Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 15 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 14 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,100 के नीचे रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ। लगभग 1422 शेयरों में बढ़त हुई,2632 शेयरों में गिरावट आई और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में शामिल शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,श्रीराम फाइनेंस,HDFC लाइफ,टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। जबकि, भारती एयरटेल,अपोलो हॉस्पिटल्स,सन फार्मा,TCS और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा गिरा (2%),इसके बाद निफ्टी PSU बैंक (-1.8%),निफ्टी ऑटो (-1.6%),निफ्टी बैंक (-1.1%) और निफ्टी IT (-1%) रहे। अन्य सेक्टरों में,निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.8%,निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.6%,निफ्टी FMCG 0.6%,निफ्टी मीडिया 0.3% और निफ्टी इंफ्रा 0.3% गिरे।

वहीं, दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा ने 1% की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया,इसके बाद निफ्टी मेटल रहा,जिसमें 0.60% की बढ़त हुई। छोटे-मझोले शेयर भी दबाव में रहे। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1% गिरे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं हैं,जिससे घरेलू इक्विटी पर फिर से दबाव आ गया। इससे यह डर भी पैदा हो गया कि क्या ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट भारत की कॉर्पोरेट कमाई में सुधार को और धीमा कर देगी। रुपये के डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार करने से मुश्किलें और बढ़ गईं। इससे इंपोर्टेड महंगाई की चिंता बढ़ी और अलग-अलग इंडस्ट्रीज में इनपुट कॉस्ट बढ़ने का डर पैदा हो गया।

इसका सबसे ज्यादा असर महंगाई और कॉस्ट-सेंसिटिव सेक्टर पर दिखा। ऑटो,फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर में गिरावट के कारण बाजार नीचे आया। जबकि फार्मा सेक्टर ने इस ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने’डिफेंसिव’शेयरों का सहारा लिया। इससे फार्मा सेक्टर को फायदा हुआ। विदेशी फंड की लगातार निकासी ने भी बाजार में सावधानी का माहौल बनाए रखा और सेंटीमेंट को कमजोर किया। अब सबकी नजरें US फेड चेयर पर हैं,जिनके आने वाले बयान ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं। इस बीच,Q1 अर्निंग्स सीजन तो अच्छा चल रहा है,लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट को कुछ हद तक कमजोर कर दिया है।

इक्विरस वेल्थ में MD और बिज़नेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों,कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू करेंसी में भारी गिरावट के कारण बैंकिंग,IT,ऑटोमोबाइल और रियल्टी शेयरों में भारी बिकवाली हुई,जिससे बेंचमार्क इंडेक्स गिर गए।

US-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। FIIs की ओर से घरेलू इक्विटी में नई बिकवाली के चलते निवेशक इक्विटी में निवेश करते समय सावधानी बरतेंगे और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाएंगे।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि NSE के वीकली ऑप्शन की एक्सपायरी के कारण गैप-डाउन के साथ खुलने के बाद इंडेक्स एक दायरे में ही बना रहा। इसने पिछले दिन के निचले स्तर के आसपास सपोर्ट लिया और गिरती हुई ट्रेंडलाइन के ऊपर बना रहा। इंडेक्स 50 EMA के ऊपर भी बना रहा, जो इसकी अंदरूनी मजबूती को दिखाता है।

शॉर्ट टर्म में,जब तक इंडेक्स 23,950 के ऊपर रहता है,तब तक आउटलुक पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। ऊपर की तरफ यह 24,250–24,300 के जोन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि,23,950 के नीचे बड़ी गिरावट मौजूदा तेजी वाले सेटअप को कमजोर कर सकती है और कंसोलिडेशन का दौर शुरू कर सकती है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में US-ईरान युद्धे से जुड़ी घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और Q1FY27 के अर्निंग्स सीजन की अहम भूमिका होगी। कंपनियों के मज़बूत नतीजों से बाजार को सहारा मिल सकता है,लेकिन जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतें निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।

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बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट,वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडलस्टिक पैटर्न’बनाया है,जो ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव दिखाता है। इंडेक्स अपने 200 डे के मूविंग एवरेज के पास भी बंद हुआ है,इसलिए इस सपोर्ट जोन पर नजर रखना ज़रूरी है। इसके अलावा,RSI ने’लोअर टॉप’बनाया है जो ऊपर की ओर बढ़ने की रफ्तार (मोमेंटम) में कमी का संकेत है।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी बैंक के लिए सपोर्ट 56,800–56,900 के जोनन में है। जबकि, तत्काल रेजिस्टेंस 58,200 के आसपास दिख रहा है। मोमेंटम कमजोर होने को देखते हुए,ट्रेडर्स को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए और नई पोजीशन लेने से पहले किसी साफ चाल(डिसाइसिव मूव)का इंतजार करना चाहिए।

 

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Iran-US War Update: होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत! भारत सरकार का बड़ा एक्शन, ईरानी राजनयिक तलब

Iran-US War Update: भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की मंगलवार (14 जुलाई) को कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दोनों जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक थे। ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक अन्य घायल हो गया है।” मंत्रालय के अनुसार, “एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से नौ घायल हुए हैं जिनमें से दो के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।”

मंत्रालय ने कहा कि भारत इन हमलों और नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा की घटनाओं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालने वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों के फिर से शुरू होने और तनाव बढ़ने पर अपनी गहरी चिंता भी दोहराते हैं। साथ ही शांति के हित में हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत एवं कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करते हैं।”

मृतक के परिवार के प्रति जताई संवेदना

विदेश मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। साथ ही घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।

ईरान के राजनयिक को किया तलब

घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने इन हमलों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर चल रहे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे सभी हिंसक हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो नाविकों की जान को खतरे में डालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही को बाधित करते हैं।

UAE में भारतीय मिशन लगातार संपर्क में है

विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। सरकार प्रभावित भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ती हिंसा और सैन्य तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी समाधान है।

कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना गंभीर खतरा

भारत ने अपने बयान में दोहराया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

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इस रूट्स पर होने वाले हमले न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीयों को सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी मजबूती से उठा रही है।

Viral Post: ‘पहले हां कहा, फिर कर दिया मना’ सीट बदलने से इनकार करने वाले यात्री का पोस्ट वायरल

ट्रेन में सीट बदलने को लेकर एक पैसेंजर की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब वायरल हो रही है। पैसेंजर ने बताया कि दो युवतियों ने उनसे सीट बदलने का अनुरोध किया था और वह इसके लिए तैयार भी हो गया था। लेकिन बातचीत के दौरान उनके व्यवहार से उसे असहज महसूस हुआ, जिसके बाद उसने अपना फैसला बदल दिया। इस घटना को शेयर करते हुए पैसेंजर ने पूछा कि क्या दूसरे लोगों ने भी ट्रेनों में अक्सर होने वाले “एडजस्ट कर लीजिए” वाले दबाव का सामना किया है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

सीट बदलने को लेकर पोस्ट वायरल

Reddit पोस्ट में व्यक्ति ने बताया, “लड़की ने मुझसे सीट बदलने के लिए कहा, लेकिन उसका व्यवहार ठीक नहीं था” टाइटल से शेयर किए गए। पैसेंजर ने बताया कि, वह ट्रेन के 3E कोच में मिडिल बर्थ पर सफर कर रहा था। तभी दो महिलाएं उसके पास आईं और सीट बदलने का अनुरोध किया। उनमें से एक की उसी कंपार्टमेंट में ऊपरी बर्थ थी, जबकि दूसरी महिला की सीट उसी कोच में किसी दूसरे स्थान पर थी। पैसेंजर ने बताया, “मैंने शुरुआत में सीट बदलने के लिए हां कर दी थी।”

सीट देने से कर दिया मना

उन्होंने कहा कि, “मैंने अपनी सीट पर पहले ही बिस्तर लगा लिया था, इसलिए उसे बस उस सीट पर बिस्तर लगाना चाहिए। ठीक है, है ना?” उनकी सिर्फ एक शर्त थी कि उन्होंने अपनी सीट पर पहले से ही बिस्तर लगा रखा है, इसलिए दूसरी सीट पर भी बिस्तर वही लगा दें। उसके मुताबिक, इस पर महिला ने जवाब दिया, “ये भी मैं ही करूं? इतना तो खुद कर लो।” पैसेंजर का कहना है कि इसी जवाब के बाद उसने अपना फैसला बदलने का मन बना लिया। पैसेंजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे नहीं पता उस समय मुझे क्या हुआ, लेकिन मैं नाराज हो गया और मैंने साफ कह दिया, ‘आप किसी और से पूछ लीजिए, मैं किसी भी हालत में सीट नहीं बदलूंगा।'”

लोगों ने कहा सीट बदलने को

उसके मुताबिक, महिला वहां से चली गई, लेकिन कुछ देर बाद लौटकर बोली, “ठीक है, मैं बिस्तर लगा दूंगी।” वहीं, तब तक पैसेंजर अपना फैसला बदल चुका था और उसने सीट बदलने से इनकार कर दिया। पैसेंजर के मुताबिक, मामला तब और बढ़ गया जब दूसरे यात्रियों ने भी उससे सीट बदलने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने कहा, “अरे, जाने दीजिए, सबको कहीं न कहीं जाना है। थोड़ा एडजस्ट करके चलना चाहिए।” इस पर उसने पास बैठे एक पैसेंजर से पूछा, “अगर ऐसा है, तो क्या आप अपनी सीट बदलने के लिए तैयार हैं?” जवाब में उस पैसेंजर ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ सफर कर रहा है, इसलिए ऐसा नहीं कर सकता।

फैसले पर कोई पछतावा नहीं

पोस्ट में आगे पैसेंजर ने लिखा कि उसने भी बाकी सभी की तरह पूरा किराया देकर टिकट लिया है और उसका मानना है कि सीट बदलने की बात विनम्रता से रखी जानी चाहिए, यह मानकर नहीं कि सामने वाला हर हाल में मान जाएगा। उसने लिखा, “मुझ पर रौब मत दिखाइए और फिर यह उम्मीद मत रखिए कि मैं आपकी हर बात मान लूंगा।” उसने यह भी कहा कि कुछ देर के लिए आसपास बैठे लोगों की नजरों से उसे अपराधबोध जरूर हुआ, लेकिन बाद में उसे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं हुआ।

यूजर ने किया कमेंट

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी। बड़ी संख्या में यूजर्स ने पैसेंजर के फैसले का समर्थन किया। वहीं, कई अन्य लोगों ने भी ट्रेन यात्रा के दौरान सीट बदलने के लिए दबाव बनाए जाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। एक यूजर ने लिखा, “ओपी, बदतमीज लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अगर उनका व्यवहार अच्छा होता, तो शायद उन्हें सीट मिल जाती। यह पूरी तरह उनकी अपनी गलती है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “लोग अक्सर किसी की विनम्रता को उसकी कमजोरी समझ लेते हैं। तुमने बिल्कुल सही किया। जब सामने वाले ने देखा कि तुमने पहले से बिस्तर लगा रखा है, तब उसे सम्मान से बात करनी चाहिए थी। यह सामान्य शिष्टाचार है।” एक और यूजर ने रिएक्शन देते हुए कहा, “तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही था। ऐसे लोगों को सीधे और साफ जवाब मिलना ही चाहिए।”

Apple iPhone 18 Pro 9 सितंबर को होगा लॉन्च! स्पेसिफिकेशन्स और कीमत से जुड़ी लीक्स आई सामने

Apple के अगले iPhone के लॉन्च में अब बस कुछ ही हफ्ते बचे हैं। हालांकि, क्यूपर्टिनो की इस टेक कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं बताया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max कंपनी के सालाना सितंबर इवेंट में उसके पहले फोल्डेबल iPhone के साथ लॉन्च हो सकते हैं। लीक्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro चिप, बेहतर कैमरा, नए कलर ऑप्शन और कीमत में बढ़ोतरी जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। iPhone 18 Pro से जुड़ी अब तक सामने आई सभी लीक जानकारी जानने के लिए आगे पढ़ें।

Apple iPhone 18 Pro का डिजाइन और स्पेसिफिकेशन्स (लीक जानकारी)

डिजाइन की बात करें तो, Apple अपने पुराने फ्लैट-एज डिजाइन को बरकरार रख सकता है, लेकिन इसमें कुछ छोटे बदलाव किए जा सकते हैं। लीक्स के अनुसार, फोन के पीछे का डिजाइन ज्यादा साफ-सुथरा होगा, कैमरा मॉड्यूल थोड़ा बड़ा हो सकता है और फोन की बॉडी थोड़ी मोटी हो सकती है। मोटा डिजाइन इसलिए दिया जा सकता है, ताकि इसमें बड़ी बैटरी और बेहतर वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम लगाया जा सके।

iPhone 18 Pro सीरीज में नया Dark Cherry कलर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह Light Blue, Silver और Dark Grey कलर में भी आ सकता है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Apple का नया A20 Pro प्रोसेसर मिलने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चिप TSMC की 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित हो सकती है। कहा जा रहा है कि यह चिप बेहतर AI परफॉर्मेंस, तेज़ ग्राफिक्स और बेहतर पावर एफिशिएंसी देगी।

कई रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 18 Pro Max में 5391 mAh से 5577 mAh तक की बड़ी बैटरी दी जा सकती है। अगर यह जानकारी सही साबित होती है, तो यह किसी भी iPhone में मिलने वाली अब तक की सबसे बड़ी बैटरी में से एक हो सकती है। बता दें कि बड़ी बैटरी के कारण फोन का डिजाइन थोड़ा मोटा और वजन में भारी हो सकता है।

डिस्प्ले की बात करें तो, Apple iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में मौजूदा 6.3 इंच और 6.9 इंच की स्क्रीन साइज को बरकरार रख सकता है। हालांकि, लीक्स के अनुसार इस बार Dynamic Island का साइज छोटा किया जा सकता है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Apple पहली बार अंडर-डिस्प्ले Face ID टेक्नोलॉजी ला सकता है, यानी Face ID सेंसर स्क्रीन के नीचे छिपे हो सकते हैं।

ऐसी चर्चा है कि क्यूपर्टिनो की यह दिग्गज कंपनी अपना ट्रिपल 48MP रियर कैमरा सिस्टम तो बरकरार रखेगी, लेकिन साथ ही वेरिएबल-अपर्चर वाला मेन कैमरा, ज्यादा ब्राइट टेलीफोटो लेंस, नया स्टैक्ड इमेज सेंसर और अपग्रेडेड 24MP का सेल्फी कैमरा भी पेश करेगी। इसके अलावा, ‘कैमरा कंट्रोल’ बटन को भी पूरी तरह प्रेशर-सेंसिटिव कंट्रोल के साथ रीडिजाइन किया जा सकता है।

भारत में Apple iPhone 18 Pro की लॉन्च डेट और कीमत (अनुमानित)

ब्लूमबर्ग के मार्क गुरमन के अनुसार, Apple अपना सालाना iPhone लॉन्च इवेंट 9 सितंबर, 2026 को आयोजित कर सकता है और इसकी बिक्री और डिलीवरी 18 सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि सितंबर का इवेंट सिर्फ Pro मॉडल और Apple के फोल्डेबल iPhone पर फोकस्ड हो सकता है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 और iPhone Air 2 साल 2027 की शुरुआत में आ सकते हैं।

हालांकि, कीमत के मामले में खबर अच्छी नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple Pro मॉडल की कीमतों में लगभग 10,000 रुपये की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत लगभग 1,44,900 रुपये हो सकती है, जबकि iPhone 18 Pro Max लगभग 1,59,900 रुपये में लॉन्च हो सकता है।

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12 घंटे के सफर सिर्फ दो घंटे में होगा पूरा! इन रूट पर 3 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का ऐलान

हैदराबाद को जल्द ही हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की बड़ी सौगात मिल सकती है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 11 जुलाई को घोषणा की कि शहर को तीन नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए चुना गया है। इन परियोजनाओं के जरिए हैदराबाद को पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु से जोड़ा जाएगा। रेल मंत्री ने यह जानकारी हैदराबाद में आईटी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित तीन बुलेट ट्रेन रूट पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु होंगे।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये तीनों कॉरिडोर पूरे क्षेत्र के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इससे हैदराबाद भारत के तेजी से बढ़ रहे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा।

  • हैदराबाद-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन: अगर यह परियोजना पूरी होती है, तो हैदराबाद से बेंगलुरु का सफर काफी छोटा हो जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस रूट पर यात्रा का समय घटकर करीब 2 घंटे 10 मिनट रह सकता है। अभी ट्रेन से यह दूरी तय करने में लगभग 12 से 15 घंटे लगते हैं।
  • हैदराबाद-चेन्नई बुलेट ट्रेन: रिपोर्टों के अनुसार, हैदराबाद से चेन्नई तक का बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अमरावती होकर गुजरेगा। इसकी लंबाई करीब 760 किलोमीटर हो सकती है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 12 घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाने की उम्मीद है।
  • पुणे-हैदराबाद बुलेट ट्रेन: इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद पुणे और हैदराबाद के बीच सफर काफी तेज हो जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यात्रा का समय घटकर करीब 2 घंटे 8 मिनट रह सकता है। फिलहाल ट्रेन से यह दूरी तय करने में 10 घंटे से ज्यादा समय लगता है।

बुलेट ट्रेन की रफ्तार कितनी होगी?

रिपोर्टों के अनुसार, इन बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को 350 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। वहीं, ट्रेनों की संचालन गति (ऑपरेटिंग स्पीड) करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की उम्मीद है। हालांकि, बीच में स्टेशनों पर रुकने और ट्रैक के मोड़ों को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की औसत रफ्तार 200 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है।

तेलंगाना के लिए 5,400 करोड़ रुपये का रेल बजट

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना के लिए 5,400 करोड़ रुपये का रेल बजट तय किया है। यह राशि राज्य में रेलवे ढांचे को मजबूत बनाने की योजना का हिस्सा है। इसके तहत रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं की तैयारी जैसे काम किए जाएंगे।

हैदराबाद के कई रेलवे स्टेशन होंगे आधुनिक

रेल मंत्री ने बताया कि हैदराबाद के नामपल्ली, काजीपेट जंक्शन और मलकपेट रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) का काम पहले से जारी है। इसके अलावा सिकंदराबाद, बेगमपेट और हाईटेक सिटी रेलवे स्टेशन भी केंद्र सरकार के स्टेशन आधुनिकीकरण कार्यक्रम में शामिल हैं। इन स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पहले मुंबई-अहमदाबाद रूट पर दौड़ेगी देश की पहली बुलेट ट्रेन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हैदराबाद के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर ट्रेनें चलना शुरू होंगी। योजना के अनुसार, इस परियोजना का पहला चरण 15 अगस्त 2027 से शुरू किया जाएगा। शुरुआत सूरत से बिलिमोरा के बीच होगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना करीब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है।

आगे क्या होगा?

हैदराबाद के तीनों बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उन सात नए हाई-स्पीड रेल रूट में शामिल हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है। इनमें मुंबई-पुणे, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे रूट भी शामिल हैं। अब इन परियोजनाओं पर आगे बढ़ने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी), जमीन का अधिग्रहण और फंड की व्यवस्था जैसे जरूरी काम किए जाएंगे। इसके बाद निर्माण कार्य की समय-सीमा तय की जाएगी।

शाही सफर करें सिर्फ ₹1 लाख में, जानिए रेलवे के VIP सलून कोच की बुकिंग का पूरा प्रोसेस

रेलवे के सलून कोच का सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों में इसे लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई। इस वीडियो ने कई पैसेंजर के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर सलून कोच क्या होता है और क्या आम लोग भी इसमें सफर कर सकते हैं। दरअसल, रेलवे का यह खास कोच लग्जरी सुविधाओं के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं सलून कोच की बुकिंग, खर्च और इसमें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में:

क्या होता है रेलवे का सलून कोच

Golden chariot luxury train to operate two itineraries this month, ETTravelWorld

रेलवे सलून कोच एक खास और लग्जरी कोच होता है, जिसमें पैसेंजर को आरामदायक सफर के लिए कई सुविधाएं मिलती हैं। इसमें दो बेडरूम, एक हॉल, किचन और बाथरूम जैसी सुविधाएं होती हैं। शुरुआत में इन कोचों का इस्तेमाल ब्रिटिश काल से ही सीनियर रेलवे ऑफिसर की ट्रैवल के लिए किया जाता था। रेलवे अधिकारी दूर-दराज के इलाकों में इंस्पेक्शन, इंवेस्टिगेशन या इमरजेंसी में इन सलून कोचों का यूज करते हैं। देशभर के अलग-अलग रेलवे जोन में कुल 336 सलून कोच हैं, जिनमें से कई एयर कंडीशन्ड भी हैं।

राष्ट्रपति से भी जुड़ी है सलून कोच की हिस्ट्री

This may contain: the inside of a train car with couches, tables and windows on each side

रेलवे सलून कोच का इस्तेमाल देश के बड़े नेताओं और राष्ट्रपतियों की ट्रैवल के लिए भी किया गया है। साल 1956 से राष्ट्रपति के लिए सलून कोच की सुविधा शुरू हुई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. एस. राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन और अन्य राष्ट्रपतियों ने इससे ट्रैवल की थी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने साल 2006 में इस कोच से आखिरी जर्नी की थी। बाद में पुराने होने के कारण इसे कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया, लेकिन 2018 में इसे फिर से शुरू किया गया और आम पैसेंजर के लिए भी बुकिंग की फैसिलिटी उपलब्ध कराई गई।

आम पैसेंजर ऐसे करें सलून कोच की बुकिंग

Golden Chariot History, Introduction of Golden Chariot

अब आम पैसेंजर भी रेलवे के सलून कोच में सफर कर सकते हैं। इसके लिए IRCTC की वेबसाइट के जरिए बुकिंग करनी होती है। यात्री को IRCTC FTR (Full Tariff Rate) पोर्टल पर जाकर ट्रेन और रूट की जानकारी देनी होती है। अगर चुने गए रूट पर सलून कोच अवेलेबल है, तो इसे बुक किया जा सकता है। इस कोच में लगभग 8 लोग आराम से ट्रैवल कर सकते हैं और सफर के दौरान एक अटेंडेंट भी साथ रहता है।

सलून कोच बुक करने का खर्च

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सलून कोच की बुकिंग के लिए पैसेंजर को एक तय राशि जमा करनी होती है। इसके अलावा ज्यादा दिनों के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है। अगर पैसेंजर को खाना बनाने के लिए कुक की जरूरत हो तो इसकी फैसिलिटी भी दी जा सकती है। आमतौर पर रूट और ट्रैवल टाइम के हिसाब से इसका खर्च करीब 2 से 3 लाख रुपये तक जा सकता है। बुकिंग के लिए पहले से प्लानिंग बनाना जरूरी होता है, क्योंकि इसे लगभग 6 महीने पहले तक बुक किया जा सकता है।

सलून कोच बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

Railways' make in India: A look at 24 coach train features - BusinessToday

सलून कोच की सुविधा लेने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। यह फैसिलिटी कम से कम 500 किलोमीटर की जर्नी के लिए अवेलेबल होती है। बुकिंग के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है और रूट पर कोच की अवेलेबिलिटी भी जरूरी है। यह सामान्य ट्रेन टिकट की तरह नहीं होता, बल्कि एक प्रीमियम और प्राइवेट ट्रैवल एक्सपीरियंस देता है, जिसमें पैसेंजर को ट्रेन के अंदर घर जैसी फैसिलिटी मिलती हैं।

पहाड़ों की चोटियों पर बसे भारत के वो मंदिर जहां सिर्फ कदम चलते है!

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है, जहां कई प्राचीन मंदिर पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बने हुए हैं। इन मंदिरों तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन भक्त कठिन रास्तों को पार करके भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ों की शांति और सुंदर वातावरण इन मंदिरों की खासियत को और बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिरों के बारे में, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है:

आदि बद्री मंदिर – शांत वातावरण में बसा प्राचीन धाम

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उत्तराखंड में स्थित आदि बद्री मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर सरस्वती नदी के उद्गम क्षेत्र के पास स्थित है। यहां पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है और भक्तों को कुछ दूरी पैदल चलकर तय करनी पड़ती है। पहाड़ों के बीच बसे इस मंदिर की यात्रा श्रद्धा, धैर्य और प्रकृति के करीब जाने का अनुभव देती है। यहां का शांत वातावरण मन को सुकून और आध्यात्मिक शांति का एहसास कराता है।

 

मध्यमहेश्वर मंदिर – कठिन रास्तों के बीच आस्था का केंद्र

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित मध्यमहेश्वर मंदिर पंच केदारों में से एक है। यह मंदिर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों और सुंदर घाटियों के बीच स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि सड़क मार्ग सीधे मंदिर तक नहीं पहुंचता। कठिन चढ़ाई के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। यह यात्रा धैर्य, भक्ति और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल मानी जाती है।

 

तुंगनाथ मंदिर – दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

तुंगनाथ मंदिर - विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

 

उत्तराखंड में स्थित तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर चंद्रशिला पर्वत के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को ऊबड़-खाबड़ और चढ़ाई वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। बादलों और पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। तुंगनाथ की यात्रा भक्तों को धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देती है।

 

वैष्णो देवी मंदिर – आस्था और विश्वास की कठिन यात्रा

Vaishno Devi Shrine: Where Spirituality, History, and Devotion Converge - माता वैष्णो देवी मंदिर की गुफा कितनी पुरानी है? जानिए इसका इतिहास | Jansatta

जम्मू-कश्मीर के कटरा में मां वैष्णो देवी मंदिर त्रिकूट पर्वत पर करीब 5,200 फीट की ऊंचाई पर बना है। माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों को कठिन चढ़ाई और लंबी यात्रा पूरी करनी पड़ती है। रास्ते में कई मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ आगे बढ़ते हैं। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी के दर्शन करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

 

केदारनाथ मंदिर – हिमालय की गोद में शिव का पवित्र धाम

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच स्थित है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि मंदिर तक सीधा सड़क मार्ग नहीं है। खराब मौसम और कठिन रास्तों के बावजूद भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। केदारनाथ की यात्रा धैर्य, विश्वास और अटूट भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

 

Renault Triber पर मिल रहा ₹60,000 तक का डिस्काउंट, बस इसी महीने रहेगा यह धांसू ऑफर, जानें कीमत और फीचर्स

Renault Triber: अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Renault India अपने Triber MPV पर 60,000 रुपये तक की छूट दे रहा है। जो कि केवल इसी महीने तक लागू है। ये ऑफर राज्य, मॉडल ईयर, वेरिएंट और कस्टमर की पात्रता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। रेनॉ इंडिया की ऑफिशियल ऑफर लिस्ट के अनुसार, केरल में कस्टमर Triber पर कुल 60,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिल सकता है, जबकि गुजरात में खरीदार 45,000 रुपये तक का लाभ उठा सकते हैं। ज्यादातर दूसरे राज्यों में, MY2026 मॉडल पर ज्यादा से ज्यादा फायदे 30,000 रुपये तक हैं।

इन ऑफर्स में 30,000 रुपये तक का कैश डिस्काउंट शामिल हो सकता है। इसके अलावा, ग्राहक को एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बोनस, लॉयल्टी बोनस, रेफरल और कॉरपोरेट बेनिफिट्स जैसे फायदे भी मिल सकते हैं। हालांकि, ये लाभ ग्राहक की पात्रता और लागू स्कीम पर निर्भर करेंगे।

रेनॉ ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने शहर में लागू सही ऑफर के बारे में जानने के लिए अपने नजदीकी ऑथराइज्ड डीलर से संपर्क करें, क्योंकि ऑफर के फायदे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकते हैं और ये डीलर की भागीदारी और स्टॉक की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं।

रेनॉ ट्राइबर की कीमत अभी 5.81 लाख रुपये से 8.48 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है। यह भारतीय बाजार में सबसे सस्ती थ्री-रो वाली MPV में से एक बनी हुई है, जिसमें सात लोगों के बैठने की सुविधा मिलती है।

पावरट्रेन और इंजन

इंजन की बात करें तो, Renault Triber में 1.0 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन 72 bhp की पावर और 96 Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ ग्राहकों को 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) का विकल्प मिलता है।

ट्राइबर के मैनुअल वर्जन की ARAI-क्लेम्ड फ्यूल एफिशिएंसी 20.0 kmpl तक है, जबकि AMT वेरिएंट 17.0 kmpl तक का माइलेज देता है।

फीचर्स

वेरिएंट के आधार पर, ट्राइबर में कई फीचर्स देखने को मिलते हैं। इनमें 8 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, स्टीयरिंग पर ऑडियो कंट्रोल, पीछे की सीटों के लिए AC वेंट्स, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, कीलेस एंट्री, इलेक्ट्रिकली एडजस्ट होने वाले ORVMs और कूल्ड सेंटर स्टोरेज कंपार्टमेंट शामिल हैं।

सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो, वेरिएंट के आधार पर Triber में स्टैंडर्ड तौर पर छह एयरबैग, EBD के साथ ABS, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), हिल स्टार्ट असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), रियर पार्किंग सेंसर, रिवर्सिंग कैमरा और सीट बेल्ट रिमाइंडर दिए गए हैं।

बता दें कि Renault Triber उन खरीदारों की जरूरतों को पूरा करती है जो थ्री-रो सीटिंग वाली किफायती फैमिली गाड़ी की तलाश में हैं। जुलाई 2026 के ऑफर सीमित समय के लिए हैं और ये मैन्युफैक्चरर और भाग लेने वाली डीलरशिप द्वारा तय की गई शर्तों और नियमों के अधीन हैं।

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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

Trading Plan : इस समय बाजार में पोजीशनल ट्रेड से बचें, कुछ समय इंडेक्स में इंट्रा-डे रहें

Trading Plan : निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन कच्चे तेल ने बाजार का खेल बिगाड़ दिया है। निफ्टी 150 प्वाइंट टूटकर 24100 के नीचे फिसल गया है। बैंक निफ्टी भी करीब 750 प्वाइंट नीचे कारोबार कर रहा है। इसमें कल का लो टूटा गया है। इधर मिडकैप और स्मॉलकैप भी बिकवाली आई है। हालांकि, वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में कोई बड़ा उछाल नहीं आया है। रुपये की कमजोरी बाजार की टेंशन फिर बढ़ा रही है। आज रुपये में 56 पैसे की कमजोरी है। कल से लेकर आजतक रुपया 1% टूटा है। इधर वेस्ट एशिया संकट से क्रूड भी 86 डॉलर के पार चला गया है। इसके चलते BPCL,IOCऔर HPCL 2-3 परसेंट फिसले हैं।

रियल्टी और सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है। ये दोनों सेक्टर इंडेक्स करीब दो फीसदी फिसले हैं। साथ ही ऑटो,डिफेंस और NBFCs में भी दबाव है। LTF और श्रीराम फाइनेंस करीब 4 फीसदी गिरावट के साथ वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल है। हालांकि फार्मा और मेटल शेयरों में खरीदारी आई है। नतीजों के बाद HCL TECH में मुनाफावसूली देखने को मिली है। यह शेयर करीब 4 फीसदी से ज्यादा फिसलकर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। उधर अच्छे बिजनेस अपडेट से कॉनकॉर का शेयर करीब 5 फीसदी चढ़ा है।

बाजार: तेल की मार

बाजार पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में गिरावट है,लेकिन यह सधी हुई है। निफ्टी अभी भी कल के निचले स्तर के ऊपर ही है। बैंक निफ्टी ने जरूर कल के लो तोड़े हैं। बैंक निफ्टी अब 20 DEMA के काफी करीब है। ब्रॉडर मार्केट में भी गिरावट है। ADV/DEC 1:2.5 के करीब है। इंडिया VIX में बड़ी तेजी नहीं है। कच्चा तेल $86 के भी पार निकला है। रुपये में तेज गिरावट है। यह 96 के पार निकला है।

बाजार: अब क्या?

बाजार में गिरावट है,घबराहट नहीं है। अगर यही मार्च में हुआ होता तो निफ्टी 400 प्वाइंट गिरता। बाजार में अब डर का फैक्टर नहीं है। बाजार की सोच है कि ये मामला जल्दी ही सुलझेगा। लेकिन एक रिस्क फैक्टर खुल गया है। ऐसे में बैंक निफ्टी की रैली पर रिस्क है। बैंक निफ्टी काफी चल चुका है और अगर 20 DEMA टूटा तो करेक्शन का रिस्क होगा। इस समय बाजार में पोजीशनल ट्रेड्स से बचें। कुछ समय इंडेक्स में इंट्रा-डे रहें। पोजीशन कैरी करना भी है तो हेज के साथ ही करें

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,950-24,000 पर सपोर्ट और 24,150-24,200 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,500-57,700 पर रेजिस्टेंस है।

 

 

Bank Nifty Trend : बैंक निफ्टी में तीन दिन की बढ़त थमी, 1% से ज्यादा टूटा इंडेक्स, केनरा बैंक और कोटक ने लगाई सबसे तगड़ी चपत

 

 

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