
लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल 228 प्लस विकेटों के साथ इंडियन प्रीमियर लीग के सबसे सफल गेंदबाज हैं। वहं लंबे समय तक इस प्रारुप में भारत के भी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। लेकिन भारत का साल 2013 से 2023 तक का 10 साल का आईसीसी ट्रॉफी का सूखा ऐसा रहा कि वह अपने करियर में कुछ खास उपलब्धि लेकर नहीं जा पाए।
कहने को तो युजवेंद्र चहल टी-20 विश्वकप 2024 की विजेता टीम का हिस्सा थे लेकिन उस विश्वकप में उनको एक भी बार अंतिम ग्यारह में मौका नहीं मिला। कुछ ऐसे ही पिछले टी-20 विश्वकप गुजरे। इससे पिछले दो विश्व कप (T20I 2016- 2021) में से चहल एक में टीम का हिस्सा नहीं थे जबकि 2022 टी20 विश्व कप में टीम में होने के बाद भी उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला।वहीं एकदिवसीय विश्वकप 2019 में जब वह टीम में थे तो टीम सेमीफाइनल में हार गई।
2016 में अपने सफेद गेंद क्रिकेट की शुरुआत करने वाले 33 वर्षीय युजवेंद्र चहल ने 72 वनडे मैच खेले हैं। 27.1 की औसत और 5.26 की इकॉनोमी के साथ उन्होंने 121 विकेट चटकाए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदरेशन 42 रनों पर 6 विकेट लेना रहा। चहल ने 2022 की शुरुआत के बाद से 50 ओवर के प्रारूप में 16 मैचों में 24 विकेट लिए हैं। जनवरी 2023 में वह आखिरी बार न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में इस प्रारुप में देखे गए थे।
टी-20 अंतरराष्ट्रीय में चहल सबसे सफल गेंदबाज
वहीं टी-20 अंतरराष्ट्रीय की बात करें तो युजवेंद्र चहल ने अपना आखिरी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ अगस्त 2023 में खेला था। यह सीरीज भारत 2-3 से हारा था।युजवेंद्र चहल ने 80 मैचों में 25.1 की औसत और 8.19 की इकॉनोमी से 96 विेकेट चटकाए हैं।इस प्रारुप में उनसे ज्यादा विकेट हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह ने ही लिए हैं, वह भी इस कारण क्योंकि वह लगातार यह प्रारुप खेल रहे हैं और युजवेंद्र चहल लंबे समय से इस प्रारुप से बाहर हैं।

हाल ही में उन्होंने अपने फर्स्ट-क्लास करियर को अलविदा कह दिया है। इसके साथ ही भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने का उनका सपना तो खत्म हो गया है, व्हाइट-बॉल क्रिकेट में राष्ट्रीय टीम में वापसी के रास्ते तो खुले हैं। लेकिन 36 साल के स्पिनर को एशियाई खेलों तक में जगह नहीं मिली।
चहल ने कहा“मैंने अभी हार नहीं मानी है। देश के लिए खेलने की भूख अभी भी मुझमें बहुत ज़्यादा है। मेरा मानना है कि मुझमें अभी भी क्रिकेट बाकी है, और मैं वनडे और टी 20 फ़ॉर्मेट में एक और मौका पाने के लिए अपनी पूरी जान लगा दूँगा।हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन, रणबीर सिंह महिंद्रा सर और अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का मेरे सफ़र के दौरान लगातार समर्थन, भरोसा और विश्वास बनाए रखने के लिए खास तौर पर शुक्रिया। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “10 साल की उम्र में पहली बार रेड बॉल पकड़ने से लेकर अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच खेलने तक, यह एक शानदार सफ़र रहा है।”
टेस्ट टीम में जगह बनाने के करीब नहीं पहुँच पाए
युजवेंद्र चहल ने अपने फर्स्ट-क्लास करियर को अलविदा कह दिया है।वे कभी भी टेस्ट टीम में जगह बनाने के करीब नहीं पहुँच पाए, क्योंकि भारत के पास रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्टार जोड़ी हमेशा मौजूद रही।
चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, “मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ़ एक और फ़ॉर्मेट नहीं था।” “इसी फ़ॉर्मेट में मैंने धैर्य, चरित्र, मज़बूती और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी को समझा।” चहल के फर्स्ट-क्लास करियर की शुरुआत 2009 में हरियाणा के साथ हुई थी और उन्होंने 49 मैचों में 32.27 के औसत से 148 विकेट लिए। उन्होंने 2026 का काउंटी चैंपियनशिप नॉर्थम्प्टनशायर के साथ खेला, जिसमें डिवीज़न टू में 16.14 के औसत से 21 विकेट लिए। उनका आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच मिडलसेक्स के खिलाफ़ था, जिसमें मिडलसेक्स ने सात विकेट से जीत हासिल की और नॉर्थम्प्टनशायर के प्रमोशन की उम्मीदों को खत्म कर दिया। “मैंने अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच लॉर्ड्स में खेला था। ये शब्द कहना भावुक कर देने वाला है क्योंकि टेस्ट कैप पहनना हमेशा से मेरा सपना रहा है, जिसे मैंने कई सालों तक संजोकर रखा। भले ही वह सपना पूरा नहीं हो पाया, लेकिन मैं अपने अब तक के सफ़र से सचमुच संतुष्ट हूँ और इस फ़ॉर्मेट में मिले हर मौके के लिए बहुत आभारी हूँ।”









