Upcoming IPO: जुलाई के आखिर तक आएंगे 5 बड़े IPO, कंपनियां जुटाएंगी ₹15000 करोड़

Upcoming IPO: पिछले दो महीनों से रफ्तार पकड़ रहा भारत का IPO बाजार अब और गर्म होने वाला है। अगले हफ्ते SBI Funds Management का IPO खुलने के बाद जुलाई के अंत तक 5 और बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां मिलकर करीब ₹15,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।

कौन-कौन से IPO आएंगे?

जुलाई के अंत तक जिन कंपनियों के IPO आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं…

  • Caliber Mining & Logistics
  • Milky Mist Dairy Foods
  • Juniper Green Energy
  • Lohia Corp
  • Manipal Health Enterprises

जून और जुलाई में बढ़ी रफ्तार

जून में 7 IPO आए थे, जिनके जरिए कंपनियों ने ₹2,718 करोड़ जुटाए। वहीं जुलाई में अब तक Knack Packaging, Kusumgar और Laser Power & Infra के IPO लॉन्च हो चुके हैं।

अगले हफ्ते SBI Funds Management और Alpine Texworld के IPO भी खुलने वाले हैं।

किस कंपनी का IPO कितना बड़ा होगा?

  • Caliber Mining & Logistics करीब ₹500-600 करोड़ जुटा सकती है। यह देश की शीर्ष 10 कोयला खनन सेवा कंपनियों में शामिल है।
  • Milky Mist Dairy Foods का IPO करीब ₹2,000 करोड़ का हो सकता है। यह तमिलनाडु की प्रमुख डेयरी कंपनी है।
  • Juniper Green Energy करीब ₹1,800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। पहले इसका IPO ₹3,000 करोड़ का प्रस्तावित था, लेकिन अब इसका आकार घटा दिया गया है।
  • Lohia Corp करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाएगी। कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
  • Manipal Health Enterprises का IPO सबसे बड़ा हो सकता है। कंपनी करीब ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह Manipal Hospitals चेन का संचालन करती है।

Zepto भी एंट्री कर सकती है

बेंगलुरु की Tonbo Imaging और मध्य प्रदेश की Symbiotec Pharmalab भी जुलाई के आखिरी या अगस्त के पहले हफ्ते में IPO ला सकती हैं। हालांकि, इनके इश्यू का साइज पहले की योजना से छोटा हो सकता है।

इसके अलावा Zepto भी IPO की कतार में शामिल हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर बाजार में आ सकती है।

IPO बाजार में क्यों लौटी रौनक?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Jio Platforms और NSE के ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने के बाद प्राइमरी मार्केट में फिर से उत्साह बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बढ़ती खरीदारी से भी IPO बाजार को समर्थन मिल रहा है।

आमतौर पर जुलाई और अगस्त को IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त महीनों में गिना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में निवेशकों को कई बड़े पब्लिक इश्यू देखने को मिल सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: इस हफ्ते 7 कंपनियों के शेयरधारक होंगे मालामाल, ₹229 तक मिलेगा डिविडेंड

Dividend Stocks: इस हफ्ते यानी 13 से 17 जुलाई के बीच 7 कंपनियां अपने शेयरहोल्डर्स को मोटा डिविडेंड देने वाली हैं। इनमें MRF, Honeywell, Pfizer, Shree Cement जैसे नाम शामिल हैं। अगर रकम के लिहाज से देखा जाए, तो MRF ने सबसे ज्यादा ₹229 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

डिविडेंड कंपनी अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों में बांटती है। लेकिन इसका फायदा सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलता है, जिनके नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में होते हैं। इसलिए अगर आप डिविडेंड का लाभ लेना चाहते हैं, तो रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदना जरूरी है।

इस हफ्ते मिलने वाले 7 बड़े डिविडेंड

कंपनीडिविडेंड (प्रति शेयर)रिकॉर्ड डेट
UTI AMC₹4014 जुलाई 2026
TCS₹12 (अंतरिम)15 जुलाई 2026
MRF₹22917 जुलाई 2026
Honeywell Automation India₹11017 जुलाई 2026
Pfizer₹7517 जुलाई 2026
Shree Cement₹7017 जुलाई 2026
Cummins India₹4617 जुलाई 2026

रिकॉर्ड डेट क्यों है जरूरी?

