TCS Q2 Results Date: टाटा की आईटी कंपनी 8 अक्टूबर जारी करेगी तिमाही नतीजे, डिविडेंड पर भी नजर

TCS Q2 Results Date: टाटा ग्रुप की दिग्गज IT कंपनी TCS इस हफ्ते वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। कंपनी 8 अक्टूबर 2026 को सितंबर तिमाही का रिजल्ट जारी करेगी। इसके साथ ही निवेशकों की नजर अंतरिम डिविडेंड पर भी रहेगी।

TCS ने 22 सितंबर को स्टॉक्स एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया कि बोर्ड मीटिंग 8 अक्टूबर को होगी। इस बैठक में 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के रिजल्ट को मंजूरी दी जाएगी।

TCS का रिजल्ट बताएगा सेक्टर का मूड

TCS के रिजल्ट से पता चलेगा कि सितंबर तिमाही में कंपनी का कारोबार कैसा रहा। खासकर IT सेक्टर में इस समय मांग, खर्च और AI को लेकर काफी चर्चा है। ऐसे में TCS के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

कंपनी TCS Tata Group की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। यह दुनिया की बड़ी IT Services कंपनियों में से एक है। TCS का कारोबार IT सर्विसेज, कंसल्टिंग और बिजनेस सॉल्यूशंस से जुड़ा है।

इंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला

TCS की बोर्ड मीटिंग में इंतरिम डिविडेंड के प्रस्ताव पर भी विचार होगा। यानी कंपनी अपने शेयरधारकों को अंतरिम डिविडेंड देगी या नहीं, इसका फैसला इसी बैठक में हो सकता है।

अगर बोर्ड डिविडेंड को मंजूरी देता है तो इसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा, जिनका नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में होगा। TCS ने रिकॉर्ड 14 अक्टूबर 2026 तय की है।

Q1 में TCS का मुनाफा घटा था

अब सबकी नजर सितंबर तिमाही के नतीजों पर है। इसकी एक वजह जून तिमाही का प्रदर्शन भी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा 13,349 करोड़ रुपये रहा था। यह पिछली तिमाही यानी मार्च 2026 के 13,718 करोड़ रुपये से 2.7% कम था।

कंपनी के मुनाफे पर 668 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च का असर पड़ा था। यह रकम एक कानूनी दावे के सेटलमेंट से जुड़ी थी।

TCS के शेयरों का हाल

TCS का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.23% की बढ़त के साथ 2,075.90 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले 1 साल में स्टॉक 16.09% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने 30.53% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 7.52 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

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FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां देंगी बोनस शेयर, 9 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट; 6 महीनों में 80% तक रिटर्न

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां देंगी बोनस शेयर, 9 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट; 6 महीनों में 80% तक रिटर्न

मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां बोनस शेयर देने जा रही हैं। ये कंपनियां हैं- मोल्ड-टेक पैकेजिंग और मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीस। दोनों कंपनियों ने इस कॉरपोरेट एक्शन की घोषणा अगस्त महीने में की थी। दोनों के बोनस इश्यू के लिए रिकॉर्ड डेट 9 अक्टूबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे बोनस शेयर पाने के हकदार होंगे।

मोल्ड-टेक पैकेजिंग और मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीस के शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर एक शेयर पर 1 नया शेयर बोनस के तौर पर मिलने वाला है। मोल्ड-टेक पैकेजिंग के शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है, जबकि मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीस के शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। दोनों कंपनियों की ओर से बोनस शेयरों का अलॉटमेंट 12 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा।

Mold-Tek Technologies का शेयर 6 महीनों में 80 प्रतिशत मजबूत

Mold-Tek Technologies के शेयर की वर्तमान में BSE पर कीमत 203.70 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 586 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 50 प्रतिशत और 6 महीनों में 80 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 227.20 रुपये और एडजस्टेड लो 101.30 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 50.47 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Mold-Tek Tech का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 45.52 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 10 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 142.81 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 10.58 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

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Mold-Tek Packaging 6 महीनों में 30 प्रतिशत बढ़ा

दूसरी ओर Mold-Tek Packaging के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 659.10 रुपये है। यह शेयर BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी का मार्केट कैप 2200 करोड़ रुपये के करीब है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 830.35 रुपये और एडजस्टेड लो 453.80 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 30 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 33.21 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Mold-Tek Packaging का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 300.45 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 25.57 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 886.61 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 72.87 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bonus Share: 3 साल में पैसा हुआ डबल, अब हर शेयर पर 1 नया शेयर मिलेगा फ्री; रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स के शेयरहोल्डर्स को जल्द ही 1:1 के रेशियो में बोनस शेयर मिलने वाले हैं। इसका मतलब है कि शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद कंपनी के हर एक शेयर पर एक नया शेयर बोनस के तौर पर मिलेगा। रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर 2026 है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे बोनस शेयर के हकदार होंगे।

कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। बोनस शेयरों के अलॉटमेंट की तारीख 5 अक्टूबर है। इनमें ट्रेडिंग अगले दिन यानि कि 6 अक्टूबर से की जा सकेगी। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 63.90 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स मेडिकल इक्विपमेंट बनाने और टे​लीमेडिसिन के कारोबार में है। कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की एडवांस्ड रेंज में पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ, डिफिब्रिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, फीटल मॉनिटर, स्ट्रेस टेस्ट सिस्टम आदि शामिल हैं।

Maestros Electronics का शेयर 6 महीने में 50 प्रतिशत मजबूत

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स के शेयरों में 28 सितंबर को दिन में लगभग 17 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर ने 52 सप्ताह का नया हाई 205 रुपये क्रिएट किया। शेयर के लिए अपर प्राइस बैंड 210.70 रुपये और लोअर प्राइस बैंड 140.50 रुपये है। सर्किट लिमिट 20 प्रतिशत है। शेयर एक महीने में 26 प्रतिशत और 3 महीने में 40 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 6 महीनों में कीमत 50 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई है। शेयर 3 साल में निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है। 5 साल में कीमत करीब 230 प्रतिशत बढ़ी है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 9.66 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 1.53 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 2.77 करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 39.18 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 7.13 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 12.93 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: ये 3 सरकारी कंपनियां देंगी डिविडेंड, जानिए रिकॉर्ड डेट और कितना मिलेगा पैसा

Dividend Stocks: सरकारी कंपनियों के शेयर रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। SAIL, IGL और NMDC अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देने जा रही हैं। सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में इनकी रिकॉर्ड डेट है। जानिए किस कंपनी का डिविडेंड कितना है और रिकॉर्ड डेट कब है।

NMDC

नवरत्न कंपनी NMDC अपने शेयरधारकों को हर शेयर पर 1 रुपये का डिविडेंड देगी। कंपनी ने इसके लिए 5 अक्टूबर 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की है।

यानी डिविडेंड का फायदा पाने के लिए रिकॉर्ड डेट पर आपके डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होने चाहिए। इसके बाद कंपनी तय प्रक्रिया के तहत डिविडेंड का भुगतान करेगी।

IGL

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL भी निवेशकों को डिविडेंड देने जा रही है। कंपनी हर शेयर पर 1.50 रुपये का डिविडेंड देगी।

IGL ने इसके लिए 1 अक्टूबर 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की है। अगर आपके पास तय रिकॉर्ड डेट के हिसाब से कंपनी के शेयर हैं, तो आप डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

SAIL

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी SAIL अपने शेयरधारकों को प्रति शेयर 2.35 रुपये का डिविडेंड देगी। कंपनी ने इसके लिए 30 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की है।

इसलिए SAIL के डिविडेंड का फायदा लेने वाले निवेशकों को रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदने के साथ उसकी पात्रता तारीख का भी ध्यान रखना होगा।

डिविडेंड से किसे मिलेगा फायदा?

इन तीनों कंपनियों का डिविडेंड उन्हीं निवेशकों को मिलेगा, जो कंपनी की तय रिकॉर्ड डेट के मुताबिक डिविडेंड के लिए पात्र होंगे। इसलिए सिर्फ रिकॉर्ड डेट देखना काफी नहीं है। शेयर खरीदने की तारीख भी महत्वपूर्ण है।

अगर आप डिविडेंड के लिए किसी शेयर को खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले उसकी रिकॉर्ड डेट और पात्रता से जुड़ी जानकारी जरूर देख लें।

सरकार की इस कंपनी के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, जेफरीज ने दी निवेश की सलाह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Split: 6 महीनों में 30% चढ़ा शेयर, अब 5 टुकड़ों में बंटेगा

बिल्डिंग मैटीरियल्स उपलब्ध कराने वाली कंपनी शंकरा बिल्डप्रो लिमिटेड का स्टॉक, स्प्लिट होने जा रहा है। कंपनी का 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर, 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में टूट जाएगा। इस कॉरपोरेट एक्शन की घोषणा अगस्त में हुई थी। रिकॉर्ड डेट 8 अक्टूबर 2026 है। कंपनी हर तरह के बिल्डिंग मैटीरियल और कंस्ट्रक्शन जरूरतों के लिए वन स्टॉप सॉल्यूशन के तौर पर काम करती है। इसका दावा है कि स्टील ट्यूब और पाइप के मामले में यह भारत की सबसे बड़ी डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर है।

शंकरा बिल्डप्रो 1,00,000 से ज्यादा तरह के बिल्डिंग मैटीरियल उपलब्ध कराती है, जिनमें घर बनाने से लेकर रेनोवेशन तक की आपकी हर जरूरत का सामान शामिल है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 40.18 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

स्टॉक स्प्लिट में एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन उसी अनुपात में प्रति शेयर कीमत घट जाती है। निवेशकों के निवेश की कुल वैल्यू नहीं बदलती। इस कदम का मकसद शेयरों को किफायती बनाना होता है। बहुत ज्यादा कीमत वाले शेयर छोटे निवेशकों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। स्प्लिट के बाद शेयर सस्ते हो जाते हैं, जिससे अधिक नए निवेशक जुड़ने की संभावना रहती है।

Shankara Buildpro का शेयर 6 महीनों में 30 प्रतिशत मजबूत

शंकरा बिल्डप्रो के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1273.10 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 20 प्रतिशत से ज्यादा उछला है। 6 महीनों में यह लगभग 30 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,379.80 रुपये और एडजस्टेड लो 633.40 रुपये है।

Stock Split: 6 महीनों में पैसा हुआ डबल, अब दो टुकड़ों में टूटेगा शेयर

कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 ​तिमाही में शंकरा बिल्डप्रो का रेवेन्यू 1,888.61 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 35.43 करोड़ रुपये रहा। इस बीच प्रति शेयर अर्निंग 14.61 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 6,824.65 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 127.56 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 52.60 करोड़ रुपये रही।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SEBI का ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन, सिक्योरिटीज मार्केट में नहीं कर सकेंगे ट्रांजेक्शन

सेबी ने ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। ये सभी एक साल तक सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। इन पर कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इन पर मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल पब्लिक शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर बनाने का आरोप है।

ऑमेक्स पर तीन महीनों के लिए रोक

Omaxe पर सिक्योरिटीज में ट्रांजेक्शन करने पर तीन महीने की रोक लगाई गई है। प्रमोटर्स रोहतास गोयल और जय भगवान गोयल, ग्रुप की कंपनियां ड्रीम होम डेवलेपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह के ट्रांजेक्शन पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है।

सेबी ने 24 सितंबर को पारित किया आदेश

ऑमेक्स के पूर्व ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल को भी सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने से एक साल के लिए रोक दिया गया है। सेबी ने यह आदेश 24 सितंबर को पारित किया। मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि ऑमेक्स 25 फीसदी मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के तय नियम का इंडिपेंडेंट पब्लिक शेयरहोल्डर्स के जरिए पालन करने में नाकाम रही।

MPS नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल स्ट्रक्चर बनाए

मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि कुछ एनटिटीज ने ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे से कंपनी के शेयर हासिल किए, और इस तरह से एमपीएस के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल शेयरहोल्डिंग स्ट्र्क्चर बनाए। ऐसे एनटिटीज को बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स के रूप में दिखाया गया। सेबी ने यह भी कहा है कि ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे को कई एनटिटीज के जरिए रूट किया गया और इनका इस्तेमाल उन नामों से शेयर खरीदने के लिए किया गया, जिन्हें बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स दिखाया गया।

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रेगुलेटर ने कुल 1.92 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

मार्केट रेगुलेटर ने इन पर 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ऑमेक्स, ड्रीम होम डेवलपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर 27-27 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रोहतास गोयल, सुनील गोयल और जय भगवान गोयल पर 37-37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसे सेबी के बड़े एक्शन के रूप में देखा जा रहा है।