IND vs ENG: ‘अगला नंबर हमारा हो सकता है’ गौतम गंभीर और टीम के माहौल पर अश्विन ने दिया बड़ा बयान

भारतीय टीम इस समय 5 मैचों की टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड दौरे पर है। पहला मुकाबला बारिश में रद्द होने के बाद दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 4 विकेट से मात दी है। इस जीत के साथ इंग्लैंड 5 मैचों की टी20 सीरीज में 1-0 की आगे है। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपना डेब्यू किया। वहीं फैंस पिछले काफी समय से वैभव के डेब्यू की मांग कर रहे थे। वहीं वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू और संजू सैमसन को बाहर करने पर भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपना रिएक्शन दिया है।

भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में संजू सैमसन को मौका नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि, टीम चयन केवल प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए और यह नहीं लगना चाहिए कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का असर फैसलों पर पड़ रहा है।

वैभव ने किया डेब्यू

आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन मैचों में कम रन बनाने के बाद संजू सैमसन को मैनचेस्टर टी20 की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को पहली बार भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला, जिसका क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय से इंतजार था। वहीं वैभव अपने डेब्यू मुकाबले में सिर्फ 14 रन ही बना सके और भारत को इस मैच में इंग्लैंड के हाथों चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। अब सीरीज का तीसरा मुकाबला 7 जुलाई, मंगलवार को खेला जाएगा। भारत सीरीज में वापसी करने की कोशिश करेगा, वहीं इंग्लैंड अपनी बढ़त और मजबूत करना चाहेगा।

संजू के निकाले जाने के फैसले से हुए हैरान

अपने YouTube चैनल ऐश की बात पर बात करते हुए रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि संजू सैमसन को इतनी जल्दी टीम से बाहर किया जाना उन्हें समझ नहीं आया। उन्होंने याद दिलाया कि इसी साल टी20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के लिए सैमसन को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया था। अश्विन ने कहा, “अभी मैं काफी परेशान हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि संजू सैमसन को इतनी जल्दी टीम से बाहर क्यों कर दिया गया। अब संजू क्या सोच रहे होंगे? जब वह नेट्स में अभ्यास करने जाएंगे तो उनके मन में कितनी प्रेरणा होगी?” उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि भारत को संजू सैमसन को नंबर-3 पर बल्लेबाजी कराने के ऑप्शन पर विचार करना चाहिए।

संजू को तीसरे नंबर पर बैटिंग करना चाहिए

अश्विन ने कहा, “अभी टीम के टॉप ऑर्डर में पहले से ही तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं—अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन। ऐसे में मुझे लगता है कि अब संजू सैमसन को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए जरूर विचार किया जाएगा। मैं पूरे भरोसे के साथ यह कह रहा हूं। कोचिंग स्टाफ और गौतम गंभीर समेत सभी जानते हैं कि संजू के साथ जो हुआ, वह सही नहीं था। अब उन्हें इस स्थिति को किसी न किसी तरह संभालना होगा।” उन्होंने आगे कहा, ‘कप्तान सूर्यकुमार यादव के बाद अब संजू भी बाहर हो गए, ऐसे में सभी खिलाड़ियों को लग सकता है कि अगला नंबर उनका होने वाला है। ये टीम के लिए अच्छा नहीं है।’

रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि टीम चुनते समय कई बार मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन जो खिलाड़ी लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, उन्हें थोड़ा ज्यादा भरोसा और मौके मिलने चाहिए।

राम मंदिर ट्रस्ट बैठक Breaking: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, इनकी जगह बजरंग बागड़ा बनाए जाएंगे महासचिव, कौन हैं ये?

