असम और बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR वापस, क्या बोली दिल्ली पुलिस?

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असम की हिमंता बिस्वा सरकार और बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने का एलान किया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया कि जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। ALSO READ: बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…

 

दिल्ली पुलिस का कहना है कि केवल उन ही मामले में एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर संबंधी मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

 

क्या है बिहार सरकार का फैसला

बिहार सरकार ने कहा है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। आंदोलन में नामित लोगों के खिलाफ भविष्य में भी कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

 

असम में रिहा होंगे प्रदर्शनकारी

असम के राज्य के गृह विभाग ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। कानून के अनुसार मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि गिरफ्तारियों की समीक्षा की जाएगी और हिरासत में लिए गए लोगों को जरूरी प्रक्रियाओं के बाद रिहा कर दिया जाएगा। 26 जुलाई को शाम 6 बजे तक पुलिस ने राज्य में 5 मामले दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था।

 

सीजेपी की चेतावनी

गौरतलब है कि काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में प्रेस कान्फ्रेंस कर प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताई थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि मंगलवार तक मांग पूरी न हुई तो फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड
 

सिब्बल ने जताई आशंका

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस आंदोलनकारी छात्रों को अपना निशाना बना सकती है। जहां-जहां छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, वहां-वहां उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की, ताकि कानूनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ी जा सके।

धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की हुई थी आखिरी कोशिश! शिक्षा मंत्रालय बदलने का ऑफर ठुकराया, इस्तीफे पर अड़ा रहा CJP

Dharmendra Pradhan Resignation: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन का साफ कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का सिर्फ मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा ही स्वीकार होगा।

बताया गया है कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पिछले कई सप्ताह से NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान के पद छोड़ने से पहले केंद्र ने एक समझौता करने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को मनाने में नाकाम रही।

सरकार ने निकाला था बीच का रास्ता

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने विवाद को शांत करने के लिए एक समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें किसी अन्य मंत्रालय में भेज दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि आंदोलनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रभावी संवाद समय पर स्थापित नहीं हो सका, जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर और अधिक अड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का जरिया न बन पाने की वजह से गतिरोध बना रहा। फिर दोनों पक्षों का रुख और कड़ा हो गया।

NEET विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन

यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बल्कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक अभियान बन गया। CJP नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं। बल्कि परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ आंदोलन बताया।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ी थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से करीब 48 घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के भीतर भी यह महसूस किया जाने लगा था कि बढ़ते जनाक्रोश और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने बैक-चैनल बातचीत के जरिए संकट टालने की कोशिश की। लेकिन जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हुए।

खबरों के मुताबिक, सरकार ने पर्दे के पीछे से बातचीत करके और प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय कुछ रियायतें देकर संकट को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, CJP का कहना था कि आंदोलन की मुख्य मांग तभी पूरी होगी जब वे इस्तीफा देंगे। सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वालों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच अपील के कारण इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य राजनीतिक महत्व भी मिला।

आखिरकार देना पड़ा इस्तीफा

करीब पांच सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्रों की जीत बताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। ओडिशा के वरिष्ठ BJP नेता प्रधान ने पेट्रोलियम, स्टील और शिक्षा जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले थे। लेकिन लगभग पांच सप्ताह के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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NEET Protest: प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए आगे आए कपिल सिब्बल, CJP लीगल फंड में दिए ₹1 करोड़

Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद और सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लीगल एड फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की। यह फंड NEET से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस केस का सामना कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए बनाया गया है।

सिब्बल ने कहा कि यह फंड अलग-अलग राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों पर नजर रखने और वकीलों के नेटवर्क के जरिए कानूनी मदद मुहैया कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।

वहीं, दूसरी तरफ CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र के आश्वासन के बावजूद, देश भर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि CJP सुप्रीम कोर्ट के वकील के संपर्क में है ताकि पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद ली जा सके।

कपिल सिब्बल ने दी आर्थिक मदद

दास के साथ बैठे कपिल सिब्बल ने CJP को आर्थिक मदद के अपने फैसले पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि भारत में जहां भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं – चाहे वह बिहार, असम, बंगाल या महाराष्ट्र हो – और जहां छात्रों या प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया है, वहां सरकारों द्वारा दर्ज किए गए कानूनी मामलों पर नजर रखने के लिए हमने एक सिस्टम बनाने का फैसला किया है, ताकि हमारे वकील कानूनी मदद दे सकें। हमने मांग की है कि कोई FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए, और अगर दर्ज की गई हैं, तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।”

सिब्बल ने कहा कि CJP एक वेबसाइट बनाएगी जिसमें FIR का सामना कर रहे छात्रों की जानकारी होगी और जो वकील मुफ्त (प्रो बोनो) या अन्य कानूनी मदद देने के इच्छुक हैं, वे इस पहल से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी तरफ से 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, और मैं पूरे भारत के वकीलों से अपील करता हूं कि वे इस फंड में योगदान देकर मदद करें ताकि हम प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। हमारे वकील उन लोगों के साथ खड़े हैं, जो कानून के दुरुपयोग से प्रभावित हुए हैं।”

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Plastic currency notes : 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोटों पर सरकार की मुहर, ट्रायल के लिए RBI के प्रस्ताव को मिली मंजूरी, क्या बंद हो जाएंगे पुराने नोट

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केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 10 रुपए और 20 रुपए मूल्यवर्ग के पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कागज के नोटों को पूरी तरह प्लास्टिक नोटों से बदलने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

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हाल ही में खबर आई थी कि RBI की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने सुरक्षा फीचर्स वाले पॉलिमर सब्सट्रेट शीट्स की आपूर्ति के लिए वैश्विक कंपनियों से रुचि पत्र (EOI) आमंत्रित किए हैं। हालांकि टेंडर में यह नहीं बताया गया है कि ये नोट किस मूल्यवर्ग में और कब से नियमित रूप से जारी किए जाएंगे।

लोकसभा में सोमवार को एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर 10 रुपए और 20 रुपए के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलिमर नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए जारी करने का प्रस्ताव दिया गया था। ट्रायल सफल रहने के बाद इन्हें नियमित रूप से जारी करने की योजना है। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है।

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मंत्री ने बताया कि RBI के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से पता चलता है कि पॉलिमर बैंक नोटों की उम्र कागज के नोटों की तुलना में काफी अधिक होती है। ये अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक उपयोग में रह सकते हैं। डिजिटल भुगतान पर संभावित असर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में पंकज चौधरी ने कहा कि पॉलिमर नोटों की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है।

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इनके नियमित रूप से जारी होने के बाद ही डिजिटल लेनदेन पर इनके प्रभाव का सही आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नकद और डिजिटल भुगतान दोनों आम जनता के लिए एक-दूसरे के पूरक माध्यम हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉलिमर नोट मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ ही चलेंगे। फिलहाल कागज के नोटों को पूरी तरह हटाकर केवल प्लास्टिक नोट जारी करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

 

CJP प्रोटेस्ट: PM मोदी पर विवादित पोस्ट पर एक्शन? सोशल मीडिया से हटवा रही पुलिस

दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों और अलग-अलग कई संगठनों के पेपर लीक से जुड़े प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए थे। दिल्ली पुलिस उन सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। प्रदर्शन में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर भद्दी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने NEET-UG से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर निगरानी और कड़ी कर दी है।

दिल्ली पुलिस ले रही एक्शन 

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक या आपत्तिजनक टिप्पणी वाले पोस्ट और वीडियो हटाए जाएं। यह कदम जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद उठाया गया है। इन घटनाओं के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्ट की संख्या बढ़ी है। साइबर निगरानी के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजे हैं। इनमें ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने को कहा गया है, जो कानून के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

कई पोस्ट और वीडियो हटाए गए

अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद कई आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं। हालांकि, पुलिस की निगरानी अभी भी लगातार जारी है। पुलिस के मुताबिक, साइबर और सोशल मीडिया की विशेष टीमें 24 घंटे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही हैं। उनका उद्देश्य ऐसे नए पोस्ट और वीडियो की पहचान करना है, जिन पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी उस समय और बढ़ा दी, जब 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी थी। उस दिन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में हजारों छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई थी।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को हुई झड़प में करीब 130 पुलिसकर्मी और 65 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने हिंसा से जुड़े 15 एफआईआर दर्ज किए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष लगातार संसद में इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहा है।

सोमवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में कामकाज रोककर चर्चा कराने का नोटिस दिया। उन्होंने इस पूरे मामले पर तुरंत बहस कराने और सरकार से जवाब देने की मांग की। इस बीच, जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, इलाके में करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आंदोलन तेज होने के बाद से यहां हर दिन हजारों छात्र और उनके समर्थक जुट रहे हैं।

CJP ने फिर दी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी, सरकार की वादाखिलाफी पर भड़की पार्टी, एक्स पर क्या बोले आशुतोष रांका

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया गया है।

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CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों की निगरानी की जा रही है और उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। रांका ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक सहायता देने वाले स्वयंसेवकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।

FIR वापस लेने और छात्रों की रिहाई की मांग

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CJP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां या भाजपा-शासित अथवा सहयोगी राज्यों की पुलिस छात्रों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करे।

 

आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

 

आशुतोष रांका ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो CJP फिर से आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस या सरकारी एजेंसियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

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एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

mahesh jethmalani, tavleen singh and saurabh dass on CJP party viral video

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सीजेपी से जुड़े कई लोग एक होटल में पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अलावा प्रदर्शनस्थल पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न मनाते वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर मचे बवाल के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रख्यात लेखिका तवलीन सिंह के जवाब भी चर्चा में है। ALSO READ: धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से BJP में बवाल! अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर घिरीं, पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी

 

महेश जेठमलानी ने उठाए फंडिंग पर सवाल?

इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। वायरल वीडियो में CJP के कुछ लोग एक होटल में पार्टी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां जश्न का माहौल है और नाच-गाना भी चल रहा है।

महेश जेठमलानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या सच में ऐसा हो रहा है? CJP की लीडरशिप दिल्ली के एक होटल में पार्टी दे रही है। राजधानी दिल्ली में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके ट्रैवल, खाने और रहने का खर्च किसने उठाया? इनकी फंडिंग किसने की? ALSO READ: 'बेटी के बयान से दुखी हूं, लेकिन पिता को दोष नहीं दे सकते'— केशव महंता के बचाव में बोले हिमंत बिस्वा सरमा

तवलीन सिंह ने दिया जवाब

तवलीन सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा अब कॉकरोच को एक 'फाइव-स्टार होटल' में पार्टी करते हुए दिखाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। क्या हम यह पूछ सकते हैं कि इतने सारे भाजपा मंत्रियों और उनकी संतानों के पास डिजाइनर कपड़े और कार्टियर के चश्मे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? ALSO READ: प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

 

क्या बोले सौरव दास?

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी के कार्यकर्ताओं साथ पार्टी और डांस करने के वायरल वीडियो पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इससे एक बार फिर साफ़ हो जाता है कि सरकार और गोदी एंकर, जेन-ज़ी और नई पीढ़ी की सोच और भाषा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा कि हम जितने दिन जरूरत होगी, उतने दिन सड़क पर बैठ सकते हैं। हम नाचते-गाते हुए भी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर भी आंदोलन को संगठित कर सकते हैं। बदलाव के लिए लड़ने के लिए हमारा वैसा दिखना जरूरी नहीं है, जैसा पिछली पीढ़ियां किसी आंदोलन से उम्मीद करती हैं।

सौरव दास ने कहा कि यही इस पीढ़ी की पहचान है-आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जुझारू और ऐसी, जिसे किसी एक तयशुदा छवि में बांधा नहीं जा सकता। अंकल-आंटी चाहे जितनी शिकायत करते रहें, उन्हें हमारी इस पीढ़ी के साथ जीना और हमें स्वीकार करना ही होगा।

E20 Janta Party campaign demands choice of ethanol-free petrol

fuel dispensers

Not long after the success of the Cockroach Janta Party’s (CJP) protests, a new social media-led campaign calling itself the E20 Janta Party has cropped up. It demands that Indian vehicle owners be given the option to purchase ethanol-free petrol alongside E20 fuel, as well as the resignation of Union Road Transport and Highways Minister Nitin Gadkari, who is a major proponent of the government’s ethanol blending policy.

For context, the E20 rollout started in April 2025, and it was mandated as the baseline petrol blend exactly one year later – all in an effort to reduce dependence on crude oil imports. This is despite the fact that E20 compliance was mandated in April 2023 as part of the BS6 Phase 2 emission norms, which means a hefty chunk of vehicles plying on Indian roads are not E20-compliant.

E20 Janta Party wants more transparency and options for fuel

No demands for E20 to be discontinued

Inspired by the CJP’s satirical, meme-driven approach, E20 Janta Party declared itself as a consumer rights movement that is not seeking the withdrawal of E20 petrol, but instead greater transparency and freedom of choice at fuel stations. Although ethanol-free fuel has been available in the form of 100-octane premium petrol (XP100, Speed100, and Power100), it’s sold only at select fuel stations and costs significantly more than standard E20, limiting its feasibility for most motorists.

“Our demand is very clear. E20 Janta Party is a people-powered movement demanding transparency, accountability, and the right of every Indian to know how the E20 policy affects their vehicles, wallets, and consumer rights,” the group said in a social media post. The campaign even referenced CJP’s initial call to mobilisation with a post stating, “What if all bike/car owners come together?”

The E20 Janta Party says it is not opposed to ethanol blending, nor is it asking for subsidies or free fuel. Instead, it wants fuel stations to offer consumers the choice between unblended petrol and ethanol-blended fuel. E20 Janta Party is also demanding transparent fuel labelling, publication of government data on the costs and benefits of different fuel blends, and independent scientific studies into mileage, engine performance, emissions, and maintenance costs, with the findings made publicly available.

Support pouring in for E20 Janta Party

At the time of writing, E20 Janta Party’s Twitter and Instagram accounts have attracted over 31,000 followers cumulatively, and the campaign has even begun attracting support beyond social media. Political commentator Tehseen Poonawalla announced a “Gaadi March” on July 31 against the E20 policy, while the Delhi Taxi and Tourist Transporters and Tour Operators Association planned a march to Parliament on August 4. The taxi association has raised concerns over fuel efficiency, maintenance costs and engine performance, particularly in older vehicles.

Govt continues to stand strong on ethanol blending policy

In recent months, motorists have expressed heightened acrimony surrounding the impact of E20 petrol on fuel efficiency and vehicle durability, whereas the government remains steadfast in its defence of the policy, saying E20 is a safe and cleaner fuel backed by scientific evaluation. A few weeks ago, prominent manufacturers like Maruti Suzuki, Toyota, and Hero Motocorp also backed E20 at a government briefing, notably claiming that they have found no significant concerns regarding accelerated wear and tear in older, non-compliant vehicles.

Petroleum Minister previously ruled out offering pure petrol or E10 alongside E20

Replying to a question in Parliament last week, Minister of State for Petroleum Suresh Gopi said the government had not received any “widespread or substantiated” complaints linking E20 petrol to vehicle performance issues. Petroleum Minister Hardeep Singh Puri earlier shot down the prospect of offering unblended and E10 petrol alongside E20, citing tremendous logistical issues like separate storage, transportation, and dispensing infrastructures.

Ethanol content in petrol could increase; diesel likely to be blended with isobutanol

The government is even looking to increase the baseline ethanol blend in petrol, with the Automotive Research Association of India (ARAI) tasked to examine the effects of E25 on existing E10- and E20-compliant vehicles. Plans are also underway to blend ethanol-derived isobutanol into diesel in the near future, even though the government has not laid out any isobutanol compliance framework for any diesel-powered passenger vehicle in India.

दिल्ली पुलिस 2022 की तरह CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से वापस लेगी केस? सामने आया बड़ा अपडेट्स

Delhi Police: संसद परिसर के हाल में और जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए दिल्ली पुलिस वर्ष 2022 में अपनाई गई प्रक्रिया को दोहरा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। मंगलवार 28 जुलाई तक इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के दौरान दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी मॉडल को इस बार भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, उस समय पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को भेजा था। इसके बाद फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास पहुंची। गृह मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई। फिर 28 फरवरी को एलजी कार्यालय लौटने पर उसी दिन उसे मंजूरी मिल गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों से मांगी राय 

अब संसद प्रदर्शन से जुड़े मामलों में भी दिल्ली पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से राय मांगी है कि FIR वापस लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाए। एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को रद्द (Quash) कराने का अनुरोध करे।

15 FIR दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका गंभीर नहीं पाई गई है। उन्हें फिलहाल जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, आपराधिक साजिश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।

 पुलिस ने उठाकर मसूरी छोड़ दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों को खाना देने वाले एक स्वयंसेवक जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, आंखों पर पट्टी बांधी गई और अगले दिन उन्हें उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।

जुनैद के अनुसार, पुलिस ने उनसे खाना बांटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता और इतने बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था के बारे में सवाल पूछे। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद ने दावा किया कि उन्हें भोजन और पानी समर्थकों से मिलने वाले दान और डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था।

पीएम मोदी के मामले में होगी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि पुलिस ऐसे पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर सकती है।

सूत्र ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड की गई सामग्री की समीक्षा के बाद पुलिस अपमानजनक प्रकृति की पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी करेगी।” उन्होंने कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने का अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है।”

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सूत्र के मुताबिक, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी सामग्री में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने होने की आशंका थी। सूत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नजर रखे हुए है, ताकि विरोध-प्रदर्शन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की पहचान की जा सके।