Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Gold Silver Price Today: पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना ₹1,400 चढ़कर करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को चांदी ₹1,000 सस्ती हो गई और यह लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।

सोने का ताजा भाव

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना सोमवार को ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत ₹1,400 बढ़ गई।

चांदी में लगातार छठे दिन गिरावट

दूसरी ओर, चांदी की कीमत ₹1,000 घटकर ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,22,500 प्रति किलो था।

अगर 10 जुलाई से अब तक की बात करें, तो चांदी की कीमत में कुल ₹15,500 यानी करीब 6.5% की गिरावट आ चुकी है।

क्यों बढ़ा सोने का भाव?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने सस्ते भाव पर सोने की खरीदारी शुरू की। इसी वजह से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत और डॉलर में नरमी की वजह से सोने को समर्थन मिला। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना कुछ सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 2% की बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है।

कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भूराजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

हालांकि बाद में ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका की ब्याज दरों और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि MCX पर सोने में करीब ₹900 की तेजी आई है और यह ₹1,41,850 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 3,975 डॉलर के सपोर्ट से उछलकर करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, जून के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से सोने को शुरुआती समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर या दिसंबर में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

गोल्ड के लिए अहम लेवल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगे कच्चे तेल की वजह से फिलहाल सोने की तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी स्तर पर MCX गोल्ड के लिए ₹1,40,000 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ₹1,42,500 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस स्तर हो सकता है।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

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Axis, HDFC और Kotak Bank; Q1 रिजल्ट के बाद शेयर धड़ाम, अब ट्रेडिंग के लिए चार्ट पर मार्क करें ये लेवल्स

Banking Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की तेज होती आंच में कच्चा तेल उबल पड़ा और प्रति बैरल यह $90 के पार पहुंच गया। इसके चलते घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) धड़ाम हो गए। इन पर प्राइवेट सेक्टर के हैवीवेट बैंकिंग स्टॉक्स एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने काफी दबाव डाला और इनके शेयर 5.5% तक फिसल गए। इन बैंकों के मार्जिन पर जून तिमाही में दबाव दिखा था और अब एनालिस्ट्स को इस तिमाही भी दबाव के आसार हैं।

जेफरीज के एनालिस्ट्स प्रखर शर्मा और विनायक अग्रवाल के मुताबिक कॉर्पोरेट लोन की हिस्सेदारी बढ़ने और हाल ही में होलसेल प्राइसिंग में तेजी पर बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर असर पड़ा और अब सितंबर तिमाही में मार्जिन पर दबाव बने रहने के आसार हैं। अब जून तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इन तीन स्टॉक्स की ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए, इसे लेकर बोनांजा के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट विराट जागड़ ने कुछ टेक्निकल लेवल्स सुझाएं है और चार्ट पर रेजिस्टेंस-सपोर्ट मार्क किया है।

Kotak Mahindra Bank

कोटक महिंद्रा बैंक एक बड़े सिमेट्रिकल ट्राईएंगल पैटर्न के अंदर ट्रेड कर रहा है, जो किसी बड़ी हलचल से पहले कंसोलिडेशन का संकेत है। हाल ही में इसे ₹390–₹397 के आस-पास ऊपरी ट्रेंडलाइन के पास रेसिस्टेंस झेलना पड़ा और प्रॉफिट बुकिंग दिखी तो नीचे की तरफ ₹370–₹375 के आस-पास निचली ट्रेंडलाइन से जरूरी सपोर्ट मिल रहा है। RSI न्यूट्रल 45 लेवल के आस-पास बना हुआ है, जिससे इसमें किसी भी तरफ मजबूत मोमेंटम नहीं होने का संकेत मिल रहा है। अगर यह शेयर ₹397 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह ₹420–435 की तरफ बढ़ सकता है। दूसरी तरफ अगर यह ₹370 के नीचे गिरता है, तो इसमें गिरावट बढ़ सकती है और अगला सपोर्ट ₹350 के आस-पास हो सकता है।

