पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए…राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए...राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

Rahul Gandhi vs PM Modi: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक कार्यक्रम में एकदम बेबाक और आक्रामक अंदाज में नजर आए। 'रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन' के मंच से उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार की नीतियां पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और संघ (RSS) पर भी ऐसा तंज कसा कि सियासी गलियारों में खलबली मच गई। अपनी चिर-परिचित बेबाकी में राहुल ने कहा कि सरकार किसी की सुनना नहीं चाहती, लेकिन हम इनको पागल कर देंगे।

पीएम को रात को नहीं सोते… 

राहुल गांधी ने पीएम मोदी की कार्यशैली पर सीधा कटाक्ष करते हुए कहा कि पीएम रात-रात भर नहीं सोते। इसके पीछे कई गहरे और छुपे हुए कारण हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लपेटे में लेते हुए कहा कि खुद को चाणक्य और सरदार पटेल बताने वाले अमित शाह संसद में घुस भी नहीं पाए और भाग निकले। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे पहली बार देश की असली आवाज (एक्सप्रेशन) सुन रहे हैं।

राहुल ने लोगों से निडर होने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में कई लोग इन कायरों की फौज के सामने खुद भी कायरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जब आपकी लड़ाई जोकरों के एक समूह से है, तो फिर किसी से डरने की क्या जरूरत? राहुल ने मंच से कार्यकर्ताओं को दिल खोलकर बोलने की आजादी का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि जो दिल में है, बेझिझक बोलिए। अगर हिंदू हैं तो शिव की बात कीजिए, मुस्लिम हैं तो अल्लाह की बात कीजिए। अगर कोई भटक जाएगा तो हम प्यार से सही राह दिखा देंगे।

सरकार की विदेश नीति पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ। ऐसे में अगर इंदिरा गांधी जैसा नेतृत्व होता, तो हमारे पास सबसे बड़ा अवसर होता। क्योंकि ईरान हमारा पुराना दोस्त है, अमेरिका और रूस भी हमारा दोस्त है तो हम इनकी आपस में दोस्ती करा सकते थे। लेकिन पाकिस्तान हमारी जगह उठाकर ले गया और नरेंद्र मोदी देखते रह गए।

आरएसएस को भारत की समझ ही नहीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संघ के लोगों को 3000 साल पुराने भारत का ताना-बाना नहीं, बल्कि आज के आधुनिक भारत को समझने की जरूरत है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में मंच से आरएसएस के स्टाइल में सैल्यूट करने की बात कही और जोड़ा कि आरएसएस का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन अगर कोई आरएसएस को अनुचित तरीके से दबाने की कोशिश करेगा, तो हम उसकी रक्षा के लिए भी खड़े होंगे।

पीएम पीसी क्यों नहीं करते?

मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने के मुद्दे पर राहुल ने अपनी एक पुरानी मुलाकात का दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि मैं पहले सोचता था कि पीएम मोदी का प्रेस कॉन्फ्रेंस न करना कोई 'मार्केटिंग स्ट्रेटजी' है। लेकिन जब मैं 5 मिनट उनके साथ एक कमरे में बैठा, तब मुझे समझ आ गया कि वे बहुत देर तक बिना लिखे-पढ़े बोल ही नहीं सकते।

बचपन का एक यादगार संस्मरण

जब मैं 12 साल का था, तब दादी (इंदिरा गांधी), मां, प्रियंका और मैं अमेरिका गए थे। आधिकारिक रात्रिभोज में दादी और मां गईं। लौटकर दादी ने मां से कहा— 'ये अमेरिकन हमें क्या समझते हैं? हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री केवल हाथ मिलाने या दोस्ती करने नहीं जाता, वह हमेशा अपने देश के स्वाभिमान और हित के लिए जाता है।

Share Market Crash: 370 प्वाइंट्स टूटा Sensex, सरकारी बैंकों की चमक नहीं थाम पाई गिरावट, 24400 के नीचे आया Nifty

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने पर मार्केट में कोहराम मच गया। सेंसेक्सन 370 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24350 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी दबाव दिख रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप लाल है। अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:30 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 314.12 प्वाइंट्स यानी 0.40% की गिरावट के साथ 77,840.13 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 96.75 प्वाइंट्स यानी 0.40% की फिसलन के साथ 24,374.95 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 370.21 प्वाइंट्स टूटकर 77,784.04 और निफ्टी 114.20 प्वाइंट्स गिरकर 24,357.50 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थिति सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता ने मार्केट पर दबाव बनाया है। एक तरफ ट्रंप दावा कर रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है लेकिन ईरान का इससे इनकार है। इसके अलावा एक-दूसरे की मुआवजे की मांग ने दोनों देशों के बीच सुलह का रास्ता और मुश्किल कर दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों के कमर्शियल जहाज पर हमले ने तनाव बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में चार क्रू सदस्यों की जान चली गई और इसे अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद समुद्री जहाजों पर हूती हमले में पहली बड़ी जानलेवा घटना बताई जा रही है।

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर गहराने पर कच्चे तेल में और उबाल आया जिसकी आंच स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रू़ड उछलकर प्रति बैरल $90 के करीब पहुंच चुका है।

आईटी-एफएमसीजी सेक्टर का दबाव

दिग्गज सरकारी बैंकों के शेयरों में आज खरीदारी का अच्छा रुझान दिख रहा और इसका निफ्टी इंडेक्ल 2% से अधिक ऊपर चढ़ा है। हालांकि मेटल को छोड़ इसे बाकी अहम सेक्टर्स से अच्छा सपोर्ट नहीं मिल पा रहा। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर अधिक दबाव डाल रहे हैं जिनके निफ्टी इंडेक्स में करीब 1-1% की गिरावट है। निफ्टी मेटल में करीब 1% की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी आधे फीसदी से अधिक कमजोर है और निफ्टी प्राइवेट बैंक भी लाल है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market: क्रूड की तेजी क्या बिगाड़ेगी बाजार का खेल, गिफ्ट निफ्टी से लेकर जानें संकेत दे रहे है ग्लोबल बाजार

GIFT Nifty Indicator: भारतीय बाजारों के लिए आज भी सुस्त संकेत मिल रहे है। गिफ्ट निफ्टी फ्लैट कामकाज कर रहा है।  FIIs की कैश में हल्की खरीदारी हुई, लेकिन वायदा में बिकवाली रही।  नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी थोड़े बढ़े है।  हालांकि निवेशक US महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले सतर्क हैं। मिले-जुले एशियाई बाज़ार, वॉल स्ट्रीट में रात भर की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी से बढ़त सीमित रह सकती है।

सुबह 7:50 बजे GIFT Nifty 40 अंक या 0.16 फीसदी बढ़कर 24,555.5 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि Nifty 50 मंगलवार के 24,471.70 के क्लोजिंग स्तर से ऊपर खुल सकता है। घरेलू बाज़ार पिछले सत्र में गिरावट के बाद रिकवरी की कोशिश करेगा। मंगलवार को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच Sensex 388.19 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 78,154.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 112.10 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 24,471.70 पर आ गया।

US महंगाई के आंकड़ों पर सबकी नजर

ग्लोबल निवेशक जुलाई के लिए US कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (महंगाई) रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं, जो बुधवार को आएगी। इससे फेडरल रिज़र्व के अगले ब्याज दर कदम के बारे में नए संकेत मिल सकते हैं। इस अनिश्चितता के कारण बुधवार को एशियाई कारोबार में US इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

एशियाई बाज़ार मिले-जुले, टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त

US महंगाई के आंकड़ों से पहले भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बीच एशियाई बाज़ारों में सतर्कता के साथ कारोबार हुआ, हालांकि टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त से कुछ सहारा मिला। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का टेक्नोलॉजी-हैवी कोस्पी (Kospi) मज़बूत कॉर्पोरेट नतीजों की बदौलत 2.8 प्रतिशत उछला।

अन्य जगहों पर, जापान का Topix 0.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा, हांगकांग का Hang Seng 0.8 प्रतिशत गिरा और शंघाई कंपोजिट में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। मिडिल ईस्ट में तनाव की चिंताओं के बीच

वॉल स्ट्रीट में गिरावट

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि निवेशकों को उस समझौते की उम्मीद कम हो गई जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता था और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल सकता था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए नियुक्त सेक्रेटरी ने कहा कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं बदलता और युद्ध खत्म करने के लिए तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक यह जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इससे समझौते की उम्मीदें और कम हो गई।

S&P 500 में 0.32 प्रतिशत, नैस्डैक कम्पोजिट में 0.6 प्रतिशत और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.34 प्रतिशत की गिरावट आई।

ब्रेंट क्रूड $90 के करीब पहुंचा

भारतीय शेयरों के लिए कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। बुधवार को कीमतों में हालिया तेजी जारी रही, क्योंकि अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें कम हो रही हैं और दो जहाजों पर हमलों के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताएं हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.81 प्रतिशत बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.85 प्रतिशत बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया।

मंगलवार को दोनों बेंचमार्क $1 से अधिक बढ़कर 31 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम क्लोजिंग स्तर पर बंद हुए थे। सोमवार को इनमें लगभग 5 प्रतिशत की तेजी आई थी, जिसके बाद यह बढ़त जारी रही।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: एशिया में मिला-जुला कारोबार, कोस्पी 4% चढ़ा, क्रूड में तेजी जारी

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। निक्केई में हल्की नरमी है। लेकिन कोस्पी 3.94 फीसदी से ज्यादा ऊपर है। वहीं US INDICES में दूसरे दिन भी दबाव दिखा। डाओ जोंस दिन की ऊंचाई से 400 प्वाइंट से ज्यादा फिसला। नैस्डैक में आधे परसेंट से ज्यादा की गिरावट आई।निवेशक दिन में बाद में आने वाले अहम US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा और वेस्ट एशिया में चल रही बातचीत पर नजर बनाए हुए थे।

दक्षिण कोरिया का बाज़ार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला रहा। कोस्पी (Kospi) में इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान 3.94% की बढ़त हुई, जबकि इससे पहले इसमें 1.5% की तेज़ी आई थी। सार्वजनिक छुट्टी के बाद कारोबार शुरू करने वाले जापानी शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई। निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.43% ऊपर रहा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) में 0.34% की बढ़त हुई।वहीं, ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 इंडेक्स 0.52% गिर गया।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार, 11 अगस्त को US बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखी गई। टेक्नोलॉजी शेयरों में लगातार कमज़ोरी ने बाज़ार के सेंटीमेंट पर असर डाला, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाज़ार पर दबाव और बढ़ा दिया।

डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) अपने इंट्राडे के उच्चतम स्तर से 430 अंक से ज़्यादा नीचे आया और अंत में 180 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। S&P 500 और नैस्डैक कम्पोजिट (Nasdaq Composite) ने भी अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी और सत्र का समापन क्रमशः 0.3% और 0.6% की गिरावट के साथ किया।

आज के सत्र में बाज़ार के लिए मुख्य ट्रिगर जुलाई के लिए US कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) डेटा का जारी होना होगा। निवेशक फेडरल रिज़र्व के ब्याज-दर आउटलुक के बारे में संकेत पाने के लिए इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

कच्चे तेल की कीमतें

बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़त हुई। इसकी वजह US-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और दो जहाजों पर हुए हमले थे, जिनसे मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका पैदा हुई। यह बढ़त तब हुई जब इंडस्ट्री डेटा से US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी का पता चला।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 प्रति बैरल हो गया।

पिछले सत्र में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने उच्चतम क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गए थे। यह बढ़त सोमवार को लगभग 5% की तेज़ी के बाद आई, क्योंकि US और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीद कमज़ोर पड़ गई थी

अमेरिका-ईरान युद्ध

मंगलवार को अमेरिका और यमन में ईरान के समर्थक हूथी गुटों ने होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों पर अलग-अलग हमलों की जानकारी दी।इस बीच, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक वॉशिंगटन युद्ध खत्म करने के लिए तेहरान की शर्तों को नहीं मान लेता। इन मांगों में ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को बहाल करना और क्षेत्र में चल रहे अन्य संघर्षों को खत्म करना शामिल है।

