बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा फिलहाल टल गया है। ढाका के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पहले भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजे। इसके बाद ही पीएम रहमान के भारत दौरे की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री 21 अगस्त को दिल्ली आने वाले थे। इस दौरे को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही थी। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल शाहिदुल करीम ने कहा- नई दिल्ली में 5 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए। इससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। हम चाहते हैं कि पीएम तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही माहौल बना सकें। तारिक के अगस्त के तीसरे हफ्ते में भारत आने की खबरें आई थीं। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। बांग्लादेश ने भारत के सामने 2 मांगें रखीं विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब बांग्लादेश भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। पीएम रहमान की पार्टी उनकी भारत यात्रा के खिलाफ भारत ने तारिक को दिल्ली आने का न्योता दिया था भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 17 फरवरी को तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के अंतरराष्ट्रीय संगठन का अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। भारतीय हाई कमिश्नर ने पीएम तारिक से मुलाकात की बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें…

SIP Calculator: ₹100 की SIP से कितने समय में ₹1 लाख बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

SIP Calculator: आज 100 रुपये में शायद परिवार के लिए पूरी सब्जी लाना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए अगर कोई कहे कि सिर्फ ₹100 महीने बचाकर 1 लाख रुपये बनाए जा सकते हैं, तो पहली बार में यकीन करना मुश्किल लगता है।

लेकिन SIP की खासियत ही यही है। यहां सिर्फ आपका पैसा काम नहीं करता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितने लंबे समय तक निवेश चलता है, कंपाउंडिंग उतना बड़ा असर दिखाती है। यही वजह है कि छोटी रकम भी धीरे-धीरे बड़ा फंड बन सकती है।

पहले सीधा जवाब जान लीजिए

अगर आप हर महीने ₹100 की SIP करते हैं, तो 1 लाख रुपये तक पहुंचने में अनुमानित समय कुछ ऐसा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
1 लाख बनने में अनुमानित समय

10%22 साल 5 महीने
12%20 साल
15%17 साल 5 महीने

नोट: यह अनुमान नियमित मासिक SIP और पूरे समय एक समान रिटर्न मानकर किया गया है। असली रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

10% रिटर्न मिले तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में ₹100 की SIP शुरू की। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 1 लाख रुपये बनने में करीब 22 साल 5 महीने लग सकते हैं।

इस दौरान आपका कुल निवेश सिर्फ करीब ₹26,900 होगा। यानी 1 लाख के फंड में करीब ₹73,100 सिर्फ कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यही वजह है कि शुरुआती सालों में लगातार निवेश करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

12% रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है

अब यही उदाहरण 12% रिटर्न के साथ देखिए। यहां लक्ष्य करीब 20 साल में पूरा हो सकता है।

इस दौरान कुल निवेश लगभग ₹24,100 रहेगा। बाकी करीब ₹75,900 रिटर्न से बन सकते हैं। सिर्फ 2% ज्यादा रिटर्न मिलने से करीब ढाई साल का समय बच जाता है।

15% रिटर्न मिले तो?

अगर लंबे समय में औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो यही 1 लाख रुपये करीब 17 साल 5 महीने में बन सकते हैं।

यहां कुल निवेश सिर्फ करीब ₹20,900 रहेगा। बाकी लगभग ₹79,100 कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यानी जितना समय बढ़ता है, उतना ही रिटर्न का असर भी तेज होता जाता है।

तीनों स्थितियों का पूरा हिसाब

रिटर्नसमयकुल निवेश
संभावित बढ़ी हुई रकम

10%22 साल 5 महीने₹26,900₹73,100
12%20 साल₹24,100₹75,900
15%17 साल 5 महीने₹20,900₹79,100

अगर SIP बढ़ा दें तो खेल बदल जाता है

यहीं सबसे दिलचस्प बात है। 100 रुपये की SIP से 1 लाख बन सकते हैं, लेकिन अगर आमदनी बढ़ने के साथ SIP भी थोड़ी बढ़ा दें, तो मंजिल कहीं पहले मिल सकती है।

12% अनुमानित रिटर्न पर अगर SIP बढ़ाकर ₹500 कर दें, तो 1 लाख बनने में करीब 9 साल लग सकते हैं। वहीं ₹1,000 की SIP में यही लक्ष्य करीब 5 साल 9 महीने में पूरा हो सकता है।

असली सीख क्या है?

