सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के 30 से ज्यादा जिले, जानें कैसे एक जिले को किया जाता है सूखाग्रस्त घोषित

महाराष्ट्र ने अपने 358 तालुकों में से 265 तालुकों (यानी राज्य के 74% तालुकों) को सूखा-प्रभावित घोषित किया है। सूखे की स्थिति की पहचान करने और राहत के उपाय शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने ‘सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016’ (जिसे 2020 में अपडेट किया गया था) और ‘सूखा प्रबंधन कोड’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ को लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ महाराष्ट्र के सूखा आकलन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब किसी इलाके में बारिश में 25% से ज्यादा की कमी हो और साथ ही कम से कम 21 दिनों तक सूखा मौसम (बिना बारिश वाला समय) रहा हो। आइए अब समझते हैं कि कोई राज्य कैसे तय करता है कि किसी इलाके में सूखा पड़ा है।

सूखा क्या है?

सूखा पानी की कमी का एक लंबा दौर होता है। सरकारें यह तय करने के लिए मापने लायक पैमानों का इस्तेमाल करती हैं कि कब सूखे का दौर इतना गंभीर हो गया है कि सरकारी दखल की जरूरत है। बारिश इनमें से एक अहम पैमाना है। अनुमानित बारिश की कमी और सूखे के दौर की अवधि का आकलन करते हैं।

कोई राज्य कैसे तय करता है कि किसी इलाके में सूखा पड़ा है?

राज्य मौसम, खेती और पानी की उपलब्धता से जुड़े पैमानों का इस्तेमाल करके यह तय करता है कि क्या बारिश की लंबी कमी से हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकारी दखल की जरूरत है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया में बारिश की कमी और सूखे के लंबे दौर का आकलन किया जाता है और फिर फसलों और जल संसाधनों पर उनके असर का मूल्यांकन किया जाता है।

राज्य का सूखा प्रबंधन ढांचा प्रभावित इलाकों की पहचान करने के लिए तय “ट्रिगर्स” (संकेतों) का इस्तेमाल करता है। इसके बाद नुकसान के स्तर और ज़रूरी राहत का पता लगाने के लिए ज़मीनी स्तर पर आकलन किया जाता है। राज्य का सूखा प्रबंधन ढांचा प्रभावित इलाकों की पहचान करने के लिए तय “पैमानों” (ट्रिगर्स) का इस्तेमाल करता है। इसके बाद नुकसान का दायरा और ज़रूरी राहत तय करने के लिए जमीनी स्तर पर जांच की जाती है।

ध्यान में रखी जानें वाली बातें

बारिश- सामान्य स्तर की तुलना में कितनी बारिश हुई है।

सूखे का दौर- क्या लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।

फसल की स्थिति- क्या कम या असमान बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है।

मिट्टी में नमी- क्या मिट्टी में फसल के लिए पर्याप्त नमी है।

पानी की उपलब्धता- भूजल और सतही जल स्रोतों की स्थिति, जिसमें पीने के पानी और सिंचाई पर उनके असर शामिल हैं।

जमीनी स्तर पर जांच- अधिकारी प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते हैं और राहत तय करने से पहले फसल के नुकसान का ब्योरा तैयार कर सकते हैं।

पूरे राज्य को सूखाग्रस्त क्यों घोषित नहीं किया जाता?

अलग-अलग जगहों पर सूखे की स्थिति काफी अलग हो सकती है। एक ही राज्य में, एक तालुका में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है और फसल को नुकसान हो सकता है, जबकि दूसरे में पर्याप्त बारिश हो सकती है। इसीलिए सूखे की जांच तालुका या स्थानीय स्तर पर की जा सकती है, न कि पूरे राज्य को एक साथ इसमें शामिल किया जाता है।

सूखा घोषित होने के बाद क्या होता है?

घोषणा के बाद तय राहत उपाय लागू किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में, इनमें फसल-ऋण का पुनर्गठन, जमीन के लगान में छूट, खेती के लिए बिजली में छूट, और पीने के पानी व चारे की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं। सूखा घोषित करना और फसल के नुकसान का व्यक्तिगत मुआवजा मिलना, जरूरी नहीं कि एक ही बात हो। महाराष्ट्र ने कहा है कि फसल के नुकसान के लिए मदद तय करने से पहले वह ज़मीनी स्तर पर फसल की जांच करेगा।

Mumbai : स्कूल जा रहे थे बच्चे, तभी बस पर मौत बनकर टूटा पेड़…एक छात्र की मौत

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। बता दें कि, मंगलवार 30 जून को मुंबई के चेंबूर इलाके में एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया। इस हादसे में 11 साल के एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि चार अन्य बच्चे घायल हो गए। यह घटना चेंबूर के रोड नंबर-11 पर हुई। उस समय स्कूल बस में 12 बच्चे सवार थे। हादसे के तुरंत बाद बस के कंडक्टर और आसपास मौजूद लोगों ने तेजी से राहत कार्य शुरू किया। उनकी मदद से सभी बच्चों को बस से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

इसके कुछ देर बाद मुंबई फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई। घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्कूल बस पर गिरा पेड़

मंगलवार दोपहर मुंबई के चेंबूर इलाके में एक दर्दनाक हादसा हो गया। रोड नंबर-11 पर एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया। इस हादसे में 11 साल के विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि चार अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के समय स्कूल बस में कुल 12 बच्चे सवार थे। पेड़ गिरते ही बस के कंडक्टर और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। उनकी मदद से मुंबई फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही सभी बच्चों को बस से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

इसके बाद घायल पांच छात्रों को इलाज के लिए पास के ज़ेन अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि विहान श्रीवास्तव को गंभीर चोटें आई थीं और अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल के ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर के अनुसार, बाकी चार बच्चों को मामूली चोटें आई हैं। उनकी हालत फिलहाल स्थिर है और उनका इलाज जारी है।

घायलों से मिलने पहुंची मेयर

मुंबई की मेयर रितु तावड़े हादसे में घायल बच्चों और मृतक छात्र के परिजनों से मिलने ज़ेन अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। मैं यहां मेयर के तौर पर नहीं, बल्कि एक मां के रूप में आई हूं। माता-पिता इतने सदमे में हैं कि कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। यूनिवर्सल स्कूल की बस में 13 बच्चे सवार थे। उनमें से 12 बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन दुख की बात है कि एक बच्चे की जान चली गई।”

मेयर ने आगे कहा कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का दावा था कि इलाके के सभी पेड़ों की छंटाई की जा चुकी है। लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि उन्होंने पहले ही कई खतरनाक पेड़ों की शिकायत की थी। उन्होंने कहा, “अगर इस मामले में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी पूरी जांच कराई जाएगी। हम चाहते हैं कि शहर के सभी पुराने पेड़ों का दोबारा सर्वे और सुरक्षा जांच हो। पेड़ों की छंटाई हुई थी, लेकिन अब उनका विस्तृत ऑडिट कराना जरूरी है। हम लंबे समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं।”

लोगों ने लगाया ये आरोप

वहीं इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को पत्र लिखकर इलाके के खतरनाक पेड़ों की छंटाई या उन्हें हटाने की मांग की थी। उनका कहना है कि इस इलाके में पहले भी ऐसा हादसा हो चुका था, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।