Hyundai कार खरीदने का शानदार मौका! क्रेटा पर 1 लाख तक की छूट, जानें किस मॉडल पर मिल रहा कितना ऑफर

अगर आप जुलाई 2026 में नई हुंडई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने जुलाई 2026 में अपनी कुछ लोकप्रिय कारों पर खास ऑफर शुरू किए हैं। इन ऑफर्स के तहत ग्राहकों को 1 लाख रुपये तक की बचत का मौका मिल रहा है। ये लाभ क्रेटा, वरना (Verna), ग्रैंड i10 निओस, एक्सटर (Exter) और ऑरा (Aura) जैसी कारों पर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कंपनी आसान फाइनेंस और आकर्षक लोन योजनाएं भी दे रही है, जिससे नई कार खरीदना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। आइए जानते हैं किस हुंडई के किस मॉडल पर मिल रही छुट

किस कार पर मिल रहा सबसे ज्यादा ऑफर

Creta: जुलाई 2026 में हुंडई की सभी कारों में सबसे बड़ा ऑफर क्रेटा (Creta) पर दिया जा रहा है। अगर आप इस एसयूवी को खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस महीने आपको 1 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है। भारतीय बाजार में क्रेटा की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.91 लाख रुपये है, जबकि इसके टॉप मॉडल की कीमत 20.11 लाख रुपये तक जाती है। कंपनी का यह ऑफर नई कार खरीदने वालों के लिए अच्छा मौका माना जा रहा है।

Verna: जुलाई 2026 में हुंडई कंपनी ने वरना (Verna) पर 65,000 रुपये तक का लाभ दे रही है। वरना की एक्स-शोरूम कीमत 10.99 लाख रुपये से शुरू होकर 18.41 लाख रुपये तक जाती है। अपने आकर्षक डिजाइन और फीचर्स के कारण ये कार मिड-साइज सेडान श्रेणी में होंडा सिटी, स्कोडा स्लाविया और फॉक्सवैगन वर्टस जैसी कारों को कड़ी टक्कर देती है। अपने बेहतरीन फीचर्स के कारण ग्राहकों की पसंद बनी हुई है।

Grand i10 Nios: जुलाई 2026 में हुंडई ग्रैंड i10 निओस खरीदने वालों के लिए भी अच्छा मौका है। कंपनी इस हैचबैक पर 70,000 रुपये तक का लाभ दे रही है। ग्रैंड i10 निओस की एक्स-शोरूम कीमत 5.60 लाख रुपये से शुरू होकर 8.04 लाख रुपये तक जाती है। किफायती कीमत, अच्छे फीचर्स और बेहतर माइलेज के कारण यह कार अपने सेगमेंट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट जैसी लोकप्रिय हैचबैक को कड़ी चुनौती देती है।

Exter and Aura: हुंडई ने जुलाई 2026 में एक्सटर और ऑरा पर भी आकर्षक ऑफर दिए हैं। इस महीने एक्सटर खरीदने पर ग्राहकों को 40,000 रुपये तक का फायदा मिल सकता है। इस एसयूवी की एक्स-शोरूम कीमत 5.81 लाख रुपये से 9.61 लाख रुपये के बीच है। वहीं, हुंडई ऑरा पर 30,000 रुपये तक का लाभ दिया जा रहा है। इस कॉम्पैक्ट सेडान की एक्स-शोरूम कीमत 6 लाख रुपये से शुरू होकर 8.60 लाख रुपये तक जाती है।

आसान फाइनेंस की सुविधा

जुलाई 2026 में हुंडई सिर्फ कैश डिस्काउंट ही नहीं, बल्कि कार खरीदने वालों के लिए कई आसान फाइनेंस सुविधाएं भी दे रही है। कंपनी कुछ मॉडल्स पर 100% तक ऑन-रोड कीमत के लिए फाइनेंस की सुविधा, लोन की प्रोसेसिंग फीस में 50% तक की छूट और तय नियमों व शर्तों के अनुसार 100% तक फोरक्लोजर शुल्क में राहत का लाभ दे रही है। इससे ग्राहकों के लिए नई कार खरीदना पहले की तुलना में ज्यादा आसान और किफायती हो सकता है।

जुलाई 2026 के ऑफर में हुंडई के ये मॉडल शामिल हैं

  • Hyundai Creta: Rs 1 लाख तक
  • Hyundai Grand i10 Nios: Rs 70,000 तक
  • Hyundai Verna: Rs 65,000 तक
  • Hyundai Exter: Rs 40,000 तक
  • Hyundai Aura: Rs 30,000 तक

नई हुंडई कार खरीदने से पहले अपने नजदीकी डीलरशिप पर जाकर ऑफर की पूरी जानकारी जरूर लें। कंपनी ने अधिकतम छूट और फायदे की जानकारी दी है, लेकिन वास्तविक डिस्काउंट कार के वेरिएंट, शहर, डीलर और उपलब्ध स्टॉक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए बुकिंग करने से पहले अपने पसंदीदा मॉडल पर मिलने वाले सटीक ऑफर की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।

CAT 2026 Notification: जल्द जारी किया जाएगा कैट 2026 का नोटिफिकेशन, यहां जानें आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न

CAT 2026 Notification: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) और भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थान (IIT) में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित किया जाने वाला कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। आईआईएम जल्द ही इसके लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इससे देश भर में मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए साल का एडमिशन साइकिल शुरू हो जाएगा। पिछले साल के ट्रेंड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कैट 2026 का नोटिफिकेशन जुलाई में जारी हो सकता है। पिछले साल कैट का विज्ञापन जुलाई में पब्लिश हुआ था।

बता दें, यह परीक्षा आईआईएम में एमबीए पाठ्यक्रम का मेन गेटवे है और कई दूसरे बिजनेस स्कूल भी प्रवेश के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आईआईएम में प्रवेश के लिए कैट स्कोर एक जरूरी क्राइटेरिया है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट की सूचि संबंधित आईआईएम की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हर आईआईएम शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट को सीधे इंटरव्यू लेटर भेजेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि देश के सभी आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थानों के शॉर्टलिस्टिंग के क्राइटेरिया अलग-अलग होते हैं।

आईआईएम प्रवेश प्रक्रिया समझें

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थान अपने-अपने योग्यता मानदंड के आधार पर इंटरव्यू चरण के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करते हैं। यह एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में राइटिंग एबिलिटी टेस्ट (WAT), ग्रुप डिस्कशन (GD) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) शामिल हो सकते हैं।

कैट 2026 में परीक्षार्थियों का प्रदर्शन प्रवेश प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा होगी। आईआईएम सहित सभी प्रमुख प्रबंधन संस्थान प्रवेश प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और रैंकिंग में कैंडिडेट्स का पिछला शैक्षिक प्रदर्शन, काम का अनुभव, जेंडर और एकेडमिक डाइवर्सिटी और इसी तरह के दूसरे इनपुट जैसे दूसरे फैक्टर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रक्रिया, शैक्षिक कट-ऑफ और मूल्यांकन मानदंडों को दिया गया वेटेज अलग-अलग आईआईएम में अलग-अलग हो सकता है।

ज्यादातर आईआईएम इंटरव्यू और लिखित परीक्षा का समायोजन करते हैं। कुछ में ग्रुप एक्सरसाइज या अतिरिक्त टेस्ट भी शामिल होते हैं। हाल के साइकल में कई आईआईएम ने इन-पर्सन इंटरव्यू जारी रखे हैं जबकि कुछ ने इन्हें हाइब्रिड ऑप्शन के साथ पूरा किया है।

प्रवेश प्रक्रिया के लिए जरूरी डिटेल्स

पर्सनल डिटेल्स : आपको अपना नाम, जन्म की तारीख, जेंडर, कैटेगरी, स्कैन किए हुए पासपोर्ट-साइज फोटो और सिग्नेचर डालने होंगे।

शैक्षिक : 10वीं और 12वीं कक्षा की मार्कशीट या स्कोर और आपकी बैचलर डिग्री, और मास्टर या प्रोफेशनल डिग्री।

काम का अनुभव : उम्मीदवारों को कंपनी के नाम, पद और अवधि देने होंगे। इसमें समय के हिसाब से एम्प्लॉयमेंट ब्रेक या एग्जिट की डिटेल हो।

पाठ्यक्रम : कैंडिडेट्स को उन 21 हिस्सा लेने वाले आईआईएम में से खास पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स (PGP) और फेलो प्रोग्राम्स (FPM/PhD) चुनने होंगे जिनके लिए वे अप्लाई करना चाहते हैं, साथ ही पसंदीदा इंटरव्यू सिटी भी चुननी होगी।

परीक्षा शहर : आवेदकों को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट लिखने के लिए प्राथमिकता के अनुसार पांच पसंदीदा परीक्षा शहर चुनने का ऑप्शन दिया जाएगा।

डिक्लेरेशन : परीक्षार्थियों को शर्तों से सहमत होना होगा, यह सत्यापित करना होगा कि दी गई सभी जानकारी सही है, और अपना सबमिशन फाइनल करने के लिए पंजीकरण शुल्क देना होगा।

कैट परीक्षा पैटर्न

कैट परीक्षा पैटर्न के तीन हिस्से होते हैं, वर्बल एबिलिटी और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, डेटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एबिलिटी। कैट 2026 देश भर के आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में एमबीए या पीजीडीएम में प्रवेश चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए 120 मिनट का होता है।

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“₹198 करोड़ की संपत्ति, 475 ग्राम सोना और कोई कार नहीं…” जानें प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव के हलफनामे में क्या जानकारी दी?

Prashant Kishor: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए अपने नॉमिनेशन पेपर के साथ दाखिल हलफनामे में लगभग 198 करोड़ रुपये की पारिवारिक संपत्ति की जानकारी दी है। इस खुलासे के साथ ही पहली बार चुनाव लड़ रहे पूर्व चुनाव रणनीतिकार की वित्तीय संपत्ति सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।

हलफनामे के अनुसार, किशोर ने अपने नाम पर 96.06 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने 101.93 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। इस तरह, परिवार की कुल घोषित संपत्ति लगभग 197.99 करोड़ रुपये है।

हलफनामे से पता चलता है कि परिवार की चल संपत्ति की कीमत 111.78 करोड़ रुपये है, जबकि अचल संपत्ति की कीमत 86.29 करोड़ रुपये है। किशोर की अपनी चल संपत्ति 22.19 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी की चल संपत्ति 89.51 करोड़ रुपये बताई गई है।

बता दें कि किशोर की घोषित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उनका इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो है। उन्होंने ‘वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ में 100% कंट्रोलिंग हिस्सेदारी की घोषणा की है, जिसकी कीमत लगभग 95.26 करोड़ रुपये है। हलफनामे में 7.36 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और मार्केट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट का भी जिक्र है।

इस जानकारी में किशोर के नाम पर ₹65,570 और उनकी पत्नी के नाम पर ₹1,95,200 नकद होने की बात कही गई है। इसमें शेयरों, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और इंश्योरेंस पॉलिसी में किए गए निवेश का भी जिक्र है।

475 ग्राम सोना और कोई कार नहीं

इसके अलावा, अचल संपत्ति के तौर पर, किशोर ने बिहार के रोहतास जिले में एक बंद पड़ी राइस मिल की जानकारी दी है, जिसकी कीमत लगभग ₹9.75 करोड़ है। उन्होंने खुद खरीदी गई लगभग ₹59.25 करोड़ की रिहायशी संपत्तियों की भी जानकारी दी है, जिनमें पाटलिपुत्र कॉलोनी, वसंत विहार और गाजियाबाद की संपत्तियां शामिल हैं। वहीं, विरासत में उन्हें मिली रिहायशी संपत्तियों की कीमत लगभग ₹14.62 करोड़ है।

हलफनामे में परिवार की चल संपत्ति के तौर पर 475 ग्राम सोना होने की जानकारी भी दी गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि किशोर पर लगभग ₹5.77 करोड़ की देनदारी है और उनके पास कोई कार नहीं है।

8 आपराधिक मामलों की दी जानकारी

कानूनी मामलों की बात करें तो किशोर ने अपने खिलाफ चल रहे आठ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इन मामलों में आपराधिक मानहानि और गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जमा करने जैसे आरोप शामिल हैं। हलफनामे में बताया गया है कि ये मामले बिहार के अलग-अलग हिस्सों, जैसे पटना और बेतिया के पुलिस स्टेशनों में दर्ज हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि उन्हें इनमें से किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।

बता दें कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को होगा, जबकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 जुलाई है। इस चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह प्रशांत किशोर का पहला चुनाव है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि पटना की इस अहम सीट पर जन सुराज पार्टी बीजेपी को कितनी कड़ी टक्कर दे पाती है।

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26 लाख रुपये की नौकरी, फिर भी परेशान गुरुग्राम इंजीनियर, पत्नी को लेकर कही ये बात वायरल

गुरुग्राम में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। PayU में काम करने वाले इस इंजीनियर ने अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य होने की वजह से उन्हें कई बार मानसिक और आर्थिक दबाव महसूस होता है।

हालांकि उन्होंने अपनी पत्नी को एक अच्छी मां बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि अगर उनकी पत्नी ज्यादा महत्वाकांक्षी होतीं और आर्थिक रूप से योगदान देतीं तो परिवार की जिम्मेदारियां आसान हो सकती थीं।

₹26 लाख सालाना कमाई, फिर भी बचत सिर्फ ₹15 हजार

सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय इंजीनियर की सालाना आय करीब 26 लाख रुपये है। टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद उनकी मासिक इन-हैंड सैलरी लगभग 1.75 लाख रुपये बताई गई।

उन्होंने दावा किया कि इतने वेतन के बावजूद घर के खर्चों के बाद हर महीने करीब 15 हजार रुपये ही बच पाते हैं। यही वजह है कि वह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

गुरुग्राम की महंगी जिंदगी का बताया हिसाब

इंजीनियर ने अपने मासिक खर्चों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सेक्टर-56 में 2BHK फ्लैट का किराया करीब 40 हजार रुपये है। इसके अलावा राशन, बिजली, घरेलू मदद और अन्य खर्चों पर करीब 30 हजार रुपये खर्च होते हैं।

वहीं कार की EMI करीब 16 हजार रुपये और रांची में रहने वाले माता-पिता की मदद के लिए वह हर महीने 20 हजार रुपये भेजते हैं।

बेटी की परवरिश पर खर्च 50 हजार रुपये

उन्होंने बताया कि बेटी की स्कूल फीस, कपड़े, खिलौने, मेडिकल जरूरतें और हॉबी क्लास जैसी चीजों पर हर महीने लगभग 50 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। उनका कहना है कि बच्चे की जिम्मेदारी और घर के अन्य खर्चों को संभालते हुए कई बार वह खुद को दबाव में महसूस करते हैं।

tech (1)पत्नी की तारीफ भी की, लेकिन जताई अधूरी उम्मीद

इंजीनियर ने कहा कि उनकी पत्नी निशा एक अच्छी मां हैं और बेटी की अच्छी देखभाल करती हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि शादी से पहले उनकी पत्नी अमिटी यूनिवर्सिटी से MBA कर रही थीं, लेकिन शादी के बाद पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी।

उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि पत्नी आगे चलकर कोई कोर्स पूरा करेंगी, नौकरी करेंगी या घर से कोई छोटा काम शुरू करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

काश पार्टनर ज्यादा महत्वाकांक्षी होता…बयान पर मचा विवाद

इंजीनियर ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि उन्होंने ऐसे साथी से शादी की होती जो जीवन में आगे बढ़ने और आर्थिक योगदान देने को लेकर ज्यादा इच्छुक होता।

उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया। कुछ लोगों ने उनकी परेशानी को समझा, जबकि कई यूजर्स ने इसे पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करने वाला नजरिया बताया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी पति-पत्नी की जिम्मेदारियों पर बहस

कई यूजर्स ने कहा कि घर संभालना, बच्चे की देखभाल करना और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना भी एक बड़ा योगदान है, जिसकी आर्थिक कीमत अक्सर नहीं आंकी जाती।

एक यूजर ने लिखा कि लोग अपनी जीवनशैली को नियंत्रित नहीं करते और बाद में बचत कम होने की शिकायत करते हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि 1.75 लाख रुपये की मासिक आय के बावजूद परेशानी महसूस होना खर्चों की योजना से जुड़ा मुद्दा हो सकता है।

कुछ लोगों ने दी फाइनेंशियल प्लानिंग की सलाह

कुछ यूजर्स का मानना था कि समस्या कम कमाई नहीं बल्कि खर्चों के सही प्रबंधन की है। उन्होंने सुझाव दिया कि बेहतर बजटिंग और निवेश योजना से आर्थिक दबाव कम किया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इंजीनियर की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार में योगदान सिर्फ पैसे से नहीं मापा जा सकता।

एक वायरल पोस्ट ने उठाया बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है कि शादी में आर्थिक जिम्मेदारी, करियर, घरेलू काम और बच्चों की परवरिश को किस तरह संतुलित किया जाए। सोशल मीडिया पर बहस जारी है कि परिवार में योगदान की असली परिभाषा क्या होनी चाहिए सिर्फ कमाई या फिर हर तरह की जिम्मेदारी निभाना।

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

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वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Saatvik Green Energy Share Price: गिरते बाजार में 5% दौड़ा शेयर, लगा सकता है आगे 45% की और छलांग, मोतीलाल ओसवाल बुलिश

Saatvik Green Energy Share Price: सोलार मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy) के शेयर मंगलवार , 14 जुलाई को 5 फीसदी की छलांग लगाते नजर आए। शेयर में यह तेजी घरेलू इक्विटी मार्केट में तेज गिरावट के बीच देखने को मिली। सुबह 11.33 बजे के आसपास जहां शेयर 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखा रहा था वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 75 अंक गिरकर 24150 के नीचे ट्रेड कर रहा था।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरु की है और शेयर पर 565 रुपये प्रति शेयर का टारगेट दिया है, जो मौजूदा लेवल से 26 फीसदी की बढ़त दिखाता है। वहीं  अपने बुल केस के लिए, मोतीलाल ओसवाल ने फाइनेंशियल ईयर 2028 तक ₹652 का प्राइस टारगेट रखा है, जिसका मतलब है कि स्टॉक के पिछले क्लोजिंग लेवल से 45% की संभावित बढ़त हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि सात्विक ग्रीन भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में तेज़ी से हो रही ग्रोथ से फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जिसे इसकी चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और बैकवर्ड इंटीग्रेशन योजनाओं से सपोर्ट मिला है।

FY26 के आखिर तक, कंपनी के पास 4.8 GW की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी थी। यह सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में भी एंट्री करते हुए 4 GW की मॉड्यूल कैपेसिटी और जोड़ रही है।

मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि कंपनी की मॉड्यूल बनाने की कैपेसिटी FY27 तक बढ़कर 8.8 GW हो जाएगी, जबकि सेल बनाने की कैपेसिटी FY27 में 2.4 GW और FY28 में 6 GW तक पहुंचने का अनुमान है।

कंपनी FY29 तक 6 GW की प्रस्तावित कैपेसिटी के साथ इंगोट और वेफर सेगमेंट में भी एंट्री करने की योजना बना रही है, जिससे उसकी बैकवर्ड इंटीग्रेशन स्ट्रैटेजी और मजबूत होगी।

ब्रोकरेज को अगले दो सालों में अच्छी कमाई की उम्मीद है। इसका अनुमान है कि FY26 और FY28 के बीच रेवेन्यू, EBITDA और एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (APAT) क्रमशः 38%, 55% और 44% की कंपाउंड सालाना दर से बढ़ेंगे।

यह ग्रोथ ज़्यादा मॉड्यूल बिक्री से होने की उम्मीद है, जिसके FY26 में 3.1 GW से बढ़कर FY27 में 3.8 GW और FY28 में 4.9 GW होने का अनुमान है। डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) मॉड्यूल का बड़ा हिस्सा, जो FY28 तक बिक्री का लगभग 56% होने की उम्मीद है, से भी रियलाइज़ेशन में सुधार होने की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि सात्विक ग्रीन ने FY25 और FY26 दोनों में 84% का इंडस्ट्री-लीडिंग कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन फैक्टर (CUF) बनाए रखा है, जो नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को तेज़ी से बढ़ाने की इसकी क्षमता को दिखाता है।

वैल्यूएशन के आधार पर ब्रोकरेज ने कहा कि स्टॉक FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के 6.9 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि वारी एनर्जीज़ के लिए यह 9.2 गुना और प्रीमियर एनर्जीज़ के लिए 10.4 गुना है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल सात्विक ग्रीन को इसके छोटे स्केल, सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में ऑपरेटिंग ट्रैक रिकॉर्ड की कमी और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग पर ज़्यादा निर्भरता के कारण FY28 के EV/EBITDA मल्टीपल के 8 गुना कम पर वैल्यू देता है, लेकिन उसका मानना ​​है कि मौजूदा वैल्यूएशन एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट का मौका देता है।

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लगातार दो सीरीज हारने के बाद टी20 टीम में होगी सूर्यकुमार यादव की वापसी? बीसीसीआई ने रखी ये शर्त

टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने वाले सूर्यकुमार यादव को बड़ा झटका लगा। विश्व कप खत्म होने के बाद बीसीसीआई ने टी20 टीम की कप्तानी उनसे लेकर श्रेयस अय्यर को सौंप दी। वहीं अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम टी20 में अब तक एक भी मुकाबला नहीं जीत पाई है। भारतीय टीम आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज हार गई। वहीं अब सीरीज हारने के बाद सूर्यकुमार के भारतीय टीम में वापसी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम का प्रदर्शन अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। टीम अपने पिछले सात टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से छह हार चुकी है, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया।

सूर्या को होगी वापसी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई ने सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। न्यूज एजेंसी ANI ने बीसीसीआई के एक सूत्र के हवाले से कहा, “सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे अभी भी खुले हैं। फिलहाल वह टीम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं और रन बनाते हैं, तो उनकी वापसी पर जरूर विचार किया जाएगा।”

करना होगा बेहतरीन प्रदर्शन

अगर सूर्यकुमार यादव को भारतीय टीम में दोबारा जगह बनानी है, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट में मुंबई की ओर से लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। चयनकर्ताओं का भरोसा फिर से जीतने के लिए उन्हें बल्ले से लगातार रन बनाने होंगे। मजबूत प्रदर्शन ही उनके लिए राष्ट्रीय टीम में वापसी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। पिछला साल सूर्यकुमार यादव के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह लगातार 19 पारियों तक अर्धशतक नहीं बना सके। वहीं इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उन्होंने पांच मैचों में तीन अर्धशतक जड़े। इसके बाद टी20 विश्व कप के पहले मुकाबले में नाबाद 84 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर उन्होंने दमदार अंदाज में अपनी फॉर्म में वापसी के संकेत दिए।

सूर्या का प्रदर्शन

इसके बाद टी20 विश्व कप के बाकी आठ मुकाबलों में सूर्यकुमार यादव का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा और वह कुल 158 रन ही बना सके। फाइनल मैच में भी उनका बल्ला नहीं चला और वह बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने 13 पारियों में 270 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 147.54 रहा, लेकिन लगातार बड़े स्कोर नहीं बना पाने के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टी20 टीम से बाहर कर दिया।

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जानिए भारत की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेनों के बारे में, क्या वंदे भारत शामिल है इसमें?

वंदे भारत एक्सप्रेस को अक्सर भारत की सबसे मॉडर्न और तेज ट्रेनों में गिना जाता है, लेकिन क्या यह सच में देश की सबसे तेज ट्रेन है? ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई यह भारत की पहली स्वदेशी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है, जो मॉडर्न टेक्निक, तेज रफ्तार और शानदार सुविधाओं के लिए जानी जाती है। इसकी मैक्सिमम स्पीड 160 किमी/घंटा तक है और यह बिना अलग इंजन के इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) सिस्टम पर चलती है। आइए जानते हैं वंदे भारत, नमो भारत, राजधानी, शताब्दी और नई वंदे भारत स्लीपर में से कौन-सी ट्रेन स्पीड, टेक्नोलॉजी और आराम के मामले में सबसे आगे है:

वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस: ​​

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2026 में शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर बनी भारत की पहली ओवरनाइट (रात भर चलने वाली) ट्रेन है। कोटा-नागदा रूट पर ट्रायल रन के दौरान इसने 180 किमी/घंटा की स्पीड हासिल की, जबकि रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर लॉन्ग डिस्टेंस के टेस्ट भी किए। हालांकि, रेगुलर कमर्शियल ऑपरेशन में यह ट्रेन मंजूर की गई ऑपरेशनल स्पीड पर चलेगी।

राजधानी एक्सप्रेस:

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​​1969 में शुरू हुई राजधानी एक्सप्रेस भारत की पहली पूरी तरह से एयर-कंडीशंड प्रीमियम ट्रेन सर्विस थी। 130 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ, यह नई दिल्ली को देश भर की कई स्टेट की राजधानियों और बड़े शहरों से जोड़ती है। दशकों से, राजधानी भारत में लॉन्ग डिस्टेंस की प्रीमियम रेल ट्रैवल के लिए एक बेंचमार्क रही है।

अमृत भारत एक्सप्रेस:

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​​2023 में शुरू की गई अमृत भारत एक्सप्रेस एक नॉन-AC पुश-पुल ट्रेन है जिसे किफायती लॉन्ग डिस्टेंस के ट्रैवल के लिए डिजाइन किया गया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनी यह ट्रेन 130 किमी/घंटा तक की स्पीड से चल सकती है। दोनों सिरों पर लोकोमोटिव होने के कारण, ट्रेन की स्पीड तेजी से बढ़ती और कम होती है। इसका ऑब्जेक्टिव छोटे कस्बों और शहरों को तेज और कम्फर्टेबल ट्रैवल ऑप्शन देना है, जहां राजधानी या शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें नहीं जाती हैं।

गतिमान एक्सप्रेस:

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अप्रैल 2016 में शुरू की गई गतिमान एक्सप्रेस भारत की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन सेवा थी। हजरत निजामुद्दीन और आगरा कैंट के बीच चलने वाली यह ट्रेन मैक्सिमम 160 किमी/घंटा की स्पीड से चलती है। इस ट्रेन को 5,500 HP वाले WAP-5 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से चलाया जाता है और इसमें एग्जीक्यूटिव चेयर कार और AC चेयर कार कोच होते हैं। सभी कोच बायो-टॉयलेट से लैस हैं, जो इसे इंडियन रेलवे की प्रीमियम डे की ट्रैवल सर्विस में से एक बनाता है।

शताब्दी एक्सप्रेस: ​​

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1988 में शुरू हुई शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे पॉपुलर प्रीमियम दिन की ट्रेनों में से एक है। इसे उसी दिन वापसी की जर्नी के लिए डिजाइन किया गया है और यह मैक्सिमम 130 किमी/घंटा की गति से चलती है। इस ट्रेन में केवल AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार कोच होते हैं, इसमें स्लीपर डिब्बे नहीं होते, जिससे यह कम से मीडियम डिस्टेंस की जर्नी के लिए आइडियल बन जाती है।

नमो भारत RRTS:

नमो भारत की पीक ऑवर्स में 10 और नई ट्रिप्स की शुरुआत, RRTS कॉरिडोर के यात्रियों को मिली बड़ी सौगात | Namo Bharat 10 more new Trips launched during peak hours Good

दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) पर चलने वाली नमो भारत ट्रेनें तेज स्पीड वाली रीजनल ट्रैवल के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हालांकि ये 160 किमी/घंटा की ऑपरेशनल स्पीड से चलती हैं, लेकिन इन ट्रेनों की डिज़ाइन स्पीड 180 किमी/घंटा है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) डेवलप्ड यह सिस्टम ट्रेडिशनल रेलवे लाइनों और रोड ट्रैफिक से अलग, खास तौर पर इसके लिए बनाए गए ट्रैक पर चलता है, जिससे ट्रैवल तेज और ज़्यादा भरोसेमंद होती है।

वंदे भारत से लेकर अमृत भारत तक, इंडियन रेलवे तेजी से मॉडर्न हो रहा है और तेज ट्रेनें, बेहतर टेक्नोलॉजी और पैसेंजर के लिए ज्यादा आराम जैसी सुविधाएं ला रहा है। ये अगली जनरेशन की सर्विस ट्रैवल का समय कम कर रही हैं, सेफ्टी बढ़ा रही हैं और देश भर के ज्यादा शहरों और कस्बों तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचा रही हैं।

UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन, जानें क्या है विदेश मंत्री जयशंकर का सुपर प्लान

UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया। इसे SHANTI कैंपेन का नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कई राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इस आधिकारिक कैंपेन को लॉन्च करने के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात की और पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय जब पीटीआई ने उनसे पूछा कि बैठक कैसी रही तो जयशंकर ने संक्षिप्त शब्दों में कहा कि हमेशा की तरह अच्छी।

क्या है भारत का SHANTI कैंपेन?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए देश की प्राथमिकताओं को स्पष्ट। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘SHANTI’ यानी ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity’ (नियमों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) पर आधारित है। जयशंकर ने भारत के इस सुपर प्लान के तहत सुरक्षा परिषद के लिए अपनी 6 मुख्य प्राथमिकताओं को सामने रखा है।

पहली ग्लोबल साउथ की आवाज बनना। यानी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चिंताओं और मुद्दों को मजबूती से उठाना। दूसरी सुधारित बहुपक्षवाद यानी वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाना ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया जा सके। तीसरी भविष्य के लिए तैयार पीसकीपिंग, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना। चौथी एआई (AI) के दुरुपयोग से निपटना, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरों को एड्रेस करना। पांचवीं समुद्री सुरक्षा जिसके तहत वैश्विक समुद्री मार्गों और सुरक्षा को मजबूत करना। छठी टेरर फाइनेंसिंग पर लगाम। इसके तहत आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद का कड़ा विरोध करना और इसे रोकना।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष वीडियो भी दिखाया गया। इसमें वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, उसके योगदान और यूएनएससी अभियान की प्राथमिकताओं को दिखाया गया। वीडियो में मिसाइल हमलों से तबाह होते शहरों और प्राकृतिक आपदाओं के फुटेज के बीच भारत द्वारा पहुंचाई गई मानवीय और राहत सहायता को दिखाया गया। वीडियो में कहा गया कि एक अव्यवस्थित दुनिया के लिए, एक सभ्यता ने हमेशा केवल एक ही शब्द में उत्तर दिया है – शांति (Shanti).

इस विशेष वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक आह्वान को भी शामिल किया गया, जो उन्होंने जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए किया था कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शासन में बदलाव लाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। बहुपक्षवाद को लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों का मतभेदों को पाटने और आम सहमति बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे देश निश्चित रूप से इस दिशा में अपना उचित योगदान दे सकते हैं।

अगले साल जून में होगा मुकाबला, 9वीं बार सीट की तैयारी

यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली 15-सदस्यीय निकाय में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में बैठ चुका है। भारत का पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में इस प्रतिष्ठित टेबल पर रह चुका है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी उम्मीदवारी ऐसे समय में पेश कर रहा है जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। एक तरफ दुनिया के पास मानव कल्याण को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमताएं हैं तो दूसरी तरफ हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा दौर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और सुरक्षा परिषद को रास्ता दिखाना होगा इसलिए इस सदस्यता के चुनाव का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात

सप्ताहांत में न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने इस कैंपेन लॉन्च के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी और भारत के यूएन मिशन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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