Ram Mandir Chadawa Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उठे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राम मंदिर में चंदा चोरी मामले में विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट की बैठक में स्वीकार कर लिया गया है। उनके स्थान पर बजरंग बागड़ा को नया महासचिव बनाए जाने की तैयारी है। फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है, जिसमें इस बदलाव पर अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

मीटिंग में लिए गए फैसले पर जल्दी ही आधिकारिक बयान जारी होने की उम्मीद है।अहम बैठक से ऐन पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह इस घटना से बहुत आहत हैं।

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पाप में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे। राम जन्मभूमि परिसर के अंदर अतिथिगृह में चल रही इस बैठक में मंदिर से चढ़ावा की कथित चोरी की जांच और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा के इस्तीफे के मुद्दों पर अहम चर्चा होने हो रही है।

भारत की विकास की सफलताओं से प्रेरणा ले रहा है इंडोनेशिया, पीएम मोदी के दौरे से दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6-8 जुलाई 2026 को होने वाली इंडोनेशिया यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों की साझेदारी पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़ रही है। आज इंडोनेशिया भारत को न केवल एक रणनीतिक साझेदार के रूप में, बल्कि तकनीक, नीतिगत विचारों और विकास समाधानों के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में भी देख रहा है। खाद्य सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस से लेकर स्वास्थ्य सेवा, कृषि और रक्षा तक, भारत की सफल सार्वजनिक नीति मॉडल इंडोनेशिया की अपनी विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रोल मॉडल बन रहे हैं।

भारत के डिजिटल भुगतान बना इंडोनेशिया का रोल मॉडल

इंडोनेशिया डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है। प्रस्तावित UPI-QRIS लिंकेज से दोनों देशों के यात्रियों और व्यवसायों के लिए बिना किसी रुकावट के सीमा-पार भुगतान संभव हो सकेगा। इस पहल से पर्यटन, व्यापार और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही लेनदेन तेज, सस्ता और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। इंडोनेशिया में व्यापार या निवेश करने वाले भारतीय व्यवसायों और हर साल बाली व इंडोनेशिया के अन्य स्थलों पर जाने वाले लगभग 17 लाख भारतीय पर्यटकों के लिए, एक लाइव UPI-QRIS कॉरिडोर क्रांतिकारी साबित होगा।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी सहयोग के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (ION) भारत के ONDC मॉडल से प्रेरित है और इसका उद्देश्य इंडोनेशिया में 65 मिलियन से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक अधिक खुला और समावेशी डिजिटल मार्केटप्लेस बनाना है। Beckn 2.0 ओपन प्रोटोकॉल पर आधारित ION का पहला लाइव लेनदेन 7 जुलाई को मोदी-प्राबोवो शिखर सम्मेलन के दौरान होने की उम्मीद है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय मॉडल को अपनाने की तैयारी में इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के साथ भारत की डिजिटल साझेदारी अब सफल मॉडलों को साझा करने से आगे बढ़कर देश के अगली पीढ़ी के डिजिटल बैकबोन (बुनियादी ढांचे) के निर्माण में मदद करने की दिशा में बढ़ रही है। इंडोनेशिया की महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल नुसंतारा’ पहल का उद्देश्य एक एकीकृत और इंटरऑपरेबल राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, और इस यात्रा में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रही है।

आधार, UPI, डिजिलॉकर, ई-KYC और ONDC की सफलता का आधार बनने वाले भारतीय डिजिटल समाधान अब इंडोनेशिया के अपने डिजिटल बदलाव में भी प्रासंगिक साबित हो रहे हैं। यह बदलाव टेक्नोलॉजी अपनाने से आगे बढ़कर गहरे संस्थागत सहयोग की ओर है, जिसमें भारतीय कंपनियाँ सुरक्षित और बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का अपना अनुभव साझा कर रही हैं। सहयोग का दायरा वित्तीय बाज़ारों तक भी बढ़ रहा है। दोनों पक्ष AI-आधारित बाज़ार निगरानी, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी-आधारित कैपिटल मार्केट सुधारों में भारत की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी के ज़रिए अपने स्टॉक मार्केट को आधुनिक बनाने का भारत का अनुभव इंडोनेशिया के साथ सहयोग के नए रास्ते खोल रहा है।

इंडोनेशिया का विज़न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र में डिजिटल समाधानों का उत्पादक और निर्यातक बनने की बड़ी सोच रखता है। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत का ओपन, समावेशी और संप्रभु डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का दशकों पुराना अनुभव बहुत काम का साबित हो रहा है। इंडोनेशिया के कई प्रतिनिधिमंडलों ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण योजनाओं, जैसे कि हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), चावल फोर्टिफिकेशन योजना, उर्वरक सब्सिडी सुधार, AGRISTACK आदि से सीखने के लिए भारत का दौरा किया है।

भारत की समाज कल्याण की योजनाओं और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए तैयार इंडोनेशिया

इंडोनेशिया का महत्वाकांक्षी ‘मुफ़्त पौष्टिक भोजन कार्यक्रम’ भारत की ‘मिड-डे मील’ (PM POSHAN) योजना से प्रेरित है। इसी तरह, उनकी ‘रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव्स’ पहल ‘जन औषधि’ मॉडल के ज़रिए सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए भारत के साथ सहयोग की संभावनाएँ तलाश रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर हो सकेगी। यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ रही है। इंडोनेशिया रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के मामलों में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत का अनुभव लंबे समय तक सहयोग के नए अवसर पैदा कर रहा है।

ये सभी पहल मिलकर एक बड़े ट्रेंड को दर्शाती हैं। भारत की विकास यात्रा अब न केवल अपने नागरिकों को फ़ायदा पहुँचा रही है, बल्कि मित्र देशों के लिए भी एक रोल मॉडल के तौर पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान, ज्ञान-साझेदारी का यह बढ़ता हुआ दायरा द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मज़बूत स्तंभों में से एक के रूप में उभर रहा है, जिससे इनोवेशन, आर्थिक विकास और लंबे समय तक रणनीतिक सहयोग के अवसर पैदा हो रहे हैं।

Agniveer Bharti 2026: अग्निवीरों को मिल सकती है बड़ी राहत! 25% नहीं, अब 50% से 75% तक को स्थायी नौकरी देने की तैयारी

Agniveer Bharti 2026: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि इस साल पूरी होने वाली है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मौजूदा 25% सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना 75% तक और सेना तथा वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बड़ा बदलाव जल्द ही संभव है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के केवल 25% अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब तीनों सेनाएं इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच चर्चा के चरण में है। सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या हो सकता है नया प्रस्ताव?

  • भारतीय नौसेना लगभग 75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की सिफारिश कर सकती हैं।
  • चार वर्षों की सेवा के दौरान अग्निवीर आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और फील्ड ऑपरेशन का अनुभव हासिल करते हैं।
  • सैन्य योजनाकारों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को अधिक संख्या में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।

स्पेशल यूनिटों में ज्यादा मौका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कुल रिटेंशन सीमा नहीं भी बढ़ती है, तब भी कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स जैसे सेना की नई भैरव बटालियन में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अधिक रखी जा सकती है,। जबकि अन्य यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की तैनाती जारी रहेगी। फिलहाल अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

भर्ती भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ट्रेनिंग के दौरान करीब 70,000 अग्निवीरों ने सेना में हिस्सा लिया। अगले भर्ती में लगभग 90,000 पदों पर भर्तियां निकाली जा सकती हैं। इसके अलावा सेना अगले दो वर्षों में करीब 1.8 लाख कर्मियों की कमी को भी अग्निवीर भर्ती के जरिए पूरा करने की योजना बना रही है। अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विचाराधीन प्रस्ताव है।

सेवा निधि पैकेज क्या है और कितना मिलता है? (Seva Nidhi Package)

4 साल की सेवा पूरी होने के बाद, जो 75% अग्निवीर बाहर आएंगे (या जो परमानेंट भी होंगे), उन्हें एकमुश्त सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। यह फंड इस तरह तैयार होता है:-

  • अग्निवीर का कुल 4 साल का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • सरकार का बराबर का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • कुल जमा राशि (ब्याज सहित): लगभग ₹11.71 लाख

सबसे बड़ा फायदा: यह ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Income Tax Free) होता है। इस पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।

अतिरिक्त भत्ते (Allowances): इस फिक्स सैलरी के अलावा अग्निवीरों को उनकी पोस्टिंग के हिसाब से रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता (Risk & Hardship Allowance), राशन भत्ता, यूनिफॉर्म भत्ता और यात्रा भत्ता (Travel Allowance) भी मिलता है।

परमानेंट होने पर मिलने वाले फायदे (Permanent Salary & Benefits)

चार साल पूरे होने के बाद, बैच के 25% अग्निवीरों (जिसके बढ़ने की संभावना पर सेना विचार कर रही है) को भारतीय सेना के रेगुलर कैडर में शामिल किया जाएगा। परमानेंट होने के बाद उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:-

