Trump Tariff: ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ लगाने का प्लान, क्या भारतीय फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर? समझिए पूरा मामला

Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय दवा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगर यह योजना लागू होती है तो 2029 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लग सकता है। हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अभी सरकार का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

ट्रंप का पूरा प्लान क्या है?

21 जुलाई को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।

इसके बाद अगस्त 2028 से 100% टैरिफ लागू होगा। फिर अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। ट्रंप चाहते हैं कि दवा कंपनियां अपनी फैक्टरी अमेरिका में लगाएं। इसी मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है।

ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

यह फैसला अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत दवा उत्पादन को दोबारा अपने देश में लाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।

इसी वजह से अमेरिका अब दवा कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।

भारत की कंपनियों पर कितना असर पड़ेगा?

भारत हर साल अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं भेजता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का होता है। अमेरिका में बिकने वाली करीब 40% से 50% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां सप्लाई करती हैं।

फिलहाल भारतीय कंपनियों की कमाई पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। उनके पास करीब दो साल का समय है। इस दौरान वे अमेरिका में निवेश बढ़ा सकती हैं, सप्लाई चेन बदल सकती हैं या किसी राहत के लिए बातचीत कर सकती हैं। वैसे भी भारत की कई बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से प्लांट हैं।

सबसे बड़ा सवाल क्या है?

अभी यह साफ नहीं है कि टैरिफ सिर्फ तैयार दवाओं पर लगेगा या फिर API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) पर भी लागू होगा। अगर API भी दायरे में आया तो कंपनियों की लागत और मुनाफे पर ज्यादा असर पड़ सकता है। इसलिए इंडस्ट्री अंतिम नियमों का इंतजार कर रही है।

एक्सपर्ट क्या मानते हैं?

Mirae Asset Sharekhan के रिसर्च एनालिस्ट थॉमस वी. अब्राहम का कहना है कि बाजार अभी अंतिम नियमों का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत की ज्यादातर बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। ऐसे में दो साल का समय नई शर्तों के हिसाब से खुद को तैयार करने के लिए काफी हो सकता है।

वहीं, Indian Pharmaceutical Alliance के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चला रही हैं। इससे वहां रोजगार भी मिलता है और दवाओं की सप्लाई चेन मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री दोनों देशों की सरकारों के साथ बातचीत जारी रखेगी।

दूसरी ओर, Entod Pharmaceuticals के CEO निखिल मसूरकर का मानना है कि भारतीय दवा कंपनियों को अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें मध्य पूर्व, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों में भी तेजी से विस्तार करना चाहिए।

दबाव बनाने की रणनीति?

कुछ एनालिस्टों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह ऐलान भारत के साथ बेहतर ट्रेड डील कराने के लिए दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका में 90% से ज्यादा प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं। अगर इन पर 200% टैरिफ लगा तो दवाएं महंगी हो जाएंगी। इसका बोझ अमेरिकी मरीजों पर पड़ेगा। चुनावी माहौल में यह फैसला ट्रंप के लिए भी आसान नहीं होगा।

IndusInd Bank Q1 Results: प्रॉफिट 47% बढ़कर 1003 करोड़ रुपये रहा, एसेट क्वालिटी बेहतर हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dr Reddy’s Q1 Results: डॉ रेड्डीज का प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा, शेयर फिसला

डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा का असर पड़ा। इस वजह से कंपनी की इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट बढ़ गई।

Dr Reddy’s Laboratories हैदराबाद की दवा बनाने वाली कंपनी है। इसने एक साल पहले की जून तिमाही में 1,418 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 5.6 फीसदी गिरकर 8,070.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 8,545.2 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने कहा है कि उसने जून तिमाही में सेमाग्लूटाइड की सप्लाई की बाधा से जुड़े इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट के लिए 240 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया है। इस महीने की शुरुआत में डॉ रेड्डीज ने कहा था कि उसकी जेनरिक सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा जारी रहेगी। यह इंडिया में उपलब्ध नहीं होगी और चीन में भी कम से कम अक्तूबर तक इसकी सप्लाई में बाधा आएगी।

एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (API) में अशुद्धता (Impurity) से जुड़े मसले की वजह से कंपनी को नए बैचेज के प्रोडक्शन को रोकना पड़ा था। सेमाग्लूटाइड एक्टिव इनग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल वजन घटाने वाली दवा Wegovy में होता है। इंडिया में इस पर पेंटेंट खत्म हो गया है। इससे जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए इसका उत्पादन करने का रास्ता खुल गया है।

डॉ रेड्डीज का प्लान भारत में तेजी से बढ़ते सेमाग्लूटाइड मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने का था। लेकिन, इसका उत्पादन रुकने से कंपनी के प्लान पर पानी फिर गया। नॉर्थ अमेरिका से भी कंपनी का रेवेन्यू 35.3 फीसदी गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया। यह कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी को लेनालिमाइड की बिक्री में गिरावट का भी सामना करना पड़ रहा है। यह ब्रिस्टल मेयर्स स्क्विब की कैंसर की दवा रेवलीमिड का जेनरिक वर्जन है।

डॉ रेड्डीज का शेयर 22 जुलाई को 2.16 फीसदी गिरकर एनएसई पर 1,179.90 रुपये पर बंद हुआ। दूसरी फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान है, जिसमें उन्होंने जेनरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका असर सन फार्मा, सिप्ला और डॉ रेड्डीज जैसी दवा कंपनियों पर पड़ेगा।

कल बारिश का तांडव: IMD ने 2 राज्यों के लिए रेड कलर वॉर्निंग दी, इन 21 राज्यों में भी मूसलाधार बरसेंगे मेघ, आंधी-तूफान का भी अलर्ट

Weather Update 23 July: मानसून का प्रचंड रूप जारी है और देश के कई हिस्सों में बादल आफत बनकर बरस रहे हैं। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जुलाई के लिए राष्ट्रीय मौसम बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने पश्चिम भारत के 2 प्रमुख राज्यों (गुजरात क्षेत्र और मध्य महाराष्ट्र) के लिए रेड कलर वॉर्निंग जारी करते हुए मूसलाधार से बेहद खतरनाक बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके अलावा देश के 21 दूसरे राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज तूफानी हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

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आइए जानते हैं कि मौसम विभाग के ताजा विश्लेषण और पूर्वानुमान के मुताबिक 23 जुलाई को आपके राज्य में मौसम का क्या मिजाज रहने वाला है।

इन 2 राज्यों में रेड कलर वॉर्निंग, होगी अत्यंत भारी बारिश

मौसम विभाग ने 23 जुलाई को दो राज्यों के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुजरात क्षेत्र के मैदानी व उत्तरी इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। महाराष्ट्र के मध्य क्षेत्र और पर्वतीय/घाट इलाकों में मूसलाधार बारिश का कहर जारी रहेगा। इससे बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।

इन 4 क्षेत्रों/राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक देश के 4 प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। पूर्वी राजस्थान में बादलों का तेज जमावड़ा रहेगा और कई जगह बहुत भारी बारिश होगी। मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज रहेंगी और मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। 23 जुलाई को तटीय गोवा और कोंकण क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर बना रहेगा। पूर्वोत्तर भारत (नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा) के चारों राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

उत्तर भारत से दक्षिण तक 17 राज्यों/क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

IMD ने देश के 17 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है-

उत्तर-पश्चिम भारत: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में तेज बारिश होगी।

मध्य एवं पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ, बिहार, झारखंड, ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम भारत: सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में भी भारी बारिश होगी।

दक्षिण एवं पूर्वोत्तर भारत: कर्नाटक, केरल और माहे, तेलंगाना, असम व मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं (30-50 kmph) का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने और तूफानी रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। झारखंड, रायलसीमा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, गांगेय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, कर्नाटक, केरल व माहे, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगानाल में आंधी-तूफान और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है।

इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, पूरा गुजरात राज्य, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, उत्तराखंड और विदर्भ में आकाशीय बिजली कड़कने की कड़ी चेतावनी है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलेंगी।

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16 साल बाद भारत लौटेंगे ललित मोदी! IPL FEMA केस में राहत के बाद किया वापसी का ऐलान

IPL के फाउंडर और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने कहा है कि वे 16 साल बाद भारत लौटने की योजना बना रहे हैं। 2010 में देश छोड़ने के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी। बता दें कि ललित मोदी पिछले एक दशक से ज्यादा समय से विदेश में रह रहे हैं और कई जांचों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में 2009 IPL साउथ अफ्रीका FEMA मामले में ट्रिब्यूनल का फैसला उनके पक्ष में आने के बाद अब वह इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में भारत लौटने का मन बना रहे हैं।

ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उनकी प्रस्तावित वापसी से पिछले कई वर्षों से उनसे जुड़े कानूनी मामलों और विवादों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो सकती है।

ललित मोदी ने क्या कहा?

