इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी और करीब 5 मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी। यह बेकाबू टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमेरिका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लॉन्च किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा। आइंस्टीन क्रेटर के पास टक्कर हुई, दूरबीन से भी देखना मुश्किल यह टक्कर चांद के ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा, ऑर्बिटर जारी करेंगे डेटा फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का ‘दानुरी’ ऑर्बिटर और नासा का ‘लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर’ (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे। चांद पर पहले से मौजूद है 190 टन कचरा इस टक्कर के बाद चांद पर इंसानों की छोड़ी गई या दुर्घटनाग्रस्त हुई चीजों की संख्या बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। इनका कुल वजन करीब 190 टन हो चुका है। सितंबर 1959 में सोवियत संघ का ‘लूना 2’ चांद की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट था। इसके अलावा नासा के अकेले अपोलो प्रोग्राम से जुड़ी 796 चीजें चांद पर मौजूद हैं। चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े। NASA और वैज्ञानिकों को इस टक्कर से क्या फायदा होगा? साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था। आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता। इस टक्कर से बने नए गड्ढे और उड़ी हुई धूल की परत का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि अरबों साल पहले चांद और हमारे सौर मंडल का निर्माण कैसे हुआ था। इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर 18वीं बार उड़ने को तैयार बूस्टर स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का निचला हिस्सा रीयूजेबल होता है। इसे बूस्टर कहते हैं और लैंडिंग करके धरती पर वापस आ जाता है। जिस जनवरी 2025 वाले मिशन का ऊपरी हिस्सा भटककर चांद से टकराया, उसी रॉकेट के निचले बूस्टर को 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किया जाएगा। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है स्पेस डैब्रिस और आइंस्टीन क्रेटर… इंसान द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट्स के छूटे हुए टुकड़े, निष्क्रिय सैटेलाइट्स और मलबे को स्पेस डैब्रिस कहा जाता है। वहीं चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक बड़ा गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 170 किलोमीटर है। इसे आइंस्टीन क्रेटर नाम दिया गया है। —————————————- ये खबर भी पढ़े… हजारों वॉट्सएप अकाउंट अचानक बंद, मैसेज आया- अंडर रीव्यू:बिना वार्निंग सभी फीचर्स ब्लॉक, कंपनी बोली- कभी-कभी गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में हजारों यूजर्स के अकाउंट 24 घंटे के लिए रीव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़े…
NPS Fund Manager: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा किसी न किसी पेंशन फंड मैनेजर के पास जाता है। वही आपके पैसे को इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश करता है।
अगर उसका प्रदर्शन कमजोर लगे, तो आप फंड मैनेजर बदल सकते हैं। लेकिन सिर्फ कुछ महीनों की खराब परफॉर्मेंस देखकर फैसला लेना सही नहीं है। इससे आपके रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ सकता है।
1. कब बदलना चाहिए फंड मैनेजर?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई फंड मैनेजर लगातार 3 से 5 साल तक अपने बेंचमार्क और दूसरे फंड्स से कमजोर प्रदर्शन करे, तभी बदलाव पर विचार करें।
मान लीजिए दो फंड मैनेजर हैं। एक ने पिछले 4 साल में हर साल औसतन 11% रिटर्न दिया। दूसरे ने सिर्फ 8%। अगर दोनों का जोखिम लगभग बराबर है, तो फंड बदलने की वजह बन सकती है। लेकिन अगर सिर्फ एक साल किसी फंड का रिटर्न कम रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
2. हर साल फंड बदलना क्यों गलत है?
