Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Yes Bank News: प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक के शेयरों में गुरुवार, 15 अक्टूबर को भारी गिरावट आई। कारोबार के दौरान स्टॉक करीब 14% तक टूट गया। मामला 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का फैसला रद्द कर दिया है। इसके बाद बैंक ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले और उसके असर की जांच कर रहा है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी शेयर में गिरावट को लेकर बैंक से जवाब मांगा था। इसके बाद यस बैंक ने कहा कि वह फैसले की पूरी कॉपी हासिल कर रहा है। उसे पढ़ने और उसके असर को समझने के बाद बैंक जरूरत के मुताबिक आगे जानकारी देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के फैसले को बरकरार रखा। यस बैंक और दूसरे पक्षों की अपील भी खारिज कर दी गई।

कोर्ट के मुताबिक, बैंक के पुनर्गठन की अंतिम योजना में इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का साफ प्रावधान नहीं था। इसलिए बैंक के एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

AT-1 बॉन्ड क्या होते हैं?

AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं। बैंक इनसे निवेशकों से पैसा जुटाते हैं और बदले में ब्याज देते हैं। लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब होने पर नियमों और शर्तों के तहत इन बॉन्ड की रकम घटाई या पूरी तरह खत्म की जा सकती है।

यस बैंक ने दिसंबर 2016 में 3,000 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड जारी किए थे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में 5,415 करोड़ रुपये के और बॉन्ड जारी किए गए। इस तरह कुल रकम 8,415 करोड़ रुपये थी।

2020 में क्या हुआ था?

मार्च 2020 में यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया था। उस समय केंद्र सरकार ने बैंक पर करीब एक महीने के लिए मोरेटोरियम लगाया था। यानी बैंक से पैसे निकालने पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। इसके बाद बैंक के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान नियुक्त एडमिनिस्ट्रेशन ने AT-1 बॉन्ड को राइट ऑफ कर दिया। इसका मतलब था कि बॉन्डधारकों की निवेश रकम खत्म कर दी गई। बॉन्डधारकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी।

बॉन्डधारक कोर्ट क्यों पहुंचे?

मई 2020 में Axis Trustee Services ने बॉन्डधारकों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को चुनौती दी गई। वहां बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला आया। मार्च 2023 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक इसके कानूनी और वित्तीय असर की समीक्षा कर रहा है। बैंक ने कहा है कि फैसले के अलावा उसके पास ऐसी कोई दूसरी जानकारी नहीं है, जिसका खुलासा करना जरूरी हो।

यस बैंक का स्टॉक 14% क्रैश

यस बैंक का शेयर 14.53% गिरकर 18.12 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 20% के लोअर सर्किट के साथ 16.96 रुपये तक फिसला था। हालांकि, बाद में थोड़ी रिकवरी हुई।

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फैशन और ब्यूटी ब्रांड्स की जानीमानी रिटेलर शॉपर्स स्टॉप के शेयरों में 15 अक्टूबर को बंपर खरीद हो रही है। दिन में शेयर बीएसई पर पिछले क्लोजिंग प्राइस से लगभग 15 प्रतिशत तक उछलकर 430.95 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शॉपर्स स्टॉप 16 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही और अप्रैल-सितंबर 2026 छमाही के वित्तीय नतीजे जारी करने वाली है। नतीजों से पहले जमकर शेयर खरीद हो रही है।

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा 14.25 करोड़ रुपये रहा था। एक साल पहले समान तिमाही में घाटा 15.74 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,291.41 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो जून 2025 तिमाही में 1,161.08 करोड़ रुपये था।

जून तिमाही में खोले 8 नए स्टोर

जून 2026 तिमाही में शॉपर्स स्टॉप के कुल खर्च एक साल पहले के मुकाबले 10.38 प्रतिशत बढ़कर 1,315.86 करोड़ रुपये के रहे थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 8 नए स्टोर खोले। इनमें से 2 डिपार्टमेंट स्टोर, 4 ब्यूटी स्टोर और बाकी 2 इसके किफायती रिटेल फॉर्मेट INTUN थे।

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Shoppers Stop का शेयर 6 महीनों में 37 प्रतिशत चढ़ा

शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शॉपर्स स्टॉप में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 66.06 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 37 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 541.70 रुपये और एडजस्टेड लो 267 रुपये है। अगस्त महीने में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग के साथ 465 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया था।

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Jio Platforms IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, जानें प्राइस बैंड से लेकर कारोबारी सेहत तक 8 बड़ी बातें

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms ने IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार, 14 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास RHP दाखिल किया। इसमें आईपीओ की पूरी रूपरेखा, जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों की जानकारी दी गई है। आइए, आईपीओ से जुड़ी 8 बड़ी बातें जानते हैं।

1. 21 अक्टूबर को खुलेगा IPO

Jio Platforms का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगा सकेंगे। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।

2. 27 करोड़ तक नए शेयर जारी होंगे

इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। यानी पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी। हालांकि, कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह अंतिम इश्यू शर्तों पर निर्भर करेगा।

3. जुटाए गए पैसे से चुकाया जाएगा कर्ज

Jio Platforms आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Ltd (RJIL) का कर्ज चुकाने में करेगी। इसके अलावा, कुछ रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इससे RJIL पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

4. रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2500 करोड़ के शेयर

आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसमें तय शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हो सकते हैं, जिनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

5. कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर

Jio Platforms ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारी आईपीओ की शर्तों के मुताबिक इन शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह हिस्सा दूसरे निवेशक वर्गों के लिए उपलब्ध शेयरों से अलग होगा।

6. पहली तिमाही में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Jio Platforms का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.8% बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 35,032 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी 15.1% बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 18,141 करोड़ रुपये था।

इस दौरान EBITDA मार्जिन 51.78% से बढ़कर 53.26% हो गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7,110 करोड़ रुपये था।

7. 1,065 से 1,119 रुपये प्राइस बैंड

Jio Platforms ने आईपीओ के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 13 शेयरों का रहेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी है। इसके लिए ₹14,534 लगेंगे। लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होने वाली है।

8. जियो 53.33 करोड़ ग्राहक

जियो के पास पहली तिमाही के अंत में 53.33 करोड़ ग्राहक थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 89 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, प्रति यूजर औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) 215.6 रुपये रहा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 135% बढ़ा, रेवेन्यू में 61% का उछाल

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी Transformers and Rectifiers (India) ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 135% बढ़कर ₹79.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹33.9 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, इस बार मुनाफे में ₹131.5 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन भी शामिल है।

रेवेन्यू और EBITDA में मजबूत बढ़त

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 60.7% बढ़कर ₹739.4 करोड़ हो गया। पिछले साल सितंबर तिमाही में यह ₹460 करोड़ था। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹128.8 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹58.9 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरा है। पिछले साल के 12.8% के मुकाबले इस बार यह 17.4% रहा। कंपनी के नतीजे CNBC-TV18 के पोल अनुमान से बेहतर रहे।

ऑर्डर बुक में 32% की बढ़ोतरी

Transformers and Rectifiers को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ₹3,283 करोड़ के नए ऑर्डर मिले। यह सालाना आधार पर 161% ज्यादा है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक 32% बढ़कर ₹7,237 करोड़ हो गई। वहीं, बातचीत के दौर में चल रहे ऑर्डर की वैल्यू ₹21,000 करोड़ है।

कंपनी को न्यूक्लियर पावर सेक्टर से पहला ऑर्डर भी मिला है। इसके तहत Nuclear Power Corporation of India के कैगा यूनिट 5 और 6 प्रोजेक्ट के लिए जनरेटर ट्रांसफॉर्मर सप्लाई किए जाएंगे।

दिवाली के आसपास बढ़ेगा प्रोडक्शन

कंपनी के MD और CEO सत्येन ममतोरा ने कहा कि चांगोदर और मोरैया प्लांट में बेहतर इस्तेमाल से रेवेन्यू बढ़ा है। ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। दिवाली के आसपास कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी ने FY27 के लिए 25% रेवेन्यू ग्रोथ, 16% EBITDA मार्जिन और 9-10% PAT मार्जिन का अनुमान बरकरार रखा है।

शेयर का हाल

नतीजों से पहले मंगलवार को Transformers and Rectifiers का शेयर BSE पर 3.36% चढ़कर ₹304.70 पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर पिछले 12 महीनों में 38% से ज्यादा गिर चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अदाणी ग्रुप की AI और डेटा सेंटर इक्विपमेंट बनाने की तैयारी, अमेरिकी कंपनी से मिलाया हाथ

अदाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज और अमेरिकी कंपनी Jabil Inc. ने भारत में AI और डेटा सेंटर के इक्विपमेंट बनाने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों ने 50:50 जॉइंट वेंचर (JV) बनाने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके जरिए भारत में बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी है।

प्रस्तावित JV में AI रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा, पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट, लिक्विड कूलिंग सिस्टम और ट्रांसफॉर्मर भी तैयार होंगे। इन इक्विपमेंट की सप्लाई भारत के साथ दूसरे देशों में भी की जाएगी। हालांकि, इसके लिए दोनों कंपनियों को अंतिम समझौते और जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी।

AI रैक और सर्वर बनाने की होगी बड़ी क्षमता

इस JV के तहत कई गीगावॉट क्षमता वाले AI रैक बनाए जाने की योजना है। ये रैक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम को संभालेंगे। AI से जुड़े कामों में ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल होता है। दोनों कंपनियां उपकरणों की इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग की सेवाएं भी देंगी।

2030 तक 8 GW हो सकती है डेटा सेंटर क्षमता

भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक 5 से 8 गीगावॉट पहुंचने का अनुमान है। AI का बढ़ता इस्तेमाल और क्लाउड सेवाओं का विस्तार इसकी बड़ी वजह हैं। डेटा को देश के भीतर रखने की जरूरत से भी इस कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।

कंपनियों के मुताबिक, डेटा सेंटर, क्लाउड और AI से जुड़े क्षेत्रों में हाइपरस्केलर्स का प्रस्तावित निवेश 50 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है। वहीं, अगले सात साल में ग्लोबल AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में 3 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा के अवसर का अनुमान है।

अदाणी ग्रुप की AI कारोबार में बढ़ेगी पकड़

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि AI के विकास के लिए सिर्फ बेहतर एल्गोरिदम काफी नहीं हैं। इसके लिए ऊर्जा, डेटा सेंटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग से जुड़ा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी चाहिए। इस JV से ग्रुप को AI के लिए जरूरी उपकरण बनाने के कारोबार में उतरने का मौका मिलेगा।

Jabil के CEO माइक डस्टूर ने कहा कि इस साझेदारी से भारत और दुनिया के दूसरे बाजारों में डेटा सेंटर उपकरणों की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।

मंगलवार को BSE पर अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 2.39% चढ़कर ₹2,694 पर बंद हुआ। इसने पिछले 6 महीने में 26.59% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bonus Share: 3 साल में 455% चढ़ी कीमत, अब मिलेंगे बोनस शेयर; 23 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट

टाइटन बायोटेक बोनस शेयर देने जा रही है। शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 4 शेयरों पर एक नया शेयर बोनस के तौर पर​ मिलेगा। रिकॉर्ड डेट 23 अक्टूबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे बोनस शेयरों के हकदार होंगे। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है।

बोनस शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को होगा और इनमें ट्रेडिंग 27 अक्टूबर से की जा सकेगी। टाइटन बायोटेक फार्मास्यूटिकल, न्यूट्रास्यूटिकल, फूड एंड बेवरेजेस, बायोटेक्नोलॉजी एंड फर्मेंटेशन, कॉस्मेटिक, वेटेरिनरी एंड एनिमल फीड, एग्रीकल्चर इंडस्ट्रीज, माइक्रोबायोलॉजी कल्चर मीडिया एंड प्लांट टिश्यू कल्चर मीडिया आदि के क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं।