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी ने कहा कि वह नतीजे से खुश हैं और इसे 16 साल लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा बताया।

उन्होंने कहा, “मैं कल आए फैसले से वाकई खुश हूं। यह वाकई मेरे लिए एक शानदार दिन रहा। मैंने 16 साल तक लड़ाई लड़ी है और मीडिया व बाकी सभी लोगों से मैंने जो कुछ भी कहा था, आखिरकार वही सच साबित हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा इंडियन प्रीमियर लीग के हित में काम किया है।

ललित मोदी ने कहा, “मुझे सिर्फ IPL की भलाई की चिंता थी और किसी चीज की नहीं। यह मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है। अब वह अध्याय पीछे छूट चुका है, मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा हूं और भारत लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।”

अपनी वापसी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं शायद इस साल के आखिर में या अगले साल की शुरुआत में वापस आऊंगा। अक्टूबर में मेरी बेटी को बेटा होने वाला है और उम्मीद है कि सब ठीक रहेगा और मैं भारत वापस आ जाऊंगा।”

FEMA मामले में ट्रिब्यूनल से राहत

‘स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (जब्ती संपत्ति) एक्ट’ (SAFEMA) के तहत अपीलेट ट्रिब्यूनल ने ललित मोदी और अन्य अपीलकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने 2009 के IPL साउथ अफ्रीका FEMA मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ज्यादातर निष्कर्षों और जुर्माने को रद्द कर दिया है।

खबरों के मुताबिक, हालिया फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि मामले में ललित मोदी की जिम्मेदारी साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

कौन हैं ललित मोदी?

ललित मोदी ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के फाउंडर और पूर्व चेयरमैन रहे हैं। उन्होंने इस टूर्नामेंट को दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीगों में से एक बनाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, उनका कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा। 2013 में, गलत व्यवहार से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों के कारण BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।

बता दें कि उनका नाम IPL की शुरुआती सफलता और इसके कामकाज से जुड़े विवादों, दोनों से जुड़ा रहा है। भ्रष्टाचार, हितों के टकराव और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के कारण मोदी को अपने पद से हटना पड़ा। इन आरोपों में फ्रेंचाइजी की बोली और प्रसारण अधिकारों से जुड़े विवाद भी शामिल थे।

बाद में BCCI ने उन्हें बाहर कर दिया और आजीवन किसी भी क्रिकेट प्रशासनिक पद पर रहने से रोक दिया।

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Rohit Sharma: ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता’ रोहित शर्मा के रिटायरमेंट की अफवाहों पर पूर्व साथी खिलाड़ी का बड़ा बयान

Rohit Sharma: भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की सीरीज में टीम इंडिया को 2-1 से हार मिली है। वहीं कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि,लॉर्डस में होने वाले सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद रोहित शर्मा की रिटायरमेंट ले लेंगे। रोहित ने इस मुकाबले में शतक लगा कर इन खबरों को खारिज कर दिया है। इसी बीच रोहित शर्मा के साथी क्रिकेटर और पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि रोहित शर्मा के संन्यास को लेकर उठी चर्चाएं पूरी तरह बेबुनियाद नहीं थीं। उन्होंने कहा कि, भले ही इन्हें बाहरी अफवाह बताया गया हो, लेकिन अक्सर ऐसी बातों के पीछे कुछ न कुछ वजह होती है।

बीसीसीआई ने रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों को खारिज कर दिया था। लेकिन रविचंद्रन अश्विन के मुतबिक, इन चर्चाओं के पीछे कुछ न कुछ सच्चाई जरूर रही होगी। रोहित शर्मा ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में 138 रनों की शानदार पारी खेलकर सभी अटकलों और आलोचनाओं का करारा जवाब दे दिया।

अफवाह नहीं था रिटायरमेंट 

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर रोहित शर्मा के संन्यास की अटकलों पर भी बात की। उन्होंने कहा, “जब रोहित शर्मा के संभावित रिटायरमेंट की खबर सामने आई, तो कई लोगों ने इसे बाहरी शोर बताया। लेकिन मैं इसे सिर्फ अफवाह नहीं मानता। तमिल में एक कहावत है, ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता।'” अश्विन ने आगे कहा, “आग तो थी, लेकिन रोहित ने अपने बल्ले से जवाब दिया। उन्होंने दिखा दिया कि वह अब भी ऐसा प्रदर्शन कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि उनके मन में कोई संदेह है। मेरा मानना है कि वह 2027 वनडे विश्व कप तक खेल सकते हैं।”

रोहित-विराट करें फैसला

अश्विन ने कहा, “मुझे लगता है कि ये चोट के बाद रोहित शर्मा की शानदार वापसी की शुरुआत है। अगर वह थोड़ी और बेहतर लय में होते या उनका आत्मविश्वास थोड़ा और ऊंचा होता, तो वह 180 रन तक भी पहुंच सकते थे और टीम को जीत दिला सकते थे।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगा कि रोहित शानदार फॉर्म में हैं। अगर रोहित और विराट खेलना चाहते हैं, तो उनके रिकॉर्ड और अनुभव के सामने कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। रोहित ने लगभग 12 हजार वनडे रन बनाए हैं, इसलिए उनके योगदान पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।”

रोहित ने आलोचकों को दिया जवाब

रोहित के रिटायरमेंट की चर्चा उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा वनडे रोहित शर्मा का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच हो सकता है। रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया था कि टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रोहित की योजना 2027 वनडे विश्व कप तक खेलकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहने की थी। रोहित शर्मा ने अपने प्रदर्शन से सभी चर्चाओं का जवाब दिया।

ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटेंगे:ED का जुर्माना रद्द; IPL का पैसा विदेश भेजने का केस; बोले- मैं लीग की भलाई चाहता था

IPL के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में हैं। एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 16 जुलाई को IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका आयोजन से जुड़े FEMA मामले में फैसला सुनाया था। इसमें
मोदी को राहत देते हुए ED के लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया था। फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि अब उनकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है और वह इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अक्टूबर में बच्चे को जन्म देने वाली है, जिसके बाद वह भारत आने की योजना बना रहे हैं।
भारत से दक्षिण अफ्रीका पैसे भेजने का मामला था यह मामला 2009 में IPL को भारत से दक्षिण अफ्रीका ले जाने से जुड़ा है। उस समय लोकसभा चुनाव के कारण सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट भारत से दक्षिण अफ्रीका शिफ्ट किया गया था। इसके आयोजन के लिए BCCI ने दक्षिण अफ्रीका में करीब 243.45 करोड़ रुपए भेजे थे। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया कि यह रकम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व मंजूरी के बिना विदेश भेजी गई, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) का उल्लंघन हुआ। ED ने 2011 में नोटिस जारी किया और 2018 में ललित मोदी समेत BCCI के कुछ पूर्व अधिकारियों पर जुर्माना लगाया था। ट्रिब्यूनल बोली- ललित व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई रकम ‘करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन’ थी, न कि ‘कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन’। इसलिए इसके लिए RBI की पहले से मंजूरी लेना जरूरी नहीं था। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि ललित मोदी BCCI की ओर से FEMA नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं थे। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल ने ED के ज्यादातर निष्कर्ष और ललित मोदी पर लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया।

Azad Jayanti 2026: जयंती विशेष: चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की ऐसी घटनाएं, जिन्हें हर युवा को जानना चाहिए

A photo reflecting the great freedom fighter Chandrashekhar Azads love for India, on the occasion of his birth anniversary

Chandra Shekhar Azad Biography: भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कई नायक हुए, लेकिन पंडित चन्द्रशेखर 'आजाद' का व्यक्तित्व अद्वितीय है। वे केवल एक महान क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि आत्मसम्मान, संगठन कुशलता और अटूट निष्ठा के प्रतीक थे। उनका साहस, अनुशासन और नेतृत्व आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज के युवाओं के लिए आजाद का जीवन केवल वीरता की कहानियों तक सीमित नहीं है; यह इस बात का अध्ययन है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में चरित्र का निर्माण कैसे किया जाता है। 

 

चन्द्रशेखर आजाद जयंती 2026 पर जानें उनके जीवन की प्रेरक घटनाएं, साहस, बलिदान, संघर्ष और ऐसे अनसुने तथ्य जो हर युवा को प्रेरित करते हैं।

 

1. 'आजाद' नाम का जन्म: 

1921 के असहयोग आंदोलन के दौरान मात्र 15 वर्ष का एक किशोर पुलिस की गिरफ्त में आया। अदालत में जब अंग्रेज जज ने सवाल पूछे, तो उस बालक के उत्तर ऐतिहासिक थे:

 

नाम: 'आजाद'

पिता का नाम: 'स्वतंत्रता'

पता: 'जेलखाना'

 

जज ने क्रुद्ध होकर 15 कोड़ों की सजा सुनाई। उस समय हर कोड़े की मार पर चमड़ी उधड़ जाती थी, लेकिन वह किशोर हर मार के साथ 'भारत माता की जय' का हुंकार भरता रहा।

 

* यह घटना केवल एक बच्चे के दुस्साहस की नहीं है। यह दर्शाती है कि जब कोई व्यक्ति अपने आत्म-बोध और राष्ट्र-बोध को पहचान लेता है, तो शारीरिक दर्द या भय उसके सामने बौना साबित हो जाता है। युवाओं के लिए सीख यह है कि अपने सिद्धांतों के लिए खड़े होने का साहस उम्र का मोहताज नहीं होता।

 

2. काकोरी कांड और संगठन पुनर्निर्माण

सन् 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन या काकोरी कांड क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण घटना थी। इसके बाद जब राम प्रसाद बिस्मिल्ला, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ां और अन्य प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए, तो ऐसा लगा कि संगठन समाप्त हो जाएगा।

आजाद ने न केवल खुद को गिरफ्तारी से बचाया, बल्कि बिखर चुके आंदोलन को समेटा। उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) को पुनर्गठित कर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे युवाओं को जोड़कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का रूप दिया।

 

* आजाद केवल बंदूक उठाने वाले क्रांतिकारी नहीं थे, वे एक बेहतरीन संगठनकर्ता और रणनीतिकार थे। जब सब कुछ बिखर रहा था, तब नेतृत्व संभालना और नए विचार यानी समाजवाद को जोड़कर संगठन को आगे बढ़ाना उनकी बौद्धिक क्षमता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

 

3. साधु के वेश में ओरछा प्रवास

काकोरी के बाद जब अंग्रेजों की सीआईडी आजाद के पीछे पड़ी थी, तब वे मध्य प्रदेश में ओरछा के जंगलों यानी सातार नदी के किनारे 'हरिशंकर ब्रह्मचारी' के नाम से छिपकर रहे। वहां वे स्थानीय बच्चों को पढ़ाते थे, कुश्ती सिखाते थे और साथ ही अपने साथियों को निशानेबाज़ी का प्रशिक्षण देते थे।

 

* इस दौर से उनके कठोर आत्म-नियंत्रण और परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने की क्षमता का पता चलता है। एक क्रांतिकारी का जीवन केवल उत्तेजना का नहीं, बल्कि लंबे धैर्य और अनुशासन का नाम है- यह सबक आज के उस युवा के लिए जरूरी है जो तुरंत परिणाम की अपेक्षा रखता है।

 

4. अलफ्रेड पार्क में अंतिम संघर्ष

प्रयागराज/ इलाहाबाद के अलफ्रेड पार्क में जब मुखबिरी के कारण पुलिस ने उन्हें घेर लिया, तब आजाद के पास पिस्टल में केवल कुछ गोलियां बची थीं। उन्होंने अपने साथी सुखदेव राज को सुरक्षित बाहर निकाला और अकेले पूरी पुलिस टुकड़ी का सामना किया। जब अंतिम गोली बची, तो उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को याद किया- 'दुश्मन की गोली का सामना हम करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।' उन्होंने वह अंतिम गोली स्वयं को मार ली और जीवित रहते कभी अंग्रेजों के हाथ न आने का अपना वादा पूरा किया।

 

* आजाद का अंतिम क्षण किसी पराजय का नहीं, बल्कि अंतिम विजय का प्रतीक था। उन्होंने मृत्यु का वरण अपनी शर्तों पर किया। यह घटना सिखाती है कि व्यक्ति का जीवन कितना लंबा है, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि वह अपने जीवन के मूल्यों और प्रतिज्ञाओं के प्रति कितना निष्ठावान रहता है।

