लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी: बिहार के स्टूडेंट्स की सेफ्टी को लेकर एक्टिव हुए सम्राट चौधरी, चांसलर और सांसद अशोक मित्तल से की बात

LPU University Unrest: पंजाब के प्रमुख प्राइवेट विश्वविद्यालय लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हिंसा और विरोध-प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार (28 सितंबर) को LPU के संस्थापक अशोक मित्तल से फोन पर बातचीत की। सीएम ने वहां पढ़ रहे बिहार के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पंजाब के फगवाड़ा स्थित एलपीयू के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से कथित दुष्कर्म किए जाने के दावे को लेकर रविवार को परिसर में तोड़फोड़ की और नेशनल हाईवे-44 को बाधित कर दिया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “मैंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से फोन पर बात की। उन्होंने बिहार के छात्रों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव सहयोग तथा आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।” इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में बिहार के स्टूडेंट पढ़ते हैं।

क्लासेस पर रोक, एग्जाम स्थगित

एलपीयू प्रशासन द्वारा सोमवार से 10 दिन के लिए क्लासेस स्थगित किए जाने के बाद कई छात्र अपने घरों के लिए रवाना होते दिखाई दिए। विश्वविद्यालय ने हाफ इयरली एग्जाम (Half-Yearly Exams)भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी हैं। विश्वविद्यालय ने कहा है कि छात्र चाहें तो अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह के बाद इस अवधि में घर जा सकते हैं।

वहीं, परिसर में रुकने वाले छात्रों को सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास या निवास स्थान के भीतर रहने और किसी भी प्रकार की अशांति से दूर रहने की सलाह दी गई है। अशोक मित्तल ने इस साल अप्रैल में छह अन्य राज्यसभा सदस्यों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर एक्शन

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के हिंसा पर उतरने के आरोप के एक दिन बाद सोमवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

परिसर में रविवार को कथित हंगामे और तोड़फोड़ की घटना पर यादव ने कहा कि पुलिस ने अब तक संयम बरता है। लेकिन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्र विश्वविद्यालय परिसर में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

राष्ट्रीय राजधानी में हाल में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए यादव ने छात्रों में व्याप्त नाराजगी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटना से निपटने में पुलिस ने रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ पुलिस और स्टूडेंट की चर्चा

पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर छात्रों की शिकायतों को दूर कराने के लिए इस प्राइवेट विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत कराई। यादव ने कहा, “हमारे अधिकारियों ने तय किया कि न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया।”

SIT करेगी मामले की पूरी जांच

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास किए गए। छात्रों द्वारा दुष्कर्म की कथित घटना का दावा किए जाने के बारे में यादव ने कहा कि FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

रविवार शाम प्रदर्शन के कथित तौर पर हिंसक हो जाने पर यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पुलिस के वाहनों पर पथराव किया गया।तोड़फोड़ में शामिल लोगों को संदेश देते हुए डीजीपी ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से बेबुनियाद अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की।

SIT की जांच और FIR के बारे में उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एलपीयू में यह घटना पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई। वहां भी दो छात्राओं द्वारा परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने की अपुष्ट खबरों को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। कथित तौर पर पुलिस के एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

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अधिकारियों के अनुसार, रविवार (27 सितंबर) शाम प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। उन्होंने उनके वाहनों पर हमला किया और कुछ वस्तुओं में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Vaishno Devi Temple fake silver Scam

माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित ‘नकली चांदी’ के आरोप ने अब 550 करोड़ रुपये के चढ़ावे की पारदर्शिता और उसके रखरखाव की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 20 टन चांदी बताए जा रहे इस चढ़ावे की जांच में पुलिस को 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, लेकिन मामले की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। ALSO READ: भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अब भी दर्ज होना बाकी हैं। अदालत ने जांच पूरी करने के लिए पुलिस को और समय देते हुए अगली सुनवाई 10 अक्टूबर तय की है।

 

मामले की ताजा स्थिति यह है कि पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसे चढ़ावे के संग्रह, छंटाई, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड, पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल चुके हैं। इनकी जांच और आपसी मिलान किया जा रहा है। हालांकि, श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अभी दर्ज नहीं किए गए हैं, जिन्हें पुलिस ने व्यापक जांच के लिए जरूरी बताया है।

 