आज सोने की कीमत

सोने की कीमतें ज़्यादातर स्थिर रहीं क्योंकि ट्रेडर्स होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते की संभावना का आकलन कर रहे थे, साथ ही वे फेडरल रिज़र्व के भविष्य के ब्याज-दर फैसलों के संकेत के लिए अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का भी इंतज़ार कर रहे थे।

मंगलवार को दो महीने के उच्चतम स्तर से नीचे आने (जब यह 0.5% गिरकर बंद हुआ था) के बाद, शुरुआती कारोबार में बुलियन की कीमत लगभग $4,370 प्रति औंस रही।

स्पॉट गोल्ड 0.1% गिरकर $4,367.56 प्रति औंस हो गया, जबकि चांदी 0.1% बढ़कर $64.72 प्रति औंस हो गई।

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

क्या ईरान युद्ध में आएगा बड़ा ट्विस्ट, न्यूक्लियर डील से पीछे हटेंगे ट्रंप? होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका की क्या है नई स्ट्रैटेजी

Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं

Read More

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  ग्लोबल मार्केट में बढ़त के बाद, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के हल्की बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार के मूड पर असर डाल सकती हैं। गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी बताते हैं कि आज भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स – निफ्टी 50 और सेंसेक्स – की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हो सकती है।

गिफ्ट निफ्टी 24,678 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 37 पॉइंट ऊपर (प्रीमियम पर) था।

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण गिरावट देखी गई, क्योंकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कोई ठोस जियोपॉलिटिकल समाधान न निकलने से बाजार का मूड कमजोर बना रहा।

सेंसेक्स 455.59 पॉइंट या 0.58% गिरकर 78,499.17 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 65.35 पॉइंट या 0.27% गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।

Asian Market Today: कमजोर जॉब रिपोर्ट से दौड़ा ग्लोबल बाजार, एशिया में तेजी, निक्केई, कोस्पी 1.5% ऊपर

Asian Market Today:  एशियाई शेयर बाज़ारों में तेजी देखने को मिली। वॉल स्ट्रीट में शुक्रवार के सत्र के बाद आई बढ़त को देखते हुए थी, जो उम्मीद से कमज़ोर अमेरिकी जॉब डेटा के कारण हुई थी। रिकॉर्ड ऊंचाई पर S&P बंद हुआ। नैस्डैक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। निक्केई में 1.29% और कोस्पी में 1.47% की बढ़त हुई, जबकि टोपिक्स में 0.36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.5% की तेज़ी दिखी, हालांकि S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2% की गिरावट आई।

यह तेज़ी उस खबर के बाद आई जिसमें पता चला कि अमेरिकी नियोक्ताओं ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियों में कटौती की थी, और पिछले दो महीनों के हायरिंग के आंकड़ों को भी घटाकर संशोधित किया गया था।

वॉल स्ट्रीट

रविवार रात S&P 500 फ्यूचर्स में गिरावट आई, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौते की संभावना को लेकर चिंताएं बढ़ गई।

S&P 500 से जुड़े फ्यूचर्स में लगभग 0.2% की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.1% की बढ़त हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 99 अंक या 0.2% गिरे।

कच्चे तेल की कीमतें

सोमवार को तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ईरान ने कहा कि ओमान के साथ नए शिपिंग रूट बनाने का समझौता पूरा होने वाला है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका को अभी भी कुछ अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी होंगी।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 91 सेंट या 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गए, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 61 सेंट या 0.78% बढ़कर $78.79 प्रति बैरल हो गए।

पिछले हफ़्ते इन दोनों बेंचमार्क में 7% से ज़्यादा की गिरावट आई थी। यह गिरावट इस उम्मीद में हुई थी कि ईरान और ओमान एक समझौते के करीब हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का रास्ता साफ़ हो सकता है। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता था।

