Stock Market Live Update: अमेरिका-ईरान के बीच गहराते विवाद से US बॉन्ड यील्ड में फिर उछाल देखने को मिला। अमेरिकी बाजार 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.7% पर पहुंचने से नर्वस हुआ। डाओ जोंस 700 प्वाइंट से ज्यादा फिसला। S&P और नैस्डैक भी एक परसेंट फिसले। उधर एशियाई बाजारों में भी नरमी देखने को मिली। निक्केई और कॉस्पी में करीब एक परसेंट का दबाव दिख रहा है । इस बीच अमेरिका और एशिया से खराब संकेतों के बावजूद गिफ्ट निफ्टी में मजबूती देखने को मिली। करीब 70 प्वाइंट ऊपर चढ़ा। इधर FIIs की कैश में हल्की बिकवाली देखने को मिला। लेकिन वायदा में खरीदारी रही। हालांकि FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट दो लाख 12 हजार के पार रहा।
पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं मिली। भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया। इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं। पेरू रिंग ऑफ फायर का हिस्सा, अक्सर आते हैं भूकंप पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं। साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी। साल 2026 में वेनेजुएला में आया सबसे बड़ा भूकंप, 6 हजार मौतें इस साल वेनेजुएला में सबसे बड़ा भूकंप आया। 24 जून को 7.2 की तीव्रता से आए भूकंप में 6 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इसके अलावा कोलंबिया में 10 अगस्त को आए भूकंप में 70 से ज्यादा जानें गईं थीं। ———————– भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल: 86 इमारतें गिरीं साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में 11 अगस्त की रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 224 लोगों की मौत हो गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं मिली। भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया। इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं। पेरू रिंग ऑफ फायर का हिस्सा, अक्सर आते हैं भूकंप पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं। साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी। साल 2026 में वेनेजुएला में आया सबसे बड़ा भूकंप, 6 हजार मौतें इस साल वेनेजुएला में सबसे बड़ा भूकंप आया। 24 जून को 7.2 की तीव्रता से आए भूकंप में 6 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इसके अलावा कोलंबिया में 10 अगस्त को आए भूकंप में 70 से ज्यादा जानें गईं थीं। ———————– भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल: 86 इमारतें गिरीं साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में 11 अगस्त की रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 224 लोगों की मौत हो गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Delhi Master Plan 2047: देश की राजधानी दिल्ली के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य और बिजली मंत्री मनोहर लाल ने इस महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान का अनावरण किया। इस मास्टर प्लान में मौजूदा निर्मित क्षेत्रों (ब्राउनफील्ड) के पुनर्विकास और नए क्षेत्रों (ग्रीनफील्ड) के विकास के लिए दो अलग-अलग योजना दृष्टिकोण अपनाए गए हैं। आइए जानते हैं दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की वो 18 बड़ी बातें जो राजधानी की पूरी तस्वीर बदल कर रख देंगी।
1- 40 लाख से अधिक नए किफायती घर
भविष्य में सबके लिए घर हो, ये सपना दिल्ली मास्टर प्लान 2027 में देखा गया है। इसके लिए 40 लाख से अधिक नए किफायती मकान बनाए जाएंगे। इसके तहत ग्रुप हाउसिंग और डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम क्षेत्र की आवश्यकता को 40000 वर्ग मीटर से घटाकर 3000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। इससे करीब 7 लाख एक्स्ट्रा मकान बनेंगे। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन यानी मेट्रो कॉरिडोर के किनारे लगभग 18 लाख किफायती मकान बनेंगे।
झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टर के निवासियों के लिए इन-सिटू यानी वहीं पर पुनर्विकास के जरिए 17 लाख से अधिक लोगों को सम्मानजनक घर दिए जाएंगे। 5000 वर्ग मीटर या उससे बड़े औद्योगिक भूखंडों पर श्रमिकों के आवास के लिए 15% अतिरिक्त FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) मिलेगा। हाई डेंसिटी कॉरिडोर के पास भी किफायती घर बनेंगे। छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले समूहों के लिए किराये के मकानों को बढ़ावा देने के लिए 50% FAR प्रोत्साहन दिया जाएगा।
