ICICI Bank Q2 Results: ₹14843 करोड़ का मुनाफा, NII में 17% का उछाल; उम्मीद से बेहतर रहे तिमाही नतीजे

ICICI Bank Q2 Results: प्राइवेट सेक्टर ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी यानी जुलाई-सितंबर तिमाही तिमाही के नतीजे शनिवार को जारी किए। बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 20.1% बढ़कर ₹14,843 करोड़ हो गया। यह बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

CNBC-TV18 के पोल में मुनाफा ₹14,280 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके मुकाबले वास्तविक मुनाफा करीब 3.9% ज्यादा रहा। बाजार को उम्मीद थी कि बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 16% की बढ़ोतरी होगी।

बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम भी बढ़ी

ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 17.7% बढ़कर ₹25,338.7 करोड़ हो गई। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले बैंक ने ब्याज से होने वाली कमाई में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की।

CNBC-TV18 के पोल में बैंक की NII ₹24,811 करोड़ रहने का अनुमान था। यहां भी बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा।

ICICI Bank के शेयर का हाल

तिमाही नतीजों से पहले शुक्रवार को ICICI बैंक का शेयर बीएसई पर 0.55% की तेजी के साथ ₹1,397 पर बंद हुआ था।

साल 2026 में अब तक बैंक के शेयर में 4.4% की बढ़त दर्ज की गई है। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 में 11.5% की गिरावट आई है। यानी इस अवधि में ICICI बैंक के शेयर ने निफ्टी 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। शुक्रवार के बंद भाव पर बैंक का मार्केट कैप करीब ₹10.03 लाख करोड़ था।

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Koffee With Karan Season 9: विक्की कौशल-दिलजीत दोसांझ दिखेंगे साथ, ‘कॉफी विद करण 9’ में करेंगे एंट्री?

Koffee With Karan Season 9: करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ का आखिरी सीजन आखिरकार शुरू हो गया है। शो के होस्ट ने इस साल आने वाले मेहमानों को लेकर फैंस की उत्सुकता बनाए रखी है। सीजन 9 की शुरुआत सलमान खान ने की, जिसमें करिश्मा कपूर भी एक खास मेहमान के तौर पर शामिल हुईं। अब फैंस यह अंदाजा लगा रहे हैं कि करण के ‘कॉफी काउच’ पर और कौन-कौन सी हस्तियां नजर आएंगी। इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि विक्की कौशल और दिलजीत दोसांझ एक साथ शो में आ सकते हैं।

एक सूत्र ने ‘फिल्मफेयर’ को बताया- “दिलजीत और विक्की के बीच बहुत अच्छी बॉन्डिंग है और उनका एपिसोड इस सीजन की सबसे मनोरंजक बातचीत में से एक होने वाला है।” अगर ऐसा होता है तो फैंस एक ऐसे एपिसोड की उम्मीद कर सकते हैं जो हंसी-मजाक, पंजाबी ऊर्जा और दिल से जुड़ी बातों से भरा होगा। हालांकि इस जोड़ी के आने की खबर ऑनलाइन काफी चर्चा में है, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इससे पहले न्यूज18 ने बताया था कि सलमान खान शो के पहले एपिसोड में वापसी करेंगे। वहीं यह भी बताया कि शाहरुख खान के भी इस आखिरी सीजन में शामिल होने को लेकर बातचीत चल रही है। सूत्र ने कहा- “करण और उनकी टीम सीजन के आखिरी एपिसोड के लिए शाहरुख खान को लाने की कोशिश कर रही है, जो इस लंबे समय से चल रहे चैट शो का ग्रैंड फिनाले भी होगा।” उन्होंने आगे बताया कि यह एपिसोड शाहरुख खान के लिए अपनी फिल्म ‘किंग’ को प्रमोट करने का जरिया बनेगा।

सूत्र ने आगे कहा, “टीम अभी भी उनसे संपर्क में है। लेकिन करण को पूरा भरोसा है कि वह ऐसा करने में कामयाब हो जाएंगे। जहां तक आर्यन की बात है तो उनका शो में आना उनके पिता पर निर्भर करता है। अगर शाहरुख खान शो में आते हैं, तो आर्यन भी उनके साथ शामिल होंगे। क्योंकि वह ‘कॉफी विद करण’ में किसी और के साथ अपना डेब्यू नहीं करना चाहेंगे।”

न्यूज18 ने यह भी बताया कि वरुण धवन इस सीजन में जाह्नवी कपूर के साथ नजर आएंगे। यह एपिसोड यश राज फिल्म्स के स्टूडियो में जाह्नवी कपूर और वरुण धवन के साथ शूट किया गया था। यह पहली बार है जब वे दोनों एक साथ इस चैट शो में नजर आए हैं। करण और उनके करीबी कलाकारों ने खूब मस्ती की। शो में एक खास मेहमान ने भी एंट्री ली, जिसे देखकर जाह्नवी और वरुण हैरान रह गए।”

यह मेहमान अर्जुन कपूर थे। सूत्र ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “अर्जुन, जो सीजन 5 के अनौपचारिक ‘मैस्कॉट’ बन गए थे, इस एपिसोड में ‘बवाल’ और ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ के अपने को-स्टार्स के साथ एक खास उपस्थिति दर्ज कराएंगे। वरुण और अर्जुन की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। 2016 में जब वे दोनों एक साथ शो में आए थे तो उन्होंने करण, क्रू मेंबर्स और दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया था।”

King Promo: क्या शाहरुख खान की ‘किंग’ का प्रोमो रणबीर कपूर ‘रामायणम्’ के साथ होगा रिलीज?

King Promo: शाहरुख खान की आने वाली एक्शन थ्रिलर ‘किंग’ 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म का प्रमोशन नवंबर से ही शुरू हो सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म का एक खास प्रमोशनल वीडियो पूरे भारत के सिनेमाघरों में रणबीर कपूर की ‘रामायण पार्ट 1’ के साथ दिखाया जा सकता है।

इससे शाहरुख खान की इस फिल्म को रिलीज से पहले एक बड़ा प्रमोशनल बूस्ट मिल सकता है। वहीं नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी ‘रामायण पार्ट 1’ दिवाली से ठीक पहले 5 नवंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में, साई पल्लवी सीता के रूप में और यश रावण के रूप में नजर आएंगे।

शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ का अपडेट

इस नवंबर में शाहरुख खान के फैंस के लिए दोहरी खुशी की खबर हो सकती है। खबरों के अनुसार सुपरस्टार की आने वाली एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘किंग’ का एक खास प्रमोशनल वीडियो भारतीय सिनेमाघरों में रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के साथ दिखाया जा सकता है। ‘वैरायटी इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रमोशनल कैंपेन इस पौराणिक फिल्म की थिएट्रिकल रिलीज के दौरान चलेगा, जो 5 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है।

उत्साह को और बढ़ाते हुए उम्मीद है कि 2 नवंबर को शाहरुख खान के 61वें जन्मदिन के मौके पर ‘किंग’ का टीजर जारी किया जाएगा। हालांकि फिल्म के मेकर्स ने अभी तक टीजर रिलीज की तारीख या ‘रामायण’ के साथ इस प्रमोशनल टाई-अप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। एक सूत्र ने पोर्टल को बताया- “इस प्रमोशनल टाई-अप से ‘किंग’ को दर्शकों के बीच और ज्यादा पहचान मिलने की उम्मीद है, खासकर इसलिए क्योंकि ‘रामायण’ को इस साल की सबसे बड़ी थिएट्रिकल रिलीज में से एक के तौर पर पेश किया जा रहा है।”

फिल्म ‘किंग’ में सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, अभय वर्मा, अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला, राघव जुयाल और अन्य कलाकार भी नजर आएंगे। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही यह फिल्म ‘डंकी’ के बाद शाहरुख खान की बड़े पर्दे पर वापसी होगी। यह फिल्म 2 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

जियो की भारत से बाहर विस्तार की योजना

रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स देश के बाहर भी बड़े पैमाने पर विस्तार की योजना बना रहा है जिसमें अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देश भी शामिल हैं।

जियो के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने यहां शनिवार को कंपनी के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले ब्रोकरों के साथ संवाद के दौरान बताया कि जियो भारत से बाहर विस्तार के लिए 11-12 रणनीतिक साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है। इससे उसे 150 करोड़ नए ग्राहक मिलने की उम्मीद है।

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उल्लेखनीय है कि अगस्त 2026 के अंत में देश में कंपनी के सबस्क्राइबरों की संख्या 53.80 करोड़ थी। श्री अंबानी ने कहा कि जियो ने एक यूनीक प्रौद्योगिकी विकसित की है जिसमें विस्तार की गुंजाइश है। आम तौर पर प्रौद्योगिकी विकसित करना और उसका विस्तार करना दो अलग-अलग कौशल हैं। जियो ने भारत में जो एकीकृत स्टैक तैयार किया है उसका विस्तार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों में फाइबर संचार के रोलआउट की गति धीमी रही है। इन देशों में जियो संभावनाएं देख रही है। इसके अलावा, पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में भी विस्तार की संभावना है।

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को कारोबार की समाप्ति के साथ बंद होगा। कंपनी ने आईपीओ के लिए मूल्य का दायरा 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया है। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

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Apple मार्च 2027 में लॉन्च करेगा iPhone 18! कीमत और फीचर्स हुए लीक

सितंबर में iPhone 18 Pro सीरीज और अपने पहले फोल्डेबल फोन iPhone Duo को लॉन्च करने के बाद Apple अब मार्च 2027 में स्टैंडर्ड iPhone 18 लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अब तक का सबसे महंगा स्टैंडर्ड iPhone हो सकता है। बता दें कि iPhone 17 को भारत में ₹79,900 की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। हालांकि, इसकी मौजूदा आधिकारिक कीमत बढ़कर ₹99,900 हो गई है।

लीक हुई जानकारी के अनुसार, iPhone 18 की कीमत भारत में 1 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है। इसकी कीमत ₹1,10,990 से ₹1,19,990 के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple मार्च 2027 में स्टैंडर्ड iPhone 18 के साथ iPhone 18e और iPhone Air 2 भी लॉन्च कर सकती है। कहा जा रहा है कि iPhone 18 का प्रोडक्शन नवंबर 2026 के आखिर में शुरू हो सकता है।

हालांकि, Apple ने अभी तक फोन की लॉन्च डेट और कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। ऐसे में इसकी सही कीमत, फीचर्स और लॉन्च डेट जानने के लिए कंपनी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना बेहतर होगा।

Apple iPhone 18 के अनुमानित फीचर्स

लीक्स के मुताबिक, Apple iPhone 18 में 6.3 इंच की LTPO OLED डिस्प्ले मिल सकती है। इसका स्क्रीन साइज iPhone 17 के जैसा हो सकता है। फोन की स्क्रीन में 120Hz का रिफ्रेश रेट मिलने की उम्मीद है। इससे फोन पर स्क्रॉलिंग करने और स्क्रीन पर एनिमेशन देखने का अनुभव पहले से ज्यादा स्मूद हो सकता है।

इसके अलावा, iPhone 18 में Dynamic Island का साइज छोटा किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि Apple यह बदलाव स्टैंडर्ड मॉडल में भी करेगी या नहीं।

परफॉर्मेंस की बात करें, तो iPhone 18 में कंपनी का नया A20 चिपसेट दिया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चिपसेट 2nm टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। नया प्रोसेसर फोन की स्पीड और काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने के साथ बैटरी की खपत कम करने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, इन फीचर्स की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

iPhone बनाने वाली कंपनी इसकी मेमोरी को भी अपग्रेड कर सकती है। विश्लेषक मिंग-ची कुओ ने 9GB RAM का सुझाव दिया है, जबकि विश्लेषक जेफ पु का मानना ​​है कि यह फोन 12GB RAM के साथ आ सकता है। वहीं, फाइनल कॉन्फिगरेशन अभी स्पष्ट नहीं है।

फोटोग्राफी के लिए, उम्मीद है कि iPhone 18 में डुअल रियर कैमरा सेटअप ही रहेगा। इसमें Apple का C2 मॉडेम भी हो सकता है, हालांकि कनेक्टिविटी में सुधार के बारे में अभी कोई पक्की जानकारी नहीं है। कुछ लीक से यह भी पता चलता है कि Apple, iPhone 18 को नए कलर और बेहतर बैटरी क्षमता के साथ पेश कर सकता है।

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Jailer 2 box office collection day 2: रजनीकांत स्टारर ने शुक्रवार को मचाया गदर, 95 करोड़ हुई फिल्म की कमाई

Jailer 2 box office collection day 2: रजनीकांत की कोई भी फिल्म रिलीज होना उनके प्रशंसकों के लिए जश्न का मौका होता है। ‘जेलर 2’ की रिलीज को लेकर बने भारी उत्साह के चलते रजनीकांत की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ ओपनिंग हासिल की। ​​अब फिल्म की कोशिश है कि पहले वीकेंड में भी यह रफ्तार बनी रहे, क्योंकि शनिवार के अंत तक इसके ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।

जेलर 2 बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट

रिलीज के दिन, ‘जेलर’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 15,887 शोज के जरिए ₹59.70 करोड़ की नेट कमाई की। भारत में ‘जेलर 2’ के लिए एडवांस बुकिंग रिलीज से पांच दिन पहले, 10 अक्टूबर को शुरू हुई। कुछ विदेशी बाजारों में यह एक दिन पहले ही शुरू हो चुकी थी। 14 अक्टूबर (बुधवार) के अंत तक फिल्म की दुनिया भर में एडवांस बुकिंग 80 करोड़ के पार पहुंच गई थी। अकेले भारत में फिल्म के लिए ओपनिंग डे के 18 लाख टिकट पहले ही बिक चुके थे, जिससे ₹37 करोड़ की ग्रॉस कमाई हुई।

सैकनिल्क (Sacnilk) के ताजा अपडेट के अनुसार ‘जेलर 2’ ने शनिवार को ₹35.60 करोड़ की कमाई की है। इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई अब तक ₹95.30 करोड़ हो गई है। फिल्म ₹100 करोड़ के आंकड़े के काफी करीब पहुंच गई थी, लेकिन थोड़े से अंतर से चूक गई। अब सबकी नजरें शनिवार और रविवार पर टिकी हैं कि ‘जेलर 2’ अपने पहले वीकेंड का कितना फायदा उठा पाती है।

रजनीकांत की पिछली रिलीज ‘कुली’ ने भारत में अपनी रिलीज के दूसरे दिन ₹53.50 करोड़ (नेट) की कमाई की थी, जिससे इसका कुल कलेक्शन ₹108 करोड़ तक पहुंच गया था।

कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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अमित शाह का इतना भरोसा!

अमित शाह ने इस सप्ताह खम ठोंक कर कहा कि विपक्ष कुछ कर लें 2029 में मोदी जीतेंगे। कांग्रेस की लगातार चौथी हार होगी। सवाल है यह शाह की गणित है या अहंकार? आखिर 2029 के चुनाव में अभी ढाई वर्ष से अधिक का समय है। तब तक देश की आर्थिकी का कैसा कबाड़ा होगा? 35 वर्ष की उम्र से कम नौजवानों की उम्मीदों और बेकारी का गुस्सा किस करवट बैठेगा? नैरेटिव कैसा चलेगा? ट्रंप, शी जिनपिंग, मुनीर जैसी विदेशी ताकतें भारत का कितना टेंटुआ दबा चुकी होंगी? इसलिए कि घर के अंदर हो या घर के बाहर कोई ऐसा है नहीं, जिसे मोदी सरकार ने ठगा नहीं! बावजूद इसके अमित शाह के लिए 2029 का चुनाव चुटकी बजा कर जीतना वैसा ही है जैसे महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल जीता और आने वाले महीनों में जीतेंगे। मानों चुनाव होना महज औपचारिकता हो। नतीजा उन्होंने पहले से लिखाया हुआ हो। 13 अक्टूबर का उनका वाक्य था, ‘2029 के चुनाव में भी कांग्रेस बुरी तरह से हारेगी’।

यों राजनीति में नेता की मजबूरी होती है कि वह आत्मविश्वास दिखाए। पर अमित शाह का हुंकारा उस समय और परिस्थितियों में है, जिसमें अब गारंटीशुदा माना जा रहा है कि मतदाता सूचियों में वोटरों के नाम कटवा कर, हटवा कर भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव जीती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के मोदी से मोहभंग को मोदी सरकार-चुनाव आयोग की मशीनरी ने वोट सूचियों में हेराफेरी से पलटा है। देश अब करोड़ों नामों (15 करोड़ मतदाताओं के अनुमान!) के कटने, नए नाम जुड़वाने की शर्तों, माता-पिता के दस्तावेजों, प्रवासी मजदूरों और पहली बार वोट देने वाले नौजवानों की पात्रता पर तलवार लटकी देख रहा है। चुनाव आयोग अराजक सूचियां बना रहा है!

सोचें, इसके पीछे की राजनीति पर। जरा सोचें। चुनाव में जनता किसे वोट देगी, उससे पहले यह तय होता है कि वोट देने वालों की सूची में कौन होगा? फिर यह कि किस इलाके के वोट किस लोकसभा क्षेत्र में (आगे की सीट परिसीमन योजना) गिने जाएंगे! फिर इरादा महिला आरक्षण लागू कराने का है। मतलब किस सीट पर किस तरह का उम्मीदवार खड़ा करने में मोदी-शाह का अपर हैंड। मुझे लग रहा है कि तीनों बातें चुनाव से पहले तय होंगी। तीनों के नियम, प्रक्रियाएं और प्रशासनिक फैसले (याकि सरकार) हैं। अब यदि इसी गेमप्लान में मोदी-शाह अपने चक्रवर्ती राजनीतिक भविष्य की गारंटी मान काम करें, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग आदि सभी रास्ता बनवाएं तो सड़क पर राहुल गांधी या जेनरेशन ज़ेड कितना ही आंदोलन करें, हल्ला मचाएं पर 2029 के नतीजे मोदी के लिए पश्चिम बंगाल जैसे होंगे।

असली सवाल बूथ का है। मोदी की कमान में भाजपा ने बूथवार मतदाताओं का राजनीतिक हिसाब रखने के पेशेवरों (सर्वेयर, पन्ना प्रमुखों आदि) की फौज बनाई हुई है। इनके पास मतदाताओं की केवल जानकारी ही नहीं है, बल्कि मतदाता सूचियों में मनमाफिक छंटनी की सामर्थ्य भी है। फॉर्म-7 सबमिट करो और नाम कटाओ। फिलहाल इतना तो प्रमाणित है कि एसआईआर के बहाने बड़ी संख्या में मौजूद मतदाताओं के नाम हटे हैं। और नए नौजवानों के वोटर पंजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। नौजवान पहले यों भी कम वोटर बनते थे लेकिन अब तो उनके आगे पंजीकरण में अतिरिक्त दस्तावेजी शर्तों को ऐसा बनाया है कि यूथ भले बेरोजगार भटकता रहे, सड़क पर आंदोलन करे लेकिन वोटर बनने के महत्त्व के प्रति लापरवाह बना रहेगा। जैसे नौकरी के आवेदनों से निराशा है वैसे ही वोटर बनने की भागदौड़ से बेरुखी रही तो 2029 में मोदी 2014 से भी बड़े बहुमत से जीतेंगे।

