मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। देश की करीब 96% आबादी मुस्लिम है, लेकिन सरकार ने सरकारी स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। इसके बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोक दिया गया। फैसले के विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सरकार ने ड्रेस कोड में क्या बदलाव किया 96% आबादी मुस्लिम, फिर भी धर्मनिरपेक्ष देश अजरबैजान की करीब 96% आबादी खुद को मुस्लिम मानती है। इनमें ज्यादातर शिया मुस्लिम हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम भी बड़ी संख्या में हैं। इसके बावजूद अजरबैजान का संविधान देश को धर्मनिरपेक्ष बताता है। इसका मतलब है कि सरकार किसी एक धर्म के आधार पर काम नहीं करती। संविधान लोगों को अपने धर्म को मानने की आजादी भी देता है। यही वजह है कि स्कूलों में हिजाब को लेकर विवाद बढ़ गया है। सरकार ड्रेस कोड को सभी छात्रों पर समान रूप से लागू करना चाहती है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना किसी की निजी पसंद और धार्मिक आस्था का मामला है। छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया नए नियमों के खिलाफ अजरबैजान में विरोध शुरू हो गया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कम से कम दो स्कूलों में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें स्कूल में प्रवेश से रोके जाने पर छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती और रोती दिखाई दे रही हैं। शिक्षिका जहरा हसानोवा ने अल जजीरा को बताया कि उन्हें स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना निजी फैसला है और इसे पहनना या उतारना व्यक्ति की अपनी पसंद होनी चाहिए। जेल में बंद पत्रकार ने विरोध में भूख हड़ताल शुरू की अजरबैजान की जेल में बंद पत्रकार पोलाद असलानोव ने भी नए नियमों के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की है। उन्हें 2020 में देशद्रोह के मामले में दोषी ठहराया गया था और वह 113 साल की सजा काट रहे हैं। उनकी पत्नी गुलमिरा असलानोवा के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए गए संदेश में असलानोव ने कहा कि वह जेल में रहते हुए भी लोगों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। देश में इंटरनेट बंद किए जाने की खबरें भी सामने आईं, लेकिन इंटरनेट पर नजर रखने वाले संगठनों ने इनकी पुष्टि नहीं की है। फैसले के खिलाफ पड़ोसी देश तुर्किये में भी प्रदर्शन अजरबैजान के फैसले का विरोध पड़ोसी देश तुर्किये तक पहुंच गया है। पिछले हफ्ते इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की। तुर्किये में कुछ लोगों ने इसकी तुलना 1997 के उस दौर से की है, जब वहां हिजाब पहनने वाली महिलाओं को विश्वविद्यालयों में जाने से रोका गया था। उस समय सरकारी नौकरियों में काम करने वाली कुछ महिलाओं को भी हिजाब के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी थी। अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने अपनी पार्टी की बैठक में कहा कि किसी को भी उनके देश की जीवनशैली में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर तुर्किये का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को वहां हो रहे प्रदर्शनों से जोड़कर देखा गया। —————– ये खबर भी पढ़ें…. सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा:अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका के हित में है। ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि EU ने रूस को ऊर्जा के लिए 250 अरब डॉलर दिए, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस खबर पर बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी लोगों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। रूस अमेरिका को लाखों टन डीजल भेजेगा ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई। ट्रम्प के मुताबिक, रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ समय बाद 30 लाख टन डीजल और भेजा जा सकता है। ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस समझौते के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे बड़ा सौदा बताते हुए कहा कि अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल मिलेगा। पुतिन ने भी कहा कि रूस अमेरिका और दुनिया के दूसरे बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। EU ने 826 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए ट्रम्प के रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करने के बीच यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, नए प्रतिबंधों में 1,569 लोगों और संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करने वाले 743 लोग शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस के सैन्य उद्योग को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, इन कंपनियों का सालाना कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। जेलेंस्की बोले- रूस को युद्ध के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को EU के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया, लेकिन रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि ऊर्जा बेचकर रूस की कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम की घोषणा के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन की 6 ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प ने रविवार को रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर की जानकारी दी ट्रम्प ने रविवार को बताया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। ————————-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका के हित में है। ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि EU ने रूस को ऊर्जा के लिए 250 अरब डॉलर दिए, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस खबर पर बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी लोगों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। रूस अमेरिका को लाखों टन डीजल भेजेगा ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई। ट्रम्प के मुताबिक, रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ समय बाद 30 लाख टन डीजल और भेजा जा सकता है। ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस समझौते के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे बड़ा सौदा बताते हुए कहा कि अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल मिलेगा। पुतिन ने भी कहा कि रूस अमेरिका और दुनिया के दूसरे बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। EU ने 826 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए ट्रम्प के रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करने के बीच यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, नए प्रतिबंधों में 1,569 लोगों और संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करने वाले 743 लोग शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस के सैन्य उद्योग को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, इन कंपनियों का सालाना कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। जेलेंस्की बोले- रूस को युद्ध के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को EU के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया, लेकिन रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि ऊर्जा बेचकर रूस की कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम की घोषणा के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन की 6 ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प ने रविवार को रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर की जानकारी दी ट्रम्प ने रविवार को बताया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। ————————-
Stocks to Watch: मंगलवार, 13 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। इनसे तिमाही नतीजे, नए ऑर्डर और बड़े कारोबारी समझौतों तक कई अहम अपडेट सामने आए हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 11 शेयरों पर रहने वाली है।
RBL Bank
प्राइवेट सेक्टर के बैंक RBL Bank का सितंबर तिमाही में मुनाफा बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 179 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। नेट इंटरेस्ट इनकम 37.4% बढ़कर 2,131 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, ग्रॉस NPA पिछली तिमाही के 1.30% से घटकर 1.02% पर आ गया।
HCL Tech
आईटी कंपनी HCL Tech ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 2.5% से 4% रखा है। सितंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा पिछली तिमाही के 4,624 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 3% बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBIT मार्जिन 18.2% दर्ज किया गया।
Karur Vysya Bank
प्राइवेट बैंक Karur Vysya Bank ने Zurich Kotak General Insurance के साथ समझौता किया है। इसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को जनरल इंश्योरेंस प्रोडक्ट उपलब्ध कराएगा। इस साझेदारी का मकसद ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से बीमा सेवाएं देना है।
ICICI Prudential AMC
म्यूचुअल फंड कंपनी ICICI Prudential AMC का सितंबर तिमाही में मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 7.8% घटकर 888.9 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, इस दौरान रेवेन्यू 7% बढ़कर 1,676.7 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के बोर्ड ने हर शेयर पर 30 रुपये के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।
Can Fin Homes
हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Can Fin Homes का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 9.2% बढ़कर 274.61 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की ऑपरेशंस से नेट इनकम 7.8% बढ़कर 1,131.18 करोड़ रुपये रही। वहीं, प्रति शेयर कमाई (EPS) पिछले साल के 18.88 रुपये से बढ़कर 20.62 रुपये हो गई।
Azad Engineering
प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी Azad Engineering को सरकारी कंपनी BHEL से 52.68 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसके तहत कंपनी भारी गैस टर्बाइन के लिए जरूरी ब्लेड की सप्लाई करेगी। यह कॉन्ट्रैक्ट 9 अक्टूबर 2028 तक चलेगा।
IRCON International
सरकारी रेल कंपनी IRCON International को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसके तहत सोन नगर-आंडाल प्रोजेक्ट की तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए ट्रैक बिछाने और जोड़ने का काम करना है। कंपनी रेलवे ट्रैक की गिट्टी और दूसरी जरूरी सामग्री की सप्लाई भी करेगी।
Indian Hotels Company