Axis Bank

₹1,300–₹1,320 के अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिके रहने में नाकामी के बाद एक्सिस बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। यह मुनाफावसूली का संकेत है और अभी भी यह अपने मीडियम-टर्म ट्रेंडलाइन सपोर्ट यानी ₹1,250–₹1,260 के आस-पास बना हुआ है। अगर यह इस जोन के नीचे जाता है, तो यह ₹1,220 और ₹1,180 की तरफ फिसल सकता है। RSI के 50 के से नीचे आने से मोमेंटम में कमजोरी दिख रही है और शेयर शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे है। ऊपर की तरफ शेयर के लिए ₹1,305 और ₹1,320 पर रेजिस्टेंस है। अगर यह ₹1,320 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो नई खरीदारी शुरू हो सकती है और ₹1,380–1,400 तक जाने का रास्ता खुल सकता है।

HDFC Bank

₹810–815 के रेजिस्टेंस जोन के पास रिजेक्शन झेलने के बाद एचडीएफसी बैंक शॉर्ट-टर्म सेलिंग प्रेशर में है। तेज गिरावट के साथ एक बेयरेश कैंडल बनी। फिलहाल यह शेयर अपने अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो कमजोरी का संकेत है, तो ₹745–750 के पास लॉन्ग-टर्म ट्रेंडलाइन एक अहम सपोर्ट का काम कर रही है। RSI भी ओवरबॉट जोन से नीचे आ गया है जो बुलिश मोमेंटम कम होने का संकेत दे रहा है। जब तक यह स्टॉक ₹815 के नीते है, इसके ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित है। नीचे की तरफ बात करें तो इसे ₹775 और फिर ₹750 पर सपोर्ट दिख रहा है तो ऊपर की तरफ ₹815 और फिर ₹850 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है। अगर यह ₹815 के ऊपर लगातार बना रहता है तो इसमें बुलिश मोमेंटम फिर से शुरू हो सकता है और शेयर ₹850–870 की तरफ बढ़ सकता है।

₹23 के नीचे आया Yes Bank, धमाकेदार रिजल्ट के बावजूद 4% टूटा शेयर, ये है वजह

HDFC Bank Share Price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 5% तक गिरा; अब बाय, सेल या होल्ड? क्या हो स्ट्रैटेजी?

Axis Bank Share Price: मुनाफा बढ़ने के बावजूद शेयर 6% तक टूटा, मार्जिन पर दबाव से निवेशक टेंशन में; अब ब्रोकरेज की क्या है राय

Kotak Mahindra Bank Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 26% बढ़कर हुआ ₹4123 करोड़, एसेट क्वालिटी में सुधार

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

₹23 के नीचे आया Yes Bank, धमाकेदार रिजल्ट के बावजूद 4% टूटा शेयर, ये है वजह

Yes Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज लेंडर येस बैंक के लिए पिछले वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही धमाकेदार रही। बैंक का मुनाफा 33% से अधिक बढ़ गया लेकिन प्रोविजंस में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी पर शेयरों ने ऐसा दबाव बनाया कि यह करीब 4% टूट गया। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद यह संभल नहीं पाया और अब भी यह काफी दबाव में है। फिलहाल बीएसई पर यह 2.75% की गिरावट के साथ ₹22.98 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 3.85% टूटकर ₹22.72 तक आ गया था। आगे की बात करें तो रिजल्ट के बाद ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने इसक रेटिंग को सेल से अपग्रेड कर रिड्यूस कर दिया है और टारगेट प्राइस ₹17 से बढ़ाकर ₹22 किया है यानी कि इसके शेयर अभी टारगेट प्राइस से ऊपर हैं।

Yes Bank Q1 Results: खास बातें

येस बैंक के लिए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। स्टैंडएलोन लेवल पर इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 33.7% बढ़कर ₹1,070.99 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक की ब्याज से शुद्ध कमाई यानी NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) ₹2,371.47 करोड़ से 17.5% बढ़कर ₹2,786.46 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) भी डिपॉजिट्स की कम लागत और पीएसएल शॉर्टफाल डिपॉजिट्स में गिरावट के दम पर 2.5% से सुधरकर 2.7% पर पहुंच गया।

बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी सालाना आधार पर 25.5% बढ़कर ₹1704 करोड़ तो नॉन-इंटेरेस्ट इनकम 2.6% उछलकर ₹1,798 करोड़ पर पर पहुंच गया। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.6% से 1.3% पर आ गया तो नेट एनपीए रेश्यो भी 0.3% से 0.2% पर आ गया। हालांकि प्रोविजंस तिमाही आधार पर ₹187.55 करोड़ से 110.33% उछलकर ₹394.48 करोड़ पर पहुंच गया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

येस बैंक के शेयरों ने इस साल कुछ ही महीने में निवेशकों को रॉकेट की स्पीड से रिटर्न दिया था। 30 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹17.19 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से तीन महीने में यह 49.91% उछलकर 18 जून 2026 को ₹25.77 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर? Q1 रिजल्ट के बाद ब्रोकरेज का ये है रुझान

South Indian Bank Share Price: साउथ इंडियन बैंक के जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने इसमें फटाफट पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके शेयरों को लेकर जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, वह इसके मौजूदा लेवल से करीब 37% ऊपर है। अभी इसकी मौजूदा स्थिति की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर शुक्रवार 17 जुलाई को यह 1.57% की गिरावट के साथ ₹44.62 पर बंद हुआ था।

किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर?

साउथ इंडियन बैंक के लिए एक और तिमाही बेहतरीन रही है और जून 2026 में इसके नतीजे शानदार रहे। बैंक के ग्रोथ, मुनाफे और एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार हुआ है। RAM (रिटेल एग्रीकल्चर एंड एमएसएमई) सेगमेंट में मजबूती के दम पर इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बैंक की क्रेडिट ग्रोथ तिमाही आधार पर 15.8% से बढ़कर 18.6% हो गई तो बेहतर CASA मिक्स की वजह से सीएएसए रेश्यो भी बढ़कर 33% हो गया।

फंडिंग कॉस्ट कम होने से NIM (नेट इंटेरेस्ट मार्जिन) में 28 बीपीएस की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह 3.23% पर पहुँच गया। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी के मुताबिक आगे भी मार्जिन के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि रिटेल/MSME मिक्स में सुधार से प्राइसिंग का दबाव कम हो जाएगा।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि ट्रेजरी से कम कमाई के बावजूद बैंक को मुनाफा अच्छा रहा और स्थिर ऑपरेटिंग परफॉरमेंस और मॉडरेट क्रेडिट कॉस्ट के दम पर लगातार नौवीं तिमाही में RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) 1% से ऊपर बना रहा। एसेट क्वालिटी भी अच्छी बनी रही और ग्रॉस स्लिपेज घटकर 52 बीपीएस हो गया।

ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि बैंक की मिड-टीन लोन ग्रोथ बनी रहेगी और FY27-28 के दौरान करीब 1.1 का RoA और करीब 13% का RoE (रिटर्न ऑफ इक्विटी) रह सकता है। इन सब बातों को देखकर ब्रोकरेज फर्म ने इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है और 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹61 फिक्स किया है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

साउथ इंडियन बैंक के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 5 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹28.13 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर 10 महीने में ही यह 77.39% ऊपर चढ़कर 7 जुलाई 2026 को ₹49.90 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Korea effect on US-Japan: यूके, अमेरिका और जापान के फंड मैनेजर्स अब ट्रेडिंग शुरू होने से पहले दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट पर एक नजर डाल रहे हैं। एक समय था कि दक्षिण कोरिया का बाजार लंदन, न्यूयॉर्क और टोक्यो के फंड मैनेजर्स के लिए बहुत अहम नहीं था लेकिन अब $4 लाख करोड़ का इक्विटी मार्केट एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रहा है। दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में उतार-चढ़़ाव अब दुनिया भर की चिप कंपनियों के शेयरों पर असर डाल रही है। खास बात ये है कि एसके हीनिक्स (SK Hynix) की अमेरिका में हाल ही लिस्टिंग हुई जिससे कोरिया का असर अमेरिका तक पहुंच गया और अब कोरिया की सेंटीमेंट-आधारित ट्रेडिंग अब चौबीसों घंटे ग्लोबल एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रही है।