मान लीजिए किसी कंपनी की रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई है। ऐसे में सिर्फ 17 जुलाई को शेयर खरीदने से डिविडेंड नहीं मिलेगा। आपको एक्स-डिविडेंड डेट से पहले शेयर खरीदना होगा, ताकि रिकॉर्ड डेट तक शेयर आपके डीमैट अकाउंट में आ जाएं। तभी आप डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

सिर्फ डिविडेंड देखकर निवेश न करें

डिविडेंड मिलना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ उसी के आधार पर शेयर खरीदना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, मुनाफे, भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन को भी जरूर देखें। कई बार डिविडेंड मिलने के बाद शेयर की कीमत उतनी ही या उससे ज्यादा गिर भी सकती है। इसलिए निवेश का फैसला हमेशा पूरी तस्वीर देखकर ही करें।

अन्य कॉर्पोरेट एक्शन पर भी रहेगी नजर

डिविडेंड के अलावा इस हफ्ते कई दूसरी कॉर्पोरेट गतिविधियां भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगी। Indian Toners & Developers अपने शेयरों का स्टॉक स्प्लिट करेगी। कंपनी ₹10 फेस वैल्यू वाले एक शेयर को ₹2 फेस वैल्यू के पांच शेयरों में बांटेगी। वहीं Fredun Pharmaceuticals ने 2:1 बोनस शेयर का ऐलान किया है। यानी हर 1 शेयर पर निवेशकों को 2 नए शेयर मिलेंगे।

इसके अलावा Orbit Exports के शेयर बायबैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगे। Minolta Finance के शेयर राइट्स इश्यू के लिए एक्स-डेट पर जाएंगे। वहीं JB Chemicals & Pharmaceuticals में अमलगमेशन (विलय) से जुड़ा कॉर्पोरेट एक्शन तय है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टॉप 10 कंपनियों में से 4 का M-Cap ₹92995 करोड़ बढ़ा, HDFC Bank को सबसे ज्यादा फायदा

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक फायदा HDFC Bank और भारती एयरटेल को हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 194.52 अंक या 0.25 प्रतिशत और निफ्टी 63.95 अंक या 0.26 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ।

टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank, भारती एयरटेल और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में 49,294.13 करोड़ रुपये की गिरावट आई।

सप्ताह के दौरान HDFC Bank का मार्केट कैप सबसे अधिक 35,808.09 करोड़ रुपये बढ़कर 12,69,454.42 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह भारती एयरटेल का मार्केट कैप 34,896.92 करोड़ रुपये बढ़कर 11,98,774.22 करोड़ रुपये, LIC का 16,065.50 करोड़ रुपये बढ़कर 5,60,205.05 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का मार्केट कैप 6,224.97 करोड़ रुपये बढ़कर 17,71,206.33 करोड़ रुपये हो गया।

बाकी 6 कंपनियों को कितना नुकसान

इसके उलट हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 12,088.65 करोड़ रुपये घटकर 5,04,997.65 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह L&T का मार्केट कैप 11,040 .23 करोड़ रुपये घटकर 5,42,938.40 करोड़ रुपये, TCS का 8,574.87 करोड़ रुपये घटकर 7,48,600.40 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस का 7,813.58 करोड़ रुपये घटकर 6,35,327.78 करोड़ रुपये, ICICI Bank का 6,315.32 करोड़ रुपये घटकर 10,05,379.71 करोड़ रुपये और SBI का मार्केट कैप 3,461.48 करोड़ रुपये घटकर 9,56,430.44 करोड़ रुपये रह गया।

टॉप 10 कंपनियों में RIL अव्वल

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमशः HDFC Bank, भारती एयरटेल, ICICI Bank, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, LIC, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज 17 जुलाई को अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। HDFC Bank और ICICI Bank के नतीजे 18 जुलाई को सामने आएंगे। TCS बीते सप्ताह 9 जुलाई को नतीजे जारी कर चुकी है।

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नए सप्ताह में 15 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Kusumgar की लिस्टिंग हो सकती है। इसके बाद 16 जुलाई को Laser Power & Infra के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने वाले हैं। इसी दिन BSE SME पर Devson Catalyst और NSE SME पर Happy Steels के शेयरों के लिस्ट होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Laser Power & Infra IPO: जबरदस्त रिस्पॉन्स से फुली सब्सक्राइब, अभी भी मौका; GMP दे रहा अच्छी लिस्टिंग के संकेत

लेजर पावर एंड इंफ्रा के ₹742 करोड़ के IPO को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह 9 जुलाई को खुला था और फुली सब्सक्राइब हो चुका है। अभी इसमें पैसे लगाने के लिए एक दिन और बचा है। यह 13 जुलाई को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹203-₹214 प्रति शेयर और लॉट साइज 70 शेयर है। क्लोजिंग के बाद अलॉटमेंट 14 जुलाई को फाइनल हो सकता है। लिस्टिंग NSE और BSE पर 16 जुलाई को हो सकती है।

