देश का पहला REIT-बेस्ड इंडेक्स फंड, Edelweiss Mutual Fund ने किया लॉन्च

एडलवाइज म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) ने ‘एडलवाइज निफ्टी REITs एंड रियल्टी इंडेक्स फंड’ लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड पैसिव स्कीम है जो निफ्टी REITs और रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) इंडेक्स को ट्रैक करती है। इस एक ही निवेश स्कीम के जरिए निवेशकों को लिस्टेड REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स)) और रियल एस्टेट डेवलपर्स, दोनों में निवेश का मौका मिलेगा। लिंक्डइन पर एक पोस्ट में सीईओ राधिका गुप्ता ने जिक्र किया कि यह अपनी तरह का पहला फंड है और यह निवेशकों को एक महत्वपूर्ण एसेट क्लास में डाईवर्सिफाईड निवेश का मौका देता है, जिसमें पहले से ही बड़े संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी है।

Edelweiss Mutual Fund के नई स्कीम की खास बातें

एडलवाइज म्यूचुअल फंड का एडलवाइज निफ्टी REITs एंड रियल्टी इंडेक्स फंड सब्सक्रिप्शन के लिए अगले महीने 5 अगस्त को खुलेगा और19 अगस्त को बंद होगा। इसमें कम से कम ₹100 का निवेश करना होगा, कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा और इसका अधिकतम TER (टोटल एक्सपेंस रेश्यो) 0.90% होगा। इस स्कीम को भरत लाहोटी (Bharat Lahoti) और मानसी जलगांवकर (Manasi Jalgaonkar) मैनेज करेंगे।

यह फंड निफ्टी रीट्स एंड रियल्टी इंडेक्स को ट्रैक करेगा जिसमें 60% लिस्टेड रीट्स और 40% रियल एस्टेट कंपनियां हैं। एडलवाइज म्यूचुअल फंड का कहना है कि जैसे-जैसे नए REITs लिस्ट होंगे और इंडेक्स में शामिल होंगे, REITs का हिस्सा बढ़ने की संभावना है। इसके पोर्टफोलियो में 15 सिक्योरिटीज शामिल होंगी और कम से कम 60% REITs में लगेगा और बाी लिस्टेड रियल एस्टेट स्टॉक्स में। किसी एक सिक्योरिटीज में अधिकतम 15% तक ही निवेश किया जाएगा और साथ ही प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में निवेश पर भी एग्रीगेट एक्सपोजर लिमिट तय की गई है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा REIT मार्केट

एडलवाइज की स्कीम ऐसे समय में लॉन्च हो रही है जब भारत का लिस्टेड REIT मार्केट लगातार बढ़ रहा है। छह लिस्टेड REITs के पास कुल मिलाकर लगभग ₹3.1 लाख करोड़ के ग्रेड-ए कमर्शियल रियल एस्टेट एसेट्स हैं और साल 2019 से उन्होंने निवेशकों को ₹31,700 करोड़ रुपये से अधिक का डिस्ट्रीब्यूशन किया है। REITs को 1 जनवरी, 2026 से इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स के तौर पर रीक्लासिफाई किया गया और 1 जुलाई से वे इक्विटी इंडेक्स का हिस्सा बन गए, जिससे इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों के बीच उनकी अपील बढ़ी है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के मुताबिक देश के ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस का सिर्फ 13% हिस्सा ही फिलहाल लिस्टेड REITs के तहत आता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कमर्शियल एसेट्स के मोनेटाइजेशन की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। फंड हाउस का मानना है कि शहरीकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ और इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के बढ़ते निवेश जैसे जैसे स्ट्रक्चरल ड्राइवर्स से इस एसेट क्लास की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

विकसित देशों की तुलना में भारत का REIT मार्केट अभी शुरुआती दौर में है। भारत में फिलहाल 6 लिस्टेड REITs हैं, जिनका अनुमानित मार्केट कैप करीब $1900 करोड़ है जबकि अमेरिका में 196 लिस्टेड REITs हैं, जिनका कुल मार्केट कैप करीब $1.4 ट्रिलियन यानी $1.4 लाख करोड़। इससे भारत में भविष्य में इस क्षेत्र के विस्तार की काफी संभावनाएं दिख रही हैं।

LIC’s Micro Bachat Plan: ₹1000 महीने वाली एलआईसी पॉलिसी, रिटर्न भी धांसू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LIC’s Micro Bachat Plan: ₹1000 महीने वाली एलआईसी पॉलिसी, रिटर्न भी धांसू

LIC’s Micro Bachat Plan: एलआईसी के कुछ प्लान ऐसे हैं, जिनमें इंश्योरेंस कवरेज के साथ-साथ रिटर्न भी बेहतर मिलता है। इसमें से एक माइक्रो बचत प्लान है। इसमें सालाना करीब ₹12 हजार में यानी हर महीने महज ₹1000 के प्रीमियम में ही 15 साल तक का इंश्योरेंस कवरेज हासिल किया जा सकता है। इसमें पॉलिसीहोल्डर्स को शर्तों के हिसाब से लॉयल्टी एडीशंस मिलता है और मौजूदा लॉयल्टी एडीशंस के हिसाब से करीब 6% तक का रिटर्न बन सकता है। हालांकि इस प्लान की कुछ सीमाएं भी हैं जैसे कि इसमें अधिकतम ₹2 लाख तक की ही पॉलिसी खरीदी जा सकती है। इस

LIC’s Micro Bachat Plan: खास बातें

एलआईसी का माइक्रो बचत प्लान एक नॉन-लिंक्ड, पार्टिसिपेटिंग, इंडिविजुअल लाइफ, माइक्रो-इंश्योरेंस, सेविंग्स प्लान है।

इसमें 18-55 वर्ष की उम्र में ₹1-₹2 लाख तक की पॉलिसी ली जा सकती है।

प्रीमियम भरने के लिए 10 से लेकर 15 वर्षों तक का पीरियड चुना जा सकता है और प्रीमियम पेमेंट टर्म (PPT) खत्म होने के बाद मेच्योरिटी पर पैसा मिलेगा।

मेच्योरिटी पर कितना पैसा मिलेगा, यह निर्भर करता है कि पॉलिसी कितने साल के लिए ली है क्योंकि जितने समय के लिए पॉलिसी लेंगे, उतने समय तक का लॉयल्टी एडीशन (LA) मिलेगा। लॉयल्टी एडीशन 5 साल के बाद ही जुड़ने शुरू होते हैं यानी कि इससे पहले सरेंडर करने पर लॉयल्टी एडीशन नहीं मिलेगा।

अब डेथ बेनेफिट की बात करें तो पॉलिसीहोल्डर्स की मौत के मामले में अगर पॉलिसी के पहले पांच साल में मृत्यु हुई है तो नॉमिनी को सम एश्योर्ड के बराबर पैसा मिलेगा और 5 साल के बाद मौत होने पर सम एश्योर्ड के साथ लॉयल्टी एडीशन जोड़कर मिलेगा। सम एश्योर्ड का मतलब बेसिक सम एश्योर्ड या सालाना प्रीमियम के सात गुने में जो अधिक हो, वह है।

इसमें किए गए निवेश पर ओल्ड टैक्स रिजीम में सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन मिलता है तो मेच्योरिटी का पैसा सेक्शन 10(10डी) के तहत टैक्स-फ्री है।

इसमें ADDB (एक्सीडेंटल डेट एंड डिजेबिलिटी बेनेफिट), AB, AB (दो गुना), AB (3 गुना) जैसे राइडर्स उपलब्ध हैं।

उदाहरण से समझें

मान लिया कि 55 साल के किसी शख्स ने इस प्लान के तहत ₹2 लाख की पॉलिसी खरीदी। उनका सालाना प्रीमियम ₹12066, छमाही ₹6096, तिमाही ₹3080 या मासिक ₹1027 बनेगा। 15 साल तक प्रीमियम पेमेंट करने के बाद मौजूदा लॉयल्टी एडीशन के हिसाब से रिटर्न में ₹2.65 लाख मिलेंगे। अभी सम एश्योर्ड के हर ₹1000 पर एलआईसी ₹325 लॉयल्टी एडीशन दे रही है। इसमें सालाना 5.1% का रिटर्न बनता दिख रहा है। ध्यान दें कि इसमें प्रीमियम कैलकुलेशन ADDB राइडर्स को मिलाकर किया गया है।

अब मान लेते हैं कि किसी शख्स ने 18 साल की उम्र में पॉलिसी ली। ADDB राइडर्स के साथ सालाना प्रीमियम ₹10360, छमाही ₹5235, तिमाही ₹2645 या मासिक ₹882 बनेगा। 15 साल तक प्रीमियम पेमेंट करने के बाद मौजूदा लॉयल्टी एडीशन के हिसाब से रिटर्न में ₹2.65 लाख मिलेंगे। इसमें सालाना 6.7% तक ेका रिटर्न बनता दिख रहा है।

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डिस्क्लेमर: निवेश या बीमा से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HPCL Stock Outlook: 23% तक उछल सकता है सरकारी कंपनी का शेयर, मोतीलाल ओसवाल ने दी खरीद की सलाह

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के शेयर में आगे 23 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल के टारगेट प्राइस से मिली है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। टारगेट प्राइस 470 रुपये प्रति शेयर रखा है। यह बीएसई पर शेयर के मौजूदा भाव 381.25 रुपये से 23 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद स्टॉक पर ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सरकारी कंपनी HPCL को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 11,526.41 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। एक साल पहले कंपनी को 4,575.87 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेजी ​आई। लेकिन फिर भी HPCL ने पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेचा। इसकी वजह से कंपनी का पिछले वित्त वर्ष का दो-तिहाई से अधिक लाभ खत्म हो गया। कंपनी का मुनाफा पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 17,258.13 करोड़ रुपये रहा था।

कंपनी को तिमाही के दौरान पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस LPG की बिक्री पर भारी नुकसान हुआ। इससे रिकॉर्ड रिफाइनिंग मार्जिन खत्म हो गया। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1.44 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 तिमाही में 1.19 लाख करोड़ रुपये था।

HPCL पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि HPCL ने मार्केटिंग मार्जिन उम्मीद से कम रहने के कारण ₹161.3 अरब का ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया। अनुमान ₹161.3 अरब के ऑपरेटिंग लॉस का था। ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (इन्वेंट्री सहित) नेगेटिव ₹14.9/लीटर रहा, जबकि अनुमान नेगेटिव ₹9.4/लीटर का था। LPG अंडर-रिकवरी ₹56 अरब रही। ब्रोकरेज को अनुमान है कि HPCL वित्त वर्ष 2028 में इक्विटी पर 17.3 प्रतिशत का रिटर्न दर्ज करेगी।

HPCL का मार्केट कैप 81100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर साल 2026 में अब तक 23 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक सरकार के पास 54.90 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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जेफरीज और नोमुरा का रुख

HPCL के शेयर पर जेफरीज ने “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस ₹325 प्रति शेयर रखा है। जून तिमाही में कंपनी का नुकसान ब्रोकरेज के अनुमान से कम था। ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि HPCL पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए घाटा दर्ज कर सकती है। इसकी वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद स्पॉट मार्केटिंग मार्जिन फिर से घाटे में चले गए हैं।

नोमुरा ने HPCL के लिए “न्यूट्रल” रेटिंग और ₹440 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। HPCL पर नजर रखने वाले 33 एनालिस्ट्स में से 15 ने “बाय” रेटिंग दी है। 7 ने “होल्ड” रेटिंग और 11 ने “सेल” रेटिंग दी है।

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Juniper Green Energy IPO: जुनिपर ग्रीन का आईपीओ 30 जुलाई को खुलेगा, रिन्यूएबल एनर्जी पर दांव लगाने का बड़ा मौका

Juniper Green Energy IPO: जुनिपर ग्रीन एनर्जी का आईपीओ 30 जुलाई को खुल जाएगा। यह आईपीओ 1,800 करोड़ रुपये का है। कंपनी इश्यू के जरिए इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू करेगी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि कंपनी के प्रमोटर्स या पुराने इनवेस्टर्स आईपीओ में अपने शेयर नहीं बेचेंगे।

एंकर इनवेस्टर्स के लिए 29 जुलाई को खुलेगा इश्यू

Juniper Green Energy ने पहले आईपीओ से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। बाद में उसने इश्यू का साइज घटा दिया। कंपनी आईपीओ में शेयरों के प्राइस बैंड सहित कई जानकारियां सोमवार यानी 27 जुलाई को इश्यू करेगी। यह इश्यू एंकर इनवेस्टर्स के लिए एक दिन पहले यानी 29 जुलाई को खुल जाएगा।

6 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट होंगे शेयर 

शेयरों का एलॉटमेंट 4 अगस्त को होने की उम्मीद है। कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज में 6 जुलाई को लिस्ट होंगे। कंपनी ने 2 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर अपने एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व रखा है। इश्यू के आधे शेयर (एंप्लॉयीज का हिस्सा छोड़कर) क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हैं। 35 फीसदी शेयर्स रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हैं।

 टॉप 10 इंडिपेंडेंट रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल 

जुनिपर ग्रीन एनर्जी गुरुग्राम की कंपनी है। यह देश के सबसे बड़े 10 रिन्यूएबल इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स में शामिल है। इसके पोर्टफोलियो में 50 प्रोजेक्ट्स हैं। कंपनी की कुल बिजली उत्पादन क्षमता इस साल जून में 7,910.20 MW की थी। मार्च 2020 में कंपनी का सिर्फ एक सोलर प्रोजेक्ट था, जिसकी क्षमता 100 मेगावॉट थी। कंपनी के 50 प्रोजेक्ट्स में 20 ऑपरेशनल प्रोजेक्ट्स हैं। 19 कॉन्ट्रैक्टेड प्रोजेक्ट्स है, जिन पर काम चल रहा है। बाकी 11 अवॉर्डेड प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

कंपनी आईपीओ से आए पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी

कंपनी आईपीओ से आए 1,411.9 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए होगा। इस साल जून में कंसॉलिडेटेड आधार पर कंपनी पर 13,266 करोड़ रुपये का कर्ज था। जुनिपर ग्रीन की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में ACME Solar Holdings, NTPC Green Energy और Adani Green Energy शामिल हैं। ये सभी कंपनियां स्टॉक्स एक्सचेंज में सूचीबद्ध (Listed) हैं।

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 41 फीसदी बढ़ा

जुनिपर ग्रीन का प्रॉफिट FY26 में 10.9 फीसदी बढ़कर 40.5 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 41.3 फीसदी बढ़कर 718.9 करोड़ रुपये रहा। यह इश्यू उन निवेशकों के लिए एक मौका है, जो रिन्यूएनबल एनर्जी पर दांव लगाना चाहते हैं। देश में कुल बिजली उत्पादन में रन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। यह हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी पर पहुंच गई है।

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शेयर बाजार का सेंटिमेंट फिलहाल कमजोर

यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब मध्यपूर्व में बढ़ते टेंशन और क्रूड में उछाल से मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर है। इस हफ्ते पांचों कारोबारी सत्रों में बाजार के प्रमुख सूचकांकों निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट आई। इस हफ्ते निफ्टी करीब 600 अंक गिरा है, जबकि सेंसेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटा है। निवेशकों को इश्यू में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स की राय लेने की सलाह है।

₹4 लाख से कम सैलरी वाले सावधान! टैक्स तो नहीं लगेगा, पर ITR भरना है जरूरी; जानिए ये 6 कड़े नियम

ITR Filing Rules Below Exemption Limit: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना लेट फीस इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है जो बेहद करीब है। आयकर विभाग के अनुसार, अब तक 3 करोड़ से अधिक करदाता अपना ITR फाइल कर चुके हैं।

आमतौर पर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹4 लाख और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ₹2.5 लाख से अधिक की सालाना कमाई पर ही आईटीआर भरना अनिवार्य होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सालाना कमाई इस बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद भी आपको जेल या पेनल्टी से बचने के लिए ITR दाखिल करना पड़ सकता है?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत ऐसे 6 विशेष नियम तय किए गए हैं, जिनके दायरे में आने पर आईटीआर भरना अनिवार्य हो जाता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

इन 6 स्थितियों में कम कमाई पर भी अनिवार्य है ITR भरना

अगर आपकी सालाना आय बेसिक छूट सीमा से कम है, फिर भी इनमें से कोई एक शर्त पूरी होने पर आपको ITR दाखिल करना ही होगा:

1- करंट अकाउंट में ₹1 करोड़ से ज्यादा का डिपॉजिट: अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक चालू खातों में ₹1 करोड़ या उससे अधिक की नकदी जमा की है।

2- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक का खर्च: अगर आपने अपने या किसी अन्य व्यक्ति के फॉरेन ट्रैवल जैसे- हवाई टिकट, टूर पैकेज आदि पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं।

3- ₹1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल: अगर पूरे साल में आपका बिजली बिल कुल मिलाकर ₹1 लाख से अधिक आया है।

4- TDS या TCS की सीमा पार होना: अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका कुल TDS/TCS कटान ₹25,000 या उससे अधिक है (60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए)। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे ऊपर) के लिए यह सीमा ₹50,000 रखी गई है।

5- सेविंग्स अकाउंट में ₹50 लाख या उससे अधिक जमा: अगर वित्त वर्ष में आपके एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल ₹50 लाख या उससे ज्यादा जमा हुए हैं।

6- विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाते में साइनिंग अथॉरिटी: अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेश में कोई संपत्ति, फाइनेंशियल शेयर या किसी विदेशी बैंक खाते का साइनिंग राइट रखते हैं।

कम कमाई के बावजूद ITR फाइल करने के 4 बड़े फायदे

भले ही कानूनन आपके लिए आईटीआर भरना अनिवार्य न हो, फिर भी वॉलंटरी रिटर्न दाखिल करने के कई बड़े फायदे मिलते हैं:

लोन मिलने में आसानी: होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के आवेदन के दौरान ITR सबसे मजबूत ‘इनकम प्रूफ’ का काम करता है।

वीजा प्रोसेसिंग: कई देशों जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन देश का वीजा हासिल करने के लिए पिछले 2-3 सालों का ITR जमा करना अनिवार्य होता है।

TDS रिफंड का दावा: अगर आपका टीडीएस कटा है, तो उसे वापस पाने के लिए रिटर्न भरना ही एकमात्र तरीका है।

नुकसान को आगे ले जाना: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए समय पर ITR फाइल करना जरूरी होता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Price Today: आज कितना बढ़ा चांदी भाव? जानें दिल्ली समेत बड़े शहरों के रेट

Silver Price Today: पश्चिमी एशिया में एक बार फिर शुरू हुए युद्ध का असर जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय मार्केट पर पड़ता दिख रहा है, वैसे-वैसे सोने और चांदी के भाव में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं। दरअसल, आज भारत में सुबह तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 1.33% बढ़कर यानी 2926 रुपये तेजी के साथ 2,22,301 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,19,375 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी 58.49 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

बुलियन्स के अनुसार, चांदी की कीमत 2,22,830 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार बंद होने तक चांदी का भाव 2,19,556 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। चूंकि शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहते हैं, इसलिए दोनों दिन चांदी का यही भाव लागू रहेगा।

दिल्ली के सर्राफा बाजार की बात करें, तो यहां पर चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। यहां चांदी का भाव 5,000 रुपये घटकर 2,24,700 रुपये प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) पर आ गया। वहीं, गुडरिटर्न्स के मुताबिक, चांदी 2,40,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई।

ऐसे में अगर आप आज चांदी में निवेश या खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले अपने शहर का रेट जरूर चेक कर लें।

चेक करें चांदी के ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,400₹24,000₹2,40,000
मुंबई₹2,400₹24,000₹2,40,000
कोलकाता₹2,400₹24,000₹2,40,000
चेन्नई₹2,450₹24,500₹2,45,000
पटना₹2,400₹24,000₹2,40,000
लखनऊ₹2,400₹24,000₹2,40,000
अयोध्या₹2,400₹24,000₹2,40,000
कानपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
मेरठ₹2,400₹24,000₹2,40,000
गाजियाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
नोएडा₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,400₹24,000₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,400₹24,000₹2,40,000
जयपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
लुधियाना₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुवाहाटी₹2,400₹24,000₹2,40,000
इंदौर₹2,400₹24,000₹2,40,000
अहमदाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
वडोदरा₹2,400₹24,000₹2,40,000
सूरत₹2,400₹24,000₹2,40,000
पुणे₹2,400₹24,000₹2,40,000
नागपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
नासिक₹2,400₹24,000₹2,40,000
बैंगलोर₹2,400₹24,000₹2,40,000
भुवनेश्वर₹2,450₹24,500₹2,45,000
रायपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
हैदराबाद₹2,450₹24,500₹2,45,000

पिछले दिन कैसा रहा चांदी का भाव?

कारोबारियों के मुताबिक, घरेलू बाजार में खरीदारी कमजोर रहने और बिकवाली दबाव बढ़ने से शुक्रवार को चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी का भाव 5,000 रुपये गिरकर 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर आ गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,29,700 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजार में हाजिर चांदी करीब 2 प्रतिशत चढ़कर 58.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Small Savings Schemes: शेयर मार्केट में उठा-पटक की टेंशन दूर, 8.2% तक का रिटर्न, पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम शानदार

Small Savings Schemes: पिछले कुछ महीनों से स्टॉक मार्केट में काफी उठा-पटक दिख रही है। इससे शॉर्ट टर्म में रिटर्न को लेकर निवेशक परेशान हो गए हैं। हालांकि अधिकतक एक्सपर्ट्स लंबे समय में अच्छा पैसा बनाने के लिए इक्विटी में पैसा लगाने की सलाह देते हैं लेकिन जो निवेशक मार्केट की घबराहट से दूर बिना टेंशन अच्छा पैसा बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी मार्केट में विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार के सपोर्ट वाली छोटी बचत योजनाएं पोर्टफोलियो का अच्छा हिस्सा बन सकती हैं। इनमें सालाना 8.2% तक का ब्याज मिल रहा है, जिससे मार्केट की उठा-पटक से दूर निवेशकों का क्रेज इन्हें लेकर बढ़ रहा है।

Public Provident Fund (PPF)

लंबे समय से पीपीएफ सैलरीड एंप्लॉयीज और अपना खुद का बिजनेस करने वालों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में शुमार है। अभी इस पर सालाना 7.1% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 15 वर्ष है। पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत इसमें किए गए निवेश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन मिलका है। साथ ही अर्जित ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा भी टैक्स-फ्री होता है।

National Savings Certificate (NSC)

एनएससी एक फिक्स्ड इनकम योजना है, जिसमें अभी सालाना 7.7% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है और इसमें निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है।

Kisan Vikas Patra (KVP)

बाजार की उठा-पटक से दूर किसान विकास पत्र (केवीपी) ऐसे निवेशकों के लिए सुरक्षित है जो बिना किसी टेंशन अपने पैसे को अच्छी रफ्तार से बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं। अभी इस पर सालाना 7.5% की दर से ब्याज मिल रहा है और इस रफ्तार से 115 महीने में इसमें रखा पैसा डबल हो जाता है।

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)

लड़कियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना में अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है जोकि स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में सबसे अधिक ब्याज देने वाली योजना में से एक है। 10 साल से कम उम्र की लड़की के अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं।

Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS)

सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम के तहत अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है और यह भी अधिक ब्याज देने वाली सरकारी बचत योजनाओं में शुमार है। इसके तहत 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं और ऐसे लोगों के लिए बेहतर है जो नियमित आय चाहते हैं।

Post Office Time Deposits

पोस्ट ऑफिस में बैंकों की तरह एक एफडी है, जिसे सरकार का सपोर्ट मिला हुआ है। इसमें एक साल की जमा पर 6.9%,दो साल की जमा पर 7.0%, तीन साल की जमा पर 7.1% और पांच साल की जमा पर 7.5% की दर से ब्याज मिलेगा। पांच साल की जमा पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलेगा।

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें

सरकार हर तिमाही स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स यानी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें तय करती हैं और सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां पोस्ट ऑफिस से जुड़ी स्कीम्स के लिए ब्याज दर की डिटेल्स दी जा रही है-

स्मॉल सेविंग्स स्कीमब्याज दर
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)8.2%
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.2%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5%
5 वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट7.5%
पोस्टऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.4%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1%
3 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट7.1%
2 साल का पोस्ट ऑफिस डाकघर टाइम डिपॉजिट7.0%
1 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट6.9%
पोस्ट ऑफिस आरडी (RD)6.7%
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम4.0%

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में ₹999 की छोटी SIP से तैयार होगा लाखों का फंड

डिस्क्लेमर: निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में ₹999 की छोटी SIP से तैयार होगा लाखों का फंड, देखें 10, 15 और 25 साल का कैलकुलेशन

SIP Investment Calculation: क्या आप सोचते हैं कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में बड़ा फंड बनाने के लिए हर महीने भारी-भरकम रकम का निवेश करना जरूरी है? अगर हां, तो यह खबर आपकी इस सोच को बदल देगी। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आप रोजाना महज ₹33 की बचत यानी हर महीने सिर्फ ₹999 का निवेश करके भी लाखों रुपये का बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

कंपाउंडिंग की ताकत और लंबी अवधि के अनुशासन के चलते छोटा सा निवेश भी समय के साथ एक बड़ी संपत्ति में तब्दील हो जाता है। आइए एसआईपी कैलकुलेटर के जरिए समझते हैं कि ₹999 महीना जमा करने पर 15, 20 और 25 सालों में कितना रिटर्न मिल सकता है।

₹999 की मासिक SIP: 12% और 15% रिटर्न का गणित

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में औसतन 12% से 15% तक का सालाना रिटर्न देखा जाता है। अगर आप हर महीने ₹999 बिना रुके एसआईपी करते हैं, तो आपकी वेल्थ कैसे बढ़ेगी:

12% अनुमानित सालाना रिटर्न पर इतना बनेगा फंड

12% अनुमानित सालाना रिटर्न पर इतना बनेगा फंड

15% अनुमानित सालाना रिटर्न पर (एग्रेसिव फंड्स)

20 साल में: आपका कुल निवेश ₹2.39 लाख होगा, लेकिन 15% रिटर्न के हिसाब से यह फंड बढ़कर ₹15.13 लाख बन सकता है।

25 साल में: ₹2.99 लाख का कुल निवेश बढ़कर ₹32.81 लाख के बड़े कॉर्पस में तब्दील हो सकता है।

कंपाउंडिंग की ताकत कैसे काम करती है?

इस कैलकुलेशन की सबसे खास बात यह है कि जैसे-जैसे समय बीतता है, आपकी जेब से लगने वाला पैसा कम रहता है, जबकि ब्याज पर मिलने वाला ब्याज आपके फंड को तेजी से बढ़ाता है। 20 साल के दौरान आपका अपना निवेश केवल ₹2.39 लाख रहेगा, लेकिन कंपाउंडिंग के कारण आपको ₹7.5 लाख से अधिक का केवल शुद्ध मुनाफा मिलेगा।

‘स्टेप-अप SIP’ से फंड को बनाएं दोगुना

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी रकम में केवल 10% का इजाफा करते हैं (जैसे- पहले साल ₹999/महीना, दूसरे साल ₹1,100/महीना), तो 20 साल बाद आपका यही फंड ₹10 लाख के बजाय बढ़कर ₹22 लाख से अधिक हो सकता है। जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, वैसे-वैसे एसआईपी अमाउंट बढ़ाना पैसे जुटाने का सबसे स्मार्ट तरीका है।

निवेश शुरू करने से पहले 3 जरूरी बातें

कंसिस्टेंसी: बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर एसआईपी कभी बंद न करें। मंदी के दौर में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

लक्ष्य तय करें: अपने रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी चुनें।

सही फंड का चुनाव: अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप या इंडेक्स फंड्स में निवेश शुरू करें।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।