हमेशा अभिजीत दिपके के बगल में दिखने वाले सौरव दास कौन? जानिए उनका पूरा बैकग्राउंड

Who is Saurav Das: देश भर में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन की पूरे देश में गूंज है। 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद से लोगों की जबान पर अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका का नाम है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके इस आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार हैं, लेकिन केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ टेबल टॉक से लेकर मीडिया के सामने छात्रों की मांगों को मजबूती से रखने का पूरा जिम्मा CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास संभाल रहे हैं।

CJP के मुख्य मीडिया यूनिट के हेड और स्पोक्सपर्सन के रूप में सौरव दास आज इस आंदोलन की सबसे पहचानी जाने वाली आवाज बन चुके हैं। जानें सौरव दास का पूरा बैकग्राउंड, पढ़ाई, पत्रकारिता के सफर और उनकी प्रोफाइल की पूरी डिटेल।

कौन हैं सौरव दास?

सौरव दास पेशे से एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कानून, न्यायपालिका, गवर्नेंस और नागरिक अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर कई वर्षों तक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। फिलहाल वो कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और सरकार के साथ बातचीत में मुख्य वार्ताकार।

CJP में शामिल होने से पहले भी वे नागरिक और पर्यावरणीय आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, जिसमें प्रदूषण विरोधी अभियान और ‘क्लाइमेट एक्शन फ्रंट’ जैसे प्रयास शामिल हैं। जून में CJP द्वारा पहला देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने से ठीक पहले सौरव दास को संगठन के प्रमुख सार्वजनिक संचारक के रूप में पेश किया गया था।

18 की उम्र में RTI से बनाई पहचान

सौरव दास की शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने साल 2016 से 2019 के दौरान एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज के दिनों में ही मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून का सक्रिय उपयोग करना शुरू कर दिया था।

RTI के माध्यम से मिली जानकारियों के आधार पर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कई कमियों और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उजागर किया। उनकी खोजी रिपोर्ट ‘द कारवां’, ‘आर्टिकल 14’, ‘द वायर’ और ‘अल जजीरा’ जैसे नामचीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

NEET आंदोलन के हैं सूत्रधार

NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सौरव दास छात्रों का पक्ष रखने वाले सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास शामिल थे, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीधी मुलाकात की और छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा।

वे लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, प्रभावित अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग पर कायम हैं। पुलिस की कार्रवाई और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच भी सौरव दास ने हमेशा आंदोलन को अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने की अपील की है।

कौन हैं अभिजीत दिपके, कितनी पढ़ाई की है? CJP के संस्थापक का पूरा बैकग्राउंड जानिए

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

indian education system

cjp protest in delhi: हमारे देश में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए युवाओं को NEET, JEE और UPSC जैसी कठिनतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, देश की नीतियां और भविष्य तय करने वाले राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता या मानक परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। केवल किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़कर कोई भी व्यक्ति नीति-निर्माता बन सकता है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जहाँ देश के निर्माण में लगे विशेषज्ञों के लिए योग्यता के कड़े पैमाने हैं, वहीं पूरे तंत्र को चलाने वाले वर्ग के लिए ऐसी कोई जवाबदेही तय नहीं है। एक अंगूठा टेक भी शिक्षा मंत्री बन सकता है।

 

1. वर्तमान शिक्षा प्रणाली की मौलिक कमियाँ

स्मृति-केंद्रित मूल्यांकन: हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था बुद्धिमत्ता की जगह केवल रटने की क्षमता (Memory) की परीक्षा लेती है। यही कारण है कि अकादमिक स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थी भी व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के सामने कई बार असहाय सिद्ध होते हैं।

 

प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा का दबाव: पारंपरिक शिक्षा बच्चों में सहयोग के स्थान पर तुलना और प्रतिस्पर्धा की भावना भरती है। “प्रथम आने” की यह अंधी दौड़ अंततः मानसिक तनाव, ईर्ष्या और सामाजिक विसंगतियों को जन्म देती है।

 

जीविका बनाम जीवन का बोध: वर्तमान शिक्षा नीति का पूरा जोर केवल इस बात पर है कि “रोटी कैसे कमाई जाए”। यह विद्यार्थी को आजीविका कमाना तो सिखाती है, लेकिन शांत, संतुलित और आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला से दूर रखती है।

 

2. स्कूल बनाम कोचिंग: शिक्षा व्यवस्था का दोहरा रवैया

भारत में शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, ज्ञानवर्धन और प्रतिभा का विकास माना गया था। लेकिन आज की वास्तविक स्थिति यह है कि देश का शिक्षा ढांचा एक ऐसी अंधी दौड़ में बदल चुका है, जहाँ छात्र और अभिभावक दोनों मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव तले पिस रहे हैं। 'स्कूल बनाम कोचिंग' की दुविधा और 'आरक्षण-आधारित व्यवस्था' से उपजी हताशा- ये दो ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर व्यापक और बेबाक चर्चा की तत्काल आवश्यकता है।

 

आज के समय में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि बच्चे को अंततः प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग ही जाना है, तो स्कूल प्रणाली का औचित्य क्या रह जाता है?

 

समय और संसाधन की बर्बादी: एक सामान्य विद्यार्थी सुबह 6 से 8 घंटे स्कूल में बिताता है और उसके तुरंत बाद कोचिंग संस्थानों का रुख करता है। इससे न तो उसे स्व-अध्ययन (Self-study) का समय मिलता है और न ही मानसिक विश्राम का।

 

'डमी स्कूल' कल्चर का पनपना: 11वीं और 12वीं कक्षा में प्रवेश लेते ही छात्र 'डमी स्कूलing' का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्कूल केवल नाममात्र के लिए रह जाते हैं और उनकी पूरी पढ़ाई का केंद्र कोचिंग सेंटर बन जाते हैं। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हमारी मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के मापदंडों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

 

आर्थिक व मानसिक शोषण: अभिभावक स्कूल और कोचिंग दोनों की भारी-भरकम फीस भरते हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब किसी कारणवश बच्चे का चयन नहीं होता, तो परिवार आर्थिक रूप से टूट जाता है और बच्चा भयंकर अवसाद (Depression) या हताशा का शिकार हो जाता है।

 

3. योग्यता, आरक्षण और युवाओं की अनिश्चितता

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था ने मेधावी और मेहनती युवाओं के सामने एक अनूठा संकट खड़ा कर दिया है।

 

मेहनत और परिणाम का असंतुलन: जो छात्र दिन-रात एक करके अत्यधिक कठिन परिश्रम करते हैं, उन्हें अक्सर प्रक्रिया के अंत में यह पता चलता है कि कट-ऑफ और सीटों के आरक्षण के कारण उनके सारे प्रयास निष्फल हो गए। यह स्थिति किसी भी युवा के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।

 

भविष्य के प्रति अनिश्चितता: परीक्षा और नौकरी दोनों स्तरों पर व्याप्त यह व्यवस्था उन बच्चों के लिए अत्यधिक कष्टदायी साबित हो रही है, जो केवल अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। जब पढ़ाई का पैमाना केवल अंक या ज्ञान न रहकर जातिगत या श्रेणीगत श्रेणियां बन जाता है, तो प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और निराशा का जन्म होता है।

 

संवाद का अभाव: इस नीतिगत भेद पर कोई भी राजनीतिक दल या नीति-निर्माता खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। सवाल यह है कि यह व्यवस्था कितनी और पीढ़ियों तक इसी रूप में चलती रहेगी और कब तक योग्यता को हाशिये पर रखा जाएगा?

 

4. भौतिकवादी दृष्टिकोण और प्रलोभन की संस्कृति

सफलता की संकीर्ण परिभाषा: बचपन से ही बच्चों के मन में यह विचार गहराई से बिठा दिया जाता है कि पद, ऊँची तनख्वाह, गाड़ी और बंगला ही सफलता के एकमात्र पैमाने हैं।

 

नैतिकता पर हावी पद-लोभ: व्यवस्था बच्चों को 'शांत व गुणी इंसान' या 'वैज्ञानिक' बनने के बजाय 'ऊँची कुर्सी' पाने का प्रलोभन देती है। इस दौड़ में सफलता पाने के साधनों की शुद्धता पीछे छूट जाती है और केवल परिणाम को ही महत्व दिया जाता है।

