सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के 30 से ज्यादा जिले, जानें कैसे एक जिले को किया जाता है सूखाग्रस्त घोषित

महाराष्ट्र ने अपने 358 तालुकों में से 265 तालुकों (यानी राज्य के 74% तालुकों) को सूखा-प्रभावित घोषित किया है। सूखे की स्थिति की पहचान करने और राहत के उपाय शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने ‘सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016’ (जिसे 2020 में अपडेट किया गया था) और ‘सूखा प्रबंधन कोड’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ को लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ महाराष्ट्र के सूखा आकलन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब किसी इलाके में बारिश में 25% से ज्यादा की कमी हो और साथ ही कम से कम 21 दिनों तक सूखा मौसम (बिना बारिश वाला समय) रहा हो। आइए अब समझते हैं कि कोई राज्य कैसे तय करता है कि किसी इलाके में सूखा पड़ा है।

सूखा क्या है?

सूखा पानी की कमी का एक लंबा दौर होता है। सरकारें यह तय करने के लिए मापने लायक पैमानों का इस्तेमाल करती हैं कि कब सूखे का दौर इतना गंभीर हो गया है कि सरकारी दखल की जरूरत है। बारिश इनमें से एक अहम पैमाना है। अनुमानित बारिश की कमी और सूखे के दौर की अवधि का आकलन करते हैं।

कोई राज्य कैसे तय करता है कि किसी इलाके में सूखा पड़ा है?

राज्य मौसम, खेती और पानी की उपलब्धता से जुड़े पैमानों का इस्तेमाल करके यह तय करता है कि क्या बारिश की लंबी कमी से हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकारी दखल की जरूरत है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया में बारिश की कमी और सूखे के लंबे दौर का आकलन किया जाता है और फिर फसलों और जल संसाधनों पर उनके असर का मूल्यांकन किया जाता है।

राज्य का सूखा प्रबंधन ढांचा प्रभावित इलाकों की पहचान करने के लिए तय “ट्रिगर्स” (संकेतों) का इस्तेमाल करता है। इसके बाद नुकसान के स्तर और ज़रूरी राहत का पता लगाने के लिए ज़मीनी स्तर पर आकलन किया जाता है। राज्य का सूखा प्रबंधन ढांचा प्रभावित इलाकों की पहचान करने के लिए तय “पैमानों” (ट्रिगर्स) का इस्तेमाल करता है। इसके बाद नुकसान का दायरा और ज़रूरी राहत तय करने के लिए जमीनी स्तर पर जांच की जाती है।

ध्यान में रखी जानें वाली बातें

बारिश- सामान्य स्तर की तुलना में कितनी बारिश हुई है।

सूखे का दौर- क्या लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।

फसल की स्थिति- क्या कम या असमान बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है।

मिट्टी में नमी- क्या मिट्टी में फसल के लिए पर्याप्त नमी है।

पानी की उपलब्धता- भूजल और सतही जल स्रोतों की स्थिति, जिसमें पीने के पानी और सिंचाई पर उनके असर शामिल हैं।

जमीनी स्तर पर जांच- अधिकारी प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते हैं और राहत तय करने से पहले फसल के नुकसान का ब्योरा तैयार कर सकते हैं।

पूरे राज्य को सूखाग्रस्त क्यों घोषित नहीं किया जाता?

अलग-अलग जगहों पर सूखे की स्थिति काफी अलग हो सकती है। एक ही राज्य में, एक तालुका में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है और फसल को नुकसान हो सकता है, जबकि दूसरे में पर्याप्त बारिश हो सकती है। इसीलिए सूखे की जांच तालुका या स्थानीय स्तर पर की जा सकती है, न कि पूरे राज्य को एक साथ इसमें शामिल किया जाता है।

सूखा घोषित होने के बाद क्या होता है?

घोषणा के बाद तय राहत उपाय लागू किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में, इनमें फसल-ऋण का पुनर्गठन, जमीन के लगान में छूट, खेती के लिए बिजली में छूट, और पीने के पानी व चारे की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं। सूखा घोषित करना और फसल के नुकसान का व्यक्तिगत मुआवजा मिलना, जरूरी नहीं कि एक ही बात हो। महाराष्ट्र ने कहा है कि फसल के नुकसान के लिए मदद तय करने से पहले वह ज़मीनी स्तर पर फसल की जांच करेगा।

महाराष्ट्र सरकार ने 358 तालुकों में 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे।

शुक्रवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुका मे राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा आ गया है।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा।

राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे।

कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकाओं की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है।

छत्रपति संभाजीनगर मंडल में जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड़, परभणी और हिंगोली जिले शामिल हैं, जबकि बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम और यवतमाल जिले अमरावती मंडल के अंतर्गत आते हैं।

नागपुर मंडल में वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली शामिल हैं।

नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में 49 तालुका और पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में 35 तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने फडणवीस के हवाले से कहा, “सूखे की स्थिति में हमारे राहत कार्यों के केंद्र में किसान, खेतिहर मजदूर और अन्य कामगार हैं। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।

सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें। ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं।

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सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सुगम करना, खेती से जुड़े ऋण की वसूली को टालना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट आदि शामिल है।

सरकारी प्रस्ताव में कहा गया कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ़ कर दिए गए थे और नयी घोषित छूट प्रभावित इलाकों में इससे ज़्यादा क्षमता वाले पंपों पर लागू होगी।

इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ज़्यादा से ज़्यादा काम उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, ज़रूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजना और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है।

प्रस्ताव के अनुसार, खेती पर निर्भर किसानों और मज़दूरों के लिए अनाज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम भी किया जाएगा।

सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।

शनिवार को जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि सूखा प्रभावित 265 तालुकों में किसानों को फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने के संबंध में, तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक अलग सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।

इस बीच, विपक्षी दलों ने सूखा घोषित करने में देरी के लिए राज्य सरकार की आलोचना की और दावा किया कि जमीनी हालात कहीं ज्यादा खराब हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि फडणवीस ने पहले विपक्ष पर सूखे के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर ‘ट्रिगर-1’ के तहत घोषित कर दिया है, जबकि जमीनी हालात पहले से ही ‘ट्रिगर-3’ के तहत तय मानकों से भी ज्यादा खराब हैं।

शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को अब राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर प्रभावित किसान को मदद मिले।

सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर रहे ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “चाहे इसमें (सूखा घोषित करने में) देरी हुई हो या इसे कब घोषित किया जाना चाहिए था… हम लगातार मांग कर रहे थे कि सूखा पहले घोषित किया जाए। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक ने इसे घोषित कर दिया।”

उन्होंने कहा, “अब जब इसकी घोषणा हो चुकी है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूखे से राहत के पूरे पैकेज के तहत दी जाने वाली हर मदद हर किसान को मिले।”

किसान सभा ने मांग की कि लगातार दो खरीफ सीजन में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए, जिसमें कर्ज माफी और फसल बीमा कवरेज के आधार पर मुआवजा शामिल हो।

अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है।

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महाराष्ट्र में 1972 से भी ज्यादा गंभीर सूखे की आशंका, सोलापुर में सिर्फ 48.65% बारिश, किसानों पर कितना बड़ा संकट?

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले पर सूखे का बड़ा संकट मंडरा रहा है। जिले में इस बार औसत बारिश का सिर्फ 50% ही बरसा है, जिससे खेतों में दरारें पड़ गई हैं। हालात का जायजा लेने खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 23 सितंबर को सोलापुर पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने दौरा करने के बाद कहा कि मौजूदा हालात 1972 के ऐतिहासिक सूखे से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। सोलापुर इस समय राज्य का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बन गया है।

जिले में औसत बारिश का सिर्फ करीब 50 फीसदी पानी ही बरसा है। इसकी वजह से खरीफ की सभी फसलों को नुकसान हुआ है। बार्शी और धनोर इलाके में करीब 90 हजार हेक्टेयर में लगी सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई है, जबकि कई चीनी उत्पादक इलाकों में गन्ने की फसल रुक गई है।

किसानों के लिए सरकार ने की ये तैयारी

फडणवीस ने किसानों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है। सरकार की पहली प्राथमिकता पीने के पानी को बचाना है। इसके अलावा फसल नुकसान, पशुओं के चारे, फसल बीमा, आर्थिक मदद और अनाज की व्यवस्था को लेकर भी योजना बनाई जा रही है। सूखे को लेकर सरकार की ओर से जल्द नोटिफिकेशन या प्रस्ताव जारी करने की बात भी कही गई है।

सूखे से मछली पालन भी प्रभावित

बारिश की कमी का असर अब खेती के साथ मछली पालन पर भी दिखाई दे रहा है। कम पानी की वजह से तालाबों और जलाशयों में मछली पालन मुश्किल हो रहा है। इससे मछली उत्पादन के साथ मछुआरों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

सूखे की स्थिति को लेकर कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक भी हुई। इसमें अधिकारियों से फसल नुकसान का सर्वे जल्द पूरा करने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों की स्थिति का सही पता चल सके। इसके अलावा जल संरक्षण के कामों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

महाराष्ट्र UCC पैनल में विवाद: सार्वजनिक फीडबैक पर मतभेद के बाद जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा, प्रक्रिया पर उठाए सवाल

UCC Panel Shock In Maharashtra: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित समिति में अब मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने समिति से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आम लोगों से सुझाव और फीडबैक लेने की प्रक्रिया को लेकर असहमति जताई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने के लिए जुलाई 2026 में सात सदस्यीय समिति बनाई थी।

खास बात यह है कि इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। इस समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। जस्टिस चव्हाण ने कमिटी की ऑनलाइन मीटिंग के कुछ घंटे बाद 19 सितंबर को अपना इस्तीफा भेज दिया। राज्य सरकार ने सोमवार 21 सितंबर को इसे मंजूरी दे दी।

क्या है पूरा विवाद?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद का हवाला दिया है। उनका कहना है कि समिति को पहले क्वेश्चनेयर (Questionnaire) को अंतिम रूप देना था। लेकिन समिति की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई की ओर से कथित तौर पर क्वेश्चनेयर पहले ही जारी कर दी गई। चव्हाण ने समिति की बैठक में एक ऐसे व्यक्ति की कथित मौजूदगी और भूमिका पर भी सवाल उठाया, जो समिति का सदस्य नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, चव्हाण ने इसके बाद 19 सितंबर को अपना इस्तीफा दिया।

समिति को भेजे अपने ईमेल में जस्टिस चव्हाण ने कहा कि मीटिंग के एजेंडा में से एक UCC पर लोगों की राय जानने के लिए क्वेश्चनेयर (questionnaire) को अंतिम रूप देना था। उन्होंने कहा, “तीन सदस्यों ने अपनी बात रखने की कोशिश की, जैसे कि जवाब देने वालों को सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देना हो, या फिर सदस्य डॉ. सुवर्णा रावल की देखरेख में प्रोफेसरों से क्वेश्चनेयर की जल्द और पेशेवर तरीके से जांच करवाई जाए।”

उन्होंने आगे लिखा, “माननीय चेयरपर्सन पहले ही अपने द्वारा तैयार की गई क्वेश्चनेयर सभी को भेज चुकी थीं और कहा था कि वेबसाइट तैयार होने पर इसे अपलोड कर दिया जाएगा। इस तरह, आज की मीटिंग के एजेंडा का तीसरा और आखिरी मुद्दा पूरा हो गया। इसलिए, समय और इंटरनेट बचाने के लिए मैंने लॉग-आउट कर दिया।”

सात सदस्यीय समिति में कौन-कौन?

महाराष्ट्र सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी सिफारिशें देने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई है। चव्हाण के इस्तीफे के बाद समिति की संरचना में बदलाव आया है। इसमें जस्टिस रंजना देसाई के अलावा ये लोग भी शामिल हैं:-

  • जस्टिस आरसी चव्हाण- पूर्व बॉम्बे हाई कोर्ट जज
  • जस्टिस एसजी मेहरे- पूर्व हाई कोर्ट जज
  • डीके जैन- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव
  • वीरेंद्र सराफ- पूर्व एडवोकेट जनरल
  • रमेश पतांगे- संवैधानिक विशेषज्ञ
  • सुवर्णा रावल- शिक्षाविद

UCC पर महाराष्ट्र सरकार की क्या प्लान है?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 सितंबर को कहा था कि समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के बाद सरकार UCC को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सरकार ने संकेत दिया है कि UCC से जुड़ा विधेयक विधानसभा के नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। समिति को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।

जनता की राय लेने की प्रक्रिया क्यों अहम?

UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। ऐसे में समिति द्वारा आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव लेने की प्रक्रिया उसके मसौदे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी प्रक्रिया को लेकर समिति के भीतर मतभेद सामने आने से महाराष्ट्र की UCC प्रक्रिया पर अब ध्यान और बढ़ गया है। हालांकि, इस्तीफा समिति की अंतिम सिफारिशों या प्रस्तावित UCC के अंतिम स्वरूप का संकेत नहीं है। ये चीजें समिति की आगे की कार्यवाही और रिपोर्ट से स्पष्ट होंगी।

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Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ की टीम ने दिल्ली में HM अमित शाह से की मुलाकात, 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है फिल्म

Hanuman Ansh: बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ ने शानदार कमाई की है। इस सफलता के बाद फिल्म की टीम ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात में फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और लीड एक्टर शोभिनव सत्या भी मौजूद थे।

अमित शाह से की मुलाकात

जानकारी के मुताबिक बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने नीम करोली बाबा के बारे में बहुत सम्मानीय बातें कीं। वहीं उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं के बारे में अपनी जानकारी साझा की। उन्होंने फिल्म बनाने वालों को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर लाने का काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

‘रामबोला’ के बारे में दी जानकारी

विशाल के साथ प्रोड्यूसर महावीर जैन भी अमित शाह से मिलने पहुंचे थे, जिन्होंने शाह को उनके अगले प्रोजेक्ट ‘रामबोला’ के बारे में बताया। रामबोला फिल्म गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और विरासत पर आधारित है।” ‘रामबोला’ का ऐलान इसी महीने की शुरुआत में किया गया था। इसे विशाल चतुर्वेदी लिखेंगे और डायरेक्ट करेंगे। वहीं महावीर इसके को-प्रोड्यूसर होंगे।

इन लोगों से भी हो चुकी है मुलाकात

इससे पहले ‘हनुमान अंश’ की टीम कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात कर चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में टीम ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसके बाद मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की थी।

7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज थिएट्रिकल सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। लगभग ₹2 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में धीमी रही, लेकिन लोगों की बातचीत (वर्ड ऑफ माउथ) से इसे गति मिली और चौथे हफ्ते से इसमें जबरदस्त उछाल आया। इसने दुनिया भर में ₹300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

Hanuman Ansh: सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की, शेयर किया वीडियो

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार धूम मचा रही है। भले ही फिल्म की शुरुआत धीमी रही, लेकिन दूसरे वीक में इसने रफ्तार पकड़ी तब से यह सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की इस कामयाबी के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में अपने आवास ‘वर्षा’ पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की।

टीम के साथ मुलाकात के बाद CM फडणवीस ने एक वीडियो शेयर किया और दिल से एक नोट लिखा। मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए फडणवीस ने लिखा- “कल शाम गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए ‘हनुमान अंश’ की टीम का ‘वर्षा’ में स्वागत करना बहुत अच्छा लगा। विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम को उनके शानदार काम के लिए बधाई दी और उनके सभी प्रयासों में और सफलता की कामना की!”

सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार ‘हनुमान अंश’ ने 43वें दिन भारत में 5 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे इसका भारत में नेट कलेक्शन 248.38 करोड़ रुपये हो गया। फिल्म ने शुक्रवार को कुल मिलाकर 18.72% ऑक्यूपेंसी दर्ज की, जिसमें नाइट शो में सबसे ज्यादा 27.08% ऑक्यूपेंसी रही। फिल्म ने 43वें दिन विदेशी बाजारों से भी 1.25 करोड़ रुपये कमाए, जिससे इसका विदेशी ग्रॉस कलेक्शन 23 करोड़ रुपये हो गया। इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन 293.30 करोड़ रुपये है, जिससे इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 316.30 करोड़ रुपये हो गया है।

अपने छठे वीक में, ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 80.25 करोड़ रुपये की कमाई की। इसने 36वें दिन 10.50 करोड़ रुपये, 37वें दिन 18.50 करोड़ रुपये और 38वें दिन 22.50 करोड़ रुपये कमाए। इसके बाद 39वें और 40वें दिन 8.25-8.25 करोड़ रुपये, 41वें दिन 6 करोड़ रुपये और 42वें दिन 6.25 करोड़ रुपये की कमाई की।

‘हनुमान अंश’ विशाल चतुर्वेदी की किताब ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ’ (Divine Detour: That Changed My Life) पर आधारित है। यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी है। फिल्म में शोभिनव सत्या और चंदन आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म आजादी से पहले के भारत में रहने वाले लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की कहानी है, जो अपनी मां की मौत के बाद भगवान की तलाश में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत की उनकी यात्रा उन्हें अंतत नीम करौली बाबा के रूप में बदल देती है। फिल्म की कास्ट में अनिल रस्तोगी, सुगंधा मल्होत्रा, भगवानदास पटेल और नेहा परांजपे भी शामिल हैं।

यह फिल्म 7 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और यह एक नियोजित ट्राइलॉजी की पहली फिल्म है। इस फिल्म को विशाल चतुर्वेदी ने अपने बैनर, स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के तहत लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया है।

Gala Dinner: PM मोदी के गाला डिनर में नहीं शामिल हुए जिनपिंग, सामने आई ये बड़ी वजह

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हुए।

उनके अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी सम्मेलन के बाद वापस अपने देश रवाना हो जाने के कारण इस डिनर में मौजूद नहीं थे।

क्यों गायब रहे शी जिनपिंग? सामने आई यह वजह

चीनी राष्ट्रपति के डिनर में शामिल न होने का सटीक और आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शी जिनपिंग सम्मेलन के व्यस्त शेड्यूल के बाद आराम करने के लिए सीधे अपने होटल चले गए थे।

गौरतलब है कि शी जिनपिंग शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्रों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की थी।

पुतिन से लेकर कई दिग्गजों की रही मौजूदगी

शी जिनपिंग भले ही डिनर में मौजूद नहीं रहे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा आयोजित इस शाही भोज में शिरकत की। इस डिनर में केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए:

केंद्रीय मंत्री: अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान।

मुख्यमंत्री व नेता: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।

ये सभी केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री संसद भवन से दो बसों में सवार होकर डिनर के वेन्यू यानी भारत मंडपम पहुंचे थे।

डिनर के मेन्यू में क्या था खास?

विदेशी और देसी मेहमानों के लिए परोसे गए भोजन में भारतीय व्यंजनों का खास स्वाद देखने को मिला:

मेन कोर्स: खांडवी मिल-फॉय, खुंब गलोटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर-बीन्स पोरियल और मिलेट्स (बाजरा) पुलाव।

डेजर्ट (मीठा): पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई।

VIDEO: ‘ख्वाब हो तुम या…’; BRICS में दिखा बॉलीवुड का रंग! किशोर कुमार के जबरा फैन निकले मलेशियाई PM अनवर इब्राहिम, हिंदी गायकी का वीडियो वायरल

गरबा में अगर मुस्लिम आएं… VHP के बैन के फरमान के बीच अमृता फडणवीस ने बिल्कुल अलग ही बात कह दी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कहा है कि त्योहार सभी के लिए होते हैं और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति भी इसमें शामिल होता है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) की उस मांग का समर्थन किया है, जिसमें मुस्लिमों को नवरात्रि के कार्यक्रमों में शामिल होने से रोकने की बात कही गई है।

बता दें कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पिछले हफ्ते कहा था कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान राज्य में गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिमों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

वहीं, राज्य के मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को VHP के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होना चाहिए।

राणे की टिप्पणियों के बारे में सवाल पूछे जाने पर, अमृता फडणवीस ने कहा कि उनका मानना ​​है कि इस त्योहार में सभी को शामिल होना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति भी वहां आता है और त्योहार का ठीक से आनंद लेता है, तो मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता।”

वहीं, VHP ने आयोजकों के लिए “गाइडलाइंस” जारी की हैं, ताकि नवरात्रि के ‘गरबा’ और ‘डांडिया’ कार्यक्रमों में शामिल होने वालों की पहचान की पुष्टि की जा सके। इसके लिए उनके आधार कार्ड की जांच करने और उनके माथे पर ‘तिलक’ लगाने को कहा गया है।

राणे ने आरोप लगाया कि ऐसे त्योहारों के दौरान “लव जिहाद” के मामले बढ़ जाते हैं और कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वालों की पहचान की जांच होनी चाहिए और उन्हें अंदर जाने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

बता दें कि ‘लव जिहाद’ एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल दक्षिणपंथी कार्यकर्ता अक्सर इस आरोप के लिए करते हैं कि मुस्लिम पुरुष महिलाओं, खासकर हिंदू महिलाओं, को प्रेम संबंधों में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश करते हैं।

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GFF: महाराष्ट्र से बदल सकता है दुनिया के फाइनेंस का फ्यूचर! फडणवीस ने बताया मुंबई कैसे बन रही ग्लोबल फिनटेक कैपिटल

Global Fintech Fest 2026: मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो जमीनों के टोकनाइजेशन के लिए कानून और ब्लॉकचेन आधारित फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। इसके तहत राज्य सरकार ‘महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकनाइजेशन एक्ट’ लाने की तैयारी में है।

ग्लोबल फिनटेक दिग्गजों को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि दुनिया के वित्तीय तंत्र का भविष्य अब केवल न्यूयॉर्क, लंदन और सिंगापुर जैसे पारंपरिक केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी नई नींव भारत और मुंबई में रखी जा रही है।

देश का पहला ‘लैंड टोकनाइजेशन’ फ्रेमवर्क

महाराष्ट्र सरकार जमीनों के टोकनाइजेशन के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। इसके साथ बनने वाला ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क SEBI, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के विशेषज्ञों, उद्योग और शिक्षा जगत के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

फडणवीस ने साफ किया कि टोकनाइजेशन को सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी या सट्टेबाजी के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसका असली मकसद अटकी हुई संपत्ति से पूंजी अनलॉक करना, पारदर्शिता लाना और मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाना है।

‘महाराष्ट्र को सिर्फ बाजार नहीं, अपनी प्रयोगशाला बनाएं’

फिनटेक कंपनियों और इनोवेटर्स को आमंत्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘महाराष्ट्र को केवल अपना बाजार न समझें, बल्कि इसे अपनी प्रयोगशाला के रूप में देखें। अगर कोई टेक्नोलॉजी या फाइनेंशियल सॉल्यूशन महाराष्ट्र में इतने बड़े पैमाने पर सफल हो सकता है, तो वह दुनिया में कहीं भी काम कर सकता है।’ राज्य सरकार फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टोकनाइजेशन के क्षेत्र में नए प्रयोगों और सॉल्यूशंस के लिए एक बड़ा टेस्टबेड देने को तैयार है।

न्यूयॉर्क, लंदन और सिंगापुर से आगे निकलेगी मुंबई

फिनटेक के वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए फडणवीस ने कहा, ग्लोबल फाइनेंस का भविष्य अब न्यूयॉर्क, लंदन या सिंगापुर के बजाय भारत में डिजाइन किया जा रहा है।मुंबई वो शहर बनना चाहिए जहां वैश्विक वित्त के भविष्य को आकार दिया जाए। अगली बड़ी ग्लोबल फिनटेक कंपनी या रिस्पॉन्सिबल फाइनेंशियल AI का बड़ा इनोवेशन मुंबई से ही निकल सकता है।

क्रेडिट, इनवेस्टमेंट और ओनरशिप का डेमोक्रेटाइजेशन

भारत की अब तक की फिनटेक यात्रा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, भारतीय फिनटेक क्रांति की पहली बड़ी उपलब्धि डिजिटल पेमेंट्स (UPI) का आम आदमी तक पहुंचना रहा है। अब क्रेडिट, इनवेस्टमेंट और ओनरशिप को इसी तरह आम जनता तक पहुंचाना और आसान बनाना है। एजेंटिक AI और टोकनाइजेशन अंतिम व्यक्ति तक इन सेवाओं को पहुंचाने में मदद करेंगे।

AI पर कंट्रोल और साइबर सुरक्षा सबसे जरूरी

फाइनेंशियल सिस्टम में AI और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच फडणवीस ने सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया। AI नागरिकों के लिए काम कर सकता है, लेकिन अंतिम नियंत्रण हमेशा नागरिक के हाथ में होना चाहिए। इंटेलिजेंस के साथ-साथ जवाबदेही अनिवार्य है। ‘भरोसा’ ही वह आधारभूत तकनीक है जिस पर बाकी सभी प्रौद्योगिकियां टिकी हैं।

जैसे-जैसे भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन रहा है, वैसे-वैसे हमारी साइबर सुरक्षा और सिस्टम की मजबूती को भी मजबूत करना होगा।