ग्रे मार्केट से कंपनी की लिस्टिंग अच्छी रहने के संकेत हैं। investorgain.com के मुताबिक, ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड ₹214 से 16.36% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Laser Power & Infra IPO में ₹542 करोड़ के 2.53 करोड़ नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही मौजूदा निवेशकों की ओर से ₹200 करोड़ के 93 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल है। पब्लिक इश्यू में अब तक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.68 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 2.03 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.85 गुना भर चुका है।

क्या करती है कंपनी

लेजर पावर एंड इंफ्रा लिमिटेड कोलकाता की कंपनी है, जो भारत में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए पावर केबल, कंडक्टर और दूसरे स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट और कंपोनेंट बनाती है। कंपनी पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) बेसिस पर भी काम करती है। कंपनी के प्रमोटर दीपक गोयल, देवेश गोयल, अक्षत गोयल और राखी गोयल हैं।

IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

IPO में 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35% हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15% हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। लेजर पावर एंड इंफ्रा अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कर्ज कम करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

क्या करना चाहिए निवेश?

मास्टर कैपिटल के IPO नोट के अनुसार, “निवेशक इस IPO को लंबे समय के निवेश के एक अच्छे मौके के तौर पर देख सकते हैं।” नोट में कहा गया है कि पूर्वी भारत में पावर केबल और कंडक्टर बनाने की क्षमता के मामले में कंपनी का नाम दिग्गज कंपनियों में शामिल है। हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे कि-

– कुछ ही ग्राहकों पर ज्यादा निर्भरता: कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा टॉप 10 ग्राहकों से ही आता है।

– रेवेन्यू के बड़े हिस्से के लिए पावर केबल और कंडक्टर पर निर्भरता

– कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर

– लॉन्ग टर्म खरीद समझौतों के बिना सीमित सप्लायर बेस पर निर्भरता

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Laser Power & Infra की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹151.6 करोड़ रहा। रेवेन्यू 9% फिसलकर ₹2,347.89 करोड़ पर आ गया। उधारी ₹828.23 करोड़ की थी। वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू ₹2,592.53 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹106.75 करोड़ दर्ज किया गया। लेजर पावर एंड इंफ्रा IPO के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड है। रजिस्ट्रार, MUFG इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Video: 1 लाख रुपये कमाने वाले लोग हो जाएं अलर्ट, जानिए क्यों बताई गई यह इनकम खतरनाक

हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी पाना कई लोगों के लिए आर्थिक सफलता का संकेत माना जाता है। ये आय स्तर एक आरामदायक जीवन जीने, जरूरी खर्च पूरे करने और कुछ इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता देता है। लेकिन अब इसी कमाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। साल 2026 में एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया है कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कई लोगों के लिए एक तरह का ‘कम्फर्ट ट्रैप’ बन सकती है।

उनके अनुसार, समस्या कमाई की रकम में नहीं बल्कि उस संतुष्टि में है, जो व्यक्ति को बड़े लक्ष्य तय करने से रोक सकती है। इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इससे सहमत हैं तो कुछ इसे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से अलग मान रहे हैं।

कंटेंट क्रिएटर ने बताया ‘सबसे खतरनाक सैलरी’

इंस्टाग्राम पर पर्सनल फाइनेंस और माइंडसेट से जुड़े वीडियो बनाने वाली निधि कुशवाहा ने कहा कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कम होना इसकी समस्या नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका आरामदायक होना है। उनका कहना है कि इतनी आय कई लोगों को इतना संतुष्ट कर सकती है कि व बड़े सपने देखने और आगे बढ़ने की कोशिश कम कर दें।

आराम कब बन जाता है करियर की रुकावट?