यही अमित शाह के आत्मविश्वास का बीजमंत्र है। सो, जेनरेशन ज़ेड का सड़क पर गुस्सा एक बात है और मतदाता सूची में उनका नाम होना दूसरी। फिर मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालना तीसरी। यदि पहली बार वोट देने वाले लाखों पात्र नौजवानों के पंजीकरण में बाधाएं हों तो उनकी राजनीतिक सक्रियता और चुनावी भागीदारी के बीच फासला अपने आप होगा।

अमित शाह ने कांग्रेस को याद दिलाया कि वह एसआईआर से पहले भी चुनाव हारती रही है। सही है। लेकिन इससे एसआईआर के सवाल का जवाब कैसे है? कांग्रेस 2014 और 2019 में हारी, 2024 में भी सरकार नहीं बना सकी। मगर 2024 में भाजपा की अपनी सीटें 303 से घटकर 240 हुई थीं। कांग्रेस 52 से 99 पर पहुंची थी। तब क्या उस चुनाव का सबक केवल कांग्रेस की हार था? या यह भी था कि पूर्ण बहुमत वाली भाजपा को गठबंधन के सहारे सरकार बनानी पड़ी? भाजपा के जीत के लाले पड़े तो एसआईआर को सुनियोजित नए फॉर्म, नई प्रक्रियाओं याकि झंझटों से भरपूर बनाने की धांधलेबाजी हुई।

सुप्रीम कोर्ट का मार्च रोकने से इनकार

नई दिल्ली। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के तिरंगा मार्च को रोकने से इनकार किया। कनॉट प्लेस के व्यापारियों के कई समूहों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और शुक्रवार की शाम को पांच बजे के तिरंगा मार्च को रोकने का आदेश देने की मांग की थी। लेकिन सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली के व्यापारियों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। एक दिन पहले गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने मार्च रोकने का आदेश नहीं दिया था। लेकिन पुलिस को सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त करने का निर्देश दिया था।

दिल्ली के व्यापारियों की इस याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, कोई कानून व्यवस्था चाहता है, ये सभी बातें आपस में जुड़ी हैं’। गौरतलब है कि प्रदर्शन के कारण एनडीएमसी ने पहले ही सेंट्रल पार्क को दिन तक बंद करने का आदेश दे दिया था।

बहरहाल, कनॉट प्लेस के व्यापारियों का दावा है प्रदर्शन और उसे रोकने के बंदोबस्तों से कनॉट प्लेस में हर दिन दो सौ करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों ने यह भी कहा है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन शुरू होने के बाद से दो हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।शुक्रवार को जो याचिका सुप्रीम कोर्ट के सामने लाई थी वह दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन ने दायर की थी। शुक्रवार सुबह चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर सुनवाई की।

अदालत ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोग बेहतर समझदारी दिखाएंगे। हम जानते हैं कि सभी छोटे दुकानदार इन दिनों अपनी रोजी रोटी कमाते हैं। हम जानते हैं कि पूरे परिवारों को किन मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा’। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सेंट्रल पार्क बंद होने से ठेले वालों और छोटे व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन के कारण उन्हें नुकसान होने का खतरा है। व्यापारी संगठनों ने त्योहार और शादी के सीजन में मध्य दिल्ली में प्रदर्शन के कारण संभावित कारोबार नुकसान का मुद्दा उठाया है।

वोट बंटवारे का नगांव व रेजिनगर मॉडल

एसआईआर, परिसीमन और महिला आरक्षण के बाद भाजपा को यह उम्मीद है कि विपक्ष का वोट बंटेगा, जिसका लाभ उसको मिलेगा। भाजपा के इस भरोसे को समझने के लिए पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट और असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव को मॉडल की तरह देखा जा सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में नगांव सीट कांग्रेस ने जीती थी। लेकिन उसके सांसद प्रद्योत बोरदोलोई पार्टी छोड़ कर भाजपा में चले गए और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। इसलिए वहां उपचुनाव हुआ। ऐसे ही रेजिनगर की सीट हुमायूं कबीर ने जीती थी। वे दो सीटों से जीते थे इसलिए उन्होंने रेजीनगर से इस्तीफा दिया। नगांव में 55 से 60 फीसदी औऱ रेजिनगर में करीब 70 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। इसके बावजूद दोनों सीटों पर भाजपा जीती।

नगांव लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार को करीब 50 फीसदी वोट मिले और रेजिनगर में करीब 60 फीसदी वोट मिला। भाजपा ने हुमायूं कबीर के बेटे को 75 हजार वोट से हराया। नगांव लोकसभा सीट पर वोट बंटवारा एक बड़ा फैक्टर रहा। वहां ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता बदरूद्दीन अजमल चुनाव लड़े थे। मुस्लिम मतदाता उनके पक्ष में एकजुट हुए फिर भी कांग्रेस को सवा लाख के करीब वोट मिला। जीत हार का अंतर डेढ़ लाख के करीब वोट का था। तभी माना जा रहा है कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर लड़तीं तो शायद भाजपा नहीं जीत पाती। रेजिनगर का मामला अलग है। वहां विपक्ष के सभी उम्मीदवारों को मिला कर भी उतना वोट नहीं आया, जितने वोट से भाजपा जीती।

सो, ये दोनों मॉडल हैं। रेजिनगर में कहा गया कि राज्य के मुस्लिम मतदाता भी लेफ्ट और तृणमूल के शासन से ऊबे हुए थे और उनको भी विकास, रोजगार वाली राजनीति पसंद आ रही है। इसलिए मुसलमानों ने भी भाजपा को वोट दिया। नगांव का मॉडल विपक्ष के वोट बंटवारे का है। भाजपा को उम्मीद है कि विपक्ष एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ेगा। पिछली बार यानी 2024 में विपक्ष एकजुट होकर लड़ा था तो संगठन और नैरेटिव दोनों की साझा ताकत के दम पर उसने भाजपा को बहुमत से नीचे ला दिया था। आजादी के बाद पहली बार इतना मजबूत विपक्ष जीत कर आया। लेकिन उसके बाद अलग अलग कारणों से बिखराव है। आम आदमी पार्टी, डीएमके आदि अलग रास्ते पर चल रहे हैं। अगर ये सभी पार्टियां साथ नहीं आती हैं तो भाजपा विरोधी वोट बंटेगा। विपक्ष के अंदर विभाजन बढ़ाने के लिए भाजपा की ओर से भी साम, दाम, दंड और भेद सारे उपाय किए जाते हैं।

इस बीच मुस्लिम नेताओं की पार्टियां भी चुनाव लड़ेंगी। मुस्लिम नेताओं ने अपनी जिस तरह की छवि बनाई है या विपक्षी पार्टियों ने उनके बारे में जिस तरह के प्रचार किए हैं उसके बाद यह संभावना कम है कि विपक्ष के साथ उनका तालमेल होगा। चाहे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी हो या बदरूद्दीन अजमल की पार्टी हो या हुमायूं कबीर और नौशाद सिद्दीकी पार्टी हो। इनका तालमेल मुख्यधारा की विपक्षी पार्टियों के साथ नहीं होगा। ऐसे में ये पार्टियां अलग चुनाव लड़ेंगी। इनकी वजह से भी वोट का बंटवारा होगा, जिस लाभ भाजपा को मिल सकता है।