नियमित सैलरी और रैंक: परमानेंट होते ही वे भारतीय सेना के फुल-टाइम सैनिक बन जाएंगे। उनका पे-स्केल (Pay Scale) रेगुलर सैनिकों जैसा हो जाएगा, जिसमें बेसिक पे, डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य सभी मिलिट्री अलाउंस शामिल होंगे।

पेंशन का अधिकार (Pension Benefits): 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान पेंशन नहीं मिलती। लेकिन परमानेंट कैडर में चुने जाने के बाद, जब वे अपनी अगली 15 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, तो वे पूरी लाइफटाइम पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे।

मेडिकल और कैंटीन की सुविधा: परमानेंट होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को ECHS (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) के तहत आजीवन मुफ्त इलाज और CSD कैंटीन की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोशन और सर्विस: वे सेना में नियमित रूप से प्रमोशन (जैसे लांस नायक, नायक, हवलदार, जेसीओ) पा सकेंगे और उनके पास आगे अधिकारी (Officer) बनने के लिए विभागीय परीक्षाएं देने का मौका भी होगा।

अन्य लाभ (Other Security Benefits)

4 साल की सर्विस के दौरान सभी अग्निवीरों को ये सुरक्षा कवर भी दिए जाते हैं:-

लाइफ इंश्योरेंस: ₹48 लाख का गैर-अंशदायी (Non-contributory) जीवन बीमा कवर।

शहादत पर मुआवजा: ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर परिवार को ₹44 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia), बचे हुए कार्यकाल की पूरी सैलरी और सेवा निधि पैकेज समेत कुल ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती है।

दिव्यांगता मुआवजा (Disability): सेवा के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने पर ₹44 लाख (100% दिव्यांगता पर), ₹25 लाख (75% पर) और ₹15 लाख (50% दिव्यांगता पर) एकमुश्त दिए जाते हैं।

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FIFA World Cup 2026: क्वार्टर फाइनल की 4 टीमें हुई तय, जानें बाकी मैचों का शेड्यूल और लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल्स

FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और खिताब की जंग पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक हो गई है। टूर्नामेंट में अबतक कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले हैं। फीफा वर्ल्ड कप की शुरुआत 48 टीमों के साथ हुई थी, लेकिन अब आधे से भी कम टीमें ट्रॉफी जीतने की दौड़ में बची हैं। नॉकआउट मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और क्वार्टर फाइनल की शुरुआत के साथ आखिरी आठ में जगह बनाने वाली चार टीमों के नाम भी तय हो चुके हैं।

क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली टीमों का सफर एक जैसा नहीं रहा। कुछ टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आसानी से जीत हासिल की, जबकि कुछ को आखिरी समय तक कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। लेकिन, मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने मुकाबला अपने नाम किया और अगले दौर में जगह पक्की कर ली।

अबतक कौन-कौन सी टीमें पहुंची क्वार्टर फाइनल में

मोरक्को

फ्रांस

नॉर्वे

इंग्लैंड

राउंड ऑफ 16 के बाकी मुकाबले

राउंड ऑफ 16 के बाकी मुकाबले भी बेहद रोमांचक होने वाले हैं। 6 जुलाई को दोपहर 2 बजे पुर्तगाल की भिड़ंत स्पेन से होगी, जबकि उसी दिन अमेरिका का सामना बेल्जियम से होगा। इसके बाद 7 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे। वहीं, एक और बड़े मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम मिस्र के खिलाफ मैदान में उतरेगी। इन मैचों के बाद क्वार्टर फाइनल की सभी टीमें तय हो जाएंगी।

किस दिन होगा किसका मुकाबला

क्वार्टर फाइनल का आगाज भारत में 10 जुलाई से होगा। पहले मुकाबले में फ्रांस और मोरक्को की टीमें आमने-सामने होंगी। ये मैच अमेरिका के बोस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों के बीच मुकाबले की शुरूआत सुबर 1:30 पर होगी। इसके बाद 11 जुलाई को दूसरा क्वार्टर फाइनल लॉस एंजिल्स स्टेडियम में खेला जाएगा, जिसमें पुर्तगाल और स्पेन के विजेता का मुकाबला अमेरिका और बेल्जियम के विजेता से होगा।

तीसरा क्वार्टर फाइनल 12 जुलाई को मियामी स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां नॉर्वे और इंग्लैंड की टीमें भिड़ेंगी। ये मुकाबला भारतीय समयानुसार सुबह 2 बजे से शुरू होगा। वहीं, चौथा और आखिरी क्वार्टर फाइनल 12 जुलाई को कैनसस सिटी स्टेडियम में होगा। इस मुकाबले में अर्जेंटीना और मिस्र के मैच के विजेता का सामना स्विट्जरलैंड और कोलंबिया के मैच के विजेता से होगा। यह मैच भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा।

भारत में कहां पर देखें मुकाबला

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबलों का प्रसारण भारत में जी एंटरटेनमेंट के नए स्पोर्ट्स नेटवर्क Unite8 स्पोर्ट्स पर किया जाएगा। दर्शक मैचों का आनंद Unite8 स्पोर्ट्स 1 (हिंदी कमेंट्री), Unite8 स्पोर्ट्स 1 HD (हिंदी कमेंट्री), Unite8 स्पोर्ट्स 2 (इंग्लिश कमेंट्री), और Unite8 स्पोर्ट्स 2 HD (इंग्लिश कमेंट्री) पर मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। वहीं इनकी लाइव स्ट्रीमिंग जी5 ऐप और जी5 की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकेगी।

ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा मानसून का रौद्र रूप! इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

ISRO Satellite Images: देश के कई हिस्सों में अभी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस साल मनसून के देरी से आने की वजह से लोगों को गर्मी से अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। वहीं भीषण गर्मी से परेशान और फसलों के लिए बारिश की राह देख रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अपने सबसे मजबूत दौर में है। नई तस्वीरों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर घने बादलों का बड़ा क्षेत्र दिखाई दे रहा है। इन बादलों की वजह से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई जगह तेज बारिश हो रही है।

सामने आई ISRO की ये तस्वीरें 

इसरो के INSAT-3DR उपग्रह से मिली तस्वीरों के अनुसार, बादलों का एक बड़ा समूह पूर्वी-मध्य अरब सागर से लेकर कोंकण तट तक फैला हुआ है। वहीं, दूसरा बड़ा बादल तंत्र उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है, जिसका असर पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी देखा जा रहा है। सैटेलाइट की थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीरों में दोनों बादल तंत्रों के ऊपरी हिस्से चमकीले सफेद दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि इन इलाकों में तेज़ बादल बनने की प्रक्रिया चल रही है और गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। कई जगह बहुत ज़्यादा बारिश होने की भी संभावना है।

मौसम विभाग ने दी ये जानकारी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इस दौरान महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। भारत के पश्चिमी हिस्से में अरब सागर के ऊपर बना मौसम तंत्र कोंकण तट के पास और अधिक मजबूत हो गया है। समुद्र का गर्म पानी और मानसून की तेज़ हवाएं इसे लगातार ताकत दे रही हैं। पिछले कुछ दिनों से तटीय इलाकों में कई जगह लगातार तेज बारिश हो रही है। इससे निचले क्षेत्रों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है। कई सड़कों पर जलभराव होने और बारिश के कारण कम दिखाई देने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्वी भारत में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और ऊपरी स्तर की हवाओं के कारण बादल तेजी से ऊपर उठ रहे हैं और बड़े तूफानी बादलों का रूप ले रहे हैं। इसी वजह से पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में लगातार भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। कई जगह तेज़ बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।

शुरुआत में मानसून की रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब इसके फिर से सक्रिय होने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई है। हालांकि, लगातार हो रही तेज़ बारिश के कारण शहरों में जलभराव, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और लोगों के आने-जाने में दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश और तेज़ हो सकती है। ऐसे में जिन इलाकों में बाढ़ या भूस्खलन का खतरा है, वहां रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

EPF Scheme 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सदस्य कम से कम छह अलग-अलग कारणों से अपने EPF खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) कर सकते हैं।

EPF Scheme 2026 29 जून 2026 से लागू हो गई है। इसके साथ ही इसने EPF Scheme 1952 की जगह ले ली है। इसके पैरा 46 के मुताबिक, भविष्य निधि आयुक्त (Provident Fund Commissioner) सदस्य को EPF खाते से कम से कम 1,000 रुपये की आंशिक निकासी की अनुमति दे सकते हैं।

हालांकि, एक शर्त भी है। नए नियमों के तहत EPF खाते में हमेशा कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। इस न्यूनतम बैलेंस में कर्मचारी और कंपनी (Employer) दोनों के योगदान शामिल होंगे। आप बाकी 75% रकम निकाल सकते हैं, जो Eligible Member Balance रहेगा। आइए जानते हैं किन-किन वजहों से EPF से पैसा निकाला जा सकता है।

बीमारी के इलाज के लिए

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को इलाज के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद आप एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकते हैं।

मान लीजिए आपके EPF खाते में कुल 1 लाख रुपये हैं। ऐसे में 25 हजार रुपये खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर बने रहेंगे और आप अधिकतम 75 हजार रुपये तक निकाल सकेंगे।

घर खरीदने के लिए

EPF Scheme 2026 के तहत घर से जुड़े कई कामों के लिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसमें फ्लैट या मकान खरीदना शामिल है। घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदने पर भी पैसा निकाला जा सकता है। मकान बनाने के लिए भी यह सुविधा मिलेगी। अगर आपने घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लिया है, तो उसकी रकम चुकाने के लिए भी EPF से पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा, पुराने घर की मरम्मत, विस्तार या रेनोवेशन के लिए भी आंशिक निकासी की अनुमति है।

इन सभी उद्देश्यों के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का फायदा पूरे मेंबरशिप पीरियड में अधिकतम 5 बार ही उठाया जा सकेगा।

पढ़ाई के लिए

अगर आपको या परिवार के किसी सदस्य की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकासी की जा सकती है। इस वजह से अधिकतम 10 बार पैसे निकाले जा सकते हैं।

शादी के लिए

अपने या परिवार के किसी सदस्य की शादी के खर्च के लिए भी EPF से पैसा निकाला जा सकता है। इसके लिए भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होना जरूरी है। इस श्रेणी में एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का इस्तेमाल पूरे सदस्यता काल में 5 बार से ज्यादा नहीं किया जा सकेगा।

खास हालात में

नई योजना में कुछ विशेष हालात के लिए भी EPF से आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है। ऐसे मामलों में 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है।

नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी में आंशिक निकासी की अनुमत संख्या की गणना प्रत्येक सदस्य के लिए 29 जून 2025 से नए सिरे से की जाएगी। इसे EPF Scheme 2026 की शुरुआत की तारीख के रूप में बताया गया है।

नौकरी छोड़ने पर

अगर कोई कर्मचारी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने से पहले ही नौकरी छोड़ देता है, तब भी वह EPF से पैसा निकाल सकता है।

ऐसे मामलों में सदस्य एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकता है। हालांकि, इस आधार पर एक वित्त वर्ष में दो बार से ज्यादा निकासी की अनुमति नहीं होगी।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

अब लापरवाह ड्राइवरों की खैर नहीं, सरकार DL रिन्यूअल से जुड़े नियमों में लाने जा रही ये बदलाव

DL Renewal: केंद्र सरकार उन ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACTs) को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव दिया है कि वे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतरिम मुआवजा दे सकें, ताकि उन्हें अपने क्लेम के अंतिम निपटारे तक इंतजार न करना पड़े।

वहीं, राज्यों और मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल तक चली बातचीत के बाद, मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने रखा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य?

बता दें कि इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना बीमा वाले वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। साथ ही, इनमें बीमा नियामक IRDAI द्वारा वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की भी बात कही गई है। साल 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय के पास था। सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवजे से जुड़े संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी MACT कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकता है। लेकिन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम्स ट्रिब्यूनल “ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे”। यह भी प्रस्ताव है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा। अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) है।

वहीं, मंत्रालय ने हाई कोर्ट में अपील करने की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया है। वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने कहा, “MACT ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम मुआवजा देने की इजाजत देने का कदम स्वागत योग्य है, क्योंकि ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में अक्सर देरी होती है।”

विशेषज्ञों ने उस प्रस्ताव की भी तारीफ की है जिसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले ड्राइवरों के लिए नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी होगा। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर सख्ती करते हुए, मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर किसी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किया जाता है, तो उसे तीन साल तक नया DL जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा, मंत्रालय ने नए DL या लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत वाली उम्र की सीमा को मौजूदा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी दिया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा, “आसानी से जीने और आसानी से बिजनेस करने के नाम पर, हमें सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बुनियादी पैमानों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

जानकारों का यह भी कहना है कि 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ में ले जाते समय ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उनका मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस को मनमानी करने का मौका मिल सकता है।

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Snake: ये सांप नहीं, चलते-फिरते इंद्रधनुष हैं! रोशनी पड़ते ही बदल जाता है इनका पूरा रंग

सांपों को आमतौर पर डर और खतरे से जोड़ा जाता है, लेकिन प्रकृति ने कुछ ऐसे दुर्लभ और बेहद खूबसूरत सांप भी बनाए हैं जो अपनी चमकदार त्वचा से लोगों को हैरान कर देते हैं। ये सांप रोशनी पड़ते ही इंद्रधनुषी रंगों में चमकने लगते हैं, जैसे किसी ने उन पर रंगों की परत बिखेर दी हो। यह खूबसूरती किसी जादू का नहीं बल्कि उनकी त्वचा की माइक्रो-लेवल संरचना और प्रकाश के परावर्तन का नतीजा होती है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले ये इरिडेसेंट स्नेक्स विज्ञान और प्रकृति का अनोखा मेल पेश करते हैं।

जंगलों, नदियों और यहां तक कि जमीन के नीचे रहने वाले ये जीव अपने अनोखे रंगों और पैटर्न की वजह से बेहद खास माने जाते हैं। आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले ये सांप इस बात का सबूत हैं कि प्रकृति सिर्फ डरावनी नहीं, बल्कि उतनी ही खूबसूरत और रहस्यमयी भी हो सकती है।

रेनबो बोआ

मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप अपनी शानदार इंद्रधनुषी चमक के लिए जाना जाता है। इसकी स्किन पर मौजूद सूक्ष्म संरचनाएं रोशनी को अलग-अलग एंगल से तोड़ती हैं, जिससे नीला, हरा, सुनहरा और बैंगनी रंग झलकता है।

सनबीम स्नेक

दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलने वाला यह सांप सामान्य रूप से गहरे भूरे रंग का होता है, लेकिन धूप में इसकी त्वचा अचानक चमकदार रंगों में बदल जाती है। इसकी खास बात यह है कि त्वचा के नीचे मौजूद पिगमेंट इसकी चमक को और बढ़ा देता है।

व्हाइट-लिप्ड पाइथन

न्यू गिनी का यह पाइथन अपने सफेद होंठों की वजह से पहचाना जाता है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती इसकी चमकदार स्किन में छिपी है। इसकी त्वचा में मौजूद माइक्रो-लेयर्स रोशनी को परावर्तित करके इसे चमकदार बना देते हैं।

बोएलेंस पाइथन

यह सांप अपने जीवन में रंग बदलता है—छोटे में लाल और सफेद धारियों वाला, जबकि बड़े होने पर यह काला और सुनहरा दिखने लगता है। इसकी चमकदार स्किन इसे “ऑयल-स्लिक” जैसा इफेक्ट देती है।

इरिडेसेंट शील्डटेल

भारत के पश्चिमी घाटों में पाया जाने वाला यह सांप बहुत कम दिखाई देता है। इसकी त्वचा पर मौजूद चमकदार परतें इसे जमीन के अंदर भी हल्की इंद्रधनुषी चमक देती हैं, जिससे यह बेहद खास बन जाता है।

ईस्टर्न इंडिगो स्नेक

उत्तर अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप काले रंग का होता है, लेकिन सूरज की रोशनी पड़ते ही इसमें नीले रंग की चमक दिखाई देती है। यह अपने पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्यूबन बोआ: सादगी में छिपी हल्की चमक

क्यूबा का यह सबसे बड़ा सांप अपने भूरे और तन रंग के कारण आसानी से छिप जाता है। इसकी चमक बहुत तेज नहीं होती, लेकिन सही रोशनी में यह हल्की कांच जैसी चमक दिखाता है, जो इसे रहस्यमय बनाती है।

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Satluj Controversy: कौन हैं जसवंत सिंह खालरा? भारत में ‘सतलुज’ को किया गया बैन, जानें अब तक फिल्म मामले में क्या-क्या हुआ

Satluj Controversy: इस शुक्रवार को Zee5 पर आने के बाद, हनी त्रेहान की काफी चर्चा में रही है। उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को रविवार को बिना किसी इंफॉर्मेशन के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है।

फिल्म को बनने में चार साल से ज्यादा का समय लगा, जिसमें सेंसर बोर्ड के साथ तीन साल तक लड़ाई की और फिल्म के नाम में दो बार बदलाव शामिल हैं। अब, देर सवेर से रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद, यह फिल्म फिर से दर्शकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन यह किस बारे में है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? आइए जानते हैं…

‘पंजाब 95’ नाम क्यों दिया गया था?

‘सतलुज’ एक बायोपिक ड्रामा है, जिसका नाम पहले ‘पंजाब 95’ था। यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिदगी से लेकर मौत तक की कहानी बताती है। खालरा एक बैंक क्लर्क थे, जो 90 के दशक के बीच पंजाब में मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले एक बड़े कार्यकर्ता बन गए थे। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच राज्य में 25,000 लोगों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालरा का किरदार निभाया है और उनके साथ गीतिका विद्या ओहलन, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और कंवलजीत सिंह भी हैं। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है और इसमें कुछ असली किरदारों को काल्पनिक रूप दिया गया है। इसके जरिए 80 और 90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पंजाब पुलिस की लड़ाई का काला चेहरा दिखाया गया है।

फिल्म को लेकर इतना विवाद क्यों है?

2022 में, यह फिल्म ‘घल्लूघारा’ नाम से शुरू की गई थी। यह शब्द सिखों के ऐतिहासिक नरसंहार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उसी साल नवंबर में, जब इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के पास भेजा गया, तो बोर्ड ने इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ करने और इसमें 21 कट लगाने का सुझाव दिया। चिंता यह थी कि फिल्म में प्रशासन को गलत तरीके से दिखाया गया है। फिल्म बनाने वालों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इन कट के खिलाफ अपील की, जिसने मामले को रिविजन कमेटी के पास भेज दिया। कमेटी ने 120 कट लगाने की भारी-भरकम मांग की। आखिरकार, लगभग चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद, यह फिल्म इस शुक्रवार को Zee5 पर ‘सतलुज’ नाम से चुपचाप रिलीज हुई। दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव पर कहा कि फिल्म की टीम ने प्रमोशन न करने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर वे इसका प्रमोशन या प्रचार करते, तो रिलीज में देरी हो सकती थी।

जसवंत सिंह खालरा कौन थे?

‘सतलुज’ फिल्म का मुख्य विषय पंजाब पुलिस पर खालरा के वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया था कि पुलिसकर्मियों ने हजारों लोगों की गैर-न्यायिक हत्याएं कीं। खालरा ने इसके लिए तत्कालीन पंजाब DGP केपीएस गिल को जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें लाइव बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया और कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भी इस पर बात की थी। फिल्म में यह सब दिखाया गया है, हालांकि इसमें केपीएस गिल का नाम बदलकर IPS बिट्टा कर दिया गया है और पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (फिल्म में अनंत सिंह) की हत्या की घटना को भी थोड़ा काल्पनिक रूप दिया गया है।

खालरा का 1995 में अपहरण कर लिया गया था और आरोप है कि उसी साल उनकी हत्या कर दी गई। उनकी लाश कभी नहीं मिली। 2005 में, पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया और सात साल की जेल की सजा सुनाई गई। दो साल बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। फिल्म में पंजाब पुलिस के कर्मचारियों द्वारा खालरा के अपहरण की पूरी कहानी दिखाई गई है और यह भी दिखाया गया है कि हिरासत में उन्हें कैसे प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।

फिल्म में उनके लापता होने और हत्या की जांच जिस तरह से आगे बढ़ी, उसमें भी असल घटनाओं से समानताएं हैं। इसमें SSP सुग्गा (सुविंदर विक्की) की मौत को आत्महत्या जैसा दिखाया गया है, ठीक वैसे ही जैसे 1997 में इस मामले के मुख्य आरोपी SSP अजीत सिंह संधू की मौत हुई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया था कि संधू की हत्या की गई थी और उनकी मौत को आत्महत्या का रूप दिया गया था।