निधि के मुताबिक, 1 लाख रुपये की मासिक कमाई से लोग किराया, रोजमर्रा के खर्च, वीकेंड आउटिंग और साल में एक-दो ट्रिप जैसी चीजें आसानी से मैनेज कर लेते हैं। यही सुविधा कई बार लोगों को अपनी सीमाओं से बाहर निकलने और नए जोखिम लेने से रोक सकती है। उनका मानना है कि जब इंसान को लगता है कि जिंदगी पूरी तरह सेट हो गई है, तो आगे बढ़ने की भूख धीरे-धीरे कम हो सकती है।

‘ज्यादा कमाने की चाह’ खत्म होने का खतरा

निधि ने अपने वीडियो में कहा कि असली खतरा कम आय में नहीं बल्कि उस स्थिति में है, जहां व्यक्ति आरामदायक जीवन में इतना खुश हो जाए कि नए लक्ष्य बनाना छोड़ दे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सिर्फ आरामदायक कमाई पर रुकने के बजाय लगातार सीखने, निवेश करने और नए अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग राय रखी। कुछ यूजर्स ने माना कि ज्यादा आराम इंसान को आगे बढ़ने से रोक सकता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जीवन में सफलता का पैमाना हमेशा ज्यादा पैसा कमाना ही होना चाहिए।

एक यूजर ने पूछा कि अगर 10 लाख रुपये महीने की सैलरी हो तो क्या वह भी खतरनाक होगी? वहीं कुछ लोगों ने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में 1 लाख रुपये की कमाई उतनी बड़ी नहीं रही जितनी पहले मानी जाती थी।

असली सवाल

इस बहस का कोई तय जवाब नहीं है कि कौन-सी सैलरी इंसान को रोक देती है। कुछ लोगों के लिए 1 लाख रुपये की आय आर्थिक स्थिरता हो सकती है, जबकि दूसरों के लिए ये सिर्फ एक पड़ाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि आय चाहे जितनी हो, सही बचत, निवेश और नए लक्ष्य बनाते रहना जरूरी है, ताकि आराम विकास की राह में बाधा न बने।

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ICE Age 2.0: Converting EVs to ICE

Horse powertrain C15

Conceived with no concessions to internal combustion propulsion, ‘born electrics’ were heralded as the future. Manufacturers poured millions into their development, and it is estimated that globally $1.2 trillion was committed to the entire EV ecosystem, $500 billion of which was from automakers.

But with global EV sales well below projections, manufacturers are left with hard decisions. The Stellantis group, for instance, confirmed a $26 billion write-off over its EV projects, while Honda said its annual operating loss would be between 270-570 billion yen, due to losses associated with the reassessment of its electrification strategy. Earlier this year, the Japanese carmaker scrapped its much-hyped ‘0 Series’ EV project, though the made-in-India 0 Alpha SUV, which is said to use components from the Elevate, is still on track.

Honda has cancelled its 0 Series EV Project altogether

The write-offs and cancellations are understandable in the context of born-electrics, as while there have been many ICE-to-EV conversions, it’s a lot harder the other way around. Conceived with no engine and gearbox in mind, space to accommodate this bulky hardware is the first hurdle they need to clear. There’s also space needed for subsystems like driveshafts, fuel and exhaust systems which leads to the other complication of thermal management. Beyond the exhaust system, internal combustion engines have higher cooling requirements than EVs, and thus airflow management needs to be addressed.

Another challenge is crashworthiness. Again, having never had to hold an engine and gearbox, the crash structure of these cars was never designed with this massive mass in mind. These changes thus require time and expensive re-engineering.

However, tough as it is, some brands are looking at re-engineering born-EVs to use some form of internal combustion. The VW Group is one such example, as is homegrown automaker Mahindra. While it sold about 16,000 EVs in FY2026 – the bulk of them coming from its born-electric line-up – it needs higher volumes given the investments in their development. The Chinese, too, who were very quick with born-electrics, are looking at the ICE switch.

Ice Age 2.0

In this scenario, Horse Powertrain might hold the panacea – the C15 powertrain. Showcased at the Vienna Motor Symposium in April this year, the C15 unit is a compact, all-in-one powertrain designed to replace the electric drive unit of a born-electric and transform it into a range-extender hybrid. The integrated unit consists of a 1.5-litre, 4-cylinder engine, hybrid transmission, electric motor and the full suite of power electronics.

C15 powertrain can be installed at the front or rear and in either a vertical or horizontal orientation.

Furthermore, Horse says the unit is modular and can have further systems bolted on, depending on manufacturer requirements, like turbocharging or even a traditional gearbox, should direct-to-wheel drive be required. Adding to its flexibility, the engine can be packaged vertically or even horizontally, and the company says systems like lubrication are capable for either installation type. It can also be located at the front or rear of the vehicle, so as to warrant fewer modifications and re-engineering for a brand. 64 percent of its components are parts from existing powertrains, and this, Horse says, brings down the unit’s cost. So far, there’s no word on when it would come to market, but the brand says work is already underway, and the first model with the C15 unit should see the light of day by 2028.  