100 रुपये की SIP आपको रातों-रात अमीर नहीं बनाएगी। लेकिन यह एक अच्छी निवेश आदत जरूर बना सकती है। अगर छोटी रकम से शुरुआत करके हर साल SIP थोड़ी-थोड़ी बढ़ाते रहें, तो वही कंपाउंडिंग आगे चलकर आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

₹5 करोड़ vs ₹10 करोड़: रिटायरमेंट के बाद कितने फंड में मिलेगी असली आजादी? जानिए एक्सपर्ट्स का ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ब्रिटेन की हरी घास हुई पीली, 190 साल में सबसे सूखा जुलाई, जानें क्यों बदल गया पूरा नजारा

अपनी हरी-भरी घास और खूबसूरत पार्कों के लिए मशहूर ब्रिटेन का नजारा इस बार बदला हुआ है। ब्रिटेन में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने इसकी मनमोहक हरियाली पर काफी असर डाला है और यहां की घास हरी से पीली, भूरी और सुनहरी रंग की दिखने लगी हैं। इंग्लैंड में इस बार 190 वर्षों में सबसे सूखा जुलाई देखने को मिला है जबकि वेल्स ने भी अपने इतिहास का सबसे सूखा जुलाई देखा। इस वजह से देश के लॉन, पार्क और खेत सूख रहे हैं।

यूके सरकार के मुताबिक महीनों तक बेहद कम बारिश और हाई टेंप्रेचर के बाद 10 अगस्त तक इंग्लैंड का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे की चपेट में आ चुका था। इस जल संकट ने नदियों, जलाशयों, कृषि योग्य भूमि और वन्यजीवों पर काफी असर डाला है।

क्यों पीली पड़ रही है हरी घास?

घास के रंग में आया यह बदलाव मुख्य रूप से पौधों का सर्वाइवल रिस्पॉन्स है। जब मिट्टी काफी सूख जाती है तो घास का बढ़ना रुक जाता है और वो डॉर्मेंट स्टेट में चली जाती है। जब घास पानी और एनर्जी बचाने की कोशिश करती है तो उसकी पत्तियां अपना स्वस्थ हरा रूप खो देती हैं और पीली, भूरी या पुआल के रंग की हो जाती हैं। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी के मुताबिक स्थापित लॉन अक्सर सूखे के लंबे दौर में भी जीवित रह सकते हैं क्योंकि सतह के नीचे उनकी जड़ें जीवित रहती हैं। जैसे ही बारिश लौटती है, उनमें फिर से नई हरी पत्तियां निकल आती हैं। फिर भी मौजूदा स्थितिइतनी गंभीर है कि कुछ क्षेत्रों में स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर सूखा जारी रहता है तो घास कमजोर हो सकती है और जड़ें खराब हो सकती हैं।

किसानों, जलाशयों और जल आपूर्ति पर पड़ा भारी असर

इस सूखे मौसम का सीधा असर ब्रिटेन के किसानों पर भी पड़ रहा है। इंग्लैंड की पर्यावरण एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि घास की पैदावार घटने के कारण पशुपालक किसानों को समय से पहले ही सर्दियों के लिए रखा गया चारा इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को समय से पहले फसलों की कटाई करनी पड़ रही है, फसल की पैदावार कम हो रही है और खेतों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है।

बारिश की कमी का आंकड़ा बेहद हैरान करने वाला है

जुलाई महीने में इंग्लैंड में केवल 6।5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि उसके दीर्घकालिक औसत का मात्र 10 प्रतिशत है। दक्षिणी इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में पूरे महीने लगभग न के बराबर बारिश हुई। देश में जलाशयों का जलस्तर काफी गिर गया है, नदियों का प्रवाह असामान्य रूप से कम है और लाखों लोग पानी के उपयोग पर लगी पाबंदियों से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सूखे के हालातों को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपने घर के लॉन में हर कीमत पर घास को हरा रखने की जिद न करें। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का कहना है कि भूरी हुई घास बारिश लौटने पर प्राकृतिक रूप से ठीक हो सकती है जबकि सूखे के दौरान ज्यादा सिंचाई करने से सीमित जल आपूर्ति पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ेगा।

सुनील सिंघानिया ने इन 2 शेयरों से निकाला पूरा पैसा, इस नए स्टॉक में लगाई बड़ी बाजी; चेक करें पूरी लिस्ट

