Balrampur Chini Q1 Results: चीनी कंपनी का मुनाफा 14% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति

Balrampur Chini Q1 Results: चीनी कंपनी Balrampur Chini Mills का जून तिमाही प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.5% घटकर 44.1 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा 51.6 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन EBITDA घटा

बलरामपुर चीनी मिल्स का रेवेन्यू 6% बढ़कर 1,636.8 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 1,542.3 करोड़ रुपये था। हालांकि, ऑपरेशनल कमाई पर दबाव रहा। EBITDA 15% घटकर 114 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल यह 134.3 करोड़ रुपये था।

EBITDA मार्जिन भी 8.71% से घटकर 6.96% हो गया। यानी बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनी की कमाई का मार्जिन कमजोर हुआ।

वर्तिका शुक्ला बनीं इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

बलरामपुर चीनी मिल्स ने वर्तिका शुक्ला को एडिशनल डायरेक्टर और नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 11 अगस्त 2026 से 10 अगस्त 2031 तक पांच साल का होगा। कंपनी के मुताबिक, शुक्ला को इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, बिजनेस स्ट्रैटेजी और एनर्जी सेक्टर में 38 साल से ज्यादा का अनुभव है।

उन्होंने अपने करियर के 38 साल Engineers India Limited (EIL) में बिताए हैं। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी है। उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स, बिजनेस डायवर्सिफिकेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े काम का भी अनुभव है।

बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों का हाल

बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 4.62% गिरकर 625 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 35.52% दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.72 हजार करोड़ रुपये है।

Balrampur Chini Mills एक प्रमुख चीनी और एथेनॉल बनाने वाली कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार गन्ने की पेराई करके चीनी बनाना है। इसके अलावा कंपनी गन्ने के रस और शीरे से एथेनॉल तैयार करती है, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए होता है। कंपनी बिजली उत्पादन के कारोबार में भी है। गन्ने की पेराई से निकलने वाले बगास का इस्तेमाल कर यह को-जनरेशन प्लांट से बिजली बनाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Vedanta Group: इन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद-बेच सकते हैं प्रमोटर, ₹3000 करोड़ तक जुटाने की तैयारी

Vedanta Group: माइनिंग दिग्गज वेदांता ग्रुप की हाल में लिस्ट हुई कुछ कंपनियों में जल्द ही प्रमोटर खरीद-बिक्री कर सकते हैं। Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके लिए खुले बाजार से धीरे-धीरे शेयर खरीदने का रास्ता अपनाया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने CNBC-TV18 को यह जानकारी दी है।

खुले बाजार से होगी खरीदारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर चुनिंदा कंपनियों के शेयर खुले बाजार से धीरे-धीरे खरीद सकते हैं। इसे Creeping Purchase कहा जाता है। इसमें एक साथ बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के बजाय समय के साथ थोड़ा-थोड़ा शेयर खरीदा जाता है।

SEBI के नियमों के तहत प्रमोटर इस तरीके से एक साल में अपनी हिस्सेदारी 5% तक बढ़ा सकते हैं। हालांकि, असल खरीदारी कितनी होगी और किस कंपनी में होगी, यह अभी साफ नहीं है।

₹2,000 से ₹3,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। इसके लिए Vedanta Ltd. या Vedanta Aluminium के शेयरों को गिरवी रखने या बेचने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

हालांकि, Vedanta ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है। CNBC-TV18 के सवाल पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वह बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती।

अनिल अग्रवाल ने क्या कहा था?

इन डीमर्ज्ड कंपनियों की लिस्टिंग के समय Vedanta Group के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि उनके लिए ‘मालिक बने रहना जरूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा था कि कंपनी की ग्रोथ के लिए वह हर संभव कदम उठाएंगे। इसमें कारोबार का पुनर्गठन और विदेशों में विस्तार भी शामिल है।

वेदांता ग्रुप के शेयरों का हाल

मंगलवार को Vedanta का शेयर 2.70%% गिरकर 276 रुपये पर बंद हुआ। वहीं Vedanta Oil & Gas का शेयर 39.64 रुपये पर लगभग सपाट रहा।

Vedanta Iron & Steel का शेयर 5% के अपर सर्किट के साथ 38.81 रुपये पर पहुंच गया। दूसरी ओर, Vedanta Aluminium Metal का शेयर 0.69% गिरकर 469.35 रुपये पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP for Child: 18 साल का होने से पहले बच्चा बन जाएगा करोड़पति! समझिए कितना निवेश करना होगा और कैसे करें प्लानिंग

SIP for Child: इस वित्तीय अनिश्चितता के दौर में अपने बच्चों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि बहुत से लोग बच्चे के पैदा होने के साथ निवेश की प्लानिंग शुरु कर देते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि शुरुआत से ही बहुत बड़ी रकम लगाई जाए। सही निवेश, लंबी अवधि और कंपाउंडिंग की ताकत से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है। सवाल है कि हर महीने कितना निवेश करना होगा और अलग-अलग रिटर्न पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपका बच्चा अभी पैदा हुआ है। आपके पास पूरे 18 साल हैं। अगर आप हर महीने एक तय रकम SIP में लगाते हैं और औसतन 10%, 12% या 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो कितना पैसा बन सकता है, इसे समझते हैं।

1 करोड़ के लिए हर महीने कितना निवेश?

18 साल में कुल 216 महीने होते हैं। 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए अनुमानित मंथली SIP इस तरह होगी।

अनुमानित सालाना रिटर्न18 साल में 1 करोड़ के लिए मंथली SIPकुल निवेशअनुमानित फायदा
10%₹17,487₹37.77 लाख₹62.23 लाख
12%₹14,184₹30.64 लाख₹69.36 लाख
15%₹10,298₹22.24 लाख₹77.76 लाख

यहां एक बात समझना जरूरी है। 15% रिटर्न मानकर चलना ज्यादा आक्रामक अनुमान है। शेयर बाजार आधारित निवेश में रिटर्न तय नहीं होता। इसलिए प्लान बनाते समय बहुत ज्यादा रिटर्न मानकर चलना ठीक नहीं है।

12% रिटर्न पर ₹10,000 की SIP से कितना पैसा बनेगा?

अब दूसरा उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप बच्चे के जन्म से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं। 18 साल तक निवेश जारी रखते हैं।

अगर औसत रिटर्न 10% रहा तो करीब 57.2 लाख रुपये बनेंगे। 12% रिटर्न पर यही रकम करीब 70.5 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, 15% औसत रिटर्न मिला तो फंड करीब 97.1 लाख रुपये पहुंच सकता है। यानी सिर्फ 10,000 रुपये की मासिक SIP से भी 18 साल में 1 करोड़ के काफी करीब पहुंचा जा सकता है।

अलग-अलग SIP से कितना फंड बनेगा?

12% सालाना औसत रिटर्न मानकर देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।

मासिक SIP18 साल में कुल निवेशअनुमानित फंड
₹5,000₹10.80 लाख₹35.3 लाख
₹10,000₹21.60 लाख₹70.5 लाख
₹15,000₹32.40 लाख₹1.06 करोड़
₹20,000₹43.20 लाख₹1.41 करोड़

इस हिसाब से 15,000 रुपये की मासिक SIP 12% औसत रिटर्न पर 18 साल में करीब 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकती है।

बच्चा 5 साल का हो चुका है तो?

मान लीजिए आपने निवेश जन्म के समय शुरू नहीं किया और बच्चा अब 5 साल का है। आपके पास 18 साल की उम्र तक सिर्फ 13 साल बचे हैं।

12% सालाना औसत रिटर्न मानें तो 1 करोड़ रुपये के लिए करीब 28,200 रुपये हर महीने निवेश करना होगा। समय कम होने की वजह से मासिक निवेश काफी बढ़ जाता है।

अगर बच्चा 10 साल का हो चुका है तो सिर्फ 8 साल बचेंगे। ऐसे में इसी अनुमानित रिटर्न पर करीब 64,300 रुपये महीने की SIP चाहिए होगी। यही वजह है कि बच्चे के लिए निवेश में जल्दी शुरुआत सबसे बड़ा फायदा देती है।

₹1,000 या ₹2,000 की SIP करें तो?

अगर शुरुआत में बड़ी रकम निवेश करना संभव नहीं है, तो ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से भी शुरुआत की जा सकती है। मान लीजिए 18 साल तक हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो करीब ₹7.6 लाख का फंड बन सकता है।

वहीं, ₹2,000 की SIP से करीब ₹15.2 लाख हो सकते हैं। 15% औसत रिटर्न मिलने पर यही रकम क्रमशः करीब ₹10.9 लाख और ₹21.8 लाख हो सकती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन कम उम्र से निवेश शुरू करने का फायदा यह है कि समय के साथ SIP बढ़ाई जा सकती है।

पैसा कहां निवेश करें?

लंबे समय का लक्ष्य है तो निवेश का तरीका भी उसी हिसाब से चुनना चाहिए। 18 साल का समय होने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP एक विकल्प हो सकती है। लेकिन इसमें बाजार का जोखिम रहता है।

जैसे-जैसे बच्चा 18 साल के करीब पहुंचे, पूरे पैसे को इक्विटी में रखना सही नहीं होगा। लक्ष्य से कुछ साल पहले धीरे-धीरे रकम को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट किया जा सकता है।

एक और तरीका हर साल SIP बढ़ाना है। उदाहरण के लिए शुरुआत 10,000 रुपये महीने से करें और हर साल इसे 10% बढ़ाते जाएं। इससे शुरुआती वर्षों में कम रकम से शुरुआत होगी और समय के साथ निवेश बढ़ता जाएगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF vs NSC: पीपीएफ या एनएससी? लंबी अवधि की बचत के लिए कौन सी सरकारी योजना है बेस्ट, देखें तुलना

PPF vs NSC Comparison: अगर आप बिना किसी जोखिम के अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित निवेश कर बेहतर रिटर्न और टैक्स बचत चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की छोटी बचत योजनाएं सबसे भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं। इन योजनाओं में पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं।

दोनों ही योजनाएं पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ आती हैं, लेकिन इनके निवेश की अवधि, ब्याज दर, टैक्स नियम और लिक्विडिटी के नियम एक-दूसरे से काफी अलग हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से कौन सी योजना ज्यादा बेहतर है।

PPF vs NSC: ब्याज दर और मैच्योरिटी अवधि

दोनों सरकारी योजनाओं में ब्याज दर और अवधि का अंतर सबसे प्रमुख है:

PPF vs NSC: ब्याज दर और मैच्योरिटी अवधि

लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए PPF क्यों है बेस्ट?

PPF को उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है जो 10 से 15 साल या उससे अधिक लंबे समय जैसे- रिटायरमेंट या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पैसा जोड़ना चाहते हैं।इसमें आपको एक साथ एकमुश्त रकम जमा करने की बाध्यता नहीं है। आप पूरे साल में किस्तों में पैसा जमा कर सकते हैं। 15 साल की शुरुआती अवधि होने के कारण इसमें ब्याज पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज लंबी अवधि में एक बहुत बड़ा कॉर्पस तैयार कर देता है।

5 साल के निश्चित गोल के लिए NSC है बेहतर विकल्प

अगर आपके पास एकमुश्त रकम है और आपका लक्ष्य 5 साल की अवधि के लिए स्पष्ट है, तो NSC एक सही चुनाव साबित हो सकता है। NSC में जिस ब्याज दर (7.7%) पर आप सर्टिफिकेट खरीदते हैं, वह दर आपके 5 साल के पूरे कार्यकाल के लिए लॉक हो जाती है। बाजार या दरों में उतार-चढ़ाव का इस पर असर नहीं पड़ता।

PPF में एक ही खाता सालों-साल चलता रहता है, जबकि NSC में हर बार नया सर्टिफिकेट खरीदने पर उसकी 5 साल की मैच्योरिटी अलग से तय होती है।

टैक्स छूट का गणित: ‘EEE’ कैटेगरी में आता है PPF

ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत दोनों योजनाओं में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है, लेकिन टैक्स का अंतिम नियम अलग है:

PPF (Exempt-Exempt-Exempt): यह ट्रिपल ई (EEE) कैटेगरी में आता है। इसमें निवेश की गई रकम, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।

NSC (Taxable Interest): NSC का ब्याज टैक्सेबल होता है। हालांकि, शुरुआत के 4 सालों में मिलने वाला ब्याज स्वतः दोबारा निवेश मान लिया जाता है, जिससे उस पर 80C के तहत छूट मिल जाती है। लेकिन मैच्योरिटी पर अंतिम वर्ष का ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।

लिक्विडिटी और पैसे निकालने के नियम

इमरजेंसी में पैसे की जरूरत पड़ने पर दोनों के नियम कड़े हैं:

PPF: इसमें निश्चित शर्तों के तहत 6 साल पूरे होने के बाद आंशिक निकासी और लोन की सुविधा मिलती है। कुछ विशेष परिस्थितियों (जैसे- गंभीर बीमारी या उच्च शिक्षा) में ही 5 साल बाद खाता समय से पहले बंद किया जा सकता है।

NSC: इसमें 5 साल से पहले पैसा निकालना लगभग असंभव है। केवल खाताधारक की मृत्यु या अदालत के आदेश जैसी असाधारण परिस्थितियों में ही मैच्योरिटी से पहले इसे भुनाया जा सकता है।

आपके लिए कौन सी योजना है बेस्ट?

PPF चुनें: अगर आपका लक्ष्य 10-15 साल से आगे का है, आप रिटायरमेंट प्लान कर रहे हैं और मैच्योरिटी पर 100% टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं।

NSC चुनें: अगर आप 5 साल के निश्चित समय के लिए पैसा सुरक्षित रखना चाहते हैं, एकमुश्त निवेश करना चाहते हैं और PPF की तुलना में अधिक ब्याज दर (7.7%) पाना चाहते हैं।

वैसे एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सबसे स्मार्ट तरीका ये है कि आप चाहें तो अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए दोनों योजनाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लंबी अवधि के लिए PPF में और 5 साल के मीडियम-टर्म गोल के लिए NSC में निवेश कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Top Trading Picks : कमजोर बाजार में भी करनी है अच्छी कमाई तो इन दो शेयरों पर लगाएं दांव

Top Trading Picks : 11 अगस्त को ग्लोबल मार्केट से मिल रहे कमजोर संकेतों और बैंकिंग शेयरों पर दबाव के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ खुले हैं। सुबह 9:45 बजे के आसपास सेंसेक्स 341.60 अंक या 0.43% गिरकर 78,200.84 पर और निफ्टी 98.40 अंक या 0.40% गिरकर 24,485.40 पर दिख रहा था। ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए manasjaiswal.com के मानस जायसवाल ने कहा कि पिछले हफ्ते सोमवार को निफ्टी ने एक ट्रायंगुलर फॉर्मेशन का ब्रेकआउट दिया था। उसके बाद अगले पांच सेशन से हमें कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है। लेकिन ध्यान रखें की यह कंसोलीडेशन 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर और जो ट्रायंगुलर फॉर्मेशन था उसके अपर बैंड के ऊपर हो रहा है। ऐसे में अभी तक का ट्रेंड पॉजिटिव लग रहा है।

जब तक निफ्टी 24,350 के आसपास स्थित 20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड करता रहेगा, मार्केट का ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। इसलिए अपनी लॉन्ग पोजीशन में बने रहें। हालांकि यह भी सही है कि कंसोलिडेशन हो रहा है, इसलिए फ्रेश खरीदारी आपको केवल 24,700 के ऊपर ही करनी है। अगर 24,700 का आंकड़ा ब्रेक हुआ तो निफ्टी 25,300 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। पोजीशन को 24,350 के स्टॉप लॉस के साथ होल्ड करना चाहिए।

बैंक निफ्टी ट्रेंड

बैंक निफ्टी में भी कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है और यहां पर भी कंसोलिडेशन 20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर हो रहा है। ऐसे में जब तक बैंक निफ्टी 57300 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। फ्रेश खरीदारी करनी है तो थोड़ा वेट कर लें। 58100 58100 के ऊपर ही खरीदारी करें। अगर ये लेवल पार हो गए तो उसके ऊपर करीब 1200 से 1300 अंक की तेजी देखने को मिल सकती है।

मानस जायसवाल की टॉप पिक्स

मानस जायसवाल ने कहा कि बाजार में काफी अपॉर्चुनिटीज़ हैं। अगर आप स्टॉक स्पेसिफिक देखें तो सबसे पहला रिकमेंडेशन बीएसई है। बीएसई का शेयर लोअर टॉप लोअर बॉटम बना रहा था। लेकिन कल इसमें कुछ रिवर्सल के साइन देखने को मिले हैं। कैंडलस्टिक चार्ट पर मॉर्निंग स्टार पैटर्न बना है। आरएसआई में भी पॉजिटिव डायवर्जन देखने को मिला। बीएसई शेयर एक बाउंस बैक के लिए तैयार दिख रहा है। इस स्टॉक में करंट लेवल के आसपास, 3549 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 3700 रुपए के पहले और 3700 रुपए के दूसरे टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।

मानस जायसवाल का आज का दूसरा पसंदीदा स्टॉक है DMART। इस स्टॉक में भी हायर टॉप, हायर बॉटम्स का कंफर्मेशन मिला है। स्टॉक अपने 10-20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। यहां पर भी एक बाउंस बैक की उम्मीद दिख रही है। इस शेयर में 3974 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 4200 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।

 

 

Market Trend : ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमत बाजार के लिए सबसे बड़ा निगेटिव फैक्टर, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन फिर उछली चांदी, ₹2.39 पर भाव, खरीदारी से पहले जानें आपके अपने शहर का भाव

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में हफ्ते के दूसरे दिन भी तेजी जारी है। भारत में चांदी के भाव लगभग ₹2,40,340 लाखप्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा सुबह 10 बजे 2242 रुपये की बढ़त के साथ 2,39,074 रुपये पर ट्रेड करती नजर आई। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,36,867 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

इंटरनेशनल मार्केट में क्या है भाव

इंटरनेशनल मार्केट Comex में सोने और चांदी के दाम में तेजी देखी गई है। सुबह करीब 9 बजे सोना comex पर 1.22% तक चढ़ा (Gold Price on Comex) और कीमत 4473.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price on Comex) के दाम 1.02 % चढ़कर 65.940 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

अब अगर आप ऐसे में सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको अपने शहर के ताजा भाव जानने होंगे:

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव (10 ग्राम, 100 ग्राम, प्रति किलो)

शहर10 ग्राम चांदी100 ग्राम चांदी1 किलो चांदी
दिल्ली₹2,360₹23,600₹2,36,000
मुंबई₹2,360₹23,600₹2,36,000
कोलकाता₹2,360₹23,600₹2,36,000
चेन्नई₹2,360₹23,600₹2,36,000
पटना₹2,360₹23,600₹2,36,000
लखनऊ₹2,360₹23,600₹2,36,000
मेरठ₹2,360₹23,600₹2,36,000
अयोध्या₹2,360₹23,600₹2,36,000
कानपुर₹2,360₹23,600₹2,36,000
गाजियाबाद₹2,360₹23,600₹2,36,000
नोएडा₹2,360₹23,600₹2,36,000
गुरुग्राम₹2,360₹23,600₹2,36,000
चंडीगढ़₹2,360₹23,600₹2,36,000
जयपुर₹2,360₹23,600₹2,36,000
लुधियाना₹2,360₹23,600₹2,36,000
गुवाहाटी₹2,360₹23,600₹2,36,000
इंदौर₹2,360₹23,600₹2,36,000
अहमदाबाद₹2,360₹23,600₹2,36,000
वडोदरा₹2,360₹23,600₹2,36,000
सूरत₹2,360₹23,600₹2,36,000
पुणे₹2,360₹23,600₹2,36,000
नागपुर₹2,360₹23,200₹2,36,000
नासिक₹2,360₹23,200₹2,36,000
बैंगलोर₹2,360₹23,200₹2,36,000
भुवनेश्वर₹2,360₹23,600₹2,36,000
रायपुर₹2,360₹23,600₹2,36,000
हैदराबाद₹2,360₹23,600₹2,36,000

पिछले दिन क्या रहा चांदी का वायदा भाव

वैश्विक बाजार में मजबूती के रुख के बीच वायदा कारोबार में सोमवार को चांदी की कीमत 1.09 फीसदी बढ़कर 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सितंबर वायदा 2,514 रुपये यानी 1.09 फीसदी की बढ़त के साथ 2,33,980 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

वहीं इंटरनेशनल मार्केट में चांदी का वायदा भाव 0.41 फीसदी बढ़कर 63.81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। विश्लेषकों ने कहा कि सटोरियों की तरफ से नए सौदे किए जाने से चांदी की कीमतों में तेजी को समर्थन मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया।

इन फैक्टर्स पर रखें नजर

सोने को लंबे समय से संकट और युद्ध के समय सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन अब इसकी कीमत पर सिर्फ जियो-पॉलिटिकल टेंशन का असर नहीं पड़ रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशक अब यह भी देख रहे हैं कि महंगाई के आंकड़े, ब्याज दरों और सेंट्रल बैंकों की नीतियों पर क्या असर पड़ेगा। युद्ध और सोने की कीमत के बीच संबंध पहले जितना सीधा नहीं रहा है । रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में बढ़ती बॉन्ड यील्ड सोने के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद हाई बॉन्ड यील्ड ने सोने की तेजी पर दबाव डाला है।

कैसा है सोने का हाल

इस बीच सोने की कीमतों में भी जोरदार उछाल देखने को मिला है। MCX पर सोना (Gold Price) चढ़कर करीब ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा है। 11 अगस्त को दिल्ली में 22K सोने की कीमत करीब ₹13,944 प्रति ग्राम है जबकि मुंबई और केरल में यह लगभग ₹13,929 प्रति ग्राम, जबकि चेन्नई में करीब ₹13,949 प्रति ग्राम है। यानी शहर के हिसाब से सोने के रेट में थोड़ा फर्क नजर आया है।

Gold Price Today: लगातार दूसरे दिन सोना फीका, दिल्ली से पटना तक 10 शहरों में सबसे सस्ता बिक रहा यहां

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Aegeus IPO Listing: 18% का लिस्टिंग गेन, सोलर की सफाई करने वाली ऐजीअस के ₹105 के शेयरों का धमाल

Aegeus IPO Listing: सोलर प्लांट की सफाई के लिए रोबोट तैयार करने वाली ऐजीअस टेक के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल 29 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ था। इसके आईपीओ के तहत ₹105 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹124.50 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 18.57% का लिस्टिंग गेन (Aegeus Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹129.95 (Aegeus Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 23.76% मुनाफे में हैं।

Aegeus IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

ऐजीअस का करीब ₹24 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 4-6 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 29.91 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 23.88 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 48.05 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 25.59 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 22,58,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2.86 करोड़ प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ₹5.74 करोड़ जमीन की खरीदारी और सिविल वर्क्स के जरिए मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी के सेटअप, ₹8.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल, ₹3.56 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों और ₹3.55 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Aegeus Technologies के बारे में

ऐजीअस रोबोटिक और इंटेलिजेंस ऑटोमेशम सॉल्यूशंस डिजाइन कर डेवलप करती है। यह सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सिस्टम इंटीग्रेशन, डेटा मैनेजमेंट, ऑटोमेशन सॉल्यूशंस और कस्टमाइज्ड टेक्नोलॉजी सपोर्ट जैसी सर्विसेज ऑफर करती है। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 108% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹4.02 करोड़ और टोटल इनकम 64% से अधिक के CAGR से बढ़कर ₹41.22 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹11.93 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹9.28 करोड़ पड़े थे।

Anawil IPO Listing: 22% का लिस्टिंग गेन, टावर बनाने वाली कंपनी के ₹270 के शेयरों की धांसू एंट्री

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Trend : ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमत बाजार के लिए सबसे बड़ा निगेटिव फैक्टर, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Market Trend : मिलेजुले ग्लोबल संकेतों के बीच 11 अगस्त को भारतीय बाजार मामूली गिरावट के साथ खुले हैं। ऐसे में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार का कहना है कि बाजार के दूसरे फंडामेंटल्स मजबूत होने के बावजूद,ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें बाजार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बाजार में एक अहम बदलाव यह हुआ है कि FIIs अब खरीदार बन रहे हैं। Q1 के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं और रुपये में स्थिरता आई है, इससे विदेशी निवेशक पसंद कर रहे हैं। इन बातों से बाजार को सपोर्ट मिल सकता है। घरेलू खपत मजबूत रहने से FY27 तक अर्निंग्स में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है।

FCNR(B)में आ रहे भारी निवेश से रुपये को सहारा मिल सकता है,जिससे और ज्यादा FII निवेश आ सकता है। FIIs दक्षिण कोरिया और ताइवान में चिप ट्रेड से अपना पैसा निकालकर भारतीय शेयरों में डाल रहे हैं। यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि FIIs अच्छे वैल्यूएशन वाले बड़े बैंकों के बजाय टेलीकॉम, रिन्यूएबल एनर्जी,कैपिटल गुड्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर के महंगे शेयरों में पैसे लगा रहे हैं।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट, हितेश टेलर का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में सुस्ती के संकेत हैं। ग्लोबल संकेत मिलेजुले हैं। निवेशक अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंता और दूसरी तरफ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। इस हफ्ते अमेरिका में जुलाई के रिटेल महंगाई आंकड़े आने वाले हैं। ऐसे में मार्केट महंगाई और ब्याज दरों को लेकर सतर्क रह सकता है।

निफ्टी पर रणनीति

बाजार में आज की कमाई की रणनीति पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24632-24678 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24711-24767/24788 पर है। इसके लिए पहला बेस 24471-24509 पर और बड़ा बेस 24383-24411 पर है। कल बेस-1 से रजिस्टेंस-1 के बीच रेंज ने अच्छा काम किया। FIIs कैश में खरीदारी रही,लेकिन इंडेक्स में बिकवाली हुई। नेट शॉर्ट 1.52 लाख पर रहे,नई शॉर्ट पोजिशन जुड़ी।

आज एक्सपायरी है और ग्लोबल सेटअप साइडवेज है। कच्चा तेल फिलहाल मजबूत निगेटिव फैक्टर है। 24600-24700-24800 पर कॉल और 24500-24400 पर पुट राइटिंग हुई है। 24471 पर 10 DEMA और 24383 पर 200 DEMA है। एक्सपायरी को देखते हुए फिलहाल रेंज में ट्रेड करना बेहतर रहेगा। बेस-1 पर गिरावट में खरीदें,रजिस्टेंस-1 पर निकलें। 24471 के नीचे फिसलने पर दबाव बढ़ेगा,फिर बेस-2 का टेस्ट संभव है। बेस-1 से रिवर्सल मिले तो रजिस्टेंस-1 पर मुनाफा बुक करें।

24711 के ऊपर रेंज ब्रेकआउट हो सकता है,दिन में 70-80 अंक की अतिरिक्त चाल संभव है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 57941-58086 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58278-58389/58534 पर है। इसके लिए पहला बेस 57432-57550 पर और बड़ा बेस 56959-57117/57236 पर है। बैंक निफ्टी अभी छोटी रेंज में फंसा हुआ है। कल भी कारोबार साइडवेज रहा। PSU बैंकों में तेज दबाव देखने को मिला। 58000-58100-58200 पर कॉल राइटिंग दिखी। 57000 पुट में अच्छा OI है, यहां 10/20DEMA भी है।

शुरुआत में रेंज ट्रेड करने की रणनीति रखें। क्रूड में तेजी है,इसलिए बेस-1 टूटने पर दबाव संभव है। बेस-1 टूटने पर बेस-2 तक गिरावट संभव है। बेस-1 से रिवर्सल मिले तो रजिस्टेंस-1 के पास निकलें।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Mantri FinMart के अरुण कुमार मंत्री। आज इनकी जेएसडब्ल्यू एनर्जी और मारुति में खरीदारी की सलाह है। जेएसडब्ल्यू एनर्जी में इनकी 577 रुपए के आसपास, 571 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 586 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, मारुति में इनकी 14090 रुपए के आसपास,13910 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 14545 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है

 

Trading Plan: ICICI सिक्योरिटीज के जय ठक्कर से जाने आज कैसी रह सकती है बाजार की चाल, क्या हो कमाई की रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Plan: ICICI सिक्योरिटीज के जय ठक्कर से जाने आज कैसी रह सकती है बाजार की चाल, क्या हो कमाई की रणनीति

Trading Plan: आने वाले सेशन में निफ्टी 50 के 24,500-24,650 की सीमित रेंज में ट्रेड करने की संभावना है। हालांकि,इंडेक्स की अंदरूनी मजबूती बनी हुई है और यह अपने 200-डे EMA, 21 डे EMA और 24,482 के ब्रेकआउट जोन के ऊपर ट्रेड कर रहा है। अगर इंडेक्स इस रेंज से नीचे गिरता है,तो अगला डाउनसाइड टारगेट 24,400 हो सकता है। ऊपर की तरफ,24,700-24,800 का जोन रेजिस्टेंस का काम करेगा।

उधर बैंक निफ्टी के लिए 57,500 का लेवल एक अहम सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह लेवल टूटता है और इसमें बड़ी गिरावट आती है तो और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऊपर की तरफ इसके लिए 58,100-58,250 का जोन रेजिस्टेंस का काम करेगा। बाजार जानकारों का कहना कि अगर बैंक निफ्टी इस रेंज से ऊपर जाता है तो 58,500 और उसके बाद 58,700 तक के लेवल देखने को मिल सकते हैं।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

ICICI सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ डेरिवेटिव्स एंड क्वांट रिसर्च,जय ठक्कर का कहना है कि सोमवार को वीकली सेटलमेंट से पहले आखिरी ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी लगभग सपाट बंद हुआ,लेकिन कुल मिलाकर स्थिति पॉजिटिव दिख रही है। डेली क्लोजिंग अब लगभग सामान्य हो गई है और इम्प्लाइड वोलैटिलिटी भी कम हुई है,जो एक अच्छी बात है। पिछली वीकली एक्सपायरी में दोपहर 3:15 बजे तक कोई ‘थीटा डिके'(समय बीतने के साथ ऑप्शन की कीमत में कमी)नहीं हुआ क्योंकि क्लोजिंग प्राइस को लेकर अनिश्चितता थी,लेकिन पिछले कुछ दिनों के आंकड़े बताते हैं कि दोपहर 3:15 बजे और 3:30 बजे के बीच का अंतर कम हुआ है,जो एक अच्छा संकेत है।

ऑप्शन डेटा से पता चलता है कि शॉर्ट-टर्म रिवर्सल 24,200 से 24,000 के लेवल पर है, जो कुल पुट बेस है। वहीं,24,600-24,800 का जोन रेसिस्टेंस का काम कर रहा है,क्योंकि वीकली एक्सपायरी के लिए यहां सबसे ज्यादा कॉल बेस है और यह 200 DMA के भी करीब है। अगर निफ्टी इसके ऊपर जाता है तो इसके 25,000 की ओर बढ़ने की संभावना है,जहां कुल मिलाकर सबसे ज्यादा कॉल बेस है।

इन बातों को ध्यान में रखकर देखें तो निफ्टी की शॉर्ट टर्म रेंज 24,200-24,800 पर दिख रही है। इसके बाद 24,000-25,000 का लेवल है। इंडिया VIX स्थिर हो गया है और इक्विटी कैश सेगमेंट और इंडेक्स फ्यूचर्स,दोनों में FIIs की तरफ से बिकवाली का दबाव भी कम हुआ है।

मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें घटने से भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए अच्छे संकेत मिल रहे हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए निफ्टी के लिए शॉर्ट-टर्म में नजरिया पॉजिटिव बना हुआ है।

अहम रेजिस्टेंस: 24,600, 24,800

अहम सपोर्ट: 24,200, 24,000

स्ट्रैटेजी: वर्तमान भाव पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें और 24,400 के आस-पास गिरावट आने पर और खरीदारी करें। क्लोजिंग बेसिस पर 24,200 के नीचे स्टॉप-लॉस रखें और 24,800 और 25,000 का टारगेट रखें।

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

जय ठक्कर का कहना है कि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के नतीजों और हाल ही में बढ़े जियो-पॉलिटिकल तनाव (जिससे ब्याज दरें बढ़ने का डर पैदा हुआ था) के बाद से बैंक निफ्टी कंसोलिडेशन मोड में आ गया है। हालांकि,अमेरिका से नौकरियों और महंगाई को लेकर आए अच्छे मैक्रो डेटा,जियो-पॉलिटिकल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बैंकिंग शेयरों में आ रही गिरावट को रोकने में मदद की है।

ऑप्शंस डेटा से पता चलता है कि 58,000 का स्ट्राइक अहम है क्योंकि यहां सबसे ज्यादा कॉल और पुट बेस है। ऐसे में इसके ऊपर जाने पर इंडेक्स पॉजिटिव हो जाएगा। ऐसा होने तक यह कंसोलिडेट होता रह सकता है। चूंकि हाल ही में काफी कंसोलिडेशन हुआ है और ओवरऑल मार्केट की स्थिति भी पॉजिटिव है,इसलिए ऐसा लगता है कि इंडेक्स में ऊपर की ओर ब्रेकआउट होगा,जिससे यह 59,000 और 60,000 के लेवल तक पहुंच सकता है।

नीचे की तरफ बैंक निफ्टी के लिए 57,000 पर तत्काल सपोर्ट है क्योंकि 58,000 स्ट्राइक के बाद यहीं सबसे ज्यादा पुट बेस है।

अहम रेजिस्टेंस: 58,000

अहम सपोर्ट: 57,000

स्ट्रैटेजी: 58,000 के ऊपर बैंक निफ्टी अगस्त फ्यूचर्स खरीदें। स्टॉप-लॉस 57,000 के नीचे रखें और टारगेट 59,000 और 60,000 पर सेट करें।

 

 

Market cues : मोमेंटम इंडिकेटर दे रहे कंसोलीडेशन जारी रहने के संकेत, 24500-24700 का दायरा टूटने पर ही आएगी तेजी

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।