पुलिस के अनुसार श्राइन के पुजारियों, बोर्ड अधिकारियों, भवन में तैनात सीआरपीएफ कर्मियों, जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े बयान और कुछ अहम रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में हैं। गौरतलब है कि शिकायत को चार महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि अदालत में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में नहीं है। ALSO READ: आजमगढ़ में महामृत्युंजय जाप के दौरान पत्नी-बेटे और 2 पंडितों को गोलियों से भूना, एनकाउंटर में ढेर

 

विवाद के केंद्र में करीब 20 टन ‘सफेद धातु’ है, जिसे चांदी का चढ़ावा बताया गया। हालांकि, चांदी की वास्तविक शुद्धता और कथित वित्तीय नुकसान से जुड़े दावों को अभी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अदालत ने दस्तावेजों, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल पूरी करने के लिए पुलिस को समय दिया है। अब 10 अक्टूबर की सुनवाई में जांच की प्रगति पर नजर रहेगी।

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Deepke on CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आए मतभेदों के दावों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘भारत का दुश्मन’ तक करार दे दिया है। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों— डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें दरकिनार कर फैसले लागू कर दिए गए। इस बीच, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश पर सीधा हमला बोला। ALSO READ: क्यों भड़के CJP नेता आशुतोष रांका? कहा- बंद कर देनी चाहिए चुनाव प्रक्रिया

 

सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दीपके ने लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। कथित तौर पर 12 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो 2024 लोकसभा चुनाव के कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 12.4% है। एनडीए और विपक्ष के बीच महज 2% का अंतर है। ज्ञानेश कुमार चुनाव करा नहीं रहे, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) का नया अर्थ निकालते हुए इसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिगिंग’ करार दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

लोकतंत्र बर्बाद करने वालों में दर्ज होगा नाम

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों की सूची में ज्ञानेश कुमार का सबसे ऊपर होगा। उन्होंने दीपके की पोस्ट को शेयर करते हुए दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को ‘भारत का दुश्मन’ कहने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए।

 

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- बाकी सभी मुद्दे बाद में हैं, सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को चुनाव आयोग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।

Mumbai Accident: मुंबई में दर्दनाक सड़क हादसा! तेज रफ्तार BMW ने पैदल चलने वालों को मारी टक्कर, 3 की मौत, 1 की हालत गंभीर

Mumbai Accident: मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार सुबह तेज रफ़्तार एक BMW कार के टक्कर मारने से तीन पैदल चलने वालों की मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा रविवार तड़के कोस्टल रोड पर लाला कॉलेज के सामने लोटस जेटी के पास हुआ। कोस्टल रोड कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक, BMW मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी, तभी यह हादसा हुआ। हादसे की वजह तेज रफ़्तार बताई जा रही है। घायल चार लोगों को इलाज के लिए नायर अस्पताल ले जाया गया। नायर अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल लाए गए चार लोगों में से तीन को मृत घोषित कर दिया गया।

मुंबई पुलिस ने एक बयान में कहा, “20 सितंबर को सुबह करीब 5:20 बजे मुंबई कोस्टल रोड पर लोटस जेटी के पास एक BMW कार के दुर्घटनाग्रस्त होने से तीन लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी, तभी तेज रफ़्तार के कारण ड्राइवर ने कथित तौर पर गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। चारों को नायर अस्पताल ले जाया गया।” मृतकों की पहचान शनाय गज्जल और धैर्य सेठ के तौर पर हुई है। एक अन्य 20 वर्षीय युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बारे में और जानकारी का इंतजार है।

गणपति पंडाल के पास करंट लगने से आठ वर्षीय लड़की समेत दो लोगों की मौत

इस बीच, मुंबई के लालबाग इलाके में शनिवार देर रात गणपति पंडाल के पास करंट लगने से आठ वर्षीय लड़की समेत दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना रात करीब दो बजकर 20 मिनट पर कालाचौकी स्थित दत्ताराम लाड मार्ग पर कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के पास हुई। उस समय गणपति उत्सव के कारण लालबाग इलाके में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

नगर निकाय के अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मुंबई दमकल विभाग (एमएफबी) को रात दो बजकर 42 मिनट पर मिली। इसके बाद दमकल विभाग, पुलिस, बेस्ट (बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन) और महानगरपालिका के वार्ड कार्यालय के कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। पुलिसकर्मियों से मौके पर मिली जानकारी के अनुसार, पांच घायलों को भायखला स्थित मसीना अस्पताल ले जाया गया। जबकि अन्य घायलों को परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मसीना अस्पताल में आठ वर्षीय राघनी घनश्याम यादव को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 19 वर्षीय किरण अकबर नाइक, 19 वर्षीय तन्वी नरश हांडे, 19 वर्षीय साहिल संदीप तारे और 12 वर्षीय रूही सिंह का अस्पताल में उपचार हो रहा है। उनकी हालत के बारे में जानकारी अभी नहीं मिली है। बाद में एक अधिकारी ने एक अन्य मौत की भी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ग्लोबल अस्पताल में भर्ती एक महिला ने भी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। उसकी पहचान और अन्य डिटेल्स की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है।

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UP Smart Schools: एक ओर यूपी के 14,429 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने का ऐलान, दूसरी ओर नोएडा के स्कूल की CJP ऑडिट पर बवाल

UP smart schools: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत 14,429 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूलों’ के तौर पर विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस योजना के तहत, राज्य के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चुने गए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास शुरू की जाएंगी। इन स्कूलों के छात्रों को स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग सिस्टम के तहत शिक्षक टैबलेट का भी इस्तेमाल करेंगे।

300 करोड़ रुपये मंज़ूर

योगी सरकार ने इस पहल के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। स्मार्ट क्लास लगाने के लिए ‘श्री ट्रॉन इंडिया लिमिटेड’ को लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर चुना है। इंस्टॉलेशन का काम कॉम्पिटिटिव टेंडरिंग (प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया) के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावित दर 2,07,910 रुपये प्रति स्कूल तय की गई है, जिसमें सैनिटेशन चार्ज और GST शामिल हैं। अगर टेंडर प्रक्रिया में दर कम आती है, तो सरकार 300 करोड़ रुपये की सीमा के भीतर बची हुई रकम का इस्तेमाल और स्कूलों को कवर करने के लिए कर सकती है।

1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा

राज्य में पहले से ही 32,000 से ज़्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल रही हैं। 15,000 से ज्यादा स्कूलों में ICT लैब की सुविधा भी है। जबकि 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा दी गई है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास 2021 में शुरू हुई थीं। जबकि इनका औपचारिक संचालन 2022-23 शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ।

नई स्मार्ट स्कूल योजना सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की पहुंच को और बढ़ाएगी। सरकार छात्रों की संख्या और एनरोलमेंट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास और ICT लैब सुविधाओं का विस्तार करेगी। इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है।

CJP ने नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत संगठन ने युवाओं से अपने आसपास के स्कूलों का निरीक्षण करने और शिक्षण सुविधाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने की अपील की। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि 15 अगस्त से जारी इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को अपने क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति और वहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

दास ने पत्रकारों से कहा, “आज हम ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत एक स्कूल का ऑडिट करने के लिए नोएडा आए हैं। हम देखना चाहते हैं कि यहां बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। चूंकि, नोएडा उत्तर प्रदेश के बेहतर जिलों में से एक है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि यहां के स्कूलों की स्थिति अच्छी होगी।” उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को भी आगे आकर अपने आसपास के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।

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इससे पहले, दास ने X पर एक पोस्ट में कहा था कि वह अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए और अनुचित तरीके से जेल में डाले गए लोगों के परिजन और मित्रों से मुलाकात करेंगे। दास ने कहा था कि संविधान उचित वेतन की मांग करने और अमानवीय रूप से लंबी पाली के खिलाफ प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करता है।

एक राज्य के मुख्यमंत्री ने अचानक दे दिया इस्तीफा? नाम ऐसा कि जानकर चौंक जाएंगे आप… जानिए वायरल लेटर की पूरी सच्चाई!

Satirical Resignation Letter MP CM: ‘मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस एक लाइन के लेटर ने हर किसी को हैरान कर दिया। लेकिन जब लोगों ने इस इस्तीफे के पीछे का नाम और असली कहानी जानी, तो पूरा मामला समझ आया।

दरअसल, यह कोई असली मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके का मध्य प्रदेश सरकार पर कसा गया एक तीखा प्रहार है।

अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत और वहां के बदहाल स्वास्थ्य ढांचे के विरोध में एक ‘इस्तीफा पत्र’ लिखकर राज्य सरकार की लाचारी पर सवाल उठाए हैं।

तंज भरे इस्तीफे में क्या लिखा दीपके ने?

मध्य प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित इस व्यंग्यात्मक पत्र में दिपके ने खुद को ‘मुख्यमंत्री’ बताते हुए लिखा, ‘मुख्यमंत्री के रूप में, मैं इन बच्चों को समय पर उचित चिकित्सा देखभाल और सहायता प्रदान करने में विफल रहने की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।’

इसके साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे और ‘हर घर नल से जल’ के दावों पर कड़ा तंज कसते हुए कहा कि आज भी बालाघाट के कई आदिवासी परिवार पीने के पानी के लिए नदियों और नालों पर निर्भर हैं।

बालाघाट में क्यों मचा है कोहराम?

यह पूरा विवाद बालाघाट जिले के बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के 30 से अधिक बच्चों की संदिग्ध मौत (खसरा और मलेरिया के प्रकोप) के बाद खड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर से जवाब तलब किया है।

कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के मुताबिक, 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 मासूम बच्चों का इलाज चल रहा है, जिससे साफ होता है कि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी बदहाल हैं।

ग्राउंड पर पहुंचे दिपके का हुआ भारी विरोध

अभिजीत दिपके खुद पीड़ित परिवारों से मिलने बालाघाट के गांवों में पहुंचे थे। 13 सितंबर को जब वे क्षेत्र का दौरा कर रहे थे, तभी वहां कुछ तथाकथित ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स’ की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उन पर ‘मौतों पर राजनीति करने’ का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया।

विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल खराब होता देख CJP कार्यकर्ताओं को दिपके को सुरक्षित वहां से बाहर निकालना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

Cabinet Decision: भारतीय रेलवे के इन 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स को 4 लाइन बनाने की मंजूरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्लान

Railway Network Projects Cabinet Decision: भारतीय रेलवे अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर (High Density Corridors) की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (9 सितंबर) को बताया कि इन प्रमुख रेल रूट्स को क्वाड्रुपल यानी चार पटरियों वाला बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाना और भविष्य में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।

रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे के इन हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर की लाइन को पहले ही क्वाड्रुपल किया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से का काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। जबकि करीब 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन को फाइनल मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है।

इन शहरों को होगा फायदा

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है। मंजूर किए गए रूट में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है। 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 6,528 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

करीब 11 हजार km रेल नेटवर्क पर बड़ा विस्तार

रेल मंत्री के बयान के मुताबिक, अलग-अलग चरणों को जोड़ें तो करीब 11,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर चार पटरियों की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के सबसे अधिक व्यस्त रेल रूट्स में शामिल हैं। इन रूटों पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती हैं। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव के कारण कई बार ट्रेनों को प्राथमिकता देने, क्रॉसिंग और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। चार पटरियां होने से एक ही दिशा में ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर भी जोर

रेलवे के लिए यह विस्तार केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं है। देश में माल ढुलाई को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अतिरिक्त रेल क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के बीच कम रोकना पड़ेगा और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

रेल मंत्री ने बताया कि इसका सीधा असर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। रेलवे के लिए माल ढुलाई से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हाई डेंसिटी रूटों की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

ट्रेनों की आवाजाही होगी ज्यादा सुचारु

क्वाड्रुपलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह की ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। करीब 2,000 किमी काम पूरा, 5,000 किमी पर काम या मंजूरी और 4,000 किमी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में होना इस बड़े विस्तार की व्यापकता को दर्शाता है।

रेल नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने की कवायद

रेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, ट्रैक क्षमता बढ़ाने और तेज रेल परिवहन की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्वाड्रुपलिंग से रेलवे को न केवल मौजूदा ट्रैफिक संभालने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाले वर्षों में नई यात्री ट्रेनों और अधिक मालगाड़ियों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता भी मिल सकती है।

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मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत..? छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI, ग्रेटर नोएडा प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत..? छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI, ग्रेटर नोएडा प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

CJI Suryakant news

CJI Suryakant: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद छात्रों पर कार्रवाई करने को लेकर शीर्ष अदालत बेहद सख्त नजर आ रही है। ग्रेटर नोएडा के एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा यूनिवर्सिटी के छात्र को 'शांति बंधपत्र' का नोटिस भेजने पर चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ लहजे में पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो मजिस्ट्रेट की ऐसी हिम्मत कैसे हुई? 

 

अदालत के स्पष्ट रुख के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आदेशों की अनदेखी का एक बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां CJI सूर्यकांत ग्रेटर नोएडा प्रशासन की कार्यशैली पर बुरी तरह भड़क गए। मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए एक प्रशासनिक नोटिस से जुड़ा है। ALSO READ: CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

 

जब यह मामला चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष लाया गया, तो उन्होंने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने पहले ही साफ कर दिया था कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जबरन या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। देश का कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।

क्या है पूरा विवाद और क्यों भेजा गया नोटिस?

यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत छात्र अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। ALSO READ: NEET प्रदर्शन विवाद : पुलिस लाठीचार्ज वाली याचिका मामले में क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?

 

पुलिस का दावा था कि प्रयागराज निवासी और GBU का छात्र अक्षत छात्रों को उकसाने, सरकार विरोधी और भ्रामक प्रचार फैलाने का काम कर रहा था, जिससे परिसर में तनाव फैल सकता था। छात्र अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में भाग लिया था और वह किसी तरह का भ्रामक प्रचार नहीं कर रहा था।

स्थानीय प्रशासन बैकफुट पर

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और सीजेपी प्रदर्शनों से जुड़े किसी भी छात्र पर दंडात्मक कार्रवाई न करने का अंतरिम आदेश दे चुका है। अदालत का कड़ा रुख देखने और मामला तूल पकड़ने के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस और स्थानीय प्रशासन बैकफुट पर आ गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया है।

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या पर सियासी बवाल, राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या पर सियासी बवाल, राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल

chongtham vikram

दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुरी संगीतकार सी. विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि उन्होंने डिलीवरी बॉय और ढाबा कर्मचारियों द्वारा घर के बाहर शोर मचाने और शराब पीने का विरोध किया था। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। दिल्ली में पूर्वोत्तर के संगीतकार की हत्या पर बवाल मच गया। राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल? ALSO READ: दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

 

क्या है मामला?

7 सितंबर को सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में GD नंबर 10A के तहत एक PCR कॉल मिली। यह कॉल किलोकारी गांव के रहने वाले 54 वर्षीय सी.विक्रम सिंह के साथ मारपीट के बारे में थी। जब विक्रम सिंह ने नीचे उतरकर उन लोगों को मना किया और आपत्ति जताई तो आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। उनके साथ लात-घूंसों से जमकर मारपीट की गई। बेटे उन्हें अस्तपाल ले गए जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

 

7 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें भरत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन विश्वकर्मा, विजय और मन्नू शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 19 से 36 साल के बीच है। एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

 

मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते थे सी विक्रम सिंह

विक्रम सिंह पिछले कई वर्षों से किलोकरी में परिवार के साथ रह रहे थे। वह मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले और मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते थे। वह एक संस्थान के लिए संगीतकार के तौर पर काम करते थे। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

राहुल ने पूर्वोत्तर परिवार की ओर से पूछा सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मणिपुर के एक प्रतिष्ठित संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह जी घर के बाहर हो रहे शोर को कम करने के लिए नीचे गए थे, और इसके लिए उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया।

 

एक पिता, जिसकी उसके अपने देश की राजधानी में, उसके अपने घर के बाहर हत्या कर दी गई। ऐसी कई घटनाओं के बाद, दिल्ली का हर पूर्वोत्तर परिवार आज यही सवाल पूछ रहा है – क्या हम यहां सुरक्षित हैं? बढ़ती अराजकता, खासकर पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने के लिए शाह का गृह मंत्रालय (MHA) और दिल्ली पुलिस क्या कर रही है?

 

मामले की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। विक्रम जी के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

 

क्या बोले मेघालय CM कॉनराड संगमा?

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा कि दिल्ली में मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मारपीट के कारण हुई दुखद मौत की घटना से मैं बहुत आहत हूं। इस घटना ने राजधानी में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ होने वाले अत्याचारों के दर्दनाक घावों को एक बार फिर ताजा कर दिया है। मैं अधिकारियों और दिल्ली पुलिस से अपील करता हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

Delhi building collapse case

दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले अदालत ने आरोपी हरिराम बंसल के बेटे को पुलिस कस्टडी में भेजा। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

 

सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोग मारे गए जबकि 12 लोगों का रेसक्यू किया गया था। हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में हरिराम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिल्डिंग उर्मिला की थी, उसका बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था और उसका मैनेजमेंट बेटा संभालता था।

 

दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामल में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। ALSO READ: Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

 

क्या है CJP की मांग?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट