New CBFC Film Certification Rules: ड्रग्स, हिंसा या समाज-विरोधी कामों को नहीं देना होगा बढ़ावा, जानें CBFC के फिल्म सर्टिफिकेशन के नए नियम

New CBFC Film Certification Rules: सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए नई गाइडलाइंस की घोषणा की है। हाल ही में, प्रीति ज़िंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी और रूपाली गांगुली जैसे कलाकार सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जुड़े हैं। अब फिल्मों को मंज़ूरी देने के लिए नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं।

नई गाइडलाइंस के तहत ज्यादा सख्त नियम लागू किए गए हैं। ड्रग्स, हिंसा, यौन हिंसा, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य संवेदनशील विषयों से निपटने में ज्यादा सावधानी बरती जाएगी। गाइडलाइंस में किए गए ये बदलाव दिसंबर 1991 में लागू हुए पुराने नियमों की जगह लेंगे।

अपडेट के अनुसार एक बड़ा बदलाव यह है कि ड्रग्स के इस्तेमाल या गैर-कानूनी बिक्री को दिखाने वाले सीन्स के लिए एक अनिवार्य चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। चेतावनी में लिखा होगा- “गैर-कानूनी नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”

एक और बदलाव यह है कि शराब पीने, ड्रग्स की लत या तंबाकू के सेवन को बढ़ावा देने वाले सीन्स नहीं दिखाए जाएंगे। CBFC इस बात का भी ध्यान रखेगा कि समाज-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा न दिया जाए। छेड़छाड़ के सीन्स से बचना चाहिए और बच्चों के साथ किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही जानवरों के साथ बेवजह क्रूरता दिखाने से भी बचना चाहिए। फिल्में भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल नहीं उठा सकतीं और न ही देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।

इन गाइडलाइंस में ऐसे कंटेंट पर रोक लगाई गई है जो नस्लीय, धार्मिक या अन्य समुदायों का अपमान करते हों, साथ ही ऐसी सामग्री पर भी जो सांप्रदायिकता, अंधविश्वास, विज्ञान-विरोधी मान्यताओं या राष्ट्र-विरोधी विचारों को बढ़ावा देती हो।

भारत सरकार ने हाल ही में 18 सदस्यों के साथ सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में अभिनेता प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी और रूपाली गांगुली जैसे नाम शामिल हैं। फिल्म निर्माता प्रियदर्शन और संगीतकार रिकी केज भी इस 18-सदस्यीय बोर्ड का हिस्सा हैं।

CBFC के पुनर्गठन के बारे में बात करते हुए I&B मंत्रालय के एक अधिकारी ने NDTV को बताया- “पुनर्गठन का काम कुछ समय से लंबित था। पिछले बोर्ड के कुछ सदस्य अब सक्रिय नहीं थे और कुछ अन्य का कार्यकाल समाप्त हो गया था।”

CBFC क्या करता है?

CBFC भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बोर्ड सिनेमैटोग्राफ एक्ट और लागू नियमों के तहत निर्धारित सर्टिफिकेशन सिस्टम के माध्यम से काम करता है।

Lust Stories 3 Movie Review: चार बड़े फिल्ममेकर, चाहत को देखने के चार बिल्कुल अलग नजरिए

Lust Stories 3 Movie Review: एंथोलॉजी बनाना आसान नहीं होता। दर्शक अभी एक कहानी में पूरी तरह डूब भी नहीं पाता कि उसे दूसरी दुनिया में पहुंचना पड़ता है। लेकिन’लस्ट स्टोरी 3′ इस फॉर्मेट की इसी खासियत को अपनी ताकत बना लेती है। चारों कहानियों को एक जैसा बनाने की कोशिश करने के बजाय हर निर्देशक को अपनी आवाज और अपना अंदाज रखने की पूरी जगह दी गई है।

विक्रमादित्य मोटवाने की कहानी चारों में सबसे अलग है। राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक शर्मा एक ऐसी कहानी का हिस्सा हैं, जो कोरियन फिक्शन से प्रभावित अंदाज में पति-पत्नी के पार्टनर बदलने जैसे विषय को एक्सप्लोर करती है। विषय अपने आप में असहज है, लेकिन फिल्म इस असहजता से भागती नहीं बल्कि इसी को कहानी का हिस्सा बना लेती है।

किरण राव गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी के साथ माहौल को पूरी तरह बदल देती हैं। उनकी कहानी में हल्की-फुल्की ठगी वाली थ्रिलर का अंदाज है, जिसमें ड्रग्स, पैसे और इतने ट्विस्ट हैं कि मनोरंजन बना रहता है। जब आपको लगता है कि अब कहानी समझ आ गई है, तभी एक मजेदार फिल्मी सरप्राइज सामने आ जाता है।

शकुन बत्रा का सेगमेंट रिश्तों पर बनी ड्रामा कहानी के लिहाज से शायद सबसे ज्यादा जाना-पहचाना महसूस होता है। अली फजल और राधिका मदान एक ऐसे रिश्ते को सामने लाते हैं, जो चाहत, थेरेपी, परिवार की उम्मीदों और अधूरी भावनाओं के बोझ तले दबा हुआ है। कहानी शारीरिक रिश्ते से आगे जाकर यह समझने की कोशिश करती है कि जब भावनात्मक उलझनें हावी होने लगती हैं तो क्या होता है।

विशाल भारद्वाज की कहानी एक खूबसूरत बदलाव लेकर आती है। अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव हमें 1987 में ले जाते हैं, जहां सेक्स एजुकेशन जैसे विषय को उस दौर की पृष्ठभूमि में पेश किया गया है। कहानी का रिदम बाकी से अलग है और नक्स वोमिका व बेलाडोना जैसे क्वर्की संदर्भ इसे और खास बनाते हैं। चारों कहानियां एक-दूसरे से मुकाबला नहीं करतीं, बल्कि यह दिखाती हैं कि चाहत को समझने और देखने के कितने अलग-अलग तरीके हो सकते हैं।

लस्ट स्टोरीज 3 यह साबित करती है कि किसी फ्रेंचाइज़ी को अपनी पहचान बनाए रखने के लिए खुद को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं होती। यह नजदीकियों और रिश्तों को एक्सप्लोर करती रहती है, लेकिन चारों फिल्ममेकरों को चार बिल्कुल अलग कहानियां कहने की आजादी देती है। दो सफल अध्यायों के बाद भी यह फॉर्मेट फ्रेश महसूस होता है और अपनी अलग पहचान बनाए रखता है।

Tukaram Mundhe: तुकाराम मुंढे का एक और बड़ा एक्शन! 2,841% वाले मुनाफे पर इस रिपोर्ट से हंगामा

Tukaram Mundhe Action: अपनी कड़क कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बार फिर जबर्दस्त चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल डिवाइस कंपनियों पर चाबुक चलाई है।

महाराष्ट्र एफडीए के एक चौकाने वाले सर्वे में सामने आया है कि अस्पताल जो सर्जिकल सामान (IV सेट्स, सिरिंज, कैथेटर) कौड़ियों के भाव खरीदते हैं, उन पर मरीजों से 2,841% (28 गुना से भी ज्यादा) तक का भारी-भरकम मुनाफा वसूला जा रहा है। तुकाराम मुंढे ने इस ‘अस्पताल लूट’ का कच्चा चिट्ठा केंद्र सरकार के पाले में फेंकते हुए सख्त नियम बनाने की मांग की है।

FDA के सर्वे में आए होश उड़ाने वाले आंकड़े

महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे ‘सर्जिकल आइटम्स की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर’ की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे हर किसी को हैरान कर रहे हैं। IV इंफ्यूजन सेट जिससे सलाइन चढ़ाया जाता है उसे प्राइवेट अस्पताल कंपनियों से महज ₹11.05 में खरीदते हैं, लेकिन मरीज के बिल में एमआरपी चिपकाकर ₹325 वसूले जाते हैं। वैसे ही कैथेटर अस्पतालों को मात्र ₹29.41 में मिलता है, लेकिन मरीज से इसकी कीमत ₹310 ली जाती है।

सिरिंज, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और कैथेटर जैसे रोजमर्रा के मेडिकल सामानों पर खरीद मूल्य और एमआरपी के बीच 2841% तक का विशाल अंतर पाया गया।

तुकाराम मुंढे ने इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) को चिट्ठी लिखकर ट्रेड मार्जिन पर कैपिंग लगाने की मांग की है।

मुंढे ने डे दी सख्त चेतावनी

तुकाराम मुंढे अपने सख्त और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इस मामले पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ कहा, ‘यह केवल कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह मरीज के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा है। अस्पताल में भर्ती लाचार मरीज के पास यह जांचने का कोई जरिया या जानकारी नहीं होती कि उससे जो सामान का दाम वसूला जा रहा है, वह जायज है या नहीं।’

वैसे इस बड़े खुलासे के बाद केंद्र सरकार का प्राइजिंग रेगुलेटर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(NPPA) हरकत में आ गया है। एनपीपीए अधिकारियों के अनुसार, वे कंपनियों की फाइलिंग्स और अंदरूनी रेट लिस्ट का मिलान महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे से कर रहे हैं।

केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल

अधिकारियों ने भी अस्पतालों द्वारा सर्जिकल सामानों पर वसूले जा रहे इस मोटे मार्जिन की शिकायत केंद्र से की है।

नियम क्या कहते हैं और अस्पताल क्या दे रहे सफाई?

ड्रग्स प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत एनपीपीए कुछ जरूरी दवाओं और डिवाइसेस (जैसे- कोरोनरी स्टेंट या नी इम्प्लांट) की अधिकतम कीमत तय करता है। लेकिन गैर-सूचीबद्ध डिवाइसेस पर केवल इतना नियम है कि कोई कंपनी 12 महीने में 10% से ज्यादा एमआरपी नहीं बढ़ा सकती। इसी ढील का फायदा उठाकर कंपनियां शुरू से ही एमआरपी कई गुना बढ़ाकर प्रिंट करती हैं।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, नियमों में पारदर्शिता जरूर होनी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि अस्पतालों को अपना ढांचा, तकनीक और मरीज की सुरक्षा बनाए रखने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत रहना जरूरी है।

एक्शन मोड में ‘सिंघम’ अधिकारी

आईएएस तुकाराम मुंढे अपने पूरे करियर में सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए जाने जाते हैं। इस साल की शुरुआत में ही मुंबई के फूड सेक्टर में चले उनके सख्त चेकिंग अभियान के बाद स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने पर कई बड़े ईटिंग जॉइंट्स और रेस्टोरेंट्स पर ताले लटक गए थे। अब मेडिकल सेक्टर में उनकी इस एंट्री से अस्पतालों और डिवाइस निर्माताओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

अस्पतालों में मिलने वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स पर मार्जिन की कोई सीमा न होना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी कमियों में से एक है। जब तक केंद्र सरकार एनपीपीए के जरिए इन मेडिकल डिवाइसेस पर ट्रेड मार्जिन रशनलाइजेशन लागू नहीं करती, तब तक आम जनता को एमआरपी के नाम पर होने वाली इस लीगल लूट से राहत मिलना मुश्किल है।

Amit Shah UCC: ‘2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC’: अमित शाह का बड़ा ऐलान, बोले- घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्ट करेंगे

Amit Shah UCC: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार (13) को कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP की 25 साल की यात्रा का उल्लेख किया।

‘मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए’

अमित शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि भाजपा-राजग शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”आपको बता दें कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35A को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। गृह मंत्री ने दावा किया कि कश्मीर अब भारत के साथ पूरी तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है और देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

90000 लोगों ने किया सरेंडर

शाह ने कहा, “नौ हजार से अधिक लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। आज हम पूर्वोत्तर को विकास के रास्ते पर लाए हैं।” उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति स्थापित की है। मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने के लिए क्या 1951 को आधार वर्ष माना जाएगा? इस सवाल पर शाह ने कहा कि केंद्र इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों और राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इन मुद्दों पर अपने सहयोगियों और मणिपुर के राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जो भी फैसला होगा, हम आपको बताएंगे।” अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुंबई जैसे शहरों में उनकी पहचान किए जाने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि सरकार उन्हें चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का खुलासा नहीं करेगी।

शाह ने चुटकी लेते हुए कहा, “आप गृहमंत्री से कह रहे हैं कि वह तरीकों को सार्वजनिक कर दें और आपको बता दें कि यह कैसे किया जाएगा। फिर हम उन्हें कैसे पकड़ेंगे? उन्हें भी पता चल जाएगा।”

अवैध घुसपैठियों पर एक्शन

शाह ने देश से अवैध घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें बाहर निकालने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “मैं अपने संकल्प को दोहराता हूं कि हम इस देश के एक-एक अवैध घुसपैठिये की पहचान करेंगे और एक-एक करके उन्हें देश से बाहर भेजेंगे।”

इस दौरान सरकार के एंटी ड्रग्स अभियान पर शाह ने कहा कि उन्होंने हाल में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है।इस अभियान के तहत हर राज्य का दौरा करेंगे। शाह ने कहा कि उन्होंने पिछले दिन एक मुख्यमंत्री से बात की थी। अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए पूरे दिन बैठक की जाएगी।

क्या है UCC?

समान नागरिक संहिता (UCC) का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े समान नागरिक कानूनों की व्यवस्था से है। वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। UCC का उद्देश्य इन व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

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5000 अमेरिकी थाईलैंड पहुंचे, 5 दिन पटाया में छुट्टियां मनाएंगे:9 महीने से USS अब्राहम लिंक पर तैनाती; पुलिस का देह व्यापार के खिलाफ एक्शन

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन बुधवार सुबह थाईलैंड पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट पर पिछले 9 महीनों से 5 हजार सैनिक तैनात हैं। लंबे सैन्य अभियान के बाद अब उन्हें पटाया में करीब 5 दिन की छुट्टी मिलेगी।

USS अब्राहम लिंकन के साथ अमेरिकी नौसेना के दो और जहाज भी पहुंचे हैं। लाम चाबांग पोर्ट पर उतरने के बाद सैनिकों को बसों से करीब 96 किमी दूर पटाया ले जाया जाएगा। हालांकि पटाया पहुंचने से पहले ही थाई पुलिस ने शहर में देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, पुलिस ने पिछले वीकेंड में छापेमारी कर 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया। शहर के समुद्र तट और नाइटलाइफ वाले इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस पटाया में अमेरिकी नौसेना के बड़ी संख्या में जवानों और मरीन के आने से पहले पुलिस ने शहर में छापेमारी और जांच बढ़ा दी है। बार, समुद्र तट और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर पुलिस खास नजर रख रही है। इसी दौरान पब्लिक प्लेस पर ग्राहकों की तलाश करने के आरोप में कम से कम 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। इनमें थाईलैंड के साथ लाओस और युगांडा की महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग कार्रवाइयों में 40 से 50 लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अमेरिकी जवानों के आने से पहले शहर में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अमेरिकी नौसैनिकों को भी ड्रग्स और गांजा बेचने वाली दुकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्हें नाइटलाइफ वाली जगहों पर जाने से नहीं रोका गया है, लेकिन देर रात तक बार और मनोरंजन की जगहों पर रुकने से बचने को कहा गया है। कारोबारियों को बड़ी कमाई की उम्मीद अमेरिकी नौसैनिकों के पटाया पहुंचने से शहर के कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। करीब 5 हजार अमेरिकी जवानों के आने से होटल, रेस्तरां, बार, शॉपिंग और दूसरे पर्यटन कारोबारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर नाइटलाइफ़ और मनोरंजन से जुड़े कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ऐसे समय में बड़ा मौका है, जब पर्यटन कारोबार में पहले जैसी तेजी नहीं है। हजारों अमेरिकी जवान कुछ दिनों के लिए शहर में रहेंगे और इस दौरान खाने-पीने, होटल में ठहरने, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर पैसा खर्च करेंगे। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटल और रेस्तरां तक कई तरह के कारोबारों को फायदा मिल सकता है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक अमेरिकी नौसैनिक रोजाना करीब 1,000 (₹2800) से 3,000 (₹8500) थाई बाहत तक खर्च कर सकता है। इस हिसाब से अगर करीब 5 हजार नौसैनिक शहर में आते हैं तो उनके खर्च से स्थानीय कारोबार में करोड़ों थाई बाहत का पैसा आ सकता है। पटाया और अमेरिकी सेना का पुराना कनेक्शन पटाया शहर का अमेरिकी सेना से रिश्ता 1960 और 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के समय से है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक छुट्टियां मनाने और आराम करने के लिए यहां आते थे। इससे स्थानीय होटल, बार, रेस्तरां और दूसरे कारोबार तेजी से बढ़े। धीरे-धीरे यह छोटा मछुआरा गांव दुनिया भर के पर्यटकों के बीच मशहूर शहर बन गया। यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड क्यों आया? यूएसएस अब्राहम लिंकन हाल ही में वेस्ट एशिया में लंबी तैनाती पूरी करके लौटा है। यह अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जिसने नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताया। इस दौरान यह ईरान से जुड़े तनाव के बीच वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक सेहत और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं। अब थाईलैंड में पांच दिन के इस पड़ाव के दौरान जहाज को जरूरी सप्लाई दी जाएगी, रखरखाव का काम होगा और हजारों नौसैनिकों को लंबे समय बाद आराम का मौका मिलेगा।

आतंकी पम्मा की गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी:तूने 40 गोलियां चलाईं, हम 4 हजार चलाएंगे, मार-मार के छन्नी बना देंगे; ऑडियो लीक से गुस्साया

ब्रिटेन(UK) में बैठे खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी दी है। पम्मा ने कहा कि बहाने से बात कर गोल्डी ने कॉल रिकॉर्डिंग लीक कर दी। कनाडा में हरदीप निज्जर को मरवाकर अच्छा नहीं किया। गोल्डी बराड़ एजेंसियों का बंदा है। पम्मा ने कहा कि गोल्डी बराड़ ने 40 गोलियों की बात की है, हम 4 हजार चलाएंगे और तेरे पूरे शरीर को छन्नी बना देंगे। तुझे निज्जर के कत्ल का हिसाब चुकाना पड़ेगा। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने लॉरेंस के साथ मिलकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का कत्ल कराया था। वहीं परमजीत सिंह पम्मा को जुलाई 2020 में भारतीय गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत आतंकी घोषित किया है। वह NIA की मोस्ट वांटेड सूची में है। NIA के अनुसार उसका संबंध Khalistan Tiger Force (KTF) से रहा है। हरदीप निज्जर भी इसी संगठन से जुड़ा था। इससे पहले सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू भी गोल्डी बराड़ को धमका चुका है। पन्नू ने बदला लेने की धमकी देते हुए कहा था कि गोल्डी FBI, कनाडाई या अमेरिकी अदालतों से बच सकता है लेकिन ‘खालसा न्याय’ से नहीं बच पाएगा। आतंकी पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के लिए क्या-क्या कहा… जिस रिकॉर्डिंग पर पम्मा भड़का, उसमें गोल्डी बराड़ ने क्या कहा था
जिस रिकॉर्डिंग को लेकर पम्मा ने बयान जारी किया, उसमें गोल्डी बराड़ ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। बराड़ ने उसे ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई। उसने दावा किया कि निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन देता था, जो युवाओं को ड्रग्स के कारोबार में धकेलते और उन्हें ब्लैकमेल कर मुखबिर के तौर पर इस्तेमाल करते थे। बराड़ ने निज्जर पर हथियारों की तस्करी से जुड़े लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। बातचीत में उसने कहा कि इन्हीं वजहों से उसकी टीम ने निज्जर को निशाना बनाया। ************ ये खबरें भी पढ़ें: निज्जर हत्याकांड में 2 पंजाबी गैंगस्टर आमने-सामने: अर्श डल्ला बोला- गोल्डी बराड़ का दावा झूठा, इसने सिद्धू मूसेवाला को झूठ बोलकर मारा गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बोला- हरदीप निज्जर को मैंने मरवाया:मेरे भाइयों को मरवाने वाले इसकी कोठी में रहते थे; पहले भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगे थे आतंकी की गोल्डी बराड़ को धमकी- गोली माथे पर लगेगी:कनाडा-अमेरिका की अदालतों से बचोगे, खालसाई इंसाफ से नहीं; निज्जर हत्याकांड पर आमने-सामने

Tukaram Mundhe: “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?” बॉम्बे हाई कोर्ट ने IAS तुकाराम मुंढे के FDI को क्यों लगाई फटकार?

Tukaram Mundhe: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई के दौरान जमकर फटकार लगाई। इसके बाद रेगुलेटर को पुणे में सिप्ला (Cipla) की एक फैसिलिटी और मुंबई में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) परिसर में चल रहे पांच रेस्टोरेंट के खिलाफ जारी आदेश वापस लेने पड़े। कोर्ट ने FDA की आलोचना करते हुए कहा कि उसने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में काम किया।

अदालत ने कहा कि कानून का ठीक से विश्लेषण नहीं किया गया। कोर्ट के मुताबिक एक मामले में तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया। MCA मामले में बेंच ने रेगुलेटर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने के बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला नजरिया अपनाने का आरोप भी लगाया।

‘क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?’

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबसे तीखी टिप्पणी बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में MCA परिसर के पांच रेस्टोरेंट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने FDA के रवैये पर सवाल उठाए। इस दौरान यह बात सामने आई कि एक नए जांच में पाया गया कि ये रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे। कोर्ट ने FDA से पूछा, “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं। आप कुछ भी कर सकते हैं?” साथ ही यह भी पूछा कि विभाग बार-बार बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में क्यों काम करता है।

‘न्यूज 18’ के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी FDA से मामले पर सोच-समझकर और व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। लेकिन आरोप लगाया कि विभाग ने इसके बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला रवैया अपनाया। अदालत ने कहा, “हम हर समय विभाग और अधिकारियों को फटकार लगाकर थक चुके हैं। अब कड़े आदेश जारी करने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझाएं या जेल जाएं।”

कामकाज रोकने का आदेश वापस

इसके बाद FDA ने हाई कोर्ट को बताया कि वह पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोकने का अपना आदेश वापस ले लेगा। साथ ही MCA को नया नोटिस जारी करेगा, ताकि उसे M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट के बारे में जवाब देने का मौका मिल सके। कोर्ट ने इस कदम को मंजूरी देते हुए कहा कि चूंकि रेस्टोरेंट अब फूड सेफ्टी नियमों का पालन कर रहे हैं, इसलिए कामकाज रोकने का आदेश रद्द माना जाएगा। अदालत ने कहा कि अब रेस्टोरेंट फिर से खुल सकते हैं।

‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’

यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। जबकि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसी व्यवस्था को रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है। FDA के फैसला लेने के तरीके पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, “हमें कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि विभाग का हौसला न टूटे? हम क्यों कहते हैं, ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि FDA लागू कानून का ठीक से विश्लेषण किए बिना आदेश क्यों जारी कर रहा था?

सिपला का लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस

दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने FDA को पुणे के वाडकी में सिपला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग सुविधा के दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने के लिए मजबूर किया। ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग और उन्हें वापस मंगाने (रिकॉल) की फॉलो-अप जांच के दौरान कथित उल्लंघन पाए जाने के बाद 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।

कोर्ट ने FDA द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसमें राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक छुट्टी के दिन सुनवाई के लिए कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाने वाला ईमेल भी शामिल था। अदालत ने FDA से कहा, “आप सराहनीय काम कर रहे हैं। लेकिन अब आप हद से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपने गलत किया है, और अब आपको इस मामले को सुलझाना होगा।”

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मुंढे पिछले कुछ दिनों से एफडीए द्वारा मुंबई में खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां (जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं) के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में, एफडीए कमिश्नर ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी।

‘क्या आपको लगता है आप भगवान हैं?’ MCA परिसर में 5 रेस्टोरेंट पर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे HC ने FDA को लगाई फटकार

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को जमकर फटकार लगाई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के BKC परिसर में मौजूद पांच आउटलेट्स के फूड लाइसेंस सस्पेंड करने के उसके आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि FDA ने इस मामले में बहुत जल्दबाजी में कार्रवाई की और व्यावहारिक तरीके से फैसला नहीं लिया।

इस दौरान हाई कोर्ट ने FDA के अधिकारियों के खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ की कार्रवाई की चेतावनी भी दी। यह कार्रवाई तब की गई जब एक नए निरीक्षण में पाया गया कि पांचों रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे, फिर भी विभाग ने उनके फूड लाइसेंस का सस्पेंशन हटाने से इनकार कर दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने फूड लाइसेंस पर लगी रोक हटा दी, जिससे इन रेस्टोरेंट को दोबारा खोलने की अनुमति मिल गई, जबकि FDA अलग से किसी तीसरे पक्ष द्वारा उनके संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच कर रहा है।

पीठ ने कहा कि मामले पर पुनर्विचार करने के अदालत के पिछले निर्देश के बावजूद FDA ने “व्यावहारिक दृष्टिकोण के बजाय किताबी दृष्टिकोण” अपनाया।

‘बहुत जल्दबाजी में की गई कार्रवाई’

बता दें कि MCA ने FDA के उस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसमें साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन और थर्ड-पार्टी ऑपरेशन से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप में पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोक दिया गया था। वहीं, दोबारा जांच के बावजूद, FDA ने सस्पेंशन जारी रखा। उनका तर्क था कि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रहा था, जबकि लाइसेंस MCA के नाम पर थे।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसने FDA अधिकारियों से साफ तौर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। कोर्ट ने कहा, “साफ तौर पर कहने के बावजूद, FDA ने हमारे आदेश को नहीं माना और व्यावहारिक नजरिए के बजाय लकीर का फकीर बनने वाला नजरिया अपनाया। हम हर समय विभाग और अधिकारियों को डांट-फटकार कर थक चुके हैं। अब सख्त आदेश देने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझा लें या जेल जाएं।”

बेंच ने यह भी सवाल किया कि FDA ने कानूनी स्थिति का पूरी तरह से विश्लेषण किए बिना “बेवजह जल्दबाजी” में कदम क्यों उठाया। बेंच ने पूछा, “हम कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करें ताकि विभाग का मनोबल न गिरे? हम क्यों कहते हैं कि मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? क्या आपको लगता है कि आप कोई भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं?”

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की कार्रवाई जारी है। पिछले कुछ हफ्तों में कई खाद्य कंपनियों को नोटिस दिए गए हैं। अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड सामान की बिक्री और नियमों से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियों को लेकर लगातार जांच कर रहे हैं।

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अपनी छापेमारी से देशभर में फेमस हो गए FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे कितना पढ़े-लिखे हैं? जानिए इनके IAS बनने की पूरी कहानी

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के एक अधिकारी हैं, जिनका नाम आजकल पूरे देश की मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। ये महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे हैं। खबरों में इन्हें ‘आईएएस सिंघम’ और ‘एफडीए का टीएन शेषन’ आदि नामों से संबोधित किया जा रहा है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर के तौर पर कार्यरत हैं। राज्य में फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर इनकी कड़ी कार्रवाई ने हर अमले के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। मुंढे ने तय नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी प्रतिष्ठानों के खिलाफ इंस्पेक्शन और कार्रवाई का आदेश दिया है।

मुंढे के पद से ज्यादा उनके तौर तरीके लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निडर और बेबाक अधिकारी अगर अपनी पहुंच और अधिकारों का इस्तेमाल सही तरीके से करने लगता है, तो वह बड़ी से बड़ी तस्वीर को भी आसानी से बदल सकता है। मुंढे ने सिविल सर्विस में दो दशक से ज्यादा समय बिताया है, इस दौरान उन्होंने कड़े प्रशासनिक फैसले लिए और कहा जाता है कि 20 साल की सेवा में उनका लगभग 25 बार ट्रांसफर हुआ है।

कौन हैं आईएएस ऑफिसर तुकाराम मुंढे?

3 जून, 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में जन्मे तुकाराम मुंढे ने अपनी पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से शुरू की। एक गांव के स्कूल से भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर रैंक तक के उनके सफर ने उनके करियर को खास बना दिया है। बीड में अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद, मुंढे उच्च शिक्षा के लिए औरंगाबाद चले गए। उन्होंने हिस्ट्री में बैचलर डिग्री पूरी की और बाद में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का सफर आखिरकार उन्हें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक ले गया, जिसे उन्होंने 2004 में 20 की शानदार ऑल इंडिया रैंक के साथ पास किया।

2005 बैच के आईएएस अधिकारी मुंढे

मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के ऑफिसर के तौर पर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हुए। 2011 में, मुंढे ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से क्राइसिस, इमरजेंसी और डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में कई मुश्किल प्रशासनिक काम संभाले हैं, जिससे उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी है जो लंबी सोच-विचार के बजाय एक्शन लेना पसंद करते हैं।

तुकाराम मुंढे अब खबरों में क्यों हैं?

मई 2026 में मुंढे को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का कमिश्नर बनाया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोस्टिंग उनके 21 साल से ज्यादा के करियर में उनका 25वां ट्रांसफर था। चार्ज संभालने के बाद से, उन्होंने फूड सेफ्टी नियमों के पालन की जांच के लिए रेस्टोरेंट, फूड आउटलेट, वेयरहाउस और दूसरी जगहों का इंस्पेक्शन बढ़ा दिया है। यह कैंपेन तेजी से बढ़ रहे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले बिजनेस तक भी बढ़ा है। एफडीए की तीखी कार्रवाई की वजह से खाद्य सुरक्षा आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

पानी बचाने से लेकर फूड सेफ्टी तक

मुंढे की सख्त प्रशासक की इमेज उनके मौजूदा एफडीए कार्यकाल से पहले की है। सोलापुर कलेक्टर के तौर पर अपने समय के दौरान, वे पानी बचाने की कोशिशों और गांवों की पानी के टैंकरों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों से जुड़े। काम करने के उनके तौर-तरीकों और समस्या के पूरे समाधान पर फोकस ने उन्हें महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी से बाहर पहचान दिलाई। उनके करियर में उन्हें बार-बार ऐसे पद मिले हैं जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा और विवाद भी। औचक निरीक्षण, एनफोर्समेंट ड्राइव और ग्राउंड पर साफ मौजूदगी ने उनकी इमेज को एक ऐसे ऑफिसर के तौर पर बनाया है जो मुश्किल फैसले लेने से पीछे नहीं हटते।

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Rohullah Mehdi Arrested: रोहुल्लाह मेहदी मुंबई ड्रग्स केस में गिरफ्तार, शाहिद कपूर की फिल्म ‘देवा’ में आ चुके हैं नजर

Rohullah Mehdi Arrested: सोशल मीडिया के ज़रिए चल रहे कथित ड्रग्स नेटवर्क के मामले में मुंबई के मीरा रोड इलाके के काशीमीरा में एक्टर और मॉडल रोहुल्लाह मेहदी को गिरफ़्तार किया गया है। काशीमीरा पुलिस क्राइम ब्रांच ने लगभग 5.60 लाख रुपये कीमत की 28 ग्राम MD ड्रग्स जब्त की और दो लोगों को गिरफ़्तार किया। FIR नंबर 437/2026 के मुताबिक, मेहदी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें स्नैपचैट, वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए MD ड्रग्स बेचे जाने की जानकारी मिली थी। इस जानकारी के आधार पर, अधिकारियों ने एक नकली ग्राहक का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कासिफ़ नाम के एक व्यक्ति को 28 ग्राम MD की डिलीवरी के लिए दहिसर चेक नाका इलाके में ठाकुर मॉल के पास बुलाया गया। पुलिस ने उसे कथित ड्रग डील के दौरान पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर मेहदी का नाम लिया।

जानकारी मिलने पर पुलिस ने मलाड में एक स्टूडियो के बाहर से मेहदी को गिरफ़्तार किया, जहां वह शूटिंग कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, मेहदी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले का रहने वाला है और मुंबई के गोरेगांव में रह रहा था। उसने शाहिद कपूर के साथ फ़िल्म ‘देवा’ में काम किया है और कई वेब सीरीज़ में भी नज़र आया है।

गिरफ़्तारी के बाद मेहदी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब कथित ड्रग नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेहदी ने किसे ड्रग्स सप्लाई किए होंगे। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री के और लोग भी इस मामले से जुड़े हैं।

यह ऑपरेशन DCP ज़ोन-1 राहुल चव्हाण की देखरेख में काशिमीरा पुलिस टीम ने चलाया। पुलिस ने कहा कि जांच चल रही है और और भी नाम सामने आ सकते हैं।