Daily Voice : अमेरिका के मिड टर्म चुनावों के बाद बाजार में आएगी तेजी, इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग शेयरों में बनेगा पैसा

Daily Voice: ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शमी को उम्मीद है कि US के मिड टर्म चुनावों के बाद जियोपॉलिटिकल हालात बेहतर होंगे। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कमी आएगी,महंगाई के अनुमानों में गिरावट होगी,US ट्रेजरी यील्ड में नरमी आएगी, कंपनियों की मार्जिन बेहतर होगी और भारतीय इक्विटी में फंड विदेशी पैसा आना शुरू होगा। इन सबसे मार्केट को सपोर्ट मिल सकता है।

उनका मानना ​​है कि जब मार्केट FY28 की अर्निंग और रेवेन्यू ग्रोथ पर ध्यान देना शुरू करेगा तो मौजूदा लेवल से बाजार में तेजी आने की संभावना है। उनको उम्मीद है कि RBI अपनी अगली MPC मीटिंग में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। वे इसे ब्याज दरें बढ़ाने के दौर की शुरुआत के तौर पर नहीं,बल्कि महंगाई के कुछ समय के दबाव को संभालने और US ट्रेजरी यील्ड बढ़ने के बीच रुपये को सहारा देने के लिए मॉनेटरी कदम के तौर पर देखते हैं।

क्या आपको उम्मीद है कि Q2 के नतीजे कोई पॉजिटिव सरप्राइज लेकर आएंगे?

दूसरी तिमाही के ज्यादातर हिस्से में महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रही है,इसलिए इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन पर दबाव पड़ने और Q2 की अर्निंग पर असर पड़ने की आशंका है। सर्विस सेक्टर,खासकर फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है,क्योंकि पिछले 2-3 क्वार्टर में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही है।

क्या हालिया गिरावट के बाद लार्ज-कैप शेयरों के भाव अच्छे हो गए हैं?

लार्ज-कैप कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी को लेकर निकट भविष्य की कमजोरी या अनिश्चितता पर बहुत ज़्यादा फोकस किया गया है। FII की बिकवाली के दबाव के साथ मिलकर लार्ज-कैप कंपनियों का वैल्यूएशन मल्टीपल आकर्षक स्तर पर आ गया है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव,करेंसी में दबाव से इनपुट कॉस्ट का बढ़ना और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन अगर आप मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के बाद डबल-डिजिट ग्रोथ की संभावना को ध्यान में रखें,तो 19.1 के P/E और 2.87 के P/B पर निफ्टी 100 निश्चित रूप से अच्छे भाव पर है।

इन चुनौतियों के बावजूद,हमने पिछली तिमाही में रेवेन्यू और अर्निंग्स में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी है। संभावना है कि US के मध्यावधि चुनावों के बाद ये हालात सामान्य हो सकते हैं।

क्या नए नियमों की वजह से हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद आपने इंश्योरेंस सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है,या आप अभी भी इस सेक्टर को लेकर सतर्क हैं?

पारंपरिक इंश्योरेंस कंपनियां अभी भी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं और उन पर डिजिटल इंटरमीडियरीज जैसा असर नहीं पड़ा है। इनमें काफी गिरावट आई है। बाजार ने पारंपरिक इंश्योरेंस कंपनियों के लिए वॉल्यूम ग्रोथ और क्लाइंट हासिल करने की बढ़ती लागत से जुड़ी चुनौतियों को अभी पूरी तरह से नहीं समझा है।

डिजिटल इंटरमीडियरीज की बात करें तो इनकी कीमतों में काफी करेक्शन हुआ है,लेकिन इनमें निवेश से पहले कारोबार पर नए नियमों से पड़ने वाले असर को पूरी तरह से समझना जरूरी है।

क्या आपको बैंकिंग सेक्टर में नेट इंटरेस्ट मार्जिन के बढ़ने और री-रेटिंग की उम्मीद है? क्या बैंकों के भाव आकर्षक हो गया है?

पब्लिक बैंक इंडेक्स 7.1 के P/E पर और प्राइवेट बैंक इंडेक्स 16.5 के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। ये दोनों इंडेक्स लार्ज-कैप इंडेक्स की तुलना में भी ज़्यादा आकर्षक कीमत पर हैं। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर नेट इंटरेस्ट मार्जिन स्थिर हो जाएंगे।

पहले,क्रेडिट ग्रोथ के मुकाबले डिपॉज़िट ग्रोथ के पीछे रहने को लेकर चिंता थी,जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव पड़ा। अभी चिंता FCNR डिपॉज़िट के रूप में आने वाले बड़े फंड को लेकर है,जिसे इस्तेमाल में लाने में समय लगेगा। हालांकि,आने वाली तिमाहियों में इन फंड्स के इस्तेमाल होने की उम्मीद है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन में स्थिरता आएगी।

क्या आपको मैन्युफैक्चरिंग स्टॉक्स में वैल्यूएशन से जुड़े जोखिम दिख रहे हैं?

इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस्ड बड़े इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पॉजिटिव नजरिया है। इसमें पावर,लॉजिस्टिक्स,मशीनरी और EPC सेगमेंट शामिल हैं। दूसरी ओर निवेशकों को कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के वैल्यूएशन लेवल को लेकर सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इनमें ग्रोथ की उम्मीदें पहले ही पूरी तरह से कीमत में शामिल हो चुकी हैं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : 500-700 अंक और गिर सकता है निफ्टी, सोमवार को इन दो शेयरों पर रहे नजर

Market View : शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कल गुरुवार को निचले स्तरों से रिकवरी तो की,लेकिन दबाव कम नहीं हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी निचले स्तरों से सुधरकर बंद हुए,मगर सेंसेक्स 31 महीने के निचले स्तर पर क्लोज हुआ। कल इसमें 14 फरवरी 2024 के बाद की सबसे निचली क्लोजिंग देखने को मिली। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट का दबाव रहा। IT को छोड़ सभी सेक्टर इंडेक्स में दबाव में रहे। ऑटो,मेटल और FMCG शेयरों में दबाव देखने को मिला। FIIs की बिकवाली जारी रही। इन्होंने 10,041.84 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, DIIs की तरफ से बाजार को सपोर्ट जारी रहा। इन्होंने 9484.22 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

बाजार अगले हफ्ते

अब सवाल ये है कि जब लॉन्ग वीकेंड के बाद अगले हफ्ते बाजार खुलेगा तो किस तरह का एक्शन देखने को मिल सकता है? क्या ट्रेंड है जो आप ध्यान में रख सकते हैं? इसका जवाब देते हुए त्रिशक्ति एसोसिएट्स (Trishakti associates)के पवन माहेश्वरी ने कहा कि मार्केट ने इस पूरे वीक में एक अच्छी लाल कैंडल बनाई है। इसके अलावा 8 हफ्ते से बैंक टू बैक रेड कैंडल्स ही बन रही हैं। लेकिन कल जो मार्केट में हुआ वह एक ध्यान में रखने वाली बात है। 2:30 बजे के आसपास में बाजार ने 22200 पर सपोर्ट लिया जो मल्टीपल टाइम टेस्ट हो चुका है। वहां से एक सपोर्ट लेकर निफ्टी 22400 के आसपास टिका रहा। तो ऐसा लगता है कि 22200-22180 के आसपास निफ्टी की लोअर रेंज रह सकती है जिसको स्टॉप लॉस रखते हुए बाजार में लॉन्ग के ट्रेड्स लिए जा सकते हैं और इंडेक्स में खरीदारी की जा सकता है। अगर सोमवार को निफ्टी इन लेवल्स को बचाए नहीं रख पाता तो फिर बाजार और टूट सकता है। इसके चलते निफ्टी में 500-700 अंक तक की और गिरावट दिखाई दे सकती है।

पवन माहेश्वरी की टॉप पिक्स

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए पवन माहेश्वरी ने कहा कि कल के क्लोजिंग सेशन में बैंक और आईटी सेक्टर ने जिस तरह का मूवमेंट दिया है उसको देखते हुए इन सेक्टरों पर फोकस रहना चाहिए। Infosys ने कल गुरुवार को काफी स्ट्रांग कैंडल बनाई है जिसमें वॉल्यूम्स भी अच्छे रहे हैं। इसको देखते हुए इंफोसिस में खरीदारी की सलाह है। Infosys में ₹980 के स्टॉप लॉस के साथ, ₹1250 तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

दूसरा अगर आप देखें तो कल के मार्केट में लास्ट के एक घंटे के अंदर IDBI बैंक ने भी काफी अच्छा मूव दिया है। पिछले तीन-चार महीने से यह शेयर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ही बढ़ता रहा है। इस शेयर में भी ₹80 के स्टॉप लॉस के साथ, ₹105 तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 1 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,450 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 570.59 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक या 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ। लगभग 1306 शेयरों में बढ़त हुई, 2916 शेयरों में गिरावट आई और 191 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, M&M, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स शामिल रहे, जबकि बढ़त वाले शेयरों में HDFC लाइफ, SBI लाइफ इंश्योरेंस, HDFC बैंक, इंफोसिस और TCS शामिल रहे।

सेक्टरल इंडेक्स में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स में 2 प्रतिशत और टेलीकॉम इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर, ऑटो, मीडिया, FMCG, इंफ्रा, मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल और रियल्टी इंडेक्स 2-3 प्रतिशत गिरे, जबकि एनर्जी, फार्मा, PSU बैंक और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर ने कहा कि बाजार में बिकवाली की मुख्य वजह बाहरी कारक रहे हैं। बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे 2026-27 के इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

