ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं हैं। अमेरिका की जनता को सोचसमझकर फैसला करना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ईरान ने UNGA में कहा था कि वह परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं छोड़ेगा। IRGC की चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की सीटों के लिए चुनाव होता है। इससे राष्ट्रपति नहीं बदलता लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत और नीतियां लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र की बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रम्प झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। IRGC के पत्र की 3 प्रमुख बात अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Nifty Outlook: सितंबर एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। Nifty50 मंगलवार को 64 अंक गिरकर 22,716 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में इंडेक्स 1,600 अंक से ज्यादा यानी करीब 6.5% टूट चुका है।
मंगलवार को Nifty की शुरुआत गैप-डाउन हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज रही और इंडेक्स काफी नीचे चला गया। हालांकि, दिन के निचले स्तर से रिकवरी आई और Nifty ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा कम कर लिया।
एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा। आखिर में Nifty 0.28% की गिरावट के साथ 22,716 पर बंद हुआ। सेक्टरों की बात करें तो IT, Realty और FMCG में गिरावट जारी रही। हालांकि, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंचा निफ्टी
गिरावट के साथ Nifty अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह लेवल अभी करीब 22,600 है। कोविड के समय बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद पहली बार Nifty इस लंबे समय के टेक्निकल सपोर्ट तक पहुंचा है।
यही वजह है कि अब 30 सितंबर को 22,600 का स्तर बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसके आसपास इंडेक्स का अगला रुख तय हो सकता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव
बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.99% गिरा। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.81% की गिरावट आई।
बाजार में कमजोरी का असर अब सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है।
लगातार आठवें हफ्ते बाजार गिरा
हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। Nifty में करीब 6.8% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते गिरा है।
2020 के बाद यह Nifty की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े अभी राहत दे रहे हैं।
इकोनॉमी से मिले कुछ अच्छे संकेत
अगस्त में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 8% रही। यह दो महीने में सबसे तेज बढ़त है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। इससे शहरी इलाकों में लोगों के खर्च में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। GDP ग्रोथ भी बाजार के लिए एक सपोर्टिव फैक्टर बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेंगी। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बाजार के लिए अहम होगी।
22,550 के नीचे गिरावट पर दबाव
HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी का ट्रेंड अभी कमजोर है। उनका कहना है कि 22,900 से 23,000 के बीच आने वाली तेजी ज्यादा टिक नहीं सकती। इस स्तर पर बिकवाली देखने को मिल सकती है।
उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,550 के नीचे जाता है तो 22,200 तक गिरावट बढ़ सकती है।
22,570-22,550 का जोन अहम
SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 22,570 से 22,550 का जोन Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट है। इसके नीचे गिरावट आने पर 22,400 तक दबाव बढ़ सकता है।
ऊपर की तरफ 22,900 से 22,930 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर Nifty इस रेंज के ऊपर टिकता है तो रिकवरी 23,050 तक जा सकती है।
22,600 के ऊपर टिकना जरूरी
LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक 22,600 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, अगर Nifty इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी की गुंजाइश रहेगी।
उनके मुताबिक 22,600 फिलहाल अहम सपोर्ट है। वहीं 22,800 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।
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पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी। यह उड़ान 24 सितंबर को ढाका पहुंचने वाली थी, लेकिन अब फ्यूल की डिलीवरी टल गई है। यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई गांवों में रोज 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। फ्यूल समय पर नहीं पहुंचने से बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। आखिरी वक्त में नहीं मिली मंजूरी रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम बांग्लादेश की रूपपुर प्लांट बना रही है और न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई भी वही कर रही है। प्लांट की यूनिट-2 के लिए फ्यूल की पहली खेप लेकर रूसी फ्लाइट को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था। एयरपोर्ट पर फ्यूल उतारने की सभी तैयारियां पूरी थीं। तभी बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया गया कि रूस को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है। बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फकीर महबूब अनाम ने कहा कि पाकिस्तान ने मंजूरी न देने की सही वजह नहीं बताई है। अक्टूबर से दूसरे रास्ते से आएगा फ्यूल द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अब रोसाटॉम ने फ्यूल की डिलीवरी के लिए दूसरा रास्ता तय किया है। सप्लाई अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोसाटॉम ने कहा है कि बाकी फ्यूल दिसंबर तक 7 अलग-अलग कार्गो फ्लाइट्स से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि डिलीवरी में हुई देरी से रूपपुर प्लांट के पूरे शेड्यूल पर असर नहीं पड़ेगा। ढाका में पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इस मामले को तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कत बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को काफी अहमियत देता है और इस घटना को इसी तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश में बन रहा पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश ने अपनी बिजली जरूरत पूरी करने के लिए रूस से 2011 में समझौता किया था। इसके तहत राजधानी ढाका से करीब 160 किलोमीटर दूर पद्मा नदी के किनारे रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने की योजना बनी। यह देश का पहला परमाणु बिजलीघर है। इसे रूस की सरकारी परमाणु एजेंसी रोसाटॉम की अगुवाई में बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की लागत करीब 12.65 अरब डॉलर है। इस प्रोजेक्ट पर 2017 में काम शुरू हुआ था। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर 2026 से बिजली उत्पादन का काम शुरू होगा। 2 साल पहले ही लेट है रूपपुर प्लांट रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका काम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से करीब 2 साल पीछे हो चुका है। अप्रैल में प्लांट की यूनिट-1 में न्यूक्लियर फ्यूल डालने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद अगस्त में प्लांट की अंतिम टेस्टिंग शुरू हुई। अक्टूबर में यूनिट-1 से करीब 300 मेगावाट बिजली ट्रायल के तौर पर नेशनल ग्रिड में भेजने की तैयारी है। दिसंबर में कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर बांग्लादेश न्यूक्लियर पावर पैदा करने वाला दुनिया का 33वां देश बन जाएगा। गैस की कमी और आयात ने बांग्लादेश की परेशानी बढ़ाई बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा बाहर से महंगे दामों पर खरीदता है। ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके बंद होने से बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बिजली संकट का असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है। गारमेंट, फूड, सिरेमिक और फार्मास्युटिकल कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के दौरान नर्सों को मरीजों की देखभाल के लिए टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। ऐसे में बांग्लादेश के लिए रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट को जल्द शुरू करना अहम है। इससे देश में बिजली की सप्लाई बढ़ सकती है और बाहर से खरीदी जाने वाली ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… PoK के लोग बोले- हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना ₹2,600 टूटकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2.32 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।
दोनों कीमती धातुओं पर ग्लोबल मार्केट की बिकवाली का असर दिखा। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों ने भी दबाव बढ़ाया। ग्लोबल मार्केट में भी सोने की कीमत में करीब 3% की गिरावट आई।
डॉलर मजबूत होने से दबाव
ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है।
आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर असर पड़ सकता है।
कच्चा तेल 108 डॉलर के पार
गौरव गर्ग के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 4% चढ़कर 108.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा।
ग्लोबल मार्केट में भी सोना-चांदी टूटा
विदेशी बाजार में स्पॉट गोल्ड 128.93 डॉलर यानी 3.01% गिरकर 4,156.44 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी 2.96 डॉलर यानी 4.6% टूटकर 61.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। चांदी भी करीब 61 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी।
ईरान ने भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में उसका प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ बातचीत की योजना नहीं बना रहा है। इस घटनाक्रम से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका चुनाव के बाद ईरान पर हमला कर सकता है:रिजल्ट का इंतजार कर रहे ट्रम्प; उनकी रिपब्लिकन पार्टी हार सकती है अमेरिका ईरान पर एक बार फिर बड़ा हमला कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि वे (ईरान) तुरंत होर्मुज इसलिए खोलना चाहते हैं। क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसा नहीं आ रहा है, क्योंकि उनकी कमाई होर्मुज स्ट्रेट से ही होती है। हमने वहां सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी कर दी। यह लोहे की दीवार जैसी है। दरअसल दो दिन पहले ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा था। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है। ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने भेजा था प्रस्ताव ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकता है। अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि वे (ईरान) तुरंत होर्मुज इसलिए खोलना चाहते हैं। क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसा नहीं आ रहा है, क्योंकि उनकी कमाई होर्मुज स्ट्रेट से ही होती है। हमने वहां सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी कर दी। यह लोहे की दीवार जैसी है। दरअसल दो दिन पहले ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा था। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है। ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने भेजा था प्रस्ताव ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकता है। अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी रिपोर्टर पर तंज कसा। रिपोर्टर ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इस पर जयशंकर ने कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है।” रिपोर्टर के सवाल का जवाब देने के बाद वे मुस्कुराए और वहां से निकल गए। जयशंकर के पाकिस्तानी पत्रकार को जवाब देने का VIDEO दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान भारत की विदेश नीति, वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर बातचीत हो रही थी। 4 साल पहले भी ऐसा ही जवाब दिया था इससे पहले दिसंबर 2022 में न्यूयॉर्क में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा था कि दक्षिण एशिया आखिर कब तक भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद का सामना करता रहेगा। इस पर जयशंकर ने कहा था, आप गलत मंत्री से सवाल पूछ रहे हैं। पाकिस्तान कब तक आतंकवाद जारी रखना चाहता है, यह पाकिस्तान के मंत्री बताएंगे। भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद बड़ा विवाद भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है। भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में मौजूद या वहां से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और आतंकवाद की फंडिंग का मुद्दा भी उठाया है। वहीं, पाकिस्तान भारत के आरोपों को खारिज करता रहा है। जयशंकर ने समुद्री जहाजों पर हमलों का मुद्दा उठाया जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खाड़ी, लाल सागर और ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये अब कभी-कभार होने वाली घटनाएं नहीं रह गई हैं। समुद्री रास्तों पर ऐसे हमले दुनिया के व्यापार और लोगों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पिछले 3 महीने में 7 भारतीयों की मौत, 1 लापता 8 जुलाई- ब्लैक सी में MV ओमोर्फी पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हुई। 19 जुलाई- MV गोल्डन लियो पर हमले में चार भारतीय नाविक मारे गए। 9 सितंबर- होर्मुज स्ट्रेट में एल गैया टैंकर पर हमला हुआ, जिसके बाद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया। 17 सितंबर- ओमान की खाड़ी में MV केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई। कल UNGA में बोलेंगे जयशंकर विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के हाई लेवल सेशन में 26 सितंबर को भारत का पक्ष रखेंगे। अपने संबोधन के दौरान वह वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखेंगे। पिछले साल भी जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखा था। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति जीरो टॉलरेंस की है। विदेश मंत्री ने आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की बात कही थी। ————————– यह खबर भी पढ़ें… UN में 75 देशों ने नेतन्याहू का बायकॉट किया:हूटिंग हुई तो 3 मिनट चुप खड़े रहे, फिर बोले- कायर बाहर चले जाएं
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधियों ने हूटिंग करके उनका विरोध किया, फिर बाहर चले गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा है। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है। पजशकियान बोले- समझौते के बाद हमला हुआ पजशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि जून में दोनों देशों के बीच एक समझौते का आधार तैयार हो गया था और ईरान आगे बढ़ने के लिए राजी था। उन्होंने कहा कि उस समय होर्मुज खुला था और बातचीत का रास्ता भी खुला था, लेकिन इसके बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। पजशकियान के मुताबिक, ईरान अब भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी हमले रुकने जरूरी है। ट्रम्प की चेतावनी के बाद आया प्रस्ताव ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकता है। 28 फरवरी से चल रही है लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