दक्षिण कोरिया की वॉचलिस्ट में एंट्री

निवेश के तौर-तरीके बदल रहे हैं। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट के एशिया मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ने अपनी 14 साल की नौकरी में पहली बार कंपनी की ग्लोबल टीम के सामने कोरिया पर एक प्रेजेंटेशन दिया। जापानी ट्रेडर् दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स को अपनी वॉच लिस्ट में शामिल कर रहे हैं। पाइनब्रिज इन्वेस्टमेंट्स के लंदन-स्थित पोर्टफोलियो मैनेजर हनी रेढा (Hani Redha) का कहना है कि अब सभी कोरियाई निवेशक हैं। हनी का कहना है कि उनके दिन की शुरुआत अब कोरियाई बाजार में एआई ट्रेडिंग को देखने से होती है। जब कोरियाई बाजार बंद हो जाता है तो उनका ध्यान अमेरिकी मार्केट में एसके हीनिक्स के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स और कोरिया से जुड़े ईटीएफ (ETFs) पर चला जाता है। हनी के मुताबिक यह लगभग 24 घंटे नजर रखने जैसा है।

वैश्विक बाजारों पर गहरा असर

कोरियाई मार्केट का अमेरिका में असर पिछले हफ्ते साफ तौर पर दिखा। एआई की मांग को लेकर संदेहों पर कोस्पी में करीब 9% की गिरावट आई तो इसकी आंच अमेरिकी मार्केट तक फैल गई। एसके हीनिक्स के अमेरिकी लिस्टेड स्टॉक्स में 9.3% की फिसलन आई जिससे दूसरी बड़ी चिप कंपनियों के शेयर भी धड़ाम हो गए। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कोरिया और अमेरिका के बीच गहरे संबंध अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगे हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरिया के मार्केट इंडेक्स कोस्पी और अमेरिकी मार्केट के इंडेक्स नास्डाक 100 के बीच 60-दिनों का कोरिलेशन बढ़कर 0.46 पर पहुंच गया जोकि दो साल में सबसे अधिक है और पांच साल के औसत 0.16 से करीब तीन गुना अधिक है।

कोरियाई स्टॉक्स का असर मार्केट की गिरावट में और दिखता है। ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार 7 जुलाई को कोरियाई बाजार में कमजोरी के दौरान कोस्पी के प्रति नैस्डैक 100 इंडेक्स की संवेदनशीलता साल 1990 के बाद से सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। इसी तरह MSCI वर्ल्ड इंडेक्स के लिए भी यह पैमाना इस महीने की शुरुआत में चार साल के हाई लेवल पर पहुंच गया।

न्यूयॉर्क में टाइग्रेस फाइनेंशियल पार्टनर्स के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर इवान फीनसेथ का कहना है कि कोरिया असल में नैस्डैक और एसओएक्स जैसे ही उतार-चढ़ाव वाले इकोसिस्टम का हिस्सा बन गया है। उनका कहना है कि एसके हीनिक्स, सैमसंग और कोस्पी अब अमेरिकी एआई और चिप से जुड़े रिस्क के लिए प्री-मार्केट इंडिकेटर का काम कर रहे हैं।

कोस्पी और जापान के निक्केई 225 के बीच भी कोरिलेशन यानी संबंध तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से ऑर्टस एडवाइजर्स के जापान इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड एंड्रयू जैक्सन ने इस साल की शुरुआत में बारीकी से नजर रखने के लिए कोस्पी का चार्ट शामिल किया। उन्होंने यह काम 20 साल से अधिक समय में पहली बार किया है। एचएसबीसी होल्डिंग्स में एशिया पैसिफिक के इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड हेराल्ड वैन डेर लिंडे का कहना है कि आजकल सभी मीटिंग में कोरिया पर चर्चा होती है। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट में एशिया पैसिफिक के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ताई हुई का भी कहना है कि इस साल से पहले अपनी ग्लोबल टीम के सामने उन्होंने कोरिया के बारे में कोई प्रेजेंटेशन नहीं दिया था।”

बना रहेगा कोरिया का वैश्विक मार्केट पर असर?

अब सवाल उठता है कि क्या दक्षिण कोरिया अब वैश्विक मार्केट के लिए अहम इंडिकेटर बना रहेगा। इसे लेकर यूबीएस सुमी ट्रस्ट वेल्थ मैनेजमेंट में जापान इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट चिसा कोबायाशी (Chisa Kobayashi) का कहना है कि जब तक एआई रैली जारी है, दक्षिण कोरियाई मार्केट अहम बना रहेगा। हालांकि उनका कहना है कि मार्केट में लेवरेज से जुड़े उतार-चढ़ाव और कम मेच्योर मार्केट की वजह से ट्रेडिंग मुश्किल हो जाती है क्योंकि यह फंडामेंटल्स से उल्टी दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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ITC Hotels के शेयर में 36% तक उछाल का दम, Q1 नतीजों के बाद ICICI Securities ने दोहराई Buy रेटिंग

ITC होटल्स के शेयर पर ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities बुलिश बनी हुई है। तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। लेकिन टारगेट प्राइस 229 रुपये प्रति शेयर से घटाकर 235 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। फिर भी नया टारगेट, शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 172.45 रुपये से 36 प्रतिशत ज्यादा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 35.4 प्रतिशत बढ़कर 180.25 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 133.10 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 14.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 936.02 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो जून 2025 तिमाही में 815.54 करोड़ रुपये था। जून 2026 तिमाही में ITC होटल्स के खर्च 750 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 674.97 करोड़ रुपये के थे। EBITDA सालाना आधार पर 19.6 प्रतिशत बढ़कर 292.3 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन बढ़कर 31.2 प्रतिशत पर पहुंच गया।

ITC Hotels पर ब्रोकरेज के तर्क

ब्रोकरेज ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि ITC होटल्स ने होटल रेवेन्यू में 10% और होटल EBITDA में 13% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की। वह भी तब जब भूराजनीतिक तनावों की वजह से अप्रैल 2026 की परफॉर्मेंस पर असर पड़ा था। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में रिकवरी जारी रहने की उम्मीद है। ITC होटल्स को अक्टूबर 2026-मार्च 2027 में डिमांड में तेज सुधार की उम्मीद है। ICICI Securities का अनुमान है कि नए होटल खुलने की वजह से FY26–29E के दौरान RevPAR CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) 9% और मैनेजमेंट फीस CAGR 16% रहेगी। इसलिए अनुमान है कि FY26–29E के दौरान ITC होटल्स का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 11% CAGR और EBITDA 14% CAGR से बढ़ेगा।

इन सब फैक्टर्स के बेसिस पर ब्रोकरेज ने ITC Hotels के लिए ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। लेकिन टारगेट प्राइस घटा दिया है। ब्रोकरेज ने मुख्य जोखिमों में होटल ऑक्यूपेंसी में सुस्ती और नए होटलों को शुरू करने में देरी को शामिल किया है।

ITC Hotels का मार्केट कैप 35900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है।

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Tech Mahindra Share Price: मुनाफा 28% बढ़ने के बाद शेयर 4% तक चढ़ा, अब क्या हो निवेशकों की स्ट्रैटेजी?

IT कंपनी टेक महिंद्रा के शेयरों में 17 जुलाई को अच्छी तेजी है। दिन में शेयर BSE पर पिछले बंद भाव से 3.8 प्रतिशत तक चढ़कर 1569.65 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 1.53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। अच्छे तिमाही नतीजों के चलते शेयर खरीद बढ़ी है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 28.4 प्रतिशत बढ़कर 1465.1 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1140.6 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 17.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15712 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 13351.2 करोड़ रुपये था। EBIT 2264 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBIT मार्जिन 14.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) डील 1.078 अरब डॉलर की रहीं। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 33.3 प्रतिशत ज्यादा है।

जून 2026 तिमाही में डॉलर के लिहाज से टेक महिंद्रा का रेवेन्यू 166 करोड़ डॉलर रहा। यह तिमाही आधार पर 2.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या तिमाही आधार पर 863 घटकर 1,46,760 कर्मचारी रह गई।

Tech Mahindra के शेयर पर ब्रोकरेज की राय

HSBC ने टेक महिंद्रा के शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 1,635 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। मार्जिन में बढ़ोतरी सही दिशा में चल रही है और मैनेजमेंट का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक 15 प्रतिशत EBIT मार्जिन हासिल करना है। कंपनी की ग्रोथ अपने साथियों की तुलना में बेहतर है, जो इसके शेयर की प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराती है।

नोमुरा ने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस 1,600 रुपये दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि टेक महिंद्रा ने मुख्य ऑपरेटिंग पैमानों पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और FY27 के लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है। जेफरीज ने तिमाही नतीजों के बाद FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों को 6-8 प्रतिशत बढ़ा दिया है। लेकिन 1,260 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि शेयर की वैल्यूएशन काफी ऊंची बनी हुई है।

Reliance Industries Share Price: Q1 नतीजों से पहले शेयर 2% उछला, तिमाही आधार पर 4% बढ़ सकता है EBITDA

टेक महिंद्रा के शेयर के लिए ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1780 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की जून तिमाही परफॉर्मेंस शानदार रही है। कंपनी के मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 में कॉम्पिटीटर्स के औसत से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने के अपने भरोसे को दोहराया है। साथ ही 15 प्रतिशत EBIT मार्जिन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

उम्मीद से बेहतर काम-काज, ग्रोथ की बेहतर संभावनाओं और मजबूत डील मोमेंटम को देखते हुए प्रभुदास लीलाधर ने FY27E/FY28E के लिए कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ अनुमानों को बढ़ाकर 6.0%/5.4% कर दिया है। पहले अनुमान 4.8%/5.8% की रेवेन्यू ग्रोथ के थे। EBIT मार्जिन अनुमानों को भी 14.5%/15.0% से बढ़ाकर 14.8%/15.1% कर दिया है। FY27E और FY28E दोनों के लिए प्रति शेयर अर्निंग्स में 2.2% बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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Polycab India Share Price: अपने हाई से 12% से ज्यादा टूटा शेयर, Q1 नतीजों के बाद आज 4% गिरा, क्या निवेश का है ये सही मौका

Polycab India Share Price: वायर्स एंड केबल्स कंपनी पॉलीकैब इंडिया (Polycab India) के शेयर शुक्रवार को लगभग 4 फीसदी गिरा है, जिससे लगातार तीसरे सेशन में नुकसान बढ़ा। कंपनी ने उम्मीद से बेहतर फाइनेंशियल पहली तिमाही की कमाई बताई। ब्रोकरेज जेफरीज और HSBC ने स्टॉक पर अपनी बुलिश रेटिंग बनाए रखी।

दोपहर के ट्रेड में पॉलीकैब के शेयर 3.96 परसेंट गिरकर 8,850 रुपये पर आ गए, जिससे यह स्टॉक NSE मिडकैप 50 पर टॉप लूजर बन गया। गुरुवार को 1.2 फीसदी गिरने के बाद, स्टॉक अब शुक्रवार समेत तीन सेशन में 7.2 फीसदी गिर चुका है।

हालिया करेक्शन के बावजूद, पॉलीकैब के शेयर 2026 में अब तक 15.5 फीसदी ऊपर हैं । कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.33 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है।