घरेलू स्तर पर भी,निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों और अगले हफ्ते आने वाली RBI की पॉलिसी को लेकर सतर्क हैं। Q2 की कमाई Q1 के मुकाबले कम रहने की उम्मीद है। Q1 में ऑपरेटिंग कॉस्ट घटने का फायदा मिला था,जो इस बार शायद न मिले। वहीं,RBI जिसने पिछली पॉलिसी में ज्यादा खुला रुख अपनाया था,अब ग्लोबल महंगाई के दबाव और रुपये (INR) को सहारा देने की जरूरत को देखते हुए अपने रुख में बदलाव पर विचार कर सकता है। इसके बावजूद,यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी हुई है और इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है।

लंबे समय के निवेशक निवेश बनाए रख सकते हैं और बाजार में करेक्शन का फायदा उठाकर धीरे-धीरे और निवेश कर सकते हैं। वहीं,कम समय के निवेशक इंतज़ार करो और देखो की रणनीति अपना सकते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के मज़बूत कदमों से ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में स्थिरता न आ जाए तब तक हमें वेट एंड वॉच मोड में रहना चाहिए।

मार्केट पर टेक्निकल व्यू

कोटक सिक्योरिटीज में हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि छोटे ट्रेडिंग वीक में बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट आई। निफ्टी 3.10 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में लगभग 2000 अंकों की गिरावट आई। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट-बुकिंग देखी गई। कंज्यूमर और ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। कंज्यूमर इंडेक्स 6.15 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स 5.85 प्रतिशत गिरा।

इस पूरे हफ्ते बाजार को ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली का दबाव झेलना पड़ा। वीकली चार्ट पर एक लंबी मंदी वाली कैंडल बनी। इंट्राडे चार्ट पर निफ्टी लगातार’लोअर हाई’और ‘लोअर लो’बनाता रहा जो काफी हद तक निगेटिव ट्रेंड का संकेत है।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि बाजार का शॉर्ट टर्म स्ट्रक्चर कमजोर है। लेकिन यह ‘ओवरसोल्ड’पोजीशन में है। इसलिए,मौजूदा स्तरों से’पुलबैक रैली’की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नीचे की ओर निफ्टी के लिए 22,200 अहम सपोर्ट जोन है। जबकि 22,500 एक तत्काल रेजिस्टेंस लेवल है। 22,500 के ऊपर जाने पर पुलबैक 22,700–22,800 तक बढ़ सकता है। इसके विपरीत,22,200 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी 22,000–21,950 तक गिर सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,54,000 एक अहम सपोर्ट जोन है। अगर यह इस स्तर के ऊपर बना रहता है,तो इंडेक्स 55,000–55,500 तक वापस उछल सकता है। हालांकि,54000 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और 53,500–53,200 तक गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि निफ्टी 22,544 के लेवल के पास हल्की गिरावट (गैप-डाउन) के साथ खुला और हाल के सेशन में दिखी कमजोरी के कारण दबाव में बना रहा। इंडेक्स अभी 22,500–22,550 के अहम सपोर्ट जोन को टेस्ट कर रहा है, इसलिए शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर के लिए इस जोन का टिके रहना जरूरी है। अगर यह लगातार 22,500 के नीचे बना रहता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,300 के लेवल तक जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऊपर की तरफ 22,700–22,800 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस एरिया का काम कर सकता है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर रिकवर करता है तो इससे कुछ स्टेबिलिटी मिल सकती है और 23,000 की तरफ बढ़ने में मदद मिल सकती है। 23,000 स्ट्राइक पर सबसे ज़्यादा कॉल OI भी है,जिससे डेरिवेटिव्स के नजरिए से यह लेवल एक बड़ा रेजिस्टेंस बन जाता। मोमेंटम इंडिकेटर कमजोर बने हुए हैं। RSI 20s के बीच में है और पूरी तरह से ओवरसोल्ड जोन में है,जो लगातार गिरावट का मोमेंटम दिखाता है। हालांकि,बहुत ज्यादा ओवरसोल्ड हालात की वजह से बीच-बीच में रिकवरी की कोशिशें हो सकती हैं। लेकिन निकट भविष्य के लिए टेक्निकल आउटलुक बेयरिश बना हुआ है।

 

Market Insight : बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की आग में झुलसा बाजार, श्रीकांत चौहान से जाने कमजोर बाजार में भी किन शेयरों में हो सकती है कमाई

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

खत्म हुआ मार्केट में गिरावट का दौर! इस कारण मैक्वेरी को है भरोसा, लगाया इन सेक्टर पर दांव

