त्योहार शुरू होने पहले महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज, वॉशिंग मशीन; दाम 5-8% तक बढ़ाने की तैयारी

त्योहारी सीजन से पहले देश में एयर कंडीशनर (AC), LED TV, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे सामान महंगे हो सकते हैं। प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां 1 अक्टूबर से अपने उत्पादों के दाम 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। कंपनियों के मुताबिक, तांबा, एल्युमीनियम, स्टील, प्लास्टिक और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की बढ़ती लागत के साथ-साथ माल ढुलाई खर्च और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। इस साल यह तीसरा मौका होगा, जब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां दाम बढ़ाएंगी। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते कच्चे माल की लागत काफी बढ़ गई है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, AC की कीमतों में जहां करीब 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं कुछ कंपनियां वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और LED TV के दाम 3 से 4 प्रतिशत बढ़ाने जा रही हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी स्थिति का आकलन कर रही हैं। कई कंपनियों का मानना है कि कीमत बढ़ाने से मांग पर असर पड़ सकता है। वहीं कुछ अन्य की राय है कि कीमत वृद्धि का असर सीमित रहेगा, क्योंकि डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास पहले ही पुराने दाम का स्टॉक है।

ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डाइकिन और सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स समेत कई कंपनियां अलग-अलग कैटेगरीज में कीमतें 4-10 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं। LG और बॉश होम कम्फर्ट ने भी AC की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। पैनासोनिक अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति का आकलन कर रही है।

कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करना हुआ जरूरी

पीटीआई के मुताबिक, ब्लू स्टार के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. त्यागराजन का कहना है कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण एसी और डीप फ्रीजर की कीमतें पहले ही 5 से 8 प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तांबा, स्टील और प्लास्टिक समेत कच्चे माल के दाम चढ़ गए हैं। कंपनी इस साल अब तक 3 बार कीमतें बढ़ा चुकी है।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, अप्लायंसेज बिजनेस कमल नंदी ने कहा कि कीमतों में पिछले बदलाव के बाद कमोडिटी की लागत में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में विभिन्न कैटेगरीज में कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है। हालांकि, पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक बाजार में उपलब्ध रह सकता है।

Tata Motors की गाड़ियां हो सकती हैं और महंगी, कमोडिटी की बढ़ती लागत मार्जिन पर डाल रही दबाव

Haier 5 प्रतिशत महंगे करेगी एसी, दिसंबर और जनवरी में भी बढ़ा सकती है दाम

हायर इंडिया के प्रेसिडेंट एन.एस. सतीश का कहना है कि कंपनी 1 अक्टूबर से एसी की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। अन्य उत्पादों जैसे एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन आदि की कीमतों में भी 2 से 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती रही, तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।

उनका कहना है कि अगर कीमतें बढ़ाने से बचते हैं, तो नुकसान होगा। अगर कीमतें बढ़ाते हैं, तो बिक्री पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन कोई चारा नहीं है। सतीश के मुताबिक, तांबे की कीमत पिछले साल के करीब 8,000-9,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 14,500 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक एसी में औसतन 3 से 4 किलोग्राम तांबे का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसका असर एसी की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर सीधे पड़ रहा है।

डाइकिन 16 सितंबर से 10 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है कीमतें

डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कंवलजीत जावा का कहना है कि कंपनी ने 16 सितंबर से ही कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। तांबे की कीमतों में करीब 25 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और डॉलर मजबूत होने से कंपनियों पर लागत का दबाव और बढ़ गया है। वहीं, सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (SPPL) ने अक्टूबर के बाद टीवी की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि की योजना बनाई है। अन्य होम अप्लायंसेज की कीमतें पहले ही 4 से 5 प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं।

Tata Motors की गाड़ियां हो सकती हैं और महंगी, कमोडिटी की बढ़ती लागत मार्जिन पर डाल रही दबाव

ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की गाड़ियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कच्चे माल की लागत में काफी बढ़ोतरी के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को और झटका लगने की आशंका है। लिहाजा हो सकता है कि कंपनी को कीमतें बढ़ानी पड़ें। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा, माल ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। इसके चलते कंपनियों को या तो बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद सहना पड़ रहा है या बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, टाटा मोटर्स पीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा का कहना है कि कंपनी पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतों में आगे चरणबद्ध ढंग से और बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। कंपनी कमोडिटी की लागत में हुई बढ़ोतरी के एक बड़े हिस्से का बोझ अभी खुद ही उठा रही है और लागत घटाने की कोशिशें भी कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम हर महीने इसकी समीक्षा कर रहे हैं कि गाड़ियों की कीमतों में एक निश्चित स्तर की बढ़ोतरी करने का अवसर कब मिलेगा। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी छोटी-छोटी किश्तों में की जाएगी ताकि मांग पर तुरंत असर न पड़े।’’ चंद्रा के मुताबिक, “जिस तेजी से लागत बढ़ी है, उसी तेजी से इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ बाजार पर डालना संभव नहीं है…जिसके कारण मार्जिन पर भारी दबाव पड़ रहा है और लागत घटाने के प्रयासों पर अधिक ध्यान देना पड़ रहा है।”

पैसेंजर व्हीकल्स के बाद अब कमर्शियल व्हीकल्स भी होने वाले हैं महंगे

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV) ने 1 सितंबर से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतें 25,000 रुपये तक बढ़ा दी हैं। कंपनी ने बयान में कहा था कि बढ़ोतरी के तहत सभी सेगमेंट्स के इंटर्नल कंबंशन इंजन (ICE) व्हीकल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) आएंगे। कीमतों में बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट्स के आधार पर अलग-अलग होगी। इसके अलावा टाटा मोटर्स अपने कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतें 1 अक्टूबर से 1 प्रतिशत तक बढ़ाने वाली है।

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सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता

रॉयटर्स के मुताबिक, चंद्रा का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता है। लागत इतनी ही बढ़नी थी, या कमोडिटी के मामले में आगे और दबाव आना बाकी है, इसे लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। चंद्रा का यह भी कहना है कि टाटा मोटर्स पीवी ने अपनी इलेक्ट्रिक कार उत्पादन क्षमता को दोगुना करके प्रति माह 16,000 यूनिट से अधिक कर दिया है। कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बढ़ोतरी जारी रखे हुए है। भारत में टाटा मोटर्स पीवी की कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है।

उप्र में राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के लिए जोड़तोड़ तेज

उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में जोड़तोड़ और लामबंदी तेज हो गई है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा।

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) ही अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में दोनों दलों में उम्मीदवारों के चयन और रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि चुनावी रणनीति तय करने के लिए पार्टी 28 सितंबर को विधायकों की बैठक करेगी।

भाजपा भी जल्द ही उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेगी। शुक्रवार को भाजपा की बैठक के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अभी ऐसी कोई बैठक नहीं हुई है।

भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा, ‘‘हम जल्द इस संबंध में फैसला लेंगे। हमारी पार्टी कैडर आधारित है और सभी प्रमुख नेताओं से सलाह लेकर फैसले किए जाते हैं।’’

निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 सीट शामिल हैं, जिन पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।

उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त होने वाले राज्यसभा सदस्यों में भाजपा के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी, सपा के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम शामिल हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से रिक्त है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। निवर्तमान 10 सीटों में से आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास थीं।

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मौजूदा विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलने की संभावना है, जबकि उसके बाद सपा का प्रतिनिधित्व होगा। हाल ही में आगरा की फतेहाबाद सीट से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा गठबंधन के 288 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक शामिल हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 103 विधायक हैं, जिनमें सपा के 101 विधायक शामिल हैं। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इन तीन निर्दलीय विधायकों में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य मंत्री मनोज कुमार पांडेय भी शामिल हैं। ये तीनों विधायक सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं।

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तिथि नौ अक्टूबर होगी।

इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा और पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। संबंधित सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है।

विधान परिषद के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा के अवनीश कुमार सिंह, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश कुमार गोयल, उमेश द्विवेदी, श्रीचंद शर्मा और हरि सिंह ढिल्लों; सपा के लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और डॉ. मान सिंह यादव; निर्दलीय आकाश अग्रवाल तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।

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ईरान युद्ध में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 861 हुई

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ईरान संघर्ष के लिए अपने सार्वजनिक घायलों के डेटाबेस में 37 और घायल सैन्य कर्मियों, 29 नाविकों और आठ मरीन, को शामिल किया है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 861 हो गई है। यह जानकारी वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट से प्राप्त हुई।

पेंटागन अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि नई सूची में शामिल लोग कब या कैसे घायल हुए। 

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हताहतों की बढ़ती संख्या ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इज़रायल का महीनों से चल रहा अभियान ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने या अमेरिका द्वारा तय किए गए युद्ध के किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध एक ऐसे गतिरोध में बदल गया है जिसमें बहुत ज़्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि ईरान सत्ता में बना हुआ है, अमेरिका के दबाव का विरोध कर रहा है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना मज़बूत नियंत्रण बनाए हुए है। फिर भी, ट्रंप प्रशासन ने इस संघर्ष को खत्म करने के बजाय इसे जारी रखा है।

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ट्रंप ने शी के स्वागत में बिछाया रेड कार्पेट, अमेरिका-चीन शिखर वार्ता शुरू

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बुधवार को सैन्य हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। इसी के साथ व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ताइवान और ईरान युद्ध को लेकर तनाव के बीच तीन दिवसीय अमेरिका-चीन शिखर वार्ता शुरू हो गई।

श्री ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर श्री शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का भव्य स्वागत किया। इस दौरान करीब 30 मीटर लंबा लाल कालीन बिछाया गया, सैन्य विमानों ने फ्लाईपास्ट किया, 21 तोपों की सलामी दी गई और अमेरिकी वायुसेना के बैंड ने प्रस्तुति दी।

श्री शी का एयर चाइना विमान स्थानीय समयानुसार शाम 5:39 बजे हवाई अड्डे पर उतरा। इसके बाद लाल कालीन के दोनों ओर सैन्य गार्ड तैनात किए गए। श्री ट्रंप और सुश्री मेलानिया राष्ट्रपति की आधिकारिक कार ‘द बीस्ट’ से वहां पहुंचे और विमान के पास जाकर चीनी राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी का स्वागत किया।

दोनों दंपतियों ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत के बाद साथ-साथ लाल कालीन पर चले तथा तस्वीरें खिंचवाईं। अमेरिकी सेना और वायुसेना के बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान दो बी-1 बमवर्षक विमानों ने ऊपर से उड़ान भरी। इसके अलावा छह एफ-16 और छह एफ-22 लड़ाकू विमान भी हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के हिस्से के रूप में तैनात किए गए थे।

सैन्य अड्डे पर श्री शी का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करने का श्री ट्रंप का फैसला इस यात्रा को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है। वर्ष 1962 के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य अड्डे पर किसी विदेशी नेता का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया है। वर्ष 1962 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन का स्वागत किया था।

वर्ष 2015 के बाद श्री शी की यह पहली वाशिंगटन यात्रा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कई वर्षों से चले आ रहे व्यापार तनाव के बाद संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि उन्नत प्रौद्योगिकी और रणनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।

दोनों नेता गुरुवार को व्हाइट हाउस में बंद कमरे में बातचीत करेंगे और इसके बाद राजकीय रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा। वार्ता में शुल्क, एआई, ताइवान और ईरान युद्ध के व्यापक प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष मौजूदा नाजुक व्यापार समझौते को बनाए रखने की भी कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका और चीन ने शुल्क संबंधी अस्थायी समझौते को जनवरी तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह व्यवस्था मूल रूप से 10 नवंबर को समाप्त होने वाली थी। इसके तहत कुछ वस्तुओं पर शुल्क कम किए गए हैं और चीन की ओर से दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को फिलहाल रोक दिया गया है।

श्री बेसेंट ने चीनी उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों ने इस अस्थायी व्यवस्था को व्यापक व्यापार समझौते में बदलने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा हम केवल बुसान समझौते को जारी रखने या किसी बड़े समझौते पर विचार करने, दोनों विकल्पों के लिए तैयार हैं।

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व्यापार संबंधी यह अस्थायी समझौता 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद हुआ था। उस समय दोनों देशों द्वारा लगाए गए शुल्क कुछ समय के लिए 100 प्रतिशत से अधिक हो गए थे, जिसके बाद वाशिंगटन और बीजिंग ने तनाव कम करने के लिए कई उपायों पर बातचीत शुरू की। इस बीच, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ में प्रकाशित बयान में श्री शी ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आह्वान किया।

उन्होंने कहा दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार होना चाहिए।” उन्होंने अमेरिका और चीन को “महान राष्ट्र और उनकी जनता को महान लोग” बताया।

श्री शी ने कहा कि चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान और अमेरिका को फिर से महान बनाने के लक्ष्य साथ-साथ चल सकते हैं और एक-दूसरे को मजबूत करते हुए दुनिया को लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यात्रा “फलदायी परिणाम” देगी।

श्री शी के साथ चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी वाशिंगटन पहुंचे हैं। इनमें कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य काई ची, उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है। दोनों देश उन्नत चिप और एआई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। श्री बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने एक ऐसी सूचना प्रणाली का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाली एआई घटनाओं के बारे में एक-दूसरे को सूचित कर सकेंगे।

व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि उन्नत कंप्यूटर चिप के व्यापार पर प्रतिबंध भी बैठक का महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने एनवीडिया को कुछ स्वीकृत चीनी ग्राहकों को चिप बेचने की अनुमति दी है।

श्री शी के लिए गुरुवार को व्हाइट हाउस में पूर्ण सैन्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें सैन्य बैंड, सशस्त्र बलों की पूर्ण सम्मान टुकड़ी और बी-2 स्पिरिट बमवर्षक तथा चार एफ-22 रैप्टर विमानों का फ्लाईपास्ट शामिल होगा।

श्री ट्रंप और श्री शी ओवल ऑफिस में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद श्री शी और सुश्री पेंग राष्ट्रपति और प्रथम महिला द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज में शामिल होंगे। सुश्री मेलानिया ट्रंप के भी दोनों नेताओं की बैठक के दौरान सुश्री पेंग के साथ स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट जाने की उम्मीद है।

राजकीय रात्रिभोज में अमेरिका के कई प्रमुख प्रौद्योगिकी और कारोबारी अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसन हुआंग, क्वालकॉम के सीईओ क्रिस्टियानो अमोन, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमोन शामिल हैं।

श्री शी की यात्रा शुक्रवार को समाप्त होगी। उस दिन श्री ट्रंप और सुश्री मेलानिया उनके और सुश्री पेंग के लिए चाय का आयोजन करेंगे। इसके बाद चीनी दंपति नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेगा और चीन के लिए रवाना होगा।

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कोर्ट ने ट्रम्प का फैसला 6 दिन बाद ही पलटा:CNN समेत 3 मीडिया हाउस की व्हाइट हाउस में एंट्री पर बैन हटाया

