Sunshine Pictures IPO: खुलने के 90 मिनट में ही 100% फुल! विपुल शाह के आईपीओ पर टूटे निवेशक, GMP में बंपर उछाल

Sunshine Pictures IPO Day 1: फिल्म और टेलीविजन निर्माता-निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह की कंपनी सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ को प्राइमरी मार्केट में निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला है। आज, 18 अगस्त को खुलते ही इस आईपीओ पर निवेशक टूट पड़े और महज 90 मिनट के भीतर यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया।

फिल्म और वेब सीरीज क्रिएशन व डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी इस कंपनी के पब्लिक इश्यू में रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) ने जोरदार दिलचस्पी दिखाई है।

खुलते ही 90 मिनट में फुल सब्सक्राइब

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को सुबह 11:30 बजे तक ही आईपीओ को 54.86 लाख शेयरों के ऑफर के मुकाबले 54.59 लाख शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी थीं:

रिटेल निवेशक: रिटेल कैटेगरी में आईपीओ 1.49 गुना सब्सक्राइब हुआ।

गैर-संस्थागत निवेशक (NII): एनआईआई का हिस्सा 1.16 गुना भरा।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹84.64 करोड़

पब्लिक इश्यू खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹84.64 करोड़ का फंड जुटाया है। कंपनी ने 9 प्रमुख एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित किए हैं:

  • इनोवेटिव विजन फंड (Innovative Vision Fund)
  • खंडेलवाल फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (Khandelwal Finance Pvt Ltd)
  • अर्नेस्टा ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड (Arnesta Global Opportunities Fund)
  • यूनी ग्रोथ फंड (Uni Growth Fund)
  • जील ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड (Zeal Global Opportunities Fund)
  • विजनरी वैल्यू फंड (Visionary Value Fund)
  • द एसियो फंड वीसीसी (The Asio Fund VCC)
  • शाइन स्टार बिल्ड कैप (Shine Star Build Cap Pvt Ltd)
  • एलआरएसडी सिक्योरिटीज (LRSD Securities Pvt Ltd)

सनशाइन पिक्चर्स आईपीओ की पूरी डिटेल्स

इश्यू साइज: कुल ₹282 करोड़ का यह आईपीओ 18 अगस्त को खुला है और 20 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।

प्राइस बैंड: कंपनी ने ₹342 से ₹360 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

ओएफएस (OFS): प्रमोटर विपुल अमृतलाल शाह ओएफएस के जरिए 20.31 लाख शेयर और शेफाली विपुल शाह 10.06 लाख शेयर बेच रहे हैं।

अलॉटमेंट और लिस्टिंग डेट: 21 अगस्त को अलॉटमेंट, बीएसई और एनएसई पर कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 25 अगस्त 2026 को होगी।

जुटाए गए पैसों का कहां होगा इस्तेमाल?

सनशाइन पिक्चर्स की योजना फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से ₹112.50 करोड़ तक का उपयोग अपनी दीर्घकालिक कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने की है। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस लिस्टिंग से भारतीय बाजार में कंपनी की ब्रांड वैल्यू और विजिबिलिटी में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।

जीएमपी उछलकर ₹75 पहुंचा

प्राइमरी मार्केट में सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ को लेकर निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर है और इसका असर ग्रे मार्केट में भी साफ दिख रहा है। 18 अगस्त को सनशाइन पिक्चर्स का जीएमपी बढ़कर +₹75 पर पहुंच गया है, जो इसके पिछले आठ सेशन का उच्चतम स्तर है।

₹360 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर की संभावित लिस्टिंग ₹435 प्रति शेयर (20.83% प्रीमियम) पर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्रे मार्केट में लगातार जारी तेजी और 90 मिनट में मिले 100% से ज्यादा सब्सक्रिप्शन से संकेत मिल रहे हैं कि 25 अगस्त को दलाल स्ट्रीट पर यह एंटरटेनमेंट स्टॉक धमाकेदार एंट्री कर सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

delhi police on student protest

Latest News Today Live Updates in Hindi : छात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पल पल की जानकारी…

ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत में हर मतदाता की पहचान फिर अमेरिका में क्यों नहीं। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया। ALSO READ: BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारीछात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पुलिस ने दावा किया कि छात्रों पर न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

