Nepal Flood: कैलाश मानसरोवर गए 21 भारतीयों की जान एक साड़ी ने बचाई! नेपाल में जल प्रलय के बीच इस कपल ने किया गजब का रेस्क्यू

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई घर, सड़कें और पुल बह गए। वहीं बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई और कई लोग लापता हैं। नेपाल में आए इस विनाशकारी बाढ़ में तमिलनाडु से गए 21 तीर्थयात्रियों भी फंसे हुए थे। वहीं इस मुसीबत के समय में एक कपल की समझदारी ने कई लोगों को जान बचाई। नेपाल में अचानक आई बाढ़ में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे इलाके के पास फंस गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी दौरान एक कपल ने सूझबूझ दिखाते हुए साड़ी की मदद से महिलाओं को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। महिलाओं को कीचड़ भरी और खड़ी ढलान से ऊपर खींचने के लिए साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया। इस मुश्किल वक्त में कपड़े के एक साधारण टुकड़े ने लोगों को सुरक्षित निकलने में बड़ी मदद की।

कैसे बची जान

26 अगस्त को माउंट कैलाश की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री नेपाल के तिमुरे इलाके के पास फंस गए। इस दौरान भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड की स्थिति बन गई। उनकी गाड़ी एक सुरक्षित जगह पर रुक गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आसपास पानी और मलबा तेजी से बह रहा था, जिसके बाद सभी यात्री गाड़ी से बाहर निकलकर सुरक्षित ऊंचाई पर जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन कीचड़ और फिसलन की वजह से पहाड़ी पर चढ़ना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था।

साड़ी से कैसे की मदद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए, लेकिन उन्होंने नीचे फंसी दूसरी महिलाओं को मुश्किल में देखा तो उनकी मदद करने का फैसला किया। पूंगुझाली ने अपना स्वेटर पहना, साड़ी उतारी और उसे नीचे की ओर पहुंचाया। महिलाओं ने साड़ी और वहां मौजूद लोहे की केबल का सहारा लिया, जबकि ऊपर मौजूद लोगों ने उन्हें धीरे-धीरे खींचकर सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। इस तरह साड़ी ने मुश्किल हालात में फंसे तीर्थयात्रियों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

दो दिनों तक रहा काफी मुश्किल

बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड के बाद तीर्थयात्रियों को करीब दो दिनों तक काफी मुश्किल हालात में रहना पड़ा। इस दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें थोड़ा-बहुत राशन और पीने का पानी उपलब्ध कराया, जिससे उन्होंने किसी तरह समय बिताया। वहीं, अधिकारी लगातार उनके संपर्क में रहे। बाद में भारतीय दूतावास, नेपाल आर्मी और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और फंसे हुए लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाने की व्यवस्था की।

अब तक 42 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार तक इस आपदा में 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार अलग-अलग इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और गोरखा समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान अभी भी जारी है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है।

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

पंजाब के 3 लोग नेपाल की बाढ़ में लापता:इनमें जीजा-साले भी शामिल; परिवार से आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी

नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ में तरनतारन जिले के तीन लोग लापता हो गए हैं। इनमें गांव रत्तोके के रहने वाले शमशेर सिंह संधू और उनके दो रिश्तेदार शामिल हैं। शमशेर सिंह संधू नेपाल में एंड्रिट्ज कंपनी के त्रिशूल अपर पावर हाउस प्रोजेक्ट में क्रेन ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे। उनके साथ ही उनका साला भुपिंदर सिंह और एक अन्य साले का बेटा रशपाल सिंह नेपाल में रह रहे थे। परिवार के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के दौरान तीनों का संपर्क अचानक से टूट गया। परिवार के सदस्य गुरजंट सिंह के मुताबिक, शमशेर सिंह से 25 अगस्त को वॉट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिए आखिरी बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया। लगातार फोन और संपर्क की कोशिश के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। पंचायत ने डीसी से लगाई मदद की गुहार मामले को लेकर गांव की पंचायत भी सक्रिय हो गई है। गांव की सरपंच शोभा कुमारी ने पंचायत की ओर से तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मदद की मांग की है। पंचायत ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया जाए। पंचायत की मांग है कि नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों के जरिए लापता लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए और अगर वे किसी सुरक्षित स्थान पर हैं, तो उनके परिवार तक जल्द से जल्द जानकारी पहुंचाई जाए। मैप में देखिए कहां टूटा ग्लेशियर नेपाल में आई बाढ़ के बारे में जानिए… नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में नेपाल की सीमा के पास बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई दे रहे हैं। अचानक ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का करीब 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरता नजर आता है। हिमस्खलन के बाद धूल और मलबा पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो में नीचे की ओर बहता पानी और मलबा भी दिखाई दे रहा है। ग्रुप जब नीचे उतरा तो रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें पता चला कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद इलाके में आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। ग्लेशियर टूटने के तुरंत बाद का वीडियो 3 पॉइंट में जानिए नेपाल के हालात ************ ये खबर भी पढ़ें: पगड़ी पहने पंजाबी युवकों को होटल में नहीं मिली एंट्री: ऑस्ट्रिया में करवाया था बुक, बोले- पैसे भी रिफंड नहीं किए; प्रबंधन ने बताया ड्रेस कोड पंजाब के सिख युवकों को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में स्थित कूल मामा होटल ने एंट्री नहीं दी। मोहाली में ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले सिख युवक जसप्रीत ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने कहा कि पगड़ी वाले यहां नहीं रह सकते। उन्होंने 27 अगस्त को होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी।(पढ़ें पूरी खबर)

Nepal Flood: 600 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता…तबाही के बीच नेपाल में अब भी मंडरा रहा सैलाब का खतरा

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इस आपदा में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 पहुंच गई है। वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।  इसमें 320 भारतीय भी शामिल है। हालात को देखते हुए बचाव और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर बनी अस्थिर बैरियर झीलों की वजह से दुबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।

नेपाल में बाढ़ का खतरा

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भयानक आपदा की शुरुआत ग्लेशियर के अचानक टूटने और ढहने से हुई। इसके बाद हिमालय से निकलने वाली नदियों में बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबा बहने लगा, जिसने निचले इलाकों में तबाही मचा दी। इस तेज बहाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।

रोकना पड़ा बचाव काम

शुक्रवार को पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मलबे से बनी एक झील का पानी लहेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ रहा था। वहीं, तिब्बत की तरफ बांध टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी। खतरा कम होने और हालात सुधरने के बाद नेपाल में बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया। चीन ने भी ग्यिरोंग इलाके में कुछ समय के लिए राहत कार्य रोका था। बाद में चीन के सरकारी चैनल CCTV ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।

नेपाल में अभी भी बाढ़ का खतरा

नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों की नजर पहाड़ी इलाके में बनी दो बैरियर झीलों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें जमा पानी किसी भी समय नीचे की ओर बह सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पानी बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। इससे दबाव बढ़ने और दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट ने भी आगाह किया है कि क्षेत्र में मौजूद 100 से अधिक ग्लेशियल झीलें आने वाले समय में खतरा पैदा कर सकती हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, चीन की ओर से 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ करीब 400 चीनी नागरिक चीन में सुरक्षित जगहों पर हैं और उन्हें वहां से निकालने में भारतीय दूतावास मदद कर रहा है।

अब तक कितने भारतीय लापता

बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था खराब होने से करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस आपदा में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा कई ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अपनी लापता लोगों की सूची में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को शामिल किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। शुक्रवार रात तक आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया। जबकि अब तक 586 लोगों के शव मिले हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और निजी प्राइवेट कंपनियों के 16 हेलिकॉप्टरों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। करीब 400 भारतीय चीन में फंसे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इसके अलावा 149 भारतीय चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लैक्स गोपिसेट्टी भी लापता बताए जा रहे हैं। कंपनी ने शुक्रवार रात बताया कि गोपिसेट्टी निजी काम से नेपाल गए थे। लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इधर, नेपाल दूसरे देशों के रेस्क्यू टीमों से मदद लेने के लिए तैयार हो गया है। नेपाल ने प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मदद भी मांगी है। PM बालेन ने बताया कि अब तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 190 करोड़ नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी एक महीने की सैलरी भी राहत कोष में देने का फैसला किया है। खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

नेपाल बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए इन 21 भारतीयों का हुआ रेस्क्यू, फुल लिस्ट यहां देखिए

Nepal Flash Flood: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और सैलाब के बीच भारतीय नागरिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि ये सभी नागरिक सुरक्षित हैं और इन्हें नेपाल के बाढ़ प्रभावित टिमुरे क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया है।

जिन लोगों का रेस्क्यू किया गया उनकी पूरी लिस्ट भी रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट की है। इसे यहां नीचे देखा जा सकता है।

नेपाल में लापता भारतीयों में त्रिशूली प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारी शामिल

राहत की इस खबर के बीच स्थिति की गंभीरता कम नहीं हुई है। आपको बता दें कि नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इन लापता भारतीयों में पर्यटक समूहों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। इनमें से 73 भारतीय नागरिक त्रिशूली वन पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इन लापता कर्मचारियों के बारे में सटीक जानकारी जुटाने के लिए प्रोजेक्ट हेड के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

तिब्बत में भी फंसे 200 भारतीय

नेपाल के साथ-साथ तिब्बत सीमा क्षेत्र में भी भारतीय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रयास जारी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक तिब्बत क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने भी भारत सरकार से सहायता मांगी है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस कठिन परिस्थिति में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और पड़ोसी देश की जरूरतों के अनुसार हर संभव सहायता और मानवीय राहत सामग्री प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 270 पहुंचा, युद्ध स्तर पर जारी है सर्च ऑपरेशन

नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने तीन जिलों में भयंकर तबाही मचाई है। अधिकारियों और राहत टीमों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियानों के बीच मौतों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नेपाली सेना, पुलिस और राहत एजेंसियां हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

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नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने  भारी तबाही मचाई। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तिब्बत के ग्यिरोंग में आई भयावह फ्लैश फ्लड को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने अपने ग्रुप को लेकर जानकारी दी। एक्स पर ट्‍वीट कर बताया गया कि उनके कैलाश यात्रा समूहों में से एक समूह बाढ़ की चपेट में आ गया।

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सद्गुरु ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब समूह के सदस्य वापस लौट रहे थे और इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे। उनके मुताबिक, बाढ़ के दौरान इमिग्रेशन कार्यालय की इमारत और आसपास का काफी हिस्सा पानी में डूब गया।

उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। उनकी टीम अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाके तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और जोखिम के बावजूद राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए तैयार है।

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सद्गुरु ने बताया कि उनके Sojourn में शामिल 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। वहीं, 743 लोग इस समय तिब्बत में, 148 लोग नेपाल में और 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर पर थे। इसके अलावा नेपाल के तिमुरे में उनके 3 स्वयंसेवक मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित स्थान तक पहुंचने तथा बचाव अभियान में सहयोग करने के लिए तैयार है।

भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।

पासपोर्ट खोने की गलती पड़ सकती है भारी, तुरंत अपनाएं ये आसान ट्रिक

विदेश ट्रैवलिंग करते समय यदि अचानक आपका पासपोर्ट खो जाए, तो घबराहट हो ही जाती है। लेकिन ऐसी सिचुएशन में जल्दबाजी करने से बेहतर सही कदम उठाना जरूरी होता है। थोड़ी समझदारी और सही जानकारी के साथ आप नया ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवा सकते हैं और अपनी जर्नी बिना ज्यादा परेशानी के कर सकते हैं।

पहले ढूंढें और शिकायत करें

अगर विदेश में आपका पासपोर्ट नहीं मिल रहा है, तो घबराएं नहीं। होटल का कमरा, बैग, कैब, एयरपोर्ट या जिन जगहों पर आप गए थे, वहां अच्छी तरह से चेक करें। अगर फिर भी पासपोर्ट नहीं मिलता या चोरी होने का शक है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में कम्प्लेन कराएं। पुलिस रिपोर्ट बहुत जरूरी होती है, क्योंकि नया पासपोर्ट या इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवाते समय इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए कम्प्लेन करने में देर न लगाएं।

एम्बेसी से तुरंत कांटेक्ट करें

पुलिस में कम्प्लेन करने के बाद अपने देश के पास के इंडियन एम्बेसी (Embassy) या वाणिज्य दूतावास (Consulate) से कांटेक्ट करें। वहां के ऑफिसर आपको पूरी प्रोसेस समझाएंगे और बताएंगे कि आगे क्या करना है। अगर आपके पास आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट या उनकी कॉपी हैं, तो उन्हें साथ रखें। इससे आपकी आइडेंटिटी जल्दी चेक हो जाती है और नया डॉक्यूमेंट बनवाने में आसानी होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट रखें तैयार 

जब भी आप ट्रिप पर निकले तो पहले पासपोर्ट, वीजा और दूसरे जरूरी आइडेंटिटी कार्ड की डिजिटल और प्रिंट कॉपी अपने पास जरूर रखें। ओरिजिनल पासपोर्ट खो जाए, तो यही कॉपियां आपके काम आ सकती हैं। नया पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट, पहचान का प्रमाण, जन्मतिथि का प्रमाण, पते का प्रमाण और पासपोर्ट खोने का एफिडेबिट डॉक्यूमेंट लिए जा सकते हैं। पहले से तैयारी होने पर परेशानी कम होती है।

नया पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट

अगर आपकी ट्रिप अभी बाकी है, तो आप नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसमें कुछ दिन या करीब एक हफ्ते लग सकते है। लेकिन अगर आपको सिर्फ भारत वापस लौटना है, तो एम्बेसी आपको इमरजेंसी सर्टिफिकेट या टेम्परेरी ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इससे आप अपने देश वापस आ सकते हैं। यह फैसिलिटी ट्रैवल के बेस पर दी जाती है।

वीजा और इंश्योरेंस का रखें ध्यान 

पुराने पासपोर्ट में किसी देश का वैलिड वीजा होने पर उसके लिए भी अलग से प्रोसेस पूरी करनी पड़ सकती है। ऐसे में उस देश के एम्बेसी से कांटेक्ट करें और नया वीजा बनाने की प्रोसेस जाने। साथ ही अपनी एयरलाइन, होटल और ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनी को भी पासपोर्ट खोने के बारे में बताये। कई ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसीस इस केस में ज्यादा रहने, आने-जाने और जरूरी डॉक्यूमेंट बनवाने का खर्च भी कवर करती हैं।

आगे के लिए रखें ये सावधानी 

पासपोर्ट खोने जैसी परेशानी से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी तैयारी आपका काफी टाइम और स्ट्रेस बचा सकती है। टॉवल से पहले पासपोर्ट और वीजा की स्कैन कॉपी क्लाउड स्टोरेज में सेव करें, एक कॉपी ईमेल में रखें और एक प्रिंट अपने सामान से अलग रखें। किसी भरोसेमंद फैमिली मेंबर के पास भी इसकी कॉपी होना अच्छा रहता है। यह तैयारी मुश्किल समय में आपकी ट्रिप को एक बड़ी मदद कर सकती है।