 

आज के युवाओं के लिए संदेश

चन्द्रशेखर आजाद का जीवन आज के दौर में इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि वे किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा अपने विचारों और आत्म-सम्मान के प्रति जवाबदेह थे।

 

स्पष्ट उद्देश्य: आजाद के जीवन में कोई भ्रम यानी कंफ्यूजन नहीं था। उनका लक्ष्य भारत की स्वाधीनता था, और उनका हर कदम उसी ओर उठा।

 

नेतृत्व क्षमता: एक सच्चे नेता की तरह उन्होंने खुद को कभी आगे नहीं रखा, बल्कि अपने साथियों- भगत सिंह आदि को वैचारिक रूप से आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया।

 

स्वाभिमान: उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके।

 

चन्द्रशेखर आजाद का इतिहास पढ़ना केवल बीते हुए समय को याद करना नहीं है, बल्कि अपने अंदर उस 'अजेय भावना' को जगाना है जो किसी भी कठिनाई के आगे झुकने से इंकार कर देती है।

 

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Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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Vaibhav Sooryavanshi: ड्रॉप होने के बाद पहली बार बोले वैभव सूर्यवंशी, बोले- खुद पर पूरा भरोसा है

भारत और जिम्बाब्वे के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाएगा। वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के बाद जिम्बाब्वे सीरीज में भी मौका मिला है। वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मुकाबले में डेब्यू का मौका मिला था। तीन मैचों में खेलने के बाद वैभव को एक मैच में ड्रॉप कर दिया गया था। वहीं हाल ही में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपने डेब्यू और इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी मुकाबले में ड्रॉप किए जाने पर चुप्पी तोड़ी है।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अभी पूरी तरह जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले पर ध्यान लगा रहे हैं। शुरुआती चुनौतियों और टीम में अपनी जगह को लेकर उठे सवालों के बावजूद उन्होंने अपना फोकस बनाए रखा है और अब उनका लक्ष्य भारतीय टीम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।

हर मैच में देना है 100 प्रतिशत

15 वर्षीय युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि पिछले चार महीने उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन इन एक्सपीरिएंस ने उन्हें मजबूत बनाया। उन्होंने माना कि भारतीय टीम में शुरुआत आसान नहीं रही, फिर भी उनका आत्मविश्वास पहले जैसा कायम है। सूर्यवंशी ने BCCI से कहा, “हां, पिछले चार महीनों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। यह क्रिकेट का हिस्सा है और ऐसा आगे भी होता रहेगा। मुझे सिर्फ अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना है और हर मैच में टीम के लिए अपना 100 प्रतिशत देना है।”

वैभव ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड

आईपीएल 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चुना गया। आयरलैंड के खिलाफ उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में दूसरे टी20 मैच में उन्होंने इंटरनेशल क्रिकेट में डेब्यू किया। इसी के साथ 15 वर्षीय वैभव भारत के सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन गए और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

वैभव ने खेल पाए बड़ी पारी

वैभव को लगातार चार टी20 मैचों में मौका मिला, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए। इसके बाद संजू की वापसी पर उन्हें अंतिम मैच से बाहर कर दिया गया। सूर्यवंशी ने इस कठिन दौर से बाहर निकलने का श्रेय अपने सपोर्ट सिस्टम को दिया। उन्होंने कहा, “मुझे जिस तरह की मदद और मार्गदर्शन की जरूरत होती है, कोच हमेशा उसे उपलब्ध कराते हैं। जिस तरह की प्रैक्टिस चाहिए, वह भी मुझे मिल रही है। मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं और मेरा आत्मविश्वास भी बरकरार है।” अब जिम्बाब्वे दौरे के साथ वह एक बार फिर उस मैदान पर लौट रहे हैं, जो उनके युवा क्रिकेट करियर में खास महत्व रखता है।