Tata Sons: नोएल टाटा जल्द कर सकते हैं RBI अधिकारियों से मुलाकात, टाटा संस की लिस्टिंग पर हो सकता है अंतिम फैसला

Noel Tata RBI Meeting: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस महीने के अंत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा टाटा संस को अनलिस्टेड कंपनी के रूप में बनाए रखने और लिस्टिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं को खत्म करना है।

एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में चेयरमैन पद छोड़ने के ऐलान के बाद, अब नोएल टाटा खुद रेगुलेटरी के साथ बातचीत की कमान संभालने जा रहे हैं।

वार्ता की कमान अब नोएल टाटा के हाथों में

अब तक टाटा संस के अधिकारी और कुछ बोर्ड मेंबर्स आरबीआई के साथ लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे। लेकिन अब नोएल टाटा बोर्ड मेंबर और बहुसंख्यक शेयरधारक के प्रतिनिधि के रूप में सीधे आरबीआई से बात करेंगे। नोएल टाटा मई 2025 में ही आरबीआई को पत्र लिखकर टाटा संस को अनलिस्टेड रखने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। अब वे पिछले तीन साल से चले आ रहे इस मुद्दे का स्थाई समाधान चाहते हैं।

NBFC-CIC डी-रजिस्ट्रेशन और लिस्टिंग का पूरा गणित

साल 2022 में रिजर्व बैंक ने टाटा संस को ‘Upper Layer NBFC’ के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए 3 साल के भीतर (सितंबर 2025 तक) शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। हालांकि, टाटा संस ने लिस्टिंग से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं:

कर्ज मुक्त हुई कंपनी: टाटा संस ने बैंकिंग सेक्टर से लिया गया अपना पूरा बाहरी कर्ज चुका दिया है।

आरबीआई को आश्वासन: कंपनी ने गारंटी दी है कि वह समूह की अन्य कंपनियों को लोन देने के लिए कोई नया कर्ज नहीं लेगी और न ही फीस लेकर कोई कॉर्पोरेट गारंटी देगी।

NBFC दर्जा रद्द करने की अर्जी: टाटा संस ने दिसंबर 2024 में आरबीआई को आवेदन सौंपकर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (NBFC-CIC) का दर्जा रद्द करने की मांग की थी। यदि आरबीआई इस अर्जी को स्वीकार कर लेता है, तो टाटा संस पर अनिवार्य IPO/लिस्टिंग की शर्त अपने आप खत्म हो जाएगी।

SP ग्रुप की हिस्सेदारी का मुद्दा भी आ सकता है सामने

शापूरजी पालोनजी (SP Group) की टाटा संस में लगभग 18% हिस्सेदारी है। 31 मार्च 2026 तक एसपी ग्रुप पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था। अपने कर्ज से राहत पाने के लिए एसपी ग्रुप टाटा संस के आईपीओ या शेयर बाय-बैक के जरिए लिक्विडिटी हासिल करने की कोशिश में है। अगर बैठक के दौरान आरबीआई इस विषय को उठाता है, तो एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी से बाहर निकलने की योजना पर भी चर्चा की जा सकती है।

आरबीआई की यह शर्त रही है कि टाटा संस को अनलिस्टेड रखने के लिए टाटा ग्रुप के भीतर पूर्ण सहमति होनी चाहिए। नए नेतृत्व के गठन और एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बीच नोएल टाटा की यह बैठक टाटा संस के भविष्य के कॉर्पोरेट ढांचे के लिहाज से सबसे निर्णायक मानी जा रही है।

Redmi Note 17 सीरीज की ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म, 10,000mAh बैटरी समेत इन फीचर्स का हुआ खुलासा

Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi ने ऐलान किया है कि Redmi Note 17 सीरीज जल्द ही ग्लोबल मार्केट में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने सोमवार को इसकी लॉन्च डेट की जानकारी दी। बता दें कि इस सीरीज के फोन जुलाई में चीन में लॉन्च किए गए थे, और ब्रांड ने Redmi Note 17 के 5G और 4G वेरिएंट भी ग्लोबल लेवल पर पेश किए थे। उम्मीद है कि ग्लोबल लाइनअप में तीन मॉडल होंगे — Redmi Note 17, Note 17 Pro और एक नया Note 17 Pro Max। इनमें से आखिरी वाले (Pro Max) के कई स्पेसिफिकेशन भी अब सामने आ गए हैं।

