जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रॉफिट जून तिमाही में 9.2 फीसदी बढ़ा, एआरपीयू 215 रुपये पहुंचा

जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रॉफिट जून तिमाही में 9.2 फीसदी बढ़ा। इसमें मोबिलिटी और होम सर्विसेज सब्सक्राइबर्स की अच्छी ग्रोथ का हाथ रहा। जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 7,108 करोड़ रुपये था। कंपनी ने 17 जुलाई को नतीजों का ऐलान किया।

जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11.8 फीसदी बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 35,032 करोड़ रुपये था। तिमाही के दौरान कुल रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 12 फीसदी बढ़कर 45,961 करोड़ रुपये रहा।

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA 15.1 फीसदी बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 18,135 करोड़ रुपये था। जियो ने कहा है कि ग्रोथ पर हायर फाइनेंस कॉस्ट और 5जी एसेट कैपिटलाइजेशन की वजह से डेप्रिसिएशन का असर पड़ा।

जियो का एआरपीयू साल दर साल आधार पर 3.3 फीसदी बढ़कर 215.6 करोड़ रुपये रहा। प्रति व्यक्ति डेटा कंजम्प्शन 43.7 जीबी प्रति माह रहा। जून तिमाही में टोटल डेटा ट्रैफिक साल दर साल आधार पर 26.9 फीसदी बढ़ा। जियो के कुल सब्सक्राइबर की संख्या बढ़कर 53.3 करोड़ हो गई। इसमें 5जी के 28.5 करोड़ सब्सक्राइबर शामिल हैं।

कंपनी ने बताया कि डिजिटल सर्विसेज का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 20 फीसदी बढ़ा। इसमें कंटेंट, क्लाउंड कंप्यूटिंग, IoT और मैनेज्ड सर्विसेज का हाथ रहा। कनेक्टिविटी की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 11 फीसदी रही।

जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश एम अंबानी ने कहा, “जियो ने खुद को एक डीप-टेक कंपनी के रूप में स्थापित किया है। इसने कई एडवान्स्ड टेक्नोलॉजीज में इनोवेशन की रफ्तार दिखाई है। इसका पता हमारे स्ट्रॉन्ग पेटेंट पोर्टफोलियो से मिलता है, जिसे दुनियाभर में पहचान मिली है।”

Ravi Pradosh Vrat 2026 Date: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत भी होगा रविवार को, इस दिन बन रहा सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग

Ravi Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का महत्वपूर्ण स्थान है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसमें प्रदोष काल में पूजा का विधान है। माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में महादेव अपने निवास स्थान कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते हैं। इस समय मां पार्वती संग शिव परिवार का पूजन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

प्रदोष व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस समय आषाढ़ माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है। इस माह का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार के दिन रखा जाएगा, क्योंकि आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि रविवार के दिन पड़ रही है। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और इंद्र योग बन रहा है। साथ ही इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र लगने से इसका महत्व और बढ़ गया है। आइए जानें आषाढ़ माह का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा?

जुलाई का अंतिम प्रदोष 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर में 1 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि की समाप्ति 27 जुलाई को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर होगी। इस व्रत में उदयातिथि की गणना नहीं होती है, प्रदोष काल का महत्व होता है। इस आधार पर जुलाई का अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई दिन रविवार को है। रविवार को होने वाले प्रदोष की वजह से यह रवि प्रदोष व्रत होगा।

रवि प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

आषाढ़ माह के अंतिम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 7 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा। यह मुहूर्त रात को 9 बजकर 21 मिनट पर खत्म होगा। प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:16 ए एम से लेकर 04:58 ए एम तक है, वहीं अभिजित मुहूर्त ठीक दोपहर 12:00 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त देर रात 12:07 ए एम से लेकर 12:49 ए एम तक है।

रवि प्रदोष व्रत में रहेगा सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का संयोग

रवि प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 07 बजकर 34 मिनट पर बनेगा और अगले दिन 27 जुलाई को सुबह में 05 बजकर 40 मिनट तक है। इस योग में प्रदोष व्रत की पूजा सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाली होगी। इसके अलावा प्रदोष पर इंद्र योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से वैधृति योग बनेगा। उस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07 बजकर 34 मिनट तक है, उसके बाद मूल नक्षत्र होगा।

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4.6 करोड़ रुपये की Ferrari Amalfi Spider भारत में लॉन्च, 3.3 सेकंड में पकड़ लेगी 100kmph की रफ्तार

Ferrari India ने अपनी नई Amalfi Spider की बुकिंग लेना शुरू कर दिया है। यह कार कंपनी की Amalfi Grand Tourer का कन्वर्टिबल वर्जन है। मार्च में ग्लोबल लॉन्च के ठीक चार महीने बाद आ रही इस कार की कीमत, ऑप्शन जोड़ने से पहले 4.6 करोड़ रुपये है। Ferrari Amalfi Spider में वही 3.9 लीटर ट्विन-टर्बो V8 इंजन दिया गया है, जो इसके कूपे मॉडल में मिलता है। यह इंजन 640 hp की पावर और 760 Nm का टॉर्क देता है। इसमें पावर को पीछे के पहियों तक पहुंचाने के लिए 8-स्पीड डुअल-क्लच गियरबॉक्स दिया गया है।

भारतीय ग्राहकों के लिए यह कार एक लग्जरी और परफॉर्मेंस का उदाहरण ज्यादा है, क्योंकि इसकी कीमत ज्यादातर लग्जरी कार खरीदारों के बजट से काफी ऊपर है। हालांकि, इससे यह जरूर पता चलता है कि Ferrari भारत को एक महत्वपूर्ण बाजार मान रही है और यहां ग्लोबल लॉन्च के करीब ही अपनी कारें पेश कर रही है।

कीमत और पोजिशनिंग

Amalfi Spider, Amalfi Grand Tourer का कन्वर्टिबल वर्जन है और जाहिर है कि इसकी कीमत इसके हार्ड-टॉप मॉडल से ज्यादा है। इसकी कीमत Amalfi Coupe से ₹52 लाख ज्यादा है, जो अभी ₹4.08 करोड़ में मिल रही है। खरीदारों को इस कार में लंबी दूरी के सफर में आराम और दमदार परफॉर्मेंस दोनों का शानदार अनुभव मिलेगा। इसके अलावा, ओपन-टॉप ड्राइविंग का मजा और अपनी पसंद के मुताबिक कार को कस्टमाइज कराने का विकल्प भी मिलेगा।

इंजन, परफॉर्मेंस

Amalfi Spider में जाना-पहचाना 3.9-लीटर ट्विन-टर्बो V8 इंजन लगा है, जो 640 hp की पावर और 760 Nm का टॉर्क देता है। यह पावर 8-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के जरिए सिर्फ पिछले पहियों तक पहुंचती है। Ferrari का दावा है कि यह कार 0 से 100 kmph की रफ्तार सिर्फ 3.3 सेकंड में पकड़ लेती है और इसकी टॉप स्पीड 320 kmph है। हालांकि, कन्वर्टिबल डिजाइन की वजह से यह कार Coupe मॉडल से 86 kg भारी है, लेकिन इसके बावजूद इसकी परफॉर्मेंस लगभग Amalfi Coupe जैसी ही दमदार बनी हुई है।

डिजाइन

दिखने में, Spider Coupe के स्लीक आकार जैसा ही है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा फर्क इसकी फोल्ड होने वाली फैब्रिक रूफ है। यह रूफ 60 kmph तक की रफ्तार पर 13.5 सेकंड में खुल या बंद हो जाती है और यह चार कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

Ferrari का दावा है कि Amalfi Spider की पांच-लेयर (Five-Layer) फैब्रिक रूफ इस तरह तैयार की गई है कि कार के अंदर शोर, वाइब्रेशन और झटके लगभग हार्ड-टॉप मॉडल जितनी ही कम महसूस होती हैं। इसके अलावा, पीछे की सीटों के पीछे खास विंड डिफ्लेक्टर लगाए गए हैं, जो खुली छत के साथ ड्राइविंग के दौरान हवा के शोर को कम करने में मदद करते हैं। इससे लंबी यात्रा भी ज्यादा आरामदायक बनती है। Ferrari ने इस कार के लिए Rosso Tramonto नाम का एक एक्सक्लूसिव एक्सटीरियर (बाहरी) शेड भी पेश किया है, जिससे Amalfi Spider की पहचान बाकी मॉडलों से अलग नजर आती है।

इंटीरियर और फीचर्स

Ferrari Amalfi Spider का इंटीरियर काफी हद तक Amalfi Coupe जैसा ही है। इसमें 2+2 सीटिंग लेआउट दिया गया है, यानी आगे दो और पीछे दो सीटें मिलती हैं। कार का केबिन पूरी तरह ड्राइवर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

फीचर्स की बात करें तो इसमें 10.25 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 8.8 इंच का पैसेंजर डिस्प्ले और 15.6 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले मिलता है। इसके अलावा, कार में पावर्ड स्पोर्ट्स सीट्स, तीन-स्पोक स्टीयरिंग व्हील (जिस पर कई फिजिकल कंट्रोल दिए गए हैं), स्टाइलिश AC वेंट्स और एल्यूमिनियम फिनिश सेंटर टनल दी गई है, जो इसे ‘ग्रैंड टूरर’ होने का अहसास कराते हैं।

टेक्नोलॉजी और आराम के मामले में, Amalfi Spider में वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, कनेक्टेड कार फीचर्स, ADAS, एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और वायरलेस चार्जिंग पैड जैसे फीचर्स मिलते हैं। रूफ बंद होने पर इसका बूट स्पेस 255 लीटर और रूफ हटने पर 172 लीटर होता है, जो कन्वर्टिबल सुपरकार के हिसाब से काफी प्रैक्टिकल है।

Ferrari इस कार में सीटों की अपहोल्स्ट्री, इंटीरियर ट्रिम और कलर स्कीम को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज कराने का विकल्प भी देती है, जिससे ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक एक अलग और खास Amalfi Spider तैयार कर सकते हैं।

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Aashadh Gupt Navratri 2026: बस 3 उपायों से प्रसन्न होंगी मां काली, मां बगलामुखी और मां मातंगी तक, 23 जुलाई तक चलेगा गुप्त नवरात्रि पर्व

Aashadh Gupt Navratri 2026: चैत्र माह से शुरू होने वाले हिंदू वर्ष में गुप्त नवरात्रि का पर्व 4 बार आता है। चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ माह में नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इनमें से चैत्र और आश्विन माह के नवरात्रि पर्व गृहस्थ श्रद्धालु बहुत धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन आषाढ़ और माघ माह में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही 10 महाविद्याओं की भी उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तंत्र साधना और सिद्धयां प्राप्त करने का असवर होता है। हालांकि, गृहस्थ श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धानुसार पूजा और उपाय करते हैं।

इस समय आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि चल रही है। इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हुई थी और समापन 23 जुलाई को होगा। इस अवधि में भक्त शक्ति की उपासना करते हैं, नौ दिनों का उपवास करते हैं और मां दुर्गा का ध्यान करते हैं। इस पर्व में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र साधकों और शक्ति के साधकों के लिए बहुत अहम स्थान रखता है। आइए जानें क्या उपाय करने से मां काली, मां बगलामुखी और मातंगी माता को प्रसन्न कर सकते हैं?

गुप्त नवरात्रि में करें ये 3 आसान उपाय

घर की पूर्व दिशा में मां मातंगी की तस्वीर रखें : मां मातंगी की तस्वीर में अक्सर उनके हाथ में तोता दिखाया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी तस्वीर घर की पूर्व दिशा में लगाने से व्यक्ति की छिपी हुई प्रतिभा निखरती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और आध्यात्मिक व व्यक्तिगत विकास में मदद मिलती है।

मां बगलामुखी को हल्दी अर्पित करें : मां बगलामुखी को रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। मां बगलामुखी को हल्दी बेहद प्रिय मानी जाती है। उन्हें हल्दी अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बुरी नजर या विरोधियों से सुरक्षा मिलने की मान्यता है।

मां काली को नारियल अर्पित करें : मां काली परिवर्तन और नई शुरुआत की देवी मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां काली को नारियल चढ़ाने से मन की उलझनें दूर होती हैं, नकारात्मक विचार कम होते हैं और मानसिक शक्ति बढ़ती है। माना जाता है कि वे जीवन की बाधाओं को दूर करने में भी मदद करती हैं।

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Reliance Industries Q1 Results: कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 25 फीसदी बढ़कर 3.40 लाख करोड़ रहा, उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन

Reliance Industries Q1 Results: रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। सभी प्रमुख सेगमेंट यानी ऑयल-टू-केमिकल (ओ2सी), डिजिटल सर्विसेज और रिटेल की ग्रोथ डबल डिजिट में रही। इससे आरआईएल को बीते कुछ सालों में एनर्जी मार्केट में आए सबसे बड़े संकट का सामना करने में मदद मिली।

RIL का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 3.40 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें सभी बिजनेस सेगमेंट के अच्छे प्रदर्शन का हाथ रहा। रेकरिंग कंसॉलिडेटेड EBITDA एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 10.1 फीसदी बढ़कर 54,067 करोड़ रुपये रहा। टैक्स से पहले प्रॉफिट (PBT) 8.5 फीसदी बढ़कर 30,630 करोड़ रुपये रहा।

आरआईएल का टैक्स बाद रेकरिंग प्रॉफिट (मॉइनरिटी इंटरेस्ट से पहले) जून तिमाही में एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 6.1 फीसदी बढ़कर 23,196 करोड़ रुपये रहा, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। हालांकि, रिपोर्टेड प्रॉफिट में गिरावट आई। इसकी वजह यह है कि एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी को एशियन पेंट्स में हिस्सेदारी बेचने से 8,924 करोड़ रुपये का वन-टाइम गेन हुआ था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जून तिमाही में 38,682 करोड़ रुपये का निवेश किया। ऑपरेटिंग कैश फ्लो से कंपनी को पूंजीगत खर्च करने में मदद मिली। जून तिमाही के अंत में कंपनी पर शुद्ध कर्ज (Net Debt) 1.23 लाख करोड़ रुपये पर बना रहा। आरआईएल ने 17 जुलाई को शेयर बाजार बंद होने के बाद जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया।

RIL के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा, “रिलायंस ने FY27 की अच्छी शुरुआत की है। सभी बिजनेसेज का प्रदर्शन मजबूत रहा। हमारे विविध बिजनेस पोर्टफोलियो ने एक बार ऐसी तिमाही में अपनी ताकत दिखाई है, जिसमें जियोपॉलिटिकल टेंशन लगातार बना रहा और कमोडिटी मार्केट्स में उतार-चढ़ाव रहा।”

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

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दिल्ली में सोना 800 रुपये गिरकर 3 हफ्ते के निचले स्तर पर, चांदी 2000 रुपये फिसली

दिल्ली में 17 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इससे सोना की कीमत तीन हफ्ते के निचले स्तर पर आ गई। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 800 रुपये गिरकर 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी 2,000 रुपये गिरकर 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर क्लोज हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी और चांदी में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.4 फीसदी बढ़कर 3,987.23 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 0.03 फीसदी गिरकर 3,990 डॉलर प्रति औंस था। इस हफ्ते सोना 3 फीसदी से ज्यााद गिर चुका है। स्पॉट सिल्वर 0.6 फीसदी की गिरावट के साथ 55.18 डॉलर प्रित औंस था।

इंडिया में गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट आई। कमोडिटी एक्सचेंज MCX में शाम के कारोबार में यह 0.25 फीसदी यानी 348 रुपये गिरकर 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.84 फीसदी यानी 2,14,149 रुपये गिरकर प्रति किलोग्राम चल रहा था।

एनालिस्ट्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतों पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई का असर पड़ रहा है। इस लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल है। क्रूड महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका है। महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है।

फॉरेक्स डॉट कॉम में मार्केट एनालिस्ट रजाकजादा ने कहा, “कीमतें नीचे जाने पर शॉर्ट सेलर्स मौके का फायदा उठाते हैं। अगर ऑयल की कीमतें और ऊपर जाती हैं तो इसका असर गोल्ड पर दिखेगा। इसकी वजह यह है कि ऑयल महंगा होने से इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा होगा। इससे इंटरेस्ट रेट बढ़ेगा जिससे लोगों की दिलचस्पी बॉन्ड्स में बढ़ेगी।” इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में गोल्ड की चमक घटती है, क्योंकि गोल्ड ऐसा एसेट है जिसकी कोई यील्ड नहीं होती। ट्रेडर्स को अमेरिका में सितंबर में इंटरेस्ट बढ़ने की 50 फीसदी उम्मीद है।

इस साल जनवरी के बाद से लगातार सोने पर दबाव दिखा है। जनवरी के आखिर में इसकी कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद से इसमें गिरावट आई है। यह रिकॉर्ड ऊंचाई से 30 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों पर दबाव दिखा।

वाराणसी में विदेशी नागरिक का हाईवोल्टेज ड्रामा, घरों में घुसकर फेंका सामान और निवासी को काटा, वीडियो वायरल

Varanasi Foreign National Incident: वाराणसी के एक इलाके में लोग तब दहशत में आ गए जब एक विदेशी नागरिक ने कथित तौर पर इलाके में जमकर हंगामा किया। वह घरों में घुस गया, घर का सामान फेंका और एक निवासी को काट भी लिया, जिसके बाद शहर की पुलिस ने उसे काबू में किया और हिरासत में ले लिया। इस घटना का वीडियो ऑनलाइन सामने आया है, जिसमें वह व्यक्ति चिल्लाता, कूदता और लोगों की तरफ झपटता हुआ दिखाई दे रहा है।

बता दें कि यह घटना गुरुवार, 16 जुलाई को कोतवाली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले सप्तसागर मेडिसिन मार्केट इलाके में हुई। बताया जा रहा है कि विदेशी नागरिक घबराहट की हालत में इलाके में भागा और फिर एक रिहायशी इमारत में घुस गया। वह कथित तौर पर ऊपरी मंजिलों पर चढ़ गया और घर का सामान फेंकने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे शांत करने की कई बार कोशिश की, लेकिन उसने कोई सहयोग नहीं किया।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, वह सिर्फ़ हाफ पैंट पहने हुए दिखाई दे रहा है। वह लोगों पर चिल्ला रहा था, सड़क पर कूद रहा था और आक्रामक व्यवहार कर रहा था। इस हंगामे के दौरान, खबर है कि जब उसे काबू करने की कोशिश की जा रही थी, तो उसने एक निवासी के हाथ पर काट लिया। काफी जद्दोजहद के बाद, स्थानीय लोग उसे काबू करने में सफल रहे, और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।। इसके बाद पुलिस ने उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया।

हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी नागरिक कथित तौर पर भांग के नशे में था। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

इंटरनेट पर विदेशी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग

विदेशी नागरिक के हंगामा करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग उसके व्यवहार पर मजाक कर रहे हैं, जबकि कई लोगों ने स्थानीय लोगों को परेशान करने के लिए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

एक यूजर ने दावा किया, “शायद उसने कुछ नशीली चीज का सेवन किया होगा। उसके कल्चर में यह बहुत आम बात है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “वाराणसी में भांग के इस्तेमाल को लेकर नियम सख्त होने चाहिए। हाल ही में ट्रेन यात्रा के दौरान वाराणसी से एक व्यक्ति ट्रेन में चढ़ा था, जो पूरी तरह नशे में था। उसे यह भी पता नहीं था कि उसे कहां जाना है और वह टीटी से बहस भी कर रहा था।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या स्थानीय पुलिस कुछ नहीं कर सकती? इसे तुरंत हिरासत में लेना चाहिए, क्योंकि यह लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।”

एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यहीं पर जनता के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।”

एक यूजर ने कहा, “साफ है कि उसने कुछ नशा कर रखा है। अब समय आ गया है कि भारत में भी पुलिस अपराधियों को शांत करने के लिए टेजर का इस्तेमाल करे, जैसा कि अमेरिका में होता है।”

एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या हमारे यहां यूरोप और अमेरिका जैसा डिपोर्टेशन सिस्टम (देश से बाहर भेजने की व्यवस्था) नहीं है?”

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

MF Investment : महंगाई के दौर में सिर्फ बचत नहीं,बल्कि स्मार्ट निवेश भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में स्टेप-अप SIP आपकी बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल सिर्फ निवेश बढ़ाने का नहीं,बल्कि बाजार की गिरावट में उस निवेश को बनाए रखने का भी है। तो अतिरिक्त रकम कहां लगानी चाहिए? क्या हर ट्रेंडिंग फंड सही विकल्प है? और बाजार की अस्थिरता में गोल-बेस्ड निवेश कैसे आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है? आज यहा इन्हीं अहम सवालों के जवाब जानेंगे वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी (Hemant Rustagi) से

क्या है स्टेप-अप SIP?

इसमें हर साल SIP की रकम तय परसेंट या तय रकम से बढ़ाई जाती है। हमें इसमें बढ़ती आय के हिसाब से निवेश बढ़ाने की सुविधा मिलती है। छोटी राशि से निवेश की शुरुआत करना आसान होता है। कंपाउंडिंग का लाभ समय के साथ अधिक मिलता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा निवेश फंड तैयार करने में मदद मिलती है।

कैसे बढ़ता है रिटर्न ?

सामान्य SIP में निवेश राशि पूरे समय एक जैसी रहती है। स्टेप-अप SIP में हर साल निवेश बढ़ने से ज्यादा रकम निवेश होती है। बढ़े हुए निवेश पर कंपाउंडिंग का असर और ज्यादा मिलता है। लंबी अवधि में रिटर्न सामान्य SIP से काफी ज्यादा हो सकता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद

स्टेप-अप SIP नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद होती है। इसमें सालाना सैलेरी बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ेगा। निवेश बढ़ाने का अतिरिक्त बोझ एक साथ महसूस नहीं होता। फाइनेंशियल गोल जल्दी हासिल करने में मदद मिलती है। रेग्युलर बचत और निवेश की आदत बनी रहती है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुसार बेहतर फंड तैयार होता है।

बड़े फाइनेंशियल गोल होंगे हासिल

इससे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फंड तैयार होता है। यह तरीका घर खरीदने के लक्ष्य को आसान बनाता है। रिटायरमेंट के लिए मजबूत कॉर्पस बनाता है।

यह लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों के लिए सही निवेश रणनीति होती है।

कहां लगाएं अतिरिक्त राशि?

स्टेप-अप SIP को सही जगह लगाना निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती है। अतिरिक्त रकम को मौजूदा SIP में बढ़ाना सही कदम होता है। नए सेक्टर,थीमैटिक फंड में अतिरिक्त निवेश में ज्यादा जोखिम होता है। ट्रेंडिंग सेक्टर,थीमैटिक और स्मॉलकैप फंड में निवेश करने में जोखिम होता है। ऐसे फंड Cyclical होते हैं और इनमें गलत समय पर निवेश मुश्किल बढ़ाएगा। रिटेल निवेशकों के लिए इन फंडों पर नजर रखना आसान नहीं होता। जब SIP काफी बढ़ जाए,तब पोर्टफोलियो में मिडकैप या स्मॉलकैप फंड जोड़ें। सही एलोकेशन में आवंटन सेलंबे समय में बेहतर रिटर्न संभव है।

बाजार की अस्थिरता से कैसे निपटें?

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। गिरावट में डरने की बजाय अनुशासित निवेश बरकरार रखें। गिरावट में लंबी अवधि का नजरिया हमेशा काम आता है। अस्थिर बाजार में SIP से लंबे समय में अच्छे रिटर्न मिलते हैं। गोल बेस्ड निवेश गिरावट में निवेशक को इमोशनल फैसले लेने से रोकता है। यदि पैसा 20–25 साल बाद चाहिए तो आज की गिरावट से क्यों डरना। साफ समय-सीमा से निवेशक का बाजार पर भरोसा बना रहता है। बाजार में जल्दबाजी में डेट या हाइब्रिड फंड में शिफ्ट होने से बचें। इससे लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर असर पड़ सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPFO Pension Calculation: 10 साल की नौकरी के बाद हर महीने कितनी मिलेगी पेंशन? ₹10,000 और ₹20,000 की सैलरी पर समझें पूरा गणित

EPFO EPS 2026 Pension Calculator: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सदस्यों के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने पिछले दिनों नई कर्मचारी पेंशन योजना (EPS 2026) को नोटिफाई कर दिया। इसके बाद से पेंशन कैलकुलेशन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। करीब 6 करोड़ ईपीएफओ सदस्यों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अलग-अलग सैलरी ब्रैकेट के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद हर महीने कितनी गारंटीड पेंशन मिलेगी?

राहत की बात यह है कि नई EPS 2026 में भी मंथली पेंशन निकालने का पुराना फॉर्मूला और न्यूनतम 10 साल की सेवा का नियम पहले जैसा ही बरकरार रखा गया है। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹10,000 या ₹20,000 है, तो 10 साल की नौकरी के बाद आपको हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।

पेंशन पाने का बेसिक नियम: 10 साल की सर्विस जरूरी

ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, हर महीने रेगुलर पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य नौकरी पूरी करना अनिवार्य है। 58 साल की उम्र पूरी होने पर मासिक पेंशन मिलनी शुरू होती है। हालांकि, 50 साल की उम्र के बाद कुछ कटौती के साथ अर्ली पेंशन का विकल्प भी मिलता है।

10 साल से कम नौकरी पर क्या होगा?

अगर आपकी कुल सर्विस 10 साल से कम है, तो आपको मंथली पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसे में आप या तो स्कीम सर्टिफिकेट लेकर अगली नौकरी में सर्विस जोड़ सकते हैं, या फिर ईपीएस का पूरा पैसा एकमुश्त निकाल सकते हैं।

कैसे होती है पेंशन की गणना?

EPFO एक तय फॉर्मूले के आधार पर आपकी मासिक पेंशन तय करता है:

मासिक पेंशन= पेंशन योग्य वेतन×पेंशन योग्य सेवा/70

पेंशन योग्य वेतन: इसका मतलब आपके आखिरी 60 महीनों के औसत मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) से है।

अधिकतम सीमा (Wage Ceiling): सामान्य तौर पर ईपीएस के लिए अधिकतम पेंशन योग्य सैलरी की सीमा ₹15,000 तय है, लेकिन कई मामलों में यह वास्तविक सैलरी या तय मानक (जैसे- ₹10,000 या ₹20,000) के आधार पर कैलकुलेट की जाती है।

कैलकुलेशन 1: अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹10,000 है

अगर आपकी औसत बेसिक सैलरी और डीए ₹10,000 है, तो नौकरी के वर्षों के हिसाब से आपकी पेंशन इस प्रकार बनेगी:

10 साल की नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (10,000×10)÷70=₹1,428

मासिक पेंशन: आपको हर महीने करीब ₹1,428 की पेंशन मिलेगी।

20 साल की नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (10,000×20)÷70=₹2,857

मासिक पेंशन: यह बढ़कर करीब ₹2,857 प्रति माह हो जाएगी।

35 साल की अधिकतम नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (10,000×35)÷70=₹5,000

मासिक पेंशन: आपको अधिकतम ₹5,000 प्रति माह की पेंशन मिल सकती है।

कैलकुलेशन 2: अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹20,000 है

अगर आपकी वास्तविक सैलरी ₹20,000 है और आपका कंट्रीब्यूशन सीलिंग लिमिट से ऊपर वास्तविक वेतन पर है, तो कैलकुलेशन इस प्रकार होगी:

10 साल की नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (20,000×10)÷70=₹2,857

मासिक पेंशन: आपको हर महीने करीब ₹2,857 की गारंटेड पेंशन मिलेगी।

20 साल की नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (20,000×20)÷70=₹5,714

मासिक पेंशन: यह राशि बढ़कर करीब ₹5,714 प्रति माह हो जाएगी।

35 साल की अधिकतम नौकरी पर:

कैलकुलेशन: (20,000×35)÷70=₹10,000

मासिक पेंशन: आपको लाइफटाइम ₹10,000 प्रति माह की ठीक-ठाक पेंशन मिल सकती है।

अगर आपकी सैलरी ₹10,000 या ₹20,000 है, तो 10 साल बाद हर महीने कितनी रकम मिलेगी?

न्यूनतम पेंशन का सुरक्षा कवच

ईपीएस के तहत वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह तय की गई है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी की 10 साल की नौकरी के बाद ईपीएफओ के फॉर्मूले से पेंशन ₹1,000 से कम यानी मान लीजिए ₹80) बनती है, तो भी सरकार उसे बढ़ाकर न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह देना सुनिश्चित करेगी।

हालांकि, देश भर के पेंशनभोगी लंबे समय से इस ₹1,000 की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर ₹5,000 से ₹7,500 करने की मांग कर रहे हैं, जिस पर सरकार की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।

टैक्सपेयर्स और नौकरी बदलने वालों के लिए जरूरी सलाह

अगर आप करियर के दौरान अपनी नौकरी बदल रहे हैं, तो कभी भी पुराने ईपीएफ (EPF) और ईपीएस (EPS) के पैसे को एकमुश्त निकालने की गलती न करें। हमेशा अपने UAN के जरिए अपने पुराने पीएफ अकाउंट को नई कंपनी में ट्रांसफर कराएं। ऐसा करने से आपकी पेंशन योग्य सेवा लगातार जुड़ती रहती है और बिना किसी रुकावट के आपकी 10 साल की पात्रता आसानी से पूरी हो जाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।