अमेरिकी कोर्ट ने CNN, MS NOW और पॉलिटिको के पत्रकारों पर लगाए गए ट्रम्प प्रशासन के बैन को हटाने का आदेश दिया है। अब इन तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को फिर से व्हाइट हाउस में एंट्री मिल सकेगी। अमेरिकी फेडरल जज टिमोथी केली ने कहा कि मीडिया पर लगाया गया बैन अमेरिकी संविधान के खिलाफ हो सकता है। तीनों मीडिया संस्थानों ने ट्रम्प के फैसले के खिलाफ कोर्ट में अपील की थी। ट्रम्प ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और पॉलिटिको को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया था। उस समय तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकार व्हाइट हाउस प्रेस क्षेत्र में मौजूद थे और अपनी रिपोर्टिंग कर रहे थे। मीडिया संस्थानों ने कहा- बैन से पहले अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला CNN, MS NOW और पॉलिटिको ने कोर्ट में कहा कि ट्रम्प का फैसला उनके फर्स्ट अमेंडमेंट अधिकारों का उल्लंघन करता है। अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट अभिव्यक्ति और प्रेस की आजादी की सुरक्षा करता है। तीनों मीडिया संस्थानों ने कहा था कि एक्सेस हटाने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। मीडिया संस्थानों पर गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप ट्रम्प प्रशासन ने कोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था। उसका कहना था कि CNN, MS NOW और पॉलिटिको की कुछ खबरों में गलत जानकारी के साथ संवेदनशील और गोपनीय जानकारी भी लीक हुई। प्रशासन ने CNN की व्हाइट हाउस के नीचे बने बंकर से जुड़ी रिपोर्ट, MS NOW की ईरान युद्ध में अमेरिकी हथियारों की कमी वाली रिपोर्ट और पॉलिटिको की व्हाइट हाउस के बॉलरूम की फंडिंग से जुड़ी रिपोर्ट का उदाहरण दिया था। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने यह भी कहा कि इन मीडिया संस्थानों ने तय नियमों का पालन नहीं किया। ट्रम्प पहले भी मीडिया पर सवाल उठाते रहे हैं ट्रम्प 2016 से CNN की रिपोर्टिंग को लगातार ‘फेक न्यूज’ कहते रहे हैं। उनके कार्यकाल में पहले भी CNN के पत्रकारों का व्हाइट हाउस पास रोका जा चुका है। ट्रम्प ने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे बड़े अखबारों पर भी उनके खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए और आरोप लगाया कि ये संस्थान गलत नीयत से उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित करते हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रम्प टीवी शुरू की CNN, MS NOW और पॉलिटिको के पत्रकारों पर बैन के बाद अमेरिका के बड़े टीवी चैनलों ने ट्रम्प के कार्यक्रमों की साझा लाइव कवरेज बंद कर दी थी। इसके बाद व्हाइट हाउस ने अपनी ऑनलाइन वीडियो फीड शुरू की, जिसका नाम ‘ट्रम्प टीवी’ रखा। ——————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी F-35 फाइटर जेट के पार्ट्स चीन के हाथ लगे: ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जा रहे थे अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट F-35 के कुछ पार्ट्स चीन के हाथ लग गए हैं। ये पार्ट्स ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जा रहे थे, लेकिन रास्ते में इनकी खेप हांगकांग पहुंच गई। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प से विवाद के बीच मेलोनी UN महासभा नहीं जाएंगी:कहा- बिजी हूं; 15 साल में पहली बार इटली के PM नहीं पहुंचेंगे

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने इसकी वजह बिजी शेड्यूल बताई है। करीब 15 साल बाद पहली बार इटली का प्रधानमंत्री UNGA की सालाना हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होगा। मेलोनी की जगह विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी UNGA में इटली का प्रतिनिधित्व करेंगे। मेलोनी के न्यूयॉर्क नहीं जाने से उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से आमने-सामने मुलाकात भी नहीं होगी। इस साल जून में G7 समिट में दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था। ट्रम्प ने कहा था कि मेलोनी उनके साथ फोटो के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने जवाब दिया था, ‘ मुझे इसके लिए गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं हैं।’ ईरान युद्ध में मेलोनी ने ट्रम्प का साथ नहीं दिया ईरान के मुद्दे पर भी ट्रम्प और मेलोनी के रुख में अंतर रहा। मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं किया था। इसके बाद ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर उनके रुख की आलोचना की थी। हालांकि, इटली और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग जारी है। इटली NATO का सदस्य है और वहां करीब 13 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। एवियानो, नेपल्स, विसेंजा और सिसिली में अमेरिका के अहम सैन्य ठिकाने भी हैं। ट्रम्प और मेलोनी आखिरी बार G7 में साथ दिखे थे 15-17 जून 2026 को हुए G7 समिट में ट्रम्प और मेलोनी के रिश्तों में सुधार के संकेत दिखे थे। फ्रांस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों कई बार साथ नजर आए। एक मौके पर दोनों सोफे पर बैठकर काफी देर तक बातचीत करते भी दिखे। उनकी तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। उस वक्त माना जा रहा था कि मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के रिश्ते फिर सामान्य हो रहे हैं। हालांकि, ट्रम्प के बयान के बाद दोनों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया था। ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका के रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय में अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने G7 के बाद ट्रम्प के बयान पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के पुराने रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फज्जोलारी के मुताबिक, ट्रम्प के ऐसे बयानों से पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि खराब हुई है। इसका नुकसान आखिरकार अमेरिका को ही उठाना पड़ेगा। ट्रम्प की बड़ी समर्थक रही हैं मेलोनी BBC के मुताबिक ट्रम्प और मेलोनी के रिश्ते पहले काफी करीबी माने जाते थे। 2025 में ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली वह एकमात्र यूरोपीय नेता थीं। उन्हें यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच ब्रिज के तौर पर भी देखा जाता था। अप्रैल में ईरान पर अमेरिकी हमले के दौरान ट्रम्प और मेलोनी के बीच मतभेद हो गया था। अमेरिका को इटली के हवाईअड्डों और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की जरूरत थी, लेकिन इटली ने इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद पोप लियो को लेकर भी ट्रम्प और मेलोनी के बीच मतभेद सामने आए। पोप ने ईरान युद्ध रोकने की अपील की थी। ट्रम्प ने उनकी अपील पर नाराजगी जताई, जबकि मेलोनी ने ट्रम्प की बात का विरोध किया। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें लगता था कि मेलोनी में हिम्मत है, लेकिन अब उन्हें ऐसा नहीं लगता। मोदी, पुतिन और जिनपिंग भी नहीं पहुंचे इस साल मेलोनी अकेली बड़ी नेता नहीं हैं जो UN महासभा से दूर हैं। प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। करीब 130 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इस बार UNGA की हाई लेवल बैठक में शामिल हो रहे हैं। PM मोदी ने इस साल UNGA में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। मोदी आखिरी बार सितंबर 2024 में UNGA की बैठक में शामिल हुए थे। इसके बाद 2025 में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने महासभा को संबोधित किया था। वहीं रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव महासभा को संबोधित करेंगे। चीन की ओर से उपराष्ट्रपति प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि, जिनपिंग इस हफ्ते वॉशिंगटन में ट्रम्प से अलग मुलाकात करने वाले हैं। ———————- यह खबर भी पढ़ें… जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका रवाना:ट्रम्प एयरपोर्ट पर रिसीव करेंगे, व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर मिलेगा; ट्रेड, AI और ताइवान पर बातचीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार दोपहर अमेरिका रवाना हो गए हैं। वे 11 साल वहां जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प की ईरान को धमकी-समझौता करो, वरना तबाह कर देंगे:ईरान मिसाइलों की आड़ में परमाणु बम बना रहा था; दुनिया देखती रही, अमेरिका ने रोका

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि या तो वे समझौता करे या हम उन्हें तबाह कर देंगे। ट्रम्प ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 40 मिनट भाषण दिया। उन्होंने कहा- मेरे सामने एक बड़ा फैसला है। अमेरिका के पास दो रास्ते हैं- ईरान के साथ समझौता करना या उसे खत्म कर देना। ट्रम्प ने कहा कि मैंने यूरोपीय देशों को बताया था कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों की आड़ में परमाणु बम बना रहा था। जब दूसरे नेता केवल इंतजार कर रहे थे, तब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर उसे रोका। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रम्प की चेतावनी के 5 बड़े मायने 1. ईरान पर हमले से 66% अमेरिकी जनता ट्रम्प से नाराज रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वे के मुताबिक, ईरान पर हमला करने से 66% अमेरिकन ट्रम्प से नाराज हैं। सिर्फ 34% लोग ही ट्रम्प के सपोर्ट में हैं। 3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन हैं। ट्रम्प नहीं चाहते कि उनकी पार्टी को नुकसान हो। इसी वजह से वो ईरान युद्ध को अब अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। 2. ट्रम्प की पार्टी के लोग युद्ध से दूरी बना रहे मिडटर्म चुनाव से पहले कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार अब ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की बात कर रहे हैं। वजह है ईंधन की बढ़ती कीमत और युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी। ऐसे में ट्रम्प की कड़ी चेतावनी अपनी पार्टी के नेताओं और समर्थकों को भी एकजुट रखने का संदेश हो सकती है। 3. हूती के हमलों से अरब देश परेशान ईरान के समर्थन वाले हूती लड़ाके लगातार सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। हूती लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास भी एक्टिव हैं। यह रास्ता एशिया और यूरोप के बीच तेल और सामान पहुंचाने के लिए बेहद अहम है। ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ा तो हूती के हमले और बढ़ सकते हैं। इससे जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ेगा और तेल-सामान महंगा हो सकता है। ट्रम्प नहीं चाहते कि हूती अरब देशों और अमेरिकी सहयोगियों पर हमले बढ़ाएं। 4. ट्रम्प अपनी जीत दिखाना चाहते हैं ईरान युद्ध करीब 7 महीने से चल रहा है और अमेरिका पर इसकी लागत 3 लाख करोड़ रूपए से ज्यादा हो चुकी है। ट्रम्प अब इसे लंबा खींचने के बजाय किसी समझौते तक पहुंचकर यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सैन्य कार्रवाई का नतीजा निकला। 5. दुनिया को संदेश: अमेरिका पीछे नहीं हटेगा UN में ट्रम्प की कड़ी भाषा सिर्फ ईरान के लिए नहीं है। वह सहयोगी देशों और विरोधियों दोनों को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलों और उसके सहयोगी समूहों के मामले में पीछे हटने वाला नहीं है। ट्रम्प ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड से समझौता किया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ सुरक्षा मजबूत करने के लिए समझौते पर साइन किया। समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जाएगी, लेकिन द्वीप डेनमार्क के कंट्रोल में ही रहेगा। ट्रम्प ने UN में भाषण के दौरान कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। इसके तहत वहां दो बड़े सैन्य अड्डे बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में अब अमेरिका के किसी भी दुश्मन देश को सैन्य मौजूदगी बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब ट्रम्प लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कहते रहे हैं। उन्होंने इसे हासिल करने के लिए डेनमार्क पर दबाव बनाने और जरूरत पड़ने पर कब्जा करने की धमकी भी दी थी। कई नेताओं से अलग मुलाकात करेंगे ट्रम्प ट्रम्प कई देशों के नेताओं के साथ अलग मुलाकात करेंगे। इनमें ब्रिटेन के PM एंडी बर्नहैम, जापान की PM साने ताकाइची और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल हैं। ब्रिटेन के PM एंडी बर्नहैम के साथ यह ट्रम्प की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। ट्रम्प गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे, जिसमें सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा वे वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से भी मुलाकात करेंगे। UNGA के दौरान इराक के प्रधानमंत्री अली फालेह अल-जैदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी ट्रम्प की मुलाकात प्रस्तावित है। ——————-

अमेरिका में श्वेत गुट भारतीयों की जासूसी कर रहे:मिडटर्म चुनाव के दौरान हेट क्राइम 30% बढ़ने का खतरा, ट्रम्प भी बना सकते हैं इमिग्रेशन को मुद्दा

अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में इमिग्रेशन विरोध बड़ा मुद्दा बन रहा है। भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 30% तक बढ़ने की आशंका है। न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में 20 साल से रेस्तरां चलाने वाले भारतवंशी मोमिन अली (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि ट्रम्प के समर्थक श्वेत गुट भारतीयों के रेस्तरां में जासूसी करते हैं। प्रवासियों के मुद्दे से जुड़े संगठन एपीआई ने एक मॉड्यूल का अध्ययन कर चेताया है कि नवंबर तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 58 हजार होने का खतरा है। जबकि इस साल जुलाई तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 44,535 मामले सामने आए थे। अमेरिका में चुनाव अथवा भारतीयों से जुड़ा कोई भी मुद्दा सामने आने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी एंटी इमिग्रेशन मुद्दा उठाती है। भारतीयों के खिलाफ जॉब छीनने का आरोप भी लगाया जाता है। आइस एजेंटों को छापेमारी के लिए बुलाते हैं मोमिन अली कहते हैं कि आइस एजेंटों की आए दिन छापेमारी बड़ी आफत बन गई है। ये लोग आइस एजेंटों को अवैध प्रवासियों के काम करने का कॉल करते हैं। आइस एजेंट रेड डालकर वैध भारतीयों को भी पकड़ लेते हैं। छोटे से कस्बे फ्रेंडशिप में ग्रॉसरी स्टोर चलाने वाले धवल कुमार (बदला हुआ नाम) को आइस एजेंट बिना कारण बताए उठा कर ले गए। यहां के लगभग 200 लोगों ने उनके समर्थन में याचिका पर हस्ताक्षर किए तब जाकर 5 दिन बाद धवल को छोड़ा गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर​ फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख:इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे, यह पाकिस्तान की इकोनॉमी का 3 गुना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका में श्वेत गुट भारतीयों की जासूसी कर रहे:मिडटर्म चुनाव के दौरान हेट क्राइम 30% बढ़ने का खतरा, ट्रम्प भी बना सकते हैं इमिग्रेशन को मुद्दा

अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में इमिग्रेशन विरोध बड़ा मुद्दा बन रहा है। भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 30% तक बढ़ने की आशंका है। न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में 20 साल से रेस्तरां चलाने वाले भारतवंशी मोमिन अली (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि ट्रम्प के समर्थक श्वेत गुट भारतीयों के रेस्तरां में जासूसी करते हैं। प्रवासियों के मुद्दे से जुड़े संगठन एपीआई ने एक मॉड्यूल का अध्ययन कर चेताया है कि नवंबर तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 58 हजार होने का खतरा है। जबकि इस साल जुलाई तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 44,535 मामले सामने आए थे। अमेरिका में चुनाव अथवा भारतीयों से जुड़ा कोई भी मुद्दा सामने आने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी एंटी इमिग्रेशन मुद्दा उठाती है। भारतीयों के खिलाफ जॉब छीनने का आरोप भी लगाया जाता है। आइस एजेंटों को छापेमारी के लिए बुलाते हैं मोमिन अली कहते हैं कि आइस एजेंटों की आए दिन छापेमारी बड़ी आफत बन गई है। ये लोग आइस एजेंटों को अवैध प्रवासियों के काम करने का कॉल करते हैं। आइस एजेंट रेड डालकर वैध भारतीयों को भी पकड़ लेते हैं। छोटे से कस्बे फ्रेंडशिप में ग्रॉसरी स्टोर चलाने वाले धवल कुमार (बदला हुआ नाम) को आइस एजेंट बिना कारण बताए उठा कर ले गए। यहां के लगभग 200 लोगों ने उनके समर्थन में याचिका पर हस्ताक्षर किए तब जाकर 5 दिन बाद धवल को छोड़ा गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर​ फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख:इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे, यह पाकिस्तान की इकोनॉमी का 3 गुना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…