 

संघर्ष का भाव: यह दृष्टिकोण समाज में एक ऐसा माहौल बनाता है जहाँ हर व्यक्ति दूसरे के खिलाफ संघर्षरत दिखाई देता है, जिससे सहज मैत्री-भाव और सामाजिक सद्भाव समाप्त हो जाता है।

 

5. सामाजिक और वैचारिक विभाजन के केंद्र

संस्थागत सांप्रदायिकता: देश में शिक्षा का ढांचा धार्मिक और सांप्रदायिक आधारों पर बंटा हुआ प्रतीत होता है। विभिन्न धार्मिक व निजी शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने एजेंडे के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित कर रही हैं, जिससे एकीकृत राष्ट्रीय चेतना का निर्माण बाधित होता है।

 

कैंपस में वैचारिक ध्रुवीकरण: उच्च शिक्षण संस्थान अक्सर वैज्ञानिक शोध और मौलिक चिंतन के केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक विचारधाराओं (लेफ्ट और राइट विंग) के टकराव के अड्डे बन जाते हैं। छात्र राष्ट्र निर्माण या नवाचार के बजाय आंदोलनों तक सीमित होकर रह जाते हैं।

 

6. प्राथमिकताओं का विपर्यय और भविष्य की चुनौतियाँ

सकारात्मक प्रेरणा का अभाव: हमारी सामाजिक सोच बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार या नेता बनने का दबाव तो देती है, लेकिन उन्हें एक संवेदनशील इंसान, मौलिक साहित्यकार या वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा नहीं देती।

 

वैज्ञानिक सोच बनाम सांस्कृतिक संघर्ष: यदि हम आने वाली पीढ़ियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास करने में विफल रहे, तो समाज वैचारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्षों में ही उलझा रहेगा।

 

शिक्षा में क्रांति की जरूरत:

आज़ादी के बाद से शिक्षा नीतियों में अनेक बदलाव हुए, लेकिन वे मुख्य रूप से सतही ही रहे। जब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल 'आज्ञाकारी कर्मचारी' बनाने के ढर्रे से बाहर निकलकर संशय, मौलिक सोच, वैज्ञानिक चेतना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा नहीं देती, तब तक एक सशक्त और विवेकशील समाज का निर्माण संभव नहीं है। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली न तो विद्यार्थी को सर्वांगीण विकास दे पा रही है और न ही उसे निष्पक्ष अवसर की गारंटी दे रही है। यदि हमें देश के युवा धन को अवसाद, पलायन और आंदोलन से बचाना है, तो दो शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव करना होंगे। 

कौन हैं अभिजीत दिपके, कितनी पढ़ाई की है? CJP के संस्थापक का पूरा बैकग्राउंड जानिए

सोशल मीडिया के दौर में कई अभियान कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल के दिनों में Cockroach Janta Party (CJP) भी ऐसी ही एक मुहिम बनकर उभरी है, जिसने अपने अलग अंदाज और डिजिटल कैंपेन के जरिए लोगों का ध्यान खींचा। इस अभियान के साथ एक नाम लगातार सुर्खियों में है अभिजीत दिपके। उनकी रणनीति, सोशल मीडिया पर पकड़ और युवाओं से जुड़ने का तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है।

बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि आखिर अभिजीत दिपके कौन हैं, उन्होंने कहां से पढ़ाई की, उनका प्रोफेशनल बैकग्राउंड क्या है और कैसे वे इस तेजी से वायरल हो रहे अभियान का प्रमुख चेहरा बन गए। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा, करियर और अब तक के सफर से जुड़ी अहम बातें।

कौन हैं अभिजीत दिपके?

अभिजीत दिपके एक राजनीतिक कम्युनिकेशन प्रोफेशनल और डिजिटल कैंपेन स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने Cockroach Janta Party की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में की, जिसे युवाओं ने तेजी से समर्थन दिया।

प्लेटफॉर्म खुद को “आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज” बताता है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा कथित NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग करता है।

सिर्फ कुछ दिनों में लाखों-करोड़ों का समर्थन

CJP की शुरुआत के कुछ ही दिनों में इसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी। इंस्टाग्राम पर कुछ ही समय में करोड़ों लोग इस मुहिम से जुड़ गए, जबकि X (पूर्व ट्विटर) पर भी मीम्स, रील्स और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए यह अभियान वायरल हो गया।

इसके अलावा, संगठन ने अपनी वेबसाइट और एंथम भी लॉन्च किया तथा एक लाख से अधिक लोगों ने इससे जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।

क्या है अभिजीत दिपके की शैक्षणिक योग्यता?

अभिजीत दिपके ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भारत में पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए।

  • पुणे से जर्नलिज्म की पढ़ाई की।
  • अमेरिका की Boston University से मास्टर ऑफ पब्लिक रिलेशंस की डिग्री हासिल की।
  • पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बताया कि वह नौकरी के अवसरों की तलाश में हैं।

राजनीतिक कम्युनिकेशन में भी रहा अनुभव

Cockroach Janta Party शुरू करने से पहले अभिजीत दिपके 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया कैंपेन और चुनावी रणनीति पर काम किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान उन्होंने युवाओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के लिए मीम-आधारित डिजिटल कैंपेन में भी भूमिका निभाई थी।

NEET विवाद के बाद तेज हुई मुहिम

CJP का अभियान सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। संगठन ने कथित NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन भी किए। समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और संसद की ओर मार्च निकालकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

48 घंटे की भूख हड़ताल भी की

अभिजीत दिपके ने इस अभियान के तहत 48 घंटे की भूख हड़ताल भी की। बाद में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद यह अनशन समाप्त हुआ। इस दौरान संगठन ने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन भी सौंपा।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंची मुहिम

Cockroach Janta Party का तेजी से बढ़ता प्रभाव यह दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरू हुआ कोई अभियान बहुत कम समय में बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। मीम्स, व्यंग्य और सोशल मीडिया की ताकत के सहारे यह पहल अब ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

4 लाख रुपये महीना कमाता है युवक, फिर भी छोड़ना चाहता है भारत! बताई चौंकाने वाली वजह

कॉकरोच वाली पोस्ट डालकर विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत! अब मांगा जाएगा जवाब

CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में आरएएफ यानी रैपिड एक्शन फोर्स की एक अधिकारी विवादों में घिर गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की अधिकारी सोनिया सहरावत से उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर जल्द ही जवाब मांगा जा सकता है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद उनकी सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट और गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई थीं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में उनसे जल्द स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

न्यूज18 के रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सोशल मीडिया से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन के संकेत मिले हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सीआरपीएफ पहले सोनिया सहरावत से उनका पक्ष जानेगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च अधिकारी उनसे जवाब मांगेंगे और इसकी जानकारी उन्हें पहले ही दे दी गई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए न्यूज18 ने सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह और सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थीं सोनिया सहरावत

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) में तैनात सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान झड़प में घायल हो गई थीं। इसके बाद वह सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा सबसे चर्चित चेहरा बन गईं। उस दिन सोनिया सहरावत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात आरएएफ की टीम का हिस्सा थीं। झड़प के अगले दिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी तेजी से वायरल हो गई। इस पोस्ट की सीजेपी और कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की, जिसके बाद फोर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के दौरान सोनिया सहरावत के कंधे में चोट लगी और उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ। उनका इलाज किया गया, लेकिन 20 जुलाई के बाद से उन्होंने दोबारा ड्यूटी जॉइन नहीं की है। फिलहाल वह स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को सोनिया सहरावत अन्य घायल जवानों के साथ सीआरपीएफ मुख्यालय पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने भी उनसे मुलाकात की।

अब जांच के दायरे में अकाउंट

असिस्टेंट कमांडेंट  सोनिया सहरावत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6.28 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह यहां अक्सर अपनी निजी जिंदगी और कभी-कभी वर्दी में ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। हालांकि, हाल ही में वायरल हुई उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद अब उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां आधिकारिक जांच के दायरे में आ गई हैं। इस बीच, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बुधवार को सोनिया सहरावत और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अन्य सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मुश्किल हालात में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए जवानों की सराहना की और उनके काम की प्रशंसा की।

सीआरपीएफ की सोशल मीडिया नीति क्या कहती है?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने जवानों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, जवानों को किसी भी पोस्ट में तथ्य और निजी राय के बीच साफ अंतर रखना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया, ब्लॉग या किसी भी ऑनलाइन मंच पर साझा किए गए कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। जवानों को यह भी साफ लिखने की सलाह दी गई है कि उनकी निजी राय सरकार या सीआरपीएफ का आधिकारिक रुख नहीं है। सीआरपीएफ ने अपने कर्मियों को सरकारी नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने और सोशल मीडिया पर राजनीतिक या धार्मिक टिप्पणी करने से भी मना किया है। बल का कहना है कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों की सोशल मीडिया पोस्ट को संगठन के नेतृत्व ने उचित नहीं माना था।

बल की ओर से जारी सलाह में जवानों से यह भी कहा गया है कि वे अपने परिवार और दोस्तों को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में जागरूक करें, ताकि वे अनजाने में कोई संवेदनशील जानकारी साझा न कर दें। इसके अलावा, परिवार की निजता का ध्यान रखने, जरूरत न होने पर लोकेशन और जियो-टैगिंग बंद रखने, निजी अकाउंट की सेटिंग का इस्तेमाल करने और संवेदनशील या विवादित मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरी सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।

महाराष्ट्र के 423 शहरों के लिए ₹44800 करोड़ का प्लान, सड़क-पानी और ट्रैफिक की तस्वीर बदल जाएगी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी 423 शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड नाम से 44800 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना की घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह कार्यक्रम शहरों को अधिक आधुनिक, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम बनाएगा। यह फंड वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे अगले तीन सालों के लिए इसे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है।

फंड का ढांचा: कैसे जुटाया जाएगा 44800 करोड़ रुपये का बजट?

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता इसका ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल है। इसके तहत परियोजनाओं को केंद्र सरकार की सहायता, बाजार उधारी और राज्य के सहयोग के संयोजन के माध्यम से फाइनेंस किया जाएगा। एलिबिल परियोजनाओं को केंद्र सरकार से 25 प्रतिशत तक की फंडिंग मिल सकती है। परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए जुटाना होगा। बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार या संबंधित शहरी स्थानीय निकाय द्वारा दी जाएगी।

छोटे शहरों के लिए विशेष सुविधा

यह योजना महाराष्ट्र के सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए खुली है। छोटे शहरों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए लोन रीपेमेंट गारंटी मैकेनिज्म पेश किया है। इससे छोटी नगरपालिकाओं के लिए वित्तीय बाजारों से धन जुटाना और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को शुरू करना आसान हो जाएगा।

इन 3 मुख्य क्षेत्रों पर रहेगा फोकस और ये प्रोजेक्ट होंगे शामिल

यह फंड मुख्य रूप से तीन व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। पहला जल आपूर्ति और स्वच्छता, दूसरा क्रिएटिव अर्बन डेवलपमेंट और तीसरा शहरों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में मजबूत करना।

किन-किन परियोजनाओं को मिलेगा बजट?

योजना के तहत फंडिंग के लिए एलिजिबल प्रोडेक्ट्स यहां नीचे देखे जा सकते हैं:-

डिजिटल गवर्नेंस और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

पुराने शहरी इलाकों व बाजारों का पुनर्विकास

नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट, ट्रांजिट हब्स और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट

शहरी बाढ़ नियंत्रण और इंटिग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट

ग्रीनफील्ड और सेमी-ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट, सड़कें, फ्लाईओवर्स और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट

लैंड बैंक तैयार करना और शहरी क्षेत्रों से डेयरी गतिविधियों को बाहर ले जाना

20 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए विशेष प्रोजेक्ट

जिन शहरों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है, वहां सरकार कई सुविधाओं को भी प्राथमिकता देगी। इसमें कन्वेंशन सेंटर्स और मनोरंजन सुविधाएं, मॉडर्न पब्लिक लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स इंफ्रा, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, ध्यान केंद्र और वेलनेस पार्क जैसी चीजें शामिल हैं।

परियोजनाओं को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने किया है कि प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन होगा। हर शहर में समर्पित मिशन मैनेजमेंट सेल्स बनाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक परियोजनाओं को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स के माध्यम से भी लागू किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें- Delhi Metro Stations closed: CJP प्रोटेस्ट के कारण दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन आज भी बंद! देखें पूरी लिस्ट, यहां मिलेगी इंटरचेंज सुविधा

इसे सिर्फ एक फंडिंग स्कीम की बजाय कायाकल्प का रोडमैप बताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह फंड नागरिक सुविधाओं में सुधार करेगा, शहरी सेवाओं को मजबूत करेगा, निवेश लेकर आएगा, रोजगार पैदा करेगा और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सरकार का उद्देश्य एक कॉम्पिटेटिव , टिकाऊ और फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट शहरों को तैयार करना है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, बोले- युवाओं का भविष्य आपने बर्बाद किया, धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए

CJP Protest : rahul gandhi answer to PM Modi

छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रेक कोर्ट के एलान पर लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और इसके जिम्मेदार व्यक्तियों को संरक्षण दिया। ALSO READ: CJP Protest : आख़िर पेपर लीक पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किया फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान

 

राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया – और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें साफ़ हैं: धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं। छात्रों से माफ़ी मांगे। छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। ALSO READ: प्रीति जिंटा का छात्रों को समर्थन, सता रहा है CJP प्रोटेस्ट हाईजैक होने का डर

क्या बोले पीएम मोदी?

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच पेपर लीक पर फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड मिलेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम की घोषणा के बाद भी छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

 

पीएम मोदी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा- देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ALSO READ: CJP प्रदर्शन के कारण आज भी 16 मेट्रो स्टेशन बंद, DMRC ने जारी की सूची

 

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले में संसद से सड़क तक बवाल मचा हुआ है। सरकार संसद से जंतर मंतर तक गतिरोध तोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही है। सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे हैं। सीजेपी के प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। हालांकि सरकार आंदोलनकारियों की इस मांग से सहमत नजर नहीं आ रही है। युवा प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं तो पिछले 4 दिनों से संसद विपक्ष के हंगामे की वजह से ठप है।

Delhi Metro Stations closed: CJP प्रोटेस्ट के कारण दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन आज भी बंद! देखें पूरी लिस्ट, यहां मिलेगी इंटरचेंज सुविधा

Delhi Metro Stations closed: देश की राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता (CJP)पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। डीएमआरसी ने गुरुवार (23 जुलाई) सुबह बताया कि लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंबा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। DMRC के अनुसार, राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की सुविधा उपलब्ध है।

डीएमआरसी का यह कदम जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच उठाया गया है। इससे पहले बुधवार को भी इसी तरह मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुई थीं। 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने की वजह से बुधवार सुबह के व्यस्त समय में हजारों लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले कई यात्रियों को बीच रास्ते में अपना रूट बदलना पड़ा। कुछ को अपरिचित स्टेशनों पर उतरना पड़ा और वैकल्पिक परिवहन के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

DMRC ने क्या कहा?

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) की तरफ से गुरुवार (23 जुलाई) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “सेवा अपडेट! नीचे बताए गए मेट्रो स्टेशन सुबह 07:30 बजे से अगले आदेश तक बंद रहेंगे। हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट यानी केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज (दूसरी लाइन की मेट्रो बदलने की सुविधा) की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

ये 16 स्टेशन हैं बंद

1. लोक कल्याण मार्ग

2. राजीव चौक

3. पटेल चौक

4. रामकृष्ण आश्रम मार्ग

5. बाराखंभा रोड

6. सुप्रीम कोर्ट

7. सेवा तीर्थ

8. जनपथ

9. मंडी हाउस

10. केंद्रीय सचिवालय

11. आईटीओ

12. दिल्ली गेट

13. इंद्रप्रस्थ

14. खान मार्केट

15. जोर बाग

16. शिवाजी स्टेडियम

मेट्रो बंद होने से लोग हुए परेशान

इससे पहले बुधवार को प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा उपायों के तहत 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने से दफ्तर जाने के व्यस्त समय में मध्य दिल्ली में यात्रियों की आवाजाही बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई। यात्रियों ने बताया कि कई मार्गों पर मेट्रो सेवाएं जारी थीं। लेकिन ट्रेनें बंद किए गए स्टेशनों पर नहीं रुक रही थीं। इसके कारण यात्रियों के पास आगे जाने और फिर सड़क मार्ग से वापस लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

केंद्रीय सचिवालय से होकर यात्रा कर रही वृंदा नामक एक यात्री ने बताया कि प्रदर्शनकारी स्टेशन परिसर के पास जमा हो गए थे, जिससे यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा, “केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे। उनमें से कई लोग निकास द्वार के पास एकत्र होकर ‘वंदे मातरम’ के नारे लगा रहे थे। वहां भारी अनिश्चितता का माहौल था और लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि वे स्टेशन से बाहर निकल पाएंगे या नहीं।”

ये भी पढ़ें- ‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

येलो लाइन पर यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री ने बताया कि ट्रेन में की जा रही घोषणाओं के जरिए यात्रियों को सूचित किया जा रहा था कि दिल्ली गेट से खान मार्केट के बीच के स्टेशनों पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कई यात्रियों ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके गंतव्य स्टेशन बंद कर दिए गए हैं तो वे वैकल्पिक रूट तलाशने में जुट गए।

इससे उन्हें दफ्तर, कॉलेज पहुंचने और अन्य जरूरी कामों के लिए देरी हुई। चालू स्टेशनों के बाहर कई लोग ‘नेविगेशन ऐप’ देखते नजर आए। जबकि कुछ अपने परिवार के सदस्यों को फोन कर रहे थे। कई लोग कैब बुक करते दिखे। वहीं, बस स्टॉप और ऑटो-रिक्शा स्टैंड पर लोगों की लंबी कतारें लग गईं।

ये भी पढ़ें- ‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

Salman Khan Neet News: नीट पेपर लीक को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने बुधवार (22 जुलाई) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को नुकसान पहुंचा, उनके प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। सलमान खान ने छात्रों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने भविष्य और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के लिए मेहनत, ईमानदारी और पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें खुशी है कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके हिंसक रूप लेने की खबरें बेहद दुखद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सोच-समझकर लिखी गई पोस्ट में कहा, “यह आंदोलन इतना शांतिपूर्ण था, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह जानकर और देखकर खुशी होती है कि देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है।”

युवाओं को दी सलाह

हालांकि, सलमान खान ने यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से अपने कब्जे में नहीं लिया जाना चाहिए। सलमान ने छात्रों के साहस और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पीढ़ी शिक्षा के प्रति गंभीर है। भविष्य में देश का नाम रोशन करेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से किया गया यह आंदोलन सही दिशा में उठाया गया कदम है।

अभिनेता ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “यह मामला छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इस आंदोलन का श्रेय सिर्फ देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे भरोसा है कि सरकार भी छात्रों का पूरा सहयोग करेगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए जीत की स्थिति होगी।” सलमान खान ने यह भी कहा कि भारत को भविष्य में दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र बनना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। न ही उनके खिलाफ कोई FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।

गर्व है… CJP प्रदर्शन के बीच ब्लू टोकई ने जीता दिल, को-फाउंडर का बयान इंटरनेट पर छा गया

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP के चलो संसद मार्च के बीच गर्मी और प्रदर्शन के बीच एक कॉफी ब्रांड ने इंसानियत की मिसाल पेश कर पूरे इंटरनेट का दिल जीत लिया।

कौन हैं RAF अफसर सोनिया सहरावत? CJP के प्रदर्शन में लड़की को बचाते टूटा हाथ; अब चर्चा में क्यों

पुलिस की नौकरी के साथ-साथ उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है, जहाँ उनके 6 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं। वह पर्सनल अपडेट, डांस वीडियो, ट्रेंडिंग रील्स, फ़िटनेस कंटेंट और कभी-कभी वर्दी में अपनी ज़िंदगी की झलकियाँ शेयर करती हैं।