होटल कंपनी Indian Hotels Company Ltd (IHCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 47 नए होटल साइन किए और 20 होटल शुरू किए। इसके साथ ही कंपनी के पोर्टफोलियो में कुल 670 होटल हो गए हैं।
Vikran Engineering
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Vikran Engineering की सब्सिडियरी NOPL Solar Projects ने IREDA के साथ 2,941.19 करोड़ रुपये का लोन एग्रीमेंट किया है। इस रकम का इस्तेमाल महाराष्ट्र में सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 152 जगहों पर 969 MWac क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इसकी कुल अनुमानित लागत 4,201.70 करोड़ रुपये है।
Bank of India
सरकारी बैंक Bank of India ने Future Enterprises के 575.40 करोड़ रुपये के बकाया खाते को फ्रॉड घोषित कर दिया है। बैंक ने इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दे दी है। बैंक के मुताबिक, यह खाता पहले से ही NPA था। बैंक ने बकाया रकम के बराबर 575.40 करोड़ रुपये का प्रोविजन भी किया है।
Nazara Technologies
गेमिंग कंपनी Nazara Technologies ने मिथुन पदम सचेटी को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और होल-टाइम डायरेक्टर बनाया है। यह नियुक्ति 12 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है, लेकिन इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी है। कंपनी के CFO राकेश शाह ने भी इस्तीफा दे दिया है, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा।
Q2 नतीजे घोषित करने वाली कंपनियां
कई कंपनियां 13 अक्टूबर को दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Anand Rathi Share and Stock Brokers, Hero Motors, ICICI Prudential Life Insurance Company और Tata Elxsi शामिल हैं। इसके अलावा, GTPL Hathway भी अपने नतीजे घोषित करेगी।
Q2 Results: हर शेयर पर ₹30 डिविडेंड देगी म्यूचुअल फंड कंपनी, दूसरी तिमाही में ₹889 करोड़ का मुनाफा
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Stock in Focus: सरकारी रेल कंपनी IRCON International को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार, 12 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। यह ऑर्डर रेलवे की तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण से जुड़ा है।
IRCON को इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे ट्रैक बिछाने और उन्हें जोड़ने का काम करना है। इसके अलावा, कंपनी ट्रैक के नीचे बिछाई जाने वाली गिट्टी और रेलवे से जुड़ी दूसरी जरूरी सामग्री की सप्लाई भी करेगी। यह काम 32.5 टन एक्सल लोड के हिसाब से होगा।
इन रूट पर होगा काम
यह प्रोजेक्ट ईस्ट सेंट्रल रेलवे के दो डिवीजन में फैला है। इसमें धनबाद डिवीजन का गोमो-कोडरमा सेक्शन और दीन दयाल उपाध्याय डिवीजन का गया-सोन नगर सेक्शन शामिल है।
इसके अलावा, गया में डिप्टी चीफ इंजीनियर (कंस्ट्रक्शन) के तहत रेलवे ट्रैक से जुड़ी अलग-अलग सामग्रियों की सप्लाई भी करनी होगी।
365 दिन में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट
कंपनी के मुताबिक, यह ऑर्डर एक घरेलू इकाई से मिला है। इसे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के तहत दिया गया है। IRCON को यह पूरा काम 365 दिन में पूरा करना होगा।
IRCON के शेयर का हाल
सोमवार को IRCON International का शेयर 0.13% की मामूली बढ़त के साथ 104.70 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 22.54% टूटा है। वहीं, 1 साल में इसने 39.80% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 9.85 हजार करोड़ रुपये है।
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IRCON का बिजनेस
IRCON International एक सरकारी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। यह रेलवे लाइन बिछाने, नई रेल लाइनों के निर्माण, रेलवे ट्रैक और पुल बनाने जैसे प्रोजेक्ट पर काम करती है। कंपनी रेलवे से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सामग्री की सप्लाई भी करती है। इसके अलावा, IRCON देश और विदेश में रेलवे, हाईवे और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण का काम करती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। 2015 में शुरू हुई लड़ाई को 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से पर काबिज हैं। वे सऊदी अरब के अंदर तक ड्रोन और मिसाइलों से हमले करने की क्षमता रखते हैं। हालात अब ऐसे हैं कि सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा के लिए लगातार पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, हूती पीछे हटने के बजाय उस पर दबाव बढ़ा रहे हैं। तेल और गैस से होने वाली कमाई में हिस्सा मांगने का दावा भी इसी लड़ाई से जुड़ा है। सवाल यह है कि आखिर सऊदी अरब इतनी ताकत होने के बाद भी हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा? 