Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 61% रिटर्न दे सकते हैं, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां चुनिंदा शेयरों पर बुलिश बनी हुई हैं। Jefferies और Macquarie समेत कई फर्मों ने इन स्टॉक्स पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इनमें सबसे ज्यादा अपसाइड Patanjali Foods में दिख रहा है, जहां करीब 61% तक रिटर्न की उम्मीद जताई गई है।

Divi’s Laboratories

ब्रोकरेज Macquarie ने फार्मा कंपनी Divi’s Laboratories पर 10,200 रुपये का टारगेट दिया है। इसमें मौजूदा स्तर से करीब 19% तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि कैपेक्स से कमाई बढ़ने और ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार से ग्रोथ तेज हो सकती है।

Larsen & Toubro

ब्रोकरेज Jefferies ने इंजीनियरिंग कंपनी Larsen & Toubro पर Buy रेटिंग के साथ 5,000 रुपये का टारगेट दिया है। यह करीब 23% का संभावित उछाल दिखाता है। मजबूत ऑर्डर बुक और भारत के कैपेक्स साइकल से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

TVS Motor Company

ब्रोकरेज Jefferies ने ऑटो कंपनी TVS Motor Company पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके लिए 5,425 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 24% रिटर्न दे सकता है। ब्रोकरेज को वॉल्यूम ग्रोथ और कमाई में मजबूत बढ़त की उम्मीद है।

Emmvee Photovoltaic Power

ब्रोकरेज Jefferies ने सोलर कंपनी Emmvee Photovoltaic Power पर Buy रेटिंग कायम रखी है। 440 रुपये का टारगेट मौजूदा स्तर से करीब 31% ऊपर है। मजबूत ऑर्डर बुक, TOPCon टेक्नोलॉजी और विस्तार योजनाओं को इसकी बड़ी ताकत माना गया है।

Patanjali Foods

ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG कंपनी Patanjali Foods पर Buy कॉल देते हुए 560 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 61% की तेजी का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई और पूंजी पर रिटर्न में मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कई वर्षों बाद पहली बार बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ताजा ट्रेडर स्कोरकार्ड रिपोर्ट के मुताबिक मूल समस्या अभी भी बनी हुई है कि अधिकतर रिटेल ट्रेडर्स F&O (Futures & Options) को एक व्यवस्थित ट्रेडिंग प्रक्रिया की बजाय किस्मत आजमाने जैसा मानते हैं। एफएंडओ में कुल नुकसान और ट्रेडर्स की संख्या दोनों कम तो हुई, लेकिन 10 में से करीब 9 रिटेल ट्रेडर्स अब भी घाटे में रहे। सेबी के आंकड़ों से सामने आया है कि वित्त वर्ष 2026 में जो सुधार दिखा भी है, वह स्ट्रैटेजी यानी रणनीति के चलते नहीं बल्कि ट्रेडर्स की संख्या घटने से आया।

क्या हैं आंकड़े

वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख और कुल नेट नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा तो नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी 90.9% से घटकर 87.7% रह गया। हालांकि नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया। इस प्रकार वित्त वर्ष 2026 में कम लोगों ने ट्रेडिंग की, लेकिन जो ट्रेडिंग में बने रहे, उन्होंने अभी काफी बड़ा रिस्क लिया और भारी नुकसान उठाया।

Options Buying अब भी रिटेलर्स की पहली पसंद

सेबी के बिहैवरियल एनालिसिस के मुताबिक करीब 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया, तो 93% ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग की और फ्यूचर्स में उनकी हिस्सेदारी बहुत सीमित रही। इसके अलावा सेबी के के स्ट्रैटेजी-वाइज स्टडी में सामने आया कि ऑप्शंस बायर्स को 90% नुकसान हुआ और रिटेलर्स को सबसे बड़ा झटका इसी ने दिया। इससे फटाफट पैसा बनाने की कोशिश, एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग, बिना ठोस रणनीति के डायरेक्शन बेट्स और जरूरत से ज्यादा बड़ी पोजिशंस लेना।

रिटेलर्स के लिए बढ़ी लड़ाई

सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला अब सिर्फ दूसरे इंडिविजुअल्स से नहीं है। मार्केट पर अब बड़े इंस्टीट्यूशंस, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और एल्गोरिदम से चलने वाले उन ट्रेडर्स का दबदबा बढ़ रहा है जो एडवांस्ड एग्जीक्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेक्नोलॉजी, रिस्क मॉडल्स, ऑटोमोटेड एग्जीक्यूशन और डिसिपलिन्ड पोजिशन साइजिंग का इस्तेमाल करते हैं। वित्त वर्ष 2026 प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर्स ने लगभग ₹44,000 करोड़ और FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ की कमाई की। इन दोनों की कमाई का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग एंटिटीज से आया। एक तरह कई रिटेलर्स भावनाओं, सोशल मीडिया टिप्स और एक्सपायरी के दिन ट्रे़डिंग पर पर निर्भर हैं तो प्रोफेशनल ट्रेडर्स पहले से तय रणनीतियों, टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के के आधार पर ट्रेड कर रहे।

और भी खास बातें आई सामने

सेबी की रिपोर्ट में एक बात का खंडन हुआ कि अधिक अनुभव का मतलब घाटा कम होना है। जिन ट्रेडर्स ने लगातार चार या उससे अधिक वर्षों तक ट्रेडिंग की, उनमें भी नुकसान की दर बहुत अधिक रही यानी कि बार-बार एक ही गलती करने से ट्रेडिंग स्किल अपने आप नहीं बढ़ती। इसी तरह जिन ट्रेडर्स को लगातार दो साल नुकसान हुआ, उनमें से लगभग 90% ने ट्रेडिंग जारी रखी और फिर से नुकसान उठाया।

सेबी की रिपोर्ट में एक और परेशान करने वाली बात सामने आई कि अधिक ट्रेडिंग से नुकसान भी बड़ा हुआ। सबसे अधिक एक्टिव 42% ट्रेडर्स की कुल घाटे में 87% और टर्नओवर में 94% हिस्सेदारी रही। यह समस्या खासतौर से युवाओं और कम आय वाले ट्रेडर्स में अधिक दिखाई दी।

सेबी की रिपोर्ट में कम कैपिटल और अधिक रिस्क की बात सामने आई। लगभग 35% डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था, तो 78% के पास ₹1 लाख से कम की इक्विटी होल्डिंग थी। पोर्टफोलियो का साइज बढ़ने के साथ नुकसान की संभावना लगातार कम होती गई। बहुत कम या बिना इक्विटी होल्डिंग वाले ट्रेडर्स के लिए नुकसान की संभावना 93% रही तो ₹10 करोड़ से अधिक के पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स के लिए यह लगभग 58% रही। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी पूंजी वाले ट्रेडर्स आमतौर पर एक लिमिट में एक्सपोजर लेते हैं, जबकि कई छोटे ट्रेडर्स अपनी पूंजी के मुकाबले बहुत अधिक लेवरेज इस्तेमाल करते हैं।

Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

कनाडा का अमेरिकी सामान पर 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ:ट्रम्प ने 50% टैरिफ का ऐलान किया था, दोनों देशों के बीच तीन दिन की बातचीत फेल

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा कि कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा। यह फैसला अमेरिका की ओर से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद लिया गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी शुक्रवार को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। कनाडा का जवाबी टैरिफ स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अमेरिकी सामान पर लगेगा। किन-किन उत्पादों पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी पूरी जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी। दोनों देशों के बीच 3 दिन चली बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। अमेरिका बोला- अच्छा ऑफर दिया था, उन्होंने मौका गंवाया दोनो देशों के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ पार्टनशिप का बहुत अच्छा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, उन्होंने कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले सबसे अच्छा ऑफर दिया था। लेकिन कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से यह डील नहीं हो पाई। USTR ने आगे कहा कि अगर यह डील होती तो इससे एयरोस्पेस में सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन, गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने के लिए जरूरी कदम, खनिजों पर सहयोग, और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) बातचीत की घोषणा जैसे नतीजे सामने आते। अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की ट्रेड पॉलिसी अमेरिकी कार कंपनियों को कनाडा के बाजार में बराबर मौका नहीं देती। अमेरिका चाहता है कि उसकी कारों और दूसरे सामान के लिए कनाडा का बाजार ज्यादा खुले। कनाडा ने बदले में अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत मांगी थी। लेकिन अमेरिका इन टैरिफ को हटाने पर तैयार नहीं हुआ। 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन कनाडा अपने डेयरी बाजार को विदेशी कंपनियों और सस्ते डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम लागू करता रहा है। अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिले। लेकिन कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर ज्यादा रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। अमेरिका इसे अपने सामान के साथ भेदभाव के तौर पर देखता है। अमेरिका चाहता है कि उसकी शराब को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने की इजाजत मिले। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आने वाली लकड़ी पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है। ————— यह खबर भी पढ़ें… भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा

बांग्लादेश के उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में देश के 7 प्रमुख औद्योगिक इलाकों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 गारमेंट उद्योग से जुड़ी यूनिट्स शामिल हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं और 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। बंद फैक्ट्रियों का संकट सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं पिछले दो साल में बंद हुई 457 फैक्ट्रियों में कपड़ा और गारमेंट से जुड़ी फैक्ट्रियों के साथ दूसरे उद्योगों की इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं। यानी बांग्लादेश में उद्योगों की मुश्किल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है। गैस की कमी ने संकट और बढ़ाया सबसे बड़ी परेशानी ऊर्जा की कमी को लेकर है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर में गैस का दबाव इतना कम हो गया कि 700 से 800 फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा या कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा। गैस की कमी से बॉयलर और दूसरी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घटता है और फैक्ट्रियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं विदेशी खरीदार गैस की कमी से अभी जो फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके लिए ज्यादा दिन तक काम रोकना मुश्किल हो सकता है। फैक्ट्री बंद होने के बाद भी कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक का कर्ज और बाकी खर्च देने पड़ते हैं। गैस की जगह डीजल या एलपीजी से काम चलाने पर खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर संकट लंबा चला तो कई फैक्ट्रियों के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों में कामकाज पर नहीं पड़ रहा है। इससे बांग्लादेश के लिए विदेशी कंपनियों से कारोबार हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है। अगर फैक्ट्रियां समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर पाईं तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की कमाई घटेगी और कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और बाकी खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा। गैस नहीं मिली तो कपड़ा उद्योग पर और संकट बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार कपड़ों का बड़ा हिस्सा है। इनके लिए धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और दूसरे शुरुआती काम करने वाली फैक्ट्रियां जरूरी हैं। अगर इन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिली तो आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होगा। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने इन इकाइयों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने की मांग की है। उद्योग संगठनों ने सरकार से यह भी कहा है कि फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी दी जाए, ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन की तैयारी कर सकें। इसके अलावा गैस संकट से परेशान छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में कुछ समय की राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवाद जल्द सुलझाने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस और बिजली का संकट कब तक बना रहता है। अभी कई फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर रहे, तो आर्थिक दबाव झेल रही कई और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसका असर सिर्फ रोजगार पर नहीं पड़ेगा। स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

Awarapan 2 Budget vs Collection: 45 करोड़ के बजट में बनी ‘आवारापन 2’, इमरान हाशमी की फिल्म ने 3 गुना कमाया मुनाफा

Awarapan 2 Budget vs Collection: ‘आवारापन 2’ ठीक वही कर रही है, जिसकी उम्मीद इसके मेकर्स ने की थी – यानी लोगों को सिनेमाघरों तक वापस लाना। जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इमरान हाशमी के लीड रोल वाली इस सीक्वल फिल्म ने शुरुआती दो दिनों में ही 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था, जबकि प्रोड्यूसर विशेष भट्ट का कहना है कि टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

कितना है फिल्म का बजट

जानकारी के मुताबिक फिल्म का बजट 30 से 45 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। हालांकि ये आंकड़े ऑफिशियल नहीं हैं। फिल्म प्रोड्यूसर विशेष भट्ट ने बताया थी कि उनकी फिल्म पर कोई भरोसा नहीं कर रहा था। हर किसी को फिल्म के फ्लॉप हो जाने का डर सता रहा था। टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

फिल्म ने कितनी कमाई की

2007 की फिल्म ‘आवारापन’ बेशक बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, लेकिन इसका म्यूजिक और कहानी आज भी लोगों के जुबान पर चढ़े हैं। इसी का फायदा ‘आवारापन 2’ को पूरी तरह से मिला है। सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘आवारापन 2’ ने 21.50 करोड़ के नेट कलेक्शन के साथ ओपनिंग की थी। भारत में ग्रॉस कलेक्शन 25.80 करोड़ रुपये रहा था। जबकि वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 27.80 करोड़ से ओपनिंग की थी।

वहीं 8वें दिन फिल्म ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है। फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।

पहले दिन का कलेक्शन-22 करोड़

दूसरे दिन का कलेक्शन-33.75 करोड़

तीसरे दिन का कलेक्शन-26 करोड़

चौथे दिन का कलेक्शन-9.25 करोड़

पांचवें दिन का कलेक्शन-9.75 करोड़

छठवें दिन का कलेक्शन-6.75 करोड़

सातवें दिन का कलेक्शन-6 करोड़

आठवें दिन का कलेक्शन-5.75 करोड़

India Net (Sacnilk): 119.00 crore

India Gross (Sacnilk): 142.21 cr

Worldwide Gross: 169.17 crore

कितना कमाया मुनाफा

‘आवारापन 2’ ने 45 करोड़ के बजट के मुकाबले 74 करोड़ से 78.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट (164% से 175% रिटर्न) कमाया है, जो अपने एक बड़ा आंकड़ा है। फिल्म साल की तीसरी बिग ओपनर बनकर उभरी है। इससे पहले यशराज की ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाया था।

यह फ़िल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ से टक्कर के बावजूद अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रही। लेकिन रिलीज़ से पहले कहानी कुछ और ही थी। ‘ज़ूम’ के साथ एक इंटरव्यू में, विशेष भट्ट – जिन्होंने बिलाल सिद्दीकी के साथ मिलकर इस फ़िल्म की कहानी भी लिखी है – ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर इस फ़िल्म को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उनके मुताबिक, दिलचस्पी न दिखाने की वजह से ही उन्हें नहीं लगता कि ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ जल्दी पैसे कमाने के मकसद से बनाई गई फ़िल्म है।

उन्होंने कहा, “अगर आप ‘आवारापन’ जैसी फ़िल्में देखना चाहते हैं, तो आपको सिनेमाघरों में जाकर उन्हें सपोर्ट करना होगा। वरना मुझे कैसे पता चलेगा कि आपको इसमें दिलचस्पी है? अगर मुझे पता होगा, तो मैं भी अपनी मेहनत की कमाई लगाकर फ़िल्म बनाऊंगा ताकि पैसे कमा सकूं। मैं आपको बता दूं, ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए बनाई गई फ़िल्म नहीं है।”

दुबई में पानीपुरी का ऐसा क्रेज, राजस्थानी शख्स के पास रोज पहुंचते हैं 500 से 1000 ग्राहक

भारत से बड़ी संख्या में लोग बेहतर नौकरी, कमाई और भविष्य की तलाश में विदेश का रुख करते हैं। लेकिन कुछ लोगों की कहानी सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहती। वे नए देश में अपनी मेहनत और हुनर के दम पर ऐसा काम शुरू कर देते हैं, जिसमें उनकी जड़ों की झलक भी दिखाई देती है। दुबई में रहने वाले राजस्थान के एक शख्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उसने विदेश में अपना कारोबार शुरू किया, लेकिन इसके लिए किसी विदेशी खाने को नहीं चुना, बल्कि भारत की मशहूर स्ट्रीट फूड पानीपुरी को अपना जरिया बनाया।

जिस पानीपुरी को भारत में लोग सड़क किनारे ठेलों और दुकानों पर बड़े चाव से खाते हैं, वही अब दुबई में इस शख्स की पहचान बन गई है। खास बात यह है कि उसके यहां रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। उसकी कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग उसकी मेहनत और परिवार के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ कर रहे हैं।

रोज 500 से 1000 लोग पहुंचते हैं

इस शख्स की कहानी का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर @emirateslovesindia ने शेयर किया है। वीडियो में उसने बताया कि वह पिछले करीब दो साल से दुबई में रह रहा है और वहां पानीपुरी का कारोबार कर रहा है। जब उससे ग्राहकों की संख्या के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि रोजाना करीब 500 से 600 ग्राहक आते हैं और कई बार यह आंकड़ा 1,000 तक पहुंच जाता है। हालांकि, वीडियो में कारोबार की सटीक जगह और उसकी कमाई का खुलासा नहीं किया गया।

एक नहीं, कई फ्लेवर की पानीपुरी

दुबई में ग्राहकों को सिर्फ आम पानीपुरी का स्वाद नहीं मिलता। शख्स ने बताया कि उनके यहां कई अलग-अलग फ्लेवर उपलब्ध हैं। इनमें जीरा, लहसुन, खट्टा-मीठा, हाजमोला, नींबू और सामान्य फ्लेवर शामिल हैं। यानी देसी पानीपुरी को दुबई में थोड़ा अलग अंदाज देकर लोगों के सामने पेश किया जा रहा है।

कमाई का आधा हिस्सा भेजता है घर

इस शख्स की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा उसकी कमाई को लेकर है। उसने बताया कि वह अपनी कमाई का 50 फीसदी हिस्सा घर भेजता है, जबकि बाकी 50 फीसदी रकम दुबई में अपने खर्चों के लिए रखता है। उसकी यह बात सोशल मीडिया यूजर्स को खास तौर पर पसंद आई, क्योंकि विदेश में रहते हुए भी वह अपने परिवार की आर्थिक मदद करना जारी रख रहा है।

दुबई की जिंदगी भी है पसंद

सिर्फ कारोबार ही नहीं, शख्स ने दुबई में अपनी जिंदगी के बारे में भी बात की। उसने बताया कि उसे वहां का खाना, रहन-सहन और घूमना काफी पसंद है। उसके मुताबिक, दुबई की अच्छी सड़कें और बेहतर सेवाएं भी उसे पसंद आती हैं। यानी राजस्थान से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद उसने वहां अपनी मेहनत से कमाई का रास्ता बना लिया है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की तारीफ

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने शख्स की मेहनत और उसके कारोबार की तारीफ की। कई लोगों को यह बात खास लगी कि वह विदेश में रहकर भी भारतीय स्ट्रीट फूड को लोगों तक पहुंचा रहा है और अपनी कमाई का एक हिस्सा परिवार को भेजता है।

हरिद्वार कांवड़ मेले में भिखारी बनकर बैठा यूट्यूबर, 8 घंटे में कमाए 4,000 रुपये

हरिद्वार कांवड़ मेले में भिखारी बनकर बैठा यूट्यूबर, 8 घंटे में कमाए 4,000 रुपये

हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूब सोशल एक्सपेरिमेंट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने यह जानने की कोशिश की कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक मेले में भिखारी बनकर पैसे मांगे, तो एक दिन में कितनी रकम जुटा सकता है। सचिन करीब 8 घंटे तक भिखारी का हुलिया बनाकर लोगों के बीच घूमे और दोनों के मुताबिक इस दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए।

फटे कपड़े, हाथ में कटोरा और गले में QR कोड

एक्सपेरिमेंट के लिए सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में छोटा सा कटोरा लेकर श्रद्धालुओं के बीच पैसे मांगने लगे। इस प्रयोग को थोड़ा अलग बनाने के लिए उन्होंने गले में UPI QR कोड भी लटका रखा था, ताकि लोग चाहें तो डिजिटल पेमेंट से भी मदद कर सकें। शुरुआत में दोनों को लगा था कि पूरे दिन में शायद ₹1,000 से ₹2,000 तक ही मिल पाएंगे।

शुरुआत में मिले सिर्फ ₹130

मेले में पैसे मांगने के शुरुआती घंटों में सचिन को ज्यादा सफलता नहीं मिली। काफी कोशिश के बाद उनके पास करीब ₹130 ही जमा हुए। कुछ लोगों ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उनकी मदद की। कई लोगों ने पैसे न होने की बात कहकर आगे बढ़ना बेहतर समझा, तो कुछ ने सचिन के साथ अच्छा व्यवहार किया।

दुकानदार ने दे दी चश्मे की जोड़ी

मेले में घूमते हुए सचिन कई दुकानदारों से भी बातचीत करने लगे। इसी दौरान एक सनग्लास विक्रेता ने उन्हें चश्मे की एक जोड़ी दे दी। इस घटना के बाद सचिन ने मजाकिया अंदाज में खुद को ‘प्रोफेशनल भिखारी’ तक कह दिया। वहीं, गले में लगे UPI QR कोड से भी करीब ₹40 का डिजिटल भुगतान मिला।

असली भिखारी से हुई दिलचस्प बातचीत

एक वक्त सचिन एक असली भिखारी के पास जाकर बैठ गए। दोनों के बीच बातचीत हुई। बताया गया कि उस व्यक्ति को अपना नाम और वह पहले कहां रहता था, इसकी जानकारी तक याद नहीं थी। यह मुलाकात एक्सपेरिमेंट के दौरान सामने आई उन स्थितियों में से एक थी, जिसने भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी व्यक्तिगत परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा।

चार घंटे में ₹800, आठ घंटे में ₹4 हजार

करीब चार घंटे बाद सचिन ने अपनी जमा रकम गिनी तो उनके पास लगभग ₹800 थे। इसके बाद उन्होंने कई घंटे और मेले में बिताए। कभी लोगों ने पैसे दिए तो कभी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटने के लिए भी कहा। बारिश और लगातार पैदल चलने की वजह से एक्सपेरिमेंट उनके लिए शारीरिक रूप से भी काफी थकाऊ बन गया। करीब 8 घंटे बाद दोनों ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 जमा हुए। यानी इस प्रयोग में औसतन करीब ₹500 प्रति घंटे की रकम जुटी।