Sunil Singhania Abakkus MF Changes: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के अबक्कस म्यूचुअल फंड ने जुलाई महीने में अपने पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल किया है। फंड हाउस की दो प्रमुख इक्विटी स्कीम अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड और अबक्कस स्मॉल कैप फंड से सरकारी बैंक ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ को पूरी तरह बेच दिया है।

इसके अलावा, स्मॉल कैप फंड ने आईटी कंपनी Cyient से भी एग्जिट कर लिया है, जबकि आईजीआई (IGI) जैसे शेयरों में नई हिस्सेदारी खरीदी है। आइए जानते हैं जुलाई के महीने में सुनील सिंघानिया के फंड हाउस ने किन शेयरों में बिकवाली की और किन दिग्गजों पर भरोसा बढ़ाया है।

IGI में नई एंट्री, HDFC Bank और SBI पर बढ़ाया दांव

₹6,338 करोड़ के एसेट साइज वाले अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड ने जुलाई में अपने पोर्टफोलियो के 34 शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई और 3 में घटाई। महीने के अंत तक इसके पोर्टफोलियो में कुल 45 शेयर थे।

फंड ने IGI में 0.6% हिस्सेदारी के साथ नई पोजीशन ली, जबकि जून में 2.7% वेटेज वाले Bank of Baroda को पूरी तरह से बेचकर एग्जिट कर लिया।

फंड ने HDFC Bank (4% से बढ़ाकर 4.72%), SBI (3.6% से 3.89%), L&T (1.5% से 3.2%), वेदांता एल्युमीनियम (2% से 2.65%) और M&M (2.6% से 2.84%) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।

टॉप-5 होल्डिंग्स: ICICI Bank (5.55%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग है। इसके बाद HDFC Bank (4.72%), SBI (3.89%), रिलायंस इंडस्ट्रीज (3.10%) और डिविस लैबोरेटरीज (2.95%) का नंबर आता है।

सेक्टर आवंटन: बैंकिंग सेक्टर 17% हिस्सेदारी के साथ सबसे ऊपर है, जिसके बाद फार्मा (7.7%) और कैपिटल मार्केट्स (5.2%) हैं।

अबक्कस स्मॉल कैप फंड: Cyient से एग्जिट, BEML और मिसेज बेक्टर्स की एंट्री

₹2,113 करोड़ के अवाकस स्मॉल कैप फंड में जुलाई में जबरदस्त हलचल देखी गई। फंड ने 56 शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और महीने के अंत में कुल 62 शेयरों का पोर्टफोलियो मेंटेन किया।

नए शेयर शामिल किए: फंड ने BEML (1.5%), मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज (1%) और इंडो-MIM (0.4%) को अपने पोर्टफोलियो में जगह दी।

इन दो शेयरों से पूरी तरह बाहर: स्मॉल कैप फंड ने Bank of Baroda (जून में 1.1% वेटेज) और Cyient (जून में 1.3% वेटेज) को पूरी तरह बेच दिया।

इनमें बढ़ाया निवेश: कॉनकॉर, किर्लोस्कर ऑयल इंजन, लीला पैलेसेस, एलेम्बिक फार्मा, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट, तानला प्लेटफॉर्म्स और आईजीआई में एक्सपोजर बढ़ाया गया।

टॉप होल्डिंग्स: डॉ लाल पाथलैब्स (1.80%) और वेल्सपन कॉर्प (1.80%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग्स हैं, जिसके बाद कैम्स (1.79%), आईजीआई (1.76%) और करूर वैश्य बैंक (1.74%) का स्थान है।

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

सुनील सिंघानिया के इन दोनों फंड्स ने जुलाई महीने और बीते कुछ महीनों में अपने संबंधित बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतरीन रिटर्न दिया है:

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एक गलती…और टूट गया 10 साल पुराना रिश्ता, पत्नी से धोखा मिलने के बाद पति ने खत्म किया रिश्ता, वायरल हुई कहानी

सोशल मीडिया पर एक महिला का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में महिला ने बताया की एक गलती की वजह से उसके पति ने 10 साल पुरानी शादी तोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या एक बार किया गया धोखा इतने सालों के रिश्ते, प्यार और साथ को खत्म करने के लिए काफी है, या फिर टूटे भरोसे के बाद रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। जानें क्या है पूरा मामला

महिला ने पति को दिया धोखा

X यूजर SamSiff ने एक महिला से जुड़ी पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि, महिला ने अपने पति को धोखा दिया, जिसके बाद पति ने उसे तलाक दे दिया। बताया गया कि तलाक से पहले दोनों की शादी को 10 साल हो चुके थे। कहानी शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “उसने सिर्फ एक बार धोखा दिया, लेकिन पति ने 10 साल पुरानी शादी खत्म करने का फैसला कर लिया। अब लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सिर्फ एक गलती की वजह से किसी रिश्ते के 10 साल को खत्म कर देना सही है?”

नहीं दिया सफाई का मौका

पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई थी, जिसमें महिला ने पूरे मामले को लेकर अपनी बात रखी थी। महिला ने दावा किया कि 10 साल की शादी में उसने सिर्फ एक बार पति को धोखा दिया, लेकिन पति ने उसे सफाई या रिश्ता सुधारने का मौका दिए बिना तलाक ले लिया। महिला ने अपनी बात रखते हुए लिखा, “मैंने शादी के 10 साल में सिर्फ एक बार अपने पति को धोखा दिया। यह मेरी एक गलती थी, लेकिन इसके बाद वह मुझसे पूरी तरह दूर हो गया, जैसे मैं उसके लिए सबसे बुरी इंसान हूं। उसने न तो मुझसे बात करने की कोशिश की, न रिश्ते को बचाने का कोई मौका दिया और न ही मेरी बात सुनी। इसके बजाय उसने तलाक के कागज मेरे सामने रख दिए।”

2 साल से मांद रही मांफी

महिला ने आगे बताया, “यह घटना दो साल पहले हुई थी। तब से मैं लगातार माफी मांगती रही, रोती रही और रिश्ता बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हमने साथ मिलकर 10 साल की जिंदगी बिताई और कई यादें बनाई थीं। मुझे समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतने सालों के रिश्ते और साथ को इतनी आसानी से कैसे भुला सकता है।” महिला का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि, रिश्ते की लंबी अवधि से ज्यादा जरूरी भरोसा होता है और एक बार विश्वास टूट जाने के बाद शादी को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं होता।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने महिला की आलोचना करते हुए लिखा, “बड़ी मेट्रो की लड़कियां और महिलाएं आखिर क्या उम्मीद कर रही हैं? एक बार धोखा देना हो या 20 बार, इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर स्थिति उलट होती और पति ऐसा करता, तो शायद वह भी अपनी पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर देता। उसे इस बात की गंभीरता समझनी चाहिए।”

एक और कमेंट करने वाले ने महिला पर कहानी को मैनिपुलेट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा, “एलीट लेवल की गैसलाइटिंग। जो कोई भी उसके पक्ष में बात करता है या उसका सपोर्ट करता है, वह सबसे बुरे लोग हैं।” एक यूजर ने लिखा, “कितनी ऊपरी सोच है.. यह सिर्फ एक गलती नहीं है बल्कि भरोसा टूटना है.. धोखा तो धोखा है… बस। माफ नहीं किया जा सकता।”

Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 31% बढ़ा, तीन साल में ₹1000 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी Lincoln Pharmaceuticals ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 30.9% बढ़कर ₹36.23 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹27.68 करोड़ था।

कंपनी की कुल आय भी 19% बढ़कर ₹201.55 करोड़ पहुंच गई। एक साल पहले यह ₹169.34 करोड़ थी। वहीं, प्रति शेयर आय (EPS) बढ़कर ₹18.09 हो गई।

EBITDA में भी मजबूत बढ़त

Lincoln Pharmaceuticals का EBITDA 32.3% बढ़कर ₹51.70 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹39.08 करोड़ था। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी पहले से बेहतर रही।

FY26 में डिविडेंड की सिफारिश

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026 में ₹87.89 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कुल आय ₹704.48 करोड़ रही और EBITDA ₹131.14 करोड़ पहुंच गया। बोर्ड ने FY26 के लिए 18% डिविडेंड यानी ₹10 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹1.80 डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, इसे AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है।

तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य

Lincoln Pharmaceuticals ने अगले तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वह 15-18% सालाना ग्रोथ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी को कार्डियक, डायबिटीज, डर्मेटोलॉजी और ENT सेगमेंट से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

90 देशों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी

Lincoln Pharmaceuticals अभी 60 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। कंपनी का लक्ष्य अगले 2-3 साल में यह संख्या बढ़ाकर 90 देशों तक पहुंचाने का है।

हाल ही में कंपनी ने कनाडा के बाजार में एंट्री की है। साथ ही उसे ऑस्ट्रेलिया के TGA और यूरोप के EU GMP से मंजूरी भी मिली है। कंपनी का कहना है कि इससे उसके ग्लोबल विस्तार को और रफ्तार मिलेगी।

Lincoln के शेयरों का हाल

कंपनी के शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.19% की गिरावट के साथ 612.10 रुपये पर बंद हुए। इस साल अब तक स्टॉक 27.57% का रिटर्न दिया है। वहीं बीते 1 साल के दौरान इसमें करीब 12% की तेजी आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.22 हजार करोड़ रुपये है।

Lincoln Pharmaceuticals दवाइयां बनाने और बेचने वाली भारतीय फार्मा कंपनी है। यह कार्डियक, डायबिटीज, एंटीबायोटिक, डर्मेटोलॉजी, ENT और दर्द निवारक जैसी कई कैटेगरी में दवाइयां बनाती है।

Apollo Hospitals Share Price: इस साल 25% चढ़ा है शेयर, क्या अभी खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Molbio Diagnostics करेगा मालामाल या लगेगा शॉक! ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

Molbio Diagnostics Listing: टेमासेक (Temasek) और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप (Motilal Oswal Group) के निवेश वाली मोल्बियो डाइग्नॉस्टिक के आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला। अब कल 17 अगस्त को इसके शेयर लिस्ट होने वाले हैं। ग्रे मार्केट से 15.49% के लिस्टिंग गेन के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹125 यानी 15.49% प्रीमियम पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹807 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं। शेयर मिले या नहीं, इसका चेक करने का स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Molbio Diagnostics चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे चेक करें स्टेटस

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Molbio Diagnostics चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Molbio Diagnostics IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

मोब्लियो डाइग्नॉस्टिक्स न का ₹940 करोड़ का आईपीओ 10-12 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 70.27 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 186.39 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 49.80 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.97 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 13.28 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले 91.66 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹105.54 करोड़ आरएंडडी फैसिलिटी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कनेक्टेड ऑफिस स्पेस बनाने, ₹72.28 करोड़ गोवा यूनिट 1, गोवा यूनिट 2 और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए प्लांट, मशीनरी और अन्य इक्विपमेंट की खरीदारी, ₹59.54 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹9.47 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Molbio Diagnostics के बारे में

मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। इसने ‘Truenat’ नाम से पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म डेवलप किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के जरिए यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है। देश भर में इसके 6 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं और इसके ग्राहक 90 से अधिक देशों में हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 40% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹164.14 करोड़ और टोटल इनकम करीब 32% के सीएजीआर से ₹1,455.17 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹412.64 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,148.84 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Javed Akhtar: ‘बेनजीर से शादी कर चमकने वाले लोग’, जरदारी का बयान सुन भड़के जावेद अख्तर

Javed Akhtar: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की देश के हिंदू अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणी पर लेखक जावेद अख्तर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में पाकिस्तानी नेता पर “संवेदनहीन” होने का आरोप लगाया।

यह मामला तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान आसिफ अली जरदारी के भाषण का एक वीडियो सामने आया। देश की हिंदू आबादी के बारे में बात करते हुए, आसिफ अली जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान और वहां की मुस्लिम बहुल आबादी 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को “बर्दाश्त” करती है।

वीडियो में आसिफ अली जरदारी ने “अखंड भारत” पर भारत के रुख का जिक्र करते हुए कहा, “भारतीयों का नजरिया अलग है। उनके मन में अपना एजेंडा है। वे अखंड भारत में यकीन रखते हैं। लेकिन इसके बीच बहुत सी ऐसी बातें हैं, जिन्हें वे भूल गए हैं।”

उन्होंने कहा, “हम मुसलमान हैं। वे नहीं हैं। लेकिन हमारी सोच ऐसी है कि हम पाकिस्तान में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं।” आसिफ अली जरदारी ने आगे दावा किया कि पाकिस्तान में हिंदू “उतने ही आजाद और अच्छी स्थिति में हैं, जितने वे कहीं और हो सकते थे” और कहा कि वे “उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे।”

इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, जावेद अख्तर ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की “मिस्टर 10 परसेंट” वाली छवि पर तंज कसा। यह उपनाम उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। जावेद अख्तर ने X पर लिखा, “पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी – जो बेनजीर भुट्टो से शादी के बाद चर्चा में आए थे – कहते हैं कि वे अपने देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं। मिस्टर जरदारी, मैं समझता हूं कि आप हमेशा से ही उन सभी के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनकी आबादी 10 प्रतिशत से कम है।”

यह इशारा “मिस्टर 10 परसेंट” वाले उपनाम की ओर था, जो लंबे समय से आसिफ अली जरदारी के साथ जुड़ा हुआ है। यह नाम उन पर सरकारी ठेकों से कमीशन लेने के आरोपों के कारण पड़ा था। यह पहली बार नहीं है, जब जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की नीतियों और भारत के प्रति उसके रवैये पर खुलकर बात की है।

पिछले साल मई में, मुंबई में एक किताब के लॉन्च के दौरान, उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की थी और कहा था कि भारत ने रिश्ते सुधारने की कोशिशें की हैं, जिसमें पाकिस्तानी कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रास्ते खोलना भी शामिल है। आसिफ अली जरदारी अभी पाकिस्तान के राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 10 मार्च, 2024 को देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी।

₹5 करोड़ vs ₹10 करोड़: रिटायरमेंट के बाद कितने फंड में मिलेगी असली आजादी? जानिए एक्सपर्ट्स का ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला

Rs 5 Crore vs Rs 10 Crore Retirement Corpus: भारत में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस या अर्ली रिटायरमेंट का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ‘मैजिक नंबर’ होता है। अधिकतर भारतीय निवेशकों के लिए यह नंबर ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच झूलता रहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ₹5 करोड़ का फंड जुटाने के बाद आपकी पैसों की चिंताएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं, या ₹10 करोड़ का कॉर्पस ही असली आजादी दिला पाता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों पड़ावों के बीच का असली फर्क केवल पैसों का नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी, सुरक्षा और लाइफस्टाइल में मिलने वाले मार्जिन का है। आइए आसान भाषा में समझते हैं ₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ के फंड का पूरा गणित।

क्या ₹5 करोड़ का फंड रिटायरमेंट के लिए काफी है?

आपकी उम्र, खर्च, निर्भर सदस्यों, मेडिकल जरूरतों और लाइफस्टाइल के आधार पर ₹5 करोड़ का फंड फाइनेंशियल फ्रीडम दिला सकता है। लेकिन इस लेवल पर आपको कड़े वित्तीय अनुशासन और सोच-समझकर पैसे निकालने की जरूरत होती है।

MIRA Money के इनवेस्टमेंट रिसर्च एनालिस्ट रोहन गोयल के अनुसार, अगर आप 4% के स्टैंडर्ड विड्रॉल रेट से पैसे निकालते हैं, तो ₹5 करोड़ के फंड से आपको सालाना ₹20 लाख या करीब ₹1.6 लाख महीना मिल सकता है (जो महंगाई के हिसाब से एडजस्ट होगा)।

यह रकम नौकरी छोड़ने, करियर से ब्रेक लेने या कम तनाव वाली नौकरी चुनने के लिए काफी है, लेकिन जोखिम भी है। अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, बच्चे की विदेश में पढ़ाई या शेयर बाजार में लंबी मंदी आपके पूरे प्लान को बिगाड़ सकती है। यही वजह है कि ₹5 करोड़ वाले लेवल पर ज्यादातर लोग कोई न कोई पैसिव इनकम या काम जारी रखते हैं।

कॉर्पस ₹10 करोड़ पहुंचने पर क्या-क्या बदल जाता है?

जब आपका कॉर्पस बढ़कर ₹10 करोड़ हो जाता है, तो 4% के नियम के हिसाब से आपकी सालाना आय दोगुनी होकर ₹40 लाख (लगभग ₹3.33 लाख महीना) हो जाती है। यह रकम आपको केवल आराम ही नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं से निपटने की बड़ी ढाल भी देती है।

₹10 करोड़ के लेवल पर हेल्थकेयर, अंतरराष्ट्रीय यात्राएं या बच्चों/माता-पिता की मदद करना आपके बजट पर भारी नहीं पड़ता।

अगर रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में ही शेयर बाजार गिर जाता है, तब भी आपके पोर्टफोलियो पर इसका असर कम पड़ता है क्योंकि आपका विड्रॉल रेट आपके कुल फंड के मुकाबले काफी सुरक्षित होता है।

क्या ₹10 करोड़ होने का मतलब ज्यादा फिजूलखर्ची करना है?

बिल्कुल नहीं। बड़ा कॉर्पस आपको तभी तक वित्तीय आजादी दे सकता है जब तक आपकी लाइफस्टाइल और खर्च नियंत्रण में रहें। वाइज फिनसर्व की डायरेक्टर और सीओओ चारू पहूजा चेतावनी देती हैं कि यहाँ ‘लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन’ यानी अमीर होने के साथ खर्च बढ़ाने की आदत सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। बड़ा घर, महंगी गाड़ियां और बार-बार महंगे वेकेशन आपके मंथली बजट को इतना बढ़ा सकते हैं कि ₹10 करोड़ का बड़ा फंड भी कम पड़ने लगे।

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

आपके लिए कौन सा आंकड़ा सही है?

फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस का मतलब केवल पैसों का ढेर लगाना नहीं, बल्कि काम को मजबूरी के बजाय ‘अपनी पसंद’ बनाना है। ₹5 करोड़ आपको काम छोड़ने की आजादी दे सकता है, लेकिन ₹10 करोड़ आपको जिंदगी में किसी भी अनचाहे मोड़ या मंदी से बेफिक्र होने का सुकून देता है। सही कॉर्पस वही है जो आपकी मौजूदा लाइफस्टाइल को बनाए रखे और महंगाई को पछाड़ते हुए आपको कभी दोबारा मजबूरी में काम पर न लौटने दे।

डिस्क्लेमर: यह खबर वित्तीय विशेषज्ञों के विचारों और सैद्धांतिक कैलकुलेशन पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत निवेश या रिटायरमेंट सलाह न माना जाए। अपनी उम्र और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) से सलाह जरूर लें।

Skoda Slavia facelift design details teased ahead of August 18 launch

Skoda Slavia facelift design details teased ahead of August 18 launch
Skoda Slavia facelift design details

Ahead of its launch on August 18, 2026, Skoda India has shared another teaser of the Slavia facelift. The teaser gives a glimpse of a few design elements that the updated Slavia will receive.

  1. Updated Slavia to have subtly refreshed exterior.
  2. To continue with 1.0 and 1.5-litre turbo-petrol engines.
  3. 1.0-litre engine to have a new 8-speed automatic transmission.

Skoda Slavia facelift: What did the teaser reveal?

At the front, the grille was spotted studded with chrome detailing. The Slavia facelift is also expected to have revised detailing for the headlamps and restyled bumpers with new fog lamp housings. The tail-lights were spotted as well with similar detailing as the current version, but it’s yet to be seen if it gets the connected treatment like the Kushaq. Additionally, a new sporty five-spoke design for the alloy wheels was spotted, which will likely continue to be 16 inches in size, like the current version. The facelift continues to get chrome treatment for the window line, like the current version. 

Skoda Slavia facelift: What to expect?

Current version’s interior used for representation.

On the inside, the Slavia facelift is likely to continue with the same cabin layout, albeit with updated colours and trim materials. It is expected to borrow the Kushaq’s 10.25-inch digital driver’s display. Whether it gets the Kushaq’s segment-only rear massaging seats is yet to be seen. Meanwhile, features like a single-pane sunroof, powered and ventilated front seats, wireless phone charger will continue to be offered. 

Current Slavia 1.0-litre engine used for representation.

As for powertrains, the Slavia facelift will continue to be powered by the current version’s 1.0 and 1.5-litre direct-injection turbo-petrol engines. The former develops 115hp and 178Nm, while the latter delivers 150hp and 250Nm of torque. While the 1.0-litre unit will continue to be paired with a 6-speed manual, automatic versions will get a new 8-speed torque converter gearbox, replacing the current version’s 6-speed unit. On the other hand, the 1.5-litre mill will continue to come solely with a 7-speed DCT.

In terms of price, the Slavia facelift is expected to be slightly pricier than the current version, which retails for Rs 9.99 lakh to Rs 18.19 lakh. It will continue to take on rivals like the Hyundai Verna, Honda City and the Volkswagen Virtus.