है कि कई कंपनियों के शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे आ गए हैं, जिसके चलते निवेशक सावधानी भी बरतने लगे हैं। बता दें कि जुलाई की शुरुआत से हांगकांग में हुए 10 सबसे बड़े सौदों में से केवल दो ही अपने ऑफर प्राइस से ऊपर हैं। फास्ट-फैशन रिटेलर शेन ग्लोबल होल्डिंग्स (Shein Global Holdings) और चिपमेकर लॉन्गसिस इलेक्ट्रॉनिक्स (chipmaker Longsys Electronics) के शेयर तो पहले ही दिन इश्यू प्राइस के नीचे आ गए।

आगे की बात करें तो आईपीओ और अन्य सौदों की पाइपलाइन काफी बड़ी है। फिलीपींस के सबसे लोकप्रिय मोबाइल पेमेंट ऐप GCash की पैरेंट कंपनी Mynt Inc ने आईपीओ का भाव फिक्स कर दिया है और यह फिलीपींस का सबसे बड़ा आईपीओ बनने वाला है। ऑस्ट्रेलिया भी एआई से जुड़ी इस तेजी का एक हिस्सा बनने वाला है। वहां डेटा सेंटर ऑपरेटर Firmus Grid $5 अरब का IPO देश में अब तक के सबसे बड़े लिस्टिंग में से एक होगा।

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Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

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पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 सैन्य साइट्स चुनी गईं; आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद प्रोडक्शन की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों एरिक और ट्रम्प जूनियर की हिस्सेदारी वाली पावरयूएस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। कंपनी ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित मिलिट्री साइट्स चुनी गई हैं। यहां आत्मघाती ड्रोन बनाए जाएंगे। प्रोडक्शन यूनिट की साइट फाइनल करने के लिए पाक टीम 15 अक्टूबर के बाद अमेरिका जाएगी। सूत्रों के अनुसार, करार की बाकी औपचारिकताएं भी पूरी की जाएंगी। 16 सितंबर को मुनीर और पावरयूएस के बीच ड्रोन आयात का एमओयू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, ड्रोन प्रोडक्शन में पाक आर्मी की इंडस्ट्रियल यूनिट भी शामिल होगी। पाकिस्तान आर्मी फिलहाल चीन और तुर्किये से ड्रोन सप्लाई ले रही है। तुर्किये ने भी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन का करार किया है। एक्सपर्ट बोले- भारत के लिए खतरा, 4 सवालों में समझिए कैसे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुके डिफेंस एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी के मुताबिक पाकिस्तान में बनने वाले ये ड्रोन भारत की अंदरूनी सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकते हैं। 1. ड्रोन यूनिट से हमें क्या खतरा? पाक को अमेरिका से मिलने वाले कई हथियार आईएसआई से होकर आतंकियों के पास जाते हैं। कश्मीर में ऐसे कई केस हैं जब यूएस मेड हथियार आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। ये ड्रोन हमारी अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती होंगे। 2. पाक में प्रोडक्शन क्यों? पहले पाक को अमेरिका से ड्रोन आयात करने थे, लेकिन अब प्रोडक्शन इसलिए क्योंकि ट्रम्प के बेटों की कंपनी इन्हें पाक के जरिए एशिया और अफ्रीका के उन देशों को भी बेच सकेगी जिन्हें अमेरिका सीधे हथियार नहीं देता है। 3. चीन की पाक को मंजूरी क्यों? चीन का पाक में सीपैक के रूप में बड़ा निवेश है। सीपैक सबसे अहम है, पर इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बलूचिस्तान-खैबर में चीन खनन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मुनीर के कहने पर चीन ने पाक को इस डील की मंजूरी दी। 4. क्या पाक का रोल बढ़ेगा? ट्रम्प के दौर में अमेरिका का पाक के साथ कई क्षेत्रों में करार बढ़ा है। ईरान युद्ध में भी अमेरिका ने पाक को मध्यस्थ का रोल दिया था। ट्रम्प परिवार का पाक के क्रिप्टो करंसी बिजनेस में हाथ है। अमेरिका पाक के रोल को और बढ़ाने वाला है।

पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 सैन्य साइट्स चुनी गईं; आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद प्रोडक्शन की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर से जुड़े पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। कंपनी ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित मिलिट्री साइट्स चुनी गई हैं। यहां आत्मघाती ड्रोन बनाए जाएंगे। 16 सितंबर को मुनीर और पॉवरस के बीच ड्रोन आयात का एमओयू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, प्रोडक्शन में पाक आर्मी की इंडस्ट्रियल यूनिट भी शामिल होगी। यूनिट की साइट फाइनल करने के लिए पाक टीम 15 अक्टूबर के बाद अमेरिका जाएगी। इसके बाद करार की बाकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। पाकिस्तान आर्मी फिलहाल चीन और तुर्किये से ड्रोन सप्लाई ले रही है। तुर्किये ने भी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन का करार किया है। ट्रम्प के बेटों की निवेश कंपनी की 9.9% हिस्सेदारी अलजजीरा के मुताबिक, ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प पॉवरस कंपनी में अमेरिकन वेंचर्स के जरिए निवेशक हैं। अमेरिकी रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, पॉवरस के प्रस्तावित मर्जर के बाद अमेरिकन वेंचर्स की कंपनी में 9.9% बेनिफिशियल हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। ट्रम्प जूनियर के प्रवक्ता के मुताबिक, वह सिर्फ पैसिव निवेशक हैं और कंपनी के कामकाज या कॉन्ट्रैक्ट में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान से पहले भारत से भी पॉवरस का करार पॉवरस का पाकिस्तान से पहले भारत में भी करार हुआ था। 30 जून की फाइलिंग में पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने बताया कि पॉवरस ने उसे भारत में गार्डियन-1 ड्रोन इंटरसेप्टर बनाने और बेचने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस दिया है। यानी पॉवरस की ड्रोन तकनीक से भारत और पाकिस्तान दोनों जुड़े हैं। पाकिस्तान ने क्या समझौता किया है? पॉवरस के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ हुआ एमओयू अंतिम समझौता नहीं है। इससे खरीदारी की बाध्यता नहीं बनती और यह अमेरिकी कानूनों और सरकार की मंजूरी के अधीन है। कंपनी ने पाकिस्तान में अपनी तकनीक बनाने के तरीकों पर काम करने की बात भी कही है। 16 सितंबर की बैठक में रक्षा खरीद, प्रोडक्शन और क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। एक्सपर्ट बोले- भारत के लिए खतरा, 4 सवालों में समझिए कैसे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुके डिफेंस एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी के मुताबिक पाकिस्तान में बनने वाले ये ड्रोन भारत की अंदरूनी सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकते हैं। 1. ड्रोन यूनिट से हमें क्या खतरा? पाक को अमेरिका से मिलने वाले कई हथियार आईएसआई से होकर आतंकियों के पास जाते हैं। कश्मीर में ऐसे कई केस हैं जब यूएस मेड हथियार आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। ये ड्रोन हमारी अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती होंगे। 2. पाक में प्रोडक्शन क्यों? पहले पाक को अमेरिका से ड्रोन आयात करने थे, लेकिन अब प्रोडक्शन इसलिए क्योंकि ट्रम्प के बेटों की कंपनी इन्हें पाक के जरिए एशिया और अफ्रीका के उन देशों को भी बेच सकेगी जिन्हें अमेरिका सीधे हथियार नहीं देता है। 3. चीन की पाक को मंजूरी क्यों? चीन का पाक में सीपैक के रूप में बड़ा निवेश है। सीपैक सबसे अहम है, पर इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बलूचिस्तान-खैबर में चीन खनन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मुनीर के कहने पर चीन ने पाक को इस डील की मंजूरी दी। 4. क्या पाक का रोल बढ़ेगा? ट्रम्प के दौर में अमेरिका का पाक के साथ कई क्षेत्रों में करार बढ़ा है। ईरान युद्ध में भी अमेरिका ने पाक को मध्यस्थ का रोल दिया था। ट्रम्प परिवार का पाक के क्रिप्टो करंसी बिजनेस में हाथ है। अमेरिका पाक के रोल को और बढ़ाने वाला है। ————————————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोकना जंग जैसा:UN में शहबाज बोले- कश्मीर गले की नस; भारत का जवाब- अवैध कब्जे वाले कश्मीर की हालत देखें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UN में भारत को जंग की धमकी दी। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा। शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है। पूरी खबर पढ़ें…

ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी जनता से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को खारिज करने की अपील की गई है। यह भी कहा गया है कि ट्रम्प भरोसे लायक नहीं हैं। IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। IRGC ने यह भी कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ट्रम्प पर झूठ बोलने और अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान की अमेरिकी वोटरों से सीधी अपील अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इसी चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले अमेरिकी जनता के नाम 25 पेज की चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी वोटरों से ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने को कहा गया है। पत्र में IRGC ने यह भी कहा अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें ‘हैनोई हन्ना’ कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।

ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं हैं। अमेरिका की जनता को सोचसमझकर फैसला करना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ईरान ने UNGA में कहा था कि वह परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं छोड़ेगा। IRGC की चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की सीटों के लिए चुनाव होता है। इससे राष्ट्रपति नहीं बदलता लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत और नीतियां लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र की बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रम्प झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। IRGC के पत्र की 3 प्रमुख बात अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान ने बांग्लादेश जा रही मदद रोकी:न्यूक्लियर फ्यूल ले जा रही फ्लाइट को एयरस्पेस नहीं दिया, सबसे बड़े बिजली संकट से जूझ रहा देश

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी। यह उड़ान 24 सितंबर को ढाका पहुंचने वाली थी, लेकिन अब फ्यूल की डिलीवरी टल गई है। यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई गांवों में रोज 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। फ्यूल समय पर नहीं पहुंचने से बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। आखिरी वक्त में नहीं मिली मंजूरी रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम बांग्लादेश की रूपपुर प्लांट बना रही है और न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई भी वही कर रही है। प्लांट की यूनिट-2 के लिए फ्यूल की पहली खेप लेकर रूसी फ्लाइट को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था। एयरपोर्ट पर फ्यूल उतारने की सभी तैयारियां पूरी थीं। तभी बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया गया कि रूस को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है। बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फकीर महबूब अनाम ने कहा कि पाकिस्तान ने मंजूरी न देने की सही वजह नहीं बताई है। अक्टूबर से दूसरे रास्ते से आएगा फ्यूल द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अब रोसाटॉम ने फ्यूल की डिलीवरी के लिए दूसरा रास्ता तय किया है। सप्लाई अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोसाटॉम ने कहा है कि बाकी फ्यूल दिसंबर तक 7 अलग-अलग कार्गो फ्लाइट्स से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि डिलीवरी में हुई देरी से रूपपुर प्लांट के पूरे शेड्यूल पर असर नहीं पड़ेगा। ढाका में पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इस मामले को तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कत बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को काफी अहमियत देता है और इस घटना को इसी तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश में बन रहा पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश ने अपनी बिजली जरूरत पूरी करने के लिए रूस से 2011 में समझौता किया था। इसके तहत राजधानी ढाका से करीब 160 किलोमीटर दूर पद्मा नदी के किनारे रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने की योजना बनी। यह देश का पहला परमाणु बिजलीघर है। इसे रूस की सरकारी परमाणु एजेंसी रोसाटॉम की अगुवाई में बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की लागत करीब 12.65 अरब डॉलर है। इस प्रोजेक्ट पर 2017 में काम शुरू हुआ था। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर 2026 से बिजली उत्पादन का काम शुरू होगा। 2 साल पहले ही लेट है रूपपुर प्लांट रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका काम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से करीब 2 साल पीछे हो चुका है। अप्रैल में प्लांट की यूनिट-1 में न्यूक्लियर फ्यूल डालने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद अगस्त में प्लांट की अंतिम टेस्टिंग शुरू हुई। अक्टूबर में यूनिट-1 से करीब 300 मेगावाट बिजली ट्रायल के तौर पर नेशनल ग्रिड में भेजने की तैयारी है। दिसंबर में कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर बांग्लादेश न्यूक्लियर पावर पैदा करने वाला दुनिया का 33वां देश बन जाएगा। गैस की कमी और आयात ने बांग्लादेश की परेशानी बढ़ाई बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा बाहर से महंगे दामों पर खरीदता है। ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके बंद होने से बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बिजली संकट का असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है। गारमेंट, फूड, सिरेमिक और फार्मास्युटिकल कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के दौरान नर्सों को मरीजों की देखभाल के लिए टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। ऐसे में बांग्लादेश के लिए रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट को जल्द शुरू करना अहम है। इससे देश में बिजली की सप्लाई बढ़ सकती है और बाहर से खरीदी जाने वाली ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… PoK के लोग बोले- हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में दबाव दिख रहा है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड 5.25% तक उछलने से अमेरिकी बाजार के सेंटिमेंट भी बिगड़े हैं। इधर कच्चा तेल भी 105 डॉलर के ऊपर कायम है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