Redmi Note 17 सीरीज की लॉन्च डेट

Xiaomi ने X पर एक पोस्ट में घोषणा की कि Redmi Note 17 सीरीज को 27 अगस्त को ग्लोबल लेवल पर लॉन्च किया जाएगा। Xiaomi की ग्लोबल वेबसाइट पर एक नई माइक्रोसाइट से Redmi Note 17 Pro Max नाम के एक नए मॉडल के जल्द लॉन्च होने की पुष्टि होती है। डिजाइन की बात करें तो, इस लाइनअप में फोटोक्रोमिक टेक्नोलॉजी होगी। Redmi का कहना है कि इसमें एक नया ‘क्लाउड ब्लश’ एलिमेंट है जो सूरज की रोशनी के साथ रिएक्ट कर सकता है।

आने वाली Redmi Note 17 सीरीज में 6.83 इंच का CrystalRes AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 1.5K रेजोल्यूशन के साथ आएगा। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया जाएगा। इसके साथ 24GB तक रैम मिलेगी, जिसमें वर्चुअल रैम का सपोर्ट भी शामिल होगा। Redmi का दावा है कि फोन 72 महीने तक स्मूद परफॉर्मेंस बनाए रखेगा।

माइक्रोसाइट से धूल और पानी से बचाव के लिए IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग्स का भी पता चलता है। Xiaomi के सब-ब्रांड का कहना है कि उनके फोन SGS और TÜV SÜD दोनों से सर्टिफाइड हैं।

कैमरे की बात करें तो अभी इसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Note 17 सीरीज में AI-पावर्ड पोर्ट्रेट एन्हांसमेंट फीचर होगा। ब्रांड द्वारा शेयर किए गए कैमरा सैंपल में f/1.5 अपर्चर, 26mm फोकल लेंथ, 1/60-सेकंड शटर स्पीड और ISO 125 की जानकारी मिलती है।

हालांकि, सबसे खास बात इसकी बैटरी क्षमता है, जो 10,000mAh की है। जानकारी से पता चलता है कि यह Redmi 17 Pro Max के लिए है, जो 100W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा, हालांकि Xiaomi ने कन्फर्म किया है कि वे बॉक्स में पावर एडॉप्टर नहीं देंगे। Redmi Note 17 सीरीज खरीदने पर ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के 2 महीने का YouTube Premium, तीन महीने का Spotify Premium, छह महीने का Google One प्लान, 24 महीने के अंदर एक बार फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और 36 महीने के अंदर एक बार फ्री बैटरी सर्विस मिलेगी।

पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार, Redmi Note 17 सीरीज भारत में 18 या 20 सितंबर को लॉन्च हो सकती है। लीक से यह भी पता चलता है कि Redmi Note 17 Pro Max में 50MP (f/1.8) का प्राइमरी रियर कैमरा हो सकता है, साथ ही 8MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल लेंस और सेल्फी व वीडियो कॉल के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। हालांकि, पहले सामने आई जानकारी में फोन में 9,210mAh बैटरी होने की बात कही गई थी।

लेकिन अब ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म होने के बाद, हम उम्मीद कर सकते हैं कि Redmi Note 17 सीरीज के लॉन्च से पहले के दिनों में और भी जानकारी सामने आएगी।

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Gold Silver price: फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद हुई कम, फिर भी सोने-चांदी की कीमतें स्थिर, आखिर क्या है इसकी वजह

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। दरअसल, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं और निवेशक केंद्रीय बैंक की पॉलिसी की दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे थे।

COMEX पर, सोना $4,467.70 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से $6 या 0.13% कम था। धातु की कीमत $4,493.10 प्रति औंस के उच्चतम और $4,466 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच रही।

चांदी $66.07 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से 0.161 या 0.24% कम थी। इसने दिन के दौरान $66.685 प्रति औंस का उच्चतम और $65.760 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।स्पॉट मार्केट में, सोना 0.2% बढ़कर $4,424.28 प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,480.90 प्रति औंस हो गए। स्पॉट सिल्वर 0.9% बढ़कर $66.40 प्रति औंस हो गई।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों के बारे में बदलता नजरिया है।हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। जुलाई में अप्रत्याशित रूप से नौकरियों का नुकसान, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजारों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना का फिर से आकलन करने के लिए प्रेरित किया है।