अमेरिका-ईरान युद्ध

ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता “अंतिम चरण” में है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य तभी फिर से खोला जाएगा जब अमेरिका अतिरिक्त शर्तें पूरी कर लेगा। इन शर्तों में तेहरान को उन बड़े हमलों के लिए मुआवज़ा देना भी शामिल है जिनका उसे सामना करना पड़ा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है और जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन करता रहेगा, ईरान बातचीत शुरू नहीं करेगा।

इस बीच, ईरान का समर्थन करने वाली हूथी सेनाओं ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया है। यह घटना सऊदी अरब द्वारा तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने के दो दिन बाद हुई, जबकि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के टकराव के कारण इलाके में तनाव बढ़ रहा है।

अलग से, संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी ADNOC ने शुक्रवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय उसके 15 जहाजों पर हमले हुए हैं।

आज सोने की कीमत

जनवरी के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। ट्रेडर्स ने अमेरिकी लेबर मार्केट में अप्रत्याशित गिरावट का आकलन किया, जिससे ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंता कम हुई।

पिछले हफ्ते 7% से अधिक की बढ़त के बाद, एशियाई बाजार में शुरुआती घंटों में सोना लगभग $4,345 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

हाल के हफ्तों में यह कीमती धातु काफी हद तक $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है। जून में युद्ध के कारण हुई भारी बिकवाली से सोना ‘बेयर मार्केट’ (गिरावट वाले बाजार) में चला गया था, जिसके बाद अब कम कीमत पर खरीदारी (dip-buying) में तेजी आई है।

हालिया रिकवरी के बावजूद, सोना अभी भी फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से लगभग 20% नीचे है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाकिस्तान पर अटैक हुआ तो सऊदी-तुर्किये हमला करेंगे? नए ‘इस्लामिक NATO’ का भारत के लिए क्या मायने है?

Saudi Arabia-Turkey-Pakistan Mecca Alliance: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मक्का डील के तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किये गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने इस समझौते को ‘इस्लामिक NATO’ करार दिया। साथ ही भारत और इजरायल की तरफ से पैदा की गई चुनौतियों से निपटने का आग्रह किया।

एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।

एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा

बयान के अनुसार, “इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।” बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी शामिल है। बयान में कहा गया है, “यह समझौता एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।”

यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है। इसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।

तुर्किये और इजरायल में बढ़ा तनाव

हाल के महीनों में तुर्किये और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें यह संकल्प लिया गया था कि उन दोनों में से किसी भी देश पर हमले को दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा। रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त ट्रेनिंग, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए सैन्य कर्मियों और विमानों को तैनात किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं। साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है। शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।

क्या बोले एक्सपर्ट?

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका काफी कम हो सकती है। रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एक पूर्व प्रमुख के बेटे अब्दुल्ला हमीद गुल ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को सुरक्षा मुहैया कराने की अमेरिका की क्षमता को लेकर क्षेत्र में शंकाएं बढ़ रही हैं।

गुल ने कहा, “खाड़ी देशों में अमेरिका के 27 सैन्य अड्डे थे। उनमें से 17 को अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ईरान ने तबाह कर दिया। इससे क्षेत्र में ये सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिकी वाकई उनकी रक्षा कर सकते हैं। इसी वजह से ऐसे समझौते करने की जरूरत पड़ी।” गुल ने कहा कि इस समझौते के साथ ही क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका बहुत कम या कहें कि खत्म सी हो जाएगी। गुल ने कहा, “कतर और कुवैत भी जल्द ही पाकिस्तान के साथ इसी तरह के समझौतों में शामिल होंगे।”

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को आभास हो गया था कि ईरान के बजाय इजरायल उनके लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने कहा कि इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर धारणा बदल दी है। वहीं, रिटायर्ड ब्रिगेडियर फारूक हमीद ने कहा कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। लिहाजा पाकिस्तान और भारत के बीच भविष्य में किसी तरह के संघर्ष के विरुद्ध यह प्रावधान ‘निवारक’ के रूप में काम करेगा।गठजोड़ से नई दिल्ली की बढ़ेगी टेंशन?

मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यही प्रावधान इस समझौते की तुलना NATO के Article 5 से किए जाने की सबसे बड़ी वजह है। NATO के Article 5 के तहत किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। इसके सदस्य देश सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता जताते हैं।

पाकिस्तान ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा

समझौते पर हस्ताक्षर के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद से पीड़ित राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर ‘Islamic NATO’ से उन चुनौतियों से निपटने की अपील, जिन्हें उन्होंने भारत और इजरायल से जुड़ा बताया। पाकिस्तान की इस बयानबाजी को खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच लंबे समय से सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी मुद्दों पर तनाव बना रहा है।

एक पर हमला तो तीनों आएंगे साथ?

मक्का में हुए इस संयुक्त रक्षा समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामूहिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता है। यानी अगर समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषक इसे NATO मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, केवल इस प्रावधान के आधार पर इसे NATO का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा। NATO एक व्यापक, संस्थागत और दशकों पुराना सैन्य गठबंधन है। जबकि पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये के बीच यह समझौता तीन देशों की रक्षा साझेदारी पर आधारित है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह एग्रीमेंट?

नई दिल्ली के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों शामिल हैं। साथ ही तुर्किये भी पाकिस्तान के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। भारत की चिंता का एक पहलू यह हो सकता है कि पाकिस्तान भविष्य में क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामूहिक रक्षा के मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश करे।

ये भी पढ़ें- Khamenei Video: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद गंभीर! अचानक सामने आया वीडियो, बीमारी की खबरों के बीच मचा हड़कंप

खासकर तब, जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भारत और इजरायल को कथित चुनौतियों से जोड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नए डिफेंस डील का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करेगा?

क्या भारत के खिलाफ बनेगा सैन्य मोर्चा?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत के खिलाफ बनाया गया सैन्य गठबंधन है। समझौते का घोषित आधार तीनों देशों के बीच सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग है। लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा भारत और इजरायल का नाम लेकर बयान देना निश्चित रूप से इस घटनाक्रम को नई दिल्ली के लिए अधिक संवेदनशील बना देता है। भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि यह समझौता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित रहता है या भविष्य में इसे किसी व्यापक राजनीतिक-सैन्य गठबंधन का रूप दिया जाता है।

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘मैं लोगों को मारना नहीं चाहता…’, खाड़ी में जारी भीषण तनाव के बीच ट्रंप ने आखिर क्यों कहा ऐसा?

Trump I do not want to kill people: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा बयान दिया है। लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर कड़ा सैन्य दबाव बना रहा है, लेकिन वे युद्ध या तबाही की जगह कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘मैं समझौता करना पसंद करूंगा क्योंकि मैं लोगों को मारना नहीं चाहता।’ इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े हमले की थी तैयारी

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों की ओर से बातचीत की पहल के बाद इस हमले की योजना को रोक दिया गया।

ट्रंप ने कहा, ‘ईरानी अधिकारियों ने मुझसे संपर्क कर हमला न करने और बातचीत करने का अनुरोध किया था। हालांकि वे सार्वजनिक रूप से इससे इनकार करते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बातचीत चल रही है।’ उनके अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और सख्त रुख के कारण ही ईरान अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है।

48 घंटे में साफ होगी तस्वीर

व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच काफी प्रगति हुई है और अगले 48 घंटों के भीतर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। उनका मानना है कि अमेरिका के साथ समझौता करना ही ईरान के हित में होगा।

वेनेजुएला से तुलना और तेल समझौते का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने वेनेजुएला का भी जिक्र किया। उन्होंने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को ’48 मिनट की लड़ाई’ करार देते हुए कहा कि अमेरिका को वहां के संसाधनों से लाभ हुआ है।

ट्रंप ने कहा, ‘अब हम वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल प्राप्त कर रहे हैं और उनके साथ हमारे संबंध अच्छे हैं।’ उन्होंने अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने वेनेजुएला के आपराधिक गिरोह ‘ट्रेन दे अरागुआ’ के खिलाफ सराहनीय कदम उठाए हैं।

क्या है मिडिल ईस्ट में मौजूदा विवाद का मुख्य कारण?

फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बाद से ही मिडिल ईस्ट में समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और एलपीजी ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करना है।