On the face of it, converting a born-electric to ICE might seem like a retrograde step in the journey towards electrification. However, it’s clear this journey is far longer than previously thought, and a born-electric-to-ICE conversion will certainly help a manufacturer’s business viability in the immediate term. Furthermore, in this scenario of internal combustion living longer, hybridisation helps lowering fuel consumption and emissions. Thus, a retrograde step this might be, but one that can help build the future.

Q&A Jesus Frances Busto –  Strategy & RAE Director, Horse Technologies

On the company structure

Horse Powertrain is a joint venture between Renault, Geely and Saudi Aramco, but we are an independent global powertrain supplier. So we can supply, work with, and integrate this (C15) with any manufacturer that is interested in it. It’s part of our new story at Horse Powertrain.

On the C15’s requirement

Brands have invested a lot into born-electric platforms, and many have even got the products ready and out into the market. But yes, they now would need to have an option to cope with this adoption towards EVs, and a hybrid with a range-extender setup is a good possibility for this.

On the C15’s specialities 

The C15 solves the problem of space, and we have solved it not by miniaturisation, but with innovative redesign and repackaging. We can install this vertically or even horizontally, and when we do this, one of the points we have to solve is lubrication, so we have a scavenge function circulating oil through and through correctly.

On a market launch

As you would understand, we cannot disclose our clients at the moment or specific launch dates, but we are working with brands, and we should see this in the market by early 2028.

IND vs ENG: प्लेइंग 11 से बाहर होने के बाद अकेले मायूस बैठे दिखे वैभव, वायरल हुई युवा बल्लेबाज की तस्वीर

IND vs ENG: इंग्लैंड के खिलाफ लगातार हार के बाद भारतीय टीम ने पांचवें टी20 मुकाबले के लिए अपनी ओपनिंग जोड़ी में बदलाव किया। पांचवें मुकाबले में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। वहीं टीम ने अनुभवी बल्लेबाज संजू सैमसन की वापसी हुई है। सीरीज पहले ही गंवा चुकी भारतीय टीम अब साउथैम्प्टन में खेले जा रहे इस मुकाबले को जीतकर सम्मान बचाने की कोशिश कर रही है। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे 5वें मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। वहीं पहले बल्लेबाजी करने आई इंग्लैंड ने रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। इंग्लैंड ने 20 ओवर में 3 विकेट खोकर 257 रन बनाई है। इंग्लैंड ने भारत को 258 रन का टारगेट दिया है।

वहीं अब भारत को उम्मीद है कि अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाएगी। इसी बीच प्लेइंग 11 से बाहर हुए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी काफी वायरल हो रहे हैं।

अकेले बैठे दिखे वैभव

पांचवें टी20 मैच के लिए भारतीय टीम में दो बदलाव किए गए। वैभव सूर्यवंशी और वॉशिंगटन सुंदर को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया। टीम की घोषणा के बाद कैमरे में वैभव अकेले बैठे नजर आए। उनके चेहरे और हाव-भाव से साफ लग रहा था कि टीम से बाहर होने के कारण वह काफी निराश थे। टीम से वैभव सूर्यवंशी को बाहर किए जाने के फैसले पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली रिएक्शन देखने को मिलीं है। कई प्रशंसकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे सही बताया।

 

पहले तीन मैचों में नहीं चला बल्ला

वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में भारत के लिए टी20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने का सचिन तेंदुलकर रिकॉर्ड तोड़ा है। वैभव ने 15 साल की उम्र में टी20 में डेब्यू किया है। वहीं अपने शुरुआती तीन मुकाबलों में वह बल्लेबाजी से खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। बाएं हाथ के इस युवा ओपनर को खासकर तेज गेंदबाजों की शॉर्ट गेंदों के सामने मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह लगातार तीन पारियों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ 15, 13 और 14 रन बनाए। शुरुआती तीन मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके और कुल 42 रन ही बना पाए।

 

भारत की प्लेइंग 11: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, इशान किशन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, सूर्यांश शेज, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा

इंग्लैंड की प्लेइंग 11: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद, जोश टंग

AIIMS Paramedical Result 2026: एम्स के रिजल्ट पोर्टल पर जारी हुआ नतीजों का पीडीएफ, यहां बताए स्टेप्स की मदद से चेक करें अपना रोल नंबर

