Urban Company का Kent RO पर मानहानि केस, हाई कोर्ट में विज्ञापन हटाने पर बनी बात

Urban Company ने Kent RO Systems के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और ब्रांड को बदनाम करने का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि Kent RO ने अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट में उसके Native वॉटर प्यूरीफायर को लेकर गलत और भ्रामक दावे किए।

कंपनी ने रविवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह मुकदमा 11 अगस्त 2026 को दायर किया गया था।

किस बात पर हुआ विवाद?

Urban Company का कहना है कि Kent RO की विज्ञापन मुहिम में उसके Native M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्यूरीफायर के दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल तक सर्विसिंग की जरूरत नहीं वाले फीचर को निशाना बनाया गया।

कंपनी के मुताबिक Kent RO ने इन दावों को ‘मार्केटिंग गिमिक’ बताया और कहा कि Native वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना उपभोक्ताओं के लिए ‘असुरक्षित’ और ‘जोखिम भरा’ है।

Kent RO ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई 12 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान Kent RO ने अदालत से कहा कि वह विवादित विज्ञापन हटा देगा। साथ ही भविष्य में ऐसे विज्ञापन या प्रचार सामग्री भी नहीं चलाएगा, जिसमें दो साल की फिल्टर लाइफ या दो साल तक बिना सर्विसिंग वाले फीचर को लेकर Urban Company के खिलाफ इसी तरह के दावे किए जाएं।

Urban Company के मुताबिक अदालत ने Kent RO को 12 अगस्त से 15 दिनों के भीतर विवादित विज्ञापन और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश 12 अगस्त को पारित हुआ था, जबकि इसे 22 अगस्त को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

दोनों कंपनियों के बीच और भी कानूनी मामले

Urban Company ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच अन्य कानूनी मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं। इनमें Kent RO की ओर से दायर पेटेंट उल्लंघन का मुकदमा, उस पेटेंट को चुनौती देने वाला Urban Company का जवाबी दावा और Kent RO के खिलाफ दायर टॉर्टियस इंटरफेरेंस का मामला शामिल है।

शेयरों में कैसी रही चाल?

Urban Company का शेयर शुक्रवार को 8.19% चढ़कर ₹157.41 पर बंद हुआ था। इस साल अब तक शेयर करीब 20% चढ़ चुका है। वहीं पिछले 12 महीनों में इसमें करीब 6% की गिरावट रही है।

FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। वहीं दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने सभी तरह के घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया है।

FSSAI ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

30 दिन के लिए लाइसेंस सस्पेंड

नई दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd के परिसर में निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां मिलीं। जांच में डिजाइन, ऑपरेशनल कंट्रोल, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने में खामियां पाई गईं।

इसके बाद FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। कंपनी को इस दौरान सभी खाद्य कारोबार रोकने और कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।

SDP Industries के सभी घी पर रोक

दमन की SDP Industries Pvt Ltd के खिलाफ FSSAI ने घी में मिलावट की आशंका के चलते प्रतिबंध आदेश जारी किया है।

जांच में कंपनी के Shraddha, Shree Saras और Gokul ब्रांड के कई घी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में घी के नमूनों में A-sitosterol मिला, जो घी में नहीं होना चाहिए। साथ ही फैटी एसिड की संरचना भी तय मानकों से अलग पाई गई।

FSSAI के मुताबिक इससे वनस्पति या दूसरे बाहरी फैट की मिलावट का संकेत मिला। कंपनी को अपने अधिकृत परिसर से बने, स्टोर किए गए या बेचे जाने वाले सभी घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है।

हाल में कई बड़ी कंपनियों पर भी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब FSSAI ने हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इनमें Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Mondelez India, Ferrero India समेत कई बड़े ब्रांड शामिल हैं।

ये नोटिस भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं।

Amazon, Flipkart और Domino’s भी कार्रवाई की जद में

FSSAI ने बताया कि Amazon और Flipkart को भी कुल 12 नोटिस जारी किए गए हैं। Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।

इसके अलावा KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee समेत 30 से ज्यादा फूड सर्विस कंपनियों को भी नोटिस मिले हैं। नियामक ने Domino’s के पांच लाइसेंस भी सस्पेंड किए हैं। FSSAI का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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Home Loan: सस्ता लोन पड़ न जाए महंगा! होम लोन लेने से पहले इन 6 पॉइंट्स में समझ लें प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस का पूरा गणित

Home Loan Hidden Charges: नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ बैंक की ब्याज दरों की तुलना करते हैं। लेकिन सच यह है कि लोन लेने का कुल खर्च सिर्फ ब्याज तक सीमित नहीं होता।

बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) आपकी लोन एप्लिकेशन की जांच और प्रोसेसिंग के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम ‘प्रोसेसिंग फीस’ और अन्य चार्जेस के रूप में वसूलती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में कोई छिपा हुआ खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े।

1. क्या होती है होम लोन प्रोसेसिंग फीस?

प्रोसेसिंग फीस वह प्रशासनिक शुल्क है, जो बैंक आपके लोन आवेदन की क्रेडिट जांच, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और अन्य कागजी कार्रवाई के लिए लेता है। यह फीस हर बैंक में अलग-अलग होती है। कुछ बैंक एक तय राशि वसूलते हैं, तो कुछ लोन राशि का 0.25% से लेकर 2% तक चार्ज करते हैं। त्योहारों या विशेष स्कीम के दौरान बैंक इस फीस पर पूरी या आंशिक छूट भी देते हैं।

2. लोन रिजेक्ट होने पर क्या प्रोसेसिंग फीस वापस मिलती है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर लोन मंजूर नहीं हुआ, तो बैंक फीस वापस कर देगा लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को आवेदन के समय ही साफ-साफ बताना होगा कि लोन रिजेक्ट या डिसबर्स न होने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस का कितना हिस्सा रिफंडेबल है। एप्लिकेशन फीस देने से पहले बैंक अधिकारी से रिफंड पॉलिसी लिखित में जरूर समझ लें।

3. प्रोसेसिंग फीस के अलावा ये ‘अतिरिक्त खर्च’ भी समझें

केवल प्रोसेसिंग फीस देखकर किसी लोन को सस्ता न समझें। इसके साथ कई अन्य अपफ्रंट खर्च भी जुड़ते हैं:

लीगल और टाइटिल फीस: प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और कानूनी जांच के लिए।

टेक्निकल और वैल्युएशन चार्ज: प्रॉपर्टी की बाजार में सही कीमत और निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए।

डॉक्यूमेंटेशन फीस: एग्रीमेंट और स्टांप ड्यूटी से जुड़े खर्च।

इस बात का ध्यान दें कि जिस बैंक की प्रोसेसिंग फीस कम दिख रही हो, हो सकता है कि उसके लीगल या टेक्निकल चार्जेस दूसरे बैंकों से ज्यादा हों!

4. केवल ब्याज दर नहीं, ‘ऑल-इन कॉस्ट’ की तुलना करें

दो बैंकों के लोन की तुलना करते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दर न देखें।RBI के आदेशानुसार, बैंक को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन की असली कुल लागत यानी Annual Percentage Rate (APR) लिखा होता है। स्मार्ट तरीका ये है कि दो लोन की तुलना करते समय ब्याज दर + प्रोसेसिंग फीस + अन्य सभी चार्ज को जोड़कर ही फैसला लें।

5. क्या प्रोसेसिंग फीस कम या माफ कराई जा सकती है?

जी हां! बैंक अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर फीस में मोलभाव की गुंजाइश रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है और आपकी जॉब प्रोफाइल स्थिर है, तो आप बैंक से फीस माफ करने या घटाने की मांग कर सकते हैं। बैंक प्रतिनिधि या एजेंट द्वारा दी गई किसी भी छूट या छूट के मौखिक वादे पर भरोसा न करें, इसे आधिकारिक ईमेल या लेटर हेड पर लिखित रूप में ही लें।

6. पेमेंट करने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

आवेदन जमा करने से पहले बैंक से फीस की पूरी सूची मांगें। अगर लोन मंजूर होने के बाद कोई ऐसा चार्ज जोड़ा जाता है जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था, तो आप बैंक से जवाब मांग सकते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, बिना पूर्व जानकारी के ग्राहकों पर नए चार्ज थोपना अनुचित व्यापार प्रथा के अंतर्गत आता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Weather Forecast: यूपी-बिहार के लिए अगले 24 घंटे होंगे खतरनाक! IMD ने बारिश-तूफान का दिया अलर्ट

Weather Alert: देश के कई इलाकों में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इसके चलते मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम बदल गया है। मौसम में बदलाव के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम विभाग ने 23 अगस्त को दिल्ली और बिहार समेत 19 राज्यों में खराब मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई जगहों पर तेज आंधी के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी भारत में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है, वहीं पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका जताई गई है। ऐसे में आईएमडी लोगों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 23 अगस्त को देश के कई राज्यों में खराब मौसम की संभावना जताई है। यूपी, दिल्ली, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मेघालय, केरल और असम में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वी भारत में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इस दौरान कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

कैसा होगा दिल्ली का मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 23 अगस्त को मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है। दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सुबह से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने दिन के दौरान बारिश की संभावना जताई है। लेकिन, बारिश के बावजूद लोगों को गर्मी और उमस से पूरी राहत मिलने के आसार नहीं हैं। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

यूपी-बिहार में होगी तेज बारिश

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में 23 अगस्त को मौसम खराब रहने की संभावना है। यूपी के नोएडा, मेरठ, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर समेत कई इलाकों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं, बिहार के भी कई जिलों में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। लखनऊ में तापमान 33 डिग्री और पटना में 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि दोनों शहरों में न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

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Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स के लिए विज्ञापनों से जुड़े नियमों पर सख्ती का प्रस्ताव पेश किया है। सेबी का लक्ष्य ये है कि ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगे जो निवेशकों को बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। सेबी ने इससे जुड़ा कंसल्टेशन पेपर शुक्रवार को जारी किया। इसमें डिजिटल विज्ञापन, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के जरिए होने वाले प्रचार को ध्यान में रखते हुए नए ऐड कोड का प्रस्ताव दिया गया है। इन प्रस्ताव पर सेबी ने 11 सितंबर तक सभी स्टेकहोल्डर्स से कमेंट्स मंगाए हैं।

किस तरह के विज्ञापनों पर रोक लग सकती है?

सेबी ऐसे विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव कर रहा है जिनसे निवेशकों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बन रहा हो। ऐसे ऐड पर रोक लग सकती है, जिसमें अर्जेंसी, बिहैवियरियल प्रॉम्प्ट्स या FOMO (Fear of Missing Out) यानी छूट जाने का डर जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जाए। सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मैसेजेज पर रोक लगाई जाएगी जिसमें उत्साहित होकर निवेशक बॉन्ड के रिस्क की पर्याप्त जांच किए बिना निवेश कर दें। सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक हाई यील्ड, हाई रेटेड या हाई रिटर्न्स जैसे दावों पर बिना पर्याप्त जानकारी के रोक लगेगी

क्या देनी होगी जानकारी?

सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी विज्ञापन में किसी खास बॉन्ड या सिक्योरिटी का प्रचार किया जा रहा है, तो प्लेटफॉर्म को कुछ खास जानकारी देनी होगी, जैसे कि इसे जारी कौन कर रहा (Issuer), इसकी अवधि कितनी है (Tenor), इसकी क्रेडिट रेटिंग, सिक्योरिटी का प्रकार, क्लीन प्राइस और डर्टी प्राइस, यील्ड टू मेच्योरिटी (YTM), क्रेडिट रिस्स-ओ-मीटर। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशक निवेश करने से पहले बॉन्ड से जुड़ी अहम जानकारी और रिस्क को समझ सकें।

फिक्स्ड रिटर्न को लेकर क्या है प्रस्ताव?

सेबी ने फिक्स्ड रिटर्न्स, प्रेडिक्टेबिल रिटर्न्स और पैसिव इनकम जैसे शब्दों के इस्तेमाल के लिए भी खास निर्देश दिए हैं ताकि ऐसा ना लगे कि निवेश पर खास रिटर्न की गारंटी है। अगर किसी विज्ञापन में ‘फिक्स्ड रिटर्न’ लिखा जा रहा है, तो उसमें प्रमुखता से यह डिस्क्लेमर देना होगा कि फिक्स्ड रिटर्न्स की गारंटी नहीं होती और डेट सिक्योरिटीज में मार्केट रिस्क, क्रेडिट रिस्क और डिफॉल्ट का रिस्क होता है यानी कि बॉन्ड्स से रिटर्न पूरी तरह सुरक्षित या गारंटीड है, ऐसा विज्ञापन के जरिए नहीं बताया जा सकेगा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पलूशन की वजह से पहले दिल्ली से बेंगलुरु और फिर मिजोरम शिफ्ट हुआ ये कनाडाई शख्स फिर इनका एक्सपीरियंस आंखें खोलने वाला!

भारत में पिछले आठ सालों से रह रहे एक कनाडाई नागरिक ने एयर पलूशन की वजह से दिल्ली और बेंगलुरु छोड़ने के बाद आखिरकार मिजोरम के आइजोल में बसने का फैसला किया है। शख्स का कहना है कि लगातार खराब होती एयर क्वॉलिटी ने उन्हें इस कदम को उठाने के लिए मजबूर कर दिया क्योंकि वे अपने बच्चों के सेहत के साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी पोस्ट के बाद यह बहस छिड़ गई है कि आखिर भारतीय महानगरों में रहने वाले लोगों को साफ हवा की तलाश में अपना घर या शहर क्यों छोड़ना पड़ रहा है।

साफ हवा की तलाश में छोड़ना पड़ा दिल्ली और बेंगलुरु

कालेब फ्रिसेन नाम के इस कनाडाई शख्स ने बताया कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण के कारण उन्होंने सबसे पहले 2018 में दिल्ली छोड़ दी थी। इसके बाद वे यह सोचकर बेंगलुरु चले गए कि इसे भारत का ‘गार्डन सिटी’ कहा जाता है। उनका अनुभव रहा कि समय के साथ बेंगलुरु की हवा की गुणवत्ता भी लगातार खराब होती चली गई। इसके बाद वर्ष 2026 की शुरुआत में वे मिजोरम शिफ्ट हो गए। आइजोल में उनकी पत्नी का परिवार रहता है और दो बच्चों का पालन-पोषण भी उनके इस फैसले की एक बड़ी वजह बना।

फ्रिसेन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, ‘हम दो बच्चों की परवरिश कर रहे हैं और मेरा मानना है कि एक बच्चे को पालने के लिए पूरे समुदाय के सहयोग की जरूरत होती है। मुझे खुशी है कि मैं आइजोल शिफ्ट हो गया। मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था कि मेरे बच्चे अस्थमा के मरीज बन जाएं।’

इसके साथ ही उन्होंने भारतीय महानगरों में रहने वाले लोगों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि मुझे इस बात का दुख है कि जो भारतीय महानगरों में रहने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें इस तरह रहना पड़ता है। उन्हें साफ हवा में सांस लेने के लिए पहाड़ों की तरफ नहीं भागना पड़ना चाहिए।

पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि आइजोल एक सपने जैसा लगता है दोस्त! वहीं एक दूसरे यूजर ने सवाल पूछा कि क्या यह कोई विज्ञापन है?

इसके जवाब में फ्रिसेन ने स्पष्ट किया कि यह कोई पेड प्रमोशन नहीं है। उन्होंने समझाया कि वे भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों पर वीडियो बनाते हैं और उनके पोस्ट प्रायोजित नहीं होते हैं। एक अन्य यूजर ने आइजोल को एक हरा-भरा और सुंदर शहर बताया और विशेष रूप से इसके एयरपोर्ट पर उतरने के अनुभव की तारीफ की। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने प्रदूषण की समस्या का सरल समाधान देते हुए लिखा कि समाधान पहले से मौजूद है, पेड़ लगाओ।

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Sainik School Vacancy 2026: संबलपुर सैनिक स्कूल में टीचिंग-नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, आधिकारिक वेबसाइट पर देखें जानकारी

Sainik School Vacancy 2026: टीचिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी करने की इच्छा है, तो संबलपुर सैनिक स्कूल में आपके लिए अच्छा मौका हो सकता है। यहां टीचिंग और नॉन टीचिंग पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए पीजीटी, टीजीटी टीचर के साथ मैट्रन, आर्ट मास्टर, लैब असिस्टेंट और क्लर्क की नियुक्ति की जाएगी। संबलपुर सैनिक स्कूल में घोषित इन पदों पर नियमित और संविदा के आधार पर भर्तियां होंगी। स्कूल ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट sainikschoolsambalpur.edu.in पर इससे संबंधित विज्ञापन जारी किया है। खास बात यह है कि इन पदों के लिए 10वीं और 12वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

संबलपुर सैनिक स्कूल में इस भर्ती के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। फॉर्म ऑफलाइन भरकर स्कूल को स्पीड पोस्ट/रजिस्टर पोस्ट के माध्यम से पहुंचाना होगा। आवेदन पत्र भेजने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 तय की गई है। इस तारीख के बाद पहुंचे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और इनके लिए स्कूल की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। उम्मीदवार किसी भी सवाल के लिए स्कूल के नंबर 9692200674 पर संपर्क कर सकते हैं।

संबलपुर सैनिक स्कूल में आवेदन के इच्छुक जनरल/ओबीसी उम्मीदवारों को ₹500 आवेदन शुल्क भरना होगा। वहीं, एससी/एसटी कैंडिडेट्स को ₹250 फीस का भुगतान करना होगा। यह फीस प्रिंसिपल सैनिक स्कूल संबलपुर के अकाउंट में भरनी होगी। इसके बाद अपना फॉर्म, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, एप्लिकेशन फीस रिसिप्ट को स्कूल के पते पर भेज दें। एड्रेस है- ‘प्रिंसिपल, सैनिक स्कूल संबलपुर, पीओ- बसंतपुर, पीएस-बुर्ला, वाया सीएस चिपलिमा, गौशाला के पास, जिला संबलपुर, ओडिशा-768025’

संबलपुर सैनिक स्कूल भर्ती 2026 : चयन प्रक्रिया

इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा, स्किल/प्रैक्टिस टेस्ट और इंटरव्यू में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। सभी कॉन्ट्रेक्चुअल पोस्ट के लिए भी तीन चरणों की चयन प्रक्रिया रखी गई है। इंटरव्यू/लिखित परीक्षा आदि की तारीख स्कूल की वेबसाइट पर सितंबर के दूसरे सप्ताह में अपलोड कर दी जाएंगी। इसी शेड्यूल के मुताबिक उम्मीदवारों को इन सभी में शामिल होना होगा।

सैलरी कितनी मिलेगी?

टीचिंग और नॉन टीचिंग सभी पोस्ट के लिए सैलरी का पे-लेवल भी अलग-अलग रखा गया है।

पीजीटी टीचर : पे लेवल-08, 7वें वेतन आयोग के आधार पर ₹47600-₹151100 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा डीए और अन्य भत्ते भी देय होंगे।

टीजीटी टीचर : पे लेवल-07, 7वें वेतन आयोग के आधार पर ₹44,900-₹1,42,400 तक मंथली सैलरी मिलेगी। अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे।

पीईएम/पीटीआई कम मैट्रन : 40,000/- प्रति माह

आर्ट मास्टर : ₹70,500/- प्रति माह

लैब असिस्टेंट : ₹30,000/- प्रति माह

लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC): ₹30,000/- प्रति माह

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी, जानें योग्यता और आवेदन की लास्ट डेट

कॉमेडियन के टिकट बेचने वाले फेडोरोव अब जेलेंस्की के खिलाफ:यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव की मांग तेज, पढ़िए दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता के 4 किस्से

यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव (35) ने युद्ध के बीच चुनाव कराने की मांग कर राष्ट्रपति जेलेंस्की को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने कहा, ‘रूस को यह तय करने का अधिकार नहीं कि यूक्रेन के लोग अपनी सरकार कब चुनेंगे। लोकतंत्र को बंधक नहीं बनाया जा सकता।’ 2022 से मार्शल लॉ के कारण यूक्रेन में चुनाव नहीं हुए हैं। कभी जेलेंस्की के करीबी रहे फेडोरोव अब उनके खिलाफ खड़े हैं। इसी बीच जेलेंस्की के दफ्तर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार की जांच शुरू हुई है। पढ़िए यूक्रेन के दूसरे बड़े चर्चित नेता फेडोरोव के किस्से… फेसबुक से युवाओं को जोड़ा फेडोरोव 2012 में छात्र राजनीति के दौरान जपोरिज्जिया के स्टूडेंट मेयर चुने गए। युवाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने एक्टिव-जेड संगठन बनाया, लेकिन फंड की कमी बड़ी चुनौती थी। उन्होंने फेसबुक पर विज्ञापनों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाई और धीरे-धीरे हजारों छात्र उनके अभियानों से जुड़ने लगे। तब यह तरीका छात्र राजनीति तक सीमित था, लेकिन यही डिजिटल सोच आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। जेलेंस्की ने अपनी टीम में शामिल किया 22 की उम्र में ही फेडोरोव ने डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी शुरू की। उस दौरान जेलेंस्की कॉमेडियन थे। तब फेडोरोव की टीम को जेलेंस्की के शो के प्रचार का काम मिला। फेडोरोव ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन चलवाकर शो के खूब टिकट बिकवाए और वहां पहली बार भीड़ उमड़ी। इससे जेलेंस्की प्रभावित हुए। कुछ साल बाद उन्होंने फेडोरोव को अपनी टीम में शामिल कर लिया। 2019 में फेडोरोव ने उनके ऑनलाइन चुनाव प्रचार की कमान संभाली और जीत में अहम भूमिका निभाई। बाद में उन्हें डिप्टी पीएम बनाया। अफसर के कहे असंभव काम को संभव बना दिया 2019 में डिप्टी पीएम व आईटी मंत्री रहते फेडोरोव ने सरकारी कामों को कागजों से निकालकर स्मार्टफोन तक लाने की योजना बनाई। डिजिटल पासपोर्ट का प्रस्ताव सुनकर स्टेट माइग्रेशन सर्विस का प्रमुख नाराज हो गया। उसने कहा, यह पूरी तरह असंभव है। फेडोरोव नहीं रुके। उन्होंने डिजिटल सिस्टम तैयार कराया और ई-पासपोर्ट लॉन्च किया। बाद में सरकारी सेवाओं को ई-प्लेटफॉर्म पर लाए। टकराव के बाद कुर्सी गई डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री रहते फेडोरोव ने यूक्रेनी आर्मी की कायापलट कर दी। सेना में ड्रोन, एआई और डेटा के इस्तेमाल पर जोर दिया। हालांकि उनका काम करने का तरीका पुराने सैन्य ढांचे से अलग था। सेना के कमांडर ओलेक्सांद्र सिरस्की से मतभेद हुआ। 6 महीने बाद इसी जुलाई में फेडोरोव को रक्षा मंत्री पद से हटा दिया गया। तभी से जेलेंस्की-फेडोरोव में मतभेद हैं। जेलेंस्की से आगे, रेटिंग में यूक्रेन के दूसरे चर्चित नेता कीव इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी की सर्वे में 63% यूक्रेनियनों ने फेडोरोव पर भरोसा जताया। वे दूसरे बड़े लोकप्रिय नेता हैं। 66% पसंद के साथ पूर्व सेना प्रमुख वालेरी जालुज्नी पहले पायदान पर हैं। किरिलो बुदानोव को 61% और राष्ट्रपति जेलेंस्की पर 56% लोगों का भरोसा मिला। जनवरी की तुलना में फेडोरोव की स्वीकार्यता 38% से बढ़कर 63% हुई।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

नौकरी जॉइन करने के 6 घंटे बाद ही दिया इस्तीफा, वजह जानकर मैनेजर भी रह गया हैरान

दिल्ली स्थित कंपनी Hiring Insider के संस्थापक और पूर्व टैलेंट एक्विजिशन लीडर हर्षित श्रीवास्तव की एक LinkedIn पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है। उन्होंने एक नए कर्मचारी से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने भर्ती प्रक्रिया और नौकरी की वास्तविकता के बीच के अंतर पर सवाल खड़े कर दिए। खास बात यह रही कि कर्मचारी ने कंपनी जॉइन करने के महज छह घंटे बाद ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों को नौकरी की पूरी और सच्ची तस्वीर दिखाई जाती है?

अक्सर कंपनियां किसी पद को आकर्षक तरीके से पेश करती हैं, लेकिन असली जिम्मेदारियां, काम का दबाव और टीम का माहौल जॉइन करने के बाद सामने आता है। हर्षित की पोस्ट ने इसी अंतर को बेहद दिलचस्प तरीके से उजागर किया, जिसके बाद LinkedIn पर लोगों के बीच पारदर्शिता और ईमानदार hiring को लेकर सवाल उठा दिए हैं।

पुराने कर्मचारी ने ही नए कर्मचारी को ट्रेनिंग दी

कहानी के मुताबिक, एक कर्मचारी पहले ही इस्तीफा दे चुका था। मैनेजर ने उससे कहा कि जाने से पहले वो अपनी जगह किसी नए व्यक्ति को हायर करे और उसे काम समझाकर जाए। उस कर्मचारी ने उम्मीदवार का इंटरव्यू लिया, उसे चुना और जॉइनिंग के पहले दिन उसे काम की पूरी जानकारी दी।

इंटरव्यू से अलग थी असलियत

नए कर्मचारी को सिर्फ सामान्य काम नहीं बताया गया। उसे कंपनी की पॉलिसी, टीम स्ट्रक्चर, स्टेकहोल्डर्स, काम का दबाव, डेडलाइन और एस्केलेशन कल्चर तक सब कुछ साफ-साफ समझाया गया। सबसे खास बात यह थी कि पुराने कर्मचारी ने कुछ छिपाया नहीं और न ही बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया।  नतीजा? दिन खत्म होते-होते नए कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।

मैनेजर ने पूछा “तुमने उसे क्या बताया?”

नए कर्मचारी के इस्तीफे से मैनेजर हैरान और नाराज था। उसने पुराने कर्मचारी से पूछा कि आखिर उसने नए व्यक्ति को ऐसा क्या बता दिया कि उसने कुछ ही घंटों में नौकरी छोड़ दी। जवाब मिला “वही सब, जो आपने मुझे उसे सिखाने के लिए कहा था।” यानी नए कर्मचारी को पहली बार नौकरी की असली तस्वीर दिखाई गई थी। कंपनी ने नौकरी बेची, कर्मचारी ने काम की सच्चाई दिखाई

श्रीवास्तव ने इस घटना को एक दिलचस्प लाइन में समझाया कंपनी ने उसे नौकरी का सपना दिखाया था, जबकि पुराने कर्मचारी ने उसे उस नौकरी की हकीकत दिखा दी। उनका कहना था कि कई बार नौकरी के विज्ञापन और इंटरव्यू में भूमिका जितनी आकर्षक दिखाई जाती है, असल में काम उससे काफी अलग होता है।

ईमानदारी से हो सकती है बेहतर भर्ती

इस कहानी के बाद LinkedIn पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि भर्ती के दौरान सैलरी और पद के साथ-साथ काम की असली चुनौतियां भी बतानी चाहिए। अगर कंपनी शुरुआत में ही काम का दबाव, जिम्मेदारियां, टीम कल्चर और वास्तविक उम्मीदें साफ कर दे, तो बाद में कर्मचारी के निराश होकर छोड़ने की संभावना कम हो सकती है।

अच्छी hiring सिर्फ कंपनी को पसंद आने वाला उम्मीदवार ढूंढना नहीं है। यह भी देखना है कि उम्मीदवार को कंपनी और नौकरी की सच्ची तस्वीर पहले से पता हो और फिर भी वह वहां काम करना चाहे।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।