Sona Comstar Q1 Results: मुनाफा 47% उछला, रेवेन्यू ने बनाया नया रिकॉर्ड; रोबोटिक्स कारोबार में भी उतरी कंपनी

Sona Comstar Q1 Results: ऑटो कंपोनेंट कंपनी Sona BLW Precision Forgings (Sona Comstar) ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 46.7% बढ़कर 178.5 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 122 करोड़ रुपये था। वहीं ऑपरेशन से रेवेन्यू 52.4% बढ़कर 1,301 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 854 करोड़ रुपये था।

कंपनी का प्रदर्शन बाजार के अनुमान से बेहतर रहा। CNBC-TV18 के अनुमान के मुकाबले कंपनी ने मुनाफा, रेवेन्यू और EBITDA तीनों मोर्चों पर बेहतर नतीजे दिए।

EBITDA और मार्जिन का हाल

जून तिमाही में EBITDA 42.6% बढ़कर 293.3 करोड़ रुपये रहा। हालांकि EBITDA मार्जिन 24.1% से घटकर 22.5% पर आ गया। यानी कंपनी की कमाई बढ़ी, लेकिन लागत बढ़ने से मार्जिन पर कुछ दबाव रहा।

EV बिजनेस ने बनाई नई ऊंचाई

Sona Comstar ने कहा कि यह उसकी अब तक की सबसे अधिक तिमाही रेवेन्यू रही। बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) से होने वाला रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जून तिमाही में कुल ऑटोमोटिव रेवेन्यू में BEV उत्पादों की हिस्सेदारी 44% रही, जबकि BEV रेवेन्यू सालाना आधार पर 107% बढ़ा।

रोबोटिक्स और AI में एंट्री

Sona Comstar ने इस तिमाही में Robotics & Physical AI कारोबार में भी उतरने का ऐलान किया। कंपनी इस क्षेत्र के लिए मिशन-क्रिटिकल कंपोनेंट, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग सेवाएं और चुनिंदा रोबोट प्लेटफॉर्म डेवलप करेगी। साथ ही कंपनी ने Sona Comstar 2.0 रणनीति पेश की है। इसके तहत FY35 तक रेवेन्यू को फिर से 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

नए ऑर्डर और शेयर का हाल

तिमाही के दौरान कंपनी को तीन नए ऑर्डर मिले, जिनमें EV, हाइब्रिड और ICE वाहनों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनसे कंपनी की ऑर्डर बुक में करीब 940 करोड़ रुपये जुड़े।

कंपनी के नतीजे बाजार बंद होने के बाद आए। इससे पहले BSE पर Sona Comstar का शेयर 719.25 रुपये पर बंद हुआ। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 25% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Aastha Spintex ने 1:1 बोनस शेयर का ऐलान किया, वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल कारोबार में करेगी विस्तार

कॉटन यार्न निर्माता कंपनी Aastha Spintex ने अपने शेयरधारकों के लिए 1:1 बोनस शेयर जारी करने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को उनके पास मौजूद हर एक शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर मिलेगा। कंपनी के बोर्ड ने 23 जुलाई 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

बोनस इश्यू को पूरा करने के लिए कंपनी ने अपनी अधिकृत शेयर पूंजी 45 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने का भी फैसला किया है। इसके अलावा बोर्ड ने FY26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 0.10 रुपये के अंतिम डिविडेंड की भी सिफारिश की है। हालांकि, डिविडेंड और बोनस इश्यू दोनों पर अंतिम मुहर शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी।

वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल कारोबार में उतरेगी कंपनी

गुजरात की कॉटन यार्न निर्माता कंपनी Aastha Spintex अब अपने कारोबार का विस्तार करते हुए ग्रे फैब्रिक और अन्य वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल उत्पादों के क्षेत्र में भी प्रवेश करेगी। कंपनी का कहना है कि यह कदम उसे टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने और नए ग्रोथ अवसरों का फायदा उठाने में मदद करेगा।

हाल ही में बढ़ाई है उत्पादन क्षमता

कंपनी ने हाल ही में Falcon Yarns Pvt. Ltd. का अधिग्रहण पूरा किया है। इसके बाद उसकी सालाना स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो गई है। वहीं स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 तक पहुंच गई है। कंपनी का मानना है कि नई उत्पादन क्षमता के साथ वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल सेगमेंट में विस्तार उसकी अगली ग्रोथ का आधार बनेगा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

Aastha Spintex के मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्यांग जसवंत पटेल ने कहा कि बोनस इश्यू और अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने का फैसला कंपनी के भविष्य को लेकर उसके भरोसे और शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की रणनीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ते हुए अपने ब्रांड के तहत वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस करेगी।

पिछले दो साल में मजबूत रही ग्रोथ

कंपनी का प्रदर्शन भी लगातार मजबूत रहा है। FY23 में 240 करोड़ रुपये रहा रेवेन्यू FY25 में बढ़कर 352 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 1.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 23 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो उसकी प्रॉफिटेबिलिटी में तेज सुधार को दिखाता है।

Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 25% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Infosys के सीईओ सलील पारेख पद छोड़ेंगे, आशीष कुमार दास होंगे नए सीईओ

इंफोसिस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सलील पारेख पद छोड़ेंगे। उनकी जगह आशीष कुमार दास लेंगे। इंफोसिस ने यह ऐलान 23 जुलाई को किया। पारेख बीते 9 सालों से कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी को मुश्किल दौर से निकाला। उनके कार्यकाल में कंपनी में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आर्टफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चीजें देखने को मिलीं।

दास की नियुक्ति को बोर्ड की मंजूरी

Infosys ने कहा कि पारेख कार्यकाल पूरा होने पर पद छोड़ देंगे। कंपनी ने यह भी कहा कि बोर्ड ने सीईओ पद पर आशीष कुमार दास की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। पारेख ने जनवरी 2018 में इंफोसिस के बॉस की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नाम सबसे लंबे समय तक कंपनी का सीईओ रहने का रिकॉर्ड है। 5 साल का उनका मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च, 2027 को खत्म हो रहा है।

नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर चल रही थी चर्चा

देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी ने 23 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। नए सीईओ की नियुक्ति का ऐलान कंपनी की एनुअल रिपोर्ट और एजीएम नोटिस के कई हफ्ते बाद हुआ। इससे पहले यह नहीं बताया गया था कि बोर्ड मार्च 2027 के बाद उनका कार्यकाल बढ़ाना चाहता है या नहीं। इससे निवेशकों के बीच पारेख के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा हो रही थी।

नए सीईओ में ये योग्यताएं चाहती है कंपनी 

इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा, “बोर्ड दास को सीईओ डेजिग्नेट नियुक्त कर खुशी महसूस कर रहा है। हमारी इंडस्ट्री बड़े बदलाव के समय से गुजर रही है। बोर्ड की स्पष्ट सोच थी कि हमारे अगले सीईओ के पास कंपनी की वैल्यू और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के साथ बड़े बदलाव के लिए तैयार रहने की योग्यता होनी चाहिए। इस बात की मुझे काफी खुशी है कि कंपनी का एग्जिक्यूटिव हमारा अगला सीईओ होगा।”

पारेख ने कंपनी को सफल नेतृत्व दिया

उन्होंने कहा कि बोर्ड की तरफ से मैं 9 साल की शानदार लीडरशिप के लिए पारेख को धन्यवाद देता हूं। उनके नेतृत्व में कंपनी ने अपनी लीडरशिप पोजीशन को और मजबूत की। अपनी क्षमता में इजाफा किया। शेयरहोल्डर्स को रिवॉर्ड दिया और भविष्य में ग्रोथ के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया। कंपनी में बड़े बदलाव में सलील की बड़ी भूमिका रही। वह 31 मार्च, 2027 तक कंपनी का नेतृत्व करते रहेंगे।

पारेख के कार्यकाल में रेवेन्यू 20 अरब डॉलर के पार

पारेख के नेतृत्व में इंफोसिस ने क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आर्टफिशियल इंटेलिजेंस में अपनी पोजीशन मजबूत की। उनके कार्यकाल में कंपनी का रेवेन्यू 20 अरब डॉलर को पार कर गया। हाल में पारेख ने जेनेरेटिव एआई की दिशा में इंफोसिस की पहली का नेतृत्व किया। कंपनी एआई प्लेटफॉर्म्स, एंटरप्राइज एआई ऑफरिंग्स और वर्कफोर्स रीस्किलिंग में काफी निवेश कर रही है।

Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 25% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; डिविडेंड का ऐलान

Q1 Results: एग्रो केमिकल कंपनी Coromandel International ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 24.6% घटकर 381 करोड़ रुपये रह गया।

पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 505 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। हालांकि, ऑपरेशन से रेवेन्यू 15.9% बढ़कर 8,165 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 7,042 करोड़ रुपये था।

बढ़ती लागत से मुनाफे पर दबाव

रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ती लागत का असर कंपनी की कमाई पर पड़ा। जून तिमाही में EBITDA 3.4% घटकर 756 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 782 करोड़ रुपये था। वहीं EBITDA मार्जिन 11.1% से घटकर 9.3% पर आ गया। यानी कंपनी हर 100 रुपये की बिक्री पर पहले के मुकाबले कम ऑपरेटिंग मुनाफा कमा सकी।

NACL Industries अधिग्रहण का असर

Coromandel ने कहा कि इस बार के नतीजों की पिछले साल से सीधी तुलना पूरी तरह सही नहीं होगी। इसकी वजह NACL Industries का अधिग्रहण है। Coromandel ने अगस्त 2025 में NACL Industries में 53.08% हिस्सेदारी खरीदी थी। अब उसके वित्तीय नतीजे भी कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों में शामिल हैं, जिससे दोनों अवधियों की तुलना प्रभावित हुई है।

पिछली तिमाही भी रही थी कमजोर

मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 76% गिरकर 140 करोड़ रुपये रह गया था। उस दौरान 70.6 करोड़ रुपये के एकमुश्त (Exceptional) नुकसान का भी असर रहा था। हालांकि, रेवेन्यू 20.4% बढ़कर 6,004 करोड़ रुपये पहुंच गया था।

डिविडेंड और शेयर का हाल

Coromandel के बोर्ड ने 2 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है। इसका भुगतान 21 अगस्त 2026 तक किया जाएगा।

कंपनी के नतीजे बाजार बंद होने के बाद आए। इससे पहले NSE पर Coromandel International का शेयर करीब 1% की गिरावट के साथ 2,019 रुपये पर बंद हुआ। अब अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

जल्द ही अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप  भी उड़ा सकेंगे अपने यात्री जहाज, सरकार नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जल्द ही अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप  भी उड़ा सकेंगे अपने यात्री जहाज, सरकार नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में

जल्द ही आपको अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप की एयरलाइन में उड़ने का मौका मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक सरकार नई एयरलाइंस के लिए एंट्री नियम आसान करने की तैयारी कर रही है। रॉयटर के हवाले से बड़ी खबर आई है कि अदाणी ग्रुप का एयरलाइंस शुरू करने पर विचार कर रही है। नई एयरलाइंस के लिए आसान एंट्री नियम संभव है। इस से अदाणी एयरपोर्ट और GMR के लिए एयरलाइंस कारोबार में एंट्री का रास्ता खुल सकता है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार एयरक्राफ्ट रूल्स और DGCA नियमों में बदलाव करने की तैयारी में। इससे अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप जैसे एयरपोर्ट ऑपरेटर भी अपनी एयरलाइन शुरू कर सकेंगे। अगले एक महीने में नियमों में बदलाव संभव है। एयरलाइन बिजनेस क्रॉस-ओनरशिप नियमों की समीक्षा की जा सकती है। कम से कम 20 एयरक्राफ्ट की शर्त की भी समीक्षा होगी।

सूत्रों के मुताबिक कैपिटल रिक्वायरमेंट और पायलट हायरिंग नियमों की भी समीक्षा का जा सकती है। हायरिंग से जुड़े नियम भी समीक्षा के दायरे में हैं। इससे अदाणी एयरपोर्ट और GMR के लिए रास्ता खुल सकता है। रॉयटर्स के हवाले से आई खबर में कहा गया है कि अदाणी ग्रुप का एयरलाइंस शुरू करने पर विचार कर रही है। हालांकि कंपनी ने एयरलाइंस शुरू करने पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं लिया है।

गौरतलब है कि भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है। देश में एयरपोर्ट्स का तेजी से विस्तार हो रहा है और एयरलाइंस ने सैकड़ों नए विमानों के लिए ऑर्डर दिए हैं। इस ग्रोथ के बावजूद,मार्केट पर सिर्फ़ दो कंपनियों इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में क्या भारत को एक तीसरी मजबूत एयरलाइन की जरूरत है,इस बहस ने एक पुराने पॉलिसी से जुड़े सवाल में फिर से दिलचस्पी जगा दी है कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की इजाज़त दी जानी चाहिए?

बताते चलें कि भारत का एयरपोर्ट प्राइवेटाइज़ेशन फ़्रेमवर्क इस तरह बनाया गया है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस के बीच हितों का टकराव न हो। मौजूदा पॉलिसी के तहत,दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट के ऑपरेटरों पर आम तौर पर किसी एयरलाइन में 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है। इस पॉलिसी का मकसद निष्पक्षता बनाए रखना और किसी के साथ खास बर्ताव किए जाने की संभावना को भी रोकना है।

इसके पीछे की वजह साफ है। एयरपोर्ट अहम इंफ़्रास्ट्रक्चर को कंट्रोल करते हैं,जिसमें लैंडिंग और टेक-ऑफ़ स्लॉट,पार्किंग बे,टर्मिनल एक्सेस,ग्राउंड-हैंडलिंग सुविधाएं और एयरपोर्ट चार्ज शामिल हैं। अगर कोई कंपनी एयरपोर्ट के साथ-साथ एयरलाइन की भी मालिक होगी तो दूसरी एयरलाइन कंपनियां यह शिकायत कर सकती हैं कि अब मुकाबला बराबरी का नहीं रहा।

दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो रेगुलेटर्स ने एयरपोर्ट और एयरलाइन की ओनरशिप को लेकर अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। कुछ देशों में एयरपोर्ट ऑपरेटर एयरलाइंस में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए कड़े गवर्नेंस रूल्स और स्वतंत्र रेगुलेटर होते हैं जो यह पक्का करते हैं कि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सभी को एक बराबर पहुंच मिले। भारत में आम तौर पर हितों के टकराव को रोकने के लिए दोनों के बीच स्पष्ट अंतर रखने को प्राथमिकता दी गई है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक है। इसे बढ़ती आय,बेहतर रीजनल कनेक्टिविटी और तेजी से हो रहे एयरपोर्ट विस्तार का सपोर्ट मिल रहा है। सरकार एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारी निवेश कर रही है। देश में और बड़ी एयरलाइन्स के आने से किराए को लेकर कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है, रूट के ऑप्शन बढ़ सकते है,सर्विस क्वालिटी बेहतर हो सकती है और दो बड़ी एयरलाइनों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे छोटे शहरों के साथ कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है और भारत के ग्लोबल एविएशन हब बनने के लक्ष्य को भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके लिए अब पुरानी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।

Infosys Q1 Results: इंफोसिस को ₹7769 करोड़ मुनाफा, पर ग्रोथ आउटलुक घटाया; नए CEO का भी ऐलान

Infosys Q1 Results: देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी Infosys ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 12% बढ़कर 7,769 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 6,921 करोड़ रुपये था।

हालांकि कंपनी बाजार के अनुमान पर खरी नहीं उतर सकी। CNBC-TV18 ने 7,903 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान लगाया था।

रेवेन्यू में 14% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में Infosys का ऑपरेशन से रेवेन्यू 14% बढ़कर 48,211 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 42,279 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी ने अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, लेकिन मुनाफा अनुमान से थोड़ा कम रहा।

ग्रोथ आउटलुक में हल्की कटौती

इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक में हल्की कटौती की है। अब कंपनी को उम्मीद है कि पूरे साल कॉस्टेंट करेंसी आधार पर रेवेन्यू 1.5% से 3% के बीच बढ़ेगा। कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ का मतलब है कि कंपनी की ग्रोथ को विदेशी मुद्रा (Forex) के उतार-चढ़ाव का असर हटाकर मापा जाता है।

इससे पहले कंपनी ने 1.5% से 3.5% ग्रोथ का अनुमान दिया था। बाजार को भी ऊपरी सीमा में 0.5% की कटौती की उम्मीद थी। हालांकि कंपनी ने EBIT मार्जिन का अनुमान 20% से 22% के बीच ही बरकरार रखा है।

जून तिमाही में कैसी रही ग्रोथ?

जून तिमाही में Infosys की कॉन्सटेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ तिमाही आधार पर 1% रही। यह Tech Mahindra (2.6%) से कम रही, लेकिन TCS (0.4%), HCLTech (-0.5%) और Wipro (-1.2%) से बेहतर प्रदर्शन रहा। एनालिस्टों ने करीब 1.8% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।

कंपनी के CEO सलिल पारेख ने कहा कि एक बड़े क्लाइंट के फैसले का एकमुश्त असर इस ग्रोथ पर पड़ा।

डॉलर और रुपये में रेवेन्यू

जून तिमाही में Infosys का डॉलर रेवेन्यू 5.08 अरब डॉलर रहा। यह पिछले अनुमान के लगभग मुताबिक है। तिमाही आधार पर डॉलर रेवेन्यू में 0.8% की बढ़ोतरी हुई।

वहीं रुपये में कंपनी का रेवेन्यू 48,211 करोड़ रुपये रहा। यह पिछली तिमाही से 3.9% ज्यादा है, हालांकि बाजार के अनुमान 48,431 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा।

मार्जिन में सुधार

इंफोसिस का EBIT 10,163 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 4.3% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 21.1% रहा। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 20 बेसिस प्वाइंट का सुधार हुआ। यह बाजार के अनुमान के अनुरूप रहा।

बड़े ऑर्डर और AI का बढ़ता योगदान

जून तिमाही में Infosys को 3.6 अरब डॉलर के बड़े डील मिले। इनमें 61% नए क्लाइंट या नए प्रोजेक्ट से जुड़े थे।

कंपनी ने यह भी बताया कि अब उसकी कुल आय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का योगदान 8.2% तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि AI से जुड़ी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

नए CEO की जिम्मेदारी

Infosys ने अशीष कुमार दास को CEO-Designate नियुक्त किया है। वह 1 अप्रैल 2027 से मौजूदा CEO सलिल पारेख की जगह लेंगे। दास तीन दशक से ज्यादा समय से Infosys के साथ जुड़े हैं और फिलहाल कई ग्लोबल बिजनेस वर्टिकल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि सलिल पारेख ऐसे समय में CEO बने थे, जब कंपनी कुछ चुनौतियों का सामना कर रही थी। उन्होंने संगठन में स्थिरता और स्पष्ट दिशा देने का काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि अशीष कुमार दास फिलहाल अमेरिका में काम कर रहे हैं और नई जिम्मेदारी संभालने के लिए भारत लौटेंगे।

इंफोसिस के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले Infosys का शेयर 1,052.90 रुपये पर लगभग सपाट बंद हुआ। हालांकि 2026 में अब तक यह शेयर करीब 35% टूट चुका है।

IndiGo Q1 Results: इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, ईरान युद्ध से लगा बड़ा झटका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह के पीएम बनने से पहले का नियम क्या था? नेपाल में नई सरकार बनने पर खासकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री के निजी आवास पर जाकर अलग-अलग मुलाकात करते थे। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और न ही इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि बड़े देशों के राजदूत जब चाहें प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर लेते थे। इन मुलाकातों का मकसद अक्सर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क मजबूत करना माना जाता था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हितों का टकराव पैदा होता था और नेपाल के राष्ट्रीय हित प्रभावित होते थे। पीएम बनने के बाद बालेन शाह ने क्या बदलाव किए बालेन शाह ने तय किया कि वह किसी भी विदेशी राजदूत या प्रतिनिधि से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक अलग ‘रैंक प्रोटोकॉल’ बनाया था। नए नियम के मुताबिक, वह सिर्फ किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के अधिकारी से ही अकेले व्यक्तिगत बैठक करेंगे। निचले स्तर के अधिकारियों, राजदूतों या उप-मंत्रियों से वे अकेले मिलने के बजाय विदेश मंत्रालय के माध्यम से या फिर ग्रुप मीटिंग के जरिए ही मिलेंगे। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत मुलाकातों के बजाय सरकार और विदेश मंत्रालय के तय ढांचे के तहत चलनी चाहिए। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इस फैसले के चलते बालने शाह ने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। कई विदेशी अधिकारियों से नहीं मिले बालेन भारत- बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया। मिस्री प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता देने काठमांडू आने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने के कारण उनका प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया। इससे भारत में नाराजगी भी देखी गई। अमेरिका- बालेन ने अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और विशेष दूत सर्जियो गोर को भी अलग से मिलने का समय नहीं दिया। गोर नेपाल आने से पहले भूटान के प्रधानमंत्री और राजा तथा श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके थे। चीन- बालेन ने चीन के उप वाणिज्य मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता यान डोंग से भी मुलाकात नहीं की। वह इसी महीने व्यापार और निवेश से जुड़े उच्चस्तरीय दौरे पर नेपाल आए थे। नोट- हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ये सभी घटनाओं की जानकारी रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दी गई हैं। बालेन शाह को अपना फैसला क्यों बदलना पड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाया था। इसी सोच के तहत उन्होंने नियम बनाया था कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदल गए हैं। अब उन्हें समझ आ गया है कि सिर्फ अलग छवि बनाना काफी नहीं है। देश चलाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीधे बातचीत भी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने पहली बार अपना पुराना नियम तोड़ा है। भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे अहम पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना उनकी सरकार की जरूरत बन गया है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों क्यों जरूरी हैं? नेपाल की विदेश नीति हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, जिससे लाखों नेपाली नागरिक काम, व्यापार और पढ़ाई के लिए आसानी से भारत आते-जाते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसलिए नेपाल के लिए चीन भी एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है। यही वजह है कि काठमांडू किसी एक देश के करीब दिखने के बजाय भारत और चीन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है।

IndiGo Q1 Results: इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, ईरान युद्ध से लगा बड़ा झटका

IndiGo Q1 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को जून 2026 तिमाही में 382 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 2,161 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। महंगा जेट फ्यूल, रुपये में कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसका बड़ा कारण रहे।

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन खर्च ज्यादा

जून तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू 20% बढ़कर 24,584 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 20,496 करोड़ रुपये था। लेकिन खर्च 35.1% बढ़ गया। सबसे ज्यादा असर जेट फ्यूल पर पड़ा। विमान ईंधन का खर्च 86% उछलकर 10,830 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी वजह से कंपनी मुनाफे से घाटे में चली गई।

ऑपरेशन में क्या रहा?

जून तिमाही में इंडिगो की क्षमता (ASK) 2.9% बढ़कर 43.5 अरब रही। यात्रियों की संख्या 0.7% बढ़कर 3.13 करोड़ हो गई। वहीं Yield 21.3% बढ़कर 6.04 रुपये रही। हालांकि Load Factor 1.3 प्रतिशत अंक घटकर 83.3% पर आ गया।

30 जून 2026 तक कंपनी के पास 52,885 करोड़ रुपये का कुल कैश था। इसमें 39,039 करोड़ रुपये फ्री कैश और 13,846 करोड़ रुपये प्रतिबंधित (Restricted) कैश शामिल था। यानी नकदी के मोर्चे पर कंपनी की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में IndiGo ने कहा कि महंगा ईंधन, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया का संघर्ष इस तिमाही में मुनाफे पर भारी पड़ा।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा कि तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं और मध्य-पूर्व में उड़ानों पर भी असर पड़ा। इसके बावजूद यात्रियों की मांग मजबूत बनी रही। बेहतर किरायों की वजह से रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान IndiGo ने 3.13 करोड़ यात्रियों को सफर कराया।

उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल लागत पर नियंत्रण और क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने पर फोकस कर रही है। हालांकि महंगे ईंधन और रुपये में कमजोरी की वजह से अकेले इस तिमाही में करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

इंडिगो के लिए आगे क्या?

इंडिगो का कहना है कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच यात्रा पर अभी भी असर बना हुआ है। दूसरी तिमाही में मांग भी सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है। इसलिए Q2FY27 में कंपनी की क्षमता पिछले साल के मुकाबले लगभग बराबर रह सकती है।

हालांकि IndiGo को उम्मीद है कि इसके बाद हालात सुधरेंगे। जैसे-जैसे यात्रा की मांग बढ़ेगी, विमानों का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।

इंडिगो का शेयर गुरुवार को नतीजे आने से पहले 1.70% की गिरावट के साथ 5,030 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 14.70% टूट चुका है।

SRF Share Price : कमजोर गाइडेंस के बाद वायदा के टॉप लूजर में शामिल हुआ शेयर, जानिए अब क्या हो निवेश रणनीति

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook: बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ हुआ बंद, जानिए 24 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 23 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,900 के नीचे चला गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ। लगभग 1569 शेयरों में बढ़त हुई,2479 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज,श्रीराम फाइनेंस,नेस्ले इंडिया,अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो,एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस,एमएंडएम,टीसीएस और आयशर मोटर्स शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा और केवल कुछ ही इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। गिरावट वाले सेक्टर में निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस,इंफ्रास्ट्रक्चर,पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य पिछड़ने वाले सेक्टर में निफ्टी मेटल (-0.7%),निफ्टी फार्मा (-0.4%),निफ्टी एफएमसीजी (-0.4%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.4%) शामिल रहे।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 0.7% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया में 0.22% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में और दिक्कत की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं। ऐसे में महंगाई के जोखिम और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव की आशंका के कारण निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ रहा है।

हाल के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इसका संकेत थोक महंगाई और बिजनेस एक्टिविटी में आई सुस्ती से मिलता है।

एनर्जी की ऊंची कीमतों के चलते ग्लोबल ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका और मजबूत हुई है। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने इच्छा कमजोर हुई है। आज सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। हालांकि,मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद,निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,मांग के रुझान अच्छे हैं और भविष्य के प्रदर्शन को लेकर बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिजनेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका और यूरोप से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशक इक्विटी मार्केट में लंबे समय के लिए निवेश करने से घबरा रहे हैं। रुपये समेत प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित डॉलर एसेट्स की ओर खींच रही है। हालांकि बाजार’ओवरसोल्ड’जोन में दिख रहा है,फिर भी निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर निफ्टी ने अपवर्ड कंसोलिडेशन के लेवल को तोड़ दिया है। इससे पता चलता है कि मार्केट में मंदी का रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा,इंडेक्स अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से भी नीचे आ गया है। RSI इंडिकेटर ‘बेयरिश क्रॉसओवर’की स्थिति में है और नीचे की ओर जा रहा है।

मार्केट का सेंटीमेंट नेगेटिव दिख रहा है और आने वाले समय में भी मार्केट में कमजोरी बनी रह सकती है। निचे की तरफ निफ्टी 23,600 या उससे भी नीचे जा सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ अगले कुछ दिनों तक 24,000 का लेवल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।

 

Markets Trend : क्रूड के 98 डॉलर के पार जाने से सहमा बाजार, जानिए अब क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।