रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

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उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

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इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

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विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की

CJP protest ends Abhijeet Dipke

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति और उनके बेटे की विदेश में हुई उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की है। RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से भी वित्तीय पहलुओं की जांच करने का आग्रह किया है।

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अमित तिवारी ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवानराव दिपके ने अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस तरह वहन किया। उन्होंने भगवानराव दिपके की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग करते हुए उनकी सरकारी सेवा और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने की स्थिति का हवाला दिया है।

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कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपए के कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल

 

RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित 1 करोड़ रुपए के कानूनी रक्षा कोष को लेकर भी निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से जांच की मांग की है।

 

सिब्बल ने सोमवार को NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की ओर से बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। तिवारी ने इस फंड की प्रकृति और इसके वित्तीय स्रोतों की भी जांच किए जाने की मांग की है।

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CJP के राजनीतिक दल के रूप में संचालन पर भी सवाल

 

अमित तिवारी ने कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि CJP एक अपंजीकृत संस्था है, लेकिन राजनीतिक दल के नाम से काम कर रही है। तिवारी के मुताबिक, यदि CJP के लिए 1 करोड़ रुपए का कानूनी रक्षा कोष घोषित किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संगठन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक दल के नाम से उसका संचालन और धन का संग्रह या प्राप्ति जांच के दायरे में आ सकती है।

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GST को लेकर भी जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का भी रुख किया है। उन्होंने बोर्ड से यह जांचने का अनुरोध किया है कि सिब्बल की प्रस्तावित 1 करोड़ रुपए की राशि पर GST लागू होता है या नहीं। फिलहाल, इन सभी मुद्दों पर RTI कार्यकर्ता की ओर से जांच की मांग की गई है। उनके आरोपों और सवालों के आधार पर संबंधित प्राधिकरणों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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कौन हैं अमित तिवारी

अमित तिवारी गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। वे एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। अभिजीत दिपके और उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद अमित तिवारी सुर्खियों में हैं। यह पहला मामला है जब अमित तिवारी किसी तरह की सुर्खियों में आए हो। इससे पहले उन्हें कम लोग ही जानते थे।

Gen-Z को PM मोदी ने दिया नशे से दूर रहने का मंत्र, शुरू किया नशा मुक्त युवा अभियान

narendra modi distributes government jobs appointment letter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान' का शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारे समाज में भी नशे को हमेशा एक बुराई के रूप में देखा है।

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हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया…हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गई है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। इसके लिए युवाओं को हर तरह के नशे और मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहना होगा।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उनके परिवारों, समाज और पूरे देश को नशामुक्त बनाने के प्रयासों से जोड़ना है।

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100 सप्ताह तक चलेगा जनभागीदारी अभियान

 

पीएम मोदी ने बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने खुद को Gen-Z का प्रतिनिधि बताया।

 

इस अभियान के तहत देशभर में 100 सप्ताह तक ‘जनभागीदारी’ अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत हर रविवार देश के अलग-अलग हिस्सों में नशे के खिलाफ जागरूकता और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

युवाओं को बनाया जाएगा सामाजिक बदलाव का दूत

 

अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपने समुदाय में सकारात्मक सामाजिक बदलाव का दूत बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत खेल प्रतियोगिताएं, वॉकाथॉन, ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, चर्चा मंच, कला प्रतियोगिताएं और विभिन्न सामुदायिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

 

2020 में शुरू हुआ था नशा मुक्त भारत अभियान

 

कार्यक्रम में केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के विजन के अनुरूप वर्ष 2020 में नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि नए अभियान के जरिए नशे के खिलाफ जागरूकता को और व्यापक स्तर पर ले जाने तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

‘मेरी बेटी को नई जिंदगी मिली’: PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए लड़की की मां क्या बोली?

CJP Protest News Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए पहले माफी मांग चुकी 15 साल की छात्रा ने अब सार्वजनिक रूप से पहली बार खुलकर बात की है। छात्रा ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे माफ कर दिया जाएगा। उसने PM मोदी के संदेश को दूसरी जिंदगी मिलने जैसा बताया।

उसने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वह अपने आस-पास के लोगों से प्रभावित थी। आरोप लगाया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। उसने कहा कि उसके खिलाफ दर्ज पुलिस केस अभी तक वापस नहीं लिया गया है। छात्रा ने कहा कि उसने अनजाने में वे बातें नहीं कही थीं। बल्कि वह विरोध प्रदर्शन वाली जगह के माहौल और दूसरे लोग जो उसे बता रहे थे, उससे प्रभावित थी।

लड़की की मां ने क्या कहा?

वहीं, लड़की की मां ने कहा कि PM मोदी के माफ करने के फैसले की वजह से उनकी बेटी को नई जिंदगी मिली है। न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए लड़की की मां ने कहा कि वे PM मोदी की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने बदला लेने के बजाय माफ करने का रास्ता चुना। उन्होंने इसे अपनी बेटी के लिए एक दूसरा मौका बताया।

उन्होंने कहा, “PM मोदी ने उस बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है, जिसने इतने गंदे और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया था। आज उसका जन्मदिन है और PM मोदी ने उसे सबसे बड़ा तोहफा दिया है जीवनदान….। आज इस लड़की का पुनर्जन्म हुआ है।” शुक्रवार को PM मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके संयम बरतने की अपील की थी।

यह अपील जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अपशब्दों वाले नारे लगाए जाने के बाद की गई थी। प्रधानमंत्री ने उन्हें अपशब्द कहने वालों को गुमराह बताया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसका समाधान गुस्से या बदले की भावना में है।

‘बहकावे में आ गई थी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। खुद को 15 साल का बताने वाली लड़की ने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने संबंधी उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उसने खुद पोस्ट नहीं किया था। उसने कहा कि वह इस पर बहुत शर्मिंदा है।

पीटीआई द्वारा संबंधित वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं। लेकिन यह गुमराह बच्चों को अपनाने और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।

जंतर-मंतर कैसे पहुंचीं लड़की?

माफी वाले वीडियो में लड़की ने कहा, “मैं अपने दोस्तों के साथ सीपी (कनॉट प्लेस) गई थी, जहां प्रदर्शन हो रहा था।…वहां लोग बहुत चीजें बोल रहे थे। प्रधानमंत्री जी को बहुत गालियां दे रहे थे। उन लोगों के बहकावे में आकर मैंने वे सब चीजें बोलीं।”

लड़की ने कहा, “मैं अभी मात्र 15 साल की हूं। मैंने जो किया वह माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत गंदी चीजें बोलीं। लेकिन यह मेरी पहली और आखिरी गलती होगी। इसके बाद मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी। न ही वो चीज मैंने कभी पोस्ट की थी।…मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मैं इतनी शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरें भी नहीं उठा पा रही हूं।”

गाजियाबाद में शिकायत दर्ज

लड़की का यह वीडियो गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की ओर से 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर सेक्टर-168 स्थित लोटस जिंग आवासीय सोसाइटी की निवासी लड़की ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची।

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पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की गई और उसे जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने इस कंटेंट के प्रसार को लेकर साइबर सेल थाने में FIR दर्ज की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को इसे हटाने का नोटिस जारी कर जांच के तहत संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।

दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान 6 दिन तक पथराव, 244 पुलिसकर्मी और 209 नागरिक घायल, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

cjp jantar mantar protest

कथित NEET-UG पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के सेंट्रल इलाके में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान छह दिनों से अधिक समय तक अलग-अलग स्थानों पर पथराव की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए संयम बरता और संवेदनशीलता को देखते हुए हालात को नियंत्रित किया।

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हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक संसद के आसपास करीब 2 किलोमीटर के दायरे में प्रदर्शन से जुड़े कई स्थानों को संवेदनशील बिंदु यानी फ्लैशपॉइंट के रूप में चिन्हित किया गया था। इन स्थानों में महत्वपूर्ण सड़कें और चौराहे शामिल थे।

संसद के आसपास इन जगहों पर हुई पथराव की घटनाएं

दस्तावेज के मुताबिक, जिन स्थानों पर पथराव की घटनाएं दर्ज की गईं, उनमें गोल डाक खाना, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रफी मार्ग पर रेल भवन के पास बैरिकेड, जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस स्थित LIC बिल्डिंग के पास आउटर सर्किल, टॉल्स्टॉय-संसद मार्ग कॉरिडोर के कई हिस्से, SBI बिल्डिंग के पास संसद मार्ग, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास रायसीना रोड और संसद मार्ग-टॉल्स्टॉय रोड की ओर रिगल बिल्डिंग क्षेत्र शामिल हैं। रफी मार्ग पर रेल भवन के पास स्थित बैरिकेड को संसद के सबसे नजदीक का घटनास्थल बताया गया है। अन्य स्थान संसद से करीब 0.8 से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित थे।

 

25 जुलाई तक जारी रहा पथराव

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद भी पथराव की घटनाएं जारी रहीं और 25 जुलाई तक स्थिति बनी रही। इसी दिन CJP ने सरकार की ओर से अपनी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की थी। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और इसे और अधिक हिंसक होने से रोकने का प्रयास किया।

सरकारी संपत्ति को भी नुकसान

प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान और कुछ सामान के गायब होने का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, 110 बैरिकेड और 171 रस्सियां क्षतिग्रस्त हुईं या गायब मिलीं। इसके अलावा एक वायरलेस सेट, एक बॉडी-वॉर्न कैमरा, 10 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर (HHMD), दो पब्लिक एड्रेस सिस्टम, 15 लाउडहेलर, 10 अग्निशामक यंत्र, चार वायर कटर और एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर के भी क्षतिग्रस्त या गायब होने की जानकारी दी गई है।

355 हेलमेट समेत सुरक्षा उपकरण क्षतिग्रस्त

 

प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सुरक्षा उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की बात दस्तावेज में कही गई है। इसमें 355 हेलमेट, 285 बॉडी प्रोटेक्टर, 54 शील्ड, 10 टॉर्च, 24 फर्स्ट-एड बॉक्स और 12 कंबल क्षतिग्रस्त या गायब होने का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार, 29 सरकारी वाहनों पर भी असर पड़ा। इनमें कार, बस, मोटरसाइकिल और टेंपो शामिल हैं। एक पानी का टैंकर, एक DTC बस और एक सार्वजनिक वाहन के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी दी गई है।

 

244 पुलिसकर्मी और 209 नागरिक घायल

प्रदर्शन के दौरान 244 पुलिसकर्मियों और 209 नागरिकों के घायल होने की बात भी दस्तावेज में कही गई है। इन मामलों को मेडिको-लीगल केस (MLC) के तौर पर दर्ज किया गया। इनमें बार-बार दी गई चेतावनियां, बैरिकेड तोड़ना, वाहनों को नुकसान पहुंचाना और पुलिसकर्मियों तथा प्रेस के साथ कथित तौर पर लगातार अभद्र व्यवहार शामिल था।

Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

Abhijeet Dipke: रिटायर्ड पिता ने विदेश में अभिजीत दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने CJP के फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांग

Abhijeet Dipke: सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत डिपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी अपने बेटे की विदेश में हायर एजुकेशन का खर्च कैसे उठा सकता है? RTI एक्टिविस्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और सेंट्रल GST अधिकारियों से CJP के कानूनी स्टेटस और फंडिंग की जांच करने का भी आग्रह किया है।

RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी और अभिजीत डिपके के पिता भगवान राव डिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। तिवारी ने सवाल किया कि रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद भगवानराव डिपके अपने बेटे को हायर एजुकेशन के लिए विदेश कैसे भेज पाए। इसी आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है।

लीगल डिफेंस फंड भी जांच के दायरे में

डिपके के पिता की आर्थिक जांच की मांग के अलावा, तिवारी ने CJP के उन प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड पर भी आपत्ति जताई है, जिन पर कथित NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े पुलिस केस चल रहे हैं। तिवारी ने चुनाव आयोग को एक लेटर लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या लीगल डिफेंस फंड की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी को ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत रजिस्टर किया गया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक तिवारी ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी एक अनरजिस्टर्ड संस्था है। लेकिन एक पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर काम कर रही है। अगर इसे लीगल डिफेंस फंड के तौर पर 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या CJP ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत उसके पास रजिस्टर्ड है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी रजिस्टर्ड नहीं है, तो पॉलिटिकल पार्टी के नाम पर उसका काम करना और फंड इकट्ठा करना या लेना जांच का विषय हो सकता है।

कपिल सिब्बल ने दिया 1 करोड़

एक अलग अर्जी में तिवारी ने सेंट्रल GST अधिकारियों से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिबल CJP प्रदर्शनकारियों के कानूनी बचाव के लिए दिए गए 1 करोड़ रुपये के योगदान पर 18 प्रतिशत GST देने के लिए जिम्मेदार होंगे। NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए CJP ने एक लीगल डिफेंस फंड बनाया है। सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की है।

विवाद के बीच अभिजीत दिपके बीमार पड़े

यह नया विवाद सामने आने के बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अपने घर पर अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, दिपके शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे अपने घर के पार्किंग एरिया में इंतजार कर रहे लोगों के एक समूह से मिलने के लिए नीचे आए। हालांकि, जल्द ही उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद वे घर के पिछले हिस्से में गए और उल्टी की। इसके बाद वे मीडिया से बात किए बिना ही वापस ऊपर चले गए। उनके पिता भगवान दिपके ने बताया कि उनकी जांच के लिए तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया।

दिपके का इलाज करने वाले डॉ. विशाल लहाने ने पत्रकारों को बताया कि उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 100/60 mmHg हो गया था। उन्होंने उनकी इस हालत का कारण तनाव और चिंता को बताया। डॉक्टर ने कहा, “दिपके का ब्लड प्रेशर 100/60 के स्तर पर थोड़ा कम है। तनाव और चिंता के कारण उन्हें सुबह से ही बेचैनी और जी मिचलाने की समस्या हो रही है। उन्हें कुछ बार उल्टी हुई है और दस्त की भी शिकायत है।”

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डॉक्टर ने बताया कि दिपके को IV (नस के ज़रिए) फ्लूइड दिया गया। उन्हें दिन भर आराम करने की सलाह दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि दिपके को बुखार नहीं है। उम्मीद है कि पर्याप्त आराम करने से वे ठीक हो जाएंगे। अगर उनकी हालत में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर इलाज के अगले कदम पर फैसला लेने से पहले ब्लड टेस्ट करेंगे।

आंदोलन के बाद छत्रपति संभाजीनगर लौटे CJP प्रमुख अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने दी आराम की सलाह

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Deepke health news: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में आंदोलन का झंडा बुलंद करने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अचानक अस्वस्थ हो गए हैं। शनिवार को अपने गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर स्थित आवास पर समर्थकों और लोगों से मुलाकात के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच कर उन्हें पूरी तरह से आराम करने की सख्त सलाह दी है।

क्या हुआ था उस वक्त?

शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे अभिजीत दीपके अपने घर के पार्किंग एरिया में उनसे मिलने पहुंचे लोगों और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज बेचैनी महसूस हुई और वे अचानक बातचीत छोड़कर घर के पिछले हिस्से में चले गए, जहां उन्हें उल्टी हुई। इसके बाद वे मीडियाकर्मियों से बिना बातचीत किए सीधे अपने कमरे में चले गए। दीपके के पिता भगवान दीपके ने स्थिति को देखते हुए तुरंत डॉक्टरों की टीम को बुलाया। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

 

डॉ. विशाल लहाने ने दीपके के आवास पर जाकर उनका मेडिकल चेकअप किया। जांच के बाद डॉ. लहाने ने बताया कि उनका रक्तचाप (BP) सामान्य से थोड़ा कम (100/60) पाया गया है। दरअसल, अत्यधिक तनाव और घबराहट की वजह से उन्हें जी मिचलाने, बार-बार उल्टी और दस्त की समस्या हुई है।  डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप (ग्लूकोज) चढ़ाई है। फिलहाल उन्हें बुखार नहीं है और उन्हें पूरी तरह से आराम करने को कहा गया है। यदि सेहत में सुधार नहीं होता है, तो ब्लड टेस्ट कराए जाएंगे। ALSO READ: धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

कौन हैं अभिजीत दीपके?

अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले एक चर्चित सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक एवं प्रमुख हैं। अपने अनोखे और लीक से हटकर विरोध प्रदर्शनों के कारण वे सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में काफी चर्चा में रहते हैं।

 

जुलाई के आखिरी हफ्ते में (25 जुलाई के आसपास) दीपके दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे थे। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने बताया था कि वे टाइफाइड से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। दिल्ली के उग्र आंदोलन, लगातार भागदौड़ और टाइफाइड के बावजूद आराम न करने की वजह से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई।