CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन भले ही केंद्रीय राजनीति में बड़े बदलावों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ चर्चा में आए हों, लेकिन इसका जमीनी और सबसे व्यापक असर अब पूरे भारत के सरकारी स्कूलों में महसूस किया जा रहा है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और सकारात्मक दृश्य यह है कि अब स्कूली बच्चे खुद अपने बुनियादी अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े हो रहे हैं और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। वे पंखे, बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं और कक्षाओं में भारी शिक्षकों की कमी के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

1. राजस्थान: शिक्षकों की भारी कमी पर छात्रों का फूटा गुस्सा
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गाँव से एक ऐसा ही बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

धरना और प्रशासनिक कार्रवाई: छात्रों ने कई घंटों तक स्कूल के बाहर धरना दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत चार नए शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर बाकी बची तीन रिक्तियों को भी भरने का लिखित आश्वासन दिया।

छात्रों के मन की बात: एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा: “शिक्षा विभाग और सरकार से हमारी माँग है कि वे हमारी बात सुनें। यहाँ एक भी द्वितीय श्रेणी का शिक्षक नहीं है और प्रथम श्रेणी के भी केवल एक ही शिक्षक हैं—एक इतिहास के और दूसरे हिंदी के। इतिहास के शिक्षक के पास प्रधानाचार्य का भी प्रभार है, जिससे प्रशासनिक काम के बोझ के कारण पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। हमारी माँग है कि कक्षा 1 से 3 और एल1 व एल2 के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो हम स्कूल पर ताला लगा देंगे।”

2. बिहार (गया): पंखे, हैंडपंप और टूटी बेंचों के खिलाफ मोर्चा
बिहार के गया जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने पंखे, हैंडपंप और बैठने के लिए बेंच न होने के कारण भारी धरना-प्रदर्शन किया।

जिलाधिकारी (डीएम) को आना पड़ा मैदान में: शुरुआत में जिला प्रशासन ने छात्रों को शांत करने के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को भेजा, लेकिन छात्रों ने विरोध खत्म करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के इस कड़े रुख के बाद अंततः डीएम को खुद स्कूल पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं।
 
3. महाराष्ट्र (डहानू): अस्वच्छ शौचालय और बदहाल बुनियादी ढांचा
महाराष्ट्र के डहानू में छात्रों ने अपने स्कूलों में अस्वच्छ शौचालयों, असुरक्षित माहौल और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ बहादुरी से आवाज उठाई।

छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी केवल सरकारी निरीक्षणों के दौरान ही उपलब्ध कराई जाती है, बाकी दिनों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

4. उत्तर प्रदेश (फतेहपुर): सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन
अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के चलते अंततः स्कूल प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि छात्रों की सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी।

बुनियादी समानता और शिक्षा का अधिकार: एक बड़ा सवाल
इन चारों राज्यों में छात्रों की माँगें काफी हद तक एक जैसी और बेहद बुनियादी हैं: सुचारू कक्षाएँ, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित माहौल, पर्याप्त शिक्षक और पीने योग्य शुद्ध पानी।

इन विरोध प्रदर्शनों ने एक पुरानी और गंभीर विषमता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है: आसानी से मिलने वाली ये बुनियादी सुविधाएं जो शिक्षा का न्यूनतम स्तर होनी चाहिए, उनके लिए आज भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? बदलाव की यह बयार यह साबित करती है कि अब देश का युवा और छात्र अपनी शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो रहा है।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट, नोएडा की महिला पर दर्ज हुई FIR

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में नोएडा पुलिस ने 25 वर्षीय एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि रुचिका सिंह नाम की महिला ने 23 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले में बुधवार को शिकायत मिलने के बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज की।

महिला के खिलाफ दर्ज हुई FIR

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला की टिप्पणी से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह के बयान से लोगों के बीच तनाव फैल सकता है और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।

पुलिस ने इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की थी। जीरो एफआईआर का मतलब है कि किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना किसी दूसरे इलाके में हुई हो। अब यह मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस को भेज दिया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में शांति भंग करने के लिए उकसाना, ऐसा बयान देना जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती हो और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CJP ने FIR पर उठाए सवाल

एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर महिला ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया भी है, तब भी उसके खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना सही नहीं है। पीटीआई के अनुसार, सौरव दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी मानहानि हुई है, तो वह कानून के तहत सिविल या आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है। लेकिन केवल किसी प्रदर्शनकारी के कथित आपत्तिजनक बयान के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना निंदनीय है और केवल आपत्तिजनक भाषा के कारण किसी व्यक्ति को सजा नहीं दी जानी चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वह आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं करते, लेकिन केवल ऐसे बयान के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी की भाषा गलत हो सकती है या उससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, लेकिन यह किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का पर्याप्त कारण नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, इससे लोगों में डर का माहौल पैदा होता है और खासकर युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है।

सौरव दास ने युवाओं से भी अपील की कि वे प्रदर्शन के दौरान अपने शब्दों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें और किसी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को संयम के साथ काम करना चाहिए और अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल कथित आपत्तिजनक भाषा के आधार पर आपराधिक कार्रवाई करना स्वीकार्य नहीं है।

एक और पेपर लीक? ओडिशा मेडिकल परीक्षा के दौरान WhatsApp पर शेयर किया गया क्वेश्चन पेपर

Odisha Paper Leak: एक तरफ संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक विधेयक पारित किया गया है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। वहीं दूसरी ओर एक और राज्य से कथित पेपर लीक का मामला सामने आया है। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी आक्रोश के बीच ओडिशा में आयोजित मेडिकल पीजी परीक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा के 2023–26 बैच की जनरल सर्जरी MD/MS परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे जाने के आरोप लगे हैं।

परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

ओडिशा में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल परीक्षा चल रही थी, तभी प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। बताया जा रहा है कि एक छात्र को ये तस्वीरें व्हाट्सएप पर मिली थीं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सोमवार को 2023-26 बैच की एमएस/एमडी जनरल सर्जरी की थ्योरी परीक्षा के दौरान सामने आया। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैल गईं। रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने ये तस्वीरें साझा की थीं। छात्र का कहना है कि उसे ये तस्वीरें बेरहामपुर के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से मिली थीं। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ मोबाइल नंबरों से सवालों के जवाब भी भेजे गए। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

OUHS ने दिए जांच के आदेश

इस घटना के सामने आने के बाद ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (OUHS) ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति मानस रंजन साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस दौरान उन्होंने बची हुई परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए। डीन बोले- इसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता

वहीं, एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य हरेकृष्ण दलाई ने कहा कि इस घटना को सीधे तौर पर पेपर लीक कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के बाद छात्रों में बांटा जा चुका था और उसके तुरंत बाद उसकी तस्वीरें बाहर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अगर प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले बाहर आ जाता और छात्रों तक पहुंच जाता, तब उसे पेपर लीक कहा जाता। लेकिन इस मामले में प्रश्न पत्र बांटने के तुरंत बाद ही उसकी तस्वीरें परीक्षा हॉल से बाहर पहुंचीं, इसलिए इसे उसी तरह की घटना माना जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही कड़ी निगरानी की जा रही है। इससे पहले नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चला यह आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा। इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया। इसके साथ ही CJP ने भी अपना विरोध अभियान वापस लेने का ऐलान कर दिया।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार पर आए राजनीतिक दबाव और धमकियों के सनसनीखेज मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने 29 जुलाई को एक मराठी समाचार चैनल के सामने खुलासा किया कि उनके बेटे को एक वीडियो के जरिए सीधे धमकी दी गई थी। इस वीडियो में साफ चेतावनी दी गई थी कि अगर अभिजीत भाजपा में शामिल नहीं हुए तो उनके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, सीजेपी ने कहा कि उसे न सरकार पर भरोसा और न ही सुप्रीम कोर्ट पर। अब वह सरकार के खिलाफ अगले आंदोलन की तैयारी कर रही है। 

16 दिनों तक कोंकण में छिपा रहा परिवार

अभिजीत दीपके के नई दिल्ली से वापस लौटने से पहले मराठी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए उनकी मां अनीता दीपके का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया कि धमकी के बाद परिवार में ऐसा डर समा गया था कि उन्हें अपना घर छोड़कर कोंकण क्षेत्र में अपने एक रिश्तेदार के घर पर 16 दिनों तक शरण लेनी पड़ी। ALSO READ: जेन-जी को 'गटर जनरेशन' कहकर घिरीं कंगना रनौत, CJP ने दिया करारा जवाब

आप यह वीडियो मत देखना

अनीता दीपके ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि अभिजीत को काफी समय से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उसने शुरुआत में हमें परेशान न करने की नीयत से कुछ नहीं बताया। बाद में उसने एक धमकी भरे वीडियो का जिक्र किया और मुझसे खास हिदायत दी कि मैं उस क्लिप को बिल्कुल न देखूं। उस क्लिप में अभिजीत को खुली चेतावनी दी गई थी कि यदि वह बीजेपी में शामिल नहीं होता है, तो उसके माता-पिता के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। इस सीधी धमकी के बाद अभिजीत ने खुद हमसे घर छोड़कर कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाने का आग्रह किया। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

 

मां अनीता ने कहा कि अभिजीत खुद ऐसी धमकियों और राजनीतिक दबाव से नहीं डरते हैं, लेकिन चूंकि उनका परिवार राजनीति और इन खतरनाक चीजों का आदी नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अभिजीत दीपके के पिता ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में काम करने वाले व्यक्ति को आलोचनाओं का सामना करना ही पड़ता है। लेकिन कुछ लोग 'फिक्स्ड सोच' के होते हैं जो रचनात्मक विरोध के बजाय सीधी धमकियों और दुश्मनी पर उतर आते हैं। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड

नए आंदोलन की तैयारी में सीजेपी

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी CJP को एतराज है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उन प्रदर्शनकारियों के साथ कोई नरमी न बरती जाए, जिनका आपराधिक रिकार्ड रहा है, जबकि सीजेपी नेता सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की बात कह रहे हैं। सीजेपी ने पेपर लीक रोकने की सरकार की पहल को भी नाकाफी बताया है। अब सीजेपी नए आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। सीजेपी ने सरकार से बातचीत के बाद धरना-प्रदर्शन तो रोक दिया, लेकिन सरकार पर शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए फिर से आंदोलन की चेतावनी भी दी है। 

 

दरअसल, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के कानून से सीजेपी संतुष्ट नहीं है। उसके प्रवक्ता आशुतोष रांका कहते हैं कि सरकार ने जो बिल लोकसभा में पास कराया है, वह कारगर नहीं होगा। उनका कहना है कि परीक्षाओं के पेपर लीक रोकने के लिए सीजेपी ने कई सुझाव दिए थे, पहले उन पर अमल होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

किसने दिया ऑर्डर?’ पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

opposition leaders protes in parliament

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर मचा बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कांग्रेस सांसदों ने इस मामले में संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। उनके हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था- 'किसने दिया ऑर्डर?' ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

 

प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ किया गया।

 

पार्टी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह जवाब दो- छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?' आज विपक्ष के सांसदों ने छात्रों पर की गई बर्बरता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर, मोदी सरकार से जवाबदेही की मांग की। ALSO READ: दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

संसद से क्यों भाग रहे हैं गृहमंत्री

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली में पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया? दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? हमें भारत के गृह मंत्री से जवाब चाहिए। भारत के गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं? आप तो विपक्ष के नेता (LoP) को भी बोलने नहीं दे रहे हैं।

 

क्या गृह मंत्री ने कहा कि SDM ने गलत किया? 

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि ये बड़ी स्पष्ट बात है कि यदि कोई पैलेट गन चलाता है या ऐसी कार्रवाई करता है तो इसकी अनुमति तो कोई देता है। यदि कोई कह रहा है कि SDM ने अनुमति दी तो क्या हमारे गृह मंत्री ने ये कहा कि SDM ने गलत किया? हमारे गृह मंत्री चुप क्यों हैं? इससे साफ जाहिर है कि ये उनकी सहमति से ही हुआ है नहीं तो वे कहते कि SDM ने गलत काम किया है। एक तरफ भाजपा कह रही है कि पैलेट गन नहीं चली और जब साबित हो गया कि पैलेट गन चली तो उन्हें ये बात माननी पड़ी। फिर केंद्रीय गृह मंत्री चुप क्यों है?

Abhijeet Dipke : ‘अगला आंदोलन पहले से बड़ा होगा’, जानें अभिजीत दिपके ने क्यों कही ये बात

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने बुधवार को कहा कि अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो पार्टी फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उनका कहना था कि हाल की घटनाओं के बाद भी छात्रों और लोगों में नाराजगी अब भी बनी हुई है। अभिजीत दिपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पास हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कानून को और सख्त बनाना है।

लोकसभा में पास हुआ विधेयक 

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी को लेकर भी सदन में जोरदार हंगामा हुआ। इसके बाद यह विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

संशोधन विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि सिर्फ कानून में बदलाव करने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। उनका कहना था कि जब तक लोगों की सोच और नीयत नहीं बदलेगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “देश में कई सुधार किए जा रहे हैं, लेकिन अगर लोगों की नीयत नहीं बदलेगी, तो सिर्फ कानून बदलने से कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।” अभिजीत दिपके ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई फास्ट-ट्रैक कोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई इसलिए टालनी पड़ी, क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का वकील अदालत में मौजूद नहीं था। उनके मुताबिक, इससे जांच और सुनवाई की रफ्तार पर भी सवाल खड़े होते हैं।

FIR वापस नहीं हुई तो आंदोलन जारी रहेगा

अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपना आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अगला विरोध प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा। दिपके ने आरोप लगाया कि छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं और उन्हें इसी तरह परेशान किया जाता रहा, तो हम दोबारा आंदोलन करेंगे। सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्रों का गुस्सा अभी खत्म नहीं हुआ है।”

अभिजीत दिपके ने आगे कहा कि सरकार को यह नहीं मानना चाहिए कि सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लोगों की नाराजगी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर सरकार को लगता है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लोगों का गुस्सा शांत हो जाएगा, तो ऐसा नहीं है। छात्रों और लोगों में अब भी काफी नाराजगी है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम फिर से आंदोलन करेंगे और अगला प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा।”

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे थे। अब दिल्ली पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मेडिकल जांच में गोली लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि घायल प्रदर्शनकारी की MLC (Medico-Legal Case) रिपोर्ट में दाहिने कान के आगे (Right Tragus) हिस्से में चोट दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार यह चोट ब्लंट इंजरी (किसी ठोस वस्तु से लगी चोट) है और यह सामान्य श्रेणी की चोट है।

 

पुलिस ने कहा कि MLC में चोट की प्रकृति ब्लंट बताई गई है। डॉक्टर की राय के अनुसार यह साधारण चोट है और गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

 

दिल्ली पुलिस ने X से मांगी आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग

 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाली कथित आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को पत्र लिखा था।

 

पुलिस ने X से ऐसी पोस्ट और वीडियो तुरंत हटाने की मांग की है। साथ ही संबंधित यूजर्स की पूरी जानकारी मांगी गई है, जिसमें:

 

यूजर का नाम

पता

संपर्क विवरण

ईमेल आईडी

लॉगिन और लॉगआउट रिकॉर्ड (समय और तारीख सहित)

 

शामिल हैं।

 

दिल्ली पुलिस ने प्लेटफॉर्म से संबंधित कंटेंट का डेटा सुरक्षित रखने को भी कहा है ताकि आगे की जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सके। पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4) के तहत प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाली पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट सामने आए थे।

 

दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर उसे हटाने के निर्देश दिए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियों और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जा चुका है।