इसी मैदान पर खेली थी बड़ी पारी

उन्होंने कहा, “यह मैदान मेरे लिए बहुत खास है। सिर्फ चार महीने पहले हमने यहां अंडर-19 वर्ल्ड कप का फाइनल खेला था और खिताब जीता था। भारत का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और यह मेरे लिए बेहद यादगार पल है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं फिर उसी मैदान पर खेलने जा रहा हूं, जहां हमने चार महीने पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था। इस मैदान पर दोबारा उतरना एक अलग ही एहसास है और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा हूं।” उन्होंने कहा, “यहां की पिच और हालात के बारे में मुझे अच्छी जानकारी है, क्योंकि अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान मैं यहां खेल चुका हूं। उस टूर्नामेंट से जो अनुभव मिला, उसे अब आने वाले मैचों में इस्तेमाल करने की कोशिश करूंगा और अच्छा प्रदर्शन करना चाहूंगा।”

प्रैक्टिस पर पूरा भरोसा

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी प्रैक्टिस और अपने खेल पर पूरा भरोसा रखूंगा। टीम के लिए जितना भी योगदान दे सकूं, वह देने की कोशिश करूंगा। मैंने इस मैदान पर दो मैच खेले हैं और दोनों मेरे लिए अच्छे रहे। अब कोशिश होगी कि उसी प्रदर्शन को आगे भी जारी रखूं।” महज चार महीने पहले वैभव सूर्यवंशी ने भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत ने खिताब अपने नाम किया।

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Emami Paper Mills Share Price: निवेशक हुए मालामाल, Q1 में 6 गुना उछला मुनाफा, शेयर 20% के अपरसर्किट पर हुआ लॉक

Emami Paper Mills Share Price: पेपर सेक्टर की कंपनी इमामी पेपर मिल्स (Emami Paper Mills) के शेयरों ने अपने निवेशकों को मालामाल किया है। शेयर आज 20 फीसदी के अपरसर्किट पर लॉक हुआ है और यह अपने 10 महीने के सबसे ऊपरी स्तर 118.63 रुपये पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जून तिमाही) के लिए शानदार नतीजे जारी किए है । जिसके मुताबिक कंपनी का मुनाफा 6 गुना बढ़ा है।

इमामी पेपर मिल्स ने Q1FY27 के लिए मजबूत ऑपरेशनल नतीजे दिए, जिसमें नेट प्रॉफ़िट Q1FY26 के ₹6.31 करोड़ से बढ़कर ₹38.61 करोड़ हो गया। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू साल-दर-साल 21.84 फीसदी बढ़कर ₹560.37 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹461.36 करोड़ था। खास बात यह है कि ऑपरेशनल रेवेन्यू में सालाना ₹100.40 करोड़ की बढ़ोतरी हुई।

Q1 FY26 में EBITDA ₹38 करोड़ से दोगुना होकर ₹83 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 660 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 14.82% हो गया, जो बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी को दिखाता है।

क्या करती है कंपनी

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार , इमामी पेपर मिल्स, इमामी ग्रुप का एक हिस्सा है, जो ओडिशा के बालासोर में पेपर बनाने की फैसिलिटी चलाता है। यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी न्यूज़प्रिंट बनाने वाली कंपनी है, जिसकी इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन कैपेसिटी हर साल 1.5 लाख टन है, जो इम्पोर्टेड ग्रेड के बराबर प्रीमियम-क्वालिटी न्यूज़प्रिंट बनाती है।

इसके अलावा, इमामी पेपर मिल्स की कंज्यूमर पैकेजिंग बोर्ड सेगमेंट में भी अच्छी पकड़ है, जिसकी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी हर साल 2 लाख टन है, जिसमें रीसायकल-ग्रेड और वर्जिन-ग्रेड बोर्ड शामिल हैं, जो पैकेजिंग की कई तरह की ज़रूरतों को पूरा करते हैं।

मार्च के निचले स्तर से 116% रिकवर हुआ शेयर

लंबी गिरावट झेलने के बाद इमामी पेपर मिल्स ने अप्रैल में 39% की बढ़त के साथ ज़बरदस्त रिकवरी की। अगले महीनों में रैली ने और रफ़्तार पकड़ी, मई में स्टॉक में 11% की और बढ़त हुई। जुलाई में अब तक, यह और 36% बढ़ चुका है।

लगातार रैली ने स्टॉक को अपना मल्टीबैगर स्टेटस वापस पाने में मदद की है, जिसके शेयर मार्च के निचले स्तर से 116% ऊपर चढ़ा हैं। तेज़ रिकवरी ने स्टॉक को कैलेंडर साल के लिए पॉज़िटिव ज़ोन में भी पहुंचा दिया है, जिसमें साल-दर-साल 36% की बढ़त हुई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।