₹4 हजार से लाखों की कमाई का हिसाब

इसके बाद दोनों ने इसी आंकड़े के आधार पर अनुमान लगाना शुरू किया। उनका कहना था कि अगर रोजाना इतनी ही रकम मिलती रहे तो महीने में करीब ₹1.2 लाख तक जुटाए जा सकते हैं। वायरल पोस्ट में इससे भी ज्यादा कमाई का एक अनुमान सामने आया, जिसमें 12-13 घंटे रोजाना काम करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिदिन तक की संभावित कमाई की बात कही गई। हालांकि, ये सिर्फ इस एक्सपेरिमेंट पर आधारित अनुमान हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि वास्तविक जिंदगी में भीख मांगने वाले लोग नियमित रूप से इतनी रकम कमाते हैं।

‘भीख मांगना बिल्कुल आसान नहीं’

एक्सपेरिमेंट के अंत में दोनों ने माना कि बाहर से आसान दिखने वाला यह काम असल में बेहद थका देने वाला है। घंटों तक अजनबियों के पास जाकर मदद मांगना मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मुश्किल लगा। सचिन को जहां कुछ लोगों ने पैसे देकर मदद की, वहीं कुछ लोगों के खराब व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। दोनों ने लोगों को सलाह दी कि भीख मांगने को कमाई का जरिया बनाने के बजाय मेहनत और ईमानदारी से कमाने की कोशिश करनी चाहिए।

₹4 हजार की कमाई ने छेड़ दी बड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने 8 घंटे में ₹4,000 जमा होने पर हैरानी जताई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगना कुछ लोगों के लिए कमाई का स्थायी जरिया बन गया है।

वहीं, कई यूजर्स ने इस एक्सपेरिमेंट से बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि सिर्फ 8 घंटे का प्रयोग उन लोगों की असली जिंदगी को नहीं दर्शा सकता, जो गरीबी, बेघरपन, बीमारी, दिव्यांगता, शोषण या लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियों के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं।

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Awarapan 2 Box Office Collection Day 8: छप्पर फाड़ कमाई कर रही इमरान हाशमी की फिल्म, 170 करोड़ के पहुंची करीब

Awarapan 2 Box Office Collection Day 8: इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस पर अपने दूसरे हफ़्ते में भी अच्छी रफ़्तार से आगे बढ़ रही है। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह रोमांटिक-एक्शन ड्रामा फिल्म, शानदार ओपनिंग के बाद भी दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है।

इंडस्ट्री ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, ‘आवारापन 2’ ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है।

फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।

आठवें दिन ‘आवारापन 2’ की भारत में कुल ऑक्यूपेंसी 15.19 प्रतिशत रही और फिल्म के 9,858 शो दिखाए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि दूसरे हफ़्ते में भी फ़िल्म की पकड़ मज़बूत बनी हुई है।

फिल्म ने पहले दिन ₹22 करोड़ की कमाई के साथ शुरुआत की और वीकेंड पर इसकी कमाई में उछाल आया। इसने दूसरे दिन ₹33.75 करोड़ और तीसरे दिन ₹26 करोड़ कमाए। इसके बाद चौथे दिन कमाई घटकर ₹9.25 करोड़ हो गई, फिर पांचवें दिन ₹9.75 करोड़, छठे दिन ₹6.75 करोड़ और सातवें दिन ₹6 करोड़ रही। आठवें दिन फिल्म ने ₹5.50 करोड़ और कमाए, जिससे पहले आठ दिनों में इसकी कुल भारत नेट कमाई ₹119 करोड़ हो गई।

नितिन कक्कड़ द्वारा निर्देशित, ‘आवारापन 2’ साल 2007 की फिल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल है। फिल्म में इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, पूरन गब्बी, अनिरुद्ध रावल, शबाना आज़मी, सुविंदर विक्की, विजयंत कोहली और अतुल कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। विशेष फिल्म्स बैनर के तहत विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म शिवम पंडित की कहानी है, जो प्यार, त्याग और प्रायश्चित से जूझते हुए अपराध की दुनिया में वापस खिंचा चला आता है।

ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के अमेरिका पर जवाबी टैरिफ अमेरिका के नए 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने तुरंत जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का डॉलर के बदले डॉलर के हिसाब से जवाब देगा। यानी अमेरिका जितने कनाडाई सामान पर टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतने ही मूल्य के अमेरिकी सामान पर टैरिफ लगाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया है। ————— यह खबर भी पढ़ें… भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…