AIIMS Paramedical Result 2026: नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ने एम्स पैरामेडिकल रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने 4 जुलाई, 2026 को हुई बीएससी पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया था, वे अब ऑफिशियल एग्जामिनेशन पोर्टल पर रिजल्ट देख सकते हैं। रिजल्ट एक पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध कराया गया, जिसमें सफल कैंडिडेट्स के नाम शामिल होंगे। जिन उम्मीदवारों का रोल नंबर मेरिट लिस्ट में शामिल है, उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, ऑनलाइन काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। इन चरणों में शामिल होने के लिए इन्हें सभी जरूरी योग्यता मानदंडों को पूरा करना होगा।

एम्स पैरामेडिकल रिजल्ट 2026: स्कोरकार्ड कैसे डाउनलोड करें

  • होमपेज aiimsexams.ac.in पर ‘Results’ सेक्शन पर क्लिक करें।
  • एकेडमिक कोर्स के तहत ‘Explore Now’ पर क्लिक करें।
  • अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स पर क्लिक करें या यहां दिए गए लिंक -> अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स पर जाएं।
  • B.Sc.(Allied & Health Care) लिंक ढूंढें और उस पर क्लिक करें या यहां दिए गए लिंक पर जाएं – B.Sc.(Allied & Health Care)
  • ‘View Details’ पर क्लिक करें और फिर ‘Result’ पर क्लिक करें।
  • मेरिट लिस्ट PDF डाउनलोड करें और अपना रोल नंबर देखें।
  • अपना स्कोरकार्ड प्राप्त करने और सुरक्षित करने के लिए अपनी पंजीकरण डिटेल्स का इस्तेमाल करके लॉग इन करें।
  • भविष्य में एडमिशन और काउंसलिंग के लिए एक कॉपी रखें।

कटऑफ मार्क्स और रिजल्ट के बाद के स्टेप्स

जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 50%, या कुल 90 में से 45 मार्क्स रहने की संभावना है। OBC-NCL परीक्षार्थियों को कम से कम 45%, या 40.5 अंक लाने की जरूरत होगी, जबकि SC और ST कैंडिडेट्स को 40% का क्वालिफाइंग अंक हासिल करने होंगे, जो 36 अंकों के बराबर है।

मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवार एम्स पैरामेडिकल काउंसलिंग प्रोसेस के लिए क्वालिफाई करेंगे। एम्स पाठ्यक्रम में प्रवेश कैंडिडेट की रैंक, कैटेगरी, सीट की उपलब्धता और सफल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर होगा। एम्स रिजल्ट घोषित होने के बाद काउंसलिंग का समय, चॉइस फिलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा अलग से जारी करेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे काउंसलिंग और प्रवेश से जुड़े ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक एम्स परीक्षा पोर्टल को लगातार चेक करते रहें।

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80 साल का आयरिश व्यक्ति जोधपुर की बावड़ियों की सालों से कर रहा सफाई, आनंद महिंद्रा ने स्पेशल पोस्ट शेयर कर किया सलाम

अपने आस-पास, शहरों और देश को साफ-सुथरा रखना हर नागरिक का फर्ज है, लेकिन कभी-कभी किसी एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प हमें उन चीजों की अहमियत याद दिलाता है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जोधपुर के ऐतिहासिक शहर में, आयरलैंड के रहने वाले एक 80 वर्षीय बुज़ुर्ग ने एक दशक से ज्यादा समय तक भुला दी गई बावड़ियों की सफाई की है और पानी के इन पारंपरिक ढांचों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा है।

‘द बेटर इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कैरॉन रॉन्सली – जिन्हें स्थानीय लोग “पागल साहब” के नाम से जानते हैं – जोधपुर एक पर्यटक के तौर पर आए थे, लेकिन धीरे-धीरे वे शहर की धरोहर की देखभाल करने वाले बन गए। उपेक्षित बावड़ियों और झालरों (सीढ़ीदार जल-कुंडों) को अपने हाथों से ठीक करने की उनकी कोशिशों की अब बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने भी तारीफ की है।

जहां बहुत से लोग जोधपुर की पुरानी बावड़ियों की सुंदरता की तारीफ करते थे, वहीं रॉन्सली ने कुछ ऐसा देखा जिस पर अक्सर दूसरों का ध्यान नहीं जाता था। बारीक कारीगरी और ऐतिहासिक महत्व के पीछे ऐसी संरचनाएं थीं, जो कचरे से भरी हुई थीं और धीरे-धीरे भुला दी जा रही थीं। वहां से चले जाने के बजाय, उन्होंने इनकी मरम्मत की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

महिंद्रा ने हाल ही में अपने X हैंडल पर एक प्रेरणादायक वीडियो शेयर किया, जिसमें जोधपुर में पुरानी और उपेक्षित बावड़ियों की सफाई करने के रॉन्सली के सफर को दिखाया गया है। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए महिंद्रा ने लिखा, “जोधपुर की बावड़ियों और झालरों की सफाई के प्रति अपने जुनून के कारण 80 वर्षीय आयरिश व्यक्ति कैरन रॉन्सले को ‘पागल साहब’ का उपनाम दिया गया था। सौभाग्य से, आज भारत की बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए खुद को समर्पित करने के लिए आपको ‘पागल’ या ‘फिरंगी’ होने की आवश्यकता नहीं है।”

महिंद्रा ने कहा कि विरासत को बचाने के लिए लोगों का एक्सपर्ट होना या किसी खास जगह का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि लगन रखने वाला कोई भी व्यक्ति भारत की ऐतिहासिक इमारतों को बचाने में योगदान दे सकता है। उन्होंने चांद बावड़ी के बारे में अपनी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट को भी याद किया, जिसमें उन्होंने मशहूर सीढ़ीदार कुएं (stepwell) को बनाए रखने के लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ़ की थी। महिंद्रा ने बताया कि पूरे भारत में संरक्षणवादी, स्थानीय वॉलंटियर और ग्रामीण समुदाय इन शानदार इमारतों को फिर से ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं।

ये बावड़ियां सिर्फ पत्थर से बनी पुरानी संरचनाएं नहीं हैं। सदियों से, इन्होंने समुदायों को पानी इकट्ठा करने और उसे जमा करने में मदद करने में अहम भूमिका निभाई है, खासकर राजस्थान जैसे इलाकों में जहां पानी की कमी हमेशा से एक चुनौती रही है। पानी के स्रोत होने के अलावा, बावड़ियां ऐसी जगहें भी बन गईं जहां लोग इकट्ठा होते थे, आराम करते थे और एक-दूसरे से जुड़ते थे। इनके डिज़ाइन पुरानी पीढ़ियों की इंजीनियरिंग कुशलता और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते थे।

हालांकि, बदलती जीवनशैली और पानी की आधुनिक सप्लाई प्रणालियों के आने से, कई बावड़ियों का महत्व धीरे-धीरे खत्म हो गया। कई बावड़ियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया और कुछ तो कचरा फेंकने की जगह बन गईं। रॉन्सली के लिए इन ऐतिहासिक ढांचों को ऐसी हालत में देखना मुश्किल था। उन्होंने अपना समय इन्हें साफ़ करने और एक-एक करके इनकी मरम्मत करने में लगाने का फैसला किया।

‘द बेटर इंडिया’ से बात करते हुए रॉन्सली ने कहा, “जब मैं 2014 के आखिर में जोधपुर आया, तो मैंने ये खूबसूरत बावड़ियां देखीं। लेकिन मैं यह देखकर हैरान रह गया कि पानी जमा करने के ये पुराने और अनोखे सिस्टम खराब हालत में थे। इसलिए, मैंने अपना समय इन जगहों की सफाई करने और उन्हें फिर से अच्छी हालत में लाने की कोशिश में लगाने का फैसला किया।”

तब से, रॉन्सली ने जोधपुर में कई बावड़ियों पर काम किया है, जिनमें रामबाउरी और गुलाब सागर शामिल हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से वहां से कचरा हटाया और शहर के इन भुला दिए गए हिस्सों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा। महिंद्रा ने भारतीय विरासत के प्रति रॉन्सली के समर्पण के लिए उनके प्रति सम्मान भी जाहिर किया। उन्होंने लिखा, “मैं जोधपुर के प्रति उनके प्यार और हमारी विरासत के लिए उनकी निस्वार्थ भावना और जुनून के लिए ‘पागल साहब कैरॉन’ को सलाम करना चाहता हूं। उनका काम कभी न रुके…”

आनंद महिंद्रा द्वारा रॉन्सली की कहानी शेयर किए जाने के बाद, कई यूज़र्स ने इस आयरिश व्यक्ति के समर्पण और जोधपुर की विरासत को बचाने की उनकी कोशिशों की तारीफ़ की। एक यूज़र ने कमेंट किया, “किसी जगह के लिए सच्चा प्यार काम से दिखता है, राष्ट्रीयता से नहीं। ‘पागल साहब’ को सम्मान।”

एक और यूजर ने लिखा, “कितनी अजीब बात है कि उन्हें ‘पागल’ कहा गया, जबकि वे सबसे समझदारी भरा काम कर रहे थे।” एक यूजर ने कहा, “कुछ विदेशी सच में भारत में अपने प्रेरणादायक काम के लिए हमारे सम्मान और समर्थन के हकदार हैं!”

एक और यूज़र ने कहा, “यह एक बहुत अच्छी बात है कि किसी जगह के लिए प्यार इस बात से नहीं मापा जाता कि आप कहां पैदा हुए हैं, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि आप उसकी कितनी परवाह करते हैं। कैरॉन रॉन्सली, ‘पागल साहब’ और उन सभी वॉलंटियर्स को सलाम जो चुपचाप हमारी बावड़ियों और विरासत को ठीक करते हैं। उनकी कोशिशें न सिर्फ़ इतिहास को बचाती हैं, बल्कि पानी, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद को भी सुरक्षित रखती हैं। उम्मीद है कि यह भावना और भी लोगों को प्रेरित करेगी।”

एक यूज़र ने लिखा, “मज़ेदार बात है कि कभी-कभी किसी बाहरी व्यक्ति को ही स्थानीय लोगों को यह याद दिलाना पड़ता है कि विरासत सिर्फ पोस्टकार्ड के लिए नहीं, बल्कि एक इंफ्रास्ट्रक्चर है। इतिहास के बारे में सिर्फ बातें करने के बजाय उसे ज़िंदा रखने के लिए सभी का सम्मान।”

IPOs This Week: 13 जुलाई से शुरू हफ्ते में SBI Funds Management समेत 3 नए इश्यू, 4 कंपनियां होंगी लिस्ट

13 जुलाई से शुरू हफ्ते में देश के IPO मार्केट में तगड़ी हलचल दिखने वाली है। 3 नए पब्लिक इश्यू खुल रहे हैं। इनमें से 2 मेनबोर्ड सेगमेंट से हैं, जिनमें से एक है- SBI Funds Management IPO। यह इश्यू ₹11692.91 करोड़ का है। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले 3 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से एक मेनबोर्ड है। जहां तक शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली नई कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 4 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। इनमें से 2 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए IPO

SBI Funds Management IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में यह इश्यू 14 जुलाई को लॉन्च होगा और 16 जुलाई को बंद होगा। IPO का साइज ₹11692.91 करोड़ है। IPO के​ लिए प्राइस बैंड ₹545-574 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 26 शेयर है। कंपनी के शेयर 21 जुलाई को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

Alpine Texworld IPO: यह इश्यू भी मेनबोर्ड सेगमेंट का है। कंपनी ₹126.25 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा। बोली ₹100-₹105 प्रति शेयर के भाव पर लगा सकते हैं। लॉट साइज 142 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 21 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

Millworks Technologies IPO: ₹160.34 करोड़ का पब्लिक इश्यू 14 जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है। प्राइस बैंड ₹315-₹331 प्रति शेयर और लॉट साइज 400 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग 16 जुलाई को होगी। कंपनी BSE SME पर 21 जुलाई को लिस्ट होने वाली है।

पहले से खुले IPO

Laser Power & Infra IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹742 करोड़ का इश्यू 9 जुलाई को खुला था। यह फुली सब्सक्राइब हो चुका है। इसकी क्लोजिंग 13 जुलाई को होने वाली है। प्राइस बैंड ₹203—₹214 प्रति शेयर और लॉट साइज 70 शेयर है। शेयर NSE और BSE पर 16 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

Devson Catalyst IPO: ₹42.34 करोड़ का इश्यू 9 जुलाई को खुला था और 13 जुलाई को बंद होने वाला है। अभी तक 29.35 गुना भरा है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹118 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 16 जुलाई को लिस्ट हो सकती है।

Happy Steels IPO: यह भी 9 जुलाई को खुला था और 13 जुलाई को बंद होगा। कंपनी ₹25 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू अभी तक 3.14 गुना सब्सक्राइब हुआ है। बोली ₹62-₹66 प्रति शेयर के भाव पर और 2,000 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। शेयरों के NSE SME पर 16 जुलाई को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Milky Mist IPO: जुलाई में ही लॉन्च हो सकता है डेयरी सेक्टर का सबसे बड़ा इश्यू, ₹2035 करोड़ जुटाने पर नजर

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 15 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Kusumgar की लिस्टिंग हो सकती है। इसके बाद 16 जुलाई को Laser Power & Infra के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने वाले हैं। इसी दिन BSE SME पर Devson Catalyst और NSE SME पर Happy Steels के शेयरों के लिस्ट होने की उम्मीद है।