कल भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। भारी बिकवाली के बीच निफ्टी इंट्राडे में 22,800 के नीचे फिसल गया,जिससे लगातार सातवें हफ्ते भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा।

जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी,बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कमजोर ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड,FII की लगातार बिकवाली और US-Iran शांति वार्ता में गतिरोध के बाद बढ़ी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बाजार पर दबाव बनाने वाली मुख्य वजहें रहीं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 22,834 के आसपास सपाट ट्रेड कर रहा था,जिससे घरेलू इक्विटी मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

एशियाई बाजार

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले। जापान का निक्केई 1 प्रतिशत और टॉपिक्स इंडेक्स 1.68 प्रतिशत नीचे था। वहीं, कोस्पी में 0.56 फीसदी की और ताइवान के बाजार में 0.06 फीसदी की गिरावट नजर आ रही थी।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट आई। तेल की कीमतें और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने बाजार पर दबाव बनाया। निवेशक ईरान युद्ध से जुड़ी शांति वार्ता की संभावनाओं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की चाल पर नजरे बनाए हुए हैं।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 347.11 अंक या 0.67% गिरकर 51,481.51 पर आ गया,S&P 500 में 59.72 अंक या 0.77% की गिरावट के साथ यह 7,683.69 पर बंद हुआ और नैस्डैक कम्पोजिट 248.34 अंक या 0.92% गिरकर 26,820.38 पर आ गया। S&P में आई यह गिरावट 20 अगस्त के बाद से एक दिन में प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट थी।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार होता दिख रहा है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बहत में गिरावट दिख रही है,जबकि फिलीपीन्स के पेसो और मलेशियाई रिंगित में बढ़त हुई है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.42% गिरा है। जबकि थाई बहत में 0.09% और ताइवान डॉलर में 0.11% की गिरावट आई है। सिंगापुर डॉलर 0.05% कमजोर हुआ है,जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन मामूली गिरावट (0.04%) के साथ लगभग सपाट दिख रहा है।

दूसरी ओर फिलीपीन पेसो में 0.22% की बढ़त नजर आई है। इसके बाद मलेशियाई रिंगित में 0.07% और जापानी येन में 0.05% की बढ़ोतरी हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.02% की बढ़त हुई है।

सोना $4200 के नीचे

मजबूत डॉलर और US में अगले 1 साल में 3 रेट हाइक की आशंका से सोने-चांदी में तेज गिरावट आई है और यह $4200 के नीचे फिसल गया है। वहीं, चांदी $61 के नीचे आ गई है। US में अक्टूबर में दरें बढ़ने की 70% संभावना है।

ईरान को प्रतिबंधों में ढील की खबर फर्जी: ट्रंप

ईरान को प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज किए गए फंडों को रिलीज करने की खबरों को ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा है कि Axios की खबर फर्जी और कोरी अफवाह हैं। इधर ईरान ने नवंबर में US चुनाव के बाद युद्ध और भड़कने की आशंका जताई है।

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए बड़ा कदम

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए टाटा ट्रस्ट का बड़ा कदम सामने आया है। Tata Electronics, Tata Consulting Engineers का टाटा संस में मर्जर का प्रस्ताव रखा गया है। इसके कंपनी के NBFC और CIC कैटेगरी से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट ने कहा है कि रीस्ट्रक्चरिंग शेयरहोल्डर्स के हित में होगी।

कल निफ्टी में होगा बड़ा बदलाव

कल निफ्टी में बड़ा बदलाव होगा। करीब 3 दशक बाद विप्रो निफ्टी से बाहर होगा। वहीं, BSE इसमें शामिल होगा। BSE में 650 मिलियन डॉलर का इनफ्लो हो सकता है। वहीं, विप्रो से करीब 200 मिलियन डॉलर निकलेंगे।

होनासा कंज्यूमर में ब्लॉक डील संभव, Cube Highways Trust में भी बड़े सौदे संभव

आज ब्लॉक डील्स पर नजर रहेगी । सूत्रों के मुताबिक 2.73 परसेंट हिस्से के लिए होनासा कंज्यूमर में 400 Cr रुपए की ब्लॉक डील संभव है। करीब साढ़े 3 परसेंट डिस्काउंट पर 450 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है। साथ ही Cube Highways Trust में भी करीब पौने 700 करोड़ के बड़े सौदे हो सकते हैं।

कोफोर्ज: अखिल कुमार गुप्ता बने नए चेयरमैन

कोफोर्ज आज फोकस में होगा। अखिल कुमार गुप्ता नए चेयरमैन बने हैं। ये ओपी भट्ट के पद छोड़ने के बाद जिम्मेदारी संभालेंगे। इनका कार्यकाल 5 साल का होगा।

अगस्त IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8%

देश के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तेजी आई है। अगस्त में IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8% रही है। जुलाई IIP ग्रोथ 6.7% से रिवाइज होकर 7.4% हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग,इलेक्ट्रिसिटी और इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

28 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 5,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस सेशन के दौरान लगभग 5,189 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ वे नेट बायर बने रहे।

त्योहार शुरू होने पहले महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज, वॉशिंग मशीन; दाम 5-8% तक बढ़ाने की तैयारी

त्योहारी सीजन से पहले देश में एयर कंडीशनर (AC), LED TV, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे सामान महंगे हो सकते हैं। प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां 1 अक्टूबर से अपने उत्पादों के दाम 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। कंपनियों के मुताबिक, तांबा, एल्युमीनियम, स्टील, प्लास्टिक और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की बढ़ती लागत के साथ-साथ माल ढुलाई खर्च और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। इस साल यह तीसरा मौका होगा, जब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां दाम बढ़ाएंगी। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते कच्चे माल की लागत काफी बढ़ गई है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, AC की कीमतों में जहां करीब 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं कुछ कंपनियां वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और LED TV के दाम 3 से 4 प्रतिशत बढ़ाने जा रही हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी स्थिति का आकलन कर रही हैं। कई कंपनियों का मानना है कि कीमत बढ़ाने से मांग पर असर पड़ सकता है। वहीं कुछ अन्य की राय है कि कीमत वृद्धि का असर सीमित रहेगा, क्योंकि डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास पहले ही पुराने दाम का स्टॉक है।

ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डाइकिन और सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स समेत कई कंपनियां अलग-अलग कैटेगरीज में कीमतें 4-10 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं। LG और बॉश होम कम्फर्ट ने भी AC की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। पैनासोनिक अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति का आकलन कर रही है।

कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करना हुआ जरूरी

पीटीआई के मुताबिक, ब्लू स्टार के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. त्यागराजन का कहना है कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण एसी और डीप फ्रीजर की कीमतें पहले ही 5 से 8 प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तांबा, स्टील और प्लास्टिक समेत कच्चे माल के दाम चढ़ गए हैं। कंपनी इस साल अब तक 3 बार कीमतें बढ़ा चुकी है।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, अप्लायंसेज बिजनेस कमल नंदी ने कहा कि कीमतों में पिछले बदलाव के बाद कमोडिटी की लागत में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में विभिन्न कैटेगरीज में कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है। हालांकि, पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक बाजार में उपलब्ध रह सकता है।

Tata Motors की गाड़ियां हो सकती हैं और महंगी, कमोडिटी की बढ़ती लागत मार्जिन पर डाल रही दबाव

Haier 5 प्रतिशत महंगे करेगी एसी, दिसंबर और जनवरी में भी बढ़ा सकती है दाम

हायर इंडिया के प्रेसिडेंट एन.एस. सतीश का कहना है कि कंपनी 1 अक्टूबर से एसी की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। अन्य उत्पादों जैसे एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन आदि की कीमतों में भी 2 से 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती रही, तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।

उनका कहना है कि अगर कीमतें बढ़ाने से बचते हैं, तो नुकसान होगा। अगर कीमतें बढ़ाते हैं, तो बिक्री पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन कोई चारा नहीं है। सतीश के मुताबिक, तांबे की कीमत पिछले साल के करीब 8,000-9,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 14,500 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक एसी में औसतन 3 से 4 किलोग्राम तांबे का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसका असर एसी की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर सीधे पड़ रहा है।

डाइकिन 16 सितंबर से 10 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है कीमतें

डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कंवलजीत जावा का कहना है कि कंपनी ने 16 सितंबर से ही कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। तांबे की कीमतों में करीब 25 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और डॉलर मजबूत होने से कंपनियों पर लागत का दबाव और बढ़ गया है। वहीं, सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (SPPL) ने अक्टूबर के बाद टीवी की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि की योजना बनाई है। अन्य होम अप्लायंसेज की कीमतें पहले ही 4 से 5 प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं।