छात्र आंदोलन को पाकिस्तानी समर्थन के दावे पर भारत बोला:पाकिस्तानी सीमा पर आतंकवाद बंद करे, इंडियन GenZ भी यही चाहते हैं

भारत सरकार ने मंगलवार को उन खबरों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान के कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और GenZ समूहों ने दिल्ली में हुए CJP के छात्र आंदोलन का समर्थन किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद है। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर्स ने समर्थन किया था पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने CJP आंदोलन के समर्थन में पोस्ट किए थे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास का जिक्र करते हुए छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई। इंस्टाग्राम पर करीब तीन लाख फॉलोअर्स वाले पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बिलाल हसन ने वीडियो जारी कर कहा कि दोनों देशों के बीच नफरत फैलाई गई है, लेकिन पाकिस्तान के लोग आंदोलन के पोस्टर, नारों और संदेशों को समझते हैं। उन्होंने कहा, “हम खुद को इस आंदोलन में देखते हैं। आखिर हम एक बंटे हुए परिवार के बच्चे हैं।” उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बहादुर बताया और कहा कि वे अपने देश का बेहतर भविष्य चाहते हैं। साथ ही छात्रों से अपील की कि वे एकजुट रहें और कोई भी जोखिम सोच-समझकर उठाएं। पाकिस्तानी क्रिएटर्स ने मीम्स और वीडियोज भी बनाए कई पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स ने आंदोलन पर वीडियो भी बनाए। कुछ ने मजाक में कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा रोक रही है। कुछ लोगों ने पाकिस्तानी पासपोर्ट के साथ प्रदर्शन में पहुंचने की कल्पना वाले वीडियो बनाए। एक अन्य वीडियो में एक पाकिस्तानी महिला ने कहा कि भारत के GenZ की वजह से उसके लिए भारत से नफरत करना मुश्किल होता जा रहा है। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर महविश एजाज ने भी छात्र आंदोलन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों की संघर्ष की कहानियों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। वहीं, एक दूसरे पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर अहसान मिर्जा ने कहा, “छात्रों को हमेशा छात्रों का साथ देना चाहिए। हम एक जैसे हैं। हमारे पूर्वजों ने एक ही रोटी खाई और अंग्रेजों के खिलाफ साथ लड़ाई लड़ी।” पाकिस्तान से चल रहे 480 से ज्यादा हैंडल्स पर सरकार की नजर पाकिस्तानी सरकार ने छात्र आंदोलन पर टिप्पणी नहीं की कुछ दिन पहले ही, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस आंदोलन पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से पूछा गया था कि क्या भारत में प्रदर्शनकारियों के साथ हुआ व्यवहार मानवाधिकार उल्लंघन माना जा सकता है। इस पर अंद्राबी ने कहा, “यह भारत का आंतरिक मामला है। हम ऐसे मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।” NEET पेपर लीक विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और खास तौर पर NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक प्रदर्शन किया। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। आंदोलन में छात्र आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया। बाद में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने धरना खत्म करने का ऐलान किया।

बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

controversial statement

भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

असम और बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR वापस, क्या बोली दिल्ली पुलिस?

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असम की हिमंता बिस्वा सरकार और बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने का एलान किया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया कि जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। ALSO READ: बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…

 

दिल्ली पुलिस का कहना है कि केवल उन ही मामले में एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर संबंधी मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

 

क्या है बिहार सरकार का फैसला

बिहार सरकार ने कहा है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। आंदोलन में नामित लोगों के खिलाफ भविष्य में भी कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

 

असम में रिहा होंगे प्रदर्शनकारी

असम के राज्य के गृह विभाग ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। कानून के अनुसार मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि गिरफ्तारियों की समीक्षा की जाएगी और हिरासत में लिए गए लोगों को जरूरी प्रक्रियाओं के बाद रिहा कर दिया जाएगा। 26 जुलाई को शाम 6 बजे तक पुलिस ने राज्य में 5 मामले दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था।

 

सीजेपी की चेतावनी

गौरतलब है कि काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में प्रेस कान्फ्रेंस कर प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताई थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि मंगलवार तक मांग पूरी न हुई तो फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड
 

सिब्बल ने जताई आशंका

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस आंदोलनकारी छात्रों को अपना निशाना बना सकती है। जहां-जहां छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, वहां-वहां उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की, ताकि कानूनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ी जा सके।

CJP प्रोटेस्ट: PM मोदी पर विवादित पोस्ट पर एक्शन? सोशल मीडिया से हटवा रही पुलिस

दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों और अलग-अलग कई संगठनों के पेपर लीक से जुड़े प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए थे। दिल्ली पुलिस उन सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। प्रदर्शन में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर भद्दी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने NEET-UG से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर निगरानी और कड़ी कर दी है।

दिल्ली पुलिस ले रही एक्शन 

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक या आपत्तिजनक टिप्पणी वाले पोस्ट और वीडियो हटाए जाएं। यह कदम जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद उठाया गया है। इन घटनाओं के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्ट की संख्या बढ़ी है। साइबर निगरानी के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजे हैं। इनमें ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने को कहा गया है, जो कानून के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

कई पोस्ट और वीडियो हटाए गए

अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद कई आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं। हालांकि, पुलिस की निगरानी अभी भी लगातार जारी है। पुलिस के मुताबिक, साइबर और सोशल मीडिया की विशेष टीमें 24 घंटे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही हैं। उनका उद्देश्य ऐसे नए पोस्ट और वीडियो की पहचान करना है, जिन पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी उस समय और बढ़ा दी, जब 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी थी। उस दिन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में हजारों छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई थी।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को हुई झड़प में करीब 130 पुलिसकर्मी और 65 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने हिंसा से जुड़े 15 एफआईआर दर्ज किए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष लगातार संसद में इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहा है।

सोमवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में कामकाज रोककर चर्चा कराने का नोटिस दिया। उन्होंने इस पूरे मामले पर तुरंत बहस कराने और सरकार से जवाब देने की मांग की। इस बीच, जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, इलाके में करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आंदोलन तेज होने के बाद से यहां हर दिन हजारों छात्र और उनके समर्थक जुट रहे हैं।

CJP ने फिर दी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी, सरकार की वादाखिलाफी पर भड़की पार्टी, एक्स पर क्या बोले आशुतोष रांका

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया गया है।

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CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों की निगरानी की जा रही है और उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। रांका ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक सहायता देने वाले स्वयंसेवकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।

FIR वापस लेने और छात्रों की रिहाई की मांग

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CJP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां या भाजपा-शासित अथवा सहयोगी राज्यों की पुलिस छात्रों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करे।

 

आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

 

आशुतोष रांका ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो CJP फिर से आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस या सरकारी एजेंसियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दिल्ली पुलिस 2022 की तरह CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से वापस लेगी केस? सामने आया बड़ा अपडेट्स

Delhi Police: संसद परिसर के हाल में और जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए दिल्ली पुलिस वर्ष 2022 में अपनाई गई प्रक्रिया को दोहरा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। मंगलवार 28 जुलाई तक इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के दौरान दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी मॉडल को इस बार भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, उस समय पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को भेजा था। इसके बाद फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास पहुंची। गृह मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई। फिर 28 फरवरी को एलजी कार्यालय लौटने पर उसी दिन उसे मंजूरी मिल गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों से मांगी राय 

अब संसद प्रदर्शन से जुड़े मामलों में भी दिल्ली पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से राय मांगी है कि FIR वापस लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाए। एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को रद्द (Quash) कराने का अनुरोध करे।

15 FIR दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका गंभीर नहीं पाई गई है। उन्हें फिलहाल जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, आपराधिक साजिश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।

 पुलिस ने उठाकर मसूरी छोड़ दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों को खाना देने वाले एक स्वयंसेवक जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, आंखों पर पट्टी बांधी गई और अगले दिन उन्हें उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।

जुनैद के अनुसार, पुलिस ने उनसे खाना बांटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता और इतने बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था के बारे में सवाल पूछे। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद ने दावा किया कि उन्हें भोजन और पानी समर्थकों से मिलने वाले दान और डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था।

पीएम मोदी के मामले में होगी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि पुलिस ऐसे पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर सकती है।

सूत्र ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड की गई सामग्री की समीक्षा के बाद पुलिस अपमानजनक प्रकृति की पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी करेगी।” उन्होंने कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने का अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है।”

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सूत्र के मुताबिक, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी सामग्री में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने होने की आशंका थी। सूत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नजर रखे हुए है, ताकि विरोध-प्रदर्शन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की पहचान की जा सके।

Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

top news 27 july Photo : AI Generated

Top News 27 July : संसद में आज पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस। सोनम वांगचुक को आज अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड। 27 जुलाई की बड़ी खबरें :
 

संसद में पेपर लीक संशोधन बिल

मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे संसद में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होने के बाद संसद में सोमवार से विपक्ष युवाओं पर लाठीचार्ज के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाएगा। विपक्ष आज राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को भी सदन में उठा सकता है।

 

सोनम वांगचुक को मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। वह लद्दाख रवाना होने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट जाएंगे। नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक ने किया था 26 दिन का अनशन। 

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए ऐसे कंटेंट की पहचान कर संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

 

मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड, भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांता सिंह ने जीता रजत पदक। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया। 

Bhumi Pednekar: ‘आज हमारे… लिए एक बहुत बड़ा पल है’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भूमि पेडनेकर ने शेयर किया नोट

Bhumi Pednekar: एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और कहा कि यह पल एक मज़बूत और निष्पक्ष भारत की शुरुआत का प्रतीक है। एक्ट्रेस ने यह उम्मीद भी जताई कि यह अहम पल कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक सार्थक बदलाव लाएगा।

उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि इससे हमारा भारत और मज़बूत और बेहतर बनेगा। आज हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत अहम पल है। ऐसे नागरिक जिन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी लीडरशिप जिसने उनकी बात सुनी। युवाओं ने अपनी बात रखी; उनका पक्का इरादा, उनकी हिम्मत और बदलाव की ताकत में उनका भरोसा वाकई प्रेरणा देने वाला था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस मंच पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन आखिर में वही आवाज़ गूंजी जो छात्र सही मायने में चाहते थे। मेरे लिए, जवाबदेही का मतलब है असल और समाधान-केंद्रित बदलाव लाना। कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करना। ऐसा असली सुधार जो सच में हमारे छात्रों के भविष्य की चर्चा पर असर डाले। मुझे लगता है कि हर भारतीय के लिए—चाहे आप किसी सरकारी पद पर हों या आम नागरिक—देश, उसकी खुशहाली, उसके लोग और उसकी सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। जय हिंद।”

राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच हफ़्तों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों और लगातार जन-आंदोलन के बाद, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया। छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों, खासकर NEET-UG पेपर लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। उनका इस्तीफ़ा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद आया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और नाराज़ नागरिक बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर छात्रों का समर्थन करने के लिए उमड़ पड़े।

ये विरोध-प्रदर्शन दिल्ली से पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। 18 जुलाई की सुबह, सोनम वांगचुक को 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं।

दिल्ली के इस इलाके में फूड डिलीवरी और ई कॉमर्स सर्विस बंद? जानें दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी में क्या

दिल्ली पुलिस ने राजधानी के दिल्ली के कुछ हिस्सों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों को देखते हुए नई दिल्ली जिला, जंतर-मंतर, संसद, सेंट्रल विस्टा और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में बिना जरूरत यात्रा करने से बचें। पुलिस ने ऑनलाइन ऐप आधारित टैक्सी और अन्य सेवाएं देने वाली कंपनियों से भी इन क्षेत्रों में अपने संचालन को जरूरत के अनुसार नियंत्रित रखने को कहा है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह एडवाइजरी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और इलाके में बढ़ती भीड़ को देखते हुए जारी की गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी यात्रा की योजना बना लें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

सेंट्रल दिल्ली में लागू पाबंदियां, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

दिल्ली पुलिस ने बताया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा के मद्देनजर सेंट्रल दिल्ली के तय इलाकों में प्रतिबंध लागू किए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि बहुत जरूरी काम न होने पर इन क्षेत्रों में जाने से बचें और जहां संभव हो, वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, दमकल विभाग और अधिकृत सरकारी वाहनों जैसी सभी आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह बिना किसी रोक-टोक के चलती रहेंगी।

इसके साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल सरकारी व आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की गई है। वाहन चालकों से धैर्य रखने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का सहयोग करने को कहा गया है, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

ऐप आधारित सेवाओं के लिए भी पुलिस की सलाह

दिल्ली पुलिस ने ऐप आधारित सेवाएं देने वाली कंपनियों, जैसे ऑनलाइन टैक्सी, फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों से भी प्रतिबंधित इलाकों में अपने कामकाज को नियंत्रित करने को कहा है। पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक, कंपनियां जरूरत पड़ने पर जियो-फेंसिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं या जहां संभव हो, वहां कुछ समय के लिए अपनी सेवाएं बंद रख सकती हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही कम करना और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि इन कदमों का मकसद ड्राइवरों, डिलीवरी पार्टनर्स और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इससे प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी मदद मिलेगी। किसी भी तरह की जानकारी या सहायता के लिए लोग दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन 112 या अन्य आधिकारिक माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं।

NEET प्रोटेस्ट में महिला पुलिसकर्मी के पेट में बच्चे ने तोड़ा दम? दिल्ली पुलिस ने बताया पूरा सच

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस खबर को “पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला” बताया, जिसमें दावा किया गया था कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी का गर्भपात हो गया।

यह दावा तब फैलना शुरू हुआ, जब घायल महिला पुलिस अधिकारी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि महिला अधिकारी चार महीने की गर्भवती थी और प्रदर्शन स्थल पर हुई हिंसा के दौरान उनका गर्भपात हो गया।

हालांकि, पुलिस अधिकारी ने इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि ये तस्वीरें उस समय की हैं, जब प्रदर्शन के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति में महिला अधिकारी घायल हो गई थीं।

ऑनलाइन फैल रहे दावों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा, “संबंधित महिला न तो शादीशुदा हैं और न ही गर्भवती हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और वह मेडिकल निगरानी में हैं।”

इस दौरान दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी को सोशल मीडिया पर पोस्ट और शेयर न करें।

छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन?

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से देश में NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।

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