यह सोने और चांदी के लिए मायने रखता है क्योंकि दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स से अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। अगर दर-वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो कीमती धातुओं को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (अवसर लागत) कम हो जाती है।इससे बुलियन (सोना-चांदी) अधिक आकर्षक हो सकता है।

कमजोर डॉलर बुलियन करता है सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने को सपोर्ट करता है क्योंकि धातु की कीमत डॉलर में तय होती है। इससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे संभावित रूप से मांग को सपोर्ट मिलता है।

डॉलर का यही असर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट कर सकता है। सोने और चांदी के लिए फेड (Fed) क्यों अहम है?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का नजरिया बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर बन गया है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेड 2026 के आखिर तक अपनी मुख्य ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार अब फेड की हालिया बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) का इंतजार कर रहा है, जो बुधवार (19 अगस्त) को आने वाले हैं। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा लग सकता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई, रोजगार और ब्याज दरें और बढ़ाने की जरूरत के बारे में क्या सोचते हैं। अगर फेड कम सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने और चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर रुख सख्त (हॉकिश) रहता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है।

चांदी के लिए एक और वजह

चांदी की चाल सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदों पर निर्भर नहीं करती।इस धातु की औद्योगिक मांग भी काफी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर से जुड़े इस्तेमाल शामिल हैं। इससे सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर असर डालने वाला एक और कारक जुड़ जाता है।हालांकि, अभी के लिए मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर और निवेशकों की आम धारणा दोनों धातुओं के लिए अहम कारक बने हुए हैं।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

फेड की बैठक के मिनट्स तुरंत असर डालने वाली घटना हैं। इसके अलावा, बाजार सितंबर में होने वाले पॉलिसी फैसले के संकेतों के लिए अमेरिका में महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नजर रखेगा।बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोना अभी $4,450-$4,460 प्रति औंस के दायरे में रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना कर रहा है, जबकि चांदी $63 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल कीमतें समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा हैं। घरेलू स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स और स्थानीय बाजार की स्थितियों पर भी निर्भर करती हैं।इसलिए, भले ही इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें बढ़ें, भारतीय कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव न हो।

फिलहाल, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में कमी, डॉलर का कमजोर होना और लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nepal Sanatan Row: नेपाल की राजनीति में बड़ा भूचाल! सनातन को लेकर नेपाली कांग्रेस में मचा घमासान, समझिए शेर बहादुर देउबा चला ये कैसा दांव

Nepal Sanatan religion Row: नेपाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी ‘नेपाली कांग्रेस’ में सनातन धर्म को देश की राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने के प्रस्ताव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट में ही इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। विवाद इतना बढ़ गया कि पार्टी की राष्ट्रीय सभा के निष्कर्षों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। सोमवार 17 अगस्त को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस भी टालनी पड़ी।

दरअसल, देउबा के आग्रह पर सोमवार 17 अगस्त को बंद सत्र में पांच सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तीसरे बिंदु में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई है। हालांकि, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।

देउबा के प्रस्ताव पर वरिष्ठ नेताओं ने जताई आपत्ति

नेपाली मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सनातन धर्म से जुड़े प्रस्ताव का विरोध करने वालों में कृष्ण प्रसाद सिटौला, विमलेंद्र निधि, प्रकाशमान सिंह और मिन विश्वकर्मा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। विश्वकर्मा ने कहा कि धार्मिक मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाने के कारण अंतिम दस्तावेज तैयार करने में देरी हुई। इसी वजह से प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थगित करनी पड़ी।

विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाली कांग्रेस ने मौजूदा संविधान के निर्माण और उसे लागू कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विरोध करने वाले नेताओं का तर्क है कि पार्टी को ऐसी नई राजनीतिक दिशा नहीं अपनानी चाहिए। इससे संविधान में हासिल किए गए धर्मनिरपेक्षता और अन्य संवैधानिक प्रावधान कमजोर हों।

