भारत की विकास की सफलताओं से प्रेरणा ले रहा है इंडोनेशिया, पीएम मोदी के दौरे से दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6-8 जुलाई 2026 को होने वाली इंडोनेशिया यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों की साझेदारी पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़ रही है। आज इंडोनेशिया भारत को न केवल एक रणनीतिक साझेदार के रूप में, बल्कि तकनीक, नीतिगत विचारों और विकास समाधानों के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में भी देख रहा है। खाद्य सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस से लेकर स्वास्थ्य सेवा, कृषि और रक्षा तक, भारत की सफल सार्वजनिक नीति मॉडल इंडोनेशिया की अपनी विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रोल मॉडल बन रहे हैं।

भारत के डिजिटल भुगतान बना इंडोनेशिया का रोल मॉडल

इंडोनेशिया डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है। प्रस्तावित UPI-QRIS लिंकेज से दोनों देशों के यात्रियों और व्यवसायों के लिए बिना किसी रुकावट के सीमा-पार भुगतान संभव हो सकेगा। इस पहल से पर्यटन, व्यापार और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही लेनदेन तेज, सस्ता और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। इंडोनेशिया में व्यापार या निवेश करने वाले भारतीय व्यवसायों और हर साल बाली व इंडोनेशिया के अन्य स्थलों पर जाने वाले लगभग 17 लाख भारतीय पर्यटकों के लिए, एक लाइव UPI-QRIS कॉरिडोर क्रांतिकारी साबित होगा।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी सहयोग के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (ION) भारत के ONDC मॉडल से प्रेरित है और इसका उद्देश्य इंडोनेशिया में 65 मिलियन से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक अधिक खुला और समावेशी डिजिटल मार्केटप्लेस बनाना है। Beckn 2.0 ओपन प्रोटोकॉल पर आधारित ION का पहला लाइव लेनदेन 7 जुलाई को मोदी-प्राबोवो शिखर सम्मेलन के दौरान होने की उम्मीद है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय मॉडल को अपनाने की तैयारी में इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के साथ भारत की डिजिटल साझेदारी अब सफल मॉडलों को साझा करने से आगे बढ़कर देश के अगली पीढ़ी के डिजिटल बैकबोन (बुनियादी ढांचे) के निर्माण में मदद करने की दिशा में बढ़ रही है। इंडोनेशिया की महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल नुसंतारा’ पहल का उद्देश्य एक एकीकृत और इंटरऑपरेबल राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, और इस यात्रा में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रही है।

आधार, UPI, डिजिलॉकर, ई-KYC और ONDC की सफलता का आधार बनने वाले भारतीय डिजिटल समाधान अब इंडोनेशिया के अपने डिजिटल बदलाव में भी प्रासंगिक साबित हो रहे हैं। यह बदलाव टेक्नोलॉजी अपनाने से आगे बढ़कर गहरे संस्थागत सहयोग की ओर है, जिसमें भारतीय कंपनियाँ सुरक्षित और बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का अपना अनुभव साझा कर रही हैं। सहयोग का दायरा वित्तीय बाज़ारों तक भी बढ़ रहा है। दोनों पक्ष AI-आधारित बाज़ार निगरानी, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी-आधारित कैपिटल मार्केट सुधारों में भारत की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी के ज़रिए अपने स्टॉक मार्केट को आधुनिक बनाने का भारत का अनुभव इंडोनेशिया के साथ सहयोग के नए रास्ते खोल रहा है।

इंडोनेशिया का विज़न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र में डिजिटल समाधानों का उत्पादक और निर्यातक बनने की बड़ी सोच रखता है। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत का ओपन, समावेशी और संप्रभु डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का दशकों पुराना अनुभव बहुत काम का साबित हो रहा है। इंडोनेशिया के कई प्रतिनिधिमंडलों ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण योजनाओं, जैसे कि हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), चावल फोर्टिफिकेशन योजना, उर्वरक सब्सिडी सुधार, AGRISTACK आदि से सीखने के लिए भारत का दौरा किया है।

भारत की समाज कल्याण की योजनाओं और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए तैयार इंडोनेशिया

इंडोनेशिया का महत्वाकांक्षी ‘मुफ़्त पौष्टिक भोजन कार्यक्रम’ भारत की ‘मिड-डे मील’ (PM POSHAN) योजना से प्रेरित है। इसी तरह, उनकी ‘रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव्स’ पहल ‘जन औषधि’ मॉडल के ज़रिए सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए भारत के साथ सहयोग की संभावनाएँ तलाश रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर हो सकेगी। यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ रही है। इंडोनेशिया रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के मामलों में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत का अनुभव लंबे समय तक सहयोग के नए अवसर पैदा कर रहा है।

ये सभी पहल मिलकर एक बड़े ट्रेंड को दर्शाती हैं। भारत की विकास यात्रा अब न केवल अपने नागरिकों को फ़ायदा पहुँचा रही है, बल्कि मित्र देशों के लिए भी एक रोल मॉडल के तौर पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान, ज्ञान-साझेदारी का यह बढ़ता हुआ दायरा द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मज़बूत स्तंभों में से एक के रूप में उभर रहा है, जिससे इनोवेशन, आर्थिक विकास और लंबे समय तक रणनीतिक सहयोग के अवसर पैदा हो रहे हैं।

राजन भारती मित्तल ने कहा- इंडिया एक ग्लोबल ब्राइट स्पॉट है जो 10 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन सकता है

भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राजन भारती मित्तल ने इंडिया के बारे में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत सबसे स्टेबल और अट्रैक्टिव ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक कार्यक्रम में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत ग्रोथ और स्टैबिलिटी का एक ‘ब्राइट स्पॉट’ है।

इंडिया की ग्रोथ की तीन वजहें

मित्तल ने इंडिया की ग्रोथ के लिए जिम्मेदार तीन वजहों के बारे में बताया। इनमें स्ट्रॉन्ग डोमेस्टिक कंजम्प्शन, आबादी में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी और मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता शामिल हैं। ये सभी मिलकर भारत को दुनिया में आर्थिक गतिविधि के केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं।

10 लाख करोड़ डॉलर की होगी इकोनॉमी

भारत की इकोनॉमी के बढ़ते आकार के बारे में उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था 4 लाख करोड़ डॉलर की है, जिसके आने वाले सालों में बढ़कर 10 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। यह एक ऐसा स्ट्रक्चरल बदलाव है, जो बताता है कि दुनिया की कंपनियां भारत की अनदेखी नहीं कर सकतीं।

भारत-इंग्लैंड के पास रिश्तों को बढ़ाने का बड़ा मौका

उन्होंने कहा, “किसी ग्लोबल कंपनी की स्ट्रेटेजी में अगर भारत शामिल नहीं है तो इसका मतलब है कि वह अगले दशक की ग्रोथ स्टोरी से जुड़े मौकों को गंवाने जा रही है।” उन्होंने कहा कि भविष्यकी ग्रोथ को-क्रिएशन और लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप पर निर्भर करेगी न कि ट्रांजेक्शन ट्रेड पर। भारत-इंग्लैंड के रिश्तों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास व्यापारिक रिश्तों से आगे बढ़ने का बड़ा मौका है।

ग्लोबल सिस्टम में भारत लॉन्ग टर्म पार्टनर

मित्तल ने कहा कि इंडिया उन कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का आधार बन रहा है, जो अफ्रीका सहित ज्यादा ग्रोथ वाले क्षेत्रों को टारेगट करना चाहती हैं। कानून के शासन, इंडिपेंडेंट रेगुलेटर्स और डेमोक्रेटिक फ्रेमवर्क को उन्होंने इंडिया की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ये चीजें भारत को ग्लोबल सिस्टम में भरोसेमंद लॉन्ग टर्म पार्टनर बनाती हैं।

भारत वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार

उन्होंने कहा कि इंडिया अब न सिर्फ वैश्विक स्तर पर निर्णय की प्रक्रिया में हिस्सेदार है बल्कि यह इसका स्वरूप भी तय कर रहा है। इसकी वजह यह है कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।