Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

Crude Oil Price Today:  बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।

आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।

इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: दो दिनो में ₹10100 चढ़ा सोना, चांदी भी महंगी, चेक करें 10 शहरों में 24 से 18 कैरट के लेटेस्ट भाव

Gold Rate Today in India: कच्चे तेल में उछाल के बावजूद मजबूत डिमांड के चलते सोने-चांदी की चमक आज बढ़ी है। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹1860 और 22 कैरट वाला ₹1710 सस्ता हुआ है तो 9 अगस्त की एक दिन की स्थिरता से पहले लगातार चार दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹8350 और 22 कैरट वाला ₹7650 महंगा हुआ था। 10 अगस्त को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹380 और 22 कैरट वाला ₹350 सस्ता हुआ था। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 महंगा हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक बढ़ी है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन यह महंगी हुई है और इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹10100 ऊपर चढ़ी है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
मुंबई₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
कोलकाता₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
चेन्नई₹1,54,380₹1,41,510₹1,19,310
बेंगलुरू₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
हैदराबाद₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
लखनऊ₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
पटना₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430
जयपुर₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
अहमदाबाद₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430

तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन चढ़ी चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव बढ़े है। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,100 महंगी हुई है। आज दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 चढ़कर ₹2,55,100 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,60,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के ईबीजी कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने-चांदी की चमक बढ़ सकती है। प्रमण का मानना है कि 10 ग्राम सोना ₹1.57 और 1 किलो चांदी ₹2.80 लाख का हो सकता है। लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इस कारण सोने की चमक बढ़ रही है तो चांदी में भी इनवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड स्ट्रॉन्ग है। अमेरिका में इनफ्लेशन के आंकड़े 12 अगस्त को आएंगे।

भारतीय घरों में दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी ज्यादा सोना! 

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Bata India Q1 Results: फुटवियर कंपनी का मुनाफा 23% बढ़ा, ₹25 के डिविडेंड का ऐलान

Bata India Q1 Results: फुटवियर कंपनी Bata India ने जून तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 23.1% बढ़कर 64 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 52 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू और EBITDA में भी बढ़त

बाटा का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 3.9% बढ़कर 979 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 942 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 2.6% बढ़कर 204 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल यह 199 करोड़ रुपये था।

हालांकि, EBITDA मार्जिन थोड़ा घटा है। यह पिछले साल के 21.1% से घटकर 20.8% रह गया।

₹25 के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

Bata India के बोर्ड ने FY27 के लिए हर शेयर पर 25 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यानी यह फेस वैल्यू का 500% डिविडेंड है।

डिविडेंड के लिए 19 अगस्त 2026 रिकॉर्ड डेट तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 2 सितंबर 2026 से किया जाएगा।

Bata India के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले मंगलवार को Bata India का शेयर NSE पर 1.94% गिरकर 699 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में शेयर 22.76% गिरा है। वहीं, 1 साल में स्टॉक 40.93% क्रैश हो चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 8.99 हजार करोड़ रुपये है।

Bata India का बिजनेस क्या है

Bata India प्रमुख फुटवियर कंपनी है। यह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए जूते, सैंडल, चप्पल और स्पोर्ट्स फुटवियर बेचती है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को Bata स्टोर्स, मल्टी ब्रांड आउटलेट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचती है। इसके अलावा, कंपनी अपने फुटवियर के साथ बैग, बेल्ट और दूसरी एक्सेसरीज भी बेचती है।

कंडोम बनाने वाली कंपनी का शेयर बना रॉकेट, एक महीने में 33% चढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को राजस्थान सरकार से ₹241 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, 10 साल तक ITI को ऑपरेट करेगी

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी HG Infra Engineering को राजस्थान सरकार से नया प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), भिवाड़ी क्लस्टर के संचालन और मैनेजमेंट के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) मिला है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री PM-SETU योजना के तहत दिया गया है।

प्रोजेक्ट में कंपनी की हिस्सेदारी ₹17.1 करोड़

इस प्रोजेक्ट में HG Infra Anchor Industry Partner की भूमिका निभाएगी। कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 17.1 करोड़ रुपये है। यह अनुमानित 241 करोड़ रुपये के कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का करीब 7% है।

प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाया जाएगा। HG Infra को ITI के संचालन और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी 10 साल तक निभानी होगी। कंपनी को LOA 11 अगस्त 2026 को मिला है।

पहले के दो महाराष्ट्र प्रोजेक्ट ऑर्डर बुक से बाहर

HG Infra ने मई 2026 में महाराष्ट्र के दो प्रोजेक्ट्स को अपनी ऑर्डर बुक में शामिल नहीं करने का फैसला किया था। कंपनी ने इसके पीछे प्रोजेक्ट के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बताई थी।

ये दोनों प्रोजेक्ट नागपुर-चंद्रापुर एक्सेस सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे से जुड़े थे। कंपनी को मई 2024 में दोनों पैकेज के लिए L1 bidder घोषित किया गया था। HG Infra के मुताबिक, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए जमा की गई बैंक गारंटी MSRDC ने वापस कर दी। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

HG Infra के शेयरों का हाल

मंगलवार को HG Infra Engineering का शेयर 0.97%% गिरकर 548 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.29% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 45% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 3.58 हजार करोड़ रुपये है।

HG Infra का बिजनेस क्या है

HG Infra Engineering इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जो मुख्य तौर पर सड़क, हाईवे, एक्सप्रेसवे और रेलवे से जुड़े EPC प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी सड़क निर्माण, पुल, फ्लाईओवर और दूसरी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं तैयार करती है। इसके अलावा, कंपनी अब इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के संचालन और मैनेजमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स में भी कदम बढ़ा रही है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO: 12 अगस्त से ₹1617 करोड़ का IPO खुलेगा, GMP 28% मुनाफे का संकेत दे रहा

Shiprocket IPO: टेमासेक और जोमैटो जैसे दिग्गजों के निवेश वाली Shiprocket का IPO 12 अगस्त से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 92 से 97 रुपये प्रति शेयर तय किया है। IPO के जरिए कंपनी करीब 1,617.5 करोड़ रुपये जुटाएगी।

12 से 14 अगस्त तक खुलेगा IPO

Shiprocket IPO के लिए बोली 12 अगस्त से 14 अगस्त तक लगाई जा सकेगी। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए इश्यू 11 अगस्त को खुलेगा। कंपनी फ्रेश इश्यू से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में करेगी।

कर्ज चुकाने और अधिग्रहण पर भी पैसा

IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कंपनी कुछ कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज को चुकाने में लगाएगी। इसके अलावा संभावित अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी रकम इस्तेमाल होगी।

GMP 28% तक

ग्रे मार्केट में Shiprocket के शेयरों को लेकर फिलहाल अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म के मुताबिक IPO का GMP करीब 27 से 28% तक है। Investorgain ने 27 रुपये का GMP बताया है। इसके हिसाब से 97 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर अनुमानित लिस्टिंग करीब 124 रुपये हो सकती है। हालांकि, GMP अनौपचारिक होता है और लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं देता।

Shiprocket क्या करती है?

Shiprocket पहले मुख्य तौर पर शिपिंग सर्विस देती थी। अब यह फुल स्टैक ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन चुकी है। कंपनी D2C ब्रांड्स और MSMEs को ऑनलाइन कारोबार से जुड़ी सेवाएं देती है।

इसके कारोबार को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला कोर बिजनेस है। इसमें घरेलू शिपिंग प्लेटफॉर्म और शिपिंग ऐप्स शामिल हैं। कंपनी मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्टेशन, AI आधारित लॉजिस्टिक्स अलोकेशन, ऑर्डर मैनेजमेंट और ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं देती है।

कंपनी की ग्रोथ कैसी रही?

FY24 से FY26 के बीच Shiprocket का रेवेन्यू 24% CAGR से बढ़ा। इसी दौरान एडजस्टेड PAT घाटा 351 करोड़ रुपये से घटकर 76 करोड़ रुपये रह गया।

SBI Securities ने IPO को सब्सक्राइब रेटिंग दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक, IPO से मिलने वाली रकम से करीब 210 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया जा सकता है। इससे कंपनी का कुल कर्ज 242 करोड़ रुपये से घटकर करीब 32 करोड़ रुपये रह सकता है।

ब्रोकरेज की अलग-अलग राय

Swastika Financial ने IPO को Neutral रेटिंग दी है। उसके मुताबिक, यह IPO ज्यादा जोखिम लेने वाले और ग्रोथ पर फोकस करने वाले निवेशकों के लिए बेहतर है। वहीं, Ventura Securities ने कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट और FY26 में 52.64 करोड़ रुपये के पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो को सकारात्मक बताया है।

हालांकि, कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा कोर बिजनेस से आता है। थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स पर निर्भरता भी एक जोखिम है। इसलिए IPO में निवेश से पहले वैल्यूएशन, कंपनी की ग्रोथ और जोखिम को ध्यान से देखना जरूरी है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

VB-G RAM G के तहत रोजगार में 50 फीसदी गिरावट, जानिए क्या है इसकी वजह

ग्रामीण इलाकों में रोजगार की नई गारंटी स्कीम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM-G) के तहत रोजगार में गिरावट आई है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई, 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी-राम-जी स्कीम लागू की है। इस स्कीम के फंडिंग सिस्टम में भी बदलाव किया गया है।

इन वजहों से घटा स्कीम में रोजगार

VB-G RAM-G में रोजगार घटने की कई वजहें हैं। मानसून के सीजन में इस स्कीम के तहत होने वाले काम रुक जाते हैं। मनरेगा की जगह नई योजना लागू करने के दौरान कुछ दिक्कतें आई होंगी। इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से मजदूरों के पलायन की रफ्तार सुस्त हुई है। केंद्र सरकार के दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला

राज्य सरकार के एक सूत्र ने कहा कि राज्यों की खराब वित्तीय हालत भी इस स्कीम में रोजगार में कमी की वजह हो सकती है। नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला है। ज्यादातर राज्यों को इस स्कीम पर आने वाले खर्च का 40 फीसदी बोझ उठाना पड़ता है। बाकी 60 फीसदी बोझ केंद्र सरकार उठाती है।

ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब

एक राज्य सरकार के प्रतिनिधि ने मनीकंट्रोल को बताया कि ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब है। कई राज्यों ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिन पर काफी ज्यादा पैसे खर्च होते हैं। इस वजह से उनके पास VB-G RAM-G पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं बचते हैं। आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है।

VB-G RAM-G में 125 दिन रोजगार की गारंटी

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों का कंसॉलिडेटेड फिस्कल डेफिसिट बढ़कर FY25 में जीडीपी का 3.3 फीसदी हो गया। 2021-22 से 2023-24 के बीच यह जीडीपी के 3 फीसदी से कम था। VB-G RAM-G में रोजगार की गारंटी वाले दिन की संख्या बढ़ाकर 125 दिन कर दी दी गई है। मनरेगा में यह 100 दिन थी।

बुआई और कटाई के पीक सीजन में काम रुक जाता है

गारंटी वाले रोजगार के दिन की संख्या बढ़ाने से भी राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। इस स्कीम में बुआई और कटाई के पीक सीजन में कुल 60 दिन तक काम रुक जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कृषि कार्य के लिए मजदूरों की कमी नहीं हो।

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जुलाई 2025 के मुकाबले रोजगार में 50 फीसदी कमी

केंद्र सरकार के VB-G RAM-G डैशबोर्ड (10 अगस्त को अपडेटेड) के मुताबिक, जुलाई 2026 में पर्सन-डेज गारंटीड की संख्या जुलाई 2025 में मनरेगा के मुकाबले 50 फीसदी से ज्यादा कम रही। केंद्र सरकार के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पर्सन-डेज की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने अपनी सब्सिडियरी Vyoma.AI के साथ दो समझौते किए हैं। इसके तहत L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस 1,400 करोड़ रुपये में Vyoma को ट्रांसफर करेगी। इसके अलावा, L&T Network Services में अपनी पूरी हिस्सेदारी 30 करोड़ रुपये में बेचेगी।

शेयर जारी करके होगा भुगतान

L&T ने 11 अगस्त को यह समझौता किया है। डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस को स्लंप सेल के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। यानी कारोबार को एक चालू बिजनेस के तौर पर दूसरी कंपनी को दिया जाएगा।

इसके बदले Vyoma, L&T को पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर जारी करेगी। अंतिम रकम क्लोजिंग के समय होने वाले बदलावों के आधार पर तय होगी।

डेटा सेंटर बिजनेस का कितना कारोबार?

L&T के डेटा सेंटर बिजनेस का FY26 में रेवेन्यू 36.6 करोड़ रुपये रहा था। यह L&T के स्टैंडअलोन रेवेन्यू का सिर्फ 0.025% था। इस कारोबार की नेटवर्थ 1,142 करोड़ रुपये थी। यह L&T की स्टैंडअलोन नेटवर्थ का 1.565% है।

सौदा 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके लिए समझौते में तय शर्तों को पूरा करना होगा।

नेटवर्क सर्विस कंपनी भी ट्रांसफर होगी

L&T अपनी L&T Network Services Private Ltd में 100% हिस्सेदारी भी Vyoma को देगी। इसकी कीमत 30 करोड़ रुपये तय की गई है। इसका भुगतान भी Vyoma के इक्विटी शेयर जारी करके किया जाएगा।

सौदा पूरा होने के बाद L&T Network Services, Vyoma की सब्सिडियरी बन जाएगी। वहीं, L&T की यह अप्रत्यक्ष सब्सिडियरी रहेगी।

Vyoma.AI क्या करती है?

Vyoma.AI को 22 अप्रैल 2026 को बनाया गया था। कंपनी का मकसद डेटा सेंटर स्थापित करना है। इसके अलावा यह इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी से जुड़ी सेवाएं देगी। FY26 में कंपनी का कोई रेवेन्यू या नेटवर्थ नहीं था। L&T के मुताबिक, डेटा सेंटर बिजनेस का ट्रांसफर किसी स्कीम ऑफ अरेजमेंट के तहत नहीं हो रहा है।

मंगलवार को L&T का शेयर 0.70% गिरकर 4,040 रुपये पर बंद हुआ।

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 18.5% बढ़ा, EBITDA में जोरदार उछाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज के कंसोर्टियम को ₹740 करोड़ के प्रोजेक्ट मिले, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का है काम

इंटीग्रेटेड फैसिलिटीज मैनेजमेंट कंपनी Crystal Integrated Services के कंसोर्टियम को महाराष्ट्र सरकार से दो बड़े वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 740.06 करोड़ रुपये है। कंपनी की कंसोर्टियम में 40% हिस्सेदारी है। इस हिसाब से कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 296.03 करोड़ रुपये है।

पुणे और नागपुर में होंगे प्रोजेक्ट

ये दोनों ऑर्डर LC Infra Crystal Consortium को मिले हैं। इसमें LC Infra Projects Private Limited लीड मेंबर है। वहीं Crystal Integrated Services टेक्निकल मेंबर है।

प्रोजेक्ट के तहत पुणे और नागपुर डिवीजन के शहरी निकायों में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवर नेटवर्क और इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन सिस्टम शामिल हैं। 5 MLD या उससे ज्यादा क्षमता वाले STP भी बनाए जाएंगे। इन प्रोजेक्ट्स को दो साल में पूरा करना है।

कंपनी की ऑर्डर बुक को मिलेगा सहारा

कंपनी के लिए ये ऑर्डर काफी अहम हैं। इससे सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। कंपनी टेक्निकल मेंबर के तौर पर सीवेज ट्रीटमेंट और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में भी कंपनी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।

Q1 में रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा

Crystal Integrated Services ने FY27 की पहली तिमाही में भी ग्रोथ दर्ज की। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11.65% बढ़कर 360.71 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 323.08 करोड़ रुपये था।

EBITDA 6.76% बढ़कर 22.80 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 6.30% बढ़कर 17.36 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 6.32% रहा। बेसिक EPS भी 5.95% बढ़कर 12.46 रुपये पहुंच गया।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीता प्रसाद लाड ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार से मिले ये दोनों कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए अहम पड़ाव हैं। उनके मुताबिक, 740 करोड़ रुपये के कुल कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी की 40% हिस्सेदारी से प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी सरकारी, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संस्थागत क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ हासिल करना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी घटी, नोएडा – गाजियाबाद ने मारी बाजी! NCR में बदल रही है आर्थिक ताकत की तस्वीर

देश की जीडीपी में बीते छह सालों में दिल्ली की हिस्सेदारी घटी है। यह जानकारी कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की रिपोर्ट पर आधारित है। यह रिपोर्ट एसेंबली में पेश की गई है। मनीकंट्रोल ने इस रिपोर्ट का विश्लेषण किया है।

जीडीपी में मुंबई और बेंगलुरु की हिस्सेदारी बढ़ी

रिपोर्ट के एनालिसिस से पता चला है कि मेट्रो शहरों में सिर्फ दिल्ली की हिस्सेदारी देश की जीडीपी में घटी है। मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई की हिस्सेदारी देश की जीडीपी में बढ़ी है। देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी FY में 4.12 फीसदी थी। यह FY24 में घटकर 3.82 फीसदी रह गई।

चेन्नई की हिस्सेदारी भी जीडीपी में बढ़ी है

बेंगलुरु की हिस्सेदारी देश की जीडीपी में FY18 में 2.88 फीसदी थी। यह FY24 में बढ़कर 3.23 फीसदी हो गई। मुंबई (ठाणे और पालघर छोड़कर) की हिस्सेदारी इस दौरान 2.57 फीसदी से बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई। चेन्नई की हिस्सेदारी इस दौरान 1.02 से बढ़कर 1.09 फीसदी हो गई।

नोएडा और गाजियाबाद की हिस्सेदारी बढ़ी

खास बात यह है कि दिल्ली-एनसीआर में शामिल नोएडा और गाजियाबाद की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी इस दौरान बढ़ी है। नोएडा की हिस्सेदारी देश की जीडीपी में FY18 में 0.84 फीसदी थी, जो FY24 में बढ़कर 0.87 फीसदी हो गई। गाजियाबाद की हिस्सेदारी 0.24 फीसदी थी, जो बढ़कर 0.39 फीसदी हो गई।

दिल्ली की हिस्सेदारी घटने की वजह 

देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी घटने की एक वजह कुछ सर्विसेज के दिल्ली के बाहर जाना हो सकता है। दिल्ली में किराया बढ़ने से इन सर्विसेज ने एनसीआर में शामिल दूसरे शहरों का रुख किया होगा। दूसरी वजह प्रदूषण के सख्त नियम हो सकते हैं, जिनकी वजह से कुछ मैन्युफैक्चरर्स को दिल्ली से बाहर जाना पड़ा होगा।

आर्थिक गितिविधियां दूसरे शहरों में शिफ्ट हुईं

कैग के डेटा से यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय राजधानी का हिस्सा रही आर्थिक गतिविधियां बंद होने की जगह एनसीआर के दूसरे शहरों में शिफ्ट हुई होंगी। गाजियाबाद के डेटा से इसका पता चलता है। FY18 से FY24 के बीच देश की जीडीपी में गाजियाबाद की हिस्सेदारी 0.15 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ी है। इस दौरान नोएडा की हिस्सेदारी भी 0.03 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़ी है।

चंडीगढ़ की हिस्सेदारी अपरिवर्तित रही

FY18 से FY24 के बीच देश की जीडीपी में चंडीगढ़ की हिस्सेदारी करीब अपरिवर्तित रही। पुद्दुचेरी की हिस्सेदारी 0.17 से घटकर 0.15 फीसदी पर आ गई। जम्मू एवं कश्मीर की हिस्सेदारी 0.81 फीसदी से घटकर 0.76 फीसदी पर आ गई। खास बात यह है कि हिस्सेदारी में कमी के बावजूद दिल्ली की हिस्सेदारी देश की जीडीपी में मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा है।