20 सूत्रीय निष्कर्ष में सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता की बात थी

राष्ट्रीय सभा के समापन के लिए पहले 20 सूत्रीय निष्कर्ष तैयार किए गए थे। नेताओं के बीच 19 पॉइंट पर सहमति बन चुकी थी। लेकिन 16वें बिंदु में धर्म से संबंधित प्रावधान को लेकर विवाद हो गया। मूल प्रस्ताव में नेपाल को बहुजातीय, बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश बताते हुए सभी धार्मिक समुदायों को अपने धर्म और संस्कृति का पालन एवं संरक्षण करने की संवैधानिक स्वतंत्रता मजबूत करने की बात कही गई थी।

इसमें सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान घोषित करने की मांग नहीं थी। देउबा ने इस बिंदु की भाषा पर आपत्ति जताई। इसके बाद मूल 20 सूत्रीय दस्तावेज को अंतिम रूप देने के बजाय अलग से पांच सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे बंद सत्र में पारित कर दिया गया।

पांच सूत्रीय प्रस्ताव में क्या है?

पांच सूत्रीय प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने से जुड़ा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि नेपाल की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं देश की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं। इसमें हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति-आधारित धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की बात भी कही गई है।

साथ ही प्रस्ताव में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है। यानी प्रस्ताव को केवल हिंदू धर्म की स्थापना के रूप में पेश करने के बजाय नेपाल की पारंपरिक धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की कोशिश की गई है। लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर मतभेद काफी गहरे हो गए हैं।

क्या धर्मनिरपेक्षता की जगह हिंदू राष्ट्र की मांग?

देउबा के समर्थकों और प्रस्ताव के विरोधियों के बीच सबसे बड़ा मतभेद इसी मुद्दे पर है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि देउबा की पहल नेपाल के संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता की प्रतिबद्धता को बदलकर देश को हिंदू राष्ट्र की दिशा में ले जाने की कोशिश है। देउबा खेमे में शशांक कोइराला, प्रकाश शरण महत, एनपी साउद और शंकर भंडारी जैसे नेता प्रस्ताव के समर्थन में बताए गए हैं। शंकर भंडारी पिछले कुछ वर्षों से खुले तौर पर नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने और संवैधानिक राजशाही की वकालत करते रहे हैं।

संविधान निर्माण के समय भी था मतभेद

देउबा खेमे के नेताओं का कहना है कि नेपाली कांग्रेस के भीतर सनातन धर्म को लेकर समर्थन संविधान निर्माण के समय भी मौजूद था। उनके अनुसार, संविधान लागू करते समय धर्मनिरपेक्षता को एक राजनीतिक समझौते के हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया था। प्रकाश शरण महत का कहना है कि संविधान लागू होने के बाद भी नेपाली कांग्रेस के महाधिवेशन और अन्य औपचारिक मंचों पर सनातन धर्म का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय सभा के फैसले को पार्टी की पुरानी स्थिति से एक महत्वपूर्ण प्रस्थान बताया।

मंच पर नेताओं के बीच तीखी बहस

मूल 20 सूत्रीय निष्कर्षों को पेश करने से पहले पांच सूत्रीय प्रस्ताव पारित किए जाने को लेकर पार्टी के मंच पर भी नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय सभा में चर्चा किए गए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पीछे छूट गए। पूरा ध्यान हिंदू धर्म तथा सनातन धर्म के सवाल पर केंद्रित हो गया है।

नेपाली कांग्रेस के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती

सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का प्रस्ताव अब नेपाली कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक और वैचारिक चुनौती बन गया है। एक तरफ देउबा समर्थक नेता नेपाल की पारंपरिक धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।

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दूसरी तरफ पार्टी के कई नेता संविधान में स्थापित धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था और सभी धार्मिक समुदायों की समान स्वतंत्रता को बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। यही मतभेद पार्टी की राष्ट्रीय सभा के अंतिम निष्कर्षों को रोकने का कारण बना। अब यह देखना अहम होगा कि नेपाली कांग्रेस सनातन धर्म, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच किस तरह संतुलन बनाती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि इस मुद्दे पर पार्टी की आधिकारिक राजनीतिक लाइन क्या तय होती है।

2 बार JEE में फेल हुआ लड़का, आज ₹2 लाख महीना कमाता है, Ankur Warikoo ने बताई कहानी

बिजनेसमैन अंकुर वारिकू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत में टैलेंट और सफलता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने इंदौर के एक डिजाइनर नमन की कहानी साझा की, जो दो बार JEE में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिना किसी प्रतिष्ठित कॉलेज की डिग्री के अपने दम पर प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। YouTube से सीखते हुए नमन ने धीरे-धीरे अपने कौशल को निखारा और फ्रीलांसिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कमाई करीब 2 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है।

नमन की कहानी साझा करते हुए वारिकू ने कहा कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बल्कि लोगों को पहचानने का नजरिया सीमित है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत केवल कॉलेज, डिग्री या नौकरी के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या असली हुनर।

‘भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की समस्या है’

अंकुर वारिकू ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “India does not have a talent problem. It has a label problem.” उनका कहना है कि भारत में लोगों की काबिलियत को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री और नौकरी के नाम से आंका जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतरीन टैलेंट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाता, क्योंकि उसके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या मशहूर कंपनी का अनुभव नहीं होता।

JEE में दो बार फेल, फिर YouTube से सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के डिजाइनर नमन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नमन दो बार JEE में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने रात में YouTube की मदद से खुद प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांस काम शुरू किया। वारिकू के अनुसार, आज नमन हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते हैं।

‘डिग्री यह नहीं बता सकती कि आप कितनी दूर जाएंगे’

वारिकू ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी व्यक्ति की डिग्री या पुराने अनुभव से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भविष्य में कितना सफल होगा। उनके मुताबिक, क्रेडेंशियल्स बताते हैं कि कोई व्यक्ति अब तक कहां पहुंचा है, लेकिन यह नहीं बताते कि वह आगे कितनी दूर जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

वारिकू की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली रहीं। कुछ यूजर्स ने नमन की सफलता को प्रेरणादायक बताया, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि ऐसी कहानियां अपवाद हो सकती हैं। एक यूजर ने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में 2 लाख रुपये महीने नहीं कमा पाते। वहीं, दूसरे यूजर ने IIT से तुलना पर सवाल उठाते हुए कहा कि JEE जैसी कठिन परीक्षा पास करना भी किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता दिखाता है।

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झारखंड प्रदर्शन: छात्र नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल! JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से TDPL की सभी परीक्षाओं की होगी जांच

Jharkhand students protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में अहम परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद लिया गया। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया।

सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है। सीएम ने कहा कि उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।

सीएम ने बड़ा आरोप

सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल पास करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

क्या है मांग?

सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।

अब आगे क्या होगा?

झारखंड सरकार के फैसले के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं जांच के घेरे में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जांच का दायरा केवल हाल की परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। CID 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की पड़ताल करेगी। जबकि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अलग समिति कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

JMM सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का समाधान करना और झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर में क्या है रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 18 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज पड़ेंगे रिमझिम फुहारे! IMD ने 23 अगस्त तक जताया बारिश का अनुमान, जानें पूरे हफ्ते का हाल

Delhi Weather Today: दिल्लीवासियों को मंगलवार (18 अगस्त) को एक बार फिर हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दिल्ली के कुछ इलाकों में सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम को ध्यान में रखते हुए अपने दिन की प्लानिंग करने की सलाह दी गई है।

IMD के अनुसार, “आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।” इस दौरान अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

दिल्ली का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान

IMD ने आने वाले हफ्ते में बारिश का अनुमान लगाया है। IMD के अनुसार, 19 और 20 अगस्त को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पूर्वानुमान में कहा गया है, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कई जगहों पर हल्की बारिश और कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। शाम से रात के समय बहुत हल्की से हल्की बारिश का एक और दौर हो सकता है।”

वहीं, इन दिनों दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

इसके बाद, 21 और 22 अगस्त को IMD ने बहुत हल्की से हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। IMD के अनुमान के अनुसार, “आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम के समय कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

इन दिनों अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

आखिर में, 23 अगस्त के लिए IMD का अनुमान वही है, जिसमें बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक, “आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम के बीच कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

इस दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

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