शेयर बाजार हमेशा एक जैसा नहीं चलता। कभी तेजी आती है, कभी गिरावट। ऐसे में हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड के पीछे भागना नुकसान करा सकता है।
मान लीजिए इस साल फंड A सबसे आगे है। अगले साल फंड B आगे निकल जाए। अगर आप हर साल फंड बदलते रहेंगे, तो हो सकता है कि आप हमेशा देर से एंट्री करें और असली फायदा न मिले। इससे कंपाउंडिंग भी कमजोर पड़ सकती है।
3. सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न लें
फंड चुनते समय सिर्फ रिटर्न पर गौर करना अधूरी तस्वीर दिखा सकता है। यह भी देखिए कि फंड ने जोखिम कितना लिया। बाजार गिरने पर उसने नुकसान कितना रोका। उसका पोर्टफोलियो कितना मजबूत है। फंड मैनेजर की निवेश रणनीति कितनी अनुशासित है।
किसी फंड ने 12% रिटर्न दिया, लेकिन उसके लिए बहुत ज्यादा जोखिम लिया। और दूसरे ने 11% रिटर्न कम जोखिम में दिया, तो दूसरा विकल्प रिटायरमेंट के लिहाज से ज्यादा बेहतर हो सकता है।
4. NPS में कौन-कौन से फंड मैनेजर हैं?
फिलहाल NPS में 10 पेंशन फंड मैनेजर हैं।
- SBI Pension Funds
- LIC Pension Fund
- UTI Pension Fund
- HDFC Pension Fund Management
- ICICI Pension Fund Management
- Kotak Mahindra Pension Fund
- Aditya Birla Sun Life Pension Fund Management
- Tata Pension Fund Management
- Axis Pension Fund Management
- DSP Pension Fund Managers
5. Active Choice और Auto Choice में फर्क
अगर आपने Active Choice चुना है, तो यह तय करना आपकी जिम्मेदारी है कि पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और सरकारी बॉन्ड में कितना जाएगा। इसलिए समय-समय पर एसेट एलोकेशन और फंड मैनेजर, दोनों की समीक्षा करें।
अगर आपने Auto Choice चुना है, तो उम्र बढ़ने के साथ सिस्टम खुद एसेट एलोकेशन बदलता रहता है। ऐसे में आपको सिर्फ यह देखना है कि आपका फंड मैनेजर लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं।
ये गलतियां बिल्कुल न करें
- सिर्फ पिछले 1 साल का रिटर्न देखकर फंड न चुनें।
- हर साल या बार-बार फंड मैनेजर न बदलें।
- इक्विटी और डेट फंड के रिटर्न की सीधी तुलना न करें।
- सिर्फ ज्यादा रिटर्न के चक्कर में जोखिम को नजरअंदाज न करें।
- बाजार गिरते ही घबराकर फंड न बदलें।
NPS कोई एक-दो साल का निवेश नहीं है। यह 20-30 साल की योजना होती है। इसलिए धैर्य रखना सबसे जरूरी है। फंड मैनेजर तभी बदलें, जब लंबे समय तक उसका प्रदर्शन लगातार कमजोर रहे। तभी आपका रिटायरमेंट फंड बेहतर तरीके से बढ़ पाएगा।
NPS में अकाउंट कैसे खोलें?
18 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है। इसमें नौकरीपेशा, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और NRI भी निवेश कर सकते हैं।
आप NPS अकाउंट किसी भी बैंक, पोस्ट ऑफिस से जुड़े Point of Presence (PoP) या ऑनलाइन eNPS पोर्टल के जरिए खोल सकते हैं। अकाउंट खुलने के बाद आपको PRAN (Permanent Retirement Account Number) मिलता है। इसी नंबर के जरिए आप नियमित निवेश कर सकते हैं और अपना पेंशन फंड मैनेज कर सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
Tamil Nadu Budget 2026: तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार का पहला बजट (2026-27) विधानसभा में पेश कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली इस नई सरकार ने अपने पहले बजट के जरिए साफ संदेश दिया है युवा और Gen Z इस सरकार के एजेंडे के सबसे बड़े केंद्र बिंदु हैं। सिर्फ पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित रहने के बजाय 2026-27 का यह बजट शिक्षा में सुधार, डिजिटल पहुंच, रोजगार क्षमता, कौशल विकास और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है।
बुधवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री एन मैरी विल्सन ने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, खेल और रोजगार से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों की घोषणा की। इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार ने नीट (NEET) परीक्षा का विरोध दोहराते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि राज्य में मेडिकल प्रवेश को कक्षा 12वीं की पब्लिक परीक्षा के अंकों के आधार पर ही बहाल किया जाए।
स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए खोला खजाना
शिक्षा क्षेत्र को इस बजट में सबसे बड़ा आवंटन दिया गया है। सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 44527 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 8393 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है। पल्ली निरईवु थिटम योजना के तहत 2132 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 3734 सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष के लिए योजना को 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 10 हजार स्कूलों के लिए सुपर क्लीन, सुपर कैंपस अभियान के तहत पहले चरण में 139 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत रोजना की सफाई, साफ पेयजल, शौचालय रखरखाव और 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
पेरुंथलैवर कामराजर मॉडल स्कूल का ऐलान हुआ है। इनमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को आवासीय सुविधाएं, शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, आवास, पाठ्यपुस्तकें और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त दी जाएगी।
फ्री लैपटॉप, साइकिलें और इंटीग्रेटेड हॉस्टल
टीवीके सरकार ने छात्रों के कल्याण को कक्षाओं से आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। छात्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये की लागत से वेत्री लैपटॉप योजना शुरू की जा रही है। पुथिया पयनम, पुथिया वेगम योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा 11वीं के 5.3 लाख स्टूडेंट्स को मुफ्त साइकिलें दी जाएंगी। इन साइकिलों में सुरक्षा हेलमेट और वाटर बोतल भी लगी होगी। इस पर 277 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
राज्य में हॉस्टल व्यवस्था को सुधारने के लिए ‘तमिलनाडु स्टूडेंट हॉस्टल्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन’ (TNSHIC) का गठन किया जाएगा। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 3200 करोड़ रुपये की लागत से 200 इंटिग्रेटेड हॉस्टल बनाए जाएंगे। इनमें 1 लाख छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी। पाठ्यक्रम सुधार कार्यक्रम ‘कत्रलिल मुधलीदम तमिलनाडु’ के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा मदुरै में 300 वार्षिक सीटों की क्षमता वाला नया लॉ कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की गई है।
AI मिशन, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और फ्यूचर स्किल्स
प्रौद्योगिकी के महत्व को समझते हुए बजट में AI और टेक्नोलॉजी पर खास जोर दिया गया है। तमिलनाडु AI मिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, वर्चुअल रियलिटी और दूसरी इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘तमिलनाडु AI मिशन’ का गठन किया जाएगा। यह मिशन e-Sevai 2.0 के साथ मिलकर नागरिक सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाएगा। AI और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के लिए बजट में 398 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सरकार ने कहा है कि 2031 तक इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के 5 लाख छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी।
रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और स्पोर्ट्स पर जोर
शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। वेत्रीथिरन ट्रेनिंग स्कीम के तहत 13 लाख युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के मौके दिए जाएंगे। एसएससी, आरआरबी और आईबीपीएस (IBPS) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जिला रोजगार केंद्रों के माध्यम से कोचिंग कक्षाओं का संचालन होगा। इसके लिए 3.38 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। 90 करोड़ रुपये की लागत से 5 नए ITI स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, TN Spark कार्यक्रम का विस्तार 5,000 स्कूलों से बढ़ाकर 7,600 सरकारी स्कूलों तक किया जाएगा। खेलों और एथलेटिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए तमिलनाडु भर में 50 करोड़ रुपये के बजट के साथ 10 ओलंपिक सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे।
बजट में क्यों छाया रहा Gen Z और युवा वर्ग?
मौजूदा समय में पूरे देश में सरकारें Gen Z और युवाओं की आकांक्षाओं को साधने का प्रयास कर रही हैं। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएं, स्किल गैप, डिजिटल अवसर, AI तकनीक और उच्च शिक्षा जैसे मुद्दे सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में हैं। युवा मतदाता राजनीतिक नैरेटिव को दिशा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीएम विजय का यह पहला बजट युवाओं की इसी बदलती सोच और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
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NEET UG Counselling 2026: डॉक्टर बनकर देश के चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए आज अहम दिन है। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। मेडिकल काउंसिल कमेटी ने नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के पहले राउंड के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। नीट यूजी 2026 में सफल परीक्षार्थी एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
एमसीसी 15% एक्यूआई सीटों के लिए करेगा काउंसलिंग
एमसीसी केवल 15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ) की सीटों के लिए काउंसलिंग कराती है। इसके अलावा एम्स, जेआईपीएमईआर केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, ईएसआईसी, एफएमएस और अन्य भाग लेने वाले संस्थानों में प्रवेश भी इसी प्रक्रिया के माध्यम से होगा। ध्यान रहे, 85% स्टेट कोटा की सीटों के लिए अलग से संबंधित राज्य की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा, क्योंकि स्टेट काउंसलिंग स्वतंत्र रूप से आयोजित की जाती है।
राउंड-1 का पूरा शेड्यूल
रजिस्ट्रेशन शुरू : 5 अगस्त 2026 (दोपहर 1 बजे से)
रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख : 9 अगस्त 2026 (दोपहर 12 बजे तक)
फीस जमा करने की आखिरी तारीख : 9 अगस्त 2026 (दोपहर 3 बजे तक)
चॉइस फिलिंग : 6 अगस्त से 10 अगस्त 2026
चॉइस लॉकिंग : 10 अगस्त 2026 (शाम 4 बजे से रात 11:55 बजे तक)
सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया : 11 से 12 अगस्त 2026
राउंड-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट : 13 अगस्त 2026
अलॉट किए गए कॉलेज में रिपोर्टिंग : 14 से 18 अगस्त 2026
इंस्टीट्यूट द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन : 19 से 20 अगस्त 2026
राउंड-2 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू : 22 अगस्त 2026
क्या है फ्रीज-फ्लोट विकल्प?
इस साल काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक डिजिटल बनाया गया है ताकि छात्रों को बार-बार कॉलेज ना जाना पड़े।
फ्रीज-फ्लोट व्यवस्था
अगर छात्र सीट मिलने के बाद फ्रीज (Freeze) विकल्प चुनता है, तो उसे संबंधित कॉलेज जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वहीं, फ्लोट विकल्प चुनने वाले छात्र अगले राउंड में भाग ले सकेंगे और दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन करा सकेंगे। ऐसी स्थिति में तीसरे राउंड तक सीट बरकरार रहने पर ही कॉलेज में फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी।
ऑनलाइन छोड़ सकेंगे सीट
अब योग्य छात्र आवंटित सीट को एमसीसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन छोड़ सकेंगे। इसके लिए कॉलेज जाकर अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।
अन्य नए सुधार
ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
एनआरआई एडमिशन प्रोसेस का डिजिटाइजेशन
PwBD छात्रों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं
साइबर सिक्योरिटी को मजबूत किया गया
शिकायत निवारण प्रणाली को बेहतर बनाया गया
रजिस्ट्रेशन से पहले तैयार रखें ये डॉक्यूमेंट
रजिस्ट्रेशन करने से पहले छात्र नीचे बताए गए डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें:
- नीट यूजी 2026 स्कोरकार्ड
- नीट यूजी एडमिट कार्ड
- कक्षा 10 का सर्टिफिकेट (डेट ऑफ बर्थ प्रूफ)
- 12वीं कक्षा की मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट
- सरकारी फोटो पहचान पत्र (आधार, पैन, पासपोर्ट आदि)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- SC/ST/OBC-NCL/EWS सर्टिफिकेट (अगर लागू हो)
- PwBD सर्टिफिकेट (अगर लागू हो)
- डोमिसाइल सर्टिफिकेट (जहां आवश्यक हो)
- NRI कोटा के लिए पहचान संबंधी डॉक्यूमेंट
- एमसीसी इन्फॉर्मेशन बुलेटिन में मांगे गए अन्य डॉक्यूमेंट्स
कैसे मिलेगी सीट?
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद छात्रों को काउंसलिंग फीस जमा करनी होगी और अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स को चुनकर उन्हें लॉक करना होगा। बता दें सीट अलॉटमेंट निम्न आधारों पर किया जाएगा:
- नीट यूजी 2026 रैंक
- आरक्षण कैटेगरी
- भरी गई पसंद
- उपलब्ध सीटें

नीरज चोपड़ा ने जब टोक्यो 2021 में स्वर्ण पदक जीता था तो ऐसा लग रहा था कि अब तो वह हर टूर्नामेंट में सोना ही सोना लूटेंगे। लेकिन खेल में हर दिन एक जैसा नहीं होता। यह बताने के लिए काफी है कि नीरज चोपड़ा को 3 साल हो गए हैं किसी भी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीते हुए।
नीरज चोपड़ा को पेरिस ओलंपिक में पाकिस्तान के अरशद नदीम के हाथों स्वर्ण पदक खोना पड़ा तो विश्व चैंपियनशिप में ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स के खिलाफ। राष्ट्रमंडल खेल में वह श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे से स्वर्ण पदक खो बैठे। वह 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।
नीरज ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन चोट के कारण 2022 के सत्र में हिस्सा नहीं ले सके थे। पिछले साल सितंबर में विश्व चैंपियनशिप से ठीक पहले उन्हें कमर के निचले हिस्से में चोट लगी थी और राष्ट्रमंडल खेलों से पहले उन्होंने केवल एक प्रतियोगिता में भाग लिया था।
फिटनेस से जुड़ी परेशानियों से करीब एक साल तक जूझने के बाद भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने कहा कि पिछले 10 महीने उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे और उन्होंने ऐसे दौर का सामना किया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।वह मुख्य रूप से जांघ की मांसपेशियों की चोट और कुछ अन्य शारीरिक परेशानियों से प्रभावित रहे थे।
नीरज ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर राष्ट्रमंडल खेलों के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘‘कुछ भाले लंबी दूरी तय करते हैं और कुछ पल पूरी यात्रा का भार अपने साथ लेकर आते हैं। पिछले 10 महीने ने मेरी ऐसी परीक्षा ली, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।’’उन्होंने कहा, ‘‘कई चोटों से उबरना, अपने शरीर को दोबारा मजबूत बनाना, फिर से लय हासिल करना और उस समय धैर्य रखना जब मैं केवल प्रतियोगिता में उतरना चाहता था। मैं हर दिन अभ्यास कर रहा था, लेकिन यह भी नहीं पता था कि इस साल मुझे खेलने का मौका मिलेगा या नहीं।’’
पूर्व विश्व चैंपियन नीरज ने अपनी वापसी में मदद करने वाले सहयोगी दल के प्रति आभार जताते हुए कहा, ‘‘इस स्तर पर दोबारा प्रतिस्पर्धा करना अच्छा लग रहा है। यह सब कुछ अकेले संभव नहीं था। मैं उन लोगों का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा विश्वास बनाए रखा।’

उन्होंने अपने फिजियो ईशान मारवाहा और कोच जय चौधरी का विशेष रूप से धन्यवाद किया।नीरज ने कहा, ‘ईशान जी चोट से उबरने के दौरान हर कदम पर मेरे साथ रहे और मुझे फिर से वह करने में मदद की, जिसे मैं सबसे ज्यादा पसंद करता हूं। मेरे कोच जय चौधरी उस समय से मेरे साथ हैं, जब मैंने पहली बार भाला उठाया था।’उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा परिवार हर परिस्थिति में मेरे साथ मजबूती से खड़ा रहा। सत्र अभी जारी है और मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूं।’’
सत्तार रज्जाक ने 1956 में बेंगलुरु में टेलर की दुकान खोली थी। बाद में इरफान रज्जाक सहित उनके तीन बेटे भी दुकान में उनकी मदद करने लगे। बाद में परिवार खासकर इरफान ने प्रॉपर्टी के बिजनेस में हाथ आजमाने का फैसला लिया। यह बात 1980 के दशक की है। तब बेंगलुरु शहर का दायरा बढ़ रहा था। प्रॉपर्टी का धंधा जोर पकड़ रहा था। परिवार ने 1986 में प्रेस्टीज एस्टेट्स एंड कंस्ट्रक्शंस नाम से कंपनी शुरू की।
40000 रुपये से रियल एस्टेट बिजनेस की शुरुआत
Prestige Estates and Constructions की शुरुआत सिर्फ 40,000 रुपये की शुरुआती पूंजी से हुई थी। इसका पहला प्रोजेक्ट 10,000 वर्ग फीट की एक ऑफिस ब्लिडिंग था। जैसे-जैसे बेंगलुरु शहर की सीमाएं बढ़ती गई, वैसे-वैसे प्रेस्टीज का कारोबार बढ़ता गया। आज इस कंपनी का नाम कई प्रतिष्ठित और बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है। इनमें Forum Mall, UB City और Kingfisher Towers शामिल हैं।
देश के कई बड़े शहरों में कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्टस
Prestige Estates Projects ने 2010 में अपना आईपीओ पेश किया। कंपनी ने इश्यू से करीब 1,200 करोड़ रुपये जुटाए। इस पैसे से कंपनी ने नए बाजारों में अपना कारोबार फैलाया। दक्षिण भारत के रियल एस्टेट मार्केट में कंपनी ने अपनी मजबूत पैठ बनाई। इनमें हैदराबाद, चेन्नई, कोच्चि जैसे शहर शामिल थे। बाद में कंपनी गोवा, पुणे और मुंबई के बाजार में दाखिल हुई। अब तक दिल्ली-एनसीआर में भी कंपनी आ चुकी है।
अगस्त में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 70000 करोड़ रुपये
अगस्त 2026 में प्रेस्टीज एस्टेट प्रोजेक्ट्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 70,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। यह कंपनी आज रेजिडेंशियल, कमर्शियल, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट्स में मौजूद है। देश के कई बड़े शहरों में कंपनी प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुकी है। आज देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों की लिस्ट में प्रेस्टीज का नाम शामिल है।
कंपनी के एमडी इरफान रज्जाक का नेटवर्थ करीब 1.5 अरब डॉलर
इरफान रज्जाक कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। फॉर्ब्स बिलियनेयर्स लिस्ट 2026 के मुताबिक, उनका नेटवर्थ करीब 1.5 अरब डॉलर का है। कंपनी के कामकाज से परिवार के कई सदस्य करीबी रूप से जुड़े हैं। रज्जाक परिवार की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के कई सदस्य आज कंपनी में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
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शेयर ने पांच साल में निवेशकों का पैसा चार गुना किया
प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स का शेयर का प्राइस 5 अगस्त को 1:30 बजे 0.70 फीसदी चढ़कर 1,604 रुपये चल रहा था। बीते पांच साल में यह शेयर 345 फीसदी चढ़ा है। इसका मतलब है कि इस शेयर ने पांच साल में निवेशकों का पैसा चार गुना से ज्यादा कर दिया है।

Sales of India’s 10 highest-selling passenger vehicles reached 2,00,868 units in July 2026, up 37.55 percent from the 1,46,029 units recorded a in the year-ago period. Last month’s sales figures highlight Maruti Suzuki’s strong hold, with six models featuring among the top 10 bestsellers. Tata Motors was the only other brand with more than one model on the list, while Hyundai and Mahindra had one offering each. Demand remained strong across the board, with all but one model registering double-digit year-on-year growth.
| Rank | Model | July 2026 sales (units) | July 2025 sales (units) | YoY growth (percent) |
| 1 | Maruti Dzire | 23,791 | 20,895 | 13.86 |
| 2 | Maruti Wagon R | 23,338 | 14,710 | 58.65 |
| 3 | Maruti Ertiga | 21,606 | 16,604 | 30.13 |
| 4 | Maruti Swift | 21,538 | 14,190 | 51.78 |
| 5 | Tata Punch, Punch EV | 21,313 | 10,785 | 97.62 |
| 6 | Maruti Fronx | 19,473 | 12,872 | 51.28 |
| 7 | Maruti Baleno | 18,241 | 12,503 | 45.89 |
| 8 | Hyundai Creta, Creta Electric | 18,088 | 16,898 | 7.04 |
| 9 | Tata Nexon, Nexon EV | 17,471 | 12,825 | 36.23 |
| 10 | Mahindra Scorpio, Scorpio Classic | 16,009 | 13,747 | 16.45 |
| Total | 2,00,868 | 1,46,029 | 37.55 |
1. Maruti Dzire
23,791 units
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The Maruti Dzire was India’s bestselling passenger vehicle in July, with sales of 23,791 units, up 13.86 percent from 20,895 units in July 2025. It was also the only sedan to feature among the country’s 10 bestselling models and contributed 11.84 percent of the combined sales of the top 10.
2. Maruti Wagon R
23,338 units
With sales of 23,338 units, the Maruti Wagon R finished second. The hatchback recorded a strong 58.65 percent year-on-year growth, selling 8,628 more units than in July last year. It was also one of the three hatchbacks to feature in the top 10 list, all of which are from Maruti Suzuki. Another highlight of the Wagon R is that it is also available in a flex-fuel version compatible with E85 fuel, an option that none of the other models on this list offer.
3. Maruti Ertiga
21,606 units

The Maruti Ertiga ranked third with 21,606 units sold, registering 30.13 percent year-on-year growth. Notably, it is the only MPV on the list and managed to secure a place among the country’s three bestselling passenger vehicles.
4. Maruti Swift
21,538 units
Coming in fourth was the Maruti Swift, with sales of 21,538 units. The hatchback recorded a healthy 51.78 percent year-on-year growth and was the second Maruti Suzuki hatchback to feature in the country’s top 10 bestselling models.
5. Tata Punch, Punch EV
21,313 units

Ranking fifth was the Tata Punch and Punch EV, which together sold 21,313 units. Their combined sales were up 97.62 percent year-on-year, nearly doubling from the same month last year. Compared to other models on this list, the sub-compact SUV registered the highest YoY growth. The Punch also recently crossed the 8 lakh sales mark.
6. Maruti Fronx
19,473 units
Selling 19,473 units, the Maruti Fronx secured the sixth spot, registering a 51.28 percent year-on-year growth. It is also Maruti Suzuki’s highest-selling model retailed through the brand’s premium Nexa dealership network.
7. Maruti Baleno
18,241 units

The Maruti Baleno secured the seventh position with 18,241 units, recording a 45.89 percent increase over the same month last year. It rounded off Maruti’s six-model presence in the top 10 and was also the third hatchback on the list. Like the Fronx, the hatchback is retailed through Nexa showrooms.
8. Hyundai Creta, Creta Electric
18,088 units
Next, the Hyundai Creta and Creta Electric together secured the eighth spot with 18,088 units, registering a 7.04 percent year-on-year growth, the lowest among the top 10 models. Recently, Hyundai introduced an assured buyback programme for the Creta Electric, offering a 60 percent buyback value after three years or 45,000km, whichever comes first (terms and conditions apply). The electric SUV is also available with a Battery-as-a-Service (BaaS) option, allowing buyers to lower the upfront purchase cost.
9. Tata Nexon, Nexon EV
17,471 units

The ninth position went to the Tata Nexon and Nexon EV, which together sold 17,471 units in July 2026, recording 36.23 percent year-on-year growth. After the Fronx, the Nexon is the only compact SUV to feature on this list.
10. Mahindra Scorpio, Scorpio Classic
16,009 units
Rounding off the top 10 were the Mahindra Scorpio N and Scorpio Classic with combined sales of 16,009 units, up 16.45 percent over the same month last year. Mahindra rolled out the 2026 update for the Scorpio N just today.
Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।
उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।
भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध
महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।
महतो ने अपना अनशन तोड़ा
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”
इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”
महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।
महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।
NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।
उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।
झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।
इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

गुजरात पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है, जिसके तहत विभिन्न संवर्गों (कैडर) की लिखित परीक्षा की तारीख तय कर दी गई है। यह परीक्षा 23 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित की जाएगी।
परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवार 17 अगस्त को दोपहर 2:00 बजे से ओजस (OJAS) की आधिकारिक वेबसाइट से अपने कॉल लेटर डाउनलोड कर सकेंगे।
इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से पुलिस विभाग में अलग-अलग तकनीकी और अन्य संवर्गों के पदों को भरा जाएगा। इसमें पुलिस सब-इंस्पेक्टर (वायरलेस) के 172 पद, टेक्निकल ऑपरेटर के 698 पद, पुलिस सब-इंस्पेक्टर (मोटर ट्रांसपोर्ट) के 35 पद तथा हेड कांस्टेबल ड्राइवर मैकेनिक ग्रेड-1 के 45 पद शामिल हैं।
संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं के लिए आवेदन करने वाले समान (कॉमन) अभ्यर्थी एक ही केंद्र पर परीक्षा दे सकेंगे। भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसे कॉमन उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी गई है। जिन अभ्यर्थियों का नाम इस सूची में शामिल नहीं है, वे 10 अगस्त को शाम 5:00 बजे तक अपना अभ्यावेदन (रिफ्रेशमेंट/रिव्यू) बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

After years on the sidelines, Audi India is finally in attack mode. The next 12 months will see a barrage of all-new metal. First comes the third-generation Q3 this month, followed by the A5 in February 2027 and then the recently unveiled Q9 flagship SUV by the second half of 2027. “Three models in less than 12 months’ time,” confirms Balbir Singh Dhillon, head of Audi India.
The crucial detail is not the cadence but the sourcing. These will not be costly completely built-up (CBU) imports but will be assembled at the Skoda Auto Volkswagen Group plant in Chhatrapati Sambhajinagar. Model-to-model replacement, as Dhillon points out, needs little fresh capital because the heavy lifting was done years ago. “To be successful in India, you have to make in India,” he says. “Irrespective of any FTA, we will still make in India. That will remain the core strategy.”
Let’s take a close look at what to expect from each model:
Audi Q3
Launch: August 2026, estimated price: Rs 50 lakh

A big leap over the second-gen model in tech and styling, the third-gen Q3 was revealed last June. It is available in petrol, diesel and plug-in hybrid options in overseas markets, but in India, it’ll have a 204hp, 2.0 turbo-petrol paired with a 7-speed dual-clutch and standard Quattro all-wheel drive. The AWD will give it an edge over the BMW X1 and Mercedes-Benz GLA. Expected in both SUV and Sportback body styles, the Q3 will ride on 18-inch alloys and should get a spare under the boot floor. Kit is expected to include an 11.9-inch digital driver’s display, a 12.8-inch touchscreen, three-zone auto AC and a large sunroof.
Audi A5
Launch: February 2027, estimated price: Rs 60 lakh

Revealed in 2024 and updated with hybrid powertrains last year, the A5 will replace the ageing A4 in Audi India’s line-up. Based on the new Premium Platform Combustion (PPC) architecture, it is larger than the A4 and shares its high-tech interior with newer Audis like the Q6 e-tron, including an optional 10.9-inch passenger-side touchscreen display. India is expected to get the same 204hp, 2.0 turbo-petrol engine and 7-speed dual-clutch transmission as the Q3, though only in front-wheel-drive form. While overseas markets also get a 265hp Quattro variant, it isn’t expected for India.
Audi Q9
Launch: H2 2027, estimated price: Rs 1.40 crore-1.50 crore

The Q9 sits above the Q7 and Q8, at the very top of the range and is Audi’s new flagship. It’s also the first time Audi has used the ‘9’ designation, and with the A8 gone, this three-row giant is now the standard-bearer for the brand. At more than 5.3 meters in length, this isn’t a stretched Q7; it’s a class-size jump that finally gives Audi a genuine rival to the Mercedes-Benz GLS and BMW X7, a fight it has sat out for far too long. It will get a sole engine option in India: a 3.0-litre V6 petrol producing 367hp and 550Nm, driving all four wheels through an 8-speed automatic. Sadly, there will be no diesel engine option for India.
Network expansion to compliment new launches
Hardware alone will not do it. The retail network is being rebuilt in parallel. “Today we have 29 showrooms. By the end of next year, we’ll be at 40,” says Dhillon, with virtually every existing outlet currently torn up for conversion to Audi’s global ‘progressive’ showroom format. The new locations alone, he reckons, will contribute a quarter of the planned growth. Add a thriving Audi Approved Plus used-car operation, which now sells one pre-owned car for every new one and sits on a database of 20,000 pre-owned buyers ripe for upgrade, and the machinery for a volume push is in place.
The stated ambition is bold. “Today we are at about 8, 9 percent market share. I want to double it to maybe reach 18 to 20 percent in the next three to five years,” says Dhillon. In volume terms, that means more than doubling sales to cross 10,000 units within three years, outpacing the luxury market that is itself expected to grow.
For the first time in years, Audi India has a genuine arsenal: a fresh Q range from Q3 to Q9, a striking new sedan, a rebuilt network and a loyal customer base waiting to be rewarded. There will still be gaps in the product lineup, but the intent is there, and this opening salvo is just the start of an offensive built to sustain itself, with future products already being hatched, many of them aimed squarely at those very holes in the line-up. 2027 promises to be a turning point. It’s game on for Audi.

