BHAVYA-Rasayan Scheme: बड़ा ऐलान! 3030 करोड़ खर्च कर देश में बनेंगे 3 विशाल केमिकल पार्क, जानें किसे होगा फायदा

BHAVYA-Rasayan Scheme: देश में केमिकल सेक्टर को मजबूत करने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को स्पीड देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश में 3 डेडिकेटेड केमिकल पार्क बनाने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना-रसायन (BHAVYA-Rasayan Scheme) को मंजूरी दी गई है। PTI के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इस नई योजना का ऐलान किया। इसकी घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में ही कर दी गई थी। सरकार ने बताया है कि इस स्कीम के लिए 3030 करोड़ रुपये का खर्च तय किया गया है।

₹3030 करोड़ के बजट का कैसे होगा इस्तेमाल?

ये योजना मौजूदा वित्त वर्ष से शुरू होकर वित्त वर्ष 2030-31 तक (5 वर्षों के लिए) के लिए होगी। कुल बजट में से ₹3000 करोड़ पार्कों के भीतर कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं और बुनियादी उपयोगिताओं को तैयार करने के लिए दिए जाएंगे। बाकी ₹30 करोड़ का इस्तेमाल एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों के लिए होगा। केंद्र सरकार प्रति पार्क ₹1000 करोड़ तक की सहायता देगी। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार को न्यूनतम ₹500 करोड़ का योगदान देना अनिवार्य होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इन तीनों पार्कों की स्थापना के लिए कुल निवेश इससे कहीं अधिक होगा। सरकार की ओर से दी जा रही ₹3,030 करोड़ की सहायता मुख्य रूप से कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के लिए है।

क्यों खास है केमिकल सेक्टर?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इकॉनमी में ऐसे कई क्षेत्र हैं जो बुनियादी महत्व रखते हैं और केमिकल सेक्टर उनमें से एक है क्योंकि यह कई अन्य उद्योगों को बेसिक रॉ मैटेरियल उपलब्ध कराता है।

इस योजना से किसे और क्या फायदा होगा?

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक ‘भव्य-रसायन योजना’ से कई फायदे होंगे। यह योजना अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और सहायक उद्योगों सहित पूरी वैल्यू चेन के साथ-साथ केमिकल इंडस्ट्री के विकास को बढ़ावा देगी। पार्कों के निर्माण से संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा। एक ही जगह पर इंटिग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और उद्योगों के लिए उत्पादन आसान होगा।

‘डीके, सावधान रहना…’ PM मोदी ने डीके शिवकुमार से क्यों कही ये बात, बेंगलुरु को लेकर किया ये खुलासा

News18 Rising Bharat Summit: बेंगलुरु में आयोजित न्यूज 18 राइजिंग भारत समिट में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के लिए ज्यादा आर्थिक मदद देने की मांग की है। उनका कहना है कि कर्नाटक देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, इसलिए उसे केंद्र से भी बेहतर आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए। ‘राइजिंग भारत’ समिट में डी.के. शिवकुमार ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बेंगलुरु पर नजर बनाए हुए हैं।

जब पीएम मोदी ने सीएम शिवकुमार से कही ये बात

सीएम शिवकुमार ने कहा, “जब भी मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होती है, मैं उनसे कहता हूं कि हम देश की तरक्की में पूरा सहयोग दे रहे हैं, इसलिए केंद्र को भी हमारी मदद करनी चाहिए। हमारे हिस्से के पैसे को दूसरे राज्यों में ज्यादा न बांटा जाए।” उन्होंने कहा कि कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें केंद्रीय संसाधनों में उचित हिस्सा मिले।

डी.के. शिवकुमार ने आगे कहा कि यह केंद्र सरकार की नीति से जुड़ा मामला है और वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाल ही में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। शिवकुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उनसे कहा, “डी.के., सावधान रहिए। दुनिया भर के सभी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बेंगलुरु पर नजर रखे हुए हैं।”