Market Outlook: मैक्वेरी कैपिटल के एमडी और भारत में इक्विटी हेड संदीप भाटिया का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अपनी रेंज के निचले स्तर पर हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि मार्केट को झटका देने वाली जितनी भी खबरें हैं, और जो भी दबाव है, उसका खराब दौर अब निश्चित रूप से पीछे छूट चुका है। संदीप के मुताबिक कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी टैरिफ का रिस्क बना हुआ है तो भारत और अमेरिका में ब्याज दरें अभी भी मार्केट के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा भारत को अभी तक हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े थीम में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का पूरा फायदा नहीं मिला है। इन चिंताओं के बावजूद उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों के सितंबर 2026 तिमाही के रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं।

बैंकिंग सेक्टर

किस सेक्टर के कंपनियों के कारोबारी नतीजे धमाकेदार रह सकते हैं, इसे लेकर संदीप ने कोई अनुमान तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आउटलुक सुधर रहा है। बैंकिंग सेक्टर उन सेक्टर्स में शुमार है, जिनमें सबसे अधिक दबाव दिखा है लेकिन अब संदीप को उम्मीद है कि अगले दो साल में बैंकों के मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयरों की वैल्यूएशन फिर से बढ़ सकती है, हालांकि नियर टर्म में कमाई पर कुछ दबाव रह सकता है। उनका कहना है कि साल 2027 और साल 2028 में यानी अगले दो वर्षों में बैंकों की कमाई अच्छी रहेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर

संदीप भाटिया को फाइनेंशियल सेविंग्स में बड़ा मौका दिख रहा है। उनका अनुमान है कि देश की वित्तीय बचत $50 हजार करोड़ से अधिक है, जोकि और बढ़ सकता है। संदीप का मानना है कि एमसीएक्स, बीएसई और एनएसई को इस रुझान से फायदा हो सकता है।

कंज्यूमर और ऑटो सेक्टर

संदीप भाटिया को उम्मीद है कि कंज्यूमर-ड्यूरेबल कंजम्प्शन से अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने हुंडई इंडिया, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि फेस्टिवल सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री जबरदस्त रही है।

पावर और एनर्जी सेक्टर

संदीप भाटिया की पावर और एनर्जी स्पेस में दिलचस्पी बनी हुई है। रिन्यूएबल एनर्जी स्पेस में उन्हें क्लीन मैक्स एंवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस तो पावर इक्विपमेंट और ट्रांसमिशन कंपनियों में हिताची एनर्जी इंडिया पसंद है। उनका कहना है कि यह मौका सिर्फ एआई से जुड़ी बिजली की मांग की वजह से नहीं बन रहा है, बल्कि देश में मजबूत इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से भी इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आईटी सेक्टर

वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद संदीप आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हैं और अभी इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे हैं। संदीप का मानना है कि जब तक एआई के असर को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक दबाव बना रहेगा।

इंश्योरेंस सेक्टर

संदीप भाटिया का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर के लिए नियमों में बदलाव बड़ी चिंता बनी हुई है। फिलहाल वह पॉलिसीबाजार की पीबी फिनटेक को लेकर सतर्क हैं और इस सेक्टर पर कोई फैसला लेने से पहले बीमा नियामक IRDA की ड्राफ्ट सिफारिशों के फाइनल होने का इंतजार करना चाहते हैं।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : अक्टूबर सीरीज की कमजोर शुरूआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी करीब 4 अंक ऊपर कारोबार कर रहा है। हालांकि ग्लोबल संकेत ठीक-ठाक हैं। एशियाई बाजार मजबूत दिख रहे हैं। निक्केई और कोस्पी 1-1% ऊपर हैं। 30 साल की US ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के ऊपरी स्तरों पर पहुंचने के बावजूद अमेरिकी बाजारों में निचले स्तरों से रिकवरी दिखी। डाओ फ्यूचर्स भी 125 प्वाइंट ऊपर दिख रहा है। कच्चे तेल में नरमी आई है। कच्चे तेल में नरमी के बावजूद 30 साल की US ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के ऊपरी स्तरों पर पहुंचने से टेंशन है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

उतार-चढ़ाव भरे सेशन में 29 सितंबर को भारतीय शेयर बाज़ार लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। F&O एक्सपायरी के बीच निफ्टी 22,700 के आसपास बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 242.65 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर और निफ्टी 64.05 अंक या 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

GIFT निफ्टी सपाट कारोबार कर रहा है। यह 22,830 के आसपास नजर आ रहा है। ये भारतीय बाजारों के लिए सुस्त शुरुआत के संकेत हैं।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयरों में तीन सेशन में पहली बार बढ़त देखने को मिल रही है। US सेमीकंडक्टर शेयरों के अहम इंडेक्स में बढ़त के बाद टेक्नोलॉजी कंपनियों की अगुवाई में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.4% ऊपर चढ़ा है। US इक्विटी इंडेक्स फ्यूचर्स में भी थोड़ी बढ़त हुई है। निक्केई में 1.20 फीसदी की तेजी है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स 0.05 फीसदी की हल्की कमजोरी है। हैंग सेंग में भी 0.42 फीसदी की कमजोरी दिख रही है। ताइवान का बाजार 1.45 फीसदी और कोस्पी 0.08 फीसदी बढ़त दिखा रहा है। शांघाई कंपोजिट में भी 0.24 फीसदी की तेजी है।

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार में मामूली गिरावट के साथ कारोबार बंद हुआ। महंगाई और लेबर मार्केट के आंकड़ों से पहले सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जारी रही, जबकि निवेशकों ने ब्याज दरों की दिशा को लेकर फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर फोकस बनाए रखा। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 131.59 अंक या 0.26% गिरकर 51,349.92 पर आ गया। S&P 500 में 12.85 अंक या 0.17% की गिरावट आई और यह 7,670.84 पर बंद हुआ। जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 22.84 अंक या 0.08% गिरकर 26,797.54 पर आ गया।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला कारोबार दिख रहा है। दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज़्यादा 0.43% की गिरावट आई है,जबकि इंडोनेशियाई रुपिया और फिलीपीन पेसो में 0.02% की गिरावट दर्ज की गई है। सिंगापुर डॉलर में 0.01% की मामूली गिरावट आई है।

वहीं दूसरी ओर जापानी येन में 0.16% की मज़बूती आई है,इसके बाद ताइवान डॉलर में 0.11%, मलेशियाई रिंगित में 0.07% और चीनी रेनमिनबी में 0.06% की बढ़त हुई है। थाई बाहत में 0.02% की मामूली बढ़त देखी गई है।

क्रूड कीमतों में नरमी, ब्रेंट $102 के पास, 7 हफ्ते के निचले स्तर पर गोल्ड

पश्चिम एशिया से सप्लाई सुधरने से क्रूड में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर के पास दिख रहा है। होर्मुज के रास्ते तेल शिपमेंट PRE-WAR लेवल के करीब है। रिकवरी के बावजूद सोना 7 हफ्ते के निचले स्तर पर है। कॉमेक्स गोल्ड 4200 डॉलर के ऊपर है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर दिख रहा है।

ट्रंप ने कहा बहुत जल्द खत्म होगा ईरान से युद्ध, जॉन विलियम्स ने कहा दरें बढ़ाने की जल्दबाजी नहीं

बाजारों के लिए 2 पॉजिटिव बयान आए हैं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान से युद्ध बहुत जल्द खत्म होगा। इधर FOMC के रेट तय करने वाली कमिटी के वाइस चेयरमैन जॉन विलियम्स का बड़ा बयान आया है। इसमें कहा गया है कि सितंबर के बाद दरें बढ़ाने की जल्दबाजी नहीं है। इस बयान के बाद अक्टूबर में 25 bps रेट हाइक की संभावना 70% से घटकर 50% हो गई है।

आज से निफ्टी में बदलाव लागू

आज से निफ्टी में बदलाव लागू होगा। निफ्टी 50 में विप्रो की जगह BSE शामिल होगा। वहीं Nifty Next 50 में विप्रो,हिताची एनर्जी पॉलीकैप, Vedanta Aluminium, Vodafone Idea जैसे शेयर जुड़ेंगे।

Avalon Tech और Gland Pharma में बड़े सौदे संभव

आज दो बड़ी ब्लॉक डील्स पर बाजार की नजर रहेगी। Avalon Tech में 862 करोड़ रुपए के ब्लॉक संभव है। प्रोमोटर 6 परसेंट हिस्सा बेच सकते हैं। Indicative प्राइस 2150 से 2302 रुपए प्रति शेयर के बीच है। वहीं, Gland Pharma में 450 करोड़ रुपए के बड़े सौदों की संभावना है। फ्लोर प्राइस 2990 रुपए प्रति शेयर है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

29 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार चौथे सत्र में भी बिकवाली जारी रखी और लगभग ₹10,000 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा देना जारी रखा और इस सत्र के दौरान लगभग ₹7,000 करोड़ के शेयर खरीदे।

 

 

Market cues : बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर सभी पैमानों पर कमजोर, 22570 के नीचे जाने पर निफ्टी में बढ़ेगी गिरावट

Market cues : बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर सभी पैमानों पर कमजोर, 22570 के नीचे जाने पर निफ्टी में बढ़ेगी गिरावट

Trade setup for today : बाजार जानकारों का कहना है कि बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर सभी पैमानों पर कमजोर नजर आ रहा है। इसके अलावा US ट्रेजरी यील्ड्स भी दो दशक के हाई के आसपास दिख रही है। ऐसे में निफ्टी के आसानी से मंदड़ियों के पकड़ से बाहर निकलने की उम्मीद बहुत कम है। दिन के लो से तेज रिकवरी के बावजूद,29 सितंबर को मंथली F&O एक्सपायरी सेशन में इंडेक्स एक तिहाई परसेंट गिर गया। सितंबर में अब तक इसमें 5.67 परसेंट की गिरावट आई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी का मंगलवार का 22,570 का निचला स्तर काफी अहम लेवल हो सकता है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स और नीचे जा सकता है और 22,380 पर मौजूद 200-वीक EMA और फिर अप्रैल के निचले स्तर 22,182 तक गिर सकता है। दूसरी ओर अगर निफ्टी 22,570 के ऊपर बना रहता है तो यह 22,800–23,000 के जोन की ओर बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स अभी भी ‘सेल-ऑन-रैली'(तेज़ी आने पर बेचने)की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,716) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 22,750, 22,793 और 22,863

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,610, 22,566 और 22,496

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली चार्ट पर गिरावट के दौरान निफ्टी ने एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी निचली विक (wick) लंबी थी। यह’हैमर’जैसे कैंडलस्टिक पैटर्न जैसा दिखता है,जो निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। हालांकि इसे आमतौर पर ट्रेंड-रिवर्सल का संभावित पैटर्न माना जाता है,लेकिन इसकी पुष्टि के लिए आने वाले सेशन में मजबूत खरीदारी की जरूरत होती है। निफ्टी सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है और ये एवरेज नीचे की ओर झुके हुए हैं। जबकि RSI नेगेटिव क्रॉसओवर के साथ गिरकर 26.71 पर आ गया है। MACD सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है और रेड हिस्टोग्राम बार एक और सेशन में बढ़ता दिखा है। ये सभी इंडिकेटर अंडरलाइंग मोमेंटम में लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।

बैंक निफ्टी (54,260) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,387, 54,533 और 54,770

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 53,914, 53,767 और 53,531

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,509, 55,897

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 53,300, 51,830

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी ने एक पतली बॉडी वाली कैंडल बनाई,जिसकी निचली विक (wick) लंबी थी। यह निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। डाउनट्रेंड के दौरान डेली चार्ट पर यह बनावट’डोजि'(doji) जैसे कैंडलस्टिक पैटर्न जैसी दिख रही थी। ऐसी बनावट ट्रेंड में संभावित बदलाव का संकेत दे सकती है,लेकिन इसके लिए अगले सेशन में पुष्टि की जरूरत होती है। दिन के निचले स्तर से जबरदस्त रिकवरी के बावजूद इंडेक्स 0.39 प्रतिशत गिरा। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है और इसके शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज नीचे की ओर जा रहे हैं। RSI गिरकर 29.04 पर आ गया है,जबकि MACD सिग्नल लाइन के नीचे अपने डाउनट्रेंड में बना हुआ है और रेड हिस्टोग्राम बार लगातार चौथे सेशन में बढ़ रहा है। ये सभी इंडिकेटर लगातार बने दबाव का संकेत दे रहे हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला इंडिया VIX पिछले दिन की तेज़ी के बाद इंट्राडे में 14.77 के ऊंचे स्तर तक पहुंचने के बाद 1.65 प्रतिशत गिरकर 13.41 पर आ गया। हालांकि,यह ऊंचे स्तर पर बना रहा,जिससे तेजड़ियों के बीच कुछ सावधानी का संकेत मिला। 12 के स्तर से नीचे आने पर ‘बुल्स’को ज़्यादा राहत मिल सकती है,जबकि 14 के स्तर से ऊपर जाने पर मार्केट में बेचैनी बढ़ सकती है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 29 सितंबर को बढ़कर 0.91 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.71 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: SAIL

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 30 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty छह महीनों के निचले स्तर पर, एनालिस्ट्स से जानिए आगे बाजार चढ़ेगा या गिरेगा

निफ्टी 50 में 29 सितंबर को भी गिरावट देखने को मिली। इससे सूचकांक गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। 28 सितंबर को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। ब्रेंट क्रूड में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का हाई लेवल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। सवाल है कि अगले साल की शुरुआत में निफ्टी का लेवल क्या होगा?

एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बाजार पर कई वजहों से दबाव दिख रहा है। इनमें क्रूड में उछाल, रुपये में कमजोरी और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली शामिल है। BofA ने पिछले महीने भारतीय बाजारों के लिए 8 बड़े रिस्क बताए थे। इनमें क्रूड की ऊंची कीमतें, मानसून की कमजोर बारिश, रुपये में कमजोरी और आईपीओ की ज्यादा संख्या शामिल थी।

जेफरीज के क्रिस वुड ने ऑयल की ऊंची कीमतों को शॉर्ट टर्म के लिए सबसे बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि निफ्टी में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी कहना है कि आरबीआई के इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने पर हैरानी होगी। आरबीआई 7 अक्तूबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। अनुमान है कि वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि कर सकता है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा था कि भारतीय बाजार में शॉर्ट टर्म में कमजोरी दिख सकती है, क्योंकि एआई कंपनियों वाले देशों और भारतीय बाजार के प्रदर्शन के बीच गैप काफी बढ़ गया है। हालांकि, उसने कहा था कि चूंकि भारतीय बाजार कई साल के निचले स्तर पर हैं, जिसका मतलब है कि बाजार पर खराब खबरों का असर पड़ चुका है।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि आगे कई तिमाहियों तक अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। एचएसबीसी की भी भारत को लेकर सोच पॉजिटिव है। BofA का मानना है कि अक्तूबर तक भारतीय बाजारों के लिए रिस्क चरम पर पहुंच जाएगा। उसके बाद नवंबर से बाजार में रिकवरी शुरू होगी। जेपी मॉर्गन ने अक्तूबर के अंत तक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसका मानना है कि साल के अंत से बाजार में तेजी शुरू हो सकती है।

एंबिट एसेट मैनेजमेंट में फंड मैनेजर त्रिलोक अग्रवाल ने कहा कि निफ्टी में एक साल की फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 19 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसका मतलब है कि हालिया करेक्शन के बाद भी भारतीय बाजार की वैल्यूएशन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हाई बॉन्ड यील्ड को देखते हुए वैल्यूएशन में यह फर्क मायने रखता है।

अग्रवाल का हालांकि मानना है कि भारतीय बाजार में और गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने इसकी वजह अर्निंग्स आउटलुक को बताया। उनका मानना है कि FY27 में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ 17-20 फीसदी रह सकती है। अर्निंग्स ग्रोथ वैल्यूएशन में आई कमी से भारतीय बाजारों को सपोर्ट मिलेगा।

Stock in Focus: सोलर कंपनी को ₹2025 करोड़ का ऑर्डर, राजस्थान में बनाएगी 500 MW का प्रोजेक्ट

Stock in Focus: रिन्यूएबल पावर कंपनी KPI Green Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को NACOF Oorja Private Ltd से करीब ₹2,025 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स और GST शामिल हैं। कंपनी राजस्थान में 500 MW/550 MWp का सोलर प्रोजेक्ट तैयार करेगी।

राजस्थान में बनेगा 500 MW का सोलर प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट राजस्थान के बीकानेर जिले में बनेगा। इसे NACOF की सब्सिडियरी NOPL विकसित कर रही है। यह 5,000 MW के बड़े Solar Power Park का हिस्सा है।

KPI Green Energy को इस प्रोजेक्ट का पूरा EPC काम करना है। इसमें डिजाइन से लेकर प्रोजेक्ट की कमीशनिंग तक की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

क्या-क्या काम करेगी कंपनी?

KPI Green Energy सोलर प्लांट का डिजाइन और इंजीनियरिंग करेगी। इसके बाद जरूरी उपकरणों की खरीद और सप्लाई भी कंपनी करेगी। इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम भी इसी के जिम्मे होगा।

प्रोजेक्ट में PV मॉड्यूल, माउंटिंग स्ट्रक्चर, इनवर्टर और ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। इसके अलावा हाई-टेंशन स्विचगियर और दूसरे इलेक्ट्रिकल सिस्टम भी शामिल हैं।

12 महीने में पूरा करना होगा काम

कंपनी को साइट मिलने के बाद 12 महीने में EPC का काम पूरा करना होगा। इसमें प्रोजेक्ट की कमीशनिंग भी शामिल है।

इसके अलावा 33 kV ट्रांसमिशन लाइन और एवैक्यूएशन बे भी बनाया जाएगा। प्लांट में SCADA और मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे।

पहले भी मिला था 500 MW का काम

KPI Green Energy ने बताया कि इस साल की शुरुआत में उसे बीकानेर में NTPC Renewable Energy से 500 MW/550 MWp का Solar BOS पैकेज मिला था। नया ऑर्डर उसी क्षेत्र में कंपनी के काम को और बढ़ाता है।

कंपनी के मुताबिक, नए ऑर्डर से उसकी EPC ऑर्डर बुक बढ़ेगी। इससे आने वाले एक साल के लिए रेवेन्यू की विजिबिलिटी भी बेहतर होगी।

