Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP Delhi march: जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक बड़े शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए अपने वादों को पूरा नहीं किया है।

5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध मार्च

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर युवाओं और छात्र संगठनों का बड़ा जुटान देखने को मिल सकता है। CJP के नेतृत्व में यह मार्च 5 सितंबर को इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ेगा। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के अनुसार, इस मार्च का नेतृत्व नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों और पुलिस की बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

सरकार परलापरवाही का आरोप

CJP ने हाल ही में हुई ऑनलाइन कार्यसमिति की बैठक में यह समीक्षा की कि एक महीना बीत जाने के बाद भी सरकार ने मुआवजे और मुकदमे वापस लेने के अपने वादों पर अमल नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि उनके धैर्य और सद्भावना को कमजोरी न समझा जाए, इसलिए अब वे एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए विवश हैं। ALSO READ: जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध?

पिछले दिनों नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन चला था। उस दौरान सरकार के आश्वासन और सद्भावना के चलते 25 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया गया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की मांग के अनुरूप शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। सीजेपी की अन्य मांगों में नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को पूरी तरह रद्द करना भी शामिल है।

Shashi Tharoor: ‘जाति-वर्ग से ऊपर उठे कांग्रेस’, शशि थरूर ने CJP के आंदोलन से पार्टी को सीख लेने को कहा

Shashi Tharoor: कांग्रेस लीडरशिप जब OBC तक पहुंचने और जाति-आधारित प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान बढ़ा रही है, तब तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि पार्टी को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से सीख लेनी चाहिए और जाति-वर्ग से ऊपर उठना चाहिए।

News 18 के साथ एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से यह बात कह रहा हूं कि हमें जाति, धर्म, पंथ, आदिवासी या किसी खास ग्रुप जैसे सीमित हितों से ऊपर उठने की जरूरत है। और इसके साथ ही, हमें उस क्षेत्र पर भी बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिसे हम नजरअंदाज करते रहे हैं – यानी आम भारतीयों, मिडिल क्लास भारतीयों, शहरी भारतीयों और प्रोफेशनल्स से उन मुद्दों पर बात करना जो जाति और धर्म से परे सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने कहा, “चाहे परीक्षाओं का मुद्दा हो, जो हर किसी को प्रभावित करता है, महंगाई और बढ़ती कीमतें हों या शहरों की खराब होती नागरिक सुविधाएं, इन समस्याओं का सामना हर कोई रोज करता है। राहुल गांधी ने सही कहा है कि मिडिल क्लास के लिए शिक्षा अब महंगी होती जा रही है। हमें ऐसे मुद्दों को भी उठाना होगा, जो हर व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो।”

CJP के विरोध प्रदर्शनों पर थरूर ने News 18 से कहा, “CJP ने जंतर-मंतर पर क्या किया? उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसका जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से कोई लेना-देना नहीं था। और यही वजह है कि उन्हें हर तरफ से समर्थन मिला। सभी राजनीतिक पार्टियों को यही सीखने की जरूरत है। मेरा मानना ​​है – और यह मेरी निजी राय है, मैं किसी पार्टी की तरफ से या किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रहा – कि यह एक ऐसा सबक है जिसे हम सीख सकते हैं।”

CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक व्यंग्यात्मक आंदोलन शुरू किया था। इस पार्टी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जब थरूर से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस को आधिकारिक तौर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, “मैंने वकालत की थी कि हमें इसमें शामिल होना चाहिए। CJP के विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।”

थरूर ने News18 से कहा, “मुझे बताया गया था कि कांग्रेस के इसमें शामिल नहीं होने की वजह एक बेहद आपत्तिजनक पत्र था, जिसे CJP के नेतृत्व ने कांग्रेस पार्टी को लिखा था। उस पत्र में कुछ ऐसी बातें कही गई थीं, जिन्हें कांग्रेस ने अपमानजनक माना। इसलिए पार्टी ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग रखना बेहतर समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “आप इसे समझ सकते हैं, क्योंकि हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखती है। अगर कांग्रेस को लगा कि CJP एक संस्था के तौर पर उसके खिलाफ है या उसके प्रति उसका रवैया विरोधी है, तो कांग्रेस अपना नाम उनके आंदोलन के साथ क्यों जोड़ेगी? शायद यही इसकी वजह थी।”

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मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

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Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

jharkhand student protest ends

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL परीक्षा को रद्द करने के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन समाप्त हो गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 15 दिन से जारी अनशन समाप्त कर किया। हालांकि भाजपा का कहना है कि झारखंड सरकार ने आधी बात मानी है। CBI जांच से झारखंड सरकार भाग रही है क्योंकि उन्हें पता है कि CBI जांच होगी तो मुख्यमंत्री तक आंच आएगी।

 

देवेंद्र महतो ने उम्मीदवारों की मांगें मानने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य के मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी का धन्यवाद किया। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानूनों और सुधारों की भी मांग की।
 

सरकार सभी मांगों पर सहमत

राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार हमेशा से झारखंड में शुरू हुए बड़े छात्र आंदोलन, खासकर सुधारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री ने आंदोलन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी है और राहुल गांधी ने भी लगातार छात्रों के हितों की बात की है। आज हम आंदोलनकारियों का धन्यवाद करना चाहते हैं। आपने जो आंदोलन शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से, राज्य और छात्रों दोनों के हित में चलाया, वह अब बहुत सम्मानजनक तरीके से समाप्त हो रहा है। सरकार आपकी सभी मांगों पर सहमत हो गई है और हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि जांच निष्पक्ष होगी। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

 

सीबीआई जांच क्यों नहीं कराना चाहती सरकार?

दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि छात्र आंदोलन से पहले ही, देवेंद्र महतो ने CID जांच का प्रस्ताव दिया था और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। इसके विपरीत, CBI नतीजे देने में विफल रही है, पेपर लीक से जुड़े उसके 17 मामले लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि 2015 से देश भर में पेपर लीक और गड़बड़ी के 152 मामले सामने आए हैं, फिर भी न तो केंद्र सरकार और न ही केंद्रीय एजेंसियों को इन मामलों में कोई ठोस नतीजा मिला है। इसलिए, CID जांच के संबंध में हमने एक समय-सीमा तय की है। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए और मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए होनी चाहिए ताकि जल्द फैसला आ सके।

 

सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र

छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने कहा कि मंत्री दीपिका पांडे और इरफान अंसारी जी अभी आए थे उन्होंने हमसे अपील की ये आंदोलन और अनशन को खत्म करें। लेकिन जो हमारी मांगे CBI संबंधित हैं उस पर सरकार की अभी तक सहमति नहीं बन पाई है हमारी CBI से संबंधित जो मांगे है उसे हम अभी भी जारी रखें हुए हैं। कल सरकार की तरफ से जो भी नोटिफिकेशन आएगा उसको भी हम अध्ययन करेंगे उसके बाद हम अपने आंदोलन की रणनीति के बारे में बताएंगे। हमारी मांग है कि CBI जांच होनी चाहिए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम संदेश: पेपर लीक रोकने और परीक्षा सुधारों पर जानें क्या कहा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है।’ अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार, गलत तरीकों पर रोक लगाने और युवाओं के लिए पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कही ये बात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि छात्र ही भारत के भविष्य को बनाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठा रही है, ताकि पेपर लीक और परीक्षा में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को पूरी तरह रोका जा सके। सरकार का लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि जिस तरह देश की सुरक्षा के लिए सरकार और समाज मिलकर काम करते हैं, उसी तरह छात्रों के वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए भी सभी को मिलकर गंभीर और मजबूत कदम उठाने होंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं छात्रों के लिए आगे बढ़ने और अपने बेहतर भविष्य का रास्ता बनाने का मौका देती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य परीक्षा में किसी भी तरह की धोखाधड़ी और गलत तरीकों को पूरी तरह रोकना है। साथ ही, परीक्षा व्यवस्था को युवाओं के लिए ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में युवाओं और छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव, मामलों की तेजी से जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।

देश के युवाओं की तारीफ 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं में बढ़ रही कारोबार और खुद का काम शुरू करने की सोच की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के युवा सिर्फ नौकरी पाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि खुद रोजगार देने वाले बन रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के कई युवा अपना काम शुरू कर रहे हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। युवाओं की भागीदारी से भारत में स्टार्टअप का मजबूत माहौल तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भी भारतीय युवाओं की प्रतिभा और मेहनत से प्रभावित हैं और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और नेतृत्व की भूमिकाएं दे रही हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऐसे सफल युवाओं ने पूरी दुनिया में भारत की युवा ताकत की पहचान मजबूत की है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की उपलब्धियों से देश के बेहतर और उज्ज्वल भविष्य में लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। युवाओं के पूरे विकास पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत देश के भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज की भी जिम्मेदारी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं के विकास और देश के निर्माण में खेलों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम के तहत गांव और जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेलों को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं और बेहतर माहौल तैयार किया जा रहा है। सरकार खेलों के विकास पर बड़े स्तर पर खर्च कर रही है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। राष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकवाद के खिलाफ सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने की भारत की क्षमता को दिखाया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए साफ संदेश दिया गया कि आतंकवादी और उन्हें मदद देने वाले लोग दुनिया में कहीं भी छिपे हों, उन्हें अपने किए की कीमत चुकानी होगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, पेपर लीक पर लगेगी लगाम, परीक्षा व्यवस्था होगी पारदर्शी और भरोसेमंद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन,  पेपर लीक पर लगेगी लगाम, परीक्षा व्यवस्था होगी पारदर्शी और भरोसेमंद

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में शिक्षा, युवा, महिला सशक्तीकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लक्ष्य समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

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पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में होंगे व्यापक सुधार

 

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य नकल और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को पूरी तरह खत्म करना है।उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिस पर देश के युवाओं को पूरा भरोसा हो। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलनों और व्यवस्था में बदलाव की मांग उठती रही है।

 

युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन रहे

 

राष्ट्रपति ने देश के युवाओं की उद्यमिता की भावना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा अब नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने की संस्कृति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार और युवा उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी से देश में मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार हुआ है। दुनिया की बड़ी कंपनियां भारतीय युवाओं की प्रतिभा और समर्पण से प्रभावित हैं और उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारियां सौंप रही हैं।

 

‘खेलो इंडिया’ से तैयार हो रहा देशव्यापी स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

 

राष्ट्रपति ने युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को देश के भविष्य की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के समग्र विकास में परिवार और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेलों का मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है।

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ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारतीय सेना की ताकत

 

राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस की सराहना करते हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे चाहे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने कृत्यों का परिणाम भुगतना होगा। राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ का भी उल्लेख किया और भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को याद किया।

 

सिंधु जल संधि निलंबन को बताया निर्णायक कदम

 

राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति के तहत सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित, विशेष रूप से किसानों के हित में उठाया गया निर्णायक कदम बताया।

 

नक्सलवाद का खात्मा बड़ी उपलब्धि

 

आंतरिक सुरक्षा पर राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद देश के सामने गंभीर चुनौती रहा। उन्होंने भारत को नक्सलवाद मुक्त बनाने को बड़ी उपलब्धि बताया।

 

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलवाद का प्रभाव था, वहां अब विकास और उत्साह का माहौल है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

 

सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने का जिक्र

 

राष्ट्रपति ने भारत की सभ्यतागत विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ को इस वर्ष UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।

 

उन्होंने पिछले वर्ष सूची में शामिल किए गए 12 मराठा सैन्य किलों का भी जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आध्यात्मिक विरासत और सैन्य शक्ति व दृढ़ता के ऐतिहासिक प्रतीकों को समान गर्व के साथ संजोता है।

 

विदेश नीति में शांति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पर जोर

 

विदेश नीति पर राष्ट्रपति ने कहा कि शांति, संवाद, सहयोग और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला हैं।

 

उन्होंने कहा कि भारत नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास करता है और संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में वैश्विक समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने का प्रयास जारी रखेगा।

 

70 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधा

 

राष्ट्रपति ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के साथ वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी बढ़ रही है।

 

उन्होंने बताया कि करीब 6 करोड़ 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक सरकारी योजनाओं के तहत सालाना 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने समाज से बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील रहने और उनकी गरिमा बनाए रखने की अपील की।

 

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

 

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक मजबूती, विशाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सशक्त युवा एवं महिलाएं इस यात्रा के प्रमुख आधार हैं।

 

उन्होंने कहा कि वैश्विक युद्ध और अस्थिरता से आर्थिक चुनौतियां बढ़ने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी हुई है। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव मजबूत करने वाला कदम बताया।

 

25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए

 

राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक की कल्याणकारी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

 

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं। वहीं 80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त राशन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

 

डिजिटल इंडिया की ताकत का भी किया उल्लेख

 

राष्ट्रपति ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धि पर कहा कि देश ने दुनिया का सबसे बड़ा और बेहतर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। भारत की हिस्सेदारी वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन में 50 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और युवा भारत की सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं।

 

महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर

 

राष्ट्रपति के संबोधन में महिला सशक्तीकरण भी प्रमुख विषय रहा। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का शुरुआती लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और अब सरकार तीन करोड़ और लखपति दीदी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

 

उन्होंने शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की। ड्रोन दीदी से लेकर वायुसेना की फाइटर कॉम्बैट लीडर तक महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं लगातार नए क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। उन्होंने ग्लासगो में हाल में संपन्न कॉमनवेल्थ गेम्स का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 8 स्वर्ण पदक महिलाओं ने जीते।

 

लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का जिक्र

 

राष्ट्रपति ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय लोकतंत्र और ज्यादा समावेशी बनेगा।

 

पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका

 

सतत विकास पर राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने 2030 के लिए निर्धारित कई सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को तय समय से पहले हासिल किया है। उन्होंने नागरिकों से प्रकृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहने की अपील की और ‘एक पेड़ मां के नाम’ तथा LiFE (Lifestyle for Environment) जैसे अभियानों का उल्लेख किया।

 

स्वतंत्रता सेनानियों और विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि

 

राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता सेनानियों, महात्मा गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 550 से अधिक रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका को याद किया। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने और विस्थापन झेलने वाले लोगों को भी श्रद्धांजलि दी। 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी उन्होंने उल्लेख किया।

 

राष्ट्रपति ने तेलुगु लेखक गुरजाडा अप्पाराव की पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र केवल उसकी भूमि नहीं, बल्कि उसके सभी लोग हैं। उन्होंने देशवासियों से 2047 तक स्वतंत्र भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने में पूरी निष्ठा से योगदान देने का आह्वान किया।

Kangana Ranaut: ‘पाकिस्तान के प्यार में मारे रहते हैं’, कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को सुनाई खरी-खोटी

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें “लोमड़ी” कहा। अब कंगना ने अपनी बात का बचाव किया है और एक्टर पर “पाकिस्तान के प्रति उनके प्यार” को लेकर निशाना साधा है, साथ ही फिल्म इंडस्ट्री पर “दोहरेपन” का आरोप भी लगाया है।

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने का बचाव किया

ANI के साथ बातचीत में, कंगना ने फ़िल्म इंडस्ट्री के “लगातार बने हुए रवैये” की आलोचना की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मची अफरातफरी को याद किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान, उनके कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनकी खिड़कियां तोड़ दी थीं, जबकि उनके घर के बाहर करीब 2,500 लोग जमा हो गए थे, जिसके कारण भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और उनके परिवार को रात भर जागना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “तो जब जंतर-मंतर पर ऐसी स्थिति बन रही थी, तो वे सभी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे। लेकिन अब जब झारखंड में बच्चे इस तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, तो क्या वे भी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) नहीं हैं? क्या कोई व्यक्ति तभी ‘जेन ज़ी’ माना जाता है जब वह देश के खिलाफ काम करता है या प्रधानमंत्री को अपशब्द कहता है? उन्हें खुद ही युवाओं के खिलाफ दिखाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री का यह पाखंड नहीं चलेगा। फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग जंतर-मंतर के लिए जो मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, उन्हें झारखंड के बच्चों के लिए भी वैसे ही आंसू बहाने चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में अपनी “लोमड़ी” टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा, “मैंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो बनाया था जिसमें वे इस तरह की धमकियां दे रहे थे। और जब भी आप उनकी फिल्में, साक्षात्कार या बयान देखें, बात हमेशा पाकिस्तान की ही होती है। ये पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में ये मरे रहते हैं। अब बंटवारे को भी इतने साल हो गए हैं तो ये प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?”

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ क्यों कहा?

पिछले हफ्ते, अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर, कंगना ने नसीरुद्दीन की टिप्पणी पर अभिनेता पीयूष मिश्रा की एक टिप्पणी को दोबारा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन पर अनुभवी अभिनेता की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक अलग नोट जोड़ा जिसमें लिखा था, “सच तो ये है कि हर कोई न किसी का कुत्ता है लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं उसकी रखवाली करती हूं, उसके लिए लड़की हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश के हैं लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं।” (सच्चाई यह है कि हममें से हर कोई किसी न किसी का पालतू है। मुझे गर्व है कि मैं उसी घर की रक्षा और बचाव करता हूं जहां से मुझे खाना मिलता है। लेकिन नसीर साहब इस जमीन से खाते हैं और पड़ोसी देश की रक्षा करते हैं)।”

उन्होंने आगे कहा, “PS: आज के समय में कुत्ता कहलाना एक तारीफ़ है क्योंकि वफ़ादारी और क्यूटनेस बहुत कम देखने को मिलती है। मैं नसीरुद्दीन की तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना ज़्यादा पसंद करूंगी।” इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने NEET पेपर लीक को लेकर CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी।

‘शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है’; Insta reels पसंद करने वाली Gen Z को PM मोदी का संदेश

PM Modi message to reel-loving Gen Z: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीखने की अपील। एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बुधवार (12 अगस्त) को अपील करते हुए कहा कि रील के युग में रह रहे युवाओं को याद रखना चाहिए कि शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी कोविंद के लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया। बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं।

युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील

प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि इनसे किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के जरिए समझने का मौका मिलता है जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। उन्होंने कहा, “आज रील का जमाना है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आपको कहीं न कहीं खींच ले जाते हैं लेकिन इस दौर में भी, रेलवे स्टेशन पर लिखी बात याद रखें, ‘शॉर्टकट’ आपको नुकसान पहुंचा सकता है।”

PM मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया पर ‘जेन जी’ से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। नीट का पेपर लीक होने के खिलाफ पिछले महीने हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें और रील पोस्ट करें।

पीएम मोदी भी शेयर कर रहे हैं रील्स

हाल के हफ्तों में पीएम मोदी ने स्वयं युवाओं को संबोधित करते हुए कई बार रील शेयर की हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की धरोहर बनेगी। साथ ही नई पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविंद की हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का पुख्ता इरादा रखें। वे आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बनाएंगे और यह आत्मकथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”

उन्होंने कहा कि आत्मकथा का शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही व्यक्तिगत थे। लेकिन उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है। पीएम मोदी ने याद किया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुखद घटना कोविंद को तोड़ सकती थी। लेकिन इसके बजाय इसने उन्हें और मजबूत बनाया।

अच्छे संस्कार का किया जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की अहम भूमिका रही। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति उनसे ऐसी बातें करते थे जिनकी प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर अनुमति नहीं होती थी। PM मोदी के मना करने के बावजूद वे उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। कोविंद ने इस अवसर पर अपने बचपन की मुश्किलों और अपने आस-पास के माहौल से मिली सीख को याद किया।

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उन्होंने याद किया कि कैसे उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था। उनका परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था। कोविंद ने कहा कि सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीने का मौका मिला है। कोविंद ने कहा कि वह BJP से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी नजर में यह पार्टी परिवार या समुदाय के हितों से ऊपर देश को रखती है।