बेंगलुरु के आर्थिक विकास पर फोकस 

बेंगलुरु की आर्थिक अहमियत पर बात करते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि यह शहर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से लेकर एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों तक बेंगलुरु का बड़ा योगदान है और इसी वजह से दुनिया भर के निवेशक यहां निवेश करना चाहते हैं। उन्होंने माना कि बेंगलुरु शुरू से योजनाबद्ध तरीके से नहीं बसाया गया था, लेकिन समय-समय पर अलग-अलग सरकारों ने शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। शिवकुमार ने कहा, “जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब मैं बेंगलुरु के शहरी विकास मंत्री के रूप में काम कर रहा था। उस दौरान हमने शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं तैयार की थीं। मैं मानता हूं कि बेंगलुरु पूरी तरह योजनाबद्ध शहर नहीं है, लेकिन अब हमें इसे उसी तरह विकसित करना होगा, क्योंकि यह आईटी से लेकर एयरोस्पेस तक कई क्षेत्रों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत देता है।”

कर्नाटक को निवेश के लिए सबसे बेहतर राज्यों में से एक बताते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य कई क्षेत्रों में देश की अगुवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि खेती, डेयरी, रेशम उत्पादन और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) जैसे क्षेत्रों में कर्नाटक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शिवकुमार ने बेंगलुरु की खासियतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां का सुहावना मौसम, बेहतर जीवनशैली और लोकप्रिय पब संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। इसके साथ ही राज्य सरकार कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी लगातार काम कर रही है, ताकि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सके।

Market outlook : लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 27 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market outlook :24 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,800 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। लगभग 2050 शेयरों में बढ़त हुई,1961 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,एटरनल, M&M, श्रीराम फाइनेंस और भारती एयरटेल शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,विप्रो,सिप्ला,ITC और HDFC लाइफ शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी IT (0.8% ऊपर),निफ्टी PSU बैंक (0.5% ऊपर)और निफ्टी बैंक (0.18% ऊपर)रहे।

दूसरी ओर निफ्टी ऑटो सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.10% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी मेटल (0.55% नीचे),निफ्टी एनर्जी (0.57% नीचे),निफ्टी रियल्टी (0.55% नीचे),निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.46% नीचे),निफ्टी फार्मा (0.4% नीचे) और निफ्टी इंफ्रा (0.4% नीचे) रहे।

ब्रॉडर मार्केट भी अपने इंट्राडे निचले स्तरों से सुधरे। निफ्टी मिडकैप 100 बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट खराब रह सकता है। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से मेन मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें संकट के समय के अपने पीक से काफी नीचे होने के बावजूद US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 52-हफ्ते के हाई पर पहुंच गए हैं। यह बॉन्ड मार्केट की उन चिंताओं को दिखाता है जो एनर्जी से जुड़ी महंगाई के जोखिम,मजबूत लेबर मार्केट की स्थिति और फेड के लगातार सख़्त रुख (hawkish stance) से जुड़ी हैं।

इन वजहों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इंपोर्ट पर वॉशिंगटन के नए टैरिफ ने एक्सपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टेक्नोलॉजी इंटेसिव मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है,क्योंकि ग्रोथ पर ऊंची दरों का दबाव है और निवेशक दूसरे उभरते हुए मार्केट की ओर रुख करके जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अच्छे वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के चलते बैंक निफ्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

निफ्टी का आउटलुक

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23650-23600 के जोन में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है,तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23450 और फिर 23300 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए तकाल रेजिस्टेंस 23950-24000 के जोन में है,जो 50-दिन के EMA के साथ मेल खाता है।

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बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी में भी निफ्टी जैसी ही शुरुआती कमजोरी दिखी। यह निचले स्तर पर खुला और नीचे की ओर गया,लेकिन फिर इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी हुई जिससे नुकसान की भरपाई हो गई। इस रिकवरी की वजह से डेली चार्ट पर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी और इंडेक्स ने अपना 200-डे का EMA फिर से हासिल कर लिया,जो ट्रेडर्स के लिए एक अहम लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57100-57200 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57600 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56300-56200 जोन में है।

 

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Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Laurus Labs Q1 Results: मार्जिन 30% उछला, रेवेन्यू 29% बढ़ा, दूसरे पैरामीटर्स भी बेहतर रहे नतीजे

Laurus Labs Q1 Results:फार्मास्यूटिकल कंपनी लॉरस लैब्स ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है , कंपनी के तिमाही नतीजे सभी पैरामीटर्स पर साल-दर-साल के आधार पर अच्छे रहे है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ₹2,026 करोड़ का रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,570 करोड़ के आंकड़े से 29% ज़्यादा है।

तिमाही के लिए इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई (EBITDA) साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹382.1 करोड़ से ₹638.3 करोड़ पर हो गया।

तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन साल-दर-साल के आधार पर 24.3% से सात परसेंटेज पॉइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 31.5% हो गया। कंपनी के लिए यह मार्जिन कई सालों में सबसे ज़्यादा है, जिसमें अच्छे प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज की मदद मिली है।

जून तिमाही के आखिर में तिमाही के लिए ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 59.4% और मार्च तिमाही के 61.4% से बढ़कर 62.7% हो गया है।

अलग- अलग सेगमेंट का कैसा रहा प्रदर्शन

लॉरस लैब्स का CDMO बिज़नेस रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 67% और लगातार 48% बढ़कर ₹870 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस ग्रोथ का क्रेडिट लेट-स्टेज क्लिनिकल प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल API सप्लाई की लगातार प्रोग्रेस को दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके पास 125 से ज़्यादा एक्टिव प्रोजेक्ट्स के साथ एक बढ़ती हुई पाइपलाइन है।

लॉरस ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में कहा कि वह कस्टमर डिमांड के आधार पर कमर्शियल स्केल पेप्टाइड्स ब्लॉक को भी आगे बढ़ा रही है।

अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिज़नेस का रेवेन्यू तिमाही के दौरान 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गया। हालांकि, यह आंकड़ा सीक्वेंशियल बेसिस पर 5% कम था क्योंकि इसने मार्च क्वार्टर में ₹1,223 करोड़ का आंकड़ा बताया था।

लॉरस ने कहा कि डिवीजन के पास एक हेल्दी ऑर्डर बुक, स्टेबल ARV और स्थापित वॉल्यूम ग्रोथ है, जिससे 10% ग्रोथ हुई। इसने कहा कि इस बिज़नेस के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं।

कंपनी इमर्जिंग मार्केट्स में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन बढ़ा रही है। अपने बिज़नेस के मौके को मजबूत करने के लिए, इसने साउथ अफ्रीका में एक ऑफिस भी खोला है।

रिज़ल्ट अनाउंसमेंट के बाद लॉरस लैब्स के शेयर आज 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,601.20 पर बंद हुआ। 2026 में अब तक स्टॉक 44% ऊपर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Lohia Corp IPO: जानिए दूसरे दिन इश्यू को कितना रिस्पॉन्स, कितना चल रहा जीएमपी

लोहिया कॉर्प के आईपीओ का आज दूसरा दिन है। अब तक इश्यू में निवेशकों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। 24 जुलाई को दोपहर से पहले तक यह इश्यू करीब 45 फीसदी सब्सक्राइब हुआ था। यह जानकारी एनएसई के डेटा पर आधारित है। कंपनी इश्यू से 1,101.28 करोड़ रुपये जुटाने वाली है।

Lohia Corp आईपीओ में ऑफर फॉर सेल के जरिए 1,43,52,274 शेयर बेचेगी। रिटेल इनवेस्टर्स की कैटेगरी में यह इश्यू 84 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) कैटेगरी में 43 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) की कैटेगरी में 19 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है।

लोहिया कॉर्प ने आईपीओ में प्रति शेयर 405-425 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इनवेस्टर गेन और आईपीओ वॉच के मुताबिक, लोहिया कॉर्प के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम 15 रुपये चल रहा है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर शेयर की लिस्टिंग 3.5 फीसदी प्रीमियम के साथ हो सकती है।

इस इश्यू में कम से कम शेयरों के लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 35 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर निवेशक के कम से कम 14,875 रुपये का निवेश करना होगा। एक इनवेस्टर मैक्सिमम शेयरों के 13 लॉट के लिए निवेश कर सकता है। FY26 में कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की कुल इनकम 25.3 फीसदी बढ़कर 1,737.87 करोड़ रुपये रही।

आईपीओ में बोली लगाने वाले निवेशकों को शेयर का एलॉटमेंट 28 जुलाई को हो जाने की संभावना है। कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंजों पर 30 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं। शेयर बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे। यह कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री के लिए मशीनरी बनाती है। यह कानपुर की कंपनी है। इस साल 31 मार्च को कंपनी का कुल एसेट्स 1,304.66 करोड़ रुपये का था।

यह आईपीओ ऐसे वक्त आया है, जब शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव दिख रहा है। इस हफ्ते बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें दिन गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर बंद हुआ। इसकी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है।

मंगलुरु के छात्रों ने बनाई AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक कार, जो खुद पहचानती है रास्ता

जहां टेस्ला जैसी ग्लोबल कंपनियां ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही हैं, वहीं मंगलुरु के मुक्का में स्थित श्रीनिवास यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SUIET) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स और फैकल्टी की एक टीम ने बहुत कम लागत में अपनी AI-पावर्ड सेल्फ-ड्राइविंग इलेक्ट्रिक गाड़ी ‘श्री-वाहन’ बनाई है।

इस गाड़ी को आधिकारिक तौर पर 23 जुलाई, 2026 को पेश किया गया था। यह सिर्फ़ स्टूडेंट्स का एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक काम करने वाला प्रोटोटाइप है जिसे आगे चलकर असल दुनिया में इस्तेमाल के लिए विकसित किया जा सकता है।

टीम ने इस वाहन को पूरी तरह से नए सिरे से बनाने के बजाय एक मौजूदा कार को मॉडिफाई किया और उसे इलेक्ट्रिक और AI-आधारित ऑटोनॉमस व्हीकल में बदल दिया। इस पूरे प्रोटोटाइप को तैयार करने में टीम को करीब छह महीने लगे और इसकी लागत लगभग 4-5 लाख रुपये आई।

यह सड़क को कैसे “देखता” है

यह वाहन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ LiDAR, कैमरा-बेस्ड विजन सिस्टम, GPS नेविगेशन, अल्ट्रासोनिक सेंसर, ओडोमेट्री, विजुअल SLAM और सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से चलती है। ये सभी तकनीकें मिलकर गाड़ी को बिना ड्राइवर के पहले से तय रास्ते पर सुरक्षित रूप से चलने में मदद करते हैं।

अगर रास्ते में कोई व्यक्ति या रुकावट आती है, तो सेंसर उसे पहचान लेते हैं और गाड़ी अपने-आप रुक जाती है। ऑपरेटर गाड़ी में लगे कैमरे से उस पर नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे दूर से कंट्रोल भी कर सकते हैं। इसके अलावा, गाड़ी में AI असिस्टेंट सिस्टम भी लगा है।

स्पीड और रेंज

टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा के लिए, ऑटोनॉमस मोड में गाड़ी की स्पीड 5 km/h तक सीमित रखी गई है। मैनुअल मोड में यह 20 से 28 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकता है। इसमें 5 किलोवाट की लिथियम-आयन बैटरी लगी है, जो एक बार फुल चार्ज होने पर 15 से 22 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।

यह गाड़ी लगभग 360 kg का भार उठा सकती है, यानी इसमें छह लोग बैठ सकते हैं या इतना ही वजन का सामान ले जाया जा सकता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर इसे एम्बुलेंस में भी बदला जा सके।

इसका इस्तेमाल कहां-कहां हो सकता है

इस गाड़ी को कई संभावित कामों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है: जैसे कि एजुकेशनल कैंपस में छात्रों को लाना-ले जाना, इंडस्ट्रियल इलाकों में स्टाफ को पहुंचाना, अस्पतालों में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, एम्बुलेंस के तौर पर इस्तेमाल होना, मिलिट्री इलाकों में ज्यादा जोखिम वाले जोन तक जरूरी सामान पहुंचाना और रिमोट-कंट्रोल से होने वाले डिफेंस ऑपरेशन में मदद करना।

आगे क्या होगा?

अभी यह गाड़ी सिर्फ पहले से मैप किए गए रास्तों पर ही चलती है। अगले चरण में, टीम का प्लान है कि इसमें बिना मैप वाले इलाकों में भी खुद चलने की क्षमता जोड़ी जाए और ज्यादा क्षमता वाली बैटरी लगाई जाए, ताकि इसे पूरी तरह काम करने वाली एम्बुलेंस बनाया जा सके।

इसके अलावा, संस्थान का मकसद भारतीय सड़कों के हिसाब से एक ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम बनाना और आगे चलकर इस टेक्नोलॉजी को कमर्शियलाइज करना भी है।

‘श्री-वहन’ यह दिखाता है कि मौजूदा तकनीक का इस्तेमाल करके पुराने वाहनों को कम लागत वाले AI-संचालित ऑटोनॉमस वाहनों में बदला जा सकता है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब टेस्ला जैसी वैश्विक कंपनियां भी बड़े बजट के साथ इसी तरह की तकनीक विकसित करने पर काम कर रही हैं।

इस प्रोजेटक्ट से छात्रों का क्या है फायदा?

यह प्रोजेक्ट छात्रों की रिसर्च करने की क्षमता को दिखाता है, उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव के साथ सीखने का मौका देता है और भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रोजेक्ट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विश्वास सी. शेट्टी ने मार्गदर्शन किया, जबकि रिसर्च एसोसिएट विशाख मेनन ने रिसर्च और डेवलपमेंट का नेतृत्व किया। श्रेयस, अद्वितीय, उज्ज्वल, अक्षय, मंजूनाथ और प्रख्यात जैसे छात्रों ने इस प्रोजेक्ट में अहम योगदान दिया।

श्रीनिवास यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. ए. श्रीनिवास राव के अनुसार, इस तरह के रिसर्च छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास देते हैं और साथ ही समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

हिंदुस्तान जिंक का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 144.8 प्रतिशत बढ़कर 5469 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 2234 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 13747 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 7771 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 6749 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 5065 करोड़ रुपये के थे। EBITDA एक साल पहले से 109 प्रतिशत बढ़कर 8074 करोड़ रुपये रहा, जो कि किसी तिमाही में दर्ज किया गया अब तक का सबसे ज्यादा EBITDA है।

जून 2026 तिमाही में हिंदुस्तान जिंक का माइन्ड मेटल प्रोडक्शन 268 KT रहा। रिफाइंड मेटल प्रोडक्शन सालाना आधार पर 4% की बढ़ोतरी के साथ 260 KT दर्ज किया गया। जिंक के प्रोडक्शन की कॉस्ट 851 डॉलर प्रति टन रही, जो कि किसी एक तिमाही में देखी गई लोएस्ट कॉस्ट है। सिल्वर प्रोडक्शन 149 टन दर्ज किया गया।

Meesho Share Price: घाटे में कमी के बावजूद बिकवाली का दबाव, शेयर 6% तक लुढ़का

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FD से कमाना चाहते है अच्छा रिटर्न, ये बैंक दे रहे हैं 8.1% तक ब्याज, चेक करें लिस्ट

Invest in FD : अगर आप भी उन इन्वेस्टर्स में से एक जो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी (FD)में निवेश करना चाहते है तो आप आसानी से इन बैंकों से 8.1 फीसदी तक का इंटरेस्ट कमा सकते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे ज़्यादा FD रेट के साथ सबसे आगे हैं, वहीं प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के लेंडर भी अलग-अलग समय में अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।

FD इंटरेस्ट रेट में थोड़ा सा भी अंतर लंबे समय में रिटर्न को काफी बढ़ा सकता है, खासकर बड़ी रकम इन्वेस्ट करने वाले सीनियर सिटिजन के लिए। FD बुक करने से पहले अलग-अलग बैंकों के रेट की तुलना करने से बिना ज़्यादा रिस्क लिए इंटरेस्ट इनकम को ज़्यादा से ज़्यादा करने में मदद मिल सकती है। निवेश से पहले यहां देखें उन बैंकों के लिस्ट जो दे रहे है सबसे ज्यादा रिटर्न।

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  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • जन स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.80 प्रतिशत तक की फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें दे रहा है।

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  • DCB बैंक 7.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बंधन बैंक 7.45 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • CSB बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • IDFC FIRST बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • SBM बैंक इंडिया 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • सिटी यूनियन बैंक 7.25 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।

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  • बैंक ऑफ़ इंडिया 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • पंजाब एंड सिंध बैंक 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • इंडियन बैंक 6.80 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बैक ऑफ़ बड़ौदा 6.75 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया 6.70 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र 6.65 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।Image
  • ड्यूश बैंक 7.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक 6.60 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • HSBC बैंक 5.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।

एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि 5 लाख रुपये के इंश्योरेंस कवर में रहने के लिए कई बैंकों में डिपॉजिट बांट लें, ज़्यादा रिटर्न के लिए छोटे फाइनेंस बैंकों का चुनिंदा इस्तेमाल करें, और लिक्विडिटी की जरूरतों के हिसाब से डिपॉजिट की अवधि तय करें। डिपॉजिट इंश्योरेंस प्रोटेक्शन और स्थिर रिटर्न के साथ, FD रिटायर लोगों के लिए एक भरोसेमंद इन्वेस्टमेंट का तरीका बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रामदेव अग्रवाल ने कहा-बाजार के लिए ऑयल और रुपया बड़े रिस्क, यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का सही समय

शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। आज यानी 24 जुलाई को लगातार पांचवें दिन शेयर बाजारों में गिरावट दिख रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अभी बाजार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन बाजार की सबसे बड़ी चिंता

अग्रवाल ने कहा कि बाजार के लिए अब सबसे बड़ी चिंता वैल्यूएशन नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल स्थितियां हैं। मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ रही हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। रुपये में कमजोरी जब तक जारी रहेगी तब तक विदेशी निवेशकों के भारत लौटने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी स्थिति अनिश्चित दिख रही है, जिससे विदेशी निवेशक खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

मार्केट करेक्शन का असर लंबी अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा

बाजार में हालिया गिरावट के बारे में उन्होंने कहा कि इसका असर लंबी अवधि के निवेशकों की खरीदारी पर नहीं पड़ेगा। दरअसल, यह अच्छी क्वालिटी के शेयरों को खरीदने या उनमें निवेश बढ़ाने का मौका है। इसकी वजह यह है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। अब भी भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया के कई बड़े देशों की ग्रोथ से ज्यादा है।

क्रूड 100 के पार जाने पर बाजार पर दबाव बढ़ेगा

उन्होंने कहा, “बाजार एक दिशा में नहीं चलता है। शेयरों पर अच्छे और बुरे दोनों वजहों का असर पड़ता है। सही तरीका यह है कि करेक्शंस के बाद शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव होने पर लंबी अवधि में अच्छे प्रदर्शन की संभावना वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश बढ़ाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर को पार कर जाती है तो बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा।

देश के एक्सटर्नल अकाउंट पर भी दबाव बढ़ रहा

अग्रवाल ने कहा कि महंगे क्रूड से करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने और विदशी निवेश कमजोर रहने से भारत के एक्सटर्नल अकाउंट पर दबाव बढ़ सकता है। पहले से ही करेंट अकाउंट का बड़ा घाटा दिख रहा है। अब तो कैपिटल अकाउंट में भी घाटा दिखने लगा है। इसका खराब असर मार्केट के मनोविज्ञान पर पड़ेगा। उनका मानना है कि बाजार में कई आईपीओ आने वाले हैं, इससे भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली दिख सकती है।

बड़े आईपीओ में निवेश के लिए शेयर बेच सकते हैं FIIs

उन्होंने कहा, “Zepto, jio और NSE जैसे आईपीओ आने वाले हैं। इनमें विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दिख सकती है। ऐसे में उन्हें इसके लिए अपने पोर्टफोलियो में जगह बनानी होगी। इसका मतलब है कि वे अपने पोर्टफोलियो के कुछ शेयर बेच सकते हैं।” उन्होंने कहा कि इससे बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा। पहले से ही क्रूड में उछाल से बाजार पर दबाव दिख रहा है।

भारत के लिए बेहतर हो रही हैं स्थितियां 

अग्रवाल ने कहा कि भारतीय बाजार के लिए स्थितियां बेहतर होती दिख रही हैं। उन्होने कहा, “मानसून में इम्प्रूवमेंट है। अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी दिख रही है। रुपये में स्थिरता है। हालांकि, हमें रुपये पर नजर बनाए रखनी होगी। उधर, दुनियाभर में AI स्टोरी कमजोर होती दिख रही है।” उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमी अच्छी है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता पर इसका असर कम पड़ेगा। अगर जियोपॉटिलिक्स को छोड़ दिया जाए तो भारत असल में अच्छी स्थिति में है।