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी हथियार हूतियों के खिलाफ बेअसर क्यों? सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और दुश्मन के हमलों को रोकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम हैं। अमेरिका उसे हथियारों के साथ खुफिया जानकारी और तकनीकी मदद भी देता रहा है। इसके बावजूद हूतियों के खिलाफ निर्णायक जीत नहीं मिल सकी। इसकी एक बड़ी वजह हमले और बचाव पर होने वाला खर्च है। हूती सस्ते ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर, इन हमलों को रोकने के लिए सऊदी अरब को कई बार महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ती हैं। यानी हूतियों को हमला करने में जितना पैसा खर्च होता है, उससे कहीं ज्यादा रकम सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा में लगानी पड़ सकती है। इससे लंबे समय तक लड़ाई जारी रखना महंगा हो जाता है। सऊदी के लिए यमन का पहाड़ी इलाका भी बड़ी चुनौती यमन का बड़ा हिस्सा पहाड़ी है। ऐसे इलाकों में विद्रोहियों के ठिकानों का पता लगाना और उन्हें पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होता। हवाई हमलों से किसी ठिकाने को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन इससे पूरे इलाके पर कब्जा नहीं मिलता। हूती लंबे समय से यमन में सक्रिय हैं और वहां उनकी मजबूत पकड़ है। उन्हें पूरी तरह हटाने के लिए सऊदी अरब को बड़ा जमीनी अभियान चलाना पड़ सकता है। इसमें सैनिकों के मारे जाने और युद्ध लंबे समय तक चलने का खतरा है। ईरान की मदद से हूतियों की ताकत बढ़ी सऊदी अरब और उसके सहयोगी ईरान पर हूतियों को हथियार और तकनीकी मदद देने का आरोप लगाते रहे हैं। ईरान और हूतियों के संबंध इस संघर्ष को क्षेत्रीय राजनीति से भी जोड़ते हैं। इस वजह से सऊदी अरब के लिए लड़ाई सिर्फ यमन के विद्रोहियों तक सीमित नहीं रहती। हूतियों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ने पर ईरान के साथ तनाव भी बढ़ सकता है। ऐसे में सैन्य कार्रवाई का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ने का खतरा रहता है। तेल-गैस की कमाई में हिस्सा क्यों मांग रहे हूती? यमन में तेल और गैस से होने वाली कमाई लंबे समय से विवाद का मुद्दा रही है। हूती चाहते हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के वेतन और दूसरी जरूरतों को पूरा करने में हो। वे तेल-गैस से मिलने वाले राजस्व में हिस्सेदारी की मांग भी करते रहे हैं। तेल की कमाई पर नियंत्रण का मतलब सिर्फ पैसा नहीं है। इससे यह भी तय होता है कि यमन में किसका राजनीतिक और आर्थिक दबदबा रहेगा। इसलिए तेल-गैस के राजस्व का बंटवारा किसी भी समझौते में बड़ा मुद्दा बन सकता है। हूतियों के लिए यह मांग सऊदी अरब और यमन की सरकार पर दबाव बनाने का एक तरीका भी है।
एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता हाल ही में सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल-गैस ठिकानों पर हूतियों के हमले हुए हैं। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शामिल है। हमलों के कारण उड़ानों और तेल कारोबार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। सऊदी अरब ने कुछ मिसाइलों को हवा में ही रोकने की जानकारी दी है। सऊदी अरब के सामने हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने, यमन में जमीनी अभियान बढ़ाने या बातचीत के जरिए समझौते की कोशिश करने जैसे विकल्प हैं। लेकिन हर रास्ते के साथ जोखिम जुड़ा है।
RBL Bank Q2 Results: प्राइवेट सेक्टर के RBL Bank ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का मुनाफा बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 179 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में करीब 169% की बढ़ोतरी हुई है। बैंक की कमाई बढ़ी है। साथ ही, खराब कर्ज के आंकड़ों में भी सुधार हुआ है।
NII में 37.4% की बढ़ोतरी
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी तेजी से बढ़ी है। सितंबर तिमाही में यह सालाना आधार पर 37.4% बढ़कर 2,131 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,551 करोड़ रुपये थी।
खराब कर्ज घटा, लेकिन प्रोविजन बढ़ा
RBL Bank के बैड लोन यानी खराब कर्ज में कमी आई है। सितंबर तिमाही में ग्रॉस NPA घटकर 1.02% रह गया। जून तिमाही में यह 1.3% था। इसी तरह, नेट NPA भी 0.37% से घटकर 0.29% पर आ गया। यानी बैंक के फंसे हुए कर्ज का स्तर कम हुआ है।
हालांकि, बैंक को खराब कर्ज के लिए ज्यादा रकम अलग रखनी पड़ी। सितंबर तिमाही में प्रोविजन बढ़कर 766.5 करोड़ रुपये हो गया। जून तिमाही में यह 599.2 करोड़ रुपये था। एक साल पहले सितंबर तिमाही में यह रकम 499.7 करोड़ रुपये थी।
लोन देने में बढ़ोतरी
बैंक का नेट एडवांस यानी दिया गया कर्ज सालाना आधार पर 42% बढ़कर 1,42,314 करोड़ रुपये हो गया। इसमें रिटेल कर्ज 32% बढ़कर 79,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं, कंपनियों को दिए जाने वाले होलसेल कर्ज में 56% की बढ़ोतरी हुई। यह 62,849 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
रिटेल लोन में सिक्योर्ड लोन की बढ़ोतरी ज्यादा रही। इसमें 52% का इजाफा हुआ। वहीं, अनसिक्योर्ड लोन सिर्फ 6% बढ़ा। बैंक में जमा रकम भी बढ़ी है।
डिपॉजिट भी बढ़ा
सितंबर तिमाही में RBL Bank का कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 34% बढ़कर 1,56,272 करोड़ रुपये हो गया। करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट यानी CASA रेशियो 27.2% रहा।
बैंक में 3 करोड़ रुपये से कम के डिपॉजिट को ग्रैन्युलर डिपॉजिट कहा जाता है। सितंबर तिमाही में इस तरह की जमा रकम 16% बढ़कर 68,877 करोड़ रुपये हो गई। यह बैंक के कुल डिपॉजिट का 44% है।
कैपिटल रेशियो में आई कमी
30 सितंबर 2026 तक बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 30.1% था। जून के आखिर में यह 33.3% था। वहीं, कॉमन इक्विटी टियर-1 यानी CET1 रेशियो भी घटा है। जून तिमाही के 32.2% के मुकाबले सितंबर तिमाही में यह 29% रहा।
बैंक का औसत लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 148% रहा। यह वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही का आंकड़ा है।
CEO ने क्या कहा?
RBL Bank के MD और CEO आर सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि सितंबर तिमाही में बैंक का प्रदर्शन मजबूत रहा। कर्ज देने और जमा जुटाने, दोनों मोर्चों पर अच्छी बढ़ोतरी हुई।
उन्होंने बताया कि बैंक ने विदेशी मुद्रा में FCNR डिपॉजिट भी जुटाए हैं। इससे बैंक की फंडिंग मजबूत हुई है। साथ ही, भविष्य में कारोबार बढ़ाने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिली है।
बैंक का नेटवर्क बढ़ा
30 सितंबर तक RBL Bank के कुल 1,954 टचपॉइंट थे। इनमें 628 बैंक शाखाएं और 1,326 बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाएं शामिल थीं।
इन बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाओं में 248 बैंकिंग आउटलेट थे। वहीं, बैंक की सब्सिडियरी RBL Finserve के पास 1,076 बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाएं थीं।
RBL Bank के शेयरों का हाल
बैंक ने बाजार बंद होने के बाद सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। 12 अक्टूबर को RBL Bank का शेयर NSE पर 0.07% गिरकर 417.70 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 32.14% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 44.03% का रिटर्न दिया है। बैंक का मार्केट कैप 64.84 हजार करोड़ रुपये है।
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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
RRB NTPC Graduate Level Recruitment: रलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने अपने भर्ती पैटर्न में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत, स्टेशन मास्टर के पदों पर अलग से भर्ती की प्रक्रिया चलाई जाएगी। बोर्ड ने हाल ही में एनटीपीसी ग्रेजुएट लेवल पोस्ट के लिए 3548 पदों पर भर्ती निकली है। इस बार नोटिफिकेशन से स्टेशन मास्टर के पदों को अलग कर दिया गया है। रेलवे की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक अब स्टेशन मास्टर के लिए अलग से नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके साथ ही इस पद के लिए आयोजित होने वाली एग्जाम में भी बदलाव किया गया है।
स्टेशन मास्टर भर्ती के लिए होगी एक ही परीक्षा
आरआरबी स्टेशन मास्टर भर्ती के लिए एक ही ऑनलाइन लिखित परीक्षा आयोजित होगी। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, पद संख्या की तुलना में 8 गुना उम्मीदवारों को कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT) के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद कंप्यूटर आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT), डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट का आयोजन किया जाएगा। यह फैसला रेलवे की स्टेशन मास्टर भर्ती को पहले से सरल बनाने के लिए लिया गया है।
क्या है सीबीएटी ?
सीबीएटी यानी कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट, उम्मीदवारों की उन क्षमताओं का आकलन करने के लिए आयोजित किया जाता है, जो स्टेशन मास्टर जैसे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पदों पर काम करते हैं। इसमें ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, तेजी से और सही निर्णय लेने की योग्यता, निर्देशों को समझने और उनका पालन करने की क्षमता और एक साथ कई जानकारियों पर ध्यान देने की योग्यता को परखा जाता है।
आरआरबी एनटीपीसी ग्रेजुएट्स भर्ती 2026 में बदलाव
एनटीपीसी ग्रेजुएट्स लेवल भर्ती 2026 के नोटिफिकेशन के अनुसार, जिन पदों पर भर्ती के लिए पहले कंप्यूटर आधारित टाइपिंग स्किल टेस्ट (CBTST) हुआ करता था, वह अब नहीं होगा। हालांकि कैंडिडेट्स को कंप्यूटर और टाइपिंग की जानकारी होनी चाहिए।
वहीं, एनटीपीसी ग्रेजुएट्स लेवल भर्ती 2026 परीक्षा पैटर्न के तहत 3 चरणों में परीक्षा होगी। पहले चरण में कंप्यूटर आधारित स्क्रीन टेस्ट (CBT-1) होगा। दूसरे फेज में CBT-2 होगा। तीसरे चरण में दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल टेस्ट होगा।
आरआरबी एनटीपीसी 2026 भर्ती नया नोटिफिकेशन जारी
आरआरबी ने एनटीपीसी ग्रेजुएट लेवल भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन परीक्षा में हुए टाइपिंग टेस्ट के बदलावों के साथ जारी किया है। इसके अनुसार, गुड्स ट्रेन मैनेजर और चीफ कमर्शियल कम टिकट सुपरवाइजर भर्ती के लिए टाइपिंग टेस्ट नहीं होगी। रेलवे भर्ती बोर्ड यानी RRB ने NTPC ग्रेजुएट लेवल भर्ती 2026 के शॉर्ट नोटिफिकेशन में पदों की संख्या 3477 थी। इसे डिटेल नोटिफिकेशन में बढ़ाकर 3548 किया गया है।
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने करेंसी में सट्टेबाजी पर लगाम लगाई है। वहीं, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देने का फैसला भी किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन कदमों से रुपये की गिरावट रुक जाएगी?
साल 2026 की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। शुक्रवार को यह गिरकर 96.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसके बाद RBI ने तुरंत कदम उठाए।
आखिर RBI ने क्या किया है? इन फैसलों से रुपये को कैसे मदद मिलेगी? और क्या रुपया 97 प्रति डॉलर के पार जाने से बच सकता है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
RBI ने क्या 5 कदम उठाए हैं?
RBI ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए पांच बड़े फैसले लिए हैं।
- पहला, 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए एक खास विंडो बनाई गई है।
- दूसरा, करेंसी में होने वाले कुछ सौदों के नियम सख्त कर दिए गए हैं। जिन सौदों के पीछे विदेशी मुद्रा की वास्तविक जरूरत नहीं है, उनकी सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है।
- तीसरा, बैंकों को कुछ बड़े करेंसी सौदों के लिए RBI के पास अतिरिक्त पैसा रखना होगा। इस व्यवस्था को फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) कहा जाता है।
- चौथा, 16 अक्टूबर से बैंकों को हर दिन अपने तय कैश रिजर्व रेशियो (CRR) का कम से कम 99 फीसदी बनाए रखना होगा। अभी तक यह सीमा 90 फीसदी थी।
- पांचवां, RBI ने 13 अक्टूबर को 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है। इससे बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
इन फैसलों के साथ RBI की कोशिश है कि बाजार में डॉलर की मांग घटे। साथ ही, रुपये के कमजोर होने पर दांव लगाने वालों के लिए ऐसा करना महंगा हो जाए।
FCNR स्कीम से कितनी राहत मिली थी?
इससे पहले RBI ने जून में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से डॉलर जुटाने के लिए एक खास स्कीम शुरू की थी। इसके तहत करीब 143 अरब डॉलर जुटाए गए। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 100 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं चली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर दबाव बना रहा। नोमुरा का अनुमान है कि सितंबर की शुरुआत में यह स्कीम बंद होने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार करीब 43 अरब डॉलर घट गया।
एमके ग्लोबल का कहना है कि इस स्कीम से बाजार में रुपये की उपलब्धता बढ़ गई थी। इससे ट्रेडर्स के लिए रुपये में गिरावट पर दांव लगाना सस्ता हो गया। इसके अलावा, FCNR डिपॉजिट से मिला पैसा हमेशा के लिए बैंकों के पास नहीं रहेगा। उन्हें आगे चलकर यह रकम ब्याज के साथ लौटानी होगी।

तेल कंपनियों को सीधे डॉलर मिलेंगे
भारत की सरकारी तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर चाहिए। अभी वे बाजार से डॉलर खरीदती हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। अब ये कंपनियां तय बैंकों के जरिए सीधे RBI से डॉलर ले सकेंगी। इससे उन्हें खुले बाजार से कम डॉलर खरीदने पड़ेंगे।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हर महीने 9 अरब से 11 अरब डॉलर की मांग खुले बाजार से हट सकती है। इससे रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।
करेंसी में सट्टेबाजी करना होगा मुश्किल
RBI ने कुछ ऐसे सौदों की सीमा घटा दी है, जिनके पीछे विदेशी मुद्रा की वास्तविक जरूरत नहीं होती। पहले ऐसे सौदों की सीमा 10 करोड़ डॉलर थी। अब इसे घटाकर 50 लाख डॉलर कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि बड़े सौदे करने वालों को अब यह बताना होगा कि उन्हें वास्तव में विदेशी मुद्रा की जरूरत क्यों है। इससे रुपये की गिरावट पर बड़े दांव लगाना मुश्किल हो सकता है।
डॉलर से जुड़े सौदे महंगे होंगे
RBI ने बैंकों के लिए एक और नियम बनाया है। अब कुछ बड़े विदेशी मुद्रा सौदों पर बैंकों को 20 फीसदी रकम अतिरिक्त रिजर्व के तौर पर रखनी होगी। यह नियम 20 लाख डॉलर से ज्यादा के तय दायरे वाले सौदों पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी बैंक का ऐसा सौदा 100 करोड़ रुपये का है, तो उसे 20 करोड़ रुपये अलग रखने होंगे।
एमके ग्लोबल का अनुमान है कि इससे करेंसी की हेजिंग करीब 1.3 से 1.5 फीसदी महंगी हो सकती है। हेजिंग का मतलब है कि कंपनियां रुपये और डॉलर की कीमत में होने वाले बदलाव से अपने नुकसान को कम करने की कोशिश करती हैं। एमके के मुताबिक, इस फैसले से बैंकिंग सिस्टम में 45,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये तक की नकदी भी कम हो सकती है।
बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो सकता है
अब बैंकों को हर दिन अपने तय CRR का कम से कम 99 फीसदी बनाए रखना होगा। पहले उन्हें 90 फीसदी रकम रखना जरूरी था। इसका मतलब है कि बैंकों को अपने पैसे का इस्तेमाल करने की आजादी कुछ कम मिलेगी। रुपये उधार लेकर करेंसी में सट्टेबाजी करने वालों के लिए भी लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा, RBI 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचेगा। इससे बाजार में मौजूद अतिरिक्त पैसा वापस खींचने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, RBI डॉलर की मांग घटाना चाहता है। साथ ही, वह रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी को महंगा बनाना चाहता है।

RBI ने अभी ये कदम क्यों उठाए?
RBI के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली है कच्चे तेल की महंगी कीमतें। दूसरी है विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना। भारत अपनी जरूरत का काफी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
दूसरी तरफ, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बेहतर रिटर्न मिलने से निवेशकों का पैसा अमेरिकी बाजारों की ओर जा रहा है। इसका असर भारत में डॉलर की उपलब्धता पर पड़ता है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है और उपलब्धता कम होती है, तो रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।
8 अक्टूबर को भारत और अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड का अंतर घटकर करीब 194 बेसिस पॉइंट रह गया था। यह करीब 22 साल का निचला स्तर था।
क्या रुपये को मजबूती मिलेगी?
RBI के इन फैसलों से बाजार में डॉलर की मांग कम हो सकती है। इससे रुपये में अचानक होने वाली बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है।
इन उपायों के बाद शुरुआती कारोबार में रुपये में करीब 1 फीसदी की तेजी आई। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 95.77 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
हालांकि, सिर्फ एक दिन की तेजी से यह नहीं कहा जा सकता कि रुपये की गिरावट रुक गई है। आगे रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और बाजार में डॉलर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
RBI के फैसलों से उन कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है, जो विदेशों से सामान खरीदती हैं। इनमें मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियां शामिल हैं। ऐसी कंपनियां डॉलर की कीमत में होने वाले बदलाव से बचने के लिए हेजिंग करती हैं।
लेकिन अगर हेजिंग महंगी हो जाती है, तो उन्हें इसके लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। कुछ कंपनियां हेजिंग कम कर सकती हैं। कुछ छोटी अवधि के सौदे कर सकती हैं। इससे फिलहाल फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की मांग घट सकती है।
आगे RBI के सामने क्या चुनौती है?
RBI के कदम रुपये को कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं। लेकिन रुपये की कमजोरी की असली वजहें अभी बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहीं, विदेशी निवेशक पैसा निकालते रहे और भारत को निर्यात से कम डॉलर मिले, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
एमके का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा GDP के 1.6 से 1.7 फीसदी तक पहुंच सकता है। चालू खाता घाटा तब होता है, जब देश के विदेशी लेनदेन में कमाई के मुकाबले खर्च ज्यादा होता है। ऐसे में डॉलर की जरूरत बढ़ सकती है।
क्या RBI रुपये को $95 तक ला पाएगा?
RBI के नए कदम रुपये को कुछ समय के लिए 95 प्रति डॉलर के आसपास संभालने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यह कहना मुश्किल है कि रुपया लंबे समय तक इसी स्तर पर बना रहेगा।
एमके के मुताबिक, RBI की नेट शॉर्ट फॉरेन एक्सचेंज फॉरवर्ड पोजिशन 200 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है। आसान भाषा में कहें तो केंद्रीय बैंक के ऐसे सौदे बड़ी मात्रा में हैं, जिनका निपटारा भविष्य में करना होगा। कुछ सौदों को आगे बढ़ाया जा सकता है या दूसरे सौदों से उनका असर संतुलित किया जा सकता है।
इसलिए सिर्फ करेंसी बाजार पर पाबंदियां लगाने से रुपये को लंबे समय तक संभालना मुश्किल होगा। इसके लिए डॉलर की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनना भी जरूरी है।
आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
अगर रुपये की गिरावट धीमी पड़ती है, तो विदेशों से आने वाले सामान की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे आयातित महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी। कच्चे तेल की कीमतें पहले से ऊंची हैं। ऐसे में रुपया ज्यादा कमजोर होने पर तेल आयात का खर्च और बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों और दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
आखिर में, अर्थव्यवस्था पर इन फैसलों का कितना असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI को ये पाबंदियां कितने समय तक जारी रखनी पड़ती हैं। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं या नहीं और विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है या नहीं, यह भी अहम होगा।
Startup Success Story: दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले लक्ष्य और अंजलि कालिया की कहानी उन लोगों के लिए अनोखी है जो नौकरी करते हुए अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं। इस कपल ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपना खुद का ब्रांड, लव लाइट शुरू किया। यह ब्रांड कई तरह के प्रोडक्ट बनाता है, जिसमें हाथ से बनी खुशबूदार मोमबत्तियां और क्रोशिया से बुने फूल शामिल हैं।
खास बात यह है कि इस बिजनेस से 50 महिलाओं को काम करने का मौका मिला है। अपना खुद का बिजनेस शुरू करना आसान नहीं है। इसके लिए सही आइडिया, कड़ी मेहनत और मार्केट की जरूरतों की समझ की जरूरत होती है। लक्ष्य और अंजलि ने नौकरी के बजाय अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। उनका बिजनेस हाथ से बने प्रोडक्ट पर आधारित है जो सुंदरता के साथ कड़ी मेहनत और हुनर को मिलाते हैं।
क्या है लव लाइट ब्रांड का बिजनेस
लव लाइट हाथ से बनी खुशबूदार मोमबत्तियां और क्रोशिया प्रोडक्ट बनाती है। खुशबूदार मोमबत्तियां खुशबूदार मोम होती हैं। क्रोशिया एक कला है जिसमें धागे का इस्तेमाल करके फूल और दूसरी सजावटी चीजें बनाई जाती हैं। ये हाथ से बने प्रोडक्ट आजकल घर की सजावट और गिफ्ट देने के लिए पॉपुलर हैं। इन प्रोडक्ट की खासियत यह है कि ये मशीन से बने होने के बजाय हाथ से बने होते हैं। इस काम के लिए स्किल और सटीकता की जरूरत होती है। लव लाइट का बिजनेस भी ऐसे ही प्रोडक्ट पर आधारित है।
50 महिलाओं को मिला रोजगार
लक्ष्य और अंजलि के बिजनेस की सबसे खास बात यह है कि इससे 50 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। दोनों ने अपने कारोबार को इस तरह आगे बढ़ाया कि इसमें दूसरी महिलाओं के लिए भी काम करने और कमाई करने का अवसर बना। हैंडमेड प्रोडक्ट्स बनाने के काम में हुनर की अहम भूमिका होती है। क्रोशिया से फूल और दूसरी चीजें तैयार करने के लिए धैर्य और बारीकी से काम करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को इस तरह के काम से जोड़ना उनके हुनर को रोजगार में बदलने का एक तरीका भी है।
क्या-क्या बनाते हैं लक्ष्य और अंजलि
लव लाइट ब्रांड के तहत खुशबूदार मोमबत्तियां यानी सेंटेड कैंडल्स तैयार की जाती हैं। इनका इस्तेमाल घर की सजावट और गिफ्ट देने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, क्रोशिया से बने फूल और दूसरी चीजें भी इस ब्रांड का हिस्सा हैं। हाथ से बने होने के कारण इनकी डिजाइन और कारीगरी इन्हें अलग पहचान देती है।
हैंडमेड प्रोडक्ट्स के बिजनेस में कितना हो सकता है मुनाफा
लक्ष्य और अंजलि के Love Light बिजनेस में कमाई हैंडमेड प्रोडक्ट्स की बिक्री और खर्च पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर, ₹1 लाख की मासिक बिक्री पर 15–25% मुनाफे के हिसाब से ₹15,000–₹25,000 बच सकते हैं। कपल ने बताया कि भले ही हमें 25% का ही मुनाफा हो रहा हो, लेकिन हमें खुशी है कि यह हमारा अपना पैसा है और हमारे पास वापस आ रहा है। हमें किसी का गुलाम बनने या किसी के लिए काम करने की जरूरत नहीं है।
रिपोर्ट- शुभांगी तिवारी