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, यह क्लिनिकली अप्रूव्ड कोलाजन (मछली, बोवाइन और चिकन), स्किन केयर इंग्रीडिएंट्स, बोन व जॉइंट केयर इंग्रीडिएंट्स, प्रोटीन, पशु पोषण के लिए इंग्रीडिएंट्स और कई अन्य चीजें बनाती है। कंपनी पिछले 34 सालों से बिजनेस कर रही है और इसकी मौजूदगी 100 से ज्यादा देशों में है।

Titan Biotech शेयर 2 साल में 175 प्रतिशत चढ़ा

वर्तमान में टाइटन बायोटेक के शेयर की कीमत BSE पर 398.70 रुपये है। शेयर साल 2026 में अब तक लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। 2 साल में कीमत 175 प्रतिशत और और 3 साल में 455 प्रतिशत उछली है। 10 साल में शेयर 5100 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 55.78 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 555.65 रुपये और एडजस्टेड लो 171.40 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में टाइटन बायोटेक का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 59.17 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 9.46 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। प्रति शेयर अर्निंग 2.29 करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 206.19 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 27.45 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 6.64 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘LTCG और STT पर निवेशकों की राय सुनेगी सरकार’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान से शेयर बाजार में तूफानी तेजी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर सभी पक्षों की राय सुनना चाहेगी। इन दोनों टैक्स को लेकर निवेशक लगातार अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को टैक्स का बोझ कम करना चाहिए।

सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि LTCG टैक्स को लेकर भारत ही नहीं, विदेश के निवेशक भी सवाल उठा रहे हैं।

LTCG और STT पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?

सीतारमण ने कहा कि बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार किन सुझावों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सोच-समझकर बोलना चाहती हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘यह सवाल उठता है कि शेयर बाजार में LTCG टैक्स और STT दोनों क्यों लगाए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इनमें से कोई एक टैक्स ही होना चाहिए। सभी तरह की संपत्तियों पर एक जैसा टैक्स लगाने का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में है।’

LTCG और STT के पीछे मकसद

सीतारमण ने कहा कि दो साल पहले सरकार ने अलग-अलग एसेट क्लास पर टैक्स को एक समान स्तर पर लाने की कोशिश की थी। उस समय कुछ लोगों को लगा कि सरकार टैक्स बढ़ा रही है। हालांकि, सीतारमण ने कहा कि ऐसा नहीं था। सरकार का मकसद अलग-अलग एसेट क्लास के बीच टैक्स का अंतर कम करना था।

इससे निवेशकों को सिर्फ टैक्स में मिलने वाले फायदे के आधार पर निवेश का विकल्प चुनने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वित्त मंत्री ने कहा, ‘इन मुद्दों पर बहस होना अच्छी बात है। मैं इस मामले में सभी पक्षों की राय सुनना चाहूंगी।’

बयान के बाद शेयर बाजार में तेजी

वित्त मंत्री के बयान के बाद शेयर बाजार में तेजी और बढ़ गई। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों 1.5% से ज्यादा चढ़ गए। निफ्टी दिनभर 22,600 के स्तर को पार करने के लिए संघर्ष कर रहा था। हालांकि, बाद में यह इस स्तर के ऊपर निकल गया। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,650 के पार भी पहुंचा।

कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई। BSE, CDSL और NSDL के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।

रुपये की गिरावट पर क्या बोलीं सीतारमण?

वित्त मंत्री ने रुपये की कमजोरी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठा रहा है।

हालांकि, रुपये में गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें से ज्यादातर का संबंध दूसरे देशों से है। सीतारमण ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

फिस्कल डिसिप्लिन पर निवेशकों को चिंता की जरूरत नहीं

सीतारमण ने राजकोषीय अनुशासन यानी फिस्कल डिसिप्लिन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हमेशा अहम मुद्दा रहा है।

उनके मुताबिक, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी मोदी राजकोषीय अनुशासन पर जोर देते थे। वित्त मंत्री ने कहा कि फिस्कल डिसिप्लिन को लेकर निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।