KPI Green के शेयर का हाल

KPI Green Energy का शेयर मंगलवार को 4.24% की बढ़त के साथ ₹372.50 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 22.29% उछला है। कंपनी का मार्केट कैप 7.31 हजार करोड़ रुपये है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 30 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 30 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook:भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 29 सितंबर को लगातार दूसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। आज निफ्टी 22,700 के आसपास रहा। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 242.65 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर और निफ्टी 64.05 अंक या 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ। लगभग 1871 शेयरों में बढ़त हुई, 2321 शेयरों में गिरावट आई और 164 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। टाइटन कंपनी, एटरनल, HCL टेक्नोलॉजीज, HDFC लाइफ और इंफोसिस निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। जबकि डॉ. रेड्डीज लैब्स, NTPC, टाटा स्टील, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में बढ़त देखी गई।

सेक्टरों की बात करें तो मीडिया, मेटल और फार्मा को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। ऑटो, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू इक्विटी मार्केट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, US ट्रेजरी यील्ड का दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब बने रहना और FII की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव है। IPO के ज़रिए रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाने से भी मार्केट में लिक्विडिटी कम हो रही है। साल के आखिर में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना और ग्लोबल स्तर पर सख्त मौद्रिक नीति के माहौल के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कम बना हुआ है।

हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव निकट भविष्य में मार्केट के सेंटीमेंट को प्रभावित करते रहेंगे,लेकिन अब मार्केट का फोकस धीरे-धीरे Q2 की अर्निंग्स पर जा रहा है, जिसके लिए उम्मीदें Q1 की तुलना में कम हैं। अगर US ईरान संघर्ष में बड़ी कमी आती है, तो जोखिम लेने की इच्छा बढ़ने के कारण मार्केट में जबरदस्त रिलीफ रैली आ सकती है। तब तक,निवेशकों के चुनिंदा शेयरों पर फोकस करने की संभावना है। ऐसे में निवेशक ब्रॉडर मार्केट एक्सपोज़र के बजाय फंडामेंटल्स और कमाई की स्पष्टता को प्राथमिकता देंगे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी जून 2026 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर से भी नीचे आ गया है,जिससे एक बड़ी ‘बेयरिश मारुबोज़ू कैंडल’बनी है और गिरावट लगातार आठवें हफ़्ते भी जारी है। मोमेंटम इंडिकेटर्स के’ओवरसोल्ड ज़ोन’में जाने के कारण निकट भविष्य में 23020 के स्तर तक थोड़ी रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि,जब तक 23150 का स्तर फिर से हासिल नहीं हो जाता,तब तक बड़ा ट्रेंड कमज़ोर ही रहेगा। हालांकि निफ्टी के 22600 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है, लेकिन अगर ऐसा होता है,तो गिरावट और तेज़ हो सकती है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि गिरावट जारी रहने के कारण इंडेक्स अपने 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज तक गिर गया। कोविड के समय आई गिरावट के बाद यह पहली बार है जब निफ्टी 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज तक गिरा है,जो अभी 22,600 पर है।

अगर यह इस लेवल से नीचे जाता है तो बाज़ार में और तेज़ी से गिरावट आ सकती है। हालांकि,अगर निफ्टी 22,600 से ऊपर बना रहता है तो ऊपर की ओर रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। इसलिए,22600 निफ्टी के लिए एक अहम सपोर्ट लेवल बना रहेगा। ऊपर की ओर सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 22,800 पर है।

PL कैपिटल में चीफ बिज़नेस ऑफिसर एडवाइजरी एंड डीलिंग, विक्रम कसाट का कहना है कि कल हुई बिकवाली का असर आज भी बाजार पर दिखा जिससे बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,कमजोर रुपया और लगातार विदेशी निवेश की निकासी के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कमजोर बना हुआ है।

ब्रेंट क्रूड का भाव $106 प्रति बैरल के आसपास होना खास तौर पर अहम है क्योंकि इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। वहीं,डॉलर के मुकाबले रुपये का ₹96 के स्तर से नीचे जाना मैक्रो रिस्क को और बढ़ाता है।

यह कमजोरी व्यापक है। फाइनेंशियल, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव है। इससे पता चलता है कि निवेशक सिर्फ अलग-अलग सेक्टर के बीच निवेश नहीं बदल रहे हैं,बल्कि जोखिम से बच रहे हैं।

आगे चलकर,बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों,जियोपॉलिटिकल घटनाओं और FII निवेश के प्रवाह पर निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को आक्रामक तरीके से निवेश करने के बजाय कमाई की स्पष्टता,मजबूत बैलेंस शीट और धीरे-धीरे निवेश करने(staggered accumulation)को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

Market Insight : निफ्टी में अब 52-वीक लो भी मुमकिन, 22180-22300 के स्तर टेस्ट होने की संभावना ज्यादा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।