यह गिरावट तब आई जब पॉलीकैब ने जून तिमाही के नतीजे बताए जो सभी ज़रूरी पैरामीटर पर स्ट्रीट की उम्मीदों से बेहतर थे। रेवेन्यू साल-दर-साल 39 फीसदी बढ़कर 8,209 करोड़ रुपये हो गया, जो CNBC-TV18 पोल के 7,902 करोड़ रुपये के अनुमान से ज़्यादा है। पिछले साल इसी तिमाही में रेवेन्यू 5,906 करोड़ रुपये था।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

कमाई के बाद कॉन्फ्रेंस कॉल में, मैनेजमेंट ने कहा कि उसका घरेलू वायर्स और केबल्स (W&C) बिज़नेस साल-दर-साल 43% बढ़ा, जबकि कुल W&C रेवेन्यू 38% बढ़ा, जो स्ट्रीट की लगभग 35% की उम्मीदों से ज़्यादा है। कंपनी ने कहा कि वॉल्यूम ग्रोथ हाई बेस पर लो-टू-मिड सिंगल डिजिट में रही, जिसमें वायर्स ने केबल्स से बेहतर परफॉर्म किया।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल दिक्कतों के कारण एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 12% की गिरावट आई, जिससे सेल्स में उनका योगदान एक साल पहले के 5.2% से घटकर 3.3% हो गया।

पॉलीकैब ने अपने मीडियम-टर्म EBITDA मार्जिन गाइडेंस 11-13% को दोहराया और कहा कि उसका फास्ट-मूविंग इलेक्ट्रिकल गुड्स (FMEG) बिज़नेस FY30 तक 8-10% मार्जिन हासिल करने के लिए ट्रैक पर है। उसे यह भी उम्मीद है कि भारतनेट प्रोजेक्ट का काम तेज़ी से पूरा होगा, और FY27 में ₹800-1,000 करोड़ का रेवेन्यू मिलने की संभावना है।

शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय

नतीजों के बाद, जेफरीज ने अपनी ‘Buy’ रेटिंग दोहराई और अपना टारगेट प्राइस ₹10,920 से बढ़ाकर ₹11,100 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से लगभग 25% की बढ़त होगी।

ब्रोकरेज ने FY27 और FY28 के अपने कमाई के अनुमान 2-3% बढ़ा दिए हैं और FY26-FY29 के दौरान 22% EPS CAGR की उम्मीद है, पॉलीकैब को भारत के पावर और कैपिटल खर्च साइकिल पर एक दांव के तौर पर बताया है।

वहीं HSBC ने भी ₹10,160 के टारगेट प्राइस के साथ ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है, जिसका मतलब है कि इसमें लगभग 14% की बढ़त हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि वायर और केबल बिज़नेस में मजबूत रियलाइज़ेशन और FMEG के मज़बूत परफॉर्मेंस की वजह से कमाई में लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई, जबकि डिमांड, कैपेसिटी बढ़ाने और FMEG स्केल-अप से FY26-FY29 के दौरान 21% EPS CAGR की उम्मीद है। इसने कॉपर और एल्युमीनियम की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मुख्य रिस्क बताया।

पॉलीकैब पर कवरेज करने वाले 34 एनालिस्ट में से 23 ने “Buy” रेटिंग दी है, 9 ने “Hold” रेटिंग दी है और दो ने “Sell” रेटिंग दी है।

सुबह 13.22 बजे तक स्टॉक 3.72% गिरकर ₹8,872 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले साल इसमें लगभग 29% की बढ़त हुई है।  पिछले तीन महीनों में इसमें 48 फीसदी की ज़बरदस्त तेज़ी आई थी। स्टॉक 22 जून, 2026 को ₹10,126 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। अपने हाई से स्टॉक 12.5 परसेंट नीचे आ चुका है। 12 अगस्त, 2025 को यह 52 हफ़्ते के सबसे निचले स्तर ₹6,620 पर पहुंच गया।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।