2- लैंड पूलिंग नीति से 200 वर्ग किमी में नया शहरी विस्तार
दिल्ली में लैंड पूलिंग नीति के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नया सुनियोजित शहरी विस्तार होगा। इससे करीब 12 लाख नए घर बनेंगे। इसमें 600 किमी लंबा सड़कों का नेटवर्क बनेगा। डीडीए खुद पहले ही 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कें बनाएगा। जमीन जुटाकर कम से कम 20 हेक्टेयर की योजनाओं के जरिए तेजी से विकास किया जाएगा। यूईआर-II के किनारे 250 मीटर चौड़े कॉरिडोर में 400 तक FAR के साथ हाई-डेंसिटी विकास होगा। गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव का सेक्टर 8B पहला अधिसूचित सेक्टर बन गया है जो लागू होने के लिए तैयार है।
3 – व्यापारिक और वाणिज्यिक स्थलों का कायाकल्प
व्यापारिक केंद्रों का पुनर्विकास अब न्यूनतम 1000 वर्ग मीटर के भूखंड पर प्रोत्साहन FAR के साथ करने की अनुमति होगी। इससे जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट के तहत ग्राउंड फ्लोर और स्टिल्ट वाले भवनों के पहले निचले फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी।
4- उद्योगों को बढ़ावा और आधुनिक सुविधाएं
औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक औद्योगिक पार्क तैयार किए जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े रिटेल स्टोर, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग, को-वर्किंग स्पेस और डेटा सेंटर खोलने की अनुमति दी जाएगी ताकि नए स्टार्टअप और इनोवेशन को सपोर्ट मिल सके।
5- दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
दिल्ली की करीब 1500 धरोहरों और ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान बनाया जाएगा। ऐतिहासिक चरित्र को बनाए रखते हुए इन इमारतों का उपयोग होटल, म्यूजियम, ऑफिस, लाइब्रेरी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करने की सुविधा मिलेगी। पहली बार हेरिटेज इंसेंटिव के तहत 50 TDR की व्यवस्था शुरू की गई है।
6- यमुना नदी का पुनरुद्धार और ग्रीन-ब्लू दिल्ली
यमुना नदी के करीब 1700 हेक्टेयर में फैले बाढ़ के मैदानों (फ्लडप्लेन्स) के संरक्षण और पारिस्थितिक सुधार के लिए 13 बड़ी परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इसके साथ ही यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित किया जाएगा।
7- नरेला बनेगा एजुकेशन हब
नरेला को वर्ल्ड क्लास एजुकेशन हब के रूप में बदला जाएगा। इसके लिए 138 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है, जहां सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज विकसित की जाएंगी।
8- द्वारका बनेगा नया इंटरनेशनल इन्वेस्ट-हब
द्वारका को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आईटी, स्टार्टअप्स, डेटा सेंटर और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
9- बेहतर और आसान परिवहन व्यवस्था
यूनिफाइड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ‘यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ बनाई जाएगी। मेट्रो, आरआरटीएस, बसों और पैदल चलने वालों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब बनेंगे। अंतर-राज्यीय और शहर के भीतर आवाजाही आसान करने के लिए UER-I, UER-II और UER-III का विस्तार होगा। इसके साथ ही पार्किंग की एकीकृत योजना और प्रबंधन के लिए नया फ्रेमवर्क लागू होगा।
10- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सरल नियम
व्यापार और जीवन को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन मंजूरी और सरल प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी। नियमों को बेहद आसान बनाते हुए उपयोग की श्रेणियों को 133 से घटाकर सिर्फ 45 कर दिया गया है। इसके अलावा आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नेगेटिव लिस्ट दृष्टिकोण लागू किया गया है, जिससे अधिक लचीलापन मिलेगा।
11- आसान पुनर्विकास रणनीति
प्लॉट-आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए 4 हेक्टेयर जमीन की न्यूनतम आवश्यकता की शर्त हटा दी गई है। कम से कम 1000 वर्ग मीटर के भूखंडों पर उच्च FAR इंसेंटिव देकर कमर्शियल रिडेवलपमेंट को प्रोत्साहित किया जाएगा।
12- 1511 अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण
1511 अनधिकृत कॉलोनियों में बने आवासीय भवनों को ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर नियमित किया जाएगा। इसके लिए किसी लेआउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। इस प्रक्रिया के सरल होने से लगभग 45 लाख निवासियों को उनके मकानों का मालिकाना हक और सुरक्षा मिलेगी।
13- 24×7 जीवंत और सुरक्षित शहर
दिल्ली को सभी के लिए समावेशी, सुरक्षित और 24 घंटे (24×7) जीवंत शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए विशेष कल्चरल सर्किट बनाए जाएंगे।
14- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नेट जीरो डेवलपमेंट
यमुना को साफ रखने और जल गुणवत्ता सुधारने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा। ऊर्जा-कुशल इमारतों और कम कार्बन वाली शहरी योजना के जरिए नेट जीरो विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। छतों पर सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर रीसाइक्लिंग और कचरे से संसाधन बनाने की पहलों को लागू किया जाएगा।
15- टेक्नोलॉजी से संचालित प्रशासन
पारदर्शी, कुशल और डेटा-आधारित शहरी नियोजन के लिए जीआईएस आधारित प्लानिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।
16- पार्क कनेक्टर्स और ग्रीन कवर का विस्तार
रीक्रिएशनल स्पेस तक लोगों के आसानी से जाने और यहां हरियाली बढ़ाने के लिए ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार होगा। अर्बन फॉरेस्ट (शहरी जंगल), बायोडायवर्सिटी पार्क और इकोलॉजिकल कॉरिडोर के माध्यम से दिल्ली के हरित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा।
17- मुख्य प्रशासनिक क्षेत्र का विकास
राजधानी के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को मजबूत किया जाएगा। कर्तव्य पथ का पुनरुद्धार कर उसे विश्वस्तरीय सार्वजनिक व सांस्कृतिक स्थल बनाया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 1.25 लाख वर्ग मीटर में युगे युगीन राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाएगा।
18- लो डेंसिटी वाले क्षेत्रों का नियोजित विकास
दिल्ली के सीमावर्ती गांवों और 23 अधिसूचित गांवों के करीब 150 वर्ग किलोमीटर के लो-डेंसिटी एरिया में सड़कों की कनेक्टिविटी के साथ आवासीय, मनोरंजक, जन-सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने वाला एक समान ढांचा लागू किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: दिल्ली मास्टर प्लान 2027 के तहत राजधानी का बदलेगा पूरा नक्शा, 40 लाख नए फ्लैट और मेट्रो नेटवर्क का होगा विस्तार
Stocks to Watch 21 August: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 21 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, लीडरशिप बदलाव और ब्लॉक डील्स के चलते कई दिग्गज शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे।
हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त के ट्रेडिंग सेशन के दौरान इन 13 प्रमुख शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी:
1- मणिपाल हेल्थ (Manipal Health Enterprises)
मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिर साल-दर-साल आधार पर 7.7% घटकर 231 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 250 करोड़ रुपये था। वैसे कंपनी का रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3091 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA 25.6% बढ़कर 736.5 करोड़ रुपये रहा जबकि EBITDA मार्जिन घटकर 23.8% रह गई। ये पिछले साल 26.2 फीसदी थी।
2- सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy)
सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को एक घरेलू स्वतंत्र बिजली उत्पादक/EPC प्लेयर से सोलर पीवी मॉडल्स की सप्लाई के लिए 190 करोड़ रुपये का कॉमर्शियल ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।
3- केआईएमएस (KIMS – Krishna Institute of Medical Sciences)
कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने हैदराबाद के गचीबोवली में 250 बिस्तरों वाले अरेते अस्पताल के विशेष संचालन और प्रबंधन (O&M) के लिए औरेविया हॉस्पिटल्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह शुरुआती समझौता 5 साल के लिए है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। केआईएमएस को अस्पताल के नेट रेवेन्यू का 9% शुल्क के रूप में मिलेगा।
4- रेलटेल (RailTel Corporation of India)
नवरत्न पीएसयू रेलटेल को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 164.79 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 60 महीनों के लिए किराए के आधार पर एमपीएलएस वीपीएन नेटवर्क स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करना है।
5- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV)
कंपनी ने जानकारी दी है कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से गुजरात के साणंद प्लांट और आसपास के सप्लायर फैसिलिटीज में आई मुश्किलें खत्म हो गई हैं और कामकाज चालू हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 35-40 करोड़ रुपये का नॉन मैटेरियरल नुकसान हुआ है, जबकि बीमा दावा 30 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पादन, संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।
6- लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels)
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इस प्रमुख कंपनी ने गुजरात के भरूच में नया होटल खोलकर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। ये गुजराज में कंपनी का 12वां एक्टिव होटल है। कंपनी के 20 और होटल पाइपलाइन में हैं। नए होटल का प्रबंधन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कार्नेशन होटल्स करेगी।
7- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
NCLT की बेंगलुरु पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और साइएंट (Cyient) के 50:50 हिस्सेदारी वाले डॉरमेंट जॉइंट वेंचर इन्फोटेक एचएएल लिमिटेड को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया मार्च 2024 में शुरू हुई थी और इस वेंचर के क्लोजर होने की वजह से एचएएल के रक्षा कार्यक्रमों या बैलेंस शीट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
8- टॉरेंट पावर (Torrent Power)
टॉरेंट पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरभ मशरूवाला ने 20 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 से विकास पोद्दार को नया सीएफओ नियुक्त किया है।
9- रैलिस इंडिया (Rallis India)
कंपनी ने बताया है कि उसके सीएफओ भास्कर स्वामीनाथन टाटा समूह की दूसरी कंपनी में शामिल होने के लिए 4 नवंबर 2026 से अपने पद से इस्तीफा देंगे। कंपनी उसी तारीख से श्रीधर राधाकृष्णन को नया सीएफओ नियुक्त करेगी।
10- एफएमसीजी शेयर (Adani Wilmar, Patanjali, Marico, Agro Tech)
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा उपभोक्ताओं को खुला खाद्य तेल न खरीदने की सलाह देने के बाद अडानी विल्मर, पतंजलि फूड्स, मैरिको और एग्रो टेक फूड्स के शेयर फोकस में रहेंगे। एफडीए ने मिलावट सहित दूसरे उल्लंघनों को देखते हुए खाद्य तेल क्षेत्र के लिए कंप्लायंस ऑर्डर भी जारी किया है।
11- निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance)
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बताया है कि बीमा नियामक IRDAI ने FY25 के लिए लागू एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए उसे चेतावनी दी है। इसके साथ ही 19 अगस्त 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए कंपनी के नए व्यावसायिक स्थान खोलने पर रोक लगा दी है।
12- अमागी मीडिया लैब्स (Amagi Media Labs)
क्लाउड-आधारित SaaS कंपनी अमागी मीडिया लैब्स के शेयर फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी ने गुरुवार को 600 करोड़ रुपये का ब्लॉक डील लॉन्च किया है। यह डील कंपनी की कुल इक्विटी का 5% रिप्रेजेंट करती है।
13- केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies)
केफिन टेक में एक बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली, जहां जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने 925 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 1400 करोड़ रुपये में 1.51 करोड़ शेयर (8.8% हिस्सेदारी) बेचे। इस डील में इंवेस्को म्यूचुअल फंड ने 400 करोड़ रुपये में 2.5% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मिराए एसेट MF (1.5%), कोटक महिंद्रा MF (1.2%) और एचएसबीसी MF (1%) ने भी खरीदारी की।
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अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।
बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।
31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा
DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।
सरकार ने तय की स्टॉक सीमा
भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।
आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे
सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा। इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।
चीनी महंगी होने की क्या वजह है?
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।
इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है।
क्या और बढ़ेंगे दाम ?
दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों (Gold Prices) में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। जून की शुरुआत के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के पार बना हुआ है। COMEX गोल्ड 19 अगस्त को $4,571.80 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि गुरुवार को इसमें मामूली 0.05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह $4,542.90 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।
घरेलू बाजार की बात करें तो शुक्रवार (14:58 IST) को घरेलू MCX पर सोने की हाजिर कीमत करीब 156571 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। वहीं 5 अक्टूबर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 158729 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार (19 अगस्त) को पीएम फिक्सिंग (PM Fixing) में LBMA स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,460.70 प्रति औंस दर्ज की गई थी।
अमेरिकी खजाने के एक फैसले से क्यों आई तेजी?
सोने की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे यूएस ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि की प्रतिभूतियों की बायबैक बढ़ाने के कदम ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया और अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर दिया। इससे सोने की कीमतों को पुश मिल गया।
अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम से 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड गिरकर क्रमशः 4.64 प्रतिशत और 5.18 प्रतिशत पर आ गई। इसके अलावा शुरुआती कारोबार में डॉलर में 0.76 फीसदी की गिरावट आई, जिससे सोने जैसे डॉलर डॉमिनेटेड असेट्स की डिमांड को मजबूत समर्थन मिला। बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक जैसे ही यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने के लिए माहौल अच्छा हो गया। बाजार ने इसे दीर्घकालिक ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी को रोकने और बॉन्ड मार्केट के लंबे सिरे पर लिक्विडिटी में सुधार के प्रयास के रूप में देखा। इसके बाद यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ, जिसने सोने के लिए एक बहुत ही अनुकूल स्थिति बनाई।
सिर्फ ट्रेजरी का फैसला नहीं, ये फैक्टर भी दे रहे सहारा
हालांकि, सोने में आई इस तेजी के पीछे सिर्फ अमेरिकी ट्रेजरी का ऐलान ही एकमात्र कारण नहीं है। वीटी मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, ट्रेजरी का ऐलान एक दिन की तेजी को एक्सप्लेन तो करता है, लेकिन सिर्फ यही एक फैक्टर नहीं है। रुचित ठाकुर के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी रुख और मौद्रिक नीति को लेकर जताई जा रही उम्मीदें, लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिरल अनिश्चितताएं और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही मांग जैसे फैक्टर भी इसे सपोर्ट कर रहे हैं।
क्या निवेशकों को इस भाव पर खरीदना चाहिए सोना?
सोने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद नए और पुराने निवेशकों के लिए विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। वीटी मार्केट्स के रुचित ठाकुर का सुझाव है कि ऊंचे स्तरों पर तेजी का पीछा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जो लोग पहले से सोने में निवेश कर चुके हैं, वो अपनी होल्डिंग को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं।
नए निवेशकों को एक बार में बड़ा दांव लगाने या तेज उछाल के तुरंत बाद अग्रेसिव इन्वेस्टमेंट करने की बजाय कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।
आगे क्या ट्रैक करें?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने की आगे की चाल तय करने के लिए निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व के संकेतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीक नजर रखनी होगी।
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Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 20 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग गए। सोना 4,300 के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे ज्यादा प्राइस है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी बताई जा रही है।
चांदी 10,000 रुपये के उछाल से 7 हफ्ते की उंचाई पर
20 अगस्त को चांदी में 10,000 रुपये की जोरदार तेजी आई। इससे इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह बीते सात हफ्तों में चांदी का सबसे ज्यादा भाव है। इससे पहले 3 जुलाई को चांदी की कीमतें इस लेवल पर थीं। लंबे समय बाद सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर से नरमी बुलियन को सपोर्ट
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोना गुरुवार को बीते दो महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी है।” उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में नरमी दिखी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर हल्की तेजी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।
बेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। उधर, ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस तनातनी की वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है।
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क्रूड में तेजी जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर
अगर लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।
Gold Price Prediction: घरेलू और वैश्विक बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में एक बार फिर रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। हालिया सत्रों में पीली धातु में 4% से अधिक का जोरदार उछाल आया है, जिससे इसके दाम दो महीने के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बाद सर्राफा बाजार में यह बड़ी तेजी दर्ज की गई है।
एशियाई कारोबार की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,500 प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोना तेजी के साथ ₹1,58,008 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा।
क्यों आई सोने में अचानक इतनी बड़ी तेजी?
सोने की कीमतों में अचानक आए इस बड़े उछाल के पीछे अमेरिका का एक बड़ा फैसला है। अमेरिकी वित्त विभाग ने लंबी अवधि (10 से 30 साल) वाले बॉन्ड बाजार को अतिरिक्त लिक्विडिटी सहायता देने के लिए बायबैक ऑपरेशंस का दायरा दोगुना करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर कमजोर हो गया।
चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने और बॉन्ड यील्ड गिरने से बिना ब्याज देने वाले एसेट जैसे सोने की मांग अचानक बढ़ गई।
MCX Gold Target: एक्सपर्ट्स से जानिए अब कहां तक जाएंगे दाम
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक तकनीकी सपोर्ट लेवल कायम हैं, तब तक सोने में यह तेजी जारी रहेगी।
चॉइस ब्रोकिंग के एक्सपर्ट आमिर माकडा के अनुसार, ‘तकनीकी चार्ट पर MCX गोल्ड अपने 20, 50 और 100 दिनों के मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है, जो शॉर्ट-टर्म में तेजी का संकेत देता है। इमीडिएट रेजिस्टेंस ₹1,59,250 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर यह इस स्तर को पार करता है, तो अगला टारगेट ₹1,60,000 होगा।
ऑगमेंट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चैनानी ने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने अपनी पुरानी रेंज ($4,340-$4,440) को तोड़ दिया है और $4,500 का टारगेट हासिल कर लिया है। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगला लक्ष्य $4,600 है, जो भारतीय बाजार (MCX) में करीब ₹1,62,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर के बराबर बैठता है।
तेजी के बीच ये है एक बड़ा रिस्क
सोने में तेजी के बीच निवेशकों को अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) के रुख पर ध्यान देने की जरूरत है। यूएस फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स से साफ हुआ है कि नीति निर्माता अभी भी महंगाई को लेकर चिंतित हैं।
अगर अमेरिका में महंगाई दर 2% के लक्ष्य तक नहीं आती है, तो फेड ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी कर सकता है। अगर आने वाले दिनों में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड में रिकवरी आ सकती है, जो सोने की इस रफ्तार पर ब्रेक लगा सकती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर गोल्ड पर दिखा है। 19 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,571.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हालांकि, 20 अगस्त को इसमें थोड़ी नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सवाल है कि लंबे समय बाद गोल्ड में आई तेजी पर निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड में आई तेजी
गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.64 पर आ गई है। 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.18 फीसदी पर आ गई है। इसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी गोल्ड को सपोर्ट मिला है।
कई देशों के केंद्रीय बैंक खरीद रहे हैं गोल्ड
बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, “बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने के लिए फेवरेबल है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।” हालांकि, गोल्ड में तेजी की वजह सिर्फ बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं है। सुरक्षित निवेश के लिए सोने में इनवेस्टमेंट बढ़ा है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोने में खरीदारी कर रहे हैं।
दिल्ली में गोल्ड की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर
20 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में गोल्ड में जोरदार तेजी दिखी। यह 4,300 रुपये के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह घरेलू बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे हाई लेवल है। चांदी में भी अच्छी खरीदारी से तेजी देखने को मिली।
निवेशकों को फिलहाल क्या करना चाहिए
वीटी मार्केट्स में मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी के गोल्ड के लिए सपोर्टिव रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सोने में तेजी के पीछे भागने में रिस्क है। इनवेस्टर्स सोने में अपना निवेश जारी रख सकते हैं।
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गिरावट पर गोल्ड में खरीदारी की सलाह
उन्होंने कहा कि नए निवेशक सोने में गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। कीमतें हाई रहने पर उन्हें निवेश करने से बचने की सलाह है। आगे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड, फेडरल रिजर्व के संकेतों और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।


