अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर से जुड़े पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। कंपनी ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित मिलिट्री साइट्स चुनी गई हैं। यहां आत्मघाती ड्रोन बनाए जाएंगे। 16 सितंबर को मुनीर और पॉवरस के बीच ड्रोन आयात का एमओयू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, प्रोडक्शन में पाक आर्मी की इंडस्ट्रियल यूनिट भी शामिल होगी। यूनिट की साइट फाइनल करने के लिए पाक टीम 15 अक्टूबर के बाद अमेरिका जाएगी। इसके बाद करार की बाकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। पाकिस्तान आर्मी फिलहाल चीन और तुर्किये से ड्रोन सप्लाई ले रही है। तुर्किये ने भी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन का करार किया है। ट्रम्प के बेटों की निवेश कंपनी की 9.9% हिस्सेदारी अलजजीरा के मुताबिक, ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प पॉवरस कंपनी में अमेरिकन वेंचर्स के जरिए निवेशक हैं। अमेरिकी रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, पॉवरस के प्रस्तावित मर्जर के बाद अमेरिकन वेंचर्स की कंपनी में 9.9% बेनिफिशियल हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। ट्रम्प जूनियर के प्रवक्ता के मुताबिक, वह सिर्फ पैसिव निवेशक हैं और कंपनी के कामकाज या कॉन्ट्रैक्ट में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान से पहले भारत से भी पॉवरस का करार पॉवरस का पाकिस्तान से पहले भारत में भी करार हुआ था। 30 जून की फाइलिंग में पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने बताया कि पॉवरस ने उसे भारत में गार्डियन-1 ड्रोन इंटरसेप्टर बनाने और बेचने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस दिया है। यानी पॉवरस की ड्रोन तकनीक से भारत और पाकिस्तान दोनों जुड़े हैं। पाकिस्तान ने क्या समझौता किया है? पॉवरस के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ हुआ एमओयू अंतिम समझौता नहीं है। इससे खरीदारी की बाध्यता नहीं बनती और यह अमेरिकी कानूनों और सरकार की मंजूरी के अधीन है। कंपनी ने पाकिस्तान में अपनी तकनीक बनाने के तरीकों पर काम करने की बात भी कही है। 16 सितंबर की बैठक में रक्षा खरीद, प्रोडक्शन और क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। एक्सपर्ट बोले- भारत के लिए खतरा, 4 सवालों में समझिए कैसे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुके डिफेंस एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी के मुताबिक पाकिस्तान में बनने वाले ये ड्रोन भारत की अंदरूनी सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकते हैं। 1. ड्रोन यूनिट से हमें क्या खतरा? पाक को अमेरिका से मिलने वाले कई हथियार आईएसआई से होकर आतंकियों के पास जाते हैं। कश्मीर में ऐसे कई केस हैं जब यूएस मेड हथियार आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। ये ड्रोन हमारी अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती होंगे। 2. पाक में प्रोडक्शन क्यों? पहले पाक को अमेरिका से ड्रोन आयात करने थे, लेकिन अब प्रोडक्शन इसलिए क्योंकि ट्रम्प के बेटों की कंपनी इन्हें पाक के जरिए एशिया और अफ्रीका के उन देशों को भी बेच सकेगी जिन्हें अमेरिका सीधे हथियार नहीं देता है। 3. चीन की पाक को मंजूरी क्यों? चीन का पाक में सीपैक के रूप में बड़ा निवेश है। सीपैक सबसे अहम है, पर इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बलूचिस्तान-खैबर में चीन खनन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मुनीर के कहने पर चीन ने पाक को इस डील की मंजूरी दी। 4. क्या पाक का रोल बढ़ेगा? ट्रम्प के दौर में अमेरिका का पाक के साथ कई क्षेत्रों में करार बढ़ा है। ईरान युद्ध में भी अमेरिका ने पाक को मध्यस्थ का रोल दिया था। ट्रम्प परिवार का पाक के क्रिप्टो करंसी बिजनेस में हाथ है। अमेरिका पाक के रोल को और बढ़ाने वाला है। ————————————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोकना जंग जैसा:UN में शहबाज बोले- कश्मीर गले की नस; भारत का जवाब- अवैध कब्जे वाले कश्मीर की हालत देखें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UN में भारत को जंग की धमकी दी। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा। शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है। पूरी खबर पढ़ें…
30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट पर आ गया। रफ्तार भी 760 से बढ़कर 1110 किमी/घंटा हो गई। विमान में बैठे यात्री आखिरी प्रार्थना करने लगे। लेकिन कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ एक ‘हीरो’ की हिम्मत और जज्बे ने सभी 180 जानें बचा लीं। नाम है- कैप्टन स्मित मच्छर। इजराइल के पीएम नेतन्याहू, भारतीय पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कैप्टन स्मित की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने 9/11 जैसा बड़ा हादसा होने से बचा लिया। आखिर कौन हैं स्मित मच्छर, कॉकपिट में क्या हुआ और क्या वाकई 9/11 जैसा हादसा टला; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकपिट में क्या हुआ कि अचानक गिरने लगा था विमान? जवाबः ये फ्लाईदुबई एयरलाइन का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे प्लेन ने UAE के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित और एक को-पायलट मौजद था। फ्लाइट इजराइल के तेल अवीव शहर जा रही थी। करीब 8 बजे प्लेन 35,000 फीट की हाइट पर था। टेक ऑफ के करीब ढाई घंटे बाद तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा। प्लेन UAE के एयर स्पेस से निकलकर सऊदी अरब के आसमान पहुंचा। इसके बाद अचानक सब कुछ बदल जाता है…. सवाल-2: स्मित लहूलुहान थे, तो फ्लाइट कैसे सुरक्षित लैंड हुई? जवाबः पहले यात्री, जो कॉकपिट में दाखिल हुए, वो यानिव हायून थे। फ्लाइट FZ 1073 की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नेतन्याहू ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यानिव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर शाबाशी दी। पेशे से प्लंबर यानिव ने नेतन्याहू को बताया कि प्लेन में एक ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे। दोनों ने मिलकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कामयाब नहीं हुए। हालांकि बेहोश होने से पहले स्मित ने दरवाजा खोल दिया। तब अंदर पहुंचे यानिव ने बताया, ‘पायलट्स की दोनों सीटें खाली थीं। मैंने देखा एक पायलट फर्श पर लहूलुहान पड़ा था और दूसरा पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़ा था।’ यानिव ने को-पायलट की गर्दन पकड़कर उसे पीछे की तरफ कॉकपिट से बाहर घसीट लिया। नेतन्याहू के पूछने पर यानिव ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि वो कंट्रोल पैनल के साथ छेड़छाड़ करने या उसे डैमेज करने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने दूसरे यात्रियों को आवाज दी। सभी ने मिलकर आरोपी को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। को-पायलट को काबू करने वाले तीन इजराइली यात्रियों में शामिल त्जिका मानेस के मुताबिक, हमलावर पायलट को काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे। तीनों ने तार वाले हेडफोन से उसे बांध दिया। इसके बाद यानिव ने कंट्रोल स्टिक्स पकड़कर पीछे खींचे, ताकि विमान ऊपर उठ सके। नेतन्याहू ने पूछा, ‘क्या आपने वाकई ऐसा किया था?’ इस पर यानिव ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘हां मैंने स्टिक्स पूरी तरह पीछे खींच दी थीं। मैं प्लेन हादसों के इन्वेस्टीगेशन देखता रहता हूं।’ स्टिक्स खींचने के बाद विमान कुछ स्थिर होने लगा। यानिव के मुताबिक, केबिन में दो पायलट मौजूद थे। वो शुरू में सदमे में लग रहे थे। यानिव ने उनसे चिल्लाकर प्लेन का कंट्रोल लेने को कहा। एक पायलट ने कंट्रोल हाथ में ले लिया और जहाज को सऊदी अरब के ताबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया। 10:45 बजे प्लेन सुरक्षित एयर पोर्ट पर उतर गया। फ्लाइट में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने स्मित का शुरुआती इलाज किया। यानिव ने कहा, ‘हमने आखिरी तक उन्हें जीवित रखा।’ नेतन्याहू ने खून से सने कपड़े पहने यानिव से पूछा, ‘आपको पता है कि आप क्या रहे थे?’ यानिव ने जवाब दिया, ‘हम शेरों का देश हैं।’ दरअसल, यहूदियों की बाइबिल में यहूदियों की तुलना उठकर खड़े होते हुए शेर से की गई है। जून 2025 में ईरान पर हुए इजराइली हमले का नाम भी- ‘राइजिंग लायन’ था। ये पूरी कहानी फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा, इजराइली रिपोर्ट्स, सऊदी अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के आधार पर है। जांच अभी जारी है इसलिए घटनाओं के सीक्वेंस में बदलाव हो सकता है। नेतन्याहू ने यानिव से कहा, ‘तुम्हारे बिना यह एक और 9/11 हो सकता था। इस पर यानिव ने भी कहा कि उनके हिसाब से को-पायलट का यही इरादा था। सवाल-3: क्या वाकई 9/11 जैसी घटना हो सकती थी? जवाबः 11 सितंबर 2001 को आतंकी संगठन अलकायदा के 19 आतंकियों ने 4 घरेलू अमेरिकी विमान हाईजैक कर लिए थे। इनमें से दो को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर और एक को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की बिल्डिंग से टकराकर क्रैश करवा दिया था। चौथा प्लेन व्हाइट हाउस पर क्रैश होने वाला था, लेकिन यात्रियों की सूजबूझ से पेन्सिलवेनिया के खाली मैदान में क्रैश हुआ। करीब 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। यानिव और नेतन्याहू के अलावा कई इजराइली पत्रकारों और आम लोगों ने स्मित के को-पायलट को आतंकी कहा है। नेतन्याहू ने यानिव से बातचीत में कहा, ‘अगर विमान इजराइल पहुंच जाता, तो न जाने क्या होता।’ पीएम मोदी ने भी नेतन्याहू की 9/11 जैसा हमला टलने की बात दोहराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को-पायलट ओमान का नागरिक है। इसकी जांच हो रही है कि वह इजराइल आने वाली फ्लाइट का पायलट कैसे बना और क्या इसके लिए उसने ओमान के अलावा इजराइल या किसी और देश की नागरिकता भी हासिल की थी। इजराइली मीडिया सोर्सेज के मुताबिक, वह फ्लाईदुबई एयरलाइंस में एक साल से भी कम समय से काम कर रहा था। यानिव के मुताबिक, वो प्लेन के कंट्रोल्स से छेड़छाड़ कर रहा था। हालांकि फ्लाईदुबई ने हमले के पीछे को-पायलट की मंशा पर कोई बयान नहीं दिया है। उसे इलाज के बाद पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है। अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट जेफ गुजेटी के मुताबिक, ‘प्लेन 10 हजार फीट के नीचे चला जाता, तो उसे क्रैश होने से बचाना मुमकिन नहीं होता। इजराइल ने भी 9/11 जैसा हमला टालने के लिए प्लेन को हवा में ही मार गिराने की तैयारी कर ली थी।’ इजराइली न्यूज पोर्टल वाईनेट ग्लोबल के मुताबिक, इजराइली एयरफोर्स के पायलट जॉर्डन में तैनात थे। अगर प्लेन इजराइल सीमा के अंदर क्रैश होने वाला होता, तो उसे हवा में शूट कर दिया जाता। सवाल-4: कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर और अब उनकी हालत कैसी है? जवाबः मूलतः गुजरात के रहने वाले 39 साल के स्मित परिवार के साथ शुरुआत में मुंबई के घाटकोपर (ईस्ट) में रहते थे। स्मित के मुताबिक, पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था। परिवार का कपड़े का पुराना कारोबार है। स्कूली पढ़ाई के बाद स्मित ने कपड़े के व्यापार से जुड़ा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से BBA की डिग्री ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एविएशन सेमिनार अटेंड करने के दौरान उन्हें पायलट बनने का ख्याल आया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के एक इंस्टीट्यूट से पायलट ट्रेनिंग ली। इसमें करीब 17 लाख रुपए खर्च हुए। इस हादसे के बाद स्मित का 2025 का एक पॉडकास्ट चर्चा में है। इसमें स्मित बता रहे हैं कि पायलट बनने के फैसले से उनकी मां डर गई थीं, लेकिन पिता बिल्कुल शांत थे। 2011 में स्मित बतौर कमर्शियल पायलट मुंबई में स्पाइसजेट एयरलाइंस से जुड़े। स्मित के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई। ये एक बोइंग विमान था। स्मित ने 11 साल स्पाइसजेट के विमान उड़ाए। नवंबर 2020 में स्मित ट्रेनिंग कैप्टन बने। इसके बाद वो दूसरे पायलट्स को फ्लाइंग ट्रेनिंग देते थे। जून 2022 में स्मित UAE की एयरलाइंस फ्लाईदुबई से जुड़ गए। यहां वह कैप्टन की पोस्ट पर हैं। कमर्शियल फ्लाइट्स में कैप्टन को पायलट-इन-कमांड कहते हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन विमान की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी, उसका कंट्रोल और इमरजेंसी के समय आखिरी निर्णय कैप्टन ही लेता है। फिलहाल स्मित अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ दुबई में ही रहते हैं। अक्टूबर 2025 के पॉडकास्ट में स्मित ने फ्लाइट की सिक्योरिटी और विमान में डॉक्टर्स और क्रू मेंबर्स की अहमियत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, ‘जब हम ऊपर होते हैं और अगर कुछ हो जाए, तो आपको कौन बचाएगा? आप भाग्यशाली होंगे अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर मौजूद हो, वे आपकी जान बचा सकते हैं।’ स्मित ने एक और किस्सा बताया कि फ्लाइट के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया था। ऐसे में उन्होंने एक नजदीकी एयरपोर्ट ढूंढकर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। घायल होने के बाद स्मित बेहोश हो गए थे, उन्हें सऊदी के तबुक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन पर हमले के आरोपी को-पायलट को भी इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित की सर्जरी हुई है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया है कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से बात की है। ——— ये खबर भी पढ़िए… अभिनंदन ने वायुसेना छोड़कर प्राइवेट एयरलाइन क्यों जॉइन की; उन्हें छुड़ाने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें तान दी थीं मिग-21 से पाकिस्तानी F-16 गिराने वाले फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान ने प्राइवेट एयरलाइन जॉइन कर ली है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना छोड़ दी, जबकि सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था। अभिनंदन अब गोवा की प्राइवेट एयरलाइन कंपनी ‘FLY 91’ के लिए ATR विमान उड़ाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…
Captain Smit Machchhar: दुबई से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को जो कुछ हुआ, उसने विमान में सवार 174 लोगों की जान खतरे में डाल दी थी। उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच कथित तौर पर हिंसक झड़प हुई। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके को-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बावजूद मच्छार ने आखिरी ताकत जुटाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला। इसके बाद विमान में मौजूद रिजर्व पायलटों ने कंट्रोल संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा।
सामान्य उड़ान के बीच अचानक मचा हड़कंप
Flydubai का बोइंग 737 MAX 8 विमान 30 सितंबर की सुबह करीब 6:49 बजे दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुआ था। विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंच गया था। शुरुआत में लगभग ढाई घंटे तक उड़ान सामान्य रही। यात्रियों को किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई। इसके बाद अचानक कॉकपिट में कथित तौर पर दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई।
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ओमान के रहने वाले को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। फ्लाईदुबई ने फिलहाल सिर्फ इतना कहा है कि फ्लाइट डेक में ‘अल्टरकेशन’ यानी झड़प हुई थी। इसके बाद क्रू ने विमान को सुरक्षित करने तथा डायवर्ट करने की कार्रवाई की। घटना की वजह और हमले के पीछे की मंशा अभी जांच का विषय है।
अचानक हजारों फीट नीचे जाने लगा विमान
कॉकपिट के अंदर क्या हो रहा था, इसकी जानकारी अधिकांश यात्रियों को नहीं थी। उन्हें सबसे पहले विमान के असामान्य तरीके से नीचे जाने का एहसास हुआ। फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, विमान ने अचानक तेजी से ऊंचाई खोई। अलग-अलग विश्लेषणों में कुछ ही समय में 14 हजार फीट से ज्यादा की गिरावट का जिक्र किया गया है। जबकि कुछ आंकड़ों में लंबे क्रम के दौरान करीब 17-18 हजार फीट की कुल गिरावट बताई गई है।
एक यात्री अल्मोग इटली ने बताया कि उन्हें शुरुआत में लगा कि विमान में बहुत तेज टर्बुलेंस हो रहा है। लेकिन विमान के बार-बार नीचे जाने से यात्रियों को समझ आने लगा कि मामला सामान्य नहीं है। विमान ने पहले ‘7700 इमरजेंसी कोड’ जारी किया। इसके बाद ‘7500 कोड’ का इस्तेमाल किया गया, जिसे विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप या संभावित हाईजैकिंग की स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है।
गंभीर रूप से घायल कैप्टन ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
घटना का सबसे अहम और निर्णायक पल कॉकपिट के अंदर हुआ। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, कैप्टन स्मित मच्छर हमले में गंभीर रूप से घायल होकर कॉकपिट के फर्श पर गिर गए थे। इसके बावजूद उन्होंने आखिरी ताकत जुटाई और कॉकपिट का लॉक्ड दरवाजा खोल दिया। यही कदम आगे की पूरी स्थिति बदलने वाला साबित हुआ। आमतौर पर उड़ान के दौरान कमर्शियल विमान का कॉकपिट यात्रियों के लिए बंद रहता है। दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचने और स्थिति को संभालने का मौका मिला।
यात्री ने हमलावर को पकड़ा, कंट्रोल भी संभाला
इजरायली यात्री यानिव हयून ने घटना के दौरान कॉकपिट में प्रवेश किया। उनके मुताबिक, विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा था। इस दौरान वह आगे की ओर जा गिरे। कॉकपिट में पहुंचने पर उन्होंने कथित हमलावर को पकड़ लिया और उसे काबू करने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए विमान के कंट्रोल को भी संभाला। हयून के मुताबिक, विमान धीरे-धीरे फिर से लेवल होने लगा। इसके बाद विमान में मौजूद एक अन्य पायलट ने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हयून की भूमिका की तारीफ की है।
तीन यात्रियों ने मिलकर हमलावर को काबू किया
कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद कई यात्री और क्रू सदस्य अंदर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, यात्रियों ने मिलकर कथित हमलावर को काबू किया। विमान के अंदर मौजूद यात्रियों के वीडियो में दो घायल लोगों को कॉकपिट के फर्श पर देखा गया। कुछ यात्रियों ने बाद में बताया कि उन्होंने सामने से लोगों को खून से लथपथ हालत में बाहर आते देखा। इस दौरान विमान में यात्रा कर रहे अतिरिक्त फ्लाईदुबई पायलटों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब तत्काल खतरा नियंत्रित हुआ तो रिजर्व क्रू ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया।
तबुक में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग
स्थिति को नियंत्रित करने के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया। सऊदी अधिकारियों को सुबह करीब 8:44 बजे विमान की परेशानी से संबंधित सूचना मिली। विमान ने तबुक में सुरक्षित लैंडिंग की। कैप्टन स्मित मच्छार और दूसरे पायलट को अस्पताल ले जाया गया। बाद में यात्रियों को तबुक में रोके जाने के बाद दूसरे विमान से इजरायल भेजा गया।
कैप्टन स्मित मच्छर की हालत अब कैसेी है?
भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को तबुक के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी सर्जरी की गई है। भारतीय दूतावास के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। भारतीय दूतावास ने कहा कि वह कैप्टन मच्छर के परिवार के संपर्क में है। सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर उनके इलाज और स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रख रहा है। कैप्टन मच्छार के पास कमर्शियल एविएशन का 13 साल से ज्यादा का अनुभव बताया गया है। वह इससे पहले स्पाइसजेट में 11 साल से अधिक समय तक काम कर चुके हैं। जून 2022 में वह फ्लाईदुबई से जुड़े थे।
आखिर हमले के पीछे क्या वजह थी?
इस घटना के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हुई है। इजरायली अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि को-पायलट ने विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन फ्लाईदुबई ने लोगों से जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की है। सऊदी अरब के नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी सेंटर ने घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कॉकपिट में वास्तव में क्या हुआ। झड़प की शुरुआत कैसे हुई। विमान इतनी तेजी से नीचे क्यों गया और घटना के दौरान किस तरह विमान का नियंत्रण दोबारा हासिल किया गया।
भारत की ओर जा रहे व्यापारिक जहाज एमवी केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। दूतावास के मुताबिक जहाज पर मौजूद 19 भारतीयों को बचा लिया गया है। अभी यह साफ नहीं है कि जहाज पर हमला किसने किया। आज की अन्य खबरें… मणिपुर के कांगपोकपी जिले में गोलीबारी, बिजली लाइन कर्मचारी की मौत मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के एक गांव में बुधवार को हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की, जिसमें व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना सुबह-सुबह लासन गांव में हुई, जिसमें बिजली लाइन कर्मचारी पाओंगम चोंगलोई की मौत हो गई। स्थानीय ग्रामीणों के हवाले से अधिकारियों ने बताया कि चोंगलोई बिजली लाइन की मरम्मत कर रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। उनके शव को कांगपोकपी जिला अस्पताल लाया गया। लंदन से दिल्ली आ रहे इंडिगो प्लेन में तकनीकी दिक्कत,एक घंटे बाद वापस लौटा, सुरक्षित लैंडिंग लंदन से दिल्ली आ रहा इंडिगो का ड्रीमलाइनर विमान तकनीकी दिक्कत के कारण बुधवार तड़के लंदन लौट गया। विमान ने करीब एक घंटे पहले उड़ान भरी थी। फ्लाइट 6E4 ने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से भारतीय समयानुसार रात 12:40 बजे उड़ान भरी थी। तकनीकी खराबी का पता चलते ही पायलटों ने तय प्रक्रिया के तहत विमान को वापस मोड़ दिया। यह विमान रात करीब 2 बजे लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया। एयरलाइन ने विमान में कितने यात्री सवार थे और तकनीकी दिक्कत क्या थी, इसकी जानकारी नहीं दी है। केवल यह बताया कि विमान की फिलहाल मेंटेनेंस जांच चल रही है। सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद विमान फिर से उड़ान भरेगा। रक्षा मंत्रालय 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन्स खरीदेगा, बीडीएल के साथ 810.79 करोड़ का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को भारतीय वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन्स (सैट-साव) और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ 810.79 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया। सैट-साव हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है। इसे जगुआर, हॉक और सु-30 एमकेआई जैसे प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है और इसमें लंबी दूरी से दुश्मन के हवाई क्षेत्रों को बेअसर करने की क्षमता है। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन कंटेंट हटाने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसमें केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे ऑनलाइन कंटेंट की पहचान करने की मांग की गई थी, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। याचिका में ऐसे कंटेंट को हटाने और ब्लॉक करने की भी मांग की गई थी, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। याचिका में ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। UDAN योजना का अगला चरण शुरू; 4 करोड़ नए यात्रियों को हवाई सेवा से जोड़ने का लक्ष्य केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बुधवार को UDAN योजना के अगले चरण की शुरुआत की। इसके तहत केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 21 MoU साइन किए हैं। इसका उद्देश्य कम या बिना हवाई सेवा वाले इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इस दौरान एयरड्रोम डेवलपमेंट के लिए चैलेंज मोड पोर्टल और UDAN रूट बिडिंग का नया स्कीम डॉक्यूमेंट भी लॉन्च किया गया। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पोर्टल के जरिए एयरस्ट्रिप और हेलीपैड के विकास के प्रस्ताव दे सकेंगे। सरकार का लक्ष्य अगले 10 साल में 120 नए डेस्टिनेशन जोड़ने और 4 करोड़ नए यात्रियों को हवाई सेवा से जोड़ने का है। इस चरण में 20 से ज्यादा राज्य शामिल हैं। तरंग शक्ति 2026 में हिस्सा लेंगे F-35, राफेल और F-16, 7 देश ले रहे हिस्सा जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक मल्टीलेटरल एयर एक्सरसाइज ‘तरंग शक्ति’ का दूसरा संस्करण होगा। इसमें 7 विदेशी देश अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और UAE हिस्सा लेंगे। अमेरिकी स्टील्थ फाइटर F-35 पहली बार इस एक्सरसाइज में शामिल होगा। भारतीय वायुसेना के मुताबिक, भारत एक्सरसाइज में राफेल, मिराज-2000, जगुआर, तेजस, MiG-29 और Su-30 MKI समेत कई एयर एसेट्स उतारेगा। IAF के करीब 60 से 80 एयर एसेट्स इसमें शामिल होंगे, जिनमें स्टैटिक डिस्प्ले भी होंगे। विदेशी एयर एसेट्स में अमेरिका का F-35, फ्रांस का राफेल, UAE का F-16 और बांग्लादेश का C-130J शामिल हैं। IAF के मुताबिक, ये विमान जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन के ऊपर दो हफ्तों तक जॉइंट टैक्टिकल मैन्युवर्स करेंगे। नेपाल में भारतीय फोरेंसिक टीम ने 3,000 DNA सैंपल की जांच की, 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार नेपाल में आई बाढ़ के बाद काठमांडू में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम ने 3,000 DNA सैंपल की जांच की है। टीम अब तक 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार कर चुकी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 22 सितंबर को यह जानकारी दी। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने द्वि-साप्ताहिक ब्रीफिंग में सवाल के जवाब में बताया। नेपाल में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी पहले दी गई थी। इसके अलावा भारतीय मूल के कई अन्य लोग भी लापता हैं।
कनाडा में फ्लाइट ट्रेनिंग के दौरान हुए विमान हादसे में तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो भारतीय छात्रों की मौत हो गई। वैंकूवर स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को हादसे की जानकारी दी। दूतावास ने हादसे की जगह और विमान की जानकारी साझा नहीं की। हालांकि, कनाडा के न्यूज आउटलेट CBC ने शनिवार को सस्केचेवान प्रांत में एक विमान हादसे की रिपोर्ट की थी, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जब विमान समय पर लैंड नहीं हुआ तो सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इसके बाद करीब 8 घंटे बाद विमान का मलबा मिला, जहां दोनों छात्र मृत मिले। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह परिवारों को हर संभव मदद देगा। इसमें दोनों के शवों को भारत लाने में मदद करना भी शामिल है। दोनों के पास पायलट लाइसेंस था हादसे में जान गंवाने वाले दोनों भारतीय छात्रों की पहचान मनोज शिवकुमार और श्रीसरण थिरुगनानासंबंथन के रूप में हुई है। CBC की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्व्स एयर फ्लाइट स्कूल का Cessna 172 विमान 18 सितंबर की सुबह सस्केचेवान प्रांत के किसबे के पास क्रैश हो गया। दोनों के पास पायलट लाइसेंस था। लेकिन कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए जरूरी उड़ान घंटे पूरे कर रहे थे। उन्होंने विमान को रेजिना से स्टाइनबाक जाने के लिए किराए पर लिया था। हार्व्स एयर के चेयरमैन एडम पेनर के मुताबिक, दोनों रात में लंबी दूरी की उड़ान भर रहे थे। विमान को सुबह करीब 10:30 बजे सेंट्रल डेलाइट टाइम (CDT) तक तय जगह पहुंचना था। जब विमान वहां नहीं पहुंचा तो कनाडा के ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड को इसकी जानकारी दी गई। विमान के समय पर नहीं पहुंचने पर रेस्क्यू शुरू हुआ विमान के तय समय पर नहीं पहुंचने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। फ्लाइट स्कूल ने सर्च और रेस्क्यू टीमों को इसकी जानकारी दी। करीब शाम 6 बजे CDT टीमों ने विमान का मलबा ढूंढ लिया। विमान में सवार दोनों लोग मौके पर मृत मिले। ज्वाइंट रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (JRCC) की पब्लिक अफेयर्स के अधिकारी लेफ्टिनेंट जो हॉलैंडर ने बताया कि JRCC ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि विमान के क्रैश साइट का पता लगाने के बाद पैराशूट के जरिए सर्च और रेस्क्यू टीम के सदस्यों को वहां उतारा गया। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद मामले की जांच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) को सौंप दी गई। हार्व्स एयर फ्लाइट स्कूल से जुड़ा यह तीसरा हादसा CBC के मुताबिक, जनवरी 2025 के बाद से यह Harv’s Air फ्लाइट स्कूल से जुड़ा तीसरा हादसा है। जनवरी 2025 में इसी स्कूल के एक इंस्ट्रक्टर को छोटे विमान के प्रोपेलर की चपेट में आने से गंभीर चोट लगी थी। उस समय एक छात्र विमान का इंजन शुरू करने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद जुलाई 2025 में ट्रेनिंग के दौरान 2 छात्र पायलटों की मौत हो गई थी। उनका सिंगल इंजन विमान हवा में एक दूसरे विमान से टकरा गया था। —————– यह खबर भी पढ़ें… लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट लंदन से ढाका जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच बहस के बाद मारपीट हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को घूंसे मारे। पूरी खबर पढ़ें…
ओमान के तट के पास रविवार को कमर्शियल जहाज एमटी एल गाइया पर हमला हुआ। जहाज पर 14 भारतीय सवार थे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि 13 भारतीय क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है। एक भारतीय अब भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि लापता भारतीय की तलाश के लिए बचाव अभियान चल रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर नजर रख रहा है। दूतावास ओमानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। हालांकि, अभी तक हमले की जिम्मेदारी अमेरिका या ईरानी सेना ने नहीं ली है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाज भी हमले की चपेट में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रविवार सुबह ईरान के केश्म द्वीप के पास एक ईरानी कार्गो जहाज पर भी हमला होने की खबर सामने आई। यह इलाका होर्मुज स्ट्रेट में आता है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में एक शख्स की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और लोगों को बाहर निकालने का ऑपरेशन शुरू किया गया था। केश्म के गवर्नर हुसैन अमीरतेइमूरी ने तस्नीम से कहा कि जहाज पर हमला एक प्रोजेक्टाइल से किया गया था। उन्होंने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया। इस हमले से कुछ घंटे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सोशल मीडिया पर कहा था कि ईरान के लोगों को दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ‘ईरान सरेंडर नहीं करेगा।’ रिपोर्ट- होर्मुज में नए रास्ते पर ईरान-ओमान में समझौता हुआ ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर एक समझौता किया है। ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों देशों ने होर्मुज से जहाजों के आने-जाने के रास्ते की जानकारी तय कर ली है। सोमवार को ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को इस समझौते की जानकारी दी जाएगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बताया कि क्षेत्र के अरब देशों के विदेश मंत्री ओमान में बैठक करेंगे। इसमें होर्मुज के रास्ते को लेकर सहमति बनाई जाएगी। इसके बाद इस व्यवस्था की जानकारी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को दी जाएगी। नया रास्ता पूरी तरह ईरान के इलाके में नए समझौते के तहत खाड़ी देशों से होर्मुज में प्रवेश करने वाला रास्ता पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय जल में होगा। बाहर निकलने वाले रास्ते का एक हिस्सा भी ईरान के क्षेत्रीय जल में रहेगा। तस्नीम ने ईरानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। व्यवस्था पर सहमति बनने के बाद होर्मुज का दक्षिणी रास्ता सीधे बंद कर दिया जाएगा। यह अमेरिका की मांग के खिलाफ है। जंग के बाद अब तक दो रास्तों में बंटा होर्मुज जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद अभी तक यह अहम समुद्री मार्ग दो अलग रास्तों में बंट गया। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के बाद अब दूसरे तेल रूट पर संकट: अल मंदेब पर हूती विद्रोहियों का कब्जा; कहा- सऊदी अरब के अलावा किसी का जहाज नहीं रोकेंगे होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब एक और समुद्री ऑयल रूट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट संकट में है। यमन के हूती विद्रोहियों ने यहां कब्जे का एलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं। यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है। भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है। अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है। जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है। बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है। दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है। यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी। आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है। नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है। —————— नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’: मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। पूरी खबर पढ़ें…
Nepal Flood: नेपाल के नुवाकोट जिले में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को हीरो माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने 26 अगस्त को त्रिशूली घाटी में आई भयानक बाढ़ के दौरान स्कूल के सभी 1,643 छात्रों की जान बचाने में मदद की थी। हालांकि, स्कूल की इमारत अब नष्ट हो चुकी है, इसलिए दवाड़ी ने भारत सरकार से अपील की है कि वे स्कूल को फिर से बनाने और बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने में मदद करें।
स्कूल से जल्दी निकलो
मीडिया से बात करते हुए दवाड़ी ने बताया कि कैसे स्कूल की एक आम सुबह समय के साथ एक मुश्किल दौड़ में बदल गई। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:20 बजे, मुझे एक दोस्त का जरूरी फोन आया, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि पास के एक गांव में नदी का पानी भर गया है। वहां, से जल्दी निकलो। इसके कुछ ही देर बाद, एक घबराए हुए पैरेंट स्कूल पहुंचे और बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
बिना देरी किए स्कूल की बेल बजाने का दिया आदेश
उस समय सैकड़ों छात्र स्कूल की तीन मंजिला इमारत के अंदर या आस-पास थे, जो नदी से लगभग 60 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थी। हालात तेजी से बिगड़ते देख, दवाड़ी ने बिना देरी के स्कूल की घंटी बजाने का आदेश दिया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे क्लासरूम खाली कराएं और बच्चों को ऊंची जगह पर ले जाएं।
प्रींसिपल ने बस ड्राइवरों से भी किया संपर्क
उन्होंने स्कूल बस ड्राइवरों से भी संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने को कहा। हालांकि, एक बस से संपर्क नहीं हो पा रहा था। राजेंद्र दावाड़ी ने बाहर आकर देखा तो वही बस लोहे के पुल को पार कर स्कूल की तरफ बढ़ रही थी और नीचे नदी का विकराल पानी स्कूल परिसर की तरफ तेजी से आ रहा था। प्रिंसिपल साहब ने पूरी ताकत से चिल्लाकर और हाथ हिलाकर ड्राइवर को इशारा किया। ड्राइवर ने पलक झपकते ही बस को रिवर्स किया और सुरक्षित दूरी पर ले गया। बस के हटते ही वो पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गया और नदी में समा गया।
जान बचाकर पहाड़ी पर भागे बच्चे
जैसे-जैसे खतरा बढ़ा, छात्र पहाड़ी की ओर जाने लगे। खबर है कि एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे मोटरसाइकिल से सुरक्षित जगह ले जाना पड़ा, जबकि बाकी बच्चे पैदल ही भाग निकले। जब छात्र नदी से दूर जा रहे थे, तो दवाड़ी उनके साथ ही रहे।
बाद में बाढ़ का पानी उस इलाके में फैल गया, जिससे स्कूल बर्बाद हो गया और नदी के किनारे बनी इमारतें बह गईं। जब पानी का तेज बहाव घाटी से गुजर रहा था, तब छात्रों ने एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली।
प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को बचाया
हालांकि, इस आपदा से प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन स्कूल ने अपने दो बहादुर साथियों को खो दिया। 32 साल के नए सोशल हिस्ट्री टीचर संतोष परियार क्लास लेने के बाद खाना पकाने अपने कमरे पर गए थे और बाढ़ में बह गए। वहीं, स्कूल के सफाईकर्मी सुल्तान लामा की भी मौत हो गई। बताया जाता है कि वे स्कूल को सुरक्षित करने के लिए वापस लौटे थे।
दुनियाभर की मीडिया में नेशनल हीरो के तौर पर सराहे जाने के बाद भी राजेंद्र दावाड़ी की आंखों में अपनों को खोने का गम है। मलबे के ढेर को देखते हुए वे बेहद विनम्रता से बस एक ही बात कहते हैं, “मैं करता भी तो क्या? उस वक्त मेरे बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं था।”
स्कूल बनाने के लिए भारत से मदद की मांग
दावाड़ी के लिए, रेस्क्यू ऑपरेशन एक और चुनौती की शुरुआत भर थी। स्कूल की इमारत के तबाह हो जाने के बाद, अब वे स्कूल को फिर से बनाने के लिए भारत से मदद मांग रहे हैं, ताकि सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।
भारत ने दी मदद की गारंटी
वहीं, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने X पर एक पोस्ट में लिखा, मैंने नुवाकोट के बिदुर में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी से मुलाकात की। रसुवा में अचानक आई बाढ़ (flash flood) में स्कूल के बह जाने से ठीक पहले, उनके समय पर लिए गए फैसले ने 1600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाई। यह स्कूल 1950 के दशक में बनाया गया था। इसका डिजाइन एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण से जुड़े थे, और इसे भारत की मदद से बनाया गया था। इस स्कूल की नई इमारत भी 2022 में भारत की मदद से HICDP प्रोग्राम के तहत बनाई गई थी। श्रीवास्तव ने दवाड़ी को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भारत, नेपाल में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।
Met Rajendra Dawadi, Principal, Tribhuvan Trishuli Secondary School, Bidur, Nuwakot. His timely action saved lives of more than 1600 school children just before the school was swept away in #Rasuwa flash flood. This school was set up in 1950s; Designed by Indian engineer,… pic.twitter.com/XoVkKRvR8x
— Naveen Srivastava, Ambassador of India in Nepal (@navsri6619) September 1, 2026
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VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।
डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।
शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।
दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।
बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।
यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।
VIDEO | Rasuwa, Nepal: One-and-a-half-month-old baby rescued from flood-affected area and brought to Rasuwa Dhange camp.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/OUd2nEMbRq
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2026
सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।
हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।
भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं
भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।
नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।
फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।
भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।
हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी
भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।
खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।
नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।
हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।
पीड़ितों की DNA से पहचान
नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।
भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।
वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।
नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।
इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।
रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।
वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।
भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में
भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।
विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।
सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।
बